शुक्रवार, 30 सितंबर 2022

रिटायर्ड टीचर्स को फिर से नियुक्त करने का फैसला

रिटायर्ड टीचर्स को फिर से नियुक्त करने का फैसला 

संदीप मिश्र 

लखनऊ। उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने रिटायर्ड सरकारी टीचर्स को तोहफा दिया है। योगी सरकार ने कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों समेत सरकारी स्कूलों में रिटायर्ड टीचर्स को फिर से नियुक्त करने का फैसला किया है। बेसिक शिक्षा प्रमुख सचिव दीपक कुमार की तरफ से जारी किए एक आदेश के मुताबिक, सरकार की योजना उन रिटायर्ड टीचर्स को शामिल करने की है, जो स्कूलों में फिर से नियुक्त होने के इच्छुक हैं।

रिटायर्ड टीचर्स के लिए योगी सरकार की इस योजना पर बेसिक शिक्षा सचिव विजय कुमार आनंद ने कहा कि संरक्षक के रूप में उन्हें सहकर्मी की शिक्षा सुनिश्चित करने, आंतरिक प्रेरणा देने और कक्षा को छात्र-केंद्रित बनाने की जरूरत होगी। इससे छात्रों के सीखने के स्तर में सुधार होगा. इस कदम से कई लाभ होंगे, जिसमें प्रशिक्षित शिक्षकों समेत टीचर्स की कमी का सामना कर रहे स्कूलों में उनका इस्तेमाल शामिल है। अधिकारी ने दावा किया कि ये बहुत कम खर्च वाले स्कूलों में मेंटरिंग की अवधारणा को भी बढ़ावा देंगे। आदेश के अनुसार, 70 साल से कम उम्र के शिक्षक परामर्श के लिए पात्र होंगे और उनका कार्यकाल 1 साल का होगा‌। हर चयनित शिक्षक का कॉन्ट्रैक्ट रिन्यू होने से पहले एक साल के बाद उसके प्रदर्शन का मूल्यांकन होगा।

बता दें कि चयन में उन शिक्षकों को प्राथमिकता दी जाएगी जो राज्य या राष्ट्रीय स्तर के पुरस्कार विजेता हैं। साथ ही, उनके पास असिस्टेंट टीचर या हेड टीचर के रूप में कम से कम 5 साल का अनुभव होना चाहिए‌। चयनित शिक्षकों को 2,500 रुपये प्रति महीने भत्ते के रूप में दिए जाएंगे। प्रत्येक चयनित शिक्षक को प्रेरणा ऐप के जरिए कम से कम 30 स्कूलों का ऑनलाइन सर्पोटिव सुपरविजन करना होगा। माता-पिता और छात्रों को दीक्षा और रीड अलॉन्ग ऐप का इस्तेमाल करने के लिए प्रोत्साहित करना होगा। ये शिक्षक स्कूल की एक्टीविटीज जैसे असेंबली, खेलकूद का भी निरीक्षण करेंगे और स्कूलों में मॉडल शिक्षण का प्रदर्शन करेंगे‌।

प्राकृतिक गैस की कीमतों में 40 प्रतिशत की बढ़ोतरी

प्राकृतिक गैस की कीमतों में 40 प्रतिशत की बढ़ोतरी

अकांशु उपाध्याय 

नई दिल्ली। वैश्विक स्तर पर ऊर्जा की कीमतों में उछाल के साथ प्राकृतिक गैस की कीमतों में शुक्रवार को 40 प्रतिशत की रिकॉर्ड बढ़ोतरी कर दी गई। इससे देश में बिजली उत्पादन, उर्वरक बनाने और वाहन चलाने में इस्तेमाल होने वाली गैस महंगी हो जाने की आशंका है। तेल मंत्रालय के पेट्रोलियम योजना एवं विश्लेषण प्रकोष्ठ (पीपीएसी) की तरफ से जारी आदेश के अनुसार, पुराने गैस क्षेत्रों से उत्पादित गैस के लिए भुगतान की जाने वाली दर को मौजूदा 6.1 डॉलर प्रति मिलियन ब्रिटिश थर्मल यूनिट (एमबीटीयू) से बढ़ाकर 8.57 डॉलर प्रति एमबीटीयू कर दिया गया है।

इसी दर पर देश में उत्पादित गैस के लगभग दो तिहाई हिस्से की बिक्री होगी। इस आदेश के मुताबिक, रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड और उसके भागीदार बीपी पीएलसी द्वारा केजी बेसिन में संचालित डी-6 ब्लॉक जैसे मुश्किल एवं नए क्षेत्रों से निकाली जाने वाली गैस की कीमत 9.92 डॉलर से बढ़ाकर 12.6 डॉलर प्रति इकाई कर दी गई है। अप्रैल 2019 के बाद से गैस की दरों में यह तीसरी वृद्धि होगी। बेंचमार्क अंतरराष्ट्रीय कीमतों में मजबूती के कारण इनमें तेजी आई है। प्राकृतिक गैस उर्वरक बनाने के साथ बिजली पैदा करने के लिए एक प्रमुख कच्चा माल है। इसे सीएनजी में भी परिवर्तित किया जाता है और पाइप्ड नेचुरल गैस (पीएनजी) यानी रसोई गैस के रूप में भी इस्तेमाल किया जाता है। दरों में भारी वृद्धि से सीएनजी और पीएनजी की कीमतों में बढोत्तरी होने की आशंका है, जो पहले से ही पिछले एक साल में 70 प्रतिशत से अधिक बढ़ चुकी हैं।

सरकार हर छह महीने यानी एक अप्रैल और एक अक्टूबर को गैस की कीमतें तय करती है। यह कीमतें अमेरिका, कनाडा और रूस जैसे गैस-अधिशेष देशों में एक साल में एक चौथाई के अंतराल के साथ प्रचलित दरों के आधार पर तय की जाती हैं। एक अक्टूबर से 31 मार्च की कीमत जुलाई 2021 से जून 2022 तक की औसत कीमत पर आधारित है। इस अवधि में वैश्विक स्तर पर दरें तेजी से बढ़ी हैं। गैस की उच्च कीमतें मुद्रास्फीति को और भी बढ़ा सकती हैं जो पिछले आठ महीनों से आरबीआई के संतोषजनक स्तर से ऊपर चल रही है। सरकार ने मूल्य निर्धारण फार्मूले की समीक्षा के लिए एक समिति का भी गठन किया है।

सूत्रों ने कहा कि प्राकर्तिक गैस की कीमतों में वृद्धि से दिल्ली और मुंबई जैसे शहरों में सीएनजी और रसोई गैस की दरों में वृद्धि होने की संभावना है। इससे बिजली पैदा करने की लागत में भी वृद्धि होगी लेकिन उपभोक्ताओं को कोई बड़ी परेशानी नहीं होगी क्योंकि गैस से पैदा होने वाली बिजली का हिस्सा बहुत कम है। इसी तरह, उर्वरक उत्पादन की लागत भी बढ़ जाएगी लेकिन सरकार की तरफ से ऊर्वरक सब्सिडी देने से दरों में वृद्धि की संभावना नहीं है। हालांकि इस फैसले से उत्पादकों की आय में वृद्धि होने की संभावना है।

पाक: क्रिकेटर राणा का 36 वर्ष की आयु में निधन 

पाक: क्रिकेटर राणा का 36 वर्ष की आयु में निधन 

मोमीन मलिक 

इस्लामाबाद। पाकिस्तान के प्रथम श्रेणी क्रिकेटर शहजाद आजम राणा का महज 36 वर्ष की आयु में कार्डियक अरेस्ट के कारण इंतकाल हो गया है। उन्होंने 95 प्रथम श्रेणी, 58 लिस्ट ए और 29 टी20 मुकाबले खेले थे। उन्होंने प्रथम श्रेणी क्रिकेट में 388, लिस्ट ए में 81 और टी20 क्रिकेट में 27 विकेट झटके हैं। अपने करियर में कुल 496 विकेट लेने के बाद भी इस खिलाड़ी को कभी पाकिस्तान की तरफ से इंटरनेशनल क्रिकेट खेलने का मौका नहीं मिला। वह पाकिस्तान सुपर लीग में इस्लामाबाद की तरफ से खेलते थे। हालांकि, 2018 के बाद ना ही शहजाद ने कोई प्रथम श्रेणी मुकाबला खेला है और ना ही लिस्ट ए मैच खेला है। अंतिम बार वह फील्ड पर 2020 में पाकिस्तान दौरे पर आए मेरिलबोन क्रिकेट क्लब के एक मुकाबले के दौरान उतरे थे।

नॉर्दन (पाकिस्तान) बनाम मैरीलेबोन क्रिकेट क्लब के बीच खेले गए उस मुकाबले में शहजाद आजम राणा 4 ओवर के कोटे में 30 रन खर्च कर एक विकेट झटका था। इस क्रिकेटर के इतनी कम आयु में देहांत होने के बाद पाकिस्तान में शोक पसर गया है। फैंस ट्विटर पर संवेदना प्रकट कर रहे हैं।

'क्रायोजेनिक इंजन निर्माण' सुविधा का उद्घाटन

'क्रायोजेनिक इंजन निर्माण' सुविधा का उद्घाटन

अकांशु उपाध्याय 

नई दिल्ली। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (एचएएल) की एकीकृत क्रायोजेनिक इंजन निर्माण सुविधा का उद्घाटन किया। इस अवसर पर उन्होंने जोनल इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी (दक्षिण क्षेत्र) का भी आभासी रूप से शिलान्यास किया। इस अवसर पर अपने संबोधन में राष्ट्रपति ने कहा कि एकीकृत क्रायोजेनिक इंजन निर्माण सुविधा का उद्घाटन केवल एचएएल और इसरो के लिए ही नहीं, अपितु समूचे राष्ट्र के लिए क्रायोजेनिक और सेमी-क्रायोजेनिक इंजन के निर्माण की अत्याधुनिक सुविधा का होना एक ऐतिहासिक क्षण है। उन्होंने कहा कि एचएएल ने रक्षा क्षेत्र में भारत की आत्मनिर्भरता की दिशा में अपार योगदान दिया है। ऐसा कहा जा सकता है कि एचएएल बलों के पीछे की ताकत रहा है। उन्होंने कहा कि एचएएल ने समय-समय पर अनुसंधान, विकास और विभिन्न विमान प्लेटफार्मों के निर्माण में अपनी क्षमताओं का प्रदर्शन किया है।

राष्ट्रपति ने कहा कि इसरो देश का गौरव रहा है। 1960 के दशक में जब इस संस्था ने संचालन शुरू किया, तब भारत एक युवा गणराज्य था, जो गरीबी और निरक्षरता की गंभीर चुनौतियों से जूझ रहा था, लेकिन उसमें अपार सामर्थ्‍य भी था। इसरो ने जिस तीव्र गति से विकास किया है, उसने सबसे उन्नत और तकनीकी रूप से विकसित देशों का भी ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया है। इसरो के ईमानदार प्रयासों और समर्पण की बदौलत भारत क्रायोजेनिक इंजन निर्माण क्षमता रखने वाला दुनिया का छठा देश बनने में समर्थ हो सका है। राष्ट्रपति ने कहा कि एचएएल और इसरो संयुक्‍त रूप से सामरिक रक्षा और विकास के क्षेत्र में योगदान करते हैं। दोनों संगठनों ने हमारे देश की सुरक्षा और विकास को सुदृढ़ बनाने वाले विभिन्न उपकरणों और कार्यक्रमों के विकास में प्रमुख भूमिका निभाई है। एचएएल रक्षा संबंधी उपकरणों के निर्माण की अपनी अत्‍याधुनिक सुविधा के साथ हमारे देश के लिए एक बहुमूल्य साबित हुई है।

मुर्मू ने कहा कि अब जबकि भारत अमृत काल में प्रवेश कर रहा है, ऐसे में एचएएल और इसरो का गौरवशाली अतीत हमें इस बात का भरोसा दिलाता है कि ये संगठन भविष्य में भी महत्वपूर्ण और सकारात्मक भूमिका निभाते रहेंगे। वर्ष 2047 तक, जब हम स्वतंत्रता के 100 वर्ष मनाएंगे, हमारे आस-पास की दुनिया काफी बदल चुकी होगी। जिस तरह 25 साल पहले हम समकालीन दुनिया की कल्पना तक नहीं कर सकते थे, उसी तरह हम आज भी इस बात की कल्पना नहीं कर सकते कि कृत्रिम आसूचना और ऑटोमेशन हमारे जीवन को किस तरह बदलने जा रहे हैं। स्वतंत्र देश के रूप में हमने 75 साल पूरे कर लिए हैं। हम अगले 25 वर्षों को भारत की नए सिरे से कल्पना करने और इसे एक विकसित देश बनाने की अवधि के रूप में देख रहे हैं। यह सुनिश्चित करना हमारी संयुक्त जिम्मेदारी है कि 2047 का भारत कहीं अधिक समृद्ध और सशक्‍त राष्ट्र हो।

कोविड महामारी का उल्‍लेख करते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि हमारे डॉक्टरों और वैज्ञानिकों के लचीलेपन और असाधारण प्रयासों ने हमें इस संकट से निपटने में मदद की। उन्होंने कहा कि भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद ने प्रभावी कोविड प्रबंधन में अनुकरणीय सहायता प्रदान की है और वह अपनी अनुसंधान अवसंरचना का विस्तार कर रही है। भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद के तहत नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी, पुणे भी वायरोलॉजी के क्षेत्र में अनुसंधान एवं विकास को बढ़ाने के लिए हर संभव कदम उठा रहा है। उन्‍होंने इस बात पर प्रसन्‍नता व्‍यक्‍त की कि नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी को विश्व स्वास्थ्य संगठन की सहयोगी प्रयोगशालाओं में से एक के रूप में नामित किया गया है। उन्होंने कहा कि विभिन्न भौगोलिक क्षेत्रों की मांगों को पूरा करने की दिशा में देश भर में क्षेत्रीय परिसरों के माध्यम से नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी का विस्तार प्रशंसनीय है।

मुलाकात, दुख की घड़ी में आज हम मिल रहे हैं: मोदी 

मुलाकात, दुख की घड़ी में आज हम मिल रहे हैं: मोदी 

अकांशु उपाध्याय/सुनील श्रीवास्तव 

नई दिल्ली/टोक्यो। भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जापान के प्रधानमंत्री फुमियो किशिदा से मुलाकात में कहा कि ये दुख की घड़ी में आज हम मिल रहे हैं। आज जापान आने के बाद, मैं अपने-आप को ज्यादा शोकातुर अनुभव कर रहा हूँ। क्योंकि पिछली बार जब मैं आया तो आबे सान से बहुत लम्बी बातें हुई थी। और कभी सोचा ही नहीं था कि जाने के बाद ऐसी खबर सुनने की नौबत आएगी।

आबे सान और उनके साथ आपने विदेश मंत्री के रूप में भी भारत और जापान के संबंधों को नयी उंचाई पर भी ले गए और बहुत क्षेत्रों में उसका विस्तार भी किया। और हमारी दोस्ती ने एक वैश्विक प्रभाव पैदा करने में भी बहुत बड़ी भूमिका निभाई, भारत और जापान की दोस्ती ने। और इस सब के लिए आज भारत की जनता आबे सान को बहुत याद करती है, जापान को बहुत याद करती है। भारत एक प्रकार से हमेशा उनको miss कर रहा है। लेकिन मुझे विश्वास है कि आपके नेतृत्व में भारत-जापान सम्बन्ध और अधिक गहरे होंगे, और अधिक ऊंचाइयों को पार करेंगे। और हम विश्व में समस्याओं के समाधान में एक उचित भूमिका निभाने के लिए समर्थ बनेंगे, ऐसा मेरा पूरा विश्वास है।

अभिनेत्री को 'दादा साहेब फाल्के' पुरस्कार मिलेगा 

अभिनेत्री को 'दादा साहेब फाल्के' पुरस्कार मिलेगा 

अकांशु उपाध्याय/कविता गर्ग 

नई दिल्ली/मुंबई। सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने आज घोषणा की है कि वर्ष 2020 के लिए दादा साहेब फाल्के पुरस्कार दिग्गज अभिनेत्री आशा पारेख को दिया जाएगा। ये पुरस्कार नई दिल्ली में आयोजित राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार समारोह में प्रदान किया जाएगा।इस निर्णय की घोषणा करते हुए केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर ने कहा, “मुझे ये घोषणा करते हुए बहुत खुशी हो रही है कि दादा साहेब फाल्के पुरस्कार की जूरी ने भारतीय सिनेमा में आशा पारेख जी के जीवन भर के अनुकरणीय योगदान को मान्यता देने और उन्हें पुरस्कृत करने का निर्णय लिया है।” मंत्री ने ये भी घोषणा की कि 68वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार समारोह का आयोजन 30 सितंबर, 2022 को होगा और इस समारोह की अध्यक्षता भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु करेंगी।

आशा पारेख एक प्रसिद्ध फिल्म अभिनेत्री, निर्देशक, निर्माता और एक कुशल भारतीय शास्त्रीय नृत्यांगना हैं। एक बाल कलाकार के रूप में अपना करियर शुरू करते हुए उन्होंने फिल्म ‘दिल दे के देखो’ में मुख्य नायिका के तौर पर अपनी शुरुआत की और 95 से ज्यादा फिल्मों में अभिनय किया। उन्होंने कटी पतंग, तीसरी मंजिल, लव इन टोक्यो, आया सावन झूम के, आन मिलो सजना, मेरा गांव मेरा देश जैसी मशहूर फिल्मों में अभिनय किया है।

पारेख पद्म से सम्मानित हैं, जो उन्हें 1992 में दिया गया था। उन्होंने 1998-2001 तक केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड के प्रमुख के रूप में भी काम किया है। अनुराग ठाकुर ने ये भी घोषणा की कि सु पारेख को पुरस्कार देने का निर्णय पांच सदस्यों की जूरी द्वारा लिया गया था। 52वें दादा साहेब फाल्के पुरस्कार के चयन के लिए इस जूरी में फिल्म उद्योग के ये पांच सदस्य शामिल थे:

  1. आशा भोसले
  2. हेमा मालिनी
  3. पूनम ढिल्लों
  4. टी. एस. नागभरण
  5. उदित नारायण।

अलायंस व आईसीएओ के बीच ज्ञापन पर हस्ताक्षर

अलायंस व आईसीएओ के बीच ज्ञापन पर हस्ताक्षर

अकांशु उपाध्याय/अखिलेश पांडेय

नई दिल्ली/पेरिस। मॉन्ट्रियाल में आयोजित इंटरनेशनल सिविल एवियेशन ऑर्गनाइजेशन (आईसीएओ) सभा के 42वें सत्र से अलग एक समारोह में, इंटरनेशनल सोलर अलायंस तथा आईसीएओ के बीच एक समझौता-ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए। यह हस्ताक्षर नागर विमानन मंत्री ज्योतिरादित्य एम. सिंधिया, फ्रांस के यातायात मंत्री मीशियो क्लेमेंट ब्यून, आईसीएओ परिषद के अध्यक्ष सल्वोटोर साशीतानो की उपस्थिति में किये गये। समझौता-ज्ञापन पर आईसीएओ के महासचिव जुआन कार्लोस सालाज़ार और आईएसए के संचालन प्रमुख जोशुआ वायक्लिफ ने किये। ज्योतिरादित्य सिंधिया जब मई 2022 में मॉन्ट्रियाल गये थे, तो उस समय आईसीएओ के अध्यक्ष के साथ अपनी मुलाकात के दौरान उन्होंने यह विचार व्यक्त किया था कि आईसीएओ को आईएसए का साझीदार संगठन बन जाना चाहिये। चार माह की अवधि में समझौता-ज्ञापन पर सहमति बनी और उसे अंतिम रूप दिया गया। उसके बाद भारत और फ्रांस के मंत्रियों के समक्ष आईएसए और आईसीएओ ने समझौते पर हस्ताक्षर कर दिये। याद रहे, पेरिस में कॉप 21 के समय 2015 में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और फ्रांस के तत्कालीन राष्ट्रपति फ्रैंक्वा होलांदे ने जो उत्साहवर्धक पहल की थी, तो यह समझौता-ज्ञापन उसी पहल को आगे बढ़ाने का काम करेगा।

आईएसए एक ऐसा गठबंधन है, जिसके लिये 121 देशों ने हस्ताक्षर किये हैं। इसमें 32 साझेदार संगठन भी शामिल हैं, जिनमें कई संयुक्त राष्ट्र संगठन भी हैं। आईएसए जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता कम करने के लिये सौर ऊर्जा की उपयुक्त खपत की दिशा में काम करता है। आईएसए का प्रयास है कि सदस्य देशों को नवीकरणीय ऊर्जा के इस्तेमाल में सस्ते और परिवर्तनगामी समाधान दिये जायें। इसके लिये एलडीसी और एसआईडीसी के प्रभाव के मद्देनजर विशेष ध्यान दिया जाता है। भारत ने कॉप 26 में संकल्प लिया था कि वह 2070 तक नेट-ज़ीरो कार्बन उत्सर्जन का लक्ष्य प्राप्त करेगा। उसकी समझ मानव-केंद्रित है, सम्मानपूर्ण और राष्ट्रीय अस्मिता के सिद्धांतों पर आधारित है तथा सबके प्रति कटिबद्ध है। भारत ने यह भी संकल्प किया है कि 2022 तक 175 मेगावॉट नवीकरणीय ऊर्जा स्थापित करने तथा 2030 तक उत्सर्जन गहनता में 33-35 प्रतिशत तक की कटौती करने का लक्ष्य हासिल कर लेगा। इस तरह उन सभी गांवों और समुदायों तक सौर ऊर्जा पहुंचा दी जायेगी, जो अब तक इससे विहीन थे। भारत में कोच्चि अंतर्राष्ट्रीय विमान पत्तन वर्ष 2015 में ही विश्व का पहला पूरी तरह से सौर ऊर्जा युक्त हवाई अड्डा बन चुका है।

फ्रांस के समर्थन से भारत ने सौर ऊर्जा के क्रियान्वयन के लिये अवसंरचना की सुविधा बढ़ाने के संबंध में देशों को आमंत्रित किया है। गठबंधन ने एक खरब डॉलर के निवेश का संकल्प किया है। इसी तरह गठबंधन दूर-दराज के इलाकों और दुर्गम समुदायों तक बिजली पहुंचाने के क्रम में सौर ऊर्जा की कीमत कम करने की दिशा में काम कर रहा है। आईसीएओ कई पहलों और लक्ष्यों के जरिये विमानन सेक्टर में कार्बन उत्सर्जन को कम करने के लिये प्रतिबद्ध है। इस रचनात्मक पहल के मद्देनजर, आईएसए और आईसीएओ के बीच समझौता-ज्ञापन के माध्यम से होने वाली साझेदारी बहुत सही वक्त पर हो रही है। इस तरह सौर ऊर्जा के इस्तेमाल के सम्बंध में सदस्य देशों की क्षमता विकसित करने के लिये अधिसंख्य काम किये जा सकेंगे। यह समझौता सूचना देने, सौर ऊर्जा के प्रति जागरूकता पैदा करने, क्षमता बढ़ाने और परियोजनाओं को प्रस्तुत करने का काम करेगा। इसके जरिये सभी सदस्य देशों के बीच विमानन सेक्टर को सौर ऊर्जा से युक्त करने में मदद मिलेगी।

पीएम ने लता मंगेशकर चौक का उद्घाटन किया

पीएम ने लता मंगेशकर चौक का उद्घाटन किया 

संदीप मिश्र 
अयोध्या। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अयोध्या में बने लता मंगेशकर चौक का उद्घाटन करते हुए कहा कि आज हम सबकी श्रद्धेय और स्नेह-मूर्ति लता दीदी का जन्मदिन है। आज संयोग से नवरात्रि का तीसरा दिन, माँ चंद्रघंटा की साधना का पर्व भी है। कहते हैं कि कोई साधक-साधिका जब कठोर साधना करता है, तो माँ चंद्रघंटा की कृपा से उसे दिव्य स्वरों की अनुभूति होती है। लता जी, मां सरस्वती की एक ऐसी ही साधिका थीं, जिन्होंने पूरे विश्व को अपने दिव्य स्वरों से अभिभूत कर दिया। साधना लता जी ने की, वरदान हम सबको मिला। अयोध्या में लता मंगेशकर चौक पर स्थापित की गई माँ सरस्वती की ये विशाल वीणा, संगीत की उस साधना का प्रतीक बनेगी। मुझे बताया गया है कि चौक परिसर में सरोवर के प्रवाहमय जल में संगमरमर से बने 92 श्वेत कमल, लता जी की जीवन अवधि को दर्शा रहे हैं। मैं इस अभिनव प्रयास के लिए योगी जी की सरकार का, अयोध्या विकास प्राधिकरण का और अयोध्या की जनता का हृदय से अभिनंदन करता हूँ। इस अवसर पर मैं सभी देशवासियों की तरफ से भारत रत्न लता जी को भावभीनी श्रद्धांजलि देता हूँ। मैं प्रभु श्रीराम से कामना करता हूँ, उनके जीवन का जो लाभ हमें मिला, वही लाभ उनके सुरों के जरिए आने वाली पीढ़ियों को भी मिलता रहे।

लता दीदी के साथ जुड़ी हुई मेरी कितनी ही यादें हैं, कितनी ही भावुक और स्नेहिल स्मृतियाँ हैं। जब भी मेरी उनसे बात होती, उनकी वाणी की युग-परिचित मिठास हर बार मुझे मंत्र-मुग्ध कर देती थी। दीदी अक्सर मुझसे कहती थीं- ‘मनुष्य उम्र से नहीं कर्म से बड़ा होता है, और जो देश के लिए जितना ज्यादा करे, वो उतना ही बड़ा है’। मैं मानता हूँ कि अयोध्या का ये लता मंगेशकर चौक, और उनसे जुड़ी ऐसी सभी स्मृतियां हमें देश के प्रति कर्तव्य-बोध का भी अहसास करवाएँगी। मुझे याद है, जब अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के लिए भूमिपूजन संपन्न हुआ था, तो मेरे पास लता दीदी का फोन आया था। वो बहुत भावुक थीं, बहुत खुश थीं, बहुत आनंद में भर गई थीं और बहुत आशीर्वाद दे रही थीं। उन्हें विश्वास नहीं हो रहा था कि आखिरकार राम मंदिर का निर्माण शुरू हो रहा है। आज मुझे लता दीदी का गाया वो भजन भी याद आ रहा है – ”मन की अयोध्या तब तक सूनी, जब तक राम ना आए” अयोध्या के भव्य मंदिर में श्रीराम आने वाले हैं। और उससे पहले करोड़ों लोगों में राम नाम की प्राण प्रतिष्ठा करने वाली लता दीदी का नाम, अयोध्या शहर के साथ हमेशा के लिए स्थापित हो गया है। वहीं रामचरितमानस में कहा गया है- ‘राम ते अधिक राम कर दासा’। अर्थात्, राम जी के भक्त राम जी के भी पहले आते हैं। संभवत: इसलिए, राम मंदिर के भव्य निर्माण के पहले उनकी आराधना करने वाली उनकी भक्त लता दीदी की स्मृति में बना ये चौक भी मंदिर से पहले ही बन गया है।

प्रभु राम तो हमारी सभ्यता के प्रतीक पुरुष हैं। राम हमारी नैतिकता के, हमारे मूल्यों, हमारी मर्यादा, हमारे कर्तव्य के जीवंत आदर्श हैं। अयोध्या से लेकर रामेश्वरम तक, राम भारत के कण-कण में समाये हुये हैं। भगवान राम के आशीर्वाद से आज जिस तेज गति से भव्य राम मंदिर का निर्माण हो रहा है, उसकी तस्वीरें पूरे देश को रोमांचित कर रही हैं। ये अपनी ‘विरासत पर गर्व’ की पुनर्प्रतिष्ठा भी है, और विकास का नया अध्याय भी है। मुझे खुशी है कि जिस जगह पर लता चौक विकसित किया गया है, वो अयोध्या में सांस्कृतिक महत्व के विभिन्न स्थानों को जोड़ने वाले प्रमुख स्थलों में से एक है। ये चौक, राम की पैड़ी के समीप है और सरयू की पावन धारा भी इससे बहुत दूर नहीं है। लता दीदी के नाम पर चौक के निर्माण के लिए इससे बेहतर स्थान और क्या होता? जैसे अयोध्या ने इतने युगों बाद भी राम को हमारे मन में साकार रखा है, वैसे ही लता दीदी के भजनों ने हमारे अन्तर्मन को राममय बनाए रखा है। मानस का मंत्र ‘श्रीरामचन्द्र कृपालु भज मन, हरण भव भय दारुणम्’ हो, या मीराबाई का ‘पायो जी मैंने राम रतन धन पायो’, अनगिनत ऐसे भजन हैं, बापू का प्रिय भजन ‘वैष्णव जन’ हो, या फिर जन-जन के मन में उतर चुका ‘तुम आशा विश्वास हमारे राम’, ऐसे मधुर गीत हों! लता जी की आवाज़ में इन्हें सुनकर अनेकों देशवासियों ने भगवान राम के दर्शन किए हैं। हमने लता दीदी के स्वरों की दैवीय मधुरता से राम के अलौकिक माधुर्य को अनुभव किया है।

संगीत में ये प्रभाव केवल शब्दों और स्वरों से नहीं आता। ये प्रभाव तब आता है, जब भजन गाने वाले में वो भावना हो, वो भक्ति हो, राम से वो नाता हो, राम के लिए वो समर्पण हो। इसीलिए, लता जी द्वारा उच्चारित मंत्रों में, भजनों में केवल उनका कंठ ही नहीं बल्कि उनकी आस्था, आध्यात्मिकता और पवित्रता भी गूँजती है। लता दीदी की आवाज में आज भी ‘वन्दे मातरम’ का आह्वान सुनकर हमारी आंखों के सामने भारत माता का विराट स्वरूप नजर आने लगता है। जिस तरह लता दीदी हमेशा नागरिक कर्तव्यों को लेकर बहुत सजग रहीं, वैसे ही ये चौक भी अयोध्या में रहने वाले लोगों को, अयोध्या आने वाले लोगों को कर्तव्य-परायणता की प्रेरणा देगा। ये चौक, ये वीणा, अयोध्या के विकास और अयोध्या की प्रेरणा को भी और अधिक गुंजायमान करेगी। लता दीदी के नाम पर बना ये चौक, हमारे देश में कला जगत से जुड़े लोगों के लिए भी प्रेरणा स्थली की तरह कार्य करेगा। ये बताएगा कि भारत की जड़ों से जुड़े रहकर, आधुनिकता की ओर बढ़ते हुए, भारत की कला और संस्कृति को विश्व के कोने-कोने तक पहुंचाना, ये भी हमारा कर्तव्य है। भारत की हजारों वर्ष पुरानी विरासत पर गर्व करते हुए, भारत की संस्कृति को नई पीढ़ी तक पहुंचाना, ये भी हमारा दायित्व है। इसके लिए लता दीदी जैसा समर्पण और अपनी संस्कृति के प्रति अगाध प्रेम अनिवार्य है।

मुझे विश्वास है, भारत के कला जगत के हर साधक को इस चौक से बहुत कुछ सीखने को मिलेगा। लता दीदी के स्वर युगों-युगों तक देश के कण-कण को जोड़े रखेंगे, इसी विश्वास के साथ, अयोध्यावासियों से भी मेरी कुछ अपेक्षाएं हैं, बहुत ही निकट भविष्य में राम मंदिर बनना है, देश के कोटि-कोटि लोग अयोध्या आने वाले हैं, आप कल्पना कर सकते हैं अयोध्यावासियों को अयोध्या को कितना भव्य बनाना होगा, कितना सुंदर बनाना होगा, कितना स्वच्छ बनाना होगा और इसकी तैयारी आज से ही करनी चाहिए और ये काम अयोध्या के हर नागरिक को करना है, हर अयोध्यावासी को करना है, तभी जाकर अयोध्या की आन बान शान, जब कोई भी यात्री आएगा, तो राम मंदिर की श्रद्धा के साथ-साथ अयोध्या की व्यवस्थाओं को, अयोध्या की भव्यता को, अयोध्या की मेहमान नवाजी को अनुभव करके जाएगा। मेरे अयोध्या के भाइयों और बहनों तैयारियां अभी से शुरू कर दीजिए, और लता दीदी का जन्मदिन हमेशा-हमेशा के लिए प्रेरणा देता रहे।

नवरात्रि का छठां दिन मां 'कात्यायनी' को समर्पित 

नवरात्रि का छठां दिन मां 'कात्यायनी' को समर्पित 

सरस्वती उपाध्याय 
नवरात्रि का छठां दिन मां कात्यायनी की पूजा के लिए समर्पित है। माँ कात्यायनी नवदुर्गा का छठा रूप है। विवाह तय करने में समस्याओं का सामना करने वाली लड़की मां कात्यायनी से एक सुखी और सुगम वैवाहिक जीवन प्राप्त करने के लिए प्रार्थना कर सकती है। वह वैवाहिक जीवन में सद्भाव और शांति सुनिश्चित करती है। यह भी माना जाता है कि नवरात्रि में उनकी पूजा करने से कुंडली में ग्रहों के सभी नकारात्मक प्रभावों को दूर करने में मदद मिल सकती है।

नव दुर्गा स्वरूपों में माँ कात्यायनी देवी का छठां स्वरुप का महत्व...

नवदुर्गा के छठवें स्वरूप में माँ भगवती कात्यायनी की पूजा की जाती है। माँ कात्यायनी का जन्म कात्यायन ऋषि के घर हुआ था अतः इनको कात्यायनी कहा जाता है। इनकी चार भुजाओं मैं अस्त्र शस्त्र और कमल का पुष्प है, इनका वाहन सिंह है. ये ब्रजमंडल की अधिष्ठात्री देवी हैं, गोपियों ने कृष्ण की प्राप्ति के लिए इनकी पूजा की थी। विवाह में आरही बाधाओं के लिए माँ कात्यायनी की पूजा की जाती है, योग्य और मनचाहा पति इनकी कृपा से प्राप्त होता है। ज्योतिष में बृहस्पति का सम्बन्ध इनसे माना जाता है।

माँ कात्यायनी देवी का स्वरूप सोने के समाना चमकीला है। चार भुजा धारी माँ कात्यायनी सिंह पर सवार हो कर  एक हाथ में तलवार और दूसरे में अपना प्रिय पुष्प कमल लिये हुए बैठी है। तथा अन्य दो हाथ वरमुद्रा और अभयमुद्रा में हैं। इनका वाहन सिंह हैं। देवी कात्यायनी के नाम और जन्म से जुड़ी एक कथा प्रसिद्ध है।

हमारे ऋषि मुनियों में एक  श्रेष्ठ कात्य गोत्र के  ऋषि महर्षि कात्यायन जी थे। उनकी कोई संतान नहीं थी। मां भगवती को पुत्री के रूप में पाने की इच्छा रखते हुए उन्होंने पराम्बा माँ भगवती  की कठोर तपस्या की। महर्षि कात्यायन की तपस्या से प्रसन्न होकर देवी ने उन्हें पुत्री का वरदान दिया। कुछ समय बीतने के बाद राक्षस महिषासुर का अत्याचार अत्यधिक बढ़ गया। तब त्रिदेवों के तेज से एक सोने के सामान चमकीली और चतुर्भजाओं वाली एक कन्या ने जन्म लिया और उसका वध कर दिया। कात्य गोत्र में जन्म लेने के कारण देवी का नाम कात्यायनी पड़ गया।

मां कात्यायनी अविवाहित कन्याओं के लिए विशेष फलदायिनी मानी गई हैं। जिन कन्याओं के विवाह में विलम्ब या परेशानियां आती है तो वह माँ कात्यायनी के चतुर्भुज रूप की आराधना कर माँ का आशीर्वाद प्राप्त कर अपने मांगलिक कार्य को पूर्ण करती है  शिक्षा प्राप्ति के क्षेत्र में प्रयासरत भक्तों को माता की अवश्य उपासना करनी चाहिए। माँ कात्यायनी देवी के पूजन में मधु का विशेष महत्व है। इस दिन प्रसाद में मधु यानि शहद का प्रयोग करना चाहिए। इसके प्रभाव से साधक सुंदर रूप प्राप्त करता है।

आरती...

जय जय अम्बे जय कात्यायनी। जय जग माता जग की महारानी॥
बैजनाथ स्थान तुम्हारा। वहावर दाती नाम पुकारा॥
कई नाम है कई धाम है। यह स्थान भी तो सुखधाम है॥
हर मन्दिर में ज्योत तुम्हारी। कही योगेश्वरी महिमा न्यारी॥
हर जगह उत्सव होते रहते। हर मन्दिर में भगत है कहते॥
कत्यानी रक्षक काया की। ग्रंथि काटे मोह माया की॥
झूठे मोह से छुडाने वाली। अपना नाम जपाने वाली॥
बृहस्पतिवार को पूजा करिए। ध्यान कात्यानी का धरिये॥
हर संकट को दूर करेगी। भंडारे भरपूर करेगी॥
जो भी माँ को भक्त पुकारे। कात्यायनी सब कष्ट निवारे॥

मां कात्यायनी की पूजा-विधि...

नवरात्रि के छठे दिन सुबह स्नान के बाद स्वच्छ वस्त्र धारण करें। इसके बाद पूजा स्थल की सफाई करके गंगाजल से शुद्धि करें। अब सबसे पहले मां कात्यायनी की प्रतिमा अथवा तस्वीर के सामने हाथ जोड़कर प्रणाम करें। फिर पूजन के दौरान देवी को पीले अथवा लाल रंग के वस्त्र अर्पित करें। इसके बाद देवी मां को पीले रंग के पुष्प, कच्ची हल्दी की गांठ चढ़ाएं। फिर माता को शहद का भोग लगाएं। मां कात्यायनी के समक्ष आसन पर बैठकर मंत्र, दुर्गा चालीसा और सप्तशती का पाठ अवश्य करें। तत्पश्चात धूप-दीप जलाकर मां की आरती उतारें। पूजा के बाद सभी को प्रसाद बांटें।

मां कात्यायनी मंत्र...

चंद्र हासोज्ज वलकरा शार्दू लवर वाहना
कात्यायनी शुभं दद्या देवी दानव घातिनि

या देवी सर्वभू‍तेषु माँ कात्यायनी रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥

विभिन्न परियोजनाओं का शिलान्यास व लोकार्पण

विभिन्न परियोजनाओं का शिलान्यास व लोकार्पण 

विमलेश यादव 

गांधीनगर/सूरत/अहमदाबाद। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने शुक्रवार को सूरत में 3400 करोड़ रुपये से अधिक की विभिन्न परियोजनाओं का शिलान्यास और लोकार्पण किया। प्रधानमंत्री ने सड़क इंफ्रास्ट्रक्चर कार्यों के पहले चरण और डायमंड रिसर्च एंड मर्केंटाइल (ड्रीम) शहर के मुख्य प्रवेश द्वार का लोकार्पण किया। प्रधानमंत्री ने परियोजना के दूसरे चरण का शिलान्यास भी किया। इसके अलावा, प्रधानमंत्री ने जैव विविधता पार्क की आधारशिला रखी, जो डॉ. हेडगेवार ब्रिज से भीमराड-बमरोली ब्रिज तक 87 हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र में बनाया जा रहा है। प्रधानमंत्री ने सूरत के विज्ञान केंद्र में खोज संग्रहालय का भी उद्घाटन किया।

सभा को संबोधित करते हुए, प्रधानमंत्री ने नवरात्रि के शुभ अवसर पर सूरत में कई परियोजनाओं के उद्घाटन के साथ-साथ आगामी परियोजनाओं की आधारशिला रखने का अवसर मिलने पर प्रसन्नता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि नवरात्रि का व्रत रखने वाले मेरे जैसे व्यक्ति के लिए सूरत जैसी विशिष्ट व्यंजनों वाली भूमि पर आना थोड़ा कठिन है। प्रधानमंत्री ने इस बात पर भी प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि 75 अमृत सरोवर का कार्य जोरों पर चल रहा है। प्रधानमंत्री ने कहा कि सूरत शहर लोगों की एकजुटता और जनभागीदारी, दोनों का बहुत ही शानदार उदाहरण है। प्रधानमंत्री ने कहा कि सूरत की सबसे बड़ी खासियत ये है कि ये शहर श्रम का सम्मान करने वाला शहर है। मोदी ने कहा, “हिन्दुस्तान का कोई प्रदेश ऐसा नहीं होगा, जिसके लोग सूरत की धरती पर न रहते हों। एक तरह से यह मिनी इंडिया है।”

इस सदी के शुरुआती दशकों के समय को याद करते हुए, प्रधानमंत्री ने कहा कि इस सदी के शुरुआती दशकों में जब दुनिया में 3-पी यानि पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप की चर्चा होती थी, तब मैं कहता था कि सूरत 4-पी का उदाहरण है। मोदी ने कहा, “4-पी यानि पीपुल, पब्लिक, प्राइवेट पार्टनरशिप। यही मॉडल सूरत को विशेष बनाता है।” उन्होंने कहा कि आज सूरत दुनिया के सबसे तेजी से बढ़ते शहरों में शुमार है, उन दिनों से बहुत अलग है जब शहर का नाम महामारी और बाढ़ के लिए बदनाम किया गया। उन्होंने सूरत के नागरिक जीवन में जैव विविधता पार्क के लाभों के बारे में विस्तार से बताया। डबल इंजन वाली सरकार बनने के बाद सकारात्मक प्रभावों पर प्रकाश डालते हुए, प्रधानमंत्री ने कहा कि डबल इंजन की सरकार बनने के बाद तो घर बनाने में भी तेजी आई है और सूरत के गरीबों, मिडिल क्लास को दूसरी सुविधाएं भी मिलने लगी हैं। आयुष्मान भारत योजना के लाभों के बारे में चर्चा करते हुए, प्रधानमंत्री ने कहा कि आयुष्मान भारत योजना के तहत देश में अभी तक लगभग 4 करोड़ गरीब मरीजों को मुफ्त इलाज मिल चुका है। प्रधानमंत्री ने कहा, “इसमें से 32 लाख से अधिक मरीज गुजरात के हैं और लगभग सवा लाख सूरत से हैं।”

सूरत के कपड़ा और हीरे के कारोबार के बारे में बताते हुए, प्रधानमंत्री ने कहा कि सूरत के कपड़ा और हीरा कारोबार से देशभर के अनेक परिवारों का जीवन चलता है। प्रधानमंत्री ने कहा कि ड्रीम सिटी प्रोजेक्ट जब पूरा हो जाएगा तो सूरत, विश्व के सबसे सुरक्षित और सुविधाजनक डायमंड ट्रेडिंग हब के रूप में विकसित होगा। शहर में आधारभूत संरचना के विकास के बारे में चर्चा करते हुए, प्रधानमंत्री ने कहा कि एयरपोर्ट से शहर को जोड़ने वाली सड़क जो बनी है, वो सूरत की संस्कृति, समृद्धि और आधुनिकता को दर्शाती है। प्रधानमंत्री ने दिल्ली में तत्कालीन सरकार की आलोचना करते हुए कहा कि तब जो दिल्ली में सरकार थी, हम उनको बताते-बताते थक गए कि सूरत को एयरपोर्ट की जरूरत क्यों है, इस शहर का सामर्थ्य क्या है। उन्होंने शहर में एक हवाई अड्डे की आवश्यकता पर ज्यादा ध्यान नहीं दिया। प्रधानमंत्री ने कहा,”आज देखिए, कितनी ही फ्लाइट्स यहां से चलती हैं, कितने लोग हर रोज यहां एयरपोर्ट पर उतरते हैं।” मोदी ने इसी तरह की स्थिति को याद करते हुए यह भी कहा कि यहां अनेक साथी ऐसे हैं जिन्होंने एयरपोर्ट के लिए भी हमारे लंबे संघर्ष को देखा है, उसका हिस्सा भी रहे हैं। प्रधानमंत्री ने कहा कि सूरत में मेट्रो की स्वीकृति के समय भी ऐसी ही स्थिति उत्पन्न हुई थी।

लॉजिस्टिक के महत्व पर प्रकाश डालते हुए, प्रधानमंत्री ने कहा कि सूरत के लोग अच्छी तरह जानते हैं कि कारोबार और व्यापार में लॉजिस्टिक का कितना अधिक महत्व है। राष्ट्रीय लॉजिस्टिक पॉलिसी के बारे में चर्चा करते हुए, प्रधानमंत्री ने कहा कि इससे सूरत को बहुत लाभ होने वाला है। उन्होंने कहा कि मल्टी-मोडल कनेक्टिविटी पर भी सूरत में एक बड़ी परियोजना पर काम चल रहा है। हजीरा घोघा रोपैक्स फेरी सेवा रोपैक्स के माध्यम से 400 किमी सड़क दूरी को नाटकीय रूप से 10-12 घंटे से घटाकर 3-4 घंटे तक कम करके समय और धन दोनों की बचत कर रही है। सूरत से काशी और पूर्वी उत्तर प्रदेश तक कनेक्टिविटी का उदाहरण देते हुए, प्रधानमंत्री ने कहा कि माल का ट्रक लोड किया जाता है, और अब रेलवे व तटीय विभाग शिपमेंट की संख्या को बढ़ावा देने के लिए अद्वितीय नवाचारों के साथ आए हैं। प्रधानमंत्री ने समझाया, “रेलवे ने अपने कोचों के डिजाइन में इस तरह से बदलाव किया है कि कार्गो आसानी से उसमें फिट हो सके। इसके लिए एक टन के कंटेनर भी खास तौर पर बनाए गए हैं। इन कंटेनरों को आसानी से लोड और अनलोड किया जाता है। शुरुआती सफलता के बाद अब सूरत से काशी के लिए नई ट्रेन चलाने का प्रयास किया जा रहा है। यह ट्रेन सूरत से काशी तक माल ले जाएगी।”

प्रधानमंत्री ने डायमंड सिटी से ब्रिज सिटी और अब बदल कर जल्द ही इलेक्ट्रिक व्हीकल सिटी के रूप में सूरत की पहचान कायम होने के बारे में भी बताया। प्रधानमंत्री ने शहर में इलेक्ट्रिक वाहनों के आगमन पर जोर दिया और कहा कि सूरत जल्द ही इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए भी जाना जाएगा। मोदी ने कहा कि अभी तक केंद्र सरकार देश भर में इलेक्ट्रिक वाहन चलाने में सरकारों की मदद कर रही है और देश के अन्य शहरों की तुलना में सूरत इस मामले में एक कदम आगे है। प्रधानमंत्री ने कहा, “आज सूरत शहर में 25 चार्जिंग स्टेशनों का उद्घाटन किया गया है और इतने ही स्टेशनों की आधारशिला रखी गई है। निकट भविष्य में सूरत में 500 चार्जिंग स्टेशन स्थापित करने की दिशा में यह एक बड़ा कदम है।” 

संबोधन के समापन में, प्रधानमंत्री ने कहा कि बीते 2 दशकों से विकास के जिस पथ पर सूरत चल पड़ा है, वो आने वाले सालों में और तेज होने वाला है। उन्होंने कहा, “यही विकास आज डबल इंजन सरकार पर विश्वास के रूप में झलकता है। जब विश्वास बढ़ता है, प्रयास बढ़ता है, और सबका प्रयास से राष्ट्र के विकास की गति तेज होती है। इस अवसर पर गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल, संसद सदस्य सी. आर. पाटिल और प्रभुभाई वासवम, केंद्रीय राज्य मंत्री दर्शना विक्रम जरदोश और गुजरात के गृह मंत्री हर्ष सांघवी सहित अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।

जनरल चौहान ने 'सीडीएस' का पदभार ग्रहण किया

जनरल चौहान ने 'सीडीएस' का पदभार ग्रहण किया

अकांशु उपाध्याय 

नई दिल्ली। जनरल अनिल चौहान ने शुक्रवार को भारत के दूसरे प्रमुख रक्षा अध्यक्ष (सीडीएस) का पदभार ग्रहण किया। उनके सामने सशस्त्र सेनाओं के तीनों अंगों के बीच समन्वय और महत्वाकांक्षी ‘थियेटर’ कमान के निर्माण का लक्ष्य है ताकि देश की सेनाओं को भविष्य की सुरक्षा चुनौतियों से निपटने के लिए तैयार किया जा सके। जनरल चौहान सेना की पूर्वी कमान के प्रमुख रह चुके हैं। तमिलनाडु में हेलीकॉप्टर दुर्घटना में, भारत के पहले सीडीएस जनरल बिपिन रावत के निधन के नौ महीने से ज्यादा समय बाद जनरल चौहान ने वरिष्ठतम सैन्य कमांडर का दायित्व ग्रहण किया है। जनरल चौहान ने कहा, “भारतीय सशस्त्र बलों में सबसे ऊंचे रैंक का दायित्व ग्रहण कर मुझे गर्व हो रहा है।

मैं सेना के तीनों अंगों की उम्मीदों पर खरा उतरने और सबको साथ लेकर सभी प्रकार की चुनौतियों से निपटने प्रयास करूंगा।” सीडीएस का कार्यभार ग्रहण करने से पहले जनरल चौहान ने इंडिया गेट पर राष्ट्रीय समर स्मारक पर बलिदानी सैनिकों को श्रद्धांजलि दी। उनके पिता सुरेंद्र सिंह चौहान भी स्मारक पर मौजूद थे। जनरल चौहान को रायसीना हिल्स पर साउथ ब्लॉक के लॉन पर तीनों सेनाओं की ओर से गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया। इस अवसर पर थलसेनाध्यक्ष जनरल मनोज पांडेय, वायुसेनाध्यक्ष एयर चीफ मार्शल विवेक राम चौधरी और नौसेना के उप प्रमुख वाईस एडमिरल एस. एन. घोरमाडे मौजूद थे। जनरल चौहान की पत्नी अनुपमा भी उनके साथ थीं।

चीन संबंधी मामलों के विशेषज्ञ माने जाने वाले जनरल चौहान की नए सीडीएस के रूप में नियुक्ति ऐसे समय हुई है जब पूर्वी लद्दाख में भारतीय और चीनी सैनिकों के बीच गतिरोध बरकरार है। भारतीय सेना के बेहद अनुभवी और अलंकृत अधिकारी, 61 वर्षीय जनरल चौहान रक्षा मंत्रालय के सैन्य मामलों के विभाग के सचिव के तौर पर भी काम करेंगे। वह पूर्वी कमान के प्रमुख के पद से गत वर्ष 31 मई को सेवानिवृत्त हुए थे। इसके बाद वह राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद सचिवालय में राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल के अधीन सैन्य सलाहकार के तौर पर काम कर रहे थे। जनरल चौहान का जन्म 18 मई 1961 को हुआ था और 1981 में 11 गोरखा राइफल्स में उन्हें कमीशन मिला था।

सीडीएस के तौर पर जनरल चौहान के सामने, एकीकृत सैन्य कमान के तौर पर ‘थिएटर कमान’ की स्थापना करने की चुनौती होगी। पिछले साल जनरल रावत के नेतृत्व वाले सैन्य मामलों के विभाग ने तीनों सेनाओं से थिएटर कमान की योजना के बाबत स्वतंत्र योजना बनाने को कहा था। परन्तु, आठ दिसंबर 2021 को जनरल रावत के निधन के बाद यह प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ पाई। इस योजना के तहत प्रत्येक थिएटर कमान के पास थलसेना, नौसेना और वायुसेना की इकाइयां होंगी और ये सभी एक इकाई (कमान) के रूप में, किसी विशेष भौगोलिक क्षेत्र में, एक कमांडर के नेतृत्व में सुरक्षा चुनौतियों से निपटने में सक्षम होंगी। वर्तमान में तीनों सेनाओं की कुल 17 कमान हैं। शुरुआत में एक योजना बनाई गई थी जिसके तहत एक ‘एयर डिफेंस कमान’ और एक ‘मेरीटाइम थिएटर कमान’ का निर्माण किया जाना था।

प्रस्तावित थिएटर कमान को लेकर भारतीय वायु सेना को कुछ आशंकाएं हैं। एयर चीफ मार्शल वी आर चौधरी ने जून में कहा था कि वायु सेना तीनों सेनाओं के एकीकरण को लेकर पूरी तरह तैयार है। जनरल चौहान 2019 में बालाकोट हमले के दौरान सेना के सैन्य परिचालन महानिदेशक (डीजीएमओ) थे। जम्मू कश्मीर के पुलवामा में हुए आतंकी हमले के जवाब में भारतीय लड़ाकू विमानों ने पाकिस्तान के बालाकोट पर हवाई हमले किये थे और जैश ए मोहम्मद के प्रशिक्षण केंद्रों को बर्बाद कर दिया था। जनरल चौहान ने देश के दूसरे सीडीएस का कार्यभार संभालने के बाद ‘फोर-स्टार रैंक’ धारण किया है। वह ऐसे पहले सेवानिवृत्त अधिकारी बन गए हैं जिन्होंने सेवानिवृत्त होने के बाद चार सितारा रैंक के साथ सेवा में वापसी की।

भारत जोड़ो यात्रा, भाजपा-आरएसएस पर निशाना 

भारत जोड़ो यात्रा, भाजपा-आरएसएस पर निशाना 

अकांशु उपाध्याय/इकबाल अंसारी 

नई दिल्ली/गुंदलुपेट। कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने शुक्रवार को भारतीय जनता दल और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) पर निशाना साधते हुए कहा कि विपक्ष के पास केंद्र सरकार के खिलाफ खड़ा होने का एकमात्र विकल्प ‘भारत जोड़ो यात्रा’ बचा हुआ है। गांधी की यात्रा तमिलनाडु की सीमा गुडलूर से कर्नाटक के गुंदलुपेट में प्रवेश कर चुकी है। उन्होंने कहा, “लोकतंत्र में विभिन्न संस्थान होते हैं जहां पर आप अपनी बात रख सकते हैं, जैसे कि मीडिया और संसद। विपक्ष के लिए सभी रास्ते बंद कर दिए गए हैं।

मीडिया हमारे विचारों को जनता तक नहीं पहुंचाता है और यह पूरी तरह से सरकार के नियंत्रण में है। जब हम संसद में बोलना चाहते हैं तो हमारे माइक बंद कर दिए जाते हैं, विपक्षी नेताओं को गिरफ्तार किया जाता है। राज्य विधानसभाओं को चलने नहीं दिया जा रहा है। इसलिए विपक्ष के पास भारत जोड़ो यात्रा ही एकमात्र विकल्प बचा हुआ है।” उन्होंने कहा,“कोई भी शक्ति हमें इस मार्ग पर चलने से नहीं रोक सकती है क्योंकि हम इस पथ पर नहीं चल रहे हैं यह भारत की आवाज है।

इस यात्रा के माध्यम से हम लोगों के दुख-दर्द और कष्टों को सुन रहे हैं। इसलिए भाषण कुछ मिनटों तक ही सीमित करते हैं, जबकि सुबह से शाम तक यात्रा करना और लोगों की बातें सुनने का काम किया जा रहा है।” श्री राहुल गांधी ने कहा कि सभी जाति, धर्म और भाषा के लोग इस यात्रा में शामिल हो रहे हैं, जो भाईचारे का प्रतीक है, जबकि भाजपा और आरएसएस सत्ता में बने रहने के लिए नफरत और हिंसा फैला रहे हैं। यह यात्रा कर्नाटक के सात जिलों से होकर गुजरेगी और लगभग 500 किलोमीटर की दूरी तय करेगी। इसमें कर्नाटक की सात लोकसभा और 22 विधानसभा सीटें को कवर किया जाएगा। कर्नाटक में कुछ महीने बाद विधानसभा चुनाव होने वाले हैं।

पंजाब: सीएम मान ने कांग्रेस नेतृत्व की कड़ी निंदा की

पंजाब: सीएम मान ने कांग्रेस नेतृत्व की कड़ी निंदा की

अमित शर्मा 

चंडीगढ़। पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने शुक्रवार को सत्र में विधानसभा अध्यक्ष की गरिमा पर सवाल उठाने के लिए कांग्रेस नेतृत्व की कड़ी निंदा की और कहा कि जो कांग्रेस विधायक अब उंगली उठा रहे हैं, उन्होंने एक ‘फर्जी सीएम’ के साथ काम किया है। पिछली सरकार में कैप्टन अमरिंदर सिंह हमेशा भारतीय जनता पार्टी के लिए काम करते थे। मान ने सत्र में विपक्ष पर तंज कसते हुए कहा,“जो ‘नकली सीएम’ कैप्टन अमरिंदर सिंह के लिए काम कर रहे थे, वे अब सत्र में ‘मुर्दाबाद’ के नारे लगा रहे हैं। कांग्रेस भाजपा के लिए काम कर रही है और उन्हें आधिकारिक तौर पर भाजपा को उसकी पार्टी के नाम के साथ लिखना चाहिए।

सत्र में हंगामा करने के लिए कांग्रेस विधायकों पर हमला करते हुए, मान ने कहा कि कांग्रेस ने सदन का कीमती समय बर्बाद किया है और उन्हें तथाकथित ‘भाजपा के सत्र’ में शामिल होने के लिए कहा है ताकि सदन को जनहित में निर्णय लेने के लिए ठीक से काम करने दिया जा सके। सत्र के दौरान, वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने कहा कि विपक्ष के पास सत्ताधारी पार्टी के खिलाफ शून्य मुद्दा है और कांग्रेस ने अपने निर्वाचन क्षेत्रों का एक भी मुद्दा नहीं उठाया और उन्होंने विधानसभा में एक भी सवाल नहीं उठाया। कांग्रेस के पास सदन में अशांति पैदा करने का एकमात्र एजेंडा है और यह बेहद दुखद और निराशाजनक है कि वे लोकतंत्र की हत्या कर रहे हैं।

उन्होंने कहा कि कांग्रेस निहित स्वार्थ के साथ काम कर रही है और उन्हें पंजाब के कल्याण की परवाह नहीं है। कांग्रेस अब आधिकारिक तौर पर भाजपा की बी-टीम बन गई है। इससे पहले विधानसभा अध्यक्ष कुलतार सिंह संधवां ने सत्र में हंगामा करने के लिए विपक्ष की आलोचना की और कहा कि सदन को दोपहर साढ़े तीन बजे तक कामकाज करना है लेकिन कांग्रेस ने सदन में हंगामा कर पंजाब की जनता को धोखा दिया. यह दुख की बात है कि वे पंजाब और पंजाबियों के कल्याण के लिए विधेयकों पर बहस करने में विफल रहे हैं।

अशोक स्तंभ के स्वरूप को चुनौती, याचिका खारिज 

अशोक स्तंभ के स्वरूप को चुनौती, याचिका खारिज 

अकांशु उपाध्याय 

नई दिल्ली। सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट के तहत भारत के नए संसद भवन पर बनाए गए अशोक स्तंभ के स्वरूप को चुनौती देने वाली याचिका सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को खारिज कर दी। दो वकीलों की ओर से दायर याचिका में राष्ट्रीय प्रतीक में लगे शेरों की मुद्रा पर सवाल उठाया गया था। सुप्रीम कोर्ट की तरफ से कहा गया है कि भारत के नए संसद भवन लगाई गई शेर की मूर्ति कानून का उल्लंघन नहीं करती है। साथ ही कोर्ट ने आक्रामक मूर्ति के दावे पर भी सवाल उठाए हैं। कोर्ट ने याचिका को खारिज करते हुए कहा कि यह व्यक्ति के दिमाग पर निर्भर करता है।

याचिकाकर्ताओं ने दावा किया था कि नई मूर्ति स्टेट एंबलम ऑफ इंडिया (प्रोहिबिशन ऑफ इम्प्रॉपर यूज) एक्ट, 2005 में मंजूरी प्राप्त राष्ट्रीय प्रतीक की डिजाइन के विपरीत है। हालांकि, जस्टिस एमआर शाह और जस्टिस कृष्ण मुरारी की बेंच ने याचिका को खारिज कर दिया।

याचिका में क्या कहा गया ?

याचिका में कहा गया है कि प्रतीक में शामिल शेर क्रूर और आक्रामक नजर आ रहे हैं, जिनका मुंह खुला हुआ है और दांत दिख रहे हैं। जबकि, सारनाथ में मूर्ति के शेर शांत नजर आ रहे हैं। आगे कहा गया है कि चारों शेर बुद्ध के विचार दिखाते हैं। याचिका के अनुसार, यह महज एक डिजाइन नहीं है, इसका अपना सांस्कृतिक महत्व है।

विपक्षी पार्टी पर तंज, वह एक ‘कठपुतली’ साबित होंगे 

विपक्षी पार्टी पर तंज, वह एक ‘कठपुतली’ साबित होंगे 

अकांशु उपाध्याय 

नई दिल्ली। कांग्रेस अध्यक्ष पद की दौड़ में राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के उतरने के बाद भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने शुक्रवार को विपक्षी पार्टी पर तंज कसते हुए कहा कि वह एक ‘‘कठपुतली’’ साबित होंगे और ‘‘रिमोट’’ से नियंत्रित होंगे। भाजपा के सूचना-प्रौद्योगिकी विभाग के प्रमुख अमित मालवीय ने एक ट्वीट में कहा, ‘‘अस्सी की उम्र में मल्लिकार्जुन खड़गे कांग्रेस के लिए प्रेरक पसंद हैं। वह युवा हैं, ऊर्जावान हैं और कांग्रेस को अपने पुनरुद्धार के लिए जिसकी जरूरत है उसके अनुरूप हैं।

उन्हें मनमोहन सिंह (पूर्व प्रधानमंत्री) से ‘रिमोट कंट्रोल से संचालित’ होने के तौर-तरीकों को अपना लेना चाहिए। इससे सब कुछ सुलझ जाएगा।’’ कांग्रेस अध्यक्ष पद के लिए पार्टी के अधिकतर वरिष्ठ नेता खड़गे के समर्थन में हैं। ऐसा माना जा रहा है कि उन्हें गांधी परिवार का समर्थन हासिल है। हालांकि, गांधी परिवार ने इस चुनाव में तटस्थ भूमिका में रहने की बात कही है। भाजपा प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने एक ट्वीट में कहा कि गहलोत (राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत) के परिवार (गांधी परिवार) का साथ खोने के बाद अब 80 वर्षीय मल्लिकार्जुन खड़गे को रिमोट से नियंत्रित ‘कठपुतली’ के रूप में चुना गया है, जिन्हें कांग्रेस के आधिकारिक उम्मीदवार के रूप में भी देखा जा रहा है। उनके नामांकन के मुकाबले थरूर का नामांकन फीका रहा। क्या आपको नहीं लगता कि यह मैच खड़गे के लिए फिक्स है?

गांधी परिवार पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा, ‘‘क्या कोई यकीन कर सकता है कि यह निष्पक्ष व स्वतंत्र चुनाव है, जिसमें परिवार अपने उम्मीदवार के निर्वाचन के लिए प्रयासरत है। जिस प्रकार मनमोहन सिंह चेहरा थे और उन्हें प्रधानमंत्री पद की उपाधि दी गई थी, उसी प्रकार की प्रक्रिया यहां अपनाई जा रही है। उन्होंने गांधी परिवार पर आरोप लगाया कि वे एक व्यक्ति, एक पद के आधार पर गहलोत को राजस्थान के मुख्यमंत्री पद से हटाना चाहते थे, वह भी उस वक्त जब उन्हें कांग्रेस अध्यक्ष पद पर उनके सबसे पसंदीदा उम्मीदवार के रूप में देखा जा रहा था। उन्होंने कहा, ‘‘लेकिन खड़गे के लिए अपवाद रखा गया है। क्या उन्होंने नामांकन से पहले राज्यसभा में विपक्ष के नेता पद से इस्तीफा दे दिया है?’’

पीनट बटर को अपने आहार में शामिल करें: सेहत 

पीनट बटर को अपने आहार में शामिल करें: सेहत 

सरस्वती उपाध्याय 

सूखे मेवों का सेवन आपकी सेहत के लिए बहुत फायदेमंद माना गया है। हालांकि, काजू, बादाम, पिस्ता आदि सूखे मेवों की कीमत अधिक होने के कारण हर कोई इन्हें नहीं खरीद पाता है। ऐसे में जो लोग महंगे नट्स का सेवन नहीं कर पाते हैं, वे लोग पीनट बटर को अपने आहार में शामिल कर सकते हैं।

जी हां, मूंगफली से तैयार किया जाने वाला पीनट बटर भी आपकी सेहत के लिए काफी फायदेमंद माना गया है। इसमें पोटेशियम, जिंक, सेलेनियम, मैग्नीशियम, विटामिन ए और आयरन सहित कई विटामिन और खनिज मौजूद होते हैं। आप एक चम्मच पीनट बटर का सेवन सुबह नाश्ते में ब्राउन ब्रेड पर लगाकर या फिर रात को सोने से पहले दूध के साथ कर सकते हैं। तो आइए जानते हैं इस समय पर पीनट बटर खाने से होने वाले फायदों के बारे में…

1. आंखों के लिए लाभकारी...

आजकल बड़े-बुजुर्गों के साथ-साथ छोटे-छोटे बच्चों को भी आंखों से संबंधित समस्याएं होने लगी हैं। जिससे कम उम्र में ही बच्चों के चश्मा लग जाता है। इसका एक सामान्य कारण पोषण में कमी और फोन, लैपटॉप आदि गैजेट्स का का अधिक इस्तेमाल करना है। इसका आंखों की रोशनी पर काफी असर पड़ता है। और धीरे-धीरे आंखें खराब होने लगती हैं। ऐसे में विटामिन-ए युक्त पीनट बटर का सेवन बच्चों से लेकर बड़ों तक सभी के लिए फायदेमंद हो सकता है। क्योंकि विटामिन-ए आपकी आंखों को स्वस्थ में सहायक माना गया है।

2. बैड कोलेस्ट्रॉल को घटाने में...

शरीर में एलडीएल यानी खराब कोलेस्ट्रॉल की मात्रा बढ़ने से हृदय संबंधी रोगों का खतरा भी बढ़ जाता है। ऐसे में बैड कोलेस्ट्रॉल को घटाने में रोजाना एक चम्मच पीनट बटर का सेवन सहायक हो सकता है। क्योंकि इसमें मोनो अनसैचुरेटेड फैट मौजूद होता है। साथ ही वजन कम करने में सहायक पीनट बटर का सेवन हृदय रोगों के जोखिम को कम करने में भी किया जा सकता है।

3. दुरुस्त पाचन के लिए...

आपका पाचन बेहतर होगा, तो बहुत सी बीमारियां आपके निकट भी नहीं आएंगी। आपके पेट को ठीक रखने में फाइबर एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इसलिए फाइबर युक्त पीनट बटर को रोजाना अपने आहार में शामिल करने से पाचन तंत्र को मजबूती मिल सकती है।

4. ब्लड शुगर कंट्रोल करता है...

रक्त शर्करा को नियंत्रित रखने के लिए भी रोजाना एक चम्मच पीनट बटर का सेवन करना एक बेहतर विकल्प हो सकता है। क्योंकि पीनट बटर में भरपूर मैग्नीशियम पाया जाता है, जो आपके ब्लड शुगर लेवल को कंट्रोल रखने में सहायक होता है।

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प्राधिकृत प्रकाशन विवरण

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1. अंक-356, (वर्ष-05)

2. शनिवार, अक्टूबर 1, 2022

3. शक-1944, आश्विन, शुक्ल-पक्ष, तिथि-षष्ठी, विक्रमी सवंत-2079।

4. सूर्योदय प्रातः 06:20, सूर्यास्त: 06:25। 

5. न्‍यूनतम तापमान- 23 डी.सै., अधिकतम-35+ डी.सै., उत्तर भारत में भारी बरसात की संभावना है।

6. समाचार-पत्र में प्रकाशित समाचारों से संपादक का सहमत होना आवश्यक नहीं है। सभी विवादों का न्‍याय क्षेत्र, गाजियाबाद न्यायालय होगा। सभी पद अवैतनिक है। 

7.स्वामी, मुद्रक, प्रकाशक, संपादक राधेश्याम व शिवांशु,(विशेष संपादक) श्रीराम व सरस्वती (सहायक संपादक) संरक्षण-अखिलेश पांडेय, ओमवीर सिंह, वीरसेन पवार, योगेश चौधरी आदि के द्वारा (डिजीटल सस्‍ंकरण) प्रकाशित। प्रकाशित समाचार, विज्ञापन एवं लेखोंं से संपादक का सहमत होना आवश्यक नहीं हैं। पीआरबी एक्ट के अंतर्गत उत्तरदायी। 

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9. पंजीकृत कार्यालयः263, सरस्वती विहार लोनी, गाजियाबाद उ.प्र.-201102

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