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गुरुवार, 17 जून 2021

ब्राजील में कोरोना के 19 वेरिएंट की पहचान की गई

ब्रासीलिया। दुनियाभर में जारी कोरोना वायरस का खतरा अब भी लगातार जारी है। इसी बीच ब्राजील के वैज्ञानिकों ने एक चौंकाने वाली जानकारी दी है। ब्राजीली वैज्ञानिको के मुताबिक, ब्राजील के साओ पाउलो राज्य में कोरोना वायरस के कम से कम 19 वेरिएंट (प्रकारों) की पहचान की गई है। ब्राजील के जैविक अनुसंधान केंद्र, इंस्टीट्यूट बुटानटन ने एक बयान देकर ये जानकारी दी। बयान में कहा गया कि साओ पाउलो राज्य में 19 कोरोना वायरस वैरिएंट घूम रहे हैं। जिनमें P.1 (अमेज़ॅन) स्ट्रेन 89.9 प्रतिशत मामलों के लिए जिम्मेदार है। इसके बाद स्ट्रेन बी.1.1.7 (यूके वेरिएंट) आता है। जो 4.2 प्रतिशत कोरोना मामलों के लिए जिम्मेदार है। साओ पाउलो राज्य ब्राजील का सबसे अधिक आबादी वाला राज्य हैष यहां पर 4.6 करोड़ लोगों की आबादी रहती है और देश के सबसे अधिक कोरोना के मामले यहीं पर पाए गए हैं।

इसी बीच, रूस की स्पुतनिक-वी कोविड वैक्सीन की पहली खेप जुलाई के शुरुआत में ब्राजील पहुंच सकती है। ब्राजील के सेरा राज्य के गवर्नर कैमिलो सैन्टाना ने इसकी जानकारी दी, उन्होंने कहा- स्पुतनिक-वी वैक्सीन से जुड़े रूसी प्रत्यक्ष निवेश कोष के प्रतिनिधियों और उत्तर-पूर्व (ब्राजील) के गवर्नरों के बीच एक बैठक हुई। फंड ने जुलाई की शुरुआत में वैक्सीन की पहली बैच की डिलीवरी की पुष्टि की और इस महीने के अंत तक वैक्सीन वितरण कार्यक्रम तैयार हो जाएगा।

रविवार, 13 जून 2021

शुक्र ग्रह 22 जून को कर्क राशि में गोचर करेंगे

शुुक्र ग्रह को सुख, सौंदर्य, कला, प्रेम, वाहन समेत अन्य भौतिक सुखों का कारक माना जाता है। शुक्र ग्रह की स्थिति से पता चलता है कि हम दोस्ती में कैसे रहेंगे और प्रेम संबंध में हमारी भावनाएं कैसी होंगी। शुक्र एक राशि से दूसरी राशि में गोचर करने के लिए लगभग 23 दिनों का समय लेता है। वैदिक ज्योतिष में भी शुक्र की गिनती शुभ ग्रहों में की जाती है। शुक्र के राशि परिवर्तन का भी सभी राशियों पर प्रभाव पड़ता है। शुक्र 22 जून को कर्क राशि में गोचर करेंगे। इससे पहले 29 मई के दिन शुक्र ने अपनी राशि बदली थी। शुक्र के कर्क राशि में गोचर करने से कुछ राशियों को लाभ होगा तो कुछ राशियों को नुकसान पहुंचेगा।
22 जून को मेष राशि के चतुर्थ भाव में शुक्र का गोचर हो रहा है। चतुर्थ भाव आराम, माता और सुख-सुविधाओं का कारक है। शुक्र गोचर से आपकी आर्थिक स्थिति बेहतर होगी। करियर में भी आपको सफलता की नई ऊंचाइयां मिलेंगी। कार्यक्षेत्र में बदलाव भी संभव है। मिथुन राशि के दूसरे भाव में शुक्र का गोचर हो रहा है। यह भाव वाणी, धन और परिवार का कारक माना जाता है। आपकी राशि में शुक्र के गोचर के दौरान आप परिवार के साथ अच्छा समय बिताएंगे। निवेश में मुनाफा हो सकता है। आमदनी में बढ़ोतरी होने के प्रबल योग हैं। यात्राओं का योग भी बन सकता है। शुक्र का गोचर वृश्चिक राशि वालों के लिए शुभ परिणाम लेकर आएगा। व्यापारियों को फायदा होगा। शुक्र गोचर के दौरान नए कार्य की शुरुआत करना उत्तम रहेगा। इस दौरान आपको करियर के क्षेत्र में अच्छे अवसर मिलेगें। अपनी सेहत का ध्यान रखें। साथ ही कार्य क्षेत्र में अनावश्यक बातों में उलझने से बचें। मकर राशि के सातवें भाव में शुक्र का गोचर हो रहा है। यह भाव विवाह और भागीदारी का कारक माना जाता है। इस वजह से मकर राशि में शुक्र के गोचर के दौरान नौकरी पेशा लोगों के जीवन में अनुकूल बदलाव हो सकते हैं। प्रमोशन मिलने की उम्मीद है। शुक्र के असर से आर्थिक स्थिति में सुधार होगा। छात्रों का मन पढ़ाई से हट सकता है।

रविवार, 6 जून 2021

10 जून को लगेगा सूर्य ग्रहण, भारत में नहीं दिखेगा

सूर्य ग्रहण 10 जून गुरुवार को लग रहा है। यह साल 2021 का पहला सूर्य ग्रहण है। जब सूर्य और पृथ्वी के बीच चंद्रमा आ जाए तो उसे सूर्य ग्रहण की संज्ञा दी जाती है। वैज्ञानिक और आध्यात्मिक दोनों ही दृष्टि से इसे महत्वपूर्ण घटना माना जाता है। जिसका असर पृथ्वी पर मौजूद हर वस्तु पर पड़ता है, खासतौर से मनुष्यों पर इसका असर देखने को मिलता है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, सूर्य ग्रहण वृष राशि और मृगशिरा नक्षत्र में लगेगा। सूर्य ग्रहण भारत में आंशिक रूप से ही देखा जा सकेगा। आंशिक सूर्य ग्रहण को खंडग्रास, कंकणाकृति भी कहा जाता है। 
इस स्थिति में सूर्य एक चांदी के चमकते कंकण या फिर वलय के आकर में दिखाई देता है। इसे ‘रिंग ऑफ फायर’ या वलयाकार ग्रहण भी कहते हैं। वहीं इस साल कुल 4 ग्रहण लगेंगेसूर्य ग्रहण 10 जून यानी कि गुरुवार को दोपहर 1 बजकर 42 मिनट से ग्रहण लगना प्रारंभ होगा। और पूरे 5 घंटे बाद शाम 6 बजकर 41 मिनट पर पूरा होगा। सूर्य ग्रहण से 12 घंटे पहले सूतक शुरू हो जाता है। लेकिन खास बात ये है कि ये ग्रहण भारत में नहीं दिखेगा इसलिए न तो यहां सूतक काल मान्य होगा और नहीं धार्मिक आयोजनों में किसी तरह की रुकावट आएगी। ये ग्रहण अमेरिका, दक्षिण अफ्रीका, ऑस्ट्रेलिया और अटलांटिक में नजर आएगा।

इन बातों का रखें ध्यान

भले ही ये सूर्य ग्रहण उपच्छाया ग्रहण होगा और भारत में नजर नहीं आएगा। बावजूद इसके ज्योतिष गर्भवती महिलाओं को कुछ खास बातों का ध्यान रखने और उन्हें नजरअंदाज न करने की सलाह देते हैं। ग्रहण शुरू हो उससे पहले ही स्नान कर लेना चाहिए। ग्रहण के दौरान जितना संभव हो उतना प्रभु को याद करें। ग्रहण काल के समय क्रोध, किसी की निंदा व बुरे कार्यों को करने से बचें। धारदार चीज़ें जैसे कैंची, चाकू इत्यादि का इस्तेमाल न करें। हाथ, पांव को सीधा रखें उन्हें मोड़े नहीं। सूर्य मंत्रों का जाप करें।

शनिवार, 5 जून 2021

पशु गर्भधारण अवस्था की मात्र 10 रुपये में जांच

राणा ओबरॉय   
चंडीगढ़। हरियाणा में वैज्ञानिकों ने पशुओं के गर्भ की जांच के लिए किट तैयार कर दी है। इस किट के जरिये अब पता लगाया जा सकता है कि पशु के गर्भ में बच्चा है या नहीं है। वहीं इस प्रक्रिया और किट के लिए ज्यादा खर्च करने की भी आवश्यकता नहीं होगी, इसके लिए महज 10 रुपये का ही खर्च आएगा। हिसार स्थित केन्द्रीय भैंस अनुसंधान संस्थान (सीआइआरबी) द्वारा विकसित इस किट को केंद्रीय कृषि एवं कल्याण मंत्री नरेंद्र सिंह तौमर ने वर्चुअल कार्यक्रम में लॉच किया। आपको बता दें कि अभी तक पशुओं में प्रेग्नेंसी जांचने की कोई भी किट नहीं थी। अब इस किट के द्वारा 20 दिन के गर्भ का आसानी से पता चल जाता है। इसकी जांच करने के लिए केवल पशु के थोडे़ से मूत्र की जरूरत होगी और गर्भ जांच कर सकता है।
यह किट पशुपालकों के लिए हितकारी साबित होगी, अभी तक पशुपालक पशु के 3-4 महिने के गर्भवती होने पर ही इसका पता कर पाते थे जोकि पशु पालकों के लिए बहुत ही नुकसानदायी रहता है। अब 20 दिन के गर्भ का पता करने के बाद पशुपालत अपने अगर पशु गर्भ से नहीं है तो उसका समय पर इलाज करवा सकेगा। कृषि मंत्री ने सीआइआरबी के निदेशक, टेस्ट किट की खोज करने वाले डॉ. अशोक बल्हारा और उनकी टीम की सराहना की है। किट तैयार करने वाली टीम के सदस्य डॉ. अशोक बल्हारा, डॉ. सुशील फुलिया, डॉ. राकेश शर्मा, डॉ. सुमन व डॉ. अशोक मोहंती हैं।

आपको बता दें कि पशुपालकों को पशुपालन में बांझ से हो रहे नुकसान को कम करने के लिए केंद्रीय भैंस अनुसंधान संस्थान के वैज्ञानिकों ने गर्भ जांच किट बनाने का निर्णय लिया। जो कि 2-3 साल के प्रयास ओर मेहनत के बाद विज्ञानियों ने इसमें सफलता प्राप्त की जो कि किसानों के लिए बहुत ही लाभदायी होगी। आपको बता दें कि पशुपालकों को पशुपालन में बांझ से हो रहे नुकसान को कम करने के लिए केंद्रीय भैंस अनुसंधान संस्थान के वैज्ञानिकों ने गर्भ जांच किट बनाने का निर्णय लिया। जो कि 2-3 साल के प्रयास ओर मेहनत के बाद विज्ञानियों ने इसमें सफलता प्राप्त की जो कि किसानों के लिए बहुत ही लाभदायी होगी।

मंगलवार, 1 जून 2021

विश्व: 35.46 लाख से अधिक लोगों की मौंत, संक्रमण

वाशिंगटन डीसी। विश्वभर में कोरोना वायरस (कोविड-19) का कहर जारी है और अब तक 17.05 करोड़ से अधिक लोग इससे संक्रमित हो चुके हैं। जबकि 35.46 लाख से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है। अमेरिका की जॉन हॉपकिन्स यूनिवर्सिटी के विज्ञान एवं इंजीनियरिंग केंद्र (सीएसएसई) की ओर से जारी ताजा आंकड़ों के अनुसार दुनिया के 192 देशों एवं क्षेत्रों में संक्रमितों की संख्या बढ़कर 17 करोड़ पांच लाख 85 हजार 283 हो गयी है। जबकि 35 लाख 46 हजार 915 लोगों की इसके संक्रमण के कारण मौत हो चुकी है।

विश्व में महाशक्ति माने जाने वाले अमेरिका में कोरोना वायरस की रफ्तार थोड़ी धीमी पड़ी है। हालांकि यहां संक्रमितों की संख्या तीन करोड़ 32 लाख 64 हजार 380 हो गयी है और 5.94 लाख से ज्यादा लोगों की इस संक्रमण से मौत हो गयी है। दुनिया में कोरोना संक्रमितों के मामले में भारत दूसरे स्थान पर और मृतकों के मामले में तीसरे स्थान पर है। पिछले 24 घंटों में 1,27,510 नये मामले आने के साथ ही संक्रमितों का आंकड़ा बढ़कर दो करोड़ 81 लाख 75 हजार 044 हो गया। इस दौरान दो लाख 55 हजार 287 मरीज स्वस्थ हुए हैं जिसे मिलाकर देश में अब तक दो करोड़ 59 लाख 47 हजार 629 लोग इस महामारी को मात दे चुके हैं। सक्रिय मामले 1,30, 572 कम होकर 18 लाख 95 हजार 520 रह गये हैं। इस दौरान 2,795 मरीज अपनी जान गंवा बैठे और इस बीमारी से मरने वालों की कुल संख्या बढ़कर तीन लाख 31 हजार 895 हो गयी है। देश में सक्रिय मामलों की दर घटकर 6.73 प्रतिशत रह गयी है जबकि मृत्युदर बढ़कर 1.18 हाे गई है।

ब्राजील संक्रमितों के मामले में अब तीसरे स्थान पर है। इस देश में कोरोना संक्रमण के मामले फिर से बढ़ रहे हैं और अभी तक इससे 1.65 करोड़ से ज्यादा लोग प्रभावित हुए हैं। जबकि 4.62 लाख से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है। ब्राजील कोरोना से मौतों के मामले में विश्व में दूसरे स्थान पर है। संक्रमण के मामले में फ्रांस चौथे स्थान पर है जहां कोरोना वायरस से अब तक 57.28 लाख से अधिक लोग प्रभावित हुए हैं जबकि 1.09 लाख से अधिक मरीजों की मौत हो चुकी है।कोरोना प्रभावितों के मामले में तुर्की रूस से आगे निकल गया है और यहां कोरोना वायरस से संक्रमितों की संख्या 52.49 लाख से ज्यादा हो गयी है और 47,527 मरीजों की मौत हो चुकी है। रूस में कोरोना संक्रमितों की संख्या 50.13 लाख से अधिक हो गई है और इसके संक्रमण से 1.19 लाख से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है। ब्रिटेन में कोरोना वायरस प्रभावितों की कुल संख्या 45.03 लाख से अधिक हो गयी है और 1.28 लाख से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है।

मृतकों के मामले में ब्रिटेन पांचवें स्थान पर है। इटली में कोरोना प्रभावितों की संख्या 42.17 लाख से अधिक हो गयी है और 1.26 लाख से अधिक लाेगों की जान जा चुकी है। कोरोना से प्रभावित होने के मामले में अर्जेंटीना ने जर्मनी को पीछे छोड़ दिया है। अर्जेंटीना में संक्रमितों की संख्या बढ़कर 37.81 लाख से अधिक हो गयी है तथा मृतकों की संख्या 78,093 है। जर्मनी में वायरस की चपेट में आने वालों की संख्या 36.89 लाख से अधिक हो गई है और 88,492 लोगों की मौत हो चुकी है। स्पेन में इस महामारी से 36.78 लाख से अधिक लोग प्रभावित हुए हैं और 79,953 लोगों की मौत हो चुकी है। कोलंबिया में कोरोना वायरस से 34.06 लाख से अधिक लोग प्रभावित हुए हैं और 88,774 लोगों ने जान गंवाई है। इस बीच ईरान ने पोलैंड को पीछे छोड़ते हुए आगे निकल गया है। 

ईरान में संक्रमितों की संख्या बढ़कर 29.13 लाख से ज्यादा हो गयी है तथा मृतकों का आंकड़ा 80,156 पहुंच गया है। पोलैंड में कोरोना से 28.72 लाख से अधिक लोग प्रभावित हुए हैं और इस महामारी से 73,745 लोग जान गंवा चुके हैं। मैक्सिको में कोरोना से 24.13 लाख से अधिक लोग संक्रमित हुए हैं और यह देश मृतकों के मामले विश्व में चौथे स्थान पर है। जहां अभी तक इस वायरस के संक्रमण से 2.23 लाख से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है। यूक्रेन में संक्रमितों की संख्या 22.60 लाख से अधिक है और 52,573 लोग अपनी जान गंवा बैठे हैं। पेरू में संक्रमितों की संख्या 19.55 लाख के पार पहुंच गयी है।जबकि 69,342 लोगों की जान जा चुकी है। इंडोनेशिया में भी कोरोना संक्रमण के मामले 18.21 लाख के पार पहुंच गये हैं जबकि 50,578 लोगों की मौत हो चुकी है। चेक गणराज्य को पीछे छोड़ते हुए नीदरलैंड उससे आगे निकल आया है। 

नीदरलैंड में कोरोना से अब तक 16.76 लाख से अधिक लोग संक्रमित हुए हैं और यहां इस महामारी से 17,897 लोगों की मौत हो चुकी है। दक्षिण अफ्रीका में कोरोना वायरस से 16.65 लाख से अधिक लोग प्रभावित हुये हैं और 56,506 लोगों की मौत हो चुकी है। चेक गणराज्य में कोरोना से अब तक 16.61 लाख से अधिक लोग प्रभावित हो चुके हैं और यहां इस महामारी से 30,108 लोग जान गंवा चुके हैं। पड़ोसी देश पाकिस्तान में अब तक कोरोना से 9.21 लाख से अधिक लोग संक्रमित हुए हैं और 20,779 मरीजों की मौत हो चुकी है। अन्य पड़ोसी देश बंगलादेश में भी कोरोना वायरस का प्रकोप जारी है। जहां आठ लाख से अधिक लोग संक्रमित हुए हैं और 12,619 मरीजों की मौत हो चुकी है। इसके अलावा दुनिया के अन्य देशों में भी कोरोना वायरस के संक्रमण से स्थिति खराब है।

शुक्रवार, 28 मई 2021

दूध में उबालकर पिए तुलसी, अधिक लाभ होगा

तुलसी की पत्तियों का सेवन करने से न सिर्फ इम्यूनिटी बढ़ती है बल्कि कई तरह के गंभीर रोगों से भी छुटकारा मिलता है। कोरोना महामारी के समय लोग तुलसी की पत्तियों से बना काढ़ा पीकर अपने इम्यून सिस्टम को स्ट्रॉन्ग बना रहे हैं। लेकिन क्या आपको पता है कि तुलसी की पत्तियों को दूध में उबालकर पीने से यह और अधिक लाभकारी हो जाता है और बहुत से रोगों से आपको दूर रखता है। आइए आपको बताते हैं कि तुलसी मिलक पीने से आप किन बीमारियों से बच सकते हैं और इसे बनाने का सही तरीका और पीने का सही समय क्या है।

कैसे करें तुलसी मिल्क का सेवन-तुलसी मिल्क बनाने के लिए आपको सबसे पहले डेढ़ गिलास दूध को उबालना है। दूध के उबलने पर इसमें 8 से 10 तुलसी की पत्तियां डालकर उसे और थोड़ी देर उबालना है। जब दूध लगभग एक गिलास रह जाए तब गैस बंद कर दें। दूध के हल्का गुनगुना होने पर इसका सेवन करें। याद रखें इस दूध का नियमित सेवन करने से ही आपकी इम्यूनिटी स्टॉग बनेगी और आप कई तरह के रोगों से दूर रहेंगे।
तुलसी मिल्क किन रोगों से लड़ने में करता है मदद

माइग्रेन से राहत-दूध में तुलसी के पत्ते उबालकर पीने से सिर दर्द या माइग्रेन जैसी बीमारियों में आराम मिलता है। अगर आप लंबे समय से इस समस्या से परेशान हैं हैं तो आप चाय की जगह रोजाना दूध में तुलसी के पत्ते डालकर पी सकते हैं।

तनाव व स्ट्रेस होता है दूर-तुलसी के पत्तों में न सिर्फ औषधीय गुण मौजूद होते हैं बल्कि इन पत्तियों में हीलिंग गुण भी शामिल होते हैं। यदि आप भी अपने ऑफिस के काम को लेकर टेंशन में हैं या फिर परिवार की कलह की वजह से डिप्रेशन जैसी समस्या से घिरे हुए हैं तो दूध में तुलसी की पत्तियों को उबालकर पिएं। ऐसा करने से डिप्रेशन की समस्या से उबरने में मदद मिलती है।

इम्यूनिटी बढ़ाने में मदद-कोरोना महामारी के दौर में हर व्यक्ति अपनी इम्यूनिटी को बढ़ाने की तरफ ध्यान दे रहा है। कोई भी रोग आपको तभी घेर सकता है जब आपकी इम्यूनिटी कमजोर होती है। ऐसे में तुलसी के पत्तों में मौजूद एंटीऑक्सीडेंट्स गुण शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में मदद करते हैं। इसके अलावा तुलसी में मौजूद एंटीबैक्टीरियल एवं एंटीवायरल गुण सर्दी, खांसी और जुकाम से भी दूर रखते हैं।

दिल का रखता है ख्याल-दूध में तुलसी के पत्तों को उबालकर पीने से दिल भी स्वस्थ रहता है। रोजाना खाली पेट तुलसी मिल्क पीने से ह्रदय रोगियों को काफी फायदा मिलता है।

अस्थमा में लाभ-अगर आप सांस संबंधी समस्याओं से परेशान हैं तो तुलसी मिल्क जरूर पिएं। बदलते मौसम से होनी वाली परेशानियों से यह घरेलू नुस्खा दूर रखता है।

मंगलवार, 25 मई 2021

इंसानों और जानवरों के नर नपुंसक, तो क्या होगा ?

कविता देवी               

भविष्य में पूरी दुनिया एक ऐसी समस्या से जूझेगी, जो किसी भी महामारी से ज्यादा बड़ी होगी। धरती पर मौजूद सभी जीवों की अगली पीढ़ी के लिए खतरा है। आप सोचिए कि कुछ सालों बाद इंसानों और अन्य जानवरों के नर नपुंसक हो जाएं तो क्या होगा ? एक नई स्टडी में इस बात का खुलासा हुआ कि इसके लिए सबसे बड़ी वजह जलवायु परिवर्तन और अत्यधिक तापमान है। इससे पहले पर्यावरण में शामिल अलग-अलग प्रकार के घातक रसायन भी जिम्मेदार हैं।

हमें पता है कि ज्यादा तापमान जब अत्यधिक की ओर बढ़ता है तो जानवरों की जान जाने लगती हैं। ये उसे बर्दाश्त नहीं कर पाते। नई रिसर्च में ये बात सामने आई है कि ज्यादा तापमान वाले पर्यावरण में नर जीव नपुंसक हो ही रहे हैं। इसके अलावा जिन जगहों पर तापमान को लेकर इतने बुरे हालात नहीं हैं, उन्हें भी नपुंसक होने का खतरा है। इसका मतलब ये है कि प्रजातियों का विभाजन प्रजनन के मामले में तापमान के चलते गड़बड़ हो जाए। शायद इंसान जलवायु परिवर्तन को कमतर आंक रहा है। यहीं पर गलती हो रही हैं इंसानों से…अगर इसे नहीं रोका गया तो ये किसी भी महामारी से ज्यादा भयानक स्थिति होगी। कुछ जीवों की प्रजातियां तो विलुप्त भी हो सकती हैं।

वैज्ञानिकों को कुछ सालों से ये बात पता है कि तापमान बढ़ता है तो जानवरों की प्रजनन क्षमता बिगड़ती हैं।उदाहरण के लिए अगर 2 डिग्री सेल्सियस तापमान बढ़ता है तो कोरल्स में स्पर्म बंडल्स और अंडों के आकार में कमी आ जाती है। इसके अलावा बीटल्स और मधुमक्खियों की कुछ प्रजातियों में प्रजनन दर की कमी देखी गई हैं। जितना तेजी से तापमान बढ़ता है, उतनी ही तेजी से मधुमक्खियों जैसे कीट-पतंगों की प्रजनन क्षमता में कमी आती है। ज्यादा तापमान का असर गाय, सूअर, मछली और पक्षियों की प्रजनन क्षमता पर भी असर डालता है। इसके भी उदाहरण वैज्ञानिकों के पास मौजूद है। हालांकि अभी तक वैज्ञानिक इस बात की जांच नहीं कर पाए हैं कि ज्यादा तापमान से जैव-विविधता पर किस स्तर का असर पड़ेगा। इसे लेकर कोई भविष्यवाणी फिलहाल नहीं की जा सकती।

शनिवार, 22 मई 2021

मिट्टी खाना आदत नहीं, बल्कि एक डिसऑर्डर है

बचपन में कई बच्चों को मिट्टी खाने की आदत होती है, लाख कोशिशों के बाद भी बच्चे जमीन से मिट्टी खोदकर या दिवारों से खुरचकर मिट्टी खाते है। लेकिन कुछ लोग बचपन की आदत समझकर इसे टाल देते हैं। लेकिन ऐसे परिजनों को ये समझना बहुत जरुर है कि बच्चे मिट्टी आदत की वजह से नहीं बल्कि एक डिसऑर्डर है। जिसे PICA के नाम से जाना जाता है। मिट्टी के अलावा अगर आपका बच्चा पेंट, प्‍लास्‍टर, चॉक, कॉर्नस्‍टार्च, साबुन या फिर ऐसी चीजें खाता तो तुरंत डॉक्‍टर से सलाह लेने की जरूरत है।
क्योंकि पीका डिसऑर्डर बच्‍चों में काफी आम समस्‍या है। लेकिन लोग इसपर ध्यान नहीं देता। एक स्‍टडी के मुताबिक 10 से 20 फीसदी बच्‍चे पीका डिसऑर्डर से कभी न कभी ग्रसित होते हैं। अमेरिकी वेबसाइट पिडियाट्रिकऑनकॉल.कॉम के मुताबिक बच्चों को डाटने की बजाय डॉक्‍टर से सलाह लेनी चाहिए।पीका डिसऑर्डर को लेकर डॉक्‍टरों का मानना है कि बच्‍चे में खून की कमी होने के कारण वो मिट्टी खाते है। इसलिए बच्चों को सिर्फ दूध ना दें। बच्चों की खुराक में अनाज, दाल या सब्जियों की कमी होने से भी यह दिक्कत देखी जाती है। वक्त रहते मिट्टी खाने की आदत है नहीं छुड़वाई गई तो इसकी वजह से वो ऑटिज्‍म नामक बीमारी से भी ग्रसित हो सकते हैं। अमेरिका के नेशनल सेंटर फॉर बायोटेक्‍नोलॉजी इनफॉर्मेशन की मानें तो पीका की वजह से बच्‍चों की रोजाना की गतिविधियों पर असर पड़ने लगता है।
  • ये बीमारी इसलिए पर नुकसानदायक है क्योंकि पीका का कोई इलाज नहीं है।
  • विशेषज्ञों की माने तो इस डिसऑर्डर के लिए आपको अपने न्‍यूट्रीशिनल से सलाह लीजिए।
  • बच्चों की खाने-पीने की आदतों में बदलाव करना चाहिए।
  • न्‍यूट्रीशिनल के साथ किसी मनोवैज्ञानिक से सलाह जरुर लें।

गुरुवार, 20 मई 2021

26 मई को वैशाख पूर्णिमा के दिन पहला चंद्र ग्रहण

नई दिल्ली। साल 2021 का पहला ग्रहण होगा चंद्र ग्रहण। जो 26 मई को लगने जा रहा है। ग्रहण वैशाख पूर्णिमा के दिन लगेगा। ये पूर्ण चंद्र ग्रहण होगा जो दुनिया भर के कई देशों में दिखाई देगा। भारत में चंद्र ग्रहण और सूर्य ग्रहण से पहले सूतक काल लग जाता है। सूतक के समय किसी भी तरह के शुभ कार्यों को करने की मनाही होती है। चंद्र ग्रहण का सूतक ग्रहण लगने से ठीक 9 घंटे पहले ही शुरू हो जाता है। भारत में उपच्छाया चंद्र ग्रहण दिखाई देगा।

कहां देगा दिखाई?

पूर्वी एशिया, प्रशांत महासागर, उत्तरी व दक्षिण अमेरिका के ज्यादातर हिस्सों और ऑस्ट्रेलिया से पूर्ण चंद्रग्रहण दिखाई देगा। भारत के अधिकांश हिस्सों में पूर्ण ग्रहण के दौरान चंद्रमा पूर्वी क्षितिज से नीचे होगा और इसलिए देश के लोग पूर्ण चंद्रग्रहण नहीं देख पाएंगे। लेकिन पूर्वी भारत के कुछ हिस्सों के लोग आंशिक चंद्र ग्रहण का आखिरी हिस्सा ही देख पाएंगे, वह भी पूर्वी आसमान से बहुत करीब, जब चंद्रमा निकल ही रहा होगा।

इस नक्षत्र और राशि पर पड़ेगा इसका प्रभाव:

चंद्र ग्रहण वृश्चिक राशि और अनुराधा नक्षत्र में लगने जा रहा है। इसलिए इस राशि और नक्षत्र के जातकों पर इसका सबसे अधिक प्रभाव पड़ेगा। आपके बनते हुए काम बिगड़ने के आसार रहेंगे। स्वास्थ्य को लेकर चिंता बनी रहेगी। वाद-विवाद का सामना करना पड़ेगा। वाणी में कटुता आने से करीबी संबंध बिगड़ेंगे।

चंद्र ग्रहण के बुरे प्रभाव से बचने के उपाय:

चंद्र ग्रहण के बुरे प्रभाव से बचने के लिए ग्रहण खत्म होने के बाद किसी पवित्र नदी या फिर स्नान करने वाले जल में गंगा जल डालकर स्नान कर स्वच्छ हो जाएं। स्नान के बाद जरूरतमंदों को यथा संभव खाद्य पदार्थों का दान कर देना चाहिए। इससे चंद्र ग्रहण का बुरा प्रभाव नहीं पड़ता है।

बुधवार, 19 मई 2021

झील के नीचे बसा है 160 घरों वाला भूतिया गांव

रोम। इटली में झील के नीचे से 160 घरों वाला गांव निकला है। झील का पानी कम होने पर ये गांव नजर आया। स्थानीय लोगों के मुताबिक ये गांव कभी-कभी नजर आता है, जिसके चलते इसे भूतिया गांव कहा जाता है।cbsnews.com की रिपोर्ट के मुताबिक इटली की झील से दशकों बाद बाहर निकले इस गांव का नाम कुरोन है।1950 में इस गांव में बिजली संयत्र की स्थापना की गई थी, उसी समय इस गांव में बाढ़ आ गई थी, जिसमें ये गांव पूरी तरह तबाह हो गया था। ऑस्ट्रिया और स्विटजरलैंड के साथ इटली की सीमा के पास बसी झील को अब एक जलाशय की मरम्मत के लिए अस्थायी रूप से निकाला जा रहा है। जैसे-जैसे जल स्तर घट रहा है, 160 घरों वाला गांव उभर रहा है।आमतौर पर 14वीं सदी की चर्च की मीनार पानी से बाहर निकल आई हैं।
 लेकिन जैसे-जैसे पानी कम हो रहा है, तो  झील के नीचे से इस गांव की गुफाएं और दीवारें दिखाई दे रही हैं। इटली की झील के डूबे इस गांव को लेकर “क्यूरॉन” नाम से एक वेब सीरीज भी बनी है, इसके अलावा इस गांव पर एक किताब लिखी गई है, जिसमें गांव की पूरी कहानी को बताया गया है।यहां की रहने वाली एक महिला ने ट्वीट करते हुए लिखा है कि पुराने घरों के मलबे पर चना एक “अजीब एहसास” था. उसने बताया कि ये क्षेत्र हाइकर्स के लिए काफी लोकप्रिय है, जिनके द्वारा गांव की भयानक तस्वीरों को शोसल मीडिया पर वायरल किया गया है। वहीं एक अन्य ट्विटर यूजर ने लिखा है कि वह "कुरोन नाम के गांव के अवशेष हैं, जो दशकों से डूबे हुए थे, इटली में LakeResia की निकासी करते हुए मिले हैं।

मंगलवार, 18 मई 2021

स्पर्म ही महिला को प्रेग्नेंसी के लिए देता हैं संकेत

मदन प्रजापति   

नई दिल्ली/सिडनी। किसी भी महिला के लिए गर्भवती होना कोई बहुत आसान प्रक्रिया नहीं होती है। इसमें एक साथ कई सारी चीजें घटित होती हैं। जाहिर सी बात है कि कोई भी महिला पुरुष के स्पर्म शुक्राणुओं के बिना प्रेग्नेंट नहीं हो सकती है। हालांकि नई स्टडी से पता चला है कि प्रेग्नेंसी में सीधी भूमिका के अलावा भी स्पर्म एक और बहुत अहम काम करता है। ये स्टडी ऑस्ट्रेलिया की एडिलेड यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने की है।

ये स्टडी नेचर रिसर्च जर्नल कम्युनिकेशंस बायोलॉजी में छपी है। स्टडी के मुताबिक, स्पर्म ही महिला को प्रेग्नेंसी के लिए मनाता है। स्पर्म महिलाओं को प्रजनन ऊतकों को एक ऐसा संकेत देता है जिससे प्रेग्नेंसी की संभावना बढ़ जाती है। स्टडी के मुख्य लेखक प्रोफेसर सारा रॉबर्टसन ने कहा, 'यह पहली ऐसी स्टडी है जो बताती है कि महिलाओं का इम्यून रिस्पॉन्स स्पर्म से मिले सिग्नल पर काम करता है और एग को फर्टिलाइज करने की अनुमति देता है, जिससे कि प्रेग्नेंसी होती है।
प्रोफेसर रॉबर्टसन ने कहा, 'स्पर्म को लेकर ये स्टडी हमारी वर्तमान समझ के उलट है जैसा कि अब तक हम इसकी क्षमता को समझते आए थे। इसमें सिर्फ जेनेटिक मेटेरियल नहीं होता है बल्कि ये महिला के शरीर को ये समझाने का भी काम करता है कि वो उसमें अपनी प्रजनन क्षमता का निवेश करे। 'स्पर्म में पाया जाने वाला प्रोटीन प्रेग्नेंसी के समय महिला की प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया (इम्यून) को नियंत्रित करता है ताकि उसका शरीर बाहरी भ्रूण को स्वीकार कर सके। हालांकि स्पर्म इस प्रतिक्रिया को प्रभावित करते हैं या नहीं, ये अब तक स्पष्ट नहीं हो पाया है।
शोधकर्ताओं की टीम ने ग्लोबल जीन को समझने के लिए चूहों के यूट्रस पर प्रयोग किया। इसके लिए उन्होंने पूरी तरह से ठीक और कुछ नसबंदी वाले स्पर्म का यूट्रस में मिलान किया। प्रयोग में पाया गया कि पूरी तरह से ठीक स्पर्म की वजह से महिला जीन में ज्यादा बदलाव आए, खासतौर से इम्यून रिस्पॉन्स के मामले में। स्टडी के अनुसार नसबंदी वाले पुरुषों की तुलना में बिना नसबंदी वाले पुरुषों के स्पर्म से महिलाओं को मजबूत इम्यून टॉलरेंस मिलता है। शोधकर्ताओं ने पाया कि महिलाओं की कोशिकाओं में स्पर्म के प्रभाव का सीधा असर पड़ता है।
नई स्टडी के नतीजों से पता चलता है कि स्पर्म की सेहत का भी प्रेग्नेंसी पर असर पड़ता है। ये ना सिर्फ प्रेग्नेंसी के लिए बल्कि बच्चे की सेहत के लिए भी जरुरी है। उम्र, डाइट, वजन, शराब और स्मोकिंग जैसी आदतों का स्पर्म क्वालिटी पर असर पड़ता है और इसकी वजह से प्रेग्नेंसी हेल्थ भी प्रभावित हो सकती है। प्रोफेसर रॉबर्टसन ने कहा, 'ऐसा माना जाता है कि स्पर्म केवल एग को फर्टिलाइज करते हैं लेकिन प्रेग्नेंसी के अलावा स्पर्म क्वालिटी का असर प्रेग्नेंसी के दौरान महिला और होने वाले बच्चे की सेहत पर भी पड़ता है।
प्रोफेसर रॉबर्टसन ने कहा, 'मिसकैरेज, प्रीक्लेम्पसिया और समय से पहले बच्चे को जन्म देना जैसी स्थितियां महिलाओं के इम्यून रिस्पॉन्स की वजह से होती हैं और इसमें पार्टनर के स्पर्म भी जिम्मेदार होते हैं।

शनिवार, 15 मई 2021

पूरा जीवन बिना पानी के आसानी से रहता है चूहा

दुनिया में एक ऐसा विचित्र जंतु भी है, जिसको अपने पूरे जीवन पानी की जरूरत नहीं होगी। उसे कंगारू रैट भी कहा जाता है। ये चूहे और कंगारू का मिला-जुला रूप होता है। छलांग लगाता है, तेजी से भागता है लेकिन बगैर पानी के आराम से रह सकता है। सभी पेड़-पौधों और जीव-जंतुओं की जिंदा रहने के लिए पानी की जरूरत होती है। क्या आप सोच सकते हैं कि कोई जंतु ऐसा भी होगा, जो जिंदगीभर बगैर पानी पिये रह सकता है लेकिन एक ऐसा विचित्र जंतु जरूर जो ऐसा कर सकता है। शायद वो दुनिया में इस तरह का अकेला जंतु होगा। ये विचित्र जंतु उत्तरी अमेरिका के रेगिस्तानों में मिलता है। इसे कंगारू रैट कहते हैं। इसकी टांगें और पूंछ आस्ट्रेलिया में पाए जाने वाले कंगारू से मिलती जुलती है। इसके गालों के बाहर की ओर थैलियों भी होती हैं। इन थैलियों में ये खाने का सामान लाता है। फिर इसे अपने बिलों में इकट्ठा करता है। इसकी इसी हरकत और शारीरिक थैली के कारण इसे कंगारू की तरह माना जाता है और इसका नाम कंगारू रैट रखा गया। ये कंगारू की तरह ही लंबी छलांगें लगाता है। रेगिस्तान में उगने वाले कैक्टस के पौधों को आसानी से कूदकर पार कर सकता है। 
कगारू रैट रेगिस्तानी जीवन का एक खास हिस्सा होता है। ये बेशक पानी नहीं पीता लेकिन इसके शरीर में पानी की मात्रा ज्यादा होने के कारण दूसरे जानवर इसे खा जाते हैं। ये बहुत तेजी से भाग सकता है। ये एक सेकेंड में 06 मीटर की दूरी पार कर लेता है। ये अपने दुश्मनों से बचने के लिए भागते समय खूब तेजी दिखाता है और लंबी पूंछ का इस्तेमाल लगाने और हवा में दिशा बदलने के लिए करता है। कंगारू रैट छलागें मारते हुए चलते हैं और इनकी छलांगे इतनी सही होती हैं कि बड़ी छलांग भी लगा लेते हैं। अब सवाल ये उठता है कि वो बगैर पानी पीये कैसे जिंदा रह लेता है। वैसे ये बात सही है कि रेगिस्तान में वही जीव जंतु और पेड़-पौधे बचे रहते हैं, जिन्हें कम पानी की जरूरत होती है।
इस चूहे को पानी की बहुत कम जरूरत होती है या नहीं होती है। ये अपनी पानी की जरूरत को रेगिस्तान में उगने वाले पेड़-पौधों की जड़ों को खाकर पूरी कर लेता है। पेड़-पौधों में की जड़ों में कुछ ना कुछ नमी जरूर होती है। इसका गुर्दा इतना मजबूत और अच्छा काम करने वाला होता है कि वो इस नमी से ही शरीर के पानी की जरूरत को पूरा कर लेता है। पानी की यही नमी उसको जिंदा रखने के लिए काफी होती है। इन्हीं जड़ों से वो अपने भोजन की जरूरत भी पूरी कर लेता है।

मंगल पर सूक्ष्म जीवन तो नहीं हो गया संक्रमित ?

कविता गर्ग   
मंगल ग्रह पर इंसानी बस्ती बसाने की तैयारी चल रही है। इसी बीच वहां सतह और उसके नीचे सूक्ष्मजीवन और उसके संकेतों की खोज जारी है। जब से मंगल ग्रह को इंसान ने धरती पर से ध्यान से देखना शुरु किया है तभी से वहां जीवन की संभावनाओं कई अटकलें लग रही हैं और 30 ज्यादा अभियानों के मंगल और उसके पास पहुंचने के बाद भी इसे खारिज नहीं किया जा सका है। लेकिन यह भी संभव है जीवन के संकेतों की तलाश में वहां सूक्ष्मजीवन पृथ्वी से पहुच कर संक्रमित कर चुका हो।
तेजी से बढ़ी संक्रमण की संभावना

पिछले कुछ सालों में मंगल अभियानों की संख्या में बहुत तेजी आई है। हाल ही में मंगल पर प्रोब, रोवर और ऑर्बिटर की संख्या बढ़ गई है। जहां यूएई और चीन के यान अब भी मंगल के चक्कर लगा रहे हैं। अमेरिका के नासा के बहुत से रोवर मंगल पर घूम रहे हैं। अब एक अनुवांशिकीविद का कहना है कि इस बात की संभावना है कि कुछ सूक्ष्मजीवी पृथ्वी से मंगल पर पहुंच गए होंगे।

हो सकती है बड़ी समस्या

अगर ऐसा वाकई हो गया है तो यह वैज्ञानिकों के लिए एक बहुत बड़ी समस्या हो सकता है। यह उन आंकड़ों में गड़बड़ी कर सकता है जो मंगल पर जीवन की तलाश के लिए जमा किए जा रहे हैं। इससे मंगल ग्रह पर जीवन या जीवन के संकेत खोजने के पर सवाल पैदा कर सकता है जो बहुत से अभियानों को प्रमुख उद्देश्य है।
आसानी से खारिज नहीं किए जा सकते ये सवाल

मंगल ग्रह पर इस तरह के गंभीर सवालों को खारिज करना आसान नहीं है। मिडिया के मुताबिक अमेरिका के कोर्नेल यूनिवर्सिटी में वेइल कॉर्नेल मेडिसिन में जैवभौतिकी, फिजियोलॉजी और जीनोमिक्स के प्रोफेसर क्रिस्टोफर मेसन का कहना है कि वैज्ञानिकों का दूसरे ग्रह पर जीवन की खोज करते समय यह सुनिश्चित करना होगा कि वह वाकई उसी ग्रह का जीवन है ना कि पृथ्वी में पले बढ़े संक्रमण के कारण जीवन।

मंगल यात्रियों के लिए भी हो सकती समस्या

इस संक्रमण से केवल शोध में ही समस्या होगी ऐसा नहीं है बल्कि मंगल पर जाने वाले अंतरिक्ष यात्रियों को भी समस्या हो सकती है। भविष्य में ये सूक्ष्मजीवी उनके स्वास्थ्य के साथ ही उनकी सहायता के लिए गए उपकरणओं के लिए भी समस्या बन सकते हैं। मेसन को संदेह है कि हो सकता है कि मंगल पर मानव डीएनए भी 1971 और उसके बाद पहुंच गया हो। 1971 में मंगल ग्रह पर सोवियत संघ के दो अन्वेषण यान मंगल की सतह पर उतरे थे।

यह तय करना जरूरी

मेसन का कहना है कि मंगल पर धूल की वैश्विक आंधी से इन यानों से डीएनए मंगल की सतह तक पहुंच गए हों। हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि जो जीवन हम पता लगा रहे हैं वह पृथ्वी से ही आया जीवन ना हो। ऐसा होने पर यह तय करना आसान नहीं होगा कि जो संकेत मिले हैं वे मंगल के मूल जीवन के ही संकेत हैं या नहीं।
नासा यह प्रयास करता है अभी वैसे तो नासा यह सुनिश्चित करता है कि उसके अंतरिक्ष यान, लैंडर, और रोवर पूरी तरह से विसंक्रमित हों। इसके लिए वह इन्हें खास तरह के कमरों में विकसित करता है जिससे किसी भी तरह का संक्रमण और अशुद्धता किसी नाजुक उपकरण में गड़बड़ी ना पैदा कर दे जिससे वहां से संकेत आने में किसी तरह की कोई समस्या हो। इसके लिए नासा ISO-5 जैसे कठोर प्रोटोकॉल का पालन करता है।

मेसन का दावा है कि यह असंभव है कि मंगल के अभियानों में जो भी यान आदि गए हैं वे सौ प्रतिशत ही सूक्ष्मजीवन से मुक्त हों। नासा के इन सफाई कमरों में भी सूक्ष्मजीवन के प्रमाण पाए गए हैं। वे विकिरण रोधी होने के साथ ठंडे वातावरण में भी पनप सकते हैं। ऐसे में मंगल पर एक मजबूत किस्म के सूक्ष्मजीव पहुंचे हों इससे इनकार नहीं किया जा सकता है।

शनिवार, 8 मई 2021

बदलते मौसम से सर्दी-खांसी और गले में खराश

मदन प्रजापति  
देश में कोरोना का कहर इस कदर बढ़ रहा है कि आजकल थोड़ी सी तबीयत खराब होने पर कोरोना का डर सताने लगता है। हल्की फुल्की खांसी को भी इंग्नोर करना आपको भारी पड़ सकता है। हल्की से तबीयत खराब होने पर कोविड टेस्ट जरुर करा लें। अगर खांसी होने लगे तो टेस्ट के साथ आरटीपीआर टेस्ट के अलावा सीटी स्कैन भी करवाएं। जब टेस्ट ठीक है तो बाकी उपचारों का सहारा लें। क्योंकि लगातार मौसम में बदलाव के कारण ‌‌लोगों‌‌ ‌‌को‌‌ ‌‌सर्दी‌,‌ ‌‌खांसी‌‌ ‌‌और‌‌ ‌‌गले‌‌ ‌‌में‌‌ ‌‌खराश‌‌ ‌‌की‌‌ ‌‌समस्या‌‌ ‌‌हो जाती है।
  • ‌‌कटे ‌‌हुए‌‌ ‌‌लहसुन‌‌ ‌‌की‌‌ ‌‌एक‌‌ ‌‌जड़‌‌ ‌‌भूनें‌‌ ‌‌और‌‌ ‌‌सोने‌‌ ‌‌से‌‌ ‌‌पहले‌‌ ‌‌इसे‌‌ ‌‌एक‌‌ ‌‌चम्मच‌‌ ‌‌शहद‌‌ ‌‌में‌‌ ‌‌मिलाकर‌‌ ‌‌खा‌‌ ‌‌लें।‌ ‌
  • शहद‌‌,‌‌ ‌‌काली मिर्च पाउडर और अदरक वाली गर्म चाय पीने से खांसी ठीक होती है। ‌
  • एक गिलास गर्म दूध में एक चौथाई छोटा चम्मच हल्दी पाउडर ‌‌मिलाएं‌‌ ‌‌और‌‌ ‌‌सोने‌‌ ‌‌से‌‌ ‌‌पहले‌‌ पिएं। ‌
  • गर्म पानी में नमक डालकर उसके गरारे करने से भी खांसी में आराम मिलता है
  • ‌नमक के पानी से गले की‌‌ ‌‌खुजली‌‌‌‌ ‌‌ठीक‌‌ होती है, ‌‌बलगम‌‌ बंद होता है, ‌‌सूजन‌‌ ‌‌और‌‌ ‌‌जलन‌‌ ‌‌को‌‌ ‌‌कम‌‌ ‌‌करने‌‌ ‌‌में‌‌ ‌‌भी‌‌ ‌‌मदद‌‌ ‌‌करता‌‌ ‌‌है।‌पुदीने‌‌ ‌‌की‌‌ ‌‌पत्तियों‌‌ ‌‌का सेवन करें। इनमें‌‌ ‌‌मेन्थॉल‌‌ ‌‌नामक‌‌ ‌‌एक‌‌ ‌‌यौगिक‌‌ ‌‌होता‌‌ ‌‌है‌,‌ ‌‌जो‌‌ ‌‌खांसी‌‌ ‌‌से‌‌ ‌‌ख़राब‌‌ ‌‌हो‌‌ ‌‌चुके‌‌ ‌‌गले‌‌ ‌‌में‌‌ ‌‌तंत्रिका‌‌ ‌‌अंत‌‌ ‌‌को‌‌ ‌‌सुन्न‌ कर‌‌ ‌‌सकता‌‌ ‌‌है।‌‌ ‌‌मेन्थॉल‌‌ ‌‌बलगम‌‌ ‌‌को‌‌ ‌‌तोड़ने‌‌ ‌‌और‌‌ ‌‌जमाव‌‌ ‌‌को‌‌ ‌‌कम‌‌ ‌‌करने‌‌ ‌‌में‌‌ मदद करता ‌‌है।‌‌ ‌खांसी‌‌ ‌‌दूर करने के लिए ‌‌दिन‌‌ ‌‌में‌‌ ‌2-3‌ ‌‌बार‌‌ ‌‌पुदीने ‌‌की‌‌ ‌‌चाय‌‌ ‌पिएं। ‌

बुधवार, 5 मई 2021

घरेलू उपाय खूबसूरती में लगा सकते है चार चांद

कविता गर्ग  
गर्मियों के मौसम में चेहरे का इंस्टेंट ग्लो कम होने लगता है। और इसका सबसे बड़ा कारण है ओपन पोर्स। चेहरे पर ओपन पोर्स की वजह से चेहरे पर पिम्पल्स और रिकल्स दिखने लगते हैं। लेकिन कुछ घरेलू उपाय से आप इनसे छुटकारा पा सकते है। गर्मियों में छाछ पीने के कई फायदे है। लेकिन ये बढ़े हुए रोमछिद्रों को बंद करने या छोटा दिखाने में मदद भी करता है।
  • एक कप में तीन चम्मच छाछ और एक चम्मच नमक लें।
  • इस मिश्रण को अच्छी तरह से मिलाएं और मुलायम ब्रश की मदद से इसे चेहरे पर दस से पंद्रह मिनट के लिए लगाएं।
  • इसके बाद ठंडे पानी से चेहरे को धो दें।
  • यह उपचार प्राकृतिक होने के साथ प्रभावशाली भी है।ओपन पोर्स को बंद करने के लिए ब्राउन शुगर का लेप भी बहुत असरदार है। ब्राउन शुगर का इस्तेमाल चेहरे पर स्क्रब की तरह करने से मृत त्वचा हटने लगती है, जिसके बाद बढ़े हुए रोमछिद्र कम होने लगते हैं।
  • इसके लिए दो चम्मच ब्राउन शुगर और एक चम्मच ऑलिव ऑयल को मिलाएं।
  • स्क्रब की तरह इस्तेमाल करते हुए चेहरे पर पांच मिनट तक मसाज करें।
  • इसके बाद ठंडे पानी से चेहरा धो दें।
  • पहले इस्तेमाल के बाद से ही फायदा नजर आने लगेगा।
  • गुलाब जल और खीरा
  • गुलाब जल और खीरे का जूस चेहरे को ठंडक देता है और ये एस्ट्रिंजेंट का काम करते हैं। गुलाब जल त्वचा का पीएच लेवल सामान्य रखता है। इसके अलावा इसमें एंटी बैक्टीरियल गुण मौजूद होते हैं। खीरे के साथ गुलाब जल का मिश्रण रोमछिद्रों को प्रभावशाली तरीके से छोटा करता है।
    • गुलाब जल और खीरे के जूस को मिलाकर चेहरे पर लगाएं।
    • 15 मिनट बाद ठंडे पानी से धो लें।
    • त्वचा चमक उठेगी।

    चंदन और हल्दी

    चंदन भी चेहरे को चमकदार, मुलायम और कोमल बनाने में उपयोगी है। इसकी तासीर ठंडी होती है। लिहाजा, रोमछिद्रों को छोटा करने में यह कारगार साबित होता है। इसमें हल्दी पाउडर मिलाने के बाद यह एक अच्छा एंटी-बैक्टीरियल मिश्रण बन जाता है।
  • चंदन पाउडर में हल्दी पाउडर और गुलाब जल डालें और अच्छी तरह से मिलाएं।
  • अब इस पेस्ट का इस्तेमाल फेसपैक के रूप में करें।
  • जब फेसपैक अच्छी तरह से सूख जाए तो चेहरे को ठंडे पानी से धो लें।
  • प्रभावी परिणाम के लिए सप्ताह में तीन दिन इस पेस्ट का इस्तेमाल करें।

बेकिंग सोडा

बेकिंग सोडा रोमछिद्र में फंसी गंदगी और मृत त्वचा को निकालने में काफी असरदार है।

  • एक बाउल में बेकिंग सोडा और एक छोटा चम्मच पानी डालकर पेस्ट तैयार करें।
  • इस पेस्ट को चेहरे पर फेसपैक की तरह लगाएं।
  • पेस्ट को पंद्र्रह से बीस मिनट के लिए छोड़ दें।
  • इसके बाद ठंडे पानी से चेहरे धो लें।
  • थोड़े दिनों बाद आप खुद फर्क महसूस करने लगेंगी।

शुक्रवार, 30 अप्रैल 2021

फिटकरी के पानी से 'वायरस' को रख सकते हैं दूर

संदीप मिश्र/ हरिओम उपाध्याय                       

कोरोना महामारी से बचने के लिए लोग तरह-तरह के घरेलू नुस्खे आजमा रहे हैं। लेकिन परेशानी की बात यह है कि इनमें ज्यादा चीजें या तो महंगी हैं या फिर इन्हें लेकर चलना मुमकिन नहीं है। लेकिन, अगर आपको हाथ धोने के लिए कुछ नहीं मिल रहा हो तो फिटकरी आपके काम आ सकती है। इस देसी नुस्खे से आप बड़ी आसानी से बैक्टिरिया और वायरस को दूर रख सकते हैं। आयुर्वेदाचार्य डॉ. वीपी सिंह का कहना है कि यदि घर या बाहर साबुन या सेनेटाइजर न मिले तो फिटकरी का टुकड़ा इस्तेमाल किया जा सकता है। 

बता दें कि फिटकरी में एल्मुनियम सल्फेट होता है। जो पानी को बिलकुल स्वच्छ कर देता है। अगर पानी में एक टुकड़ा फिटकरी डालकर उससे हाथ धोते हैं तो बीमारियों से बचने में सहूलियत होगी। कुल मिलाकर फिटकरी घुले पानी से हाथ धोना सादे पाने से कहीं ज्यादा प्रभावी है।

मंगलवार, 16 मार्च 2021

कीमोथैरेपी को मात दे सकता है कैंसर, धोखा

वाशिंगटन डीसी। कैंसर भी कीमोथैरेपी से बच सकता है। उसे धोखा देकर वापस आ सकता है। एकदम कोरोना वायरस की तरह, जैसे कोरोना वायरस के नए वैरिएंट वैक्सीन और शरीर की प्रतिरोधक क्षमता को धोखा दे सकते हैं। ठीक उसी तरह कैंसर की कोशिकाएं कुछ समय के लिए सक्रिय शीतनिद्रा यानी एक्टिव हाइबरनेशन में चली जाती है। या यूं कह लें कि निष्क्रिय हो जाती हैं. इन पर कीमोथैरेपी का असर नहीं होता. बाद में अनुकूल माहौल मिलते ही वापस अपना दुष्प्रभाव दिखाने लगती हैं.न्यूयॉर्क स्थित संस्था के साइंटिस्ट्स ने एक स्टडी में यह खुलासा किया है।वैज्ञानिकों का मानना है कि कैंसर की कुछ कोशिकाएं खुद को बुढ़ापे की ओर ले जाती हैं, उसके बाद उन्हें एक्टिव हाइबरनेशन में डाल देती हैं। ताकि उनके ऊपर की जा रही तीव्र कीमोथैरेपी प्रक्रिया का असर कम हो।
इस स्टडी के होने के बाद अब कैंसर के लिए नई दवाओं और वैक्सीन की खोज शुरु हो सकती है। वैज्ञानिकों का मानना है कि अब ऐसी दवाएं बनानी होंगी जो कैंसर की कोशिकाओं को हाइबरनेशन में जाने से रोकें और उन्हें तत्काल खत्म कर दें। इसके अलावा उनपर कीमोथैरेपी का भी असर हो।

शनिवार, 6 मार्च 2021

धरती पर हो जाएंगी ऑक्सीजन की भारी कमी

भविष्य में धरती से ऑक्सीजन की मात्रा काफी कम हो जाएगी। इसकी वजह से पृथ्वी पर मौजूद कई जीव खत्म हो जाएंगे। ये खुलासा किया है, कि जापान और अमेरिका के वैज्ञानिकों ने साइंटिस्ट्स के मुताबिक धरती पर 100 करोड़ साल बाद ऑक्सीजन का स्तर काफी कम हो जाएगा। जिसकी वजह से जटिल एयरोबिक जीव और फोटोसिंथेटिक जीवों की जिंदगी पर संकट आ जाएगा। इनके खत्म होने की आशंका बहुत ज्यादा हो जाएगी। धरती के वायुमंडल में ऑक्सीजन का हिस्सा करीब 21 फीसदी है। इंसान जैसे जटिल संरचना वाले जीवों के लिए ऑक्सीजन की मौजूदगी अत्यधिक जरूरी है। लेकिन धरती की शुरूआत में ऑक्सीजन का स्तर काफी कम था। यही हाल भविष्य में 100 करोड़ साल बाद फिर होगा।
इससे वो भविष्य में धरती पर होने वाले वायुमंडलीय बदलाव की गणना कर रहे हैं। दोनों वैज्ञानिकों के मुताबिक अगले 100 करोड़ साल तक धरती का ऑक्सीजन स्तर इसी तरह से बना रहेगा, जैसा अभी है।लेकिन इसके ठीक बाद ऑक्सीजन के स्तर में भयावह कमी आएगी।
वायुमंडल में ऑक्सीजन की मौजूदगी स्थाई उपलब्धि नहीं रहेगी। इसके पीछे बड़ा कारण बताया गया है सूरज की उम्र का ढलना। जैसे-जैसे सूरज की उम्र ढलती जाएगी, वह और गर्म होता जाएगा।

रविवार, 28 फ़रवरी 2021

भारत के 5 सबसे अमीर भिखारी, जाने संपत्ति-बैलेंस

भारत के टॉप भिखारी: ये 5 है सबसे अमीर भिखारी, है बहुत सारी संपत्तियां और बड़ा बैंक बैलेंस, आइए जाने
रोशन कुमार   
नई दिल्ली। दुनिया में हर आदमी अपना और परिवार का पेट भरने के लिए कोई ना कोई काम या नौकरी करता है। और उससे पैसे कमाता है। अगर आप से पूछा जाए कि आप एक साल में कितना कमाते हैं और कितना बचाते हैं। तो आपका जवाब होगा कि यह इस बात पर निर्भर करता है। कि आप दुनिया में कहां रहते हैं। और आपकी जीवनशैली कैसी है। लेकिन अगर हम बताएं कि कुछ भिखारी आपसे ज्यादा पैसे कमाते हैं। तो आप यह सुनकर हैरान हो जाएंगे। लेकिन यह बिल्कुल सच है। उत्तर प्रदेश सरकार ने एक आईपीएस समेत 27 अपर पुलिस अधीक्षक बदल दिए है। यूपी सरकार प्रदेश में कानून व्यवस्था सुद्रण करने के उद्देश्य से यह ट्रांसफर किया है। प्रदेश सरकार आईपीएस आदित्य लंगहे को वाराणसी में तैनात किया गया है।

गुरुवार, 25 फ़रवरी 2021

जहर: मिनटों में तय करता है मौत का सफरनामा

साँप या सर्प, पृष्ठवंशी सरीसृप वर्ग का प्राणी है। यह जल तथा थल दोनों जगह पाया जाता है। इसका शरीर लम्बी रस्सी के समान होता है। जो पूरा का पूरा स्केल्स से ढँका रहता है। साँप के पैर नहीं होते हैं। यह निचले भाग में उपस्थित घड़ारियों की सहायता से चलता फिरता है। इसकी आँखों में पलकें नहीं होती, ये हमेशा खुली रहती हैं। साँप विषैले तथा विषहीन दोनों प्रकार के होते हैं। इसके ऊपरी और निचले जबड़े की हड्डियाँ इस प्रकार की सन्धि बनाती है। जिसके कारण इसका मुँह बड़े आकार में खुलता है। हम आपको विश्व के 4 ऐसे सांपो के बारे में बताएंगे जिनका जहर लोगों की मिनटों में मौत तय कर सकता है तो चलिए शुरू करते हैं।

1- सॉ स्केल्ड वाईपर

यह सांप वैसे तो पूरे संसार में पाए जाते हैं और इनकी ज्यादातर प्रजातियां जहरीली होती है। लेकिन इनकी सबसे जहरीली प्रजाति स्केल्ड वाईपर और चैन वाइपर है। जो कि भारत चीन और साउथ ईस्ट एशिया में पाई जाती है। छोटे आकार का होता है यही सांप भारत में सांपों के काटने से होने वाली सबसे ज्यादा मौतों के लिए जिम्मेदार है।

2- ईस्टर्न ब्राउन स्नेक

ऑस्ट्रेलिया में पाया जाने वाला यह सब बहुत ही जहरीला होता है। इसका अंदाजा आप इसी बात से लगा सकते हैं कि जहर का 14000 वा हिस्सा भी किसी इंसान को खत्म करने के लिए काफी है इसे खराब बात यह है कि ऑस्ट्रेलिया में इंसानी इलाकों के पास ज्यादा पाया जाता है और ऑस्ट्रेलिया में सांपों के काटने से होने वाली सबसे ज्यादा मौतों के लिए यही सांप जिम्मेदार है।

3- बेंडिड सी क्रेट

पानी वाले सांप जहरीले नहीं होते यह आपकी गलतफहमी है। दुनिया का सबसे जहरीला सांप पानी में ही रहता है। यह सांप साउथ ईस्ट एशिया और नॉर्दन ऑस्ट्रेलिया के समुद्रों में पाया जाता है।यह सांप संसार का सबसे जहरीला सांप है। इस सांप के जहर की कुछ मिलीग्राम बूंदे 1000 व्यस्त इंसानों की मौत के लिए काफी है। समुद्र में पाए जाने के कारण इंसानों के लिए इतना खतरनाक नहीं है। मछुआरे मछली पकड़ते वक्त कभी कबार इसका शिकार होते हैं। इंसानों को काटने से उसकी मिनटों में ही मौत हो जाती है। 

4- इंग्लैंड ताइपन

इनलैंड ताइपन जिसे वेस्टर्न ताइपन भी कहा जाता है। यह दुनिया के सबसे जहरीले सांपों में से एक है। यह सांप इतना जहरीला होता है कि इसके एक बार डसने से जितना जहर निकलता है। उसे 100 वयस्क लोगों की मौत हो सकती है। इसके काटने से 30 से 45 मिनट के अंदर मौत हो जाती है। अगर इलाज नहीं हुआ तो यह सांप वैसे तो काफी शांत और शर्मीले होते हैं और छेड़खानी होने पर ही काटते हैं और यह काफी फुर्तीले होते हैं। आपको यह जानकर हैरानी होगी कि ऐसा सांप का जहर किंग कोबरा से 50 गुना ताकतवर है।

दोनों देशों से अपने राजदूतों को वापस बुलाया

वाशिंगटन डीसी/ पेरिस। अमेरिका के सबसे पुराने सहयोगी फ्रांस ने परमाणु पनडुब्बी सौदा रद्द करने पर अप्रत्याशित रूप से गुस्सा दिखाते हुए अमेरिका...