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सोमवार, 23 मई 2022

कबूतर का शिकार करते नजर आईं, मछली

कबूतर का शिकार करते नजर आईं, मछली

सरस्वती उपाध्याय      
शेर, बाघ, चीता और तेंदुआ आदि तो धरती के सबसे खतरनाक शिकारी जानवर हैं ही, वहीं मगरमच्छ और घड़ियाल आदि पानी में रहने वाले खतरनाक शिकारी जानवर हैं। इसके अलावा कुछ मछलियां भी बड़ी ही खतरनाक शिकारी होती हैं। इनमें शार्क का नाम सबसे ऊपर आता है। आमतौर पर तो शार्क समुद्र में रहने वाली छोटी मछलियों और अन्य जीवों का ही शिकार करती हैं, जबकि कभी-कभी ये इंसानों का भी शिकार कर लेती हैं। लेकिन, आजकल एक छोटी शिकारी मछली ने सबको हैरान किया हुआ है‌। दरअसल, सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हो रहा है। जिसमें एक मछली कबूतर का शिकार करते नजर आती है। इस वीडियो ने सबको हैरान किया हुआ है।
क्योंकि शायद ही आपने पहले कभी किसी मछली को कबूतर का शिकार करते देखा होगा। एक कबूतर कहीं से उड़ते हुए आता है और चलते-चलते तालाब के किनारे चला जाता है। तभी पानी के अंदर घात लगाकर बैठी हुई एक मछली झट से उसका शिकार कर लेती है और उसे लेकर पानी के अंदर चली जाती है। वैसे आमतौर पर तो बड़ी मछलियां छोटी मछलियों या अन्य छोटे जीवों का शिकार करके ही अपना पेट भरती हैं, लेकिन यहां तो मछली कबूतर का शिकार करते नजर आईं है। अब ऐसा नजारा देख कर इंसान हैरान नहीं होगा तो और क्या होगा ?

शनिवार, 14 मई 2022

बालों के लिए फायदेमंद है 'चावल का पानी'

बालों के लिए फायदेमंद है 'चावल का पानी' 

सरस्वती उपाध्याय    

चावल का पानी कार्बोहाइड्रेट से भरपूर होता है। साथ ही कई तरह के विटामिन्स, एंटीऑक्सिडेंट्स और खनिजों से समृद्ध है। इस कारण इसे स्किन और बालों के लिए काफी फायदेमंद माना जाता है।सौंदर्य विशेषज्ञों की मानें तो चावल का पानी (Rice Water) न सिर्फ आपके बालों को रेशमी, चमकदार और मुलायम बनाता है, बल्कि ये आपकी बालों की ग्रोथ को भी बेहतर करता है। कई सेलिब्रिटीज और मॉडल चावल के पानी को ब्यूटी सीक्रेट के तौर पर इस्तेमाल करते हैं। यहां जानिए चावल के पानी के तमाम फायदे और इसको इस्तेमाल करने के तरीके...

बालों को मजबूत बनाए...

अगर आपके बाल ज्यादा झड़ रहे हैं तो आपको एक बार चावल का पानी जरूर इस्तेमाल करना चाहिए। चावल के पानी में मौजूद अमिनो एसिड आपके बालों को झड़ने से रोकता है और बालों को मजबूत बनाता है। इससे बालों की ग्रोथ भी बेहतर होती है।

डैंड्रफ से छुटकारा...

अगर आप डैंड्रफ की समस्या से परेशान हैं, तो भी चावल का पानी आपके लिए मददगार हो सकता है। इसे लगाने से डैंड्रफ की समस्या दूर होती है। साथ ही सिर में होने वाली खुजली, जलन आदि परेशानियों में भी आराम मिलता है।

बालों में शाइन लाता...

अगर आपके बाल अपनी चमक खो चुके हैं और देखने में बिल्कुल बेजान हो चुके हैं, तो आपको एक बार चावल के पानी को जरूर इस्तेमाल करना चाहिए। इसे लगाने से बाल चमकदार होने के साथ काफी मुलायम भी होते हैं। चावल के पानी को लगातार इस्तेमाल करने पर चार हफ्तों में आपको इसे रिजल्ट्स दिखने शुरू हो जाएंगे।

ऐसे तैयार करें चावल का पानी...

1 कप चावल को 2 कप पानी में भिगो दें और करीब एक घंटे बाद इसे गैस पर उबलने के लिए रख दें। जब चावल के पानी में चिपचिपाहट आने लगे, तो इस पानी को छान लें। इस पानी को ठंडा करने के बाद बालों में अच्छी तरह से लगाएं और करीब एक घंटे लगा रहने दें, थोड़ा पानी बचा लें। एक घंटे बाद माइल्ड शेंपू से बालों को धो ले। इसके बाद बचे हुए चावल के पानी को कंडीशनर की तरह इस्तेमाल करें। हफ्ते में दो से तीन दिन ऐसा करने से काफी अच्छे रिजल्ट्स मिलते हैं। अच्छे रिजल्ट के लिए आप चावल के पानी में गुलाबजल मिला सकती हैं।

शुक्रवार, 13 मई 2022

'जलवायु परिवर्तन' के खिलाफ वैश्विक लड़ाई जारी

'जलवायु परिवर्तन' के खिलाफ वैश्विक लड़ाई जारी 

श्रीराम श्रेष्ठ उपाध्याय           
जलवायु परिवर्तन के खिलाफ वैश्विक लड़ाई जारी है और इस लड़ाई में हमारा सबसे बड़ा हथियार जानकारी है। जानकारी का सबसे बड़ा स्रोत मीडिया और पत्रकार बंधु हैं। इसी एहम कड़ी के महत्व को ध्यान में रखते हुए, एक उत्साहवर्धक पहल के रूप में, जलवायु परिवर्तन जैसे जटिल और तथाकथित उदासीन मुद्दे पर पत्रकारों की क्षमता संवर्धन के उद्देश्य से वैश्विक स्तर के कुछ विशेषज्ञों ने, पत्रकारों के लिये एक दिग्‍दर्शिका (गाइड) प्रकाशित की है। इसमें पर्यावरण की रिपोर्टिंग करने वाले संवाददाताओं के लिये इस बात का मार्गदर्शन प्रदान किया गया है कि वे कैसे जलवायु परिवर्तन और ताप लहर, तूफान तथा बाढ़ जैसी चरम मौसमी स्थितियों के बीच सम्‍बन्‍ध।
जोड़ने के लिये कौन-कौन से तर्क दे सकते हैं।
ऑक्सफोर्ड यूनीवर्सिटी, इम्‍पीरियल कॉलेज लंदन के शोधकर्ताओं द्वारा तैयार की गयी और जलवायु वैज्ञानिकों के अंतर्राष्‍ट्रीय समूह वर्ल्‍ड वेदर एट्रिब्‍यूशन द्वारा प्रकाशित इस गाइड में यह स्‍पष्‍ट किया गया है कि किस तरह से एट्रिब्‍यूशन साइंस के जरिये चरम मौसमी घटनाओं को जलवायु परिवर्तन से जोड़ना सम्‍भव होता है और कैसे व कहां कुछ घटनाओं को हमेशा मानव की गतिविधियों के कारण उत्‍पन्‍न वार्मिंग से जोड़कर नहीं देखा जा सकता।
हाल के समय तक, वैज्ञानिक एकल घटनाओं को जलवायु परिवर्तन से जोड़कर देखने से परहेज करते थे। इसके बजाय वे इसी बात तक सीमित रहते थे कि कोई घटना इस तरह की चीजों को जाहिर कर सकती है और अगर प्रदूषणकारी तत्‍वों का उत्‍सर्जन और वार्मिंग इसी तरह जारी रही तो आशंका है
कि भविष्‍य में ऐसी और घटनाएं हो सकती हैं।
मगर वैज्ञानिकों ने ऐसी पद्धतियां विकसित की हैं, जिनसे संवाददाताओं को जलवायु परिवर्तन और किसी एकल चरम मौसमी घटना के बीच सम्‍बन्‍ध जोड़ने का मौका मिलता है। साथ ही यह गणना करने का अवसर भी मिलता है कि कोई घटना ग्‍लोबल वार्मिंग के कारण कितनी कम या ज्‍यादा सम्‍भावित है और कितनी ज्‍यादा या कम तीव्रता वाली है। इन एट्रिब्‍यूशन अध्‍ययनों की मदद से
वैज्ञानिकों को ऐसे बयान देने में मदद मिलती है, जैसे- ‘‘यह ताप लहर (हीटवेव) तीन डिग्री सेल्सियस अधिक गर्म थी। अगर ग्‍लोबल वार्मिंग नहीं होती तो यह दुनिया इतनी गर्म नहीं होती’’, या यहां तक कि जलवायु परिवर्तन के बिना कोई घटना प्रभावी रूप से संभव नहीं होती।
यहां तक कि विशिष्‍ट एट्रिब्‍यूशन अध्‍ययन की गैर-मौजूदगी में भी पत्रकार अक्‍सर जलवायु परिवर्तन और मौसमी घटनाओं के बीच सम्‍बन्‍ध स्‍थापित कर सकते हैं। यह गाइड ऐसी हिदायतें तय करती है कि पत्रकार हीटवेव, बाढ़, चक्रवात, हिमपात, सूखा और वनों की आग के मामले में क्‍या–क्‍या कह सकते हैं।
इस दिग्‍दर्शिका में कहा गया ‘‘जलवायु परिवर्तन किसी एक घटना का कारण नहीं बन सकता, क्‍योंकि सभी मौसमी घटनाओं के कई कारण हो सकते हैं, मगर जलवायु परिवर्तन इस बात को प्रभावित करता है कि वह किसी घटना को किस हद तक सम्‍भावित और कितनी तीव्रता से प्रभावित कर सकता है।’’
इस गा‍इड के निष्‍कर्षों में यह भी शामिल है कि हर हीटवेव का सम्‍बन्‍ध अब जलवायु परिवर्तन से जोड़ा जा सकता है और भारी वर्षा तथा दुनिया के कुछ हिस्‍सों में सूखा पड़ने की घटनाएं ग्रीनहाउस गैसों के उत्‍सर्जन के कारण अधिक सामान्‍य और ज्‍यादा तीव्र हो गयी हैं। कुछ अन्‍य प्रकार की चरम मौसमी स्थितियों के साथ कुछ अन्‍य महत्‍वपूर्ण कारक भी हैं, जिनके बारे में
पत्रकारों को जलवायु परिवर्तन से सम्‍बन्‍ध जोड़ते वक्‍त ख्‍याल रखना चाहिये।

कभी भी जमीन पर पैर नहीं रखता हैं 'हरियल'

कभी भी जमीन पर पैर नहीं रखता हैं 'हरियल'   

सरस्वती उपाध्याय            

दुनियाभर में कई ऐसे जीव-जन्तु हैं, जिनकी अपनी खास विशेषताएं हैं। आज हम आपको एक ऐसे रहस्यमयी पक्षी के बारे में बताएंगे। जिसके बारे में कहते हैं कि वह अपने पूरे जीवन में कभी भी जमीन पर पैर नहीं रखता है। यह सुनकर आपको हैरानी हो रही होगी, लेकिन बात बिल्कुल सच है। अब आप सोच रहे होंगे कि क्या यह पक्षी कभी धरती पर उतरता ही नहीं है ? तो इसका जवाब है... हां, यह पक्षी धरती पर उतरता है, लेकिन अपने पैरों में लकड़ी का टुकड़ा लेकर।

भारत में पाया जाता है हरियल...

माना जाता है कि यह पक्षी उसी लकड़ी के टुकड़े पर बैठता है। सबसे खास बात है कि यह पक्षी भारत में बहुतायत में पाया जाता है। आपको जानकर आश्चर्य होगा कि यह पक्षी भारत के महाराष्ट्र राज्य का राजकीय पक्षी है‌। इस पक्षी का नाम हरियल है। 29 सेंटीमीटर से लेकर 33 सेंटीमीटर तक के आकार वाले इस पक्षी का वजन सिर्फ 225 ग्राम होता है। सबसे खास बात यह है कि हरियल एक सामाजिक प्राणी है, जो हमेशा झुंड में रहना पसंद करता है। हरियल के पंखों का फैलाव 17 से 19 सेंटीमीटर होता है‌। हल्के पीला और हरे रंग का हरियल ओलिव के फल से बिल्कुल मिलता-जुलता है। हरियल के सिर के ऊपर हल्के नीले-भूरे रंग के बाल उगते हैं‌। हरियल को ऊंचाई वाले पेड़ पसंद हैं‌। यह ज्यादातर जंगलों में ही रहता है. हरियल पीपल और बरगद के पेड़ों पर अपना घोंसला बनाना पसंद करते हैं और भोजन की तलाश में शहरों के पार्क में भी देखे जाते हैं।

सोमवार, 18 अप्रैल 2022

सबसे पुराना घड़ा, 2 हजार लीटर पानी का रिकॉर्ड

सबसे पुराना घड़ा, 2 हजार लीटर पानी का रिकॉर्ड   

संदीप मिश्र        

कन्नौज। क्या मिट्टी का घड़ा भी किसी टैंक के बराबर हो सकता है ? सुनकर हैरान न हों, यह सच है। दुनिया का सबसे बड़ा और पुराना घड़ा कन्नौज में रखा है। 'खुशबू' के लिए विख्यात इत्रनगरी के म्यूजियम में संरक्षित इस घड़े में दो हजार लीटर पानी आ सकता है। करीब दो हजार वर्ष पूर्व कुषाण वंश का यह घड़ा 40 साल पहले शहर के शेखपुरा मोहल्ले में खुदाई के दौरान मिला था। सम्राट हर्षवर्धन और राजा जयचंद का साम्राज्य रहे इस जिले का इतिहास काफी गौरवशाली रहा है। यहां समय-समय पर हुई खुदाई के दौरान कई ऐसी नायाब चीजें निकली हैं। पहली से तीसरी सदी के बीच के कुषाण वंश के दौरान का सबसे बड़ा यह घड़ा उनमें से ही एक है। नव निर्मित म्यूजियम में कांच के घेरे में सहेजे गए इस प्राचीन धरोहर घड़े को देख लोग दांतों तले उंगली दबा लेते हैं।

करीब दो हजार साल पहले कनिष्क के शासन के समय छोटे-बड़े 40 से ज्यादा बर्तन ही नहीं उसके पहले और बाद के गुप्त काल के दौर में इस्तेमाल होने वाले मिट्टी के बर्तन भी यहां खुदाई के दौरान मिले हैं। यहां कुषाण वंश से भी पहले यानी 1500 ईसा पूर्व के बर्तनों के अवशेष मिले हैं। पुरातात्विक खोजों से पता चलता है कि कन्नौज में पेंटेड ग्रे वेयर और नॉर्दर्न ब्लैक पॉलिश्ड वेयर कल्चर था। जिससे जाहिर है, यहां 3500 साल पूर्व भी मानव सभ्यता मौजूद थी। इतिहास के जानकार एवं राजकीय म्यूजियम के अध्यक्ष दीपक कुमार बताते हैं कि अब तक कहीं भी इससे बड़े और पुराने घड़े होने का सुबूत नहीं मिलता है। काफी शोध के बाद ही इसकी उम्र का आंकलन हो सका था। यह करीब दो हजार साल पहले कुषाण वंश के दौरान 78 ई. से 230 ई. के बीच का है। तब गंगा शहर के करीब गुजरती थीं। तब इसी तरह के घड़ों में पानी सहेजने की परंपरा थी।
कन्नौज में पिछले पांच दशक से भी ज्यादा समय से पुरातत्व विभाग की खुदाई में कई नायाब चीजें सामने आई हैं। फिर चाहे टेराकोटा की मूर्तियां हों या एक हजार वर्ष से भी ज्यादा पुरानी मुद्राएं। भगवान शिव की कई अलग-अलग मुद्राओं की प्राचीन मूर्तियां भी यहां से निकलती रही हैं। यहां अलग-अलग सदी के शिलालेख, मूर्तियां, सिक्के, बर्तन, पत्थर भी निकलते रहे हैं। हिन्दु, जैन और बौद्ध धर्म से जुड़ी कई विरासत यहां सहेज कर रखी गई हैं। सभी की उम्र का आकलन कार्बन डेटिंग और थर्मोल्यूमिनिसेंस विधि से किया जा चुका है।

शनिवार, 26 फ़रवरी 2022

डैमेज बालों को ठीक करने में मददगार नुस्खे, जानिए

डैमेज बालों को ठीक करने में मददगार नुस्खे, जानिए   

सरस्वती उपाध्याय        

बालों को स्टाइलिश लुक देने के लिए हीटिंग टूल्स का इस्तेमाल आजकल एक आम बात हो गई है। इन टूल्स की मदद से बालों को स्टाइलिश बनाने के अलावा उनमें शाइन भी लाई जा सकती है। लेकिन अगर इन्हें लगातार इस्तेमाल में लिया जाए, तो एक्सपर्ट्स के मुताबिक बाल एक समय पर डैमेज हो जाते हैं। इन डैमेज बालों को रिपेयर करना काफी मुश्किल हो जाता है। कहा जाता है कि इसके लिए इन हीटिंग टूल्स के बजाय घरेलू तरीकों से बालों को स्ट्रेट और स्टाइलिश लुक देना बेस्ट रहता है।वैसे इनसे डैमेज हुए बालों को रिपेयर किया जा सकता है, बशर्ते उसके लिए सही हेयर केयर रूटीन का फॉलो किया जाना बहुत जरूरी है। घरेलू नुस्खों की खासियत है कि इनके कोई साइड इफेक्ट नहीं है और इन्हें अपनाना भी काफी आसान होता है। हम आपको कुछ ऐसे घरेलू नुस्खे बताने जा रहे हैं। जो आपके लिए बहुत कारगर साबित हो सकते हैं।

जानिए, घरेलू नुस्खे... 

एवोकाडो: जरूरी फैटी एसिड और विटामिन से भरपूर ऐवोकाडो को हेयर केयर में बेस्ट माना जाता है। इसे जुड़ी होम रेमेडी अपनाकर डैमेज बालों को रिपेयर करके उन्हें फिर से शाइनी भी बनाया जा सकता है। इसके लिए एक बर्तन में ऐवोकाडो को मैश कर लें और इसमें एक अंडा मिक्स करके पेस्ट बना लें। ये एक तरह का हेयर मास्क है। जिसे बालों में आंधे घंटे तक लगाए रखना चाहिए। इसे रिमूव करने के लिए नॉर्मन वाटर का इस्तेमाल ही बेस्ट रहता है।

एप्पल साइडर विनेगर: इसमें मौजूद विटामिन और खनिज हेयर ट्रीटमेंट में कारगर होते हैं। इसका हेयर मास्क बनाने के लिए एक कटोरी में दो चम्मच विनेगर लें और इसमें एक चम्मच जैतून का तेल मिलाएं। साथ इसमें एक अंडा भी मिलाएं। तैयार किए गए मास्क को बालों और स्कैल्प में अच्छे से लगाकर करीब 30 मिनट के लिए छोड़ दें। तय समय के बीत जाने के बाद इस मास्क की मदद से बालों की हल्के हाथों से मसाज करें।अब बालों को नॉर्मल पानी से धो लें। इससे बाल काफी हद तक रिपेयर हो पाएंगे।

एलोवेरा जेल: एलोवेरा जेल सौंदर्य लाभों के लिए जाना जाता है। ये आपके स्कैल्प और बालों को स्वस्थ रखने का काम करता है। इसमें कई एंटी बैक्टीरियल गुण होते हैं। एलोवेरा आपके बालों के लिए कंडीशनर के रूप में काम करता है। इसके मास्क को बनाने के लिए आधा कप कोकोनट ऑयल और तीन बड़े चम्मच एलोवेरा जेल की जरूरत पड़ेगी। इन दोनों को अच्छे से मिलाकर पेस्ट तैयार कर लें। इससे अपने स्कैल्प पर मसाज करें और बालों की जड़ों से लेकर सिरे तक अच्छी तरह लगाएं। इसे कुछ घंटों के लिए लगा रहने दें।

गुरुवार, 24 फ़रवरी 2022

सुनने की क्षमता को ठीक करने में मददगार 'योगासन'

सुनने की क्षमता को ठीक करने में मददगार 'योगासन'   

सरस्वती उपाध्याय         

ध्वनि प्रदूषण, हेडफोन का लगातार इस्तेमाल करने और गलत तरीके से कान की सफाई करने आदि के कारण कानों से सुनाई देना काफी कम हो जाता है। खासकर, अगर आप हेडफोन का इस्तेमाल करते समय गाने की आवाज तेज रखते हैं तो इससे कानों की सुनने की क्षमता स्थाई रूप से कम हो सकती है। आइए आज हम आपको कुछ ऐसे योगासनों के अभ्यास का तरीका बताते हैं। जो सुनने की क्षमता को ठीक करने में मदद कर सकते हैं। 

अधोमुख श्वानासन: अधोमुख श्वानासन के लिए सबसे पहले योगा मैट पर वज्रासन की मुद्रा में बैठें। अब सामने की तरफ झुककर अपने हाथों को जमीन पर रखें और गहरी सांस लेते हुए कमर को ऊपर उठाएं। इस दौरान घुटनों को सीधा करके सामान्य रूप से सांस लेते रहें। इस योगासन में शरीर का पूरा भार हाथों और पैरों पर होना चाहिए और शरीर का आकार ' वी' जैसा नजर आना चाहिए। कुछ मिनट इसी अवस्था में रहने के बाद धीरे-धीरे सामान्य हो जाएं। 

मत्स्यासन: मत्स्यासन का अभ्यास करने के लिए सबसे पहले योग मैट पर पद्मासन की मुद्रा में बैठ जाएं। अब अपनी पीठ की दिशा में झुकें और अपने सिर को जमीन से सटाने की कोशिश करें। इसके बाद अपने पैरों की उंगलियों को पकड़ें और जितना संभव हो सके उतनी देर इसी मुद्रा में रूकने की कोशिश करें। कुछ मिनट तक ऐसे ही रहने के बाद धीरे-धीरे सामान्य अवस्था में आ जाएं। 

भुजंगासन: भुजंगासन के अभ्यास के लिए सबसे पहले योगा मैट पर अपने हाथों को अपने कंधों के नीचे रखकर पेट के बल लेट जाएं। अब अपने हाथों से दबाव देते हुए अपने शरीर को जहां तक संभव हो सके, ऊपर उठाने की कोशिश करें। इस दौरान सामान्य तरीके से सांस लेते रहें। कुछ देर इसी मुद्रा में बने रहें और फिर धीरे-धीरे सामान्य हो जाएं। कुछ देर बाद इस योगासन को फिर से दोहराएं। 

विपरीतकरणी आसन: विपरीतकरणी आसन का अभ्यास करने के लिए सबसे पहले योगा मैट पर सीधे पीठ के बल लेट जाएं। अब अपने पैरों को धीरे-धीरे ऊपर की तरफ उठा कर 90 डिग्री का कोण बना लें। ध्यान रखें कि आपके तलवे ऊपर की ओर होने चाहिए। इसके बाद अपने नितंब को ऊपर उठाने की कोशिश करें। इस मुद्रा में कम से कम दो-तीन मिनट तक रहने के बाद धीरे-धीरे सामान्य हो जाएं। इसके बाद दोबारा इस योगासन का अभ्यास करें। 

गुरुवार, 17 फ़रवरी 2022

एक ऐसी रहस्यमयी झील, जिसका पानी पीने से मौंत

एक ऐसी रहस्यमयी झील, जिसका पानी पीने से मौंत    

सरस्वती उपाध्याय          

ये दुनिया रहस्यों से भरी हुई है। दुनिया में हजारों की तादाद में झीलें मौजूद हैं। लेकिन इनमें से कुछ ऐसी हैं। जिनके रहस्य के बारे में आज तक इंसान नहीं जान पाया है। यह रहस्यमयी झील दक्षिण अफ्रीका के लिंपोपो राज्य में है। इसे लोग फुन्दूजी झील के नाम से जानते हैं। यह झील देखने में तो काफी सुंदर है और इसका पानी भी काफी साफ है। लेकिन जो इसका पानी एक बार पी ले। कहते हैं कि इसके बाद फिर मौत उसे अपने आगोश में ले लेती है।

बताया जाता है कि इस झील का निर्माण प्राचीन काल में भूस्खलन के कारण हुआ था, जिसने मुटाली नदी के प्रवाह को रोक दिया था। वहीं, अब तक यह एक रहस्य बना हुआ है कि ऐसा क्या है कि इसके पानी को पीने से मौत हो जाती है। झील के बारे में एक स्थानीय कहानी भी है। इसके मुताबिक, प्राचीन काल में इस जगह पर एक कोढ़ी व्यक्ति लंबा सफर करके आया था। उसके जब स्थानीय लोगों से खाना और रहने के लिए जगह मांगी, तो उसे यह नहीं दिया गया। इसके बाद उस कोढ़ी ने लोगों को श्राप दिया और झील में जाकर गायब हो गया।

कहा जाता है कि झील के अंदर से डूबे हुए लोगों के रोने और ड्रम बजने की आवाज आती रहती हैं। स्थानीय लोग यह भी कहते हैं कि इस झील की रक्षा पहाड़ों पर विशालकाय अजगर करता है। यह अजगर स्थानीय लोग को नुकसान न पहुंचाए, इसलिए उसे प्रसन्न करने के लिए हर साल यहां के लोग नृत्य उत्सव का आयोजन करतें हैं। इसमें कुंवारी लड़कियां डांस करती हैं।

सोमवार, 7 फ़रवरी 2022

चेहरे का रंग निखारने का आसान तरीका, जानिए

चेहरे का रंग निखारने का आसान तरीका, जानिए  

सरस्वती उपाध्याय     

चेहरे का रंग निखारने का सबसे आसान तरीका है स्टीमिंग। इसके लिए हफ्ते में कम से कम दो बार 5-7 मिनट चेहरे को स्टीम जरूर दें। अगर इसके लिए समय नहीं निकाल पा रही हैं तो दूसरा तरीका है नहाते वक्त जब पानी गर्म होता है तो उसमें तौलिए तो भिगोएं और थोड़ा सा निचोड़कर चेहरे पर रखकर हाथों से हल्का दबाएं। इससे दो फायदे होंगे, पहला तो चेहरे की गंदगी साफ होती है। दूसरा कील-मुंहासों की समस्या दूर होती है।

आंवला कई मायनों में हमारी सेहत के लिए फायदेमंद होता है। इसके लिए आप किसी भी रूप में इसका सेवन कर सकते हैं। फिर चाहे वह मुरब्बे के रूप में हो या फिर कच्चा या फिर जूस पीकर। रोजाना आंवला खाने से धीरे-धीरे चेहरे की रंगत निखरने लगती है और सेहत भी दुरुस्त रहने लगती है। 

दूध सबसे कारगर उपाय है रंगत निखारने के लिए। इसके लिए कच्चे दूध में चुटकी भर हल्दी मिलाएं और चाहे तो रूई के फाहे की मदद से या फिर हाथों से ही चेहरे पर लगाकर कुछ देर तक मालिश करें। दो से तीन हफ्तों तक इस रूटीन को फॉलो करें और फिर देखें चेहरे की खूबसूरती।

अंडे में शहद और थोड़ी सी-चीनी मिलाकर चेहरे पर लगाएं और थोड़ी देर ऐसे ही छोड़ दें। इसके बाद हल्के हाथों से मसाज करने के बाद गुनगुने पानी से चेहरे को धो दें। ऐसा हफ्ते में दो या तीन बार करने से आपको इसका असर नजर आने लगेगा।

संतरे और पपीते का गूदा निकालकर उसे अच्छी तरह से मैश कर चेहरे पर अच्छी तरह से लगाएं और हल्का सूखने दें। इस घरेलू उपाय को भी आपको रोजाना फॉलो करना है अगर जल्द रिजल्ट चाहिए तो।

बुधवार, 2 फ़रवरी 2022

बालों में गर्म तेल लगाने के नुकसान-फायदें, जानिए

बालों में गर्म तेल लगाने के नुकसान-फायदें, जानिए    
तराशा अग्रवाल         
सभी को पता है कि अगर बालों को स्वस्थ और खूबसूरत बनाए रखना है तो फिर बालों में तेल जरूर लगाना चाहिए। इसके साथ ही हमने हमेशा से अपने घर के बड़ों के मुंह से सुना है कि बालों में गर्म तेल ना लगाएं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि बालों में गर्म तेल क्यों नहीं लगाना चाहिए, या फिर इससे क्या नुकसान हो सकते हैं? कहा तो ये भी जाता है कि अगर आप गर्म तेल बालों में लगाते हैं तो हेयर्स सफेद हो जाते हैं। अगर आपके मन में इस तरह के सवाल हैं तो आज हम आपको बताएंगे कि गर्म तेल के नुकसान क्या होते हैं ? क्योंकि सर्दी के मौसम में अक्सर सभी गर्म तेल ही बालों में लगाते हैं।
सर्दी के मौसम में गर्म तेल से बालों के स्कैल्प की माशिल की जाती है, जिसके कई फायदे भी बताए जाते हैं। माना जाता है कि अगर बालों में गर्म तेल लगाते हैं तो डैंड्रफ से मुक्ति मिल जाती है। लेकिन बात दें कि गर्म तेल लगाने की कुछ सावधानियां होती हैं, जिनको अप्लाई करके आप बालों को नुकसान पहुंचा कर बचा सकते हैं।
1. नष्ट होते हैं पोषक तत्व: बालों में गर्म तेल से बचना चाहिए, बल्कि हमेशा हल्का गुनगुना तेल लगाना चाहिए, अगर आप हल्का गुनगुना तेल लगाते हैं तो इसमें मौजूद पोषक तत्व नष्ट नहीं होते हैं। जबकि ज्यादा गर्म तेल लगाने से सभी तत्व बेजान हो जाते हैं और इसको बालों में लगाने का कोई फायदा भी नहीं मिलेगा।
2. स्कैल्प पर होता है बुरा असर: अगर आप ज्यादा गर्म तेल लगाते हैं तो इससे आपके स्कैल्प पर बुरा असर पड़ सकता है। अगर आपके बाल ऑयली हैं, तो ज्याद गर्म तेल कभी ना लगाएं। इतना ही नहीं अगर डाइरेक्ट स्कैल्प पर गर्म तेल डालते हैं, तो इससे डैंड्रफ और खुजली की समस्या हो सकती है।
3. एलर्जी हो सकती है: अगर आपकी स्किन संवेदनशील है, और आप पहली बार गर्म तेल लगाने जा रहे हैं तो एक बार पैच टेस्ट जरूर करें। ताकि आपकी स्किन पर किसी तरह की एलर्जी या नुकसाना ना हो। अगर आप ऐसा नहीं करते हैं, तो आपको बालों में कई तरह की परेशानी जैसे- ड्राई स्कैल्प, स्कैल्प में खुजली, जलन आदि हो सकता है।
4. बाल हो सकते हैं डैमेज: अगर आप बालों में ज्यादा गर्म तेल का इस्तेमाल करते हैं, तो यह आपके बालों को डैमेज होने के चांस अधिक होते हैं। इसके साथ ही  सफेद  बाल और झड़ते बालों की समस्या हो सकती है, क्योंकि गर्म तेल भी गर्म पानी की तरह से बालों को कमजोर करता है।
बालों में गर्म तेल लगाने का तरीका और सावधानी
ऐसा नहीं है कि गर्म तेल लगाने से केवल नुकसान ही होते हैं, अगर इसको कुछ सावधानियों के साथ लगाया जाए तो फायदेमंद भी होता है, तो आइए जानते हैं बालों में कैसे लगाएं गर्म तेल?
1-तेल को गर्म करके बालों में लगाने से पहले उसका अनुपात याद रखें, क्योंकि तेल उतना ही गर्म करें जितना एक बार में लगाएं, बार बार वही तेल गर्म करके ना लगाएं, इससे बालों को नुकसान होता है।
2-जब तेल हल्का गर्म हो जाए, इसके बाद गुनगुन रूप में इसका यूज करें।
3- गुनगुन तेल को लगाकर एक दम छोड़ ना दें। इससे 10 से 15 मिनट तक अपने सिर की मालिश करें।हालांकि, स्पैल्प पर आप तेल लगाते समय बहुत जोर ना दें, इससे बालों को नुकसान हो सकता है।
4-गर्म तेल को या तो रात में लगाएं नहीं तो सुबह बाल धोने से 1, 2 घंटे पहले ही लगाएं और फिर हेयर वॉश कर लें।

मंगलवार, 1 फ़रवरी 2022

क्या पूरी पृथ्वी खरीद सकते हैं, जानिए कीमत

आइए जानते हैं पूरी पृथ्वी की कीमत क्या है ?

एक मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, हाल ही में पृथ्वी की कुल कीमत का अंदाजा लगाया गया है। पृथ्वी की कीमत का गणित 2022 में सभी चीजों की कीमत को ध्यान में रखकर अनुमान लगाया गया है। आपको जानकर हैरानी होगी कि जमीन, नदी, खनिज और सभी चीजों को मिलाकर पृथ्वी की कीमत (3 लाख 76 हजार 258 खरब) बताई गई है। अगर आपका बैंक बैलेंस इतना है तो आप जरूर पूरी पृथ्वी के मालिक बन सकते हैं।

सोमवार, 31 जनवरी 2022

बालों को स्ट्रेट करने के लिए जानिए घरेलू नुस्खे

बालों को स्ट्रेट करने के लिए जानिए घरेलू नुस्खे      

सरस्वती उपाध्याय             खूबसूरत सीधे शाइनी बाल हर लड़की का सपना होते हैं। कॉस्मैटिक इंडस्ट्री में ऐसे बहुत सारे ट्रीटमेंट हैं। जिन्हें करवा कर बालों को स्ट्रेट किया जा सकता है। मगर, यह सभी ट्रीटमेंट कैमिकल बेस्ड होने की वजह से बालों को नुकसान पहुंचा सकते हैं। जिसकी वजह से बाल खराब और पतले हो सकते हैं। ऐसे में कुछ ऐसे आसान घरेलू नुस्खे हैं, जिन्हें अपनाकर आप अपने बालों को बिना पैसा खर्च किए ही स्ट्रेट बना सकते हैं।

हॉट ऑयल मसाज: बालों में हॉट ऑयल मसाज करने से बाल सॉफ्ट और शाइनी होते हैं। बालों में एक दिन छोड़कर तेल लगाने से बाल सीधे होते हैं। बालों में तेल लगाने के लिए आप नारियल,ऑलिव, बादाम या फिर शीशम का तेल लगा सकती हैं। तेल लगाते समय बालों की 15 मिनट तक हल्के हाथों से मसाज करें।

मिल्क स्प्रे: आप बालों को स्ट्रेट करने के लिए कोकोनट मिल्क का इस्तेमाल कर सकती हैं। कोकोनट मिल्क एंटीबैक्टीरियल और एंटीफंगल होता है। लेकिन कोकोनट ऑयल नहीं मिल रहा हो तो आप साधारण दूध से भी बालों को स्प्रे करते हुए उसे स्ट्रेट कर सकती हैं। रोजाना ऐसा करने से आपके बाल कुछ ही दिनों में स्ट्रेट हो जाएंगे।

कोकोनट मिल्क और नींबू का रस: रूखे बालों को स्ट्रेट नहीं किया जा सकता। बाल रूखे होने पर कोकोनट मिल्क और नींबू के रस को मिलाकर बनाए मिश्रण को एक स्प्रे बोतल में भरकर बालों पर लगाएं। इसके बाद कंघी से बालों को सीधा करते जाएं। कोकोनट मिल्क प्रोटीन का बहुत अच्छा सोर्स है। 

अंडा और ऑलिव ऑयल: अंडे में भरपूर मात्रा में प्रोटीन होता है। अगर आप बालों में अंडा और ऑलिव ऑयल का मिश्रण लगाती हैं तो आपके बाल प्राकृतिक रूप से स्ट्रेट हो जाएंगे। मिश्रण लगाते समय साथ-साथ कंघी भी करें। इसके बाद आप बालों को शॉवर कैप से कवर कर लें। आप 1 घंटे बाद अपने बालों को वॉश कर सकती हैं।

एलोवेरा: एलोवेरा में मौजूद कई तरह के एंजाइम बालों की अच्छी ग्रोथ के लिए जिम्मेदार होते हैं। अगर आपको अपने बाल नेचुरली स्ट्रेट करने हैं तो बालों में एलोवेरा जैल के साथ ऑलिव ऑयल और चंदन के तेल की कुछ बूंदें मिलाकर लगाएं। इसके 2 घंटे बाद बालों को शैंपू कर लें। हफ्ते में 2 बार ऐसा करने से कुछ दिनों में बाल स्ट्रेट हो जाएंगे।

रविवार, 30 जनवरी 2022

डायबिटीज रोगी के लिए फायदेमंद हैं चने का पानी

डायबिटीज रोगी के लिए फायदेमंद हैं चने का पानी    

सरस्वती उपाध्याय              आइए जानते हैं काले चने का पानी पीने से सेहत को मिलते हैं कौन-कौन से लाभ और क्या है काले चने का पानी पीने का सही तरीका?काले चने में कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन, कैल्शियम, आयरन और विटामिन्स प्रचुर मात्रा में मौजूद होते हैं। इसके अलावा काले चने एंटीऑक्सीडेंट्स से भी भरपूर होते हैं। काला चना शरीर में मौजूद एक्स्ट्रा ग्लूकोज की मात्रा को कम करके शुगर को कंटेरोल रखने में भी मदद करता है।
जानें कब और कैसे करें इसका सेवन: डायबिटीज रोगी रोजाना दो मुट्ठी चने अच्‍छी तरह धोकर भिगो दें। सुबह इस चने के पानी को खाली पेट पिएं। रोजाना इसे पीने से आपको ब्‍लड शुगर लेवल कंट्रोल में आने लगेगा।

इम्‍यून‍िटी बढ़ाए-रोगों को दूर रखने के लिए इम्यूनिटी का अच्छा होना बेहद जरूरी है। इसके लिए चने का पानी आपकी मदद कर सकता है। काले चने विटामिन्स से भरपूर होने के साथ क्लोरोफिल और फास्फोरस से भी भरपूर होते हैं। भी प्रचुर मात्रा में मौजूद होती है। यदि डायबिटीज के रोगी के अलावा अन्य लोग भी इसका प्रतिदिन सेवन करें, तो वह हमेशा स्वस्थ बने रह सकते है।
पेट की चर्बी करें कम-नेशनल सेंटर फॉर बायोटेक्नोलॉजी इनफार्मेशन के अनुसार रात को भीगे हुए चने को उबालकर सुबह उसका पानी छानकर उसमें काला नमक, पुदीना, जीरा पाउडर मिला कर पीने से बैली फैट बर्न करने में मदद मिलती है।
पेट की समस्या में राहत-पेट की समस्याएं ज्यादातर रोगों का घर बनती हैं। ऐसे में पेट दर्द और कब्ज जैसी समस्याओं को दूर करने के लिए भीगे हुए चने का सेवन बेहद फायदेमंद होता है। इसके लिए आप भीगे हुए चने के पानी में जीरा और काला नमक मिलाकर पीएं।

शुक्रवार, 22 अक्तूबर 2021

करवा चौथ मुहूर्त, व्रत कथा-विधि 'धर्म-कर्म'

करवा चौथ  मुहूर्त, करवा चौथ व्रत कथा, व्रत विधि
करवा चौथ का दिन और संकष्टी चतुर्थी, जो कि भगवान गणेश के लिए उपवास करने का दिन होता है, एक ही समय होते हैं। विवाहित महिलाएँ पति की दीर्घ आयु के लिए करवा चौथ का व्रत और इसकी रस्मों को पूरी निष्ठा से करती हैं। छान्दोग्य उपनिषद के अनुसार करवा चौथ के दिन व्रत रखने से सारे पाप नष्ट होते हैं और जीवन में किसी प्रकार का कष्ट नहीं होता है। इससे आयु में वृद्धि होती है और इस दिन गणेश तथा शिव-पार्वती और चंद्रमा की पूजा की जाती है।
विवाहित महिलाएँ भगवान शिव, माता पार्वती और कार्तिकेय के साथ-साथ भगवान गणेश की पूजा करती हैं और अपने व्रत को चन्द्रमा के दर्शन और उनको अर्घ अर्पण करने के बाद ही तोड़ती हैं। करवा चौथ का व्रत कठोर होता है और इसे अन्न और जल ग्रहण किये बिना ही सूर्योदय से रात में चन्द्रमा के दर्शन तक किया जाता है।
करवा चौथ के दिन को करक चतुर्थी के नाम से भी जाना जाता है। करवा या करक मिट्टी के पात्र को कहते हैं जिससे चन्द्रमा को जल अर्पण, जो कि अर्घ कहलाता है, किया जाता है। पूजा के दौरान करवा बहुत महत्वपूर्ण होता है और इसे ब्राह्मण या किसी योग्य महिला को दान में भी दिया जाता है। करवा चौथ दक्षिण भारत की तुलना में उत्तरी भारत में ज्यादा प्रसिद्ध है। करवा चौथ के चार दिन बाद पुत्रों की दीर्घ आयु और समृद्धि के लिए अहोई अष्टमी व्रत किया जाता है।
करवा चौथ कब होता है?
करवा चौथ  का व्रत कार्तिक हिन्दू माह में कृष्ण पक्ष की चतुर्थी के दौरान किया जाता है। अमांत पञ्चाङ्ग जिसका अनुसरण गुजरात, महाराष्ट्र, और दक्षिणी भारत में किया जाता है, के अनुसार करवा चौथ अश्विन माह में पड़ता है। हालाँकि यह केवल माह का नाम है जो इसे अलग-अलग करता है और सभी राज्यों में करवा चौथ एक ही दिन मनाया जाता है। करवा चौथ के दिन चौथ माता की पूजा अर्चना और व्रत वैसे तो पुरे ही भारत में रखा जाता है लेकिन मुख्य रूप से उत्तर भारतीय लोग वृहद स्तर पर करवा चौथ का व्रत रखते हैं और विधिविधान से पूजा करते हैं।
उत्तर भारत में विशेष कर राजस्थान, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, गुजरात, मध्यप्रदेश और पंजाब में भी बहुत ही हर्ष के साथ व्रत रखकर करवा चौथ की कहानी सुनी जाती है। इस पावन अवसर पर दिन में कहानी सुनी जाती है और रात्रि के समय चाँद को देखने के उपरान्त स्त्रियाँ अपने पति के हाथो से पानी पीकर/खाना ग्रहण करके व्रत खोलती हैं। करवा चौथ का यह व्रत पति की लम्बी आयु, स्वास्थ्य और सुखद वैवाहिक जीवन के उद्देश्य से किया जाता है।
करवा चौथ व्रत १२ वर्ष तक अथवा १६ वर्ष तक लगातार हर वर्ष किया जाता है। अवधि पूरी होने के पश्चात इस व्रत का उद्यापन (उपसंहार) किया जाता है। जो सुहागिन स्त्रियाँ आजीवन रखना चाहें वे जीवनभर इस व्रत को कर सकती हैं। इस व्रत के समान सौभाग्यदायक व्रत अन्य कोई दूसरा नहीं है। अतः सुहागिन स्त्रियाँ अपने सुहाग की रक्षार्थ इस व्रत का सतत पालन कर सकती हैं।
करवा चौथ २४ अक्टुबर २०२१ रविवार,
करवा चौथ पूजा मुहूर्त १७:४३ से १८:५०
चंद्रोदय २०:०७
चतुर्थी तिथि आरंभ ०३:०० (२४ अक्टूबर)
चतुर्थी तिथि समाप्त ०५:४० (२५ अक्टूबर को)
करवा चौथ व्रत कथा:
बहुत समय पहले इन्द्रप्रस्थपुर के एक शहर में वेदशर्मा नाम का एक ब्राह्मण रहता था। वेदशर्मा का विवाह लीलावती से हुआ था जिससे उसके सात महान पुत्र और वीरावती नाम की एक गुणवान पुत्री थी। क्योंकि सात भाईयों की वह केवल एक अकेली बहन थी जिसके कारण वह अपने माता-पिता के साथ-साथ अपने भाईयों की भी लाड़ली थी।
जब वह विवाह के लायक हो गयी तब उसकी शादी एक उचित ब्राह्मण युवक से हुई। शादी के बाद वीरावती जब अपने माता-पिता के यहाँ थी तब उसने अपनी भाभियों के साथ पति की लम्बी आयु के लिए करवा चौथ का व्रत रखा। करवा चौथ के व्रत के दौरान वीरावती को भूख सहन नहीं हुई और कमजोरी के कारण वह मूर्छित होकर जमीन पर गिर गई।
सभी भाईयों से उनकी प्यारी बहन की दयनीय स्थिति सहन नहीं हो पा रही थी। वे जानते थे वीरावती जो कि एक पतिव्रता नारी है चन्द्रमा के दर्शन किये बिना भोजन ग्रहण नहीं करेगी चाहे उसके प्राण ही क्यों ना निकल जायें। सभी भाईयों ने मिलकर एक योजना बनाई जिससे उनकी बहन भोजन ग्रहण कर ले। उनमें से एक भाई कुछ दूर वट के वृक्ष पर हाथ में छलनी और दीपक लेकर चढ़ गया। जब वीरावती मूर्छित अवस्था से जागी तो उसके बाकी सभी भाईयों ने उससे कहा कि चन्द्रोदय हो गया है और उसे छत पर चन्द्रमा के दर्शन कराने ले आये।
वीरावती ने कुछ दूर वट के वृक्ष पर छलनी के पीछे दीपक को देख विश्वास कर लिया कि चन्द्रमा वृक्ष के पीछे निकल आया है। अपनी भूख से व्याकुल वीरावती ने शीघ्र ही दीपक को चन्द्रमा समझ अर्घ अर्पण कर अपने व्रत को तोड़ा। वीरावती ने जब भोजन करना प्रारम्भ किया तो उसे अशुभ संकेत मिलने लगे। पहले कौर में उसे बाल मिला, दुसरें में उसे छींक आई और तीसरे कौर में उसे अपने ससुराल वालों से निमंत्रण मिला। पहली बार अपने ससुराल पहुँचने के बाद उसने अपने पति के मृत शरीर को पाया।
अपने पति के मृत शरीर को देखकर वीरावती रोने लगी और करवा चौथ के व्रत के दौरान अपनी किसी भूल के लिए खुद को दोषी ठहराने लगी। वह विलाप करने लगी। उसका विलाप सुनकर देवी इन्द्राणी जो कि इन्द्र देवता की पत्नी है, वीरावती को सान्त्वना देने के लिए पहुँची।
वीरावती ने देवी इन्द्राणी से पूछा कि करवा चौथ के दिन ही उसके पति की मृत्यु क्यों हुई और अपने पति को जीवित करने की वह देवी इन्द्राणी से विनती करने लगी। वीरावती का दुःख देखकर देवी इन्द्राणी ने उससे कहा कि उसने चन्द्रमा को अर्घ अर्पण किये बिना ही व्रत को तोड़ा था जिसके कारण उसके पति की असामयिक मृत्यु हो गई। देवी इन्द्राणी ने वीरावती को करवा चौथ के व्रत के साथ-साथ पूरे साल में हर माह की चौथ को व्रत करने की सलाह दी और उसे आश्वासित किया कि ऐसा करने से उसका पति जीवित लौट आएगा।
इसके बाद वीरावती सभी धार्मिक कृत्यों और मासिक उपवास को पूरे विश्वास के साथ करती। अन्त में उन सभी व्रतों से मिले पुण्य के कारण वीरावती को उसका पति पुनः प्राप्त हो गया।
करवा चौथ व्रत विधि :-
नैवेद्य : आप शुद्ध घी में आटे को सेंककर उसमें शक्कर अथवा खांड मिलाकर मोदक (लड्डू) नैवेद्य के रूप में उपयोग में ले।
करवाः
काली मिट्टी में शक्कर की चासनी मिलाकर उस मिट्टी से तैयार किए गए मिट्टी के करवे उपयोग किया जा सकता है। 
करवा चौथ पूजन के लिए मंत्र :
ॐ शिवायै नमः’ से पार्वती का,‘
ॐ नमः शिवाय’ से शिव का, ‘
ॐ षण्मुखाय नमः’ 
से स्वामी कार्तिकेय का,‘
ॐ गणेशाय नमः’ से गणेश का तथा ‘
ॐ सोमाय नमः’ से चन्द्रदेव का पूजन करें।
करवा चौथ की थाली :
करवा चौथ की रात्रि के समय चाँद देखने के लिए आप पहले से ही थाली को सजाकर रख लेवे। थाली में आप निम्न सामग्री को रखें। 
•दीपक 
•करवा चौथ का कलश (ताम्बे का कलश इसके लिए श्रेष्ठ होता है )
•छलनी
•कलश को ढकने के लिए वस्त्र
•मिठाई या ड्राई फ्रूट
•चन्दन और धुप
•मोली और गुड/चूरमा
•व्रत के दिन प्रातः स्नानादि करने के पश्चात यह संकल्प बोलकर करवा चौथ व्रत का आरंभ करें- 
मम सुखसौभाग्य 
पुत्रपौत्रादि सुस्थिर 
श्री प्राप्तये करक चतुर्थी 
व्रतमहं करिष्ये।
पूरे दिन निर्जला रहें।
दीवार पर गेरू से फलक बनाकर पिसे चावलों के घोल से करवा चित्रित करें। इसे वर कहते हैं। चित्रित करने की कला को करवा धरना कहा जाता है।
●आठ पूरियों की अठावरी बनाएं। हलुआ बनाएं। पक्के पकवान बनाएं।
पीली मिट्टी से गौरी बनाएं और उनकी गोद में गणेश जी बनाकर बिठाएं।
गौरी को लकड़ी के आसन पर बिठाएं। चौक बनाकर आसन को उस पर रखें। गौरी को चुनरी ओढ़ाएं। बिंदी आदि सुहाग सामग्री से गौरी का श्रृंगार करें।
●जल से भरा हुआ लोटा रखें।
वायना (भेंट) देने के लिए मिट्टी का टोंटीदार करवा लें। करवा में गेहूं और ढक्कन में शक्कर का बूरा भर दें। उसके ऊपर दक्षिणा रखें।
●रोली से करवा पर स्वस्तिक बनाएं।
●गौरी-गणेश और चित्रित करवा 
की परंपरानुसार पूजा करें। पति की दीर्घायु की कामना करें।
नमः शिवायै शर्वाण्यै 
सौभाग्यं संतति शुभाम्‌। 
प्रयच्छ भक्तियुक्तानां 
नारीणां हरवल्लभे॥’
●करवा पर १३ बिंदी रखें और गेहूं या चावल के १३ दाने हाथ में लेकर करवा चौथ की कथा कहें या सुनें।
कथा सुनने के बाद करवा पर हाथ घुमाकर अपनी सासुजी के पैर छूकर आशीर्वाद लें और करवा उन्हें दे दें।
तेरह दाने गेहूं के और पानी का लोटा या टोंटीदार करवा अलग रख लें।
रात्रि में चन्द्रमा निकलने के बाद छलनी की ओट से उसे देखें और चन्द्रमा को अर्घ्य दें। इसके बाद पति से आशीर्वाद लें। उन्हें भोजन कराएं और स्वयं भी भोजन कर लें। पूजन के पश्चात आस-पड़ोस की महिलाओं को करवा चौथ की बधाई देकर पर्व को संपन्न करें।
●करवा चौथ में सरगी
पंजाब में करवा चौथ का त्यौहार सरगी के साथ आरम्भ होता है। यह करवा चौथ के दिन सूर्योदय से पहले किया जाने वाला भोजन होता है। जो महिलाएँ इस दिन व्रत रखती हैं उनकी सास उनके लिए सरगी बनाती हैं। शाम को सभी महिलाएँ श्रृंगार करके एकत्रित होती हैं और फेरी की रस्म करती हैं।
●इस रस्म में महिलाएँ एक घेरा बनाकर बैठती हैं और पूजा की थाली एक दूसरे को देकर पूरे घेरे में घुमाती हैं। इस रस्म के दौरान एक बुज़ुर्ग महिला करवा चौथ की कथा गाती हैं। भारत के अन्य प्रदेश जैसे उत्तर प्रदेश और राजस्थान में गौर माता की पूजा की जाती है। गौर माता की पूजा के लिए प्रतिमा गाय के गोबर से बनाई जाती है।
•क्या अविवाहित करवा चौथ व्रत रख सकते हैं?
 करवा चौथ का व्रत शादीशुदा स्त्रियों के द्वारा ही रखा जाता है। इसके लिए आप अपने घर में बड़ी बुजुर्ग स्त्रियों की सलाह जरूर लेवे क्यों की कुछ अंचल में अच्छे वर के लिए कुंवारी लड़किया भी यह व्रत रखती हैं। 
•करवा चौथ व्रत में हम क्या खा सकते हैं? 
कुछ अंचल में अल्पाहार के लिए फल का उपयोग किया जाता है लेकिन इस व्रत को  निर्जला करना अधिक लाभदायी होता है। 
•क्या आप करवा चौथ पर पानी पी सकते हैं? 
नहीं, क्यों की यह निर्जला व्रत होता है इसलिए इस दिन ना तो कुछ खाया जाता है और नाही पानी हीग्रहण किया जाता है। 
•सरगी खाने का सही समय क्या है? 
वैसे तो इस व्रत को आप निर्जला करे तो उचित रहेगा, अन्यथा अपनी परम्पराओं के अनुसार सरगी का उपयोग करे जिसके लिए सूर्योदय से पूर्व (प्रातः चार से पांच बाते) तक का समय अनुकूल होता है।
•क्या हम करवा चौथ पर बाल धो सकते हैं?
नहीं, मान्यता नहीं है। 
•करवा चौथ पर किस भगवान की पूजा की जाती है?
•चौथ माता की पूजा के साथ आप माता पार्वती जी की पूजा करें और शिव, गणेश, और कार्तिकेय की भी पूजा अर्चना करे।

पत्रकारों के साथ बदसलूकी करने वालों पर दर्ज होगी एफआईआर, मिलेगी सजा
बृजेश केसरवानी    
प्रयागराज। हाईकोर्ट की टिप्पणी के बाद पीएम और सीएम का भी ऐलान आया है कि, पत्रकारों से अभद्रता करने वालों पर लगेगा 50,000 का जुर्माना एवं पत्रकारों से बदसलूकी करने पर हो सकती है 3 साल की जेल पत्रकार को धमकाने वाले को 24 घंटे के अंदर जेल भेज दिया जाएगा। पत्रकारों को धमकी के आरोप में गिरफ्तार लोगों को आसानी से नहीं मिलेगी जमानत। सीएम योगी का कहना है कि पत्रकारों को परेशानी होने पर तुरंत संपर्क कर सहायता प्रदान करें और पत्रकारों से मान-सम्मान से बात करें वरना आप को पड़ेगा महंगा।
बदसलूकी करने वालों पर दर्ज होगी FIR :
बदसलूकी करने वाले पुलिस कर्मियों के खिलाफ दर्ज होगी FIR नही तो एसएसपी पर होगी कार्यवाही पत्रकार नही हैं भीड़ का हिस्सा l पत्रकारों के साथ बढ़ती ज्यादती और पुलिस के अनुचित व्यवहार के चलते कई बार पत्रकार आजादी के साथ अपना काम नही कर पाते हैं, उसी को ध्यान में रखते हुए भारतीय प्रेस काउंसिल के अध्यक्ष मार्कण्डेय काटजू ने राज्य सरकारों को चेतावनी देते हुए निर्देश भी दिया है कि पुलिस आदि पत्रकारों के साथ बदसलूकी ना करे।
पत्रकार भीड़ का हिस्सा नही हैं :
किसी स्थान पर हिंसा या बवाल होने की स्थिति में पत्रकारों को उनके काम करने में पुलिस व्यवधान नही पहुँचा सकती। पुलिस जैसे भीड़ को हटाती है वैसा व्यवहार पत्रकारों के साथ नही कर सकती।
ऐसा होने की स्थिति में बदसलूकी करने वाले -
पुलिसवालों या अधिकारियों के विरुद्ध आपराधिक मामला दर्ज किया जायेगा। काटजू ने कहाँ कि, "जिस तरह कोर्ट में एक अधिवक्ता अपने मुवक्किल का हत्या का केस लड़ता है पर वह हत्यारा नही हो जाता है। उसी प्रकार किसी सावर्जनिक स्थान पर पत्रकार अपना काम करते हैं पर वे भीड़ का हिस्सा नहीं होते। इसलिए पत्रकारों को उनके काम से रोकना मीडिया की स्वतंत्रता का हनन करना है।"
सभी राज्यों को दिए निर्देश : प्रेस काउन्सिल ने देश के केबिनेट सचिव, गृह सचिव, सभी राज्यों के मुख्यमंत्री, मुख्य सचिवों व गृह सचिवों को इस सम्बन्ध में निर्देश भेजा है और उसमें स्पष्ट कहा है कि, पत्रकारों के साथ पुलिस या अर्द्धसैनिक बलों की हिंसा बर्दाश्त नही की जायेगी। सरकारें ये सुनिश्चित करें कि, पत्रकारों के साथ ऐसी कोई कार्यवाही कहीं न हो। पुलिस की पत्रकारों के साथ की गयी हिंसा मीडिया की स्वतन्त्रता के अधिकार का हनन माना जायेगा जो संविधान की धारा 19 एक ए में दी गयी है और इस संविधान की धारा के तहत बदसलूकी करने वाले पुलिसकर्मी या अधिकारी पर आपराधिक मामला दर्ज होगा।

सुबह खाली पेट 5 भीगे बादाम खाने के कई लाभ

खाली पेट 5 भीगे बादाम खाने के कई फायदे

रोज सुबह खाली पेट 5 भीगे बादाम खाने के कई फायदे हो सकते हैं। बादाम पोषक तत्वों से भरपूर होता है, जो आपको दिनभर एनर्जी से भरपूर रख सकता है। बादाम खाने से दिमाग बहुत तेज होता है। बादाम में ढेर सारा पौष्टिक तत्व पाया जाता है। इसमें प्रोटीन, वसा, विटामिन और मिनरल पर्याप्त मात्रा में पाए जाते हैं जो हमें शरीर के हर रोगों से बचाते हैं।
खाने में क्रंची और प्रोटीन से भरपूर बादाम में फाइबर और ओमेगा-3 होता है। टेस्ट के साथ हल्दी गुणों से भरपूर बहुत लोगों का मनपसंद देता ड्राई फ्रूट है। सूखे बादाम के मुकाबले भीगे हुए बादाम ज्यादा हेल्दी होते हैं, क्योंकि यह खाने में ज्यादा मुलायम और पचाने में आसान होते हैं। तो आइए जानते हैं बादाम के फायदे के बारे में।
बादाम खाने के फायदे।
भीगे हुए बादाम खाने से दिल हल्दी रहता है और खराब कोलस्ट्रॉल में राहत मिलती है और अच्छा कोलेस्ट्रॉल बढ़ता है।
बादाम में प्रोटीन और फाइबर काफी होता है, जो पेट को देर तक भरा रखता है और और अस्वस्थ चीजें खाने की आशंका कम कर देता है। इसके अलावा बादाम जैसे नट्स खाने से मेटाबॉलिज्म तेज होता जाता है और शरीर तेजी से फैट बर्न करता है।
बादाम में विटामिन ई प्रचुर मात्रा में होता है। जो कि आपकी दिमागी क्षमता बढ़ाता है। इससे आपकी याददाश्त और सीखने की क्षमता बढ़ जाती है।
कच्चे बादाम की तुलना में भीगे हुए बादाम को पचाना आसान है। भीगे हुए बादाम पाचन को भी बढ़ावा दे सकते हैं। यह पोषक तत्वों के अवशोषण में मदद करता है। ये एक एंजाइम के उत्पादन को भी बढ़ावा देते हैं जो पाचन को बढ़ावा देता है।
बादाम खाने से डायबिटीज नियंत्रित रहता है। इसमें फैट, विटामिन, फाइबर और प्रोटीन पाए जाते हैं जो टाइप 2 डायबिटीज को नियंत्रित करने में मदद करते हैं।
बादाम हार्ट के लिए बेहद अच्छा होता है। बादाम का सेवन करने वाले को हृदयाघात का खतरा 50 फीसदी तक काम होता है।
भीगे हुए बादाम में विटामिन ई का स्तर भी ज्यादा होता है। विटामिन ई त्वचा को सेहतमंद रखता है। अगर आप रोजाना रात में भिगोया हुआ बादाम खाते हैं तो आपको कभी त्वचा से संबंधित परेशानी नहीं होगा और आपकी त्वचा हमेशा चमकती रहेगी और सॉफ्ट होगी।

मिल्क पाउडर से बनाए गुलाब जामुन, सीखें

मीठा खाने के शौकीन लोगों का गर्मागर्म गुलाब जामुन खाना अधिकतर पसंद होता है। गुलाब जामुन एक ऐसी स्वीट डिश है जिसे आप कई तरह से बना सकते हैं, तो लीजिए आज जानिए मिल्क पाउडर से गुलाब जामुन बनाने का पूरा तरीका।

गुलाब जामुन बनाने की सामग्री:
दो कप मिल्क पाउडर।
तीन चम्मच मैदा।
आधा कप दूध (फुल क्रीम)।
चुटकीभर बेकिंग पाउडर।
घी तलने के लिए।

चाशनी के लिए :

एक कटोरी चीनी।
डेढ़ कप पानी।
आधा चम्मच इलाइची पाउडर।
चुटकीभर केसर।

गुलाब जामुन बनाने की विधि:
 सबसे पहले मीडियम आंच पर पैन में 2 चम्मच घी डालकर गर्म करने के लिए रखें।
घी के गर्म होते ही इसमें दूध डालकर धीमी आंच पर रहने दें।
 जब दूध और घी मिक्स हो जाए तब एक कप मिल्क पाउडर डालकर मिक्स करें और चलाते हुए पकाएंं।
मिश्रण के पैन छोड़ने पर गैस बंद कर दें और इसे एक बर्तन में निकालकर रख लें।
-मिश्रण में 2 बड़े चम्मच मैदा डालकर अच्छी तरह से मैश करते हुए इसे चिकना होने तक मसलते रहें। अगर जरूरत हो तो थोड़ा दूध डाल सकते हैं।
अब इस मिश्रण का थोड़ा सा भाग लेकर गोलाकार शेप बना लें।
इसी बीच चाशनी बनाने के लिए मीडियम आंच में एक पैन में चीनी और पानी डालकर उबलने के लिए रख दे।
चाशनी को अच्छे से पकाकर इसमें इलायची पाउडर और केसर डालकर आंच बंद कर दें।
मीडियम अंच में एक पैन में घी डालकर गर्म करें।
घी के गरम होते ही इसमें गुलाब जामुन डालकर धीमी आंच पर तल लें।
गुलाब जामुन के हल्का ब्राउन होते ही इसे चाशनी में डाल दें।
सारे गुलाब जामुन तलकर चाशनी में डाल दें और कुछ घंटों के लिए छोड़ दें।
तैयार है गुलाब जामुन। ठंडा या गर्म जैसे चाहे वैसे खाएं और खिलाएं।

गुरुवार, 21 अक्तूबर 2021

स्वास्थ्य के लिए लाभदायक माना जाता हैं 'नीम'

स्वास्थ्य के लिए लाभदायक माना जाता हैं नीम

भारत के लगभग हर हिस्से में नीम का पौधा आसानी से उपलब्ध है। इस पौधे सभी भागों को स्वास्थ्य के लिए बेहद लाभदायक माना जाता है। आयुर्वेदिक चिकित्सा पद्धति में नीम की पत्तियों, छाल और बीज से होने वाले तमाम तरह के फायदों का जिक्र मिलता है। विशेषज्ञों की मानें तो नीम की पत्तियां और फलियां स्वाद में भले ही कड़वी होती हैं लेकिन इनका सेवन करने वाले लोगों को कई प्रकार की गंभीर रोगों से सुरक्षित माना जा सकता है। इसके अलावा नीम के अर्क का सेवन करने से अस्थमा, कब्ज, खांसी, मधुमेह, गैस्ट्रिक अल्सर, अपच और मूत्र पथ के संक्रमण जैसी कई बीमारियों से सुरक्षा मिल सकती है। 

आयुर्वेद में नीम के पेड़ की छाल, फूल और फल का भी औषधीय रूप से उपयोग और लाभ बताया गया है। आयुर्वेद विशेषज्ञों के मुताबिक नीम की पत्तियों का सेवन करके डायबिटीज और त्वचा की गंभीर बीमारियों के जोखिम को कम किया जा सकता है। आइए आगे की स्लाइडों में नीम से होने वाले ऐसे ही कुछ अद्भुत स्वास्थ्य लाभ के बारे में जानते हैं। 

हेल्थ के लिए कितना फायदेमंद है अनार, जानिए

क्या आप जानते हैं अनार आपके हेल्थ के लिए कितना फायदेमंद है। अनार में विटामिन ए, सी, ई, फोलिक एसिड और एंटीऑक्‍सीडेंट पाये जाते हैं। साथ इसमें प्रचुर मात्रा में लाभदायक प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट, फाइबर और खनिज पाए जाते हैं। आइये देखे क्या क्या है अनार के स्वास्थ्य फायदें
अनार में है कौन कौन से गुण।
अनार में आपके बॉडी में ब्लड इंक्रीज करने की शक्ती होती है । इसमें प्रचुर मात्रा में विटामिन ए ,सी, ई पाया जाता है। अनार में एंटीऑक्सीडेंट भी पाए जाते हैं जो आपके शरीर को हर बीमारी से लड़ने की ताकत देती है।
पेट की प्रोब्लम को भी सॉल्व करें।
अनार के रस में बैक्टीरिया को मारने की शक्ति होती है। इसलिए अनार का रस पीने से पेट के रोग पेट के रोग, अपच, गैस, कब्ज व अन्य कई तकलीफों से तुरन्त आराम मिलता है।
अनार वजन को भी काम करता है।
अनार खाने से आपके वजन पर भी असर पड़ता है। और नियमित रूप से इसका सेवन करने से आपका वजन भी कम होता है।इसमें फैट नहीं होता परन्तु फाइबर, विटामिन-सी, पोटेशियम, मिनरल फास्फोरस तथा मैग्नीशियम बहुत अधिक मात्रा में मिलता है। तो ये किसी भी प्रकार से आपके शरीर में वजन नही बढता।
आपकी याददाश्त को तेज करता है।
अनार आपके याददाश्त को तेज करता है।
और इसे खाने से आपके अंदर एनर्जी लेवल भी इंक्रीज होता है।
अनार के जूस में न्युरो-प्रोटेक्टिव गुण पाए जाते है। ब्रेन की सेहत के लिए बेहतरीन होता है। इसके लगातार सेवन करने से ब्रेन हैमरेज जैसी घातक समस्याएं होने की संभावनांए कम हो जाती है।
दांतों को मजबूत बनाएं।
अनार खाने से दांतो की समस्या से भी निजात पाया जा सकता है। साथ ही अनार को मंजन के तौर पर भी किया जा सकता है। इसके लिए अनार के फूल छाया में सुखाकर बारीक पीस लेते हैं। इसे मंजन की तरह दिन में 2 या 3 बार दांतों में मलने से दांतों से खून आना बंद होकर दांत मजबूत हो जाते हैं।

बुधवार, 20 अक्तूबर 2021

औषधीय गुणों से भरपूर होता है गन्ना, फायदे

औषधीय गुणों से भरपूर होता है गन्ना, फायदे

गन्ना औषधीय गुणों से भरपूर होता है। इसलिए इसके रस का सेवन आपको आपके शरीर को कई प्रकार से फायदेमंद है। वैसे तो गर्मी आते ही बाजार में कई प्रकार के रस उपलब्ध होते हैं। लेकिन अगर आप गन्ने का रस का सेवन करेंगे तो निश्चित ही आपको कई बीमारियों से भी छुटकारा मिल जाएगा। यह बात हम नहीं कह रहे यह बात प्राचीन काल से ही मानी जा रही है।
आपको बता दें कि गन्ने का रस पीलिया, अपचन, त्वचा, मूत्र सहित अन्य रोगों के उपचार में काफी लाभदायक है। आज हम आपको गन्ने के रस के फायदे बतायंगे। जिनके बारे में शायद आपको मालूम नहीं हो।
लीवर के लिए फायदेमंद:
गन्ने का रस आपका लिवर सिस्टम मजबूत होता है और पीलिया के लिए भी काफी फायदेमंद रहता है। गन्ने का जूस पीने से पीलिया में बहुत जल्दी फायदा होता है। लिवर की कार्यप्रणाली में रूकावट होने के कारण पीलिया होता है। इसलिए गन्ने का रस पीने से लीवर अपना काम करने लगता है।
शुगर के मरीज पी सकते हैं गन्ना:
वैसे तो मधुमेह के मरीजों के लिए मीठी चीजों का सेवन प्रतिबंधित रहता है। लेकिन गन्ने का रस ऐसा पेय है।जिसे मधुमेह से पीड़ित लोग भी पी सकते हैं। क्योंकि गन्ने के रस में आइसोमाल्टोज होता है। आइसोमाल्टोज में ग्लाइसेमिक की कमी होती है। जिसका उपयोग मधुमेह से पीड़ित मरीज भी कर सकते हैं।
वजन को करता है नियंत्रित:
गन्ने का रस वजन घटाने के लिए एक प्राकृतिक नुस्खा है। एक शोध के अनुसार गन्ना फाइबर युक्त होता है और वह वजन कम करने के साथ लिपिड को भी कंट्रोल करता है। यह ग्लूकोस को तोड़कर ऊर्जा बनाने में सहायक है और इसका खाली पेट सेवन करने से कई फायदे होते हैं।
इम्युनिटी सिस्टम करता बेहतर:
रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने में गन्ना काफी फायदेमंद है। गन्ने में हेपाटोप्रोटेक्टिव और एंटीऑक्सीडेंट पाया जाता है। गन्ने का रस कई प्रकार के बैक्टीरियल और वायरल संक्रमण से बचाने के साथ-साथ इम्यूनिटी सिस्टम बढ़ाने में मदद करता है।
टॉन्सिल्स मैं भी फायदेमंद: 
गन्ने के रस के यूं तो कई फायदे हैं। यह गले की समस्या के लिए भी काफी बेहतर है। जिसको टॉन्सिल्स की परेशानी है, उन्हें गन्ने के जूस का सेवन करने से काफी फायदा होगा। क्योंकि जब टांसिल में सूजन आ जाती है तो वह दर्द ओर तकलीफ का कारण बनता है, गन्ने का जूस खराब गला, जुकाम और फ्लू जैसी समस्याएं भी ठीक होती है।
घाव भरने में भी लाभदायक:
गन्ने का जूस का सेवन करने से शरीर पर हुए घाव भी जल्दी भर आते हैं। घाव को ठीक करने के लिए गन्ने से बनी शक्कर का भी इस्तेमाल किया जा सकता है। क्योंकि उस शक्कर में एंटीमाइक्रोबियल गुण होते हैं। जो घाव को ठीक करने में काफी मददगार होंगे।
यूरीन समस्या के लिए फायदेमंद:
गन्ने के रस से यूरिन से संबंधित समस्याओं से भी निजात मिलती है। यूरिन करते समय दर्द, जलन या असहज होना, मूत्र मार्ग में किसी प्रकार का संक्रमण आदि से निजात पाने के लिए गन्ने के रस का सेवन किया जा सकता है।
नाखूनों के लिए फायदेमंद:
आपके नाखून रूखे बेजान और कमजोर हैं। तो उनके स्वास्थ्य के लिए गन्ने का रस काफी फायदेमंद होगा। क्योंकि गन्ने में भरपूर मात्रा में कैल्शियम होता है। जो नाखून को मजबूत बनाता है।
मुहांसों के लिए भी बेहतर: 
गन्ने का रस नाखूनों के लिए काफी फायदेमंद है। इस के जूस में अल्फा हाइड्रोक्सी एसिड होता है। जो मुंहासों से निजात दिलाने में अहम भूमिका निभाता है।
बुखार में भी फायदेमंद:
बुखार किसी ना किसी प्रकार के संक्रमण के कारण होता है। अगर बुखार है तो उस दौरान भी गन्ने का रस पिया जा सकता है। क्योंकि यह संक्रमण का कारण बनने वाले बैक्टीरिया वायरस को खत्म करने का काम करता है। ऐसे में इस का जूस पीने से बुखार को कम करने में काफी मदद मिलती है।
कैन्सर:
गन्ने के रस में ट्रायसिन नामक एक फ्लेवोन पाया जाता है। जो एंटीऑक्सीडेंट गुणों से युक्त होता है। एंटी प्रोलाइफरेटिव के कारण गन्ने का जूस कैंसर की कोशिकाओं को पनपने से रोकता है। ऐसे में गन्ने का रस का सेवन करने से यह कैंसर के रोग से भी बचाता है।
ऊर्जा का स्रोत:
गन्ने के रस में कार्बोहाइड्रेट होता है। जिस कारण इसके सेवन से व्यक्ति को काफी देर तक ऊर्जा मिलती है। व्यायाम करने के बाद शरीर को फिर से हाइड्रेट करने और तरोताजा करने के लिए गन्ने का रस भी काफी बेहतर माना गया है।

अधिक मात्रा में होता हैं सेब में फाइबर, फायदें

अकांशु उपाध्याय        

नई दिल्ली। सेब में उपयोगी एंटीऑक्सिडेंट, फ्लैनोनोड्स और फाइबर बहुत अधिक मात्रा में होते है। सेब में पॉलिफेलोल अच्छी मात्रा में होते है। जो कि सेब के गूदे और छिलके दोनों में पाया जाता है। यह एंटीआक्‍सीडेंट के रूप में काम करता है। सूखे सेब को दुनिया भर में खाया जाता है। सूखे सेब को काटकर इसका पूरा पानी निकालकर इसे सूखाया जाता है।

सूखे सेब में कई विटामिन और पोषक तत्व पाए जाते हैं। सेहत के लिए भी सूखे सेब काफी फायदेमंद माना जाता है। इसे लोग स्नैक्स के रूप में खाते हैं। सूखे सेब में विटामिन ए और सी होते हैं। ये विटामिन आपकी हड्डियों और त्वचा को स्वस्थ रखने में मदद करते हैं। इसके अलावा इसमें विटामिन बी-6 भी होता है जो कि मस्तिष्क को स्वस्थ रखने के साथ न्यूरॉन्स के काम काज को बेहतर बनाने में मदद करते हैं। इसी तरह सूखे सेब खाने के फायदे कई हैं। आइए जानते हैं सूखे सेब खाने के फायदे के बारे में।

सूखे सेब खाने के फायदे

सूखे सेब में फाइबर की मात्रा ज्यादा होती है। इसमें फैट की मात्रा भी न के बराबर होती है। फाइबर मेटाबोलिज्म को ठीक करता है और तेजी से फैट पचाकर वजन घटाने में मददगार है। आयरन और पोटेशियम दोनों ही हमारे ब्लड सेल्स को हेल्दी रखने में मददगार हैं। सूखे सेब आयरन से भरपूर होते हैं। ये रेड ब्लड सेल्स को बढ़ाने और शरीर में खून की कमी को दूर करने में मदद करते हैं तो, पोटेशियम ब्लड सेल्स को हेल्दी रखता है और उनकी चौड़ाई बढ़ाने में मदद करता है। इससे ब्लड आराम से सर्कुलेट होता है और शरीर के हर अंग तक पहुंचाता है। साथ ही पोटेशियम न्यूरॉन्स और मस्तिष्क गतिविधियों को बेहतर बनाने में मदद करते हैं। तो, इस तरह से दोनों ही शरीर को हेल्दी रखने में मददगार हैं। इम्यूनिटी बढ़ाने में सूखे सेब मददगार होते हैं। इनमें विटामिन सी होता है जो कि शरीर को संक्रामक बीमारियों से बचाता है। ये इम्यून सेल्स को मजबूत करता है और शरीर को मौसमी बीमारियों से लड़ने में मदद करता है। साथ ही सूखे सेब एंटीऑक्सिडेंट का एक अच्छा स्रोत होते हैं। ये ऐसे पदार्थ हैं जो फाइन रेडिकल्स के कारण आपकी कोशिकाओं को होने वाले नुकसान से लड़ने में मदद करते हैं।

सूखे सेब में विटामिन बी होते हैं जो हार्मोन, मस्तिष्क और ऊर्जा के लिए अच्छे होते हैं। पर सबसे ज्यादा फायदा हमारे होर्मोनल हेल्थ को होता है। ये विटामिन बी 5 और विटामिन बी 6 से भरपूर है जो कि हार्मोनल संतुलन में सुधार करता है। सूखे सेब खाने से कोलेस्ट्रॉल कम होता है। इसमें विटामिन, खनिज और फाइबर का एक बड़ा स्रोत है। अघुलनशील फाइबर आपके पाचन तंत्र को स्वस्थ रखता है और घुलनशील फाइबर कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित करने में मदद करता है।



हैरतअंगेज: 70 साल की उम्र में मां बनीं महिला
अहमदाबाद। 20 अक्टूबर को 70 साल की उम्र में अगर कोई महिला मां बने, तो इसे आप क्या कहेंगे ? गुजरात के कच्छ में ऐसा ही हुआ है। 70 वर्षीय जीवूबेन राबरी ने शादी के 45 साल बाद एक बेटे को जन्म दिया है। जीवूबेन का तो दावा है कि वह किसी बच्चे को जन्म देने वाली दुनिया की सबसे उम्रदराज महिला हैं।
महिला का कहना है कि वह 70 साल की उम्र में पहली बार मां बनी हैं। जीवनबेन राबरी और उनके पति मालधारी (75) ने गर्व के साथ अपना बेटा पत्रकारों को दिखाया। दंपती ने बताया कि बच्चे का जन्म आइवीएफ तकनीक से हुआ है। राबरी और मालधारी गुजरात के एक छोटे से गांव मोरा के रहने वाले हैं। राबरी ने कहा कि उनके पास कोई पहचानपत्र नहीं है, लेकिन उन्होंने संवाददाताओं से कहा कि उनकी उम्र 70 साल है। 
इस सिलसिले में जानकारी देते हुए डॉ. नरेश भानुशाली ने बताया कि यहां आए दंपति की उम्र काफी ज्यादा है।इनको बच्चा होने की कोई उम्मीद नहीं थी। पहले हमने इनसे कहा था कि इस उम्र में बच्चा नहीं हो सकता। लेकिन इन लोगों को भगवान और डॉक्टर पर बहुत भरोसा था। डॉ. नरेश भानुशाली ने आगे जानकारी देते हुए बताया कि इस दंपति ने कहा कि हमारे परिवार के अन्य लोगों को बड़ी उम्र में परिणाम प्राप्त हुआ है। इन लोगों ने कहा कि आप अपनी तरफ से कोशिश करें, फिर हमारी किस्मत। बुजुर्ग महिला ने टेस्ट ट्यूब बेबी से बच्चे को जन्म दिया है।

मंगलवार, 19 अक्तूबर 2021

बुजुर्ग-युवाओं में ब्लड शुगर का खतरा तेजी से बढ़ा

बुजुर्ग-युवाओं में ब्लड शुगर का खतरा तेजी से बढ़ा

खराब खानपान और जीवनशैली का ही नतीजा है कि बुजुर्गों के साथ युवाओं में भी ब्लड शुगर का खतरा तेजी से बढ़ता जा रहा है। अगर आप ब्लड शुगर जैसी बीमारी से छुटकारा पाना चाहते हैं तो आपने अपनी जीवनशैली में कई तरह के बदलाव करने होंगे। क्योंकि इस बीमारी का इलाज किसी भी दवाई से नहीं किया जा सकता है। रोज़ाना दवाई खाने से ब्लड शुगर लेवल कंट्रोल हो सकता है, लेकिन ये बीमारी जड़ खत्म नहीं हो सकती है।

कई बार ब्लड शुगर के मरीजों के मन में फ्रूट्स को लेकर संशय होता है। एक स्टडी में सामने आया है कि फ्रूट जूस से बहुत तेजी से ब्लड शुगर लेवल बढ़ता है। अगर आप अपने शरीर को स्वस्थ रखने के लिए फ्रूट जूस पीना चाहते हैं तो आप ऐसे फ्रूट्स खा सकते हैं, जिनमें कम मिठास होती है।

तनाव, चिंता आदि को दूर करने में मददगार 'संतरा'

विटामिन-सी से भरपूर होता है। संतरे का छिलका।आपको बताते चलें कि इसके छिलके में भी विटामिन-सी भरपूर मात्रा में पाया जाता है। इसमें विटामिन सी के साथ-साथ विटामिन बी 6 भी प्रचुर मात्रा में मौजूद हैं। जो शरीर से डिप्रेशन,तनाव,चिंता आदि को दूर करने में मददगार साबित होता है। वहीँ इसके साथ-साथ संतरे के छिलके में विटामिन बी भी पाया जाता है। जो कि नर्वस सिस्टम को मजबूत बना के रखता है।

खनिज से भरपूर होता है संतरे का छिलका।
आपको बताते चलें कि संतरे कि तरह इसके छिलके में भी विटामिन और खनिज पाया जाता है। ये शरीर की इम्यून सिस्टम को मजबूत बना के रखने में कारगर साबित होता है। जिसकी जैसी वजह से ढेरों बीमारियां शरीर से दूर रहती हैं। वहीं ये स्किन में ग्लो लेकर आने में भी सक्षम होता है। इसका सेवन त्वचा से पिम्पल्स के दाग हटाने में आपकी काफी हद तक मदद कर सकता है। वहीं यदि बालों के झड़ने या टूटने से परेशान हैं। तो ये फायदेमंद साबित हो सकता है। कैल्शियम से होता है भरपूर। संतरे के छिलके में कैल्शियम उचित मात्रा में मौजूद होता है। कैल्शियम के सेवन से दांत और हड्डियों को मजबूती मिलती है। यदि आपकी हड्डियां कमजोर हैं तो संतरे के साथ इसका छिलका भी आपके लिए फायदेमंद होगा।कब्ज की समस्या को करता है दूर। आपको बताते चलें कि इसके छिलके में पेक्टिन नामक एक तत्त्व पाया जाता है। जिसमें फाइबर की भरपूर मात्रा होती है। ये पेट को साफ़ रखने में तो मदद करता ही है वहीं पेट से अनेकों बीमारियों को भी दूर कर देता है। पेट से जुड़ी बीमारियों के लिए संतरे का छिलका लाभदायक होता है। वेट कंट्रोल करने में होता है मददगार। संतरे के छिलके में अनेकों तत्त्व पाए जाते हैं। जो वेट को कंट्रोल करने में मदद करते हैं। वहीं ये नेचुरल तरीकों से वजन को कम करता है। जिससे सेहत को कोई भी नुकसान नहीं होता है। दिल की सेहत के लिए होता है लाभदायक। संतरे के छिलके की बात करें तो इसमें कई सारे ऐसे तत्त्व पाए जाते हैं जो बीमारियों को शरीर से दूर करते हैं। इसमें कोलेस्ट्रॉल की मात्रा बेहद कम होती है जो दिल की बीमारी के खतरे को कम करने में दो गुना सक्षम होती है।

सोमवार, 18 अक्तूबर 2021

उम्र बढ़ने के शुरुआती लक्षण आंखों के नीचे दिखें

उम्र बढ़ने के शुरुआती लक्षण आंखों के नीचे दिखें

आंखों के आसपास की त्वचा बहुत पतली होती है। इसलिए उम्र बढऩे के शुरुआती लक्षण आंखों के नीचे आसानी से दिखाई देते हैं। यही कारण है कि आंखों के नीचे की त्वचा को अधिक देखभाल की जरूरत होती है।
वैसे तो बाजार में ऐसे कई प्रोडक्ट्स है। जो इन समस्याओं से छुटकारा दिलाने में कारगर है। लेकिन इनका असर ज्यादा दिन तक नहीं रहता है ऐसे में आप प्राकृतिक उपचार आजमा सकते हैं।
आंखों की झुर्रियों के लिए प्राकृतिक उपचार
केला और एवोकैडो।
इसके लिए आपको केला और एवोकैडो की जरूरत होगी। एक बाउल लें, इसमें 1 बड़ा चम्मच मैश किया हुआ केला और एवोकैडो मिलाएं। इन्हें एक साथ ब्लेंड करे। अब इसे अपने अंडर आई एरिया पर लगाएं। इसका इस्तेमाल आप नियमित रूप से कर सकते हैं।
हल्दी और छाछ।
हल्दी से बना मास्क आंखों के नीचे की झुर्रियों से छुटकारा पाने के लिए सबसे अच्छे तरीकों में से एक है।इसके लिए आपको हल्दी और छाछ की जरूरत होगी।एक कटोरी में 1 बड़ा चम्मच हल्दी पाउडर और 1 बड़ा चम्मच छाछ लें. स्पैचुल की मदद से इस मिश्रण को एक हल्के मास्क में ब्लेंड करें। मास्क को अपनी अंडरआई के हर इंच पर सावधानी से लगाएं। गीले कॉटन पैड से हटाने से पहले इसे 15 मिनट तक लगा रहने दें।
दही, शहद और गुलाब जल।
इस मास्क को बनाने के लिए एक कटोरे में 1 बड़ा चम्मच ताजा दही, 1 चम्मच शहद और गुलाब जल की कुछ बूंदें मिलाएं। इस मिश्रण को बनाने के लिए सामग्री को अच्छे से मिलाएं। अपनी आंखों पर मास्क लगाएं।ठंडे पानी से धोने से पहले इसे 20-25 मिनट तक लगा रहने दें।
एलोवेरा जेल, खीरा और दही।
सुस्त, रूखी और थकी-सी दिखने वाली आंखों को तुरंत चमकदार और आकर्षक बनाने के लिए आप इस मास्क का इस्तेमाल कर सकते हैं। इसके लिए आपको एलोवेरा जेल, खीरा और दही की जरूरत होगी। एक मिक्सिंग बाउल में 2 बड़े चम्मच एलोवेरा जेल, 1 बड़ा चम्मच दही और 1 बड़ा चम्मच खीरे का रस मिलाएं। सामग्री को मिलाएं और पेस्ट लगाने के लिए अपनी उंगलियों का इस्तेमाल करें। इसे 10 से 15 मिनट के लिए लगा रहने दें। महीन रेखाओं को कम करने के लिए इस प्रक्रिया को सप्ताह में दो बार दोहराएं।
पपीता और शहद।
इस मास्क को बनाने के लिए आपको पपीता और शहद की जरूरत होगी। पपीते के एक स्लाइस को इतना मैश कर लें कि इसका पेस्ट बन जाए। मिश्रण बनाने के लिए सामग्री को मिलाएं और अपनी आंखों पर मास्क लगाएं।ठंडे पानी से धोने से पहले इसे 20-25 मिनट तक लगा रहने दें।

सर्दियों में रसभरी खाने के अनेक फायदेंं

विशेषज्ञों का कहना है कि आपको मौसमी फलों को मिस नहीं करना चाहिए। सर्दियों में रसभरी खाने के कई स्वास्थ्य लाभ होते हैं। दाल शरीर को अच्छे पोषक तत्व प्रदान करने के लिए अच्छी होती है। ये खनिज हृदय स्वास्थ्य के लिए आवश्यक हैं। खून में हीमोग्लोबिन बढ़ाने के लिए भी आयरन की जरूरत होती है। आलूबुखारा एनीमिया की समस्या को कम करता है। सुचारू रक्त परिसंचरण सुनिश्चित करने के लिए शरीर को आलूबुखारे की भी आवश्यकता होती है। सूखे प्लम कैल्शियम और फास्फोरस से भरपूर होते हैं। ये हड्डियों को मजबूत रखने के लिए जरूरी हैं। साथ ही गठिया से पीड़ित लोगों को भी इन फलों को खाने से फायदा हो सकता है। जिन लोगों को जोड़ों की समस्या है उन्हें इन फलों को खाने की सलाह दी जाती है। जामुन तनाव को कम करने में भी अच्छा काम करते हैं। इसमें कई तनाव से राहत देने वाले गुण होते हैं जो त्वचा के स्वास्थ्य और यौवन को बढ़ाते हैं। त्वचा की झुर्रियों को कम करता है। कब्ज वाले लोगों के लिए लेमनग्रास बहुत अच्छा होता है।

हालांकि, रोजाना रास्पबेरी खाने से समस्या काफी कम हो जाएगी। जो लोग अपना वजन कम करना चाहते हैं उनके लिए भी आलूबुखारा एक अच्छा भोजन है। आप कितना भी खा लें, आपका वजन नहीं बढ़ेगा। इसमें फैट नहीं होता, इसमें कैलोरी बहुत कम होती है। शरीर को तुरंत एनर्जी मिलती है. मानव शरीर के लिए आवश्यक 24 अमीनो एसिड में से 18 अकेले प्लम में पाए जाते हैं। ये पेट, अपच, गले में खराश, दमा और मांसपेशियों के दर्द को कम करते हैं। यह गर्भवती महिलाओं में मतली और उल्टी को भी कम करता है। फेफड़ों में जमा हुए थूक से गुर्दे और थूक को बाहर रखने में मदद करता है। तो चिकित्सा विशेषज्ञों का सुझाव है कि किसी भी मौसम में पाए जाने वाले दांत, उम्र की परवाह किए बिना, उस मौसम में खाने के लिए सभी के लिए अच्छे होते हैं।


रविवार, 17 अक्तूबर 2021

आम आदमी के खिलाफ 'संपादकीय'

आम आदमी के खिलाफ   'संपादकीय'
ना रोज़गार-रोटी, ना छत-मकान है,
चर्चे में सियासत के कब्रिस्तान है।
कुछ भीड़ इनके पीछे, कुछ भीड़ उनके आगे,
सचमुच यहाँ की हालत‌ भेड़िया धसान है।
भारत वर्ष के उत्कर्ष का स्वर्णिम वर्ष हर्ष के आगोश में मुस्कराते हुये नव वर्ष की तरफ शनैः शनैः अग्रेषित हो रहा है। चुनावी समीकरण को मन माफिक बनाने के लिये सियासी जमात के सहचर तमाम तरह के अलंकरण से जनमानस के बीच अपनी पहचान रखने वालो को बिभूषित कर रहे हैं। गरीबों के रहनुमाओं की पैदावार बढ गयी, उनके दर्द में फर्ज निभाने वालों की बाढ़ आ गयी है। इसी सीयासी तमाशे से लोगों की चीढ़ बढ़ गयी है। समय की मार देखिये, पढ़ें-लिखों को हर नुक्कड‌ हर चौराहे पर काम की तलाश में खड़ा बेकार देखिये।काम-धन्धे के अभाव में भूखमरी का दंश झेलता हुए गरीब के दिल मे बढता घाव देखिये। हर रोज बदलाव की हवा तेज होती जा रही है। महंगाई कि मार से हर आदमी मानसिक रुप से बीमार हो गया। हर तरफ‌ लूट मची है, हर तरफ अपना दबदबा कायम करता जा रहा‌ है भ्रष्टाचार। चारों तरफ हाहाकार है। फिर भी चुप सरकार है. ऐतिहासिक उत्कर्ष है साहब ! सब कुछ बिक रहा‌ है! रेल, तेल ,भेल ,खेल, जेल,आयुध कारखाना लाल किले का  तहखाना, हवाई अड्डा, ‌गांव गिराव का सरकारी गड्ढा... कल कारखाना, कोयला का खदान, सब कुछ खरीद रहा अडानी 'अम्बानी का खानदान। इसी की चपेट में आकर आन्दोलनरत है महीनों से किसान। वाह साहब देश नहीं बिकने दूंगा। शायद सुनने में गलती हो गयी। देश नहीं बचने दूंगा। गजब की सोच आखिर कैसा बन रहा‌ है हिन्दुस्तान? जहां गिरवी पड़ता जा रहा है स्वाभिमान। देश का ‌‌अन्नदाता आज सिसक रहा है। आने वाले कल में होने वाली त्रासदी को सोचकर‌ परेशान हैं। बंधक बनता जा रहा खेत और खलिहान है। भयंकर वारिस के चलते ,किसानों की खरीफ की फसलें नष्ट हो गईं हैं। किसान खून के आंसू रोने को मज़बूर है। उनकी चिंता बैंकों से लिए कर्ज की अदायगी कैसे करें? बच्चों की फीस,और दवा का इंतजाम कैसे करें? रोज मर्रा का घर का खर्चा कैसे चलेगा? बाढ़ के प्रभाव से शुद्ध पानी को मोहताज़ है। 
यदि पानी उबाल कर पियें तो गैस की मंहगाई चरम पर है। जहां बाढ़ का भयंकर प्रकोप है डायरिया फैलने लगा है। जल-जमाव से डेंगू मच्छरों का खतरा बढ़ा है। पशुओं के चारे का इंतजाम कहां से और कैसे करें? इस उधेड़बुन ने उनका जीना मुहाल कर रखा है। सरकार की ओर से अभी तक उनके दर्द पर मरहम लगाने की कोई घोषणा नहीं हुई। तबाही झेलता किसान संविधान के हासिये पर आजादी के समय ही कर दिया गया। उनके लिये न कोई आयोग से सहयोग मिला, केवल बर्बादी का रोग। सियासत के चुगलखोर चुनाव भर सुबह-शाम 'राम राम' बोलते हैं। चुनाव जीतते ही जय श्रीराम बोलकर भ्रष्टाचार के आगोश में मदहोश हो जाते हैं। चुनाव की दुन्दूभी बजने वाली है। हर कदम पर सियासी मदारी डेरा डाल रहे हैं। अपना करतब दिखाकर बहका कर अपनी झोली भरने की जुगत में है, सावधान रहें ! आप का एक वोट देश की तकदीर बदल सकता हैं।
बाजू पे अपने घर का पता बांध कर चलें,
महफूज़ मेरे शहर के रस्ते नहीं रहें।
जगदीश सिंह
भैय्यागिरी का दौर   'संपादकीय'
आधुनिक राजनीति में समसामयिक बदलावों के साथ प्रौद्योगिक क्रियाओं का बड़ा समावेश हुआ है। क्षेत्रवाद-जातिवाद के ध्रुवीकरण को केंद्रित करके राजनैतिक लाभ उठाने का दौर आज भी जारी है। उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में प्रदेश की अधिकांश विधानसभाओं में आज भी भैय्यागिरी का दौर है। कई विधानसभाओं में संप्रदायिकता ही राजनीति का प्रथम घटक है। हिंसा और द्वेष की आधारशिला पर राजनीति की जाती है। नफरत के सैलाब में भाई बंदगी और प्यार-मोहब्बत का ढांचा धूं-धूं करके जल जाता है। एक ऐसी रेखा हमारे संबंधों के बीच में खींची जाती है, जिसे हम लक्ष्मणरेखा तो नहीं कह सकते लेकिन उसकी मजबूती चीन की दीवार से भी मजबूत होती है। हमारे विचारों को परिवर्तित करने का कार्य किया जाता है और हम सभी इस बंटवारे के मूकबधिर पात्र बन जाते है। 
सत्ता पाने के लालच में गणतंत्र की व्यवस्था और संवैधानिक मूल्यों का कोई वजूद नहीं रह जाता है। जिस प्रकार से जातिवाद की संरचना और विस्तार का दौर जारी है। यह सामाजिक ताने-बाने को प्रभावित करता है। परंतु किस स्तर तक प्रभावित करेगा, क्या इसका दुष्परिणाम होगा ? इसका अनुमान इस प्रक्रिया के संरक्षकों को भी नहीं है। राजनीतिक लाभ प्राप्त करने के प्रति किए गए कूटनीतिक प्रयासों की उपेक्षा नहीं की जा सकती है। किंतु कूटनीतिक प्रयासों की जड़ें कितनी गहरी है, उससे उत्पन्न होने वाले भावी परिणाम को समझना शुद्ध राजनीति है। हालांकि राजनीति की पृष्ठभूमि में बड़े परिवर्तन से नवीनीकरण की संभावनाएं बढ़ गई हैं। आधुनिकरण की पराकाष्ठा में प्रदेश की राजनीति का केंद्र विधानसभा चुनाव 2022 में भी जातिवाद और ध्रुवीकरण आधारित ही रहेगा। इसमें किसी प्रकार के किसी बदलाव की कोई गुंजाइश नहीं है। 
सत्तारूढ़ भाजपा की कूटनीति का विशेष और महत्वपूर्ण दांवपेच का कारोबार बल्कि दारमोदार यहीं से शुरू होगा। सामाजिक द्वेष की परिधि का दायरा बढ़ने से प्रदेश की कई विधानसभा में भाजपा के प्रति अप्रिय परिणाम तो फलीभूत होंगे ही साथ में अप्रत्याशित परिणाम भाजपा के पतन का प्रारंभ भी होगा। बढ़ते हुए द्वेष में आक्रोश का व्याप्त होना स्वभाविक है। योगी सरकार की असफलता और असंतुष्ट मतदाता उल्टे दिनों के प्रतिबिंब बन कर उभरेगें। इसके लिए ज़हन पर जोर देने की जरूरत नहीं है। उदाहरण के तौर पर लोनी विधानसभा में पहली बार भाजपा के विरुद्ध रिकॉर्ड तोड़ मतदान होगा। असंतुष्ट भाजपा कैडर और राजनेताओं में उत्पन्न मतभेद से जो व्यवधान उत्पन्न हुआ है। उसके परिणाम स्वरूप भाजपा को एक छत्र के नीचे लाना दुर्गम होता जा रहा है। स्वयं की विश्वसनीयता को स्थिर रख पाना राजनेताओं के लिए एक चुनौती बन गई है। वंही, जनता झूठी तसल्ली और खोखले वादों का असली सच समझ चुकी है। महामारी के दौर में लाचारी और महंगाई की मार ने आंखें खोल दी है। जिनको 1000-1200 रुपए प्रतिदिन दिहाड़ी-मजदूरी मिलती है। बस, वही लोग अपने संकल्प को नहीं तोड़ेंगे। जनता की बदहाली का आईना बिल्कुल साफ है।
राधेश्याम 'निर्भयपुत्र'

उत्तरी क्षेत्रों में लोकप्रिय खाद्य व्यंजन हैं 'छोले भटूरे'

छोले भटूरे भारतीय उपमहाद्वीप के उत्तरी क्षेत्रों में लोकप्रिय एक खाद्य व्यंजन है। यह चना मसाला (मसालेदार सफेद छोले) और भटूरा/पूरी का एक संयोजन है। जो मैदा से बनी एक तली हुई रोटी है। हालांकि इसे एक विशिष्ट पंजाबी व्यंजन के रूप में जाना जाता है, लेकिन पकवान की उत्पत्ति के बारे में विभिन्न दावे हैं। छोले भटूरे को अक्सर नाश्ते के व्यंजन के रूप में खाया जाता है, कभी-कभी लस्सी के साथ। यह स्ट्रीट फ़ूड या संपूर्ण भोजन भी हो सकता है और इसके साथ प्याज, मसालेदार गाजर, हरी चटनी या आचार भी हो सकता है। मैदा और सूजी को किसी बर्तन में छान कर निकाल लीजिये, मैदा के बीच में जगह बनाइये, 2 टेबिल स्पून तेल, नमक, बेकिंग पाउडर, दही और चीनी इसमें डालकर, इसी जगह इन सब चीजों को अच्छी तरह मिला लीजिये। गुनगुने पानी की सहायता से नरम आटा गूथ लीजिये। गुथे हुये आटे को 2 घंटे के लिये बन्द अलमारी या किसी गरम जगह पर ढक कर रख दीजिये। कढ़ाई में तेल डाल कर गरम करें। गूथे हुये आटे से एक टेबिल स्पून आटे के बराबर आटा निकालिये। लोई बनाइये और पूरी की तरह बेलिये, लेकिन यह, पूरी से थोड़ा सा मोटा बेला जाता है। पूरी को गरम तेल में डालिये, कलछी से दबाकर फुलाइये, दोनों ओर पलट कर हल्का ब्राउन होने तक तलिये। 
काबुली चना एक कटोरी या 150 ग्राम, खाना वाला सोडा आधा चम्मच, टमाटर -3-4 मीडियम साइज, हरी मिर्च - 2-3, अदरक - 1 इन्च लम्बा टुकड़ा य़ा एक छोटी चम्मच अदरक का पेस्ट, रिफाइन्ड तेल - 2 टेबिल स्पून, जीरा - आधा छोटी चम्मच, धनियाँ पाउडर - एक छोटी चम्मच, लाल मिर्च पाउडर - एक चौथाई छोटी चम्मच से कम, गरम मसाला।
चनों को रात भर पानी में भिगने रख दीजिये। पानी से निकाल कर चनों को धोकर, कुकर में डालिये, एक छोटा गिलास पानी, नमक और खाना सोडा मिला दीजिय। कुकर बन्द करें और गैस पर उबालने के लिये रख दीजिये। दूसरी तरफ टमाटर, हरी मिर्च, अदरक को मिक्सी से बारीक पीस लें। कढ़ाई में तेल डाल कर गरम करें। जीरा भुनने के बाद धनियाँ पाउडर डाल दीजिये। चमचे से चलायें, टमाटर, अदरक, हरी मिर्च का मिश्रण और लाल मिर्च पाउडर डाल कर मसाले को जब तक भूने तब तक कि मसाले के ऊपर तेल न तैरने लगे। भुने मसाले में एक गिलास पानी और स्वादानुसार नमक डाल दीजिये। उबले चनों को इस मसाले की तरी में मिला कर अच्छी तरह चमचे से चला लीजिये। यदि आपको छोले अधिक गाढ़े लग रहे हो, तो आप उनमें आवश्यकता अनुसार पानी मिला लीजियें, उबाल आने के बाद 2-3 मिनिट पकने दीजिये। गरम मसाला और आधा हरा धनियाँ मिला दीजिये। आपके छोले तैयार हैं। इन्हें भटूरे के साथ सर्व करें।
 
शुक्ल-पक्ष की पूर्णिमा को मनाई जाती है शरद पूर्णिमा

हिंदू पंचांग के अनुसार आश्विन माह के शुक्ल-पक्ष की पूर्णिमा को शरद पूर्णिमा मनाई जाती है। शरद पूर्णिमा को 'कौमुदी व्रत', 'रास पूर्णिमा' और 'कोजागरी पूर्णिमा' भी कहा जाता है। इस बार शरद पूर्णिमा 19 अक्टूबर (मंगलवार) को 7 बजे से शुरू होकर 20 अक्टूबर को 8 बजकर 21 मिनट पर समाप्त होगी। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार पूरे साल में सिर्फ इसी दिन चांद अपनी 16 कलाओं से युक्त है। माना जाता है कि शरद पूर्णिमा के दिन चाँद 16 कलाओं से परिपूर्ण होकर रातभर अमृत बरसता है। यही वजह है कि उत्तर भारत में शरद पूर्णिमा को रात में खीर बनाकर रातभर चाँदनी में रखने का रिवाज है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन श्रीकृष्ण ने निधिवन में गोपियों के साथ महारास रचाया था इसलिए इसे रास पूर्णिमा के नाम से भी जाना जाता है। शरद पूर्णिमा को लेकर कई मान्यताएँ प्रचलित है। पौराणिक कथाओं के अनुसार इस दिन धन की देवी माँ लक्ष्‍मी जी का जन्‍म हुआ था। ऐसा कहा जाता है कि शरद पूर्णिमा की रात लक्ष्‍मी माता घर-घर जाती हैं और जागने वाले भक्‍तों को धन-वैभव का वरदान देती हैं। शरद पूर्णिमा के दिन ही वाल्मिकि जयंती भी मनाई जाती है। शरद पूर्णिमा मनाने के पीछे एक धार्मिक मान्यता यह भी है कि शरद पूर्णिमा के दिन भगवान विष्णु के चार माह के शयनकाल का अंतिम चरण होता है। ऐसा माना जाता है कि शरद पूर्णिमा का व्रत करने से सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। ऐसा कहा जाता है कि जो विवाहित स्त्रियां शरद पूर्णिमा का व्रत करती हैं उन्‍हें संतान-सुख की प्राप्‍ति होती है। वहीं, माताएँ अपनी संतान की दीर्घायु के लिए यह व्रत करती हैं। कुँवारी कन्याओं को शारद पूर्णिमा का व्रत करने से मनवांछित व्रत की प्राप्ति होती है। शरद पूर्णिमा के दिन सुबह उठकर स्‍नान करने के बाद व्रत का संकल्‍प लें। इसके बाद मंदिर की साफ-सफाई कर पूजा की तैयारी कर लें। पूजा की तैयारी के बाद घर में मौजूद मंदिर में दीया जलाएं। दीपक जलाकर ईष्‍ट देवता का पूजन करें। साथ ही भगवान इंद्र और माता लक्ष्‍मी की पूजा करें। अब धूप, दीप और बत्ती से भगवान की आरती उतारें। शाम के समय लक्ष्‍मी जी की पूजा करें और आरती भी उतारें। अब चंद्रमा को अर्घ्‍य देकर प्रसाद चढ़ाएं और आरती उतारें। इसके बाद व्रत तोड़ें। साथ ही प्रसाद की खीर को रात 12 बजे के बाद अपने दोस रिश्तेदारों में बांटें।

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