शनिवार, 27 मई 2023

अंगूर से किशमिश बनाने का तरीका, जानिए 

अंगूर से किशमिश बनाने का तरीका, जानिए 

सरस्वती उपाध्याय 

ड्राई फ्रूट्स हम सभी की सेहत के लिए बहुत लाभकारी होते हैं, ये तो हम सभी जानते हैं। वहीं, ड्राई फ्रूट्स हमारी डिश का स्वाद भी बढ़ाते हैं। इन ड्राई फ्रूट्स में से एक है किशमिश जो हमारे शरीर में आयरन की कमी को पूरा करती है। वहीं इसे हम मीठी डिश में डालकर स्वाद भी बढ़ा सकते हैं। इससे आपकी डिश का स्वाद कई गुना बढ़ जाता है।

बता दें, कि किशमिश को अगर बाजार से खरीदें तो ये काफी महंगी मिलती है। लेकिन, अगर आप इसे घर पर बनाएंगे, तो आपका काफी पैसे बच जाएंगे। आज हम आपको घर पर ही आसान तरीके से किशमिश बनाने के बारे में बताने जा रहे हैं, तो चलिए जानते हैं, इसे बनाने का तरीका। 

घर पर किशमिश बनाने के लिए जरूरी सामान...

एक किलो अंगूर।

स्टीमर।

किशमिश बनाने की विधि...

बता दें, कि अगर आप घर पर किशमिश बनाना चाहते हैं तो सबसे पहले एक किलो अंगूर लेकर इसे अच्छे से धो लें। इसके बाद इसकी डंडी निकाल कर अलग कर दें। नहीं तो इसका टेस्ट खराब हो सकता है। अगर आपके पास इडली स्टीमर है तब तो काफी अच्छा वरना सादा भिगोने को स्टीमर की तरह इस्तेमाल कर सकते हैं। अब स्टीमर में उसके साइज के हिसाब से पानी भर दें। अब स्टीमर की ट्रे में अंगूरों को भर कर गैस पर चढ़ा दें। करीब 20 मिनट बाद गैस बंद करके स्टीमर को खोलने पर आपको अंगूरों का रंग पीला दिखने लगेगा। रंग बदलने के बाद इसे निकाल कर सूती चादर पर डालकर ऐसी जगह फैला दें, जहां धूप आती हो। दो-तीन दिनों तक इसे ऐसे ही सूखने दें।

निर्धारित समय के बाद आप देखेंगे कि अंगूर सिकुड़ने लगेंगे। बता दें, कि सुखाते वक्त इस बात का ध्यान रखें कि ये अलग-अलग रहे। वरना इसके स्वाद पर असर पड़ सकता है। वहीं तीसरे दिन आप इसे पंखे के नीचे सुखाने के लिए रखें। लो जी बस अब आपकी किशमिश तैयार है, इसे एक एयर टाइट डिब्बे में रखकर आप करीब साल भर तक इसे यूज कर सकते हैं।

आज नए संसद भवन का उद्घाटन करेंगे 'पीएम'

आज नए संसद भवन का उद्घाटन करेंगे 'पीएम'

अकांशु उपाध्याय 

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी कई विपक्षी दलों के बहिष्कार के बीच, अत्याधुनिक प्रौद्योगिकी से लैस नए संसद भवन का रविवार को उद्घाटन करेंगे। हालांकि, विपक्ष के 20 दलों का कहना है, कि राष्ट्राध्यक्ष होने के नाते राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को नए संसद भवन का उद्घाटन करना चाहिए। शुक्रवार को, मोदी ने कहा था कि नया संसद भवन प्रत्येक भारतीय को गौरवान्वित करेगा। उन्होंने नए परिसर का वीडियो भी साझा किया था। नये संसद भवन में उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर की कालीन, त्रिपुरा के बांस से बने फर्श और राजस्थान के पत्थर की नक्काशी भारत की संस्कृतिक विविधता को दर्शाती है।

तमिलनाडु से संबंध रखने वाले और चांदी से निर्मित एवं सोने की परत वाले ऐतिहासिक राजदंड (सेंगोल) को लोकसभा अध्यक्ष के आसन के पास स्थापित किया जाएगा। अगस्त 1947 में सत्ता हस्तांतरण के प्रतीक के तौर पर प्रथम प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू को दिया गया यह रस्मी राजदंड इलाहाबाद संग्रहालय की नेहरू दीर्घा में रखा गया था। उद्घाटन समारोह का 20 विपक्षी दलों द्वारा बहिष्कार किए जाने के बीच, राजदंड को लेकर भी राजनीतिक विवाद छिड़ गया है।

कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने शुक्रवार को दावा किया कि इस बारे में कोई दस्तावेजी सबूत नहीं है, जिससे यह साबित होता हो कि लॉर्ड माउंटबेटन, सी राजगोपालाचारी और पंडित जवाहरलाल नेहरू ने ‘सेंगोल’ को ब्रिटिश हुकूमत द्वारा भारत को सत्ता हस्तांतरित किए जाने का प्रतीक बताया हो। ‘सेंगोल’ पर कांग्रेस के रुख को लेकर गृह मंत्री अमित शाह ने कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि कांग्रेस को अपने व्यवहार पर अच्छी तरह से विचार करने की आवश्यकता है।उन्होंने पार्टी के इस दावे की निंदा की कि 1947 में ‘सेंगोल’ को ब्रिटेन द्वारा भारत को सत्ता सौंपे जाने का प्रतीक होने का कोई उदाहरण नहीं है। नये संसद भवन के उद्घाटन के अवसर पर, सरकार 75 रुपये का स्मारक सिक्का भी जारी करेगी। वित्त मंत्रालय के तहत आने वाले आर्थिक कार्य विभाग द्वारा बृहस्पतिवार को जारी एक अधिसूचना के अनुसार, “नये संसद भवन के उद्घाटन के उपलक्ष्य में 75 रुपये का स्मारक सिक्का जारी किया जाएगा।

सिक्के का वजन 35 ग्राम है और यह चार धातुओं से बना हुआ है।” सिक्के के एक तरफ अशोक स्तंभ का शेर अंकित है, जिसके नीचे ‘सत्यमेव जयते’ लिखा है। इसके बाईं ओर देवनागरी में ‘भारत’ और दाईं ओर अंग्रेजी में ‘इंडिया’ लिखा होने के साथ ही रुपये का प्रतीक चिन्ह भी अंकित है। वहीं, सिक्के के दूसरी तरफ नए संसद भवन की तस्वीर है। इसके ऊपर देवनागरी में ‘संसद संकुल’ और नीचे अंग्रेजी में ‘पार्लियामेंट कॉम्प्लेक्स’ लिखा है। नीचे 2023 भी लिखा हुआ है। टाटा प्रोजेक्ट्स लिमिटेड द्वारा निर्मित नये संसद भवन में भारत की लोकतांत्रिक विरासत को प्रदर्शित करने के लिए एक भव्य संविधान हॉल, संसद सदस्यों के लिए एक लाउंज, एक पुस्तकालय, कई समिति कक्ष, भोजन क्षेत्र और पर्याप्त पार्किंग स्थल मौजूद होगा। त्रिभुजाकार वाले चार मंजिला संसद भवन का निर्मित क्षेत्र 64,500 वर्ग मीटर है। भवन के तीन मुख्य द्वार हैं- ज्ञान द्वार, शक्ति द्वार और कर्म द्वार। इसमें वीआईपी (अति विशिष्ट व्यक्तियों), सांसदों और आगंतुकों के लिए अलग-अलग प्रवेश द्वार हैं। नये संसद भवन के निर्माण में उपयोग की गई सामग्री देश के विभिन्न हिस्सों से लाई गई है। इसमें प्रयुक्त सागौन की लकड़ी महाराष्ट्र के नागपुर से लाई गई है, जबकि लाल और सफेद बलुआ पत्थर राजस्थान के सरमथुरा से लाया गया है।

राष्ट्रीय राजधानी में लाल किले और हुमायूं के मकबरे के लिए बलुआ पत्थर भी सरमथुरा से लाया गया था। हरा पत्थर उदयपुर से, तो अजमेर के पास लाखा से लाल ग्रेनाइट और सफेद संगमरमर अंबाजी राजस्थान से मंगवाया गया है। एक अधिकारी ने कहा, ‘‘एक तरह से लोकतंत्र के मंदिर के निर्माण के लिए पूरा देश एक साथ आया है। इस प्रकार यह ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ की सच्ची भावना को दर्शाता है।’’ लोकसभा और राज्यसभा कक्षों में ‘फाल्स सीलिंग’ के लिए स्टील की संरचना केंद्र शासित प्रदेश दमन और दीव से मंगाई गई है, जबकि नये भवन के लिए फर्नीचर मुंबई में तैयार किया गया था। इमारत पर लगी पत्थर की ‘जाली’ राजस्थान के राजनगर और उत्तर प्रदेश के नोएडा से मंगवाई गई थी। अशोक चिह्न के लिए सामग्री महाराष्ट्र के औरंगाबाद और राजस्थान के जयपुर से लाई गई थी, जबकि संसद भवन के बाहरी हिस्सों में लगी सामग्री को मध्य प्रदेश के इंदौर से मंगाया गया था।

पत्थर की नक्काशी का काम आबू रोड और उदयपुर के मूर्तिकारों द्वारा किया गया था। वहीं, पत्थरों को कोटपूतली, राजस्थान से लाया गया था। नए संसद भवन में निर्माण गतिविधियों के लिए ठोस मिश्रण बनाने के वास्ते हरियाणा के चरखी दादरी में निर्मित रेत या ‘एम-रेत’ का इस्तेमाल किया गया। ‘एम रेत’ एक प्रकार की कृत्रिम रेत है, जिसे बड़े सख्त पत्थरों या ग्रेनाइट को बारीक कणों में तोड़कर बनाया जाता है और जो नदी की रेत से अलग होती है। निर्माण में इस्तेमाल की गई ‘फ्लाई ऐश’ की ईंटें हरियाणा और उत्तर प्रदेश से मंगवाई गई थीं, जबकि पीतल के काम के लिए सामग्री और ‘पहले से तैयार सांचे’ गुजरात के अहमदाबाद से लाए गए थे। नये संसद भवन में, दोनों सदनों (लोकसभा और राज्यसभा) की संयुक्त बैठक में 1,280 सदस्य शामिल हो सकेंगे। संसद का मौजूदा भवन 96 साल पुराना है, जिसका निर्माण कार्य 1927 में पूरा हुआ था। तत्कालीन वाइसरॉय लॉर्ड इरविन ने 18 जनवरी 1927 को इसका उद्घाटन किया था। अभिलेखीय दस्तावेजों और पुरानी दुर्लभ तस्वीरों के मुताबिक, इस भव्य इमारत के उद्घाटन के लिए 18 जनवरी 1927 को एक भव्य आयोजन किया गया था। उस समय इसे ‘काउंसिल हाउस’ के रूप में जाना जाता था।

1 अंतरराज्यीय हथियार तस्कर को गिरफ्तार किया 

1 अंतरराज्यीय हथियार तस्कर को गिरफ्तार किया 

राणा ओबरॉय 

चंडीगढ़। हरियाणा पुलिस ने शनिवार को कहा, कि उसने एक अंतरराज्यीय हथियार तस्कर को मध्य प्रदेश से गिरफ्तार किया है और उसके पास से 14 अवैध पिस्तौलें और इतनी ही संख्या में मैगजीन बरामद की हैं। हरियाणा पुलिस के एक प्रवक्ता ने बताया कि आरोपी की पहचान मध्य प्रदेश के उमराती गांव के मूल निवासी गुरुदेव सिंह बरनाला के रूप में हुई है, जो वर्तमान में राज्य के बुरहानपुर जिले में रह रहा था।

प्रवक्ता ने बताया, “पुलिस की एक टीम 20 सितंबर 2022 को हरियाणा में होडल-पुनहाना रोड पर गश्त लगा रही थी। इस दौरान, उसे सूचना मिली कि आसिफ नाम के एक शख्स के पास अवैध पिस्तौलें हैं और वह इन्हें बेचना चाहता है।” उन्होंने कहा, “सूचना पर कार्रवाई करते हुए आसिफ को गिरफ्तार कर लिया गया और उसके कब्जे से दो पिस्तौलें और दो मैगजीन बरामद की गईं।”

प्रवक्ता के मुताबिक, आगे की जांच के आधार पर 19 मई को उत्तर प्रदेश के मथुरा के रहने वाले एक अन्य संदिग्ध शहनवाज उर्फ ​​सैनी को गिरफ्तार किया गया। प्रवक्ता ने बताया कि पूछताछ के दौरान शहनवाज ने बरनाला के बारे में खुलासा किया, जिसे 23 मई को मध्य प्रदेश से गिरफ्तार किया गया। प्रवक्ता के अनुसार, तलाशी के दौरान पुलिस ने बरनाला के कब्जे से 14 अवैध देसी पिस्तौलें और 14 मैगजीन बरामद की।

उन्होंने कहा कि पुलिस बरनाला से पूछताछ कर रही है और उम्मीद है कि हथियारों की तस्करी में शामिल पूरे गिरोह के बारे में और जानकारी सामने आएगी। प्रवक्ता ने बताया कि इस मामले में कुल तीन लोगों को गिरफ्तार किया गया है और अब तक कुल 16 पिस्तौलें और 16 मैगजीन जब्त की गई हैं। 

भाजपा, 9 वर्षों में सपने दिखाने के अलावा कुछ नहीं

भाजपा, 9 वर्षों में सपने दिखाने के अलावा कुछ नहीं

अविनाश श्रीवास्तव 

पटना। बिहार में सत्तारूढ़ जनता दल यूनाइटेड (जदयू) ने केंद्र सरकार पर एक भी वादा ठीक से पूरा नहीं कर पाने का आरोप लगाते हुए शनिवार को कहा, कि प्रचार के सहारे चल रही भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने नौ वर्षों के राज में जनता को कोरे सपने दिखाने के अलावा कुछ नहीं किया है।

जदयू के राष्ट्रीय प्रवक्ता एवं महासचिव राजीव रंजन ने केंद्र सरकार के नौ वर्षों को हर मानक पर फेल बताया और भाजपा पर एक भी वादा ठीक से पूरा नहीं कर पाने का आरोप लगाते हुए कहा कि प्रचार के सहारे चल रही भाजपा ने नौ वर्षों के राज में जनता को कोरे सपने दिखाने के अलावा कुछ नहीं किया है। लगातार दो कार्यकाल के बाद भी यह ऐसा एक वादा नहीं बता सकते जिसे इन्होंने ठीक से पूरा किया।

इनका पूरा समय योजनाओं का रिबन काटने और उसके फोटोग्राफ प्रचारित करवाने में लगा रह गया है। श्री रंजन ने भाजपा से सवाल पूछते हुए कहा कि आज एक तरफ भाजपा के बयानवीर नौ वर्षों की झूठी उपलब्धियां गिना रहे हैं वहीं दूसरी तरफ जनता ठगी हुई महसूस कर रही है। अपनी पीठ खुद थपथपा रहे भाजपाइयों को यह बताना चाहिए कि उन्होंने कितने किसानों की आमदनी दुगनी की है।

उन्हें बताना चाहिए कि कौशल विकास मंत्रालय पर सैकड़ों करोड़ रुपए बहाने के बावजूद भारत में कुशल कामगारों की संख्या दो फीसदी क्यों है। जदयू महासचिव ने कहा कि भाजपा ने पेट्रोल डीजल के दाम घटाने का वादा किया था, लेकिन उसे और मंहगा कर 100 रुपए के पार पहुंचा दिया। उन्हें बताना चाहिए कि कच्चे तेल के दामों के कमी के बाद भी उन्होंने पेट्रोल डीजल के दाम क्यों नहीं घटाए।

रंजन ने पूछा कि भाजपा को बताना चाहिए कि उन्होंने विदेशों से कितना काला धन देश में वापस लाया। वह बताएं कि उनके शासन में सिर्फ अदानी-अंबानी की संपत्तियों का ही विकास क्यों हुआ। वह बताएं कि दो करोड़ सालाना रोजगार के वादे के मुताबिक कितने रोजगार दिए गये। मध्यवर्ग की आमदनी क्यों नहीं बढ़ी।

उज्ज्वला योजना फेल क्यों हो रही है ? वह बताएं कि नमामि गंगे में अरबों रुपए खर्च करने के बाद भी गंगा जी अभी तक साफ़ क्यों नहीं हुई। जदयू के राष्ट्रीय प्रवक्ता ने कहा कि वास्तव में मोदी सरकार के नौ साल नाकामी, जनता के साथ धोखेबाजी और जुमलेबाजी के नौ साल हैं।

इन वर्षों में सरकार ने सिर्फ प्रवर्तन निदेशालय (ईईडी), केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) के जरिये विपक्ष को दबाने, सांप्रदायिक उन्माद फैलाने और जनता को भरमाने का काम किया है। मोदी सरकार के इन नौ सालों में विकास सिर्फ भाजपा के पूंजीपति मित्रों का हुआ है वहीं जनता की हालत और दयनीय हो गई है।

मौंत की सजा, एचसी का दरवाजा खटखटाया 

मौंत की सजा, एचसी का दरवाजा खटखटाया 

अकांशु उपाध्याय/इकबाल अंसारी 

नई दिल्ली/श्रीनगर। राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने आतंकवादी फंडिग के आरोप में जम्मू-कश्मीर लिबरेशन फ्रंट के प्रमुख यासीन मलिक को मौंत की सजा दिलाने के लिए दिल्ली उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया है, जिसको लेकर प्रदेश के राजनीतिक दलों ने अलग-अलग प्रतिक्रिया व्यक्त की है। पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) प्रमुख महबूबा मुफ्ती ने कहा कि यासीन जैसे राजनीतिक कैदी के मामले की ‘समीक्षा और पुनर्विचार’ किया जाना चाहिए।

अपनी पार्टी के प्रमुख अल्ताफ बुखारी ने कहा, ‘निवारक उपाय’ उन लोगों के खिलाफ किए जाने चाहिए, जो राष्ट्रीय सुरक्षा को खतरे में डालने की कोशिश कर रहे हैं। एनआईए ने आतंकवादी फंडिंग मामले में दोषी ठहराए गए यासीन के लिए मौत की सजा की मांग करते हुए, शुक्रवार को दिल्ली उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया। न्यायालय सोमवार को इस मामले की सुनवाई करेगा। यासिन को इस मामले में दोषी ठहराए जाने के बाद, पिछले साल मई में विशेष एनआईए अदालत ने आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। अपनी पार्टी के प्रमुख बुखारी ने ट्वीट किया, “यासीन मलिक के लिए मौत की सजा की मांग करने वाली एनआईए की याचिका जम्मू-कश्मीर में आतंकवादी फंडिंग को संबोधित करने के महत्व पर प्रकाश डालती है।

हमें यह सुनिश्चित करना चाहिए कि न्याय कायम रहे और जो लोग हमारे देश की सुरक्षा को खतरे में डालने की कोशिश कर रहे हैं, उनके खिलाफ निवारक उपाय किए जाएं। उन्होंने ट्वीट किया कि पीडीपी प्रमुख महबूबा मुफ्ती ने बुखारी के मलिक द्वारा अपने पूर्व पार्टी सहयोगी को "राजनीतिक इख्वान" (पाखण्डी) कहे जाने के बयान पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की। जिस पर समीक्षा और पुनर्विचार किया जाना चाहिए। उनकी फांसी का समर्थन करने वाला नया राजनीतिक इख्वान हमारे सामूहिक अधिकारों के लिए गंभीर खतरा है।”

पहलवान बेटियों को न्याय देने की मांग: सिसोदिया 

पहलवान बेटियों को न्याय देने की मांग: सिसोदिया 

अकांशु उपाध्याय 

नई दिल्ली। शराब घोटाला मामलें में जेल में बंद आम आदमी पार्टी के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने शनिवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर जंतर-मंतर पर धरना दे रहीं देश का गौरव बढ़ाने वाली पहलवान बेटियों को न्याय देने की मांग की है। सिसोदिया ने कहा कि प्रधानमंत्री इस प्रकरण से ऐसे अपना मुंह मोड़े हुए हैं, जैसे यह बेटियां पाकिस्तान से आई हुई हैं।

विदेशी धरती पर मेडल जीत कर भारत का नाम रौशन करने वाली इन बेटियों को प्रधानमंत्री अपने परिवार का सदस्य बताते नहीं थक रहे थे, लेकिन अब चुप हैं। हर बात पर ‘‘मन की बात’’ बताने वाले प्रधानमंत्री क्या सिर्फ इसलिए चुप हैं, क्योंकि आरोपी उनकी पार्टी का एक बाहुबली सांसद है? उन्होंने प्रधानमंत्री को लिखे पत्र में कहा, “ प्रधानमंत्री, आपने तो कहा था कि बेटियां देश की गौरव होती है।

फिर इन बेटियों ने तो सच में देश का गौरव बढ़ाया है। इन प्रतिभाशाली बेटियों की वजह से विदेशी धरती पर हमारा तिरंगा सबसे ऊपर लहराया है। इनकी वजह से विदेशी सरजमीं पर हमारा राष्ट्रगान गुंजायमान हुआ है। जो बेटी पदक जीतने पर, भारत का गौरव बढ़ाते हुए इतनी भावुक हुई कि उसकी आंखों से आंसू निकल आए, वह आज जब जंतर-मंतर पर न्याय के लिए आंसू बहा रही है, तो एक भारतीय होने के नाते मेरा खून खौल उठता है।

पूर्व उपमुख्यमंत्री कहा, “ हम आपके राजनीतिक विरोधी हैं, आपने हमारे काम रोकने के लिए आठ साल तक संविधान का गला घोंटा। अपनी सारी एजेंसियों को समझाकर मुझे झूठे आरोपों में जेल भेजा। आप अपने राजनीतिक विरोधियों को जेल भेजिए, फांसी लगवा दीजिए, यह आपकी राजनीति का तरीका और स्तर हो सकता है। लेकिन, भारत का गौरव बढ़ाने वाली इन बेटियों को न्याय दीजिए, नहीं तो कोई भी प्रतिभाशाली बेटी फिर इस देश में किसी शक्तिशाली व्यक्ति के खिलाफ आवाज़ उठाने का साहस नहीं कर सकेगी।”

पार्टी की वरिष्ठ नेता एवं दिल्ली की शिक्षा मंत्री आतिशी मार्लेना ने सिसोदिया के लिखे पत्र को ट्वीटर पर साझा कर कहा, ‘‘जेल से मनीष सिसोदिया लिखते हैं। प्रधानमंत्री, आप अपने विरोधियों को जेल भेजिए, फांसी पर लटका दीजिए। लेकिन भारत का गौरव बढ़ाने वाली बेटियों को न्याय दीजिए, वरना इस देश की कोई भी बेटी अपनी आवाज़ उठाने की हिम्मत नहीं करेगी।” 

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प्राधिकृत प्रकाशन विवरण

प्राधिकृत प्रकाशन विवरण


1. अंक-226, (वर्ष-06)

2. रविवार, मई 28, 2023

3. शक-1944, ज्येष्ठ, शुक्ल-पक्ष, तिथि-अष्टमी, विक्रमी सवंत-2079‌‌।

4. सूर्योदय प्रातः 06:40, सूर्यास्त: 06:10। 

5. न्‍यूनतम तापमान- 24 डी.सै., अधिकतम- 36+ डी.सै.।

6. समाचार-पत्र में प्रकाशित समाचारों से संपादक का सहमत होना आवश्यक नहीं है। सभी विवादों का न्‍याय क्षेत्र, गाजियाबाद न्यायालय होगा। सभी पद अवैतनिक है। 

7.स्वामी, मुद्रक, प्रकाशक, संपादक राधेश्याम व शिवांशु  (विशेष संपादक) श्रीराम व सरस्वती (सहायक संपादक) संरक्षण-अखिलेश पांडेय, ओमवीर सिंह, वीरसैन पंवार, योगेश चौधरी आदि के द्वारा (डिजीटल सस्‍ंकरण) प्रकाशित। प्रकाशित समाचार, विज्ञापन एवं लेखोंं से संपादक का सहमत होना आवश्यक नहीं हैं। पीआरबी एक्ट के अंतर्गत उत्तरदायी।

8. संपर्क व व्यवसायिक कार्यालय- चैंबर नं. 27, प्रथम तल, रामेश्वर पार्क, लोनी, गाजियाबाद उ.प्र.-201102। 

9. पंजीकृत कार्यालयः 263, सरस्वती विहार लोनी, गाजियाबाद उ.प्र.-201102

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(सर्वाधिकार सुरक्षित)

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