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शनिवार, 4 जून 2022

घर के मंदिर में नहीं रखी जाती 'शनिदेव' की मूर्ति

घर के मंदिर में नहीं रखी जाती 'शनिदेव' की मूर्ति

सरस्वती उपाध्याय    
भगवान की पूजा के लिए लोग अपने घरों में सभी देवी-देवताओं की मूर्ति रखते हैं। लेकिन घर में शनि देव की मूर्ति नहीं रखी जाती है। आखिर क्या है इसके पीछे की वजह आइए जानें। जैसा के हम सभी लोग जानते है कि शनिवार का दिन भगवान शनि को समर्पित होता है।
इस दिन शनि देव की पूजा की जाती है। मान्यता है कि अगर किसी व्यक्ति के कुंडली में शनि की साढ़े साती या महादशा चल रही है तो इस दिन पूजा-पाठ करने से शुभ फलों की प्राप्ति होती है। लेकिन इसके बावजूद भी शनिदेव की मूर्ति को घर में रखने पर पाबंदी है। 
आइए जानें कि आखिर ऐसी क्या वजह है ?
जिसके कारण शनिदेव की मूर्ति को घर के मंदिर में नहीं रखा जाता।
शास्त्रो में कुछ देवी- देवताओं की तस्वीर लगाना वर्जित माना गया है। इन्हीं में से शनिदेव की मूर्ति घर पर लगाना वर्जित माना गया है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार शनि देव को श्राप मिला था कि वह जिसे भी देखेंगे, उसका अनिष्ट यानी बुरा हो जाएगा। यही वजह है कि शनिदेव (Shani Dev) की दृष्टि सीधे तौर पर हमारे जीवन पर ना पड़े इसलिए शनिदेव की तस्वीर या मूर्ति को घर के मंदिर में रखना सही नहीं माना जाता।
कैसे करें शनि देव की मूर्ति पूजा
शनिवार के दिन पूजा के दौरान लाल रंग या लाल फूल का भी प्रयोग न करें क्योंकि लाल रंग मंगल का परिचायक है और मंगल शनि के शत्रु ग्रह हैं।
इस दिन नीले या काले रंगों का ही प्रयोग करना चाहिए। शनि देव की पूजा में हमेशा लोहे के बर्तनों का प्रयोग करना चाहिए।
भूलकर भी शनि देव की पूजा में तांबे के बर्तनों का प्रयोग नहीं करना चाहिए, क्योंकि तांबा का संबंध सूर्यदेव से है और सूर्यपुत्र होने के बावजूद शनि देव सूर्य के परम शत्रु हैं।
पूजा करते समय कभी भी उनकी मूर्ति के सीधे सामने खड़े होकर उनके दर्शन नहीं करने चाहिए।
शनि देव के दर्शन हमेशा मूर्ति के दाएं या बाईं ओर खड़े होकर करना चाहिए।
मंदिर में पूजा करते वक्त शनि देव की आंखों में आंखें डालकर दर्शन नहीं करना चाहिए।
शनि देव की दृष्टि से बचने के लिए बेहतर है कि शनि देव की मूर्ति की बजाय उनके शिला रूप के दर्शन करें।
कृपा पाने के लिए पीपल के पेड़ की पूजा करें, शनिवार को सरसों के तेल का दीपक जलाएं।
शनि देव को तेल अर्पित करते वक्त इस बात का ध्यान रखा जाता है कि तेल इधर-उधर ना गिरे या फिर उस तेल को गरीबों में दान करें।
शनि देव को प्रसन्न करने के लिए काली वस्तुओं का दान करें। इसमें आप काले कपड़े, चमड़े के जूते-चप्पल काले तिल, काली उड़द और सरसों का तेल आदि चीजों का दान कर सकते हैं।

सोमवार, 9 मई 2022

चुनिंदा लोगों को सूट करता है नीलम, खासियत

चुनिंदा लोगों को सूट करता है नीलम, खासियत 

श्रीराम मौर्य           
आजकल हर कोई डायमंड पहनता है। फैशन के चक्‍कर में डायमंड पहनना भारी भी पड़ सकता है क्‍योंकि डायमंड सभी राशि वालों को सूट नहीं करता है। इसी तरह नीलम रत्‍न भी चुनिंदा लोगों को ही सूट करता है। लेकिन इन दोनों रत्‍नों की खासियत है कि ये जिन्‍हें सूट कर जाएं उन्‍हें फर्श से अर्श पर पहुंचा देते हैं। वहीं जिन्‍हें सूट न हों तो उन्‍हें तबाह कर देते हैं।

बहुत ताकतवर हैं ये दोनों रत्‍न...
कुंडली के शुक्र और शनि जैसे ग्रहों के अशुभ असर को कम करने के लिए और इन ग्रहों को मजबूत करने के लिए हीरा और नीलम रत्‍न धारण किए जाते हैं। ये रत्‍न दिखने में जितने सुंदर होते हैं, प्रभाव के मामले में उतने ही ताकतवर होते हैं। इनके शुभ और अशुभ असर दोनों ही बहुत दमदार होते हैं इसलिए जीवन पर बड़ा प्रभाव डालते हैं। लिहाजा इन रत्‍नों को कभी भी बिना विशेषज्ञ की सलाह के नहीं पहनना चाहिए।
नीलम रत्‍न शनि का प्रमुख रत्न है। जिन जातकों की कुंडली के लिहाज से यह रत्‍न शुभ हो यह उन्‍हें सफलता के चरम पर पहुंचा देता है। वहीं जिन लोगों के लिए अशुभ हो, उन्‍हें मिट्टी में मिला देता है। बड़ी दुर्घटना, कंगाली, मान हानि कराता है। इसलिए विशेषज्ञ को अपनी कुंडली दिखाकर ही नीलम रत्‍न धारण करना चाहिए। बल्कि इसे अंगूठी, पेंडेंट में पहनने से पहले नीले कपड़े में बांधकर तकिए के नीचे रखकर या हाथ में बांध कर सोना चाहिए। यह रत्‍न 24 घंटे में असर दिखाने लगता है। नीलम रत्‍न मकर, कुंभ, वृष, मिथुन, कन्या और तुला के जातक धारण कर सकते हैं।
डायमंड हीरे का संबंध शुक्र ग्रह से है। यह रत्‍न जीवन में सुख-समृद्धि, धन-दौलत देता है। साथ ही लव लाइफ-मैरिड लाइफ पर असर डालता है। लेकिन हीरा हर किसी को सूट नहीं करता है। हालांकि कम वजन के हीरे पहनने से कोई असर नहीं पड़ता है लेकिन बड़ा हीरा बहुत सोच-समझकर पहनना चाहिए। डायमंड केवल वृषभ, तुला राशि वालों को शुभ फल देता है। यदि यह अशुभ रहे तो जातक धन हानि, दांपत्‍य में समस्‍या झेलता है। इसके अलावा बड़े नुकसान और दुर्घटना का कारण भी बन सकता है।

गुरुवार, 5 मई 2022

16 मई को लगेगा साल का पहला 'चंद्र ग्रहण'

16 मई को लगेगा साल का पहला 'चंद्र ग्रहण' 

डॉक्टर सुभाषचंद्र गहलोत   
नई दिल्ली। वैशाख पूर्णिमा के दिन साल का पहला चंद्र ग्रहण लगने जा रहा है। यह पूर्ण चंद्र ग्रहण है। चंद्र ग्रहण 16 मई 2022, सोमवार को लगेगा। सोमवार का संबंध चंद्रमा से है। साथ ही सोमवार का दिन भगवान शिव को समर्पित है। भगवान शिव अपने सिर पर चंद्रमा को धारण करते हैं। इसके अलावा इस दिन वैशाख पूर्णिमा भी है। इस तरह इन सभी कारणों से यह चंद्र ग्रहण बेहद खास होने जा रहा है।

चंद्र ग्रहण का समय और सूतक काल...
साल का पहला चंद्रग्रहण 16 मई 2022 सुबह 08:59 बजे शुरू होगा और करीब डेढ़ घंटे बाद सुबह 10:23 बजे खत्‍म होगा। यह ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा। साल 2022 का पहला चंद्र ग्रहण दक्षिणी-पश्चिमी यूरोप, दक्षिणी-पश्चिमी एशिया, अफ्रीका, उत्तरी अमेरिका के ज्यादातर हिस्सों, दक्षिण अमेरिका, प्रशांत महासागर, हिंद महासागर, अटलांटिक और अंटार्कटिका में दिखाई देगा। चूंकि यह चंद्र ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा इसलिए इसका सूतक काल मान्य नहीं होगा।
वैशाख पूर्णिमा 2022 पर जरूर करें यह काम
वैशाख पूर्णिमा और चंद्र ग्रहण एक ही दिन होने से इस दिन कुछ बातों का ख्‍याल रखना बहुत जरूरी है। इस दिन पवित्र नदी में या पवित्र नदी के जल मिले पानी से स्‍नान करें। ग्रहण खत्‍म होने के बाद दान अवश्‍य करें। ग्रहण के दौरान कुछ खाएं-पिएं नहीं। साथ ही इस दौरान जितना हो सके भगवान की आराधना करें। मंत्र जाप करें। दरअसल, ग्रहण के दौरान नकारात्‍मक शक्तियां सक्रिय हो जाती हैं। लिहाजा इस नकारात्‍मकता से बचने के लिए अपनी सोच को सकारात्‍मक रखें और अपना ध्‍यान भगवान की भक्ति में लगाए।

सोमवार, 2 मई 2022

ग्रह दोष को दूर करने के कई उपाय: ज्योतिष

ग्रह दोष को दूर करने के कई उपाय: ज्योतिष
श्रीराम श्रेष्ठ उपाध्याय
ग्रह दोष के कारण धन हानि, स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं, शत्रुता, कलह और अन्य समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं। ज्योतिषशास्त्र में ग्रह दोष को दूर करने के कई उपाय भी बताए गए हैं। ज्योतिषविद्या के जानकारों के अनुसार, सरसों के तेल के कुछ छोटे-छोटे टोटके करके भी आप ग्रह दोषों से मुक्ति पा सकते हैं।
ज्योतिषशास्त्र के अनुसार यदि किसी जातक की कुंडली में कोई भी ग्रह बुरी स्थिति में हो और हानिकारक हो रहा हो, तो इसे ग्रह दोष माना जाता है। कुंडली में ग्रह दोष के कारण जातक को जीवन में अनेक परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। ग्रह दोष के कारण धन हानि, स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं, शत्रुता, कलह और अन्य समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं। ज्योतिषशास्त्र में ग्रह दोष को दूर करने के कई उपाय भी बताए गए हैं। ज्योतिषविद्या के जानकारों के अनुसार, सरसों के तेल के कुछ छोटे-छोटे टोटके करके भी आप ग्रह दोषों से मुक्ति पा सकते हैं। आज के इस लेख में हम आपको ग्रह दोष को दूर करने के सरसों के तेल के टोटके बताने जा रहे हैं।
यदि किसी जातक की कुंडली में मंगल दोष हो तो उसे शरीर पर सरसों के तेल से मालिश करनी चाहिए। इससे मंगल दोष दूर होता है। 
शनिवार के दिन शनि मंदिर में सरसों का तेल चढ़ाने से शनिदेव प्रसन्न होते हैं। 
ज्योतिषशास्त्र के अनुसार, यदि किसी जातक की कुंडली में शनि कमजोर हो तो उसे सरसों के तेल में बनी हुई सब्जियाँ खानी चाहिए। इससे शनि मजबूत होता है। 
यदि कुंडली में शनि नीच दशा में हो तो सिर पर सरसों का तेल लगाने से शनि उच्च दशा में परिवर्तित हो जाता है।
यदि किसी जातक की कुंडली में बृहस्पति ग्रह कमजोर हो तो सरसों के तेल के साथ हल्दी लेकर बृहस्पतिवार के दिन दान देने से बृहस्पति ग्रह मजबूत होता है। ऐसा करने से बृहस्पति ग्रह शुभ फल देना प्रारम्भ कर देता है।
सरसों के तेल में बनी सब्जियां मजदूरों को दान करने से व्यापार में सफलता मिलती है। इसके साथ ही सहकर्मियों का सहयोग भी मिलता है। 
एक कटोरी में सरसों का तेल लेकर अपने ईष्ट का नाम लेते हुए अपने सिर से सात बार उतार कर बाहर फेंक दें, ऐसा करने से सभी रोगों का नाश होता है।

शुक्रवार, 22 अप्रैल 2022

ज्योतिष: 30 अप्रैल को लगेगा पहला 'सूर्य ग्रहण'

ज्योतिष: 30 अप्रैल को लगेगा पहला 'सूर्य ग्रहण' 

सरस्वती उपाध्याय        

हिन्दू पंचांग के अनुसार सूर्य ग्रहण का बहुत महत्व है। ऐसी मान्यता है कि सूर्य ग्रहण के दौरान कोई भी शुभ कार्य नहीं करने चाहिए और ऐसे में भगवान की पूजा भी नहीं की जाती है। सूर्य ग्रहण से संबंधित यह तो एक धार्मिक मान्यता है। लेकिन वैज्ञानिक दृष्टिकोण से भी सूर्य ग्रहण एक महत्वपूर्ण और अनोखी खगोलीय घटना है।  ग्रहण की घटना धार्मिक और वैज्ञानिक नजरिए से बहुत ही खास मानी जाती है। धार्मिक पहलु से ग्रहण की घटना को शुभ नहीं माना जाता है, जबकि वैज्ञानिक नजरिए से यह एक खगोलीय घटना मात्र है। हिंदू पंचांग के अनुसार 30 अप्रैल, 2022 को पहला सूर्य ग्रहण लगेगा। 
इस सूर्य ग्रहण से राशि चक्र की कुछ राशियों को जहां अशुभ फल प्राप्त होगा, वहीं कुछ ऐसी राशियां हैं।जिसके लिए यह ग्रहण धनलाभ लेकर आएगा। आइए जानते हैं शनिश्चरि अमावस्या पर लगने वाला यह ग्रहण राशियों पर क्या प्रभाव लेकर आएगा ?

मेष राशि: शनिश्चरि अमावस्या के साथ साल का पहला सूर्यग्रहण मेष राशि में लगेगा। इसलिए मेष राशि के जातकों को विशेष ध्यान रखने की जरूरत होगी। ग्रहण के प्रभाव के कारण मेष राशि वालों का भाग्य साथ नहीं देगा और उन्हें कई चुनौतियों का सामना करना होगा। इस राशि के जातकों की सूर्य ग्रहण के प्रभाव से धन हानि हो सकती है। इस दिन लेन-देन करने से बचें।

वृषभ राशि: वृषभ राशि के जातकों पर ग्रहण का शुभ प्रभाव पड़ेगा। कार्यों में आ रही बाधाएं खत्म होंगी। आर्थिक स्थिति में सुधार देखने को मिलेगा। धन लाभ के कई मौके आपको प्राप्त होंगे। पैतृक संपत्ति से लाभ की संभावना दिखाई दे रही है।

मिथुन राशि: मिथुन राशि के जातकों के यह ग्रहण थोड़ी समस्या लेकर आ सकता है। ग्रहण के दौरान यदि घर से निकलना है तो बहुत संभलकर निकलें, वरना नुकसान हो सकता है। यदि संभव हो तो इस दिन घर पर रहें या कम से कम भीड़-भाड़ वाली जगहों पर न जाएं।

कर्क राशि: कर्क राशि के जातकों के लिए यह सूर्य ग्रहण किसी वरदान से कम नहीं है। योजानाओं में आपको सफलताएं प्राप्त होंगी। मान-सम्मान में वृद्धि होगी। यात्रा में आपको अच्छा खासा लाभ मिलेगा। धन लाभ होगा। शादीशुदा लोगों का दांपत्य जीवन खुशहाल होगा।

सिंह राशि: सिंह राशि के जातकों के लिए भी सूर्य ग्रहण अच्छा है। सिंह राशि के जातकों को कार्यक्षेत्र में न सिर्फ आर्थिक तरक्की मिलेगी। बल्कि पदोन्नति होने की भी संभावना है। इस दौरान सिंह राशि के जातक आय स्रोत बढ़ाने के साथ साथ निवेश पर भी ध्यान केंद्रित करेंगे। इन ग्रहण के दौरान कार्यसंबंधी मामलों को लेकर सिंह राशि के जातक यात्रा भी कर सकते हैं।

कन्या राशि: कन्या राशि के जातकों के लिए साल का पहला सूर्य ग्रहण अच्छा नहीं रहेगा। बच्चों के करियर को लेकर आप चिंतित रह सकते हैं। मेहनत का पूरा फल नहीं मिलेगा। किसी को पैसे उधार न दें। गर्म-सर्द के कारण खांसी और जुकाम की शिकायत रहेगी। करियर में बदलाव करने से बचें।

तुला राशि: तुला राशि के जातकों के लिए ग्रहण का प्रभाव भाग्य में वृद्धि का संकेत दे रहा है। नौकरी में बेहतर अवसरों की प्राप्ति होगी। व्यापार में मुनाफा प्राप्त होने का संकेत है। निवेश से आपको अच्छा लाभ मिल सकता है। लेकिन स्वास्थ्य को लेकर थोड़ी सावधानी बरतने की जरूरत है।

वृश्चिक राशि: वृश्चिक राशि वालों के करियर के लिए समय ठीक नहीं रहेगा। नौकरी-बिजनेस में परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। किसी परिचित से धोखा मिलने की भी संभावना है। जीवनसाथी के स्वास्थ्य संबंधी दिक्कत होने की वजह से मन अंशात रह सकता है। आराम से यह समय निकालने का प्रयास करें।

धनु राशि: धनु राशि के जातकों के लिए यह सूर्यग्रहण किस वरदान से कम नहीं है। लाभ के मौके मिलने आरंभ हो जाएंगे। समय अनुकूल रहेगा। सरकारी कार्यों में आपको सफलताएं प्राप्त होंगी। भाग्य का भरपूर साथ आपको मिलेगा। आर्थिक स्थिति में पहले की तुलना में प्रगति देखने को मिलेगा।

मकर राशि: मकर राशि के जातकों को सूर्य ग्रहण के दौरान सावधान रहना होगा। सेहत के मामले में विशेष ध्यान देने की जरूरत है। कोई पुराना रोग है तो उसे गंभीरता से लें। लक्ष्य को पाने में दिक्कत आ सकती है। कर्ज की स्थिति बन सकती है। धन की कमी से महत्वपूर्ण कार्य प्रभावित हो सकता है।

कुंभ राशि: कुंभ राशि वालों के लिए सूर्य ग्रहण शुभ माना जा रहा है। उन्हें इस दौरान अचानक धन लाभ हो सकता है। लेकिन पारिवारिक विवाद होने की संभावना है। जल्दबाजी से बचें।

मीन राशि: मीन राशि वालों के लिए यह सूर्य ग्रहण काफी शुभ रहेगा। धन लाभ की संभावना है। निवेश में भी लाभ मिल सकता है। शत्रुओं पर विजय मिलेगी। मान-सम्मान में वृद्धि होगी।

शुक्रवार, 4 फ़रवरी 2022

सभी राशियों पर शुभ-अशुभ प्रभाव पड़ेगा: ज्योतिष

सभी राशियों पर शुभ-अशुभ प्रभाव पड़ेगा: ज्योतिष  

तीर्थराज पांंडेय          ज्योतिष में राशि परिवर्तन को बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। राशि परिवर्तन का सभी राशियों पर शुभ- अशुभ प्रभाव पड़ता है। फरवरी माह में सूर्य, शुक्र और मंगल राशि परिवर्तन करने जा रहे हैं। 13 फरवरी को सूर्य राशि परिवर्तन करेंगे। सूर्य के बाद 26 फरवरी को मंगल राशि परिवर्तन करेंगे। मंगल 26 फरवरी को मकर राशि में प्रवेश करेंगे। मंगल के बाद 27 फरवरी को शुक्र भी मकर राशि में प्रवेश कर जाएंगे। आइए जानते हैं सूर्य, शुक्र और मंगल के राशि परिवर्तन से किन राशि वालों को शुभ फल की प्राप्ति होगीं।

सिंह राशि: नौकरी और व्यापार में तरक्की के योग बन रहे। धन- लाभ हो सकता है। लेन-देन के लिए समय शुभ है। इस समय निवेश करना शुभ रहेगा। नौकरी और व्यापार में तरक्की के योग बन रहे हैं। स्वास्थ्य संबंधित समस्याओं से छुटकारा मिल सकता है।

कन्या राशि: कार्यों में सफलता के योग बन रहे हैं। भाग्य का साथ मिलेगा। नौकरी और व्यापार के लिए समय शुभ रहेगा। आपके द्वारा किए गए कार्यों की सराहना होगी। परिवार के सदस्यों के साथ समय व्यतीत करने का अवसर मिलेगा। दांपत्य जीवन में सुख का अनुभव करेंगे।

वृश्चिक राशि: नौकरी और व्यापार के लिए समय शुभ है। मान-सम्मान मिलेगा। कार्यों में सफलता मिलेगी। दांपत्य जीवन सुखमय रहेगा। परिवार के सदस्यों के साथ समय व्यतीत करेंगे।

मकर राशि: धन-लाभ होगा, जिससे आर्थिक पक्ष मजबूत होगा। व्यवसाय में लाभ के योग बनेंगे। भाई-बहन से मदद मिल सकती है। साहस और पराक्रम में वृद्धि होगी। मान-सम्मान और पद- प्रतिष्ठा में वृद्धि होगी। जीवनसाथी के साथ समय व्यतीत करने का अवसर मिलेगा।

मीन राशि: कार्यों में सफलता के योग बन रहे हैं। भाग्य का साथ मिलेगा। नौकरी और व्यापार के लिए समय शुभ रहेगा। आपके द्वारा किए गए कार्यों की सराहना होगी। परिवार के सदस्यों के साथ समय व्यतीत करने का अवसर मिलेगा। दांपत्य जीवन में सुख का अनुभव करेंगे। परिवार से अचानक शुभ समाचार की प्राप्ति हो सकती है।

बुधवार, 30 जून 2021

अजमाएं गए उपाय हानिकारक सिद्ध हो सकते हैं ?

अक्सर सही जानकारी के अभाव में सामान्यजन किसी के भी कहने पर ज्योतिषीय उपाय आजमाने लगते हैं। लेकिन, क्या आपको पता है कि इस तरह के आजमाए गए उपाय कई बार हानिकारक सिद्ध हो सकते हैं ?

1. कभी भी उच्च के ग्रहों का दान नहीं करना चाहिए और नीच ग्रहों की कभी पूजा नहीं करनी चाहिए।  
2 . कुंडली में गुरु दशम भाव में हो या चौथे भाव में हो तो मंदिर निर्माण के लिए धन नहीं देना चाहिए। यह अशुभ होता है और जातक को कभी भी फांसी तक पहुंचा सकता है। 
3. कुंडली के सप्तम भाव में गुरु हो तो कभी भी पीले वस्त्र दान नहीं करने चाहिए।  
4 . बारहवें भाव में चन्द्र हो तो साधुओं का संग करना बहुत अशुभ होगा। इससे परिवार की वृद्धि रुक सकती है। 
5 . सप्तम/अष्टम सूर्य हो तो ताम्बे का दान नहीं देना चाहिए, धन की हानि होने लगेगी। 
6. मंत्रोच्चारण के लिए शिक्षा-दीक्षा लेनी चाहिए क्योंकि अशुद्ध उच्चारण से लाभ की बजाय हानि अधिक होती है।  
7. जब भी मंत्र का जाप करें उसे पूर्ण संख्या में करना जरूरी है। 
8. मंत्र एक ही आसन पर, एक ही समय में सम संख्या में करना चाहिए। 
9. मंत्र जाप पूर्ण होने के बाद दशांश हवन अवश्य करना चाहिए तभी पूर्ण फल मिलता है।  
10. कुछ लोग वार के अनुसार वस्त्र पहनते हैं, यह हर किसी के लिए सही नहीं होता है। कुंडली में जो ग्रह अच्छे हैं उनके वस्त्र पहनना शुभ है लेकिन जो ग्रह शुभ नहीं हैं उनके रंग के वस्त्र पहनना गलत हो सकता है। 
11. कई बार किसी से सलाह लिए बिना कुछ लोग मोती पहन लेते हैं, यह गलत है अगर कुंडली में चन्द्रमा नीच का है तो मोती पहनने से व्यक्ति अवसाद में आ सकता है। 
12. अक्सर देखा गया है कि किसी की शादी नहीं हो रही है तो ज्योतिषी बिना कुंडली देखे पुखराज पहनने की सलाह दे देते हैं इसका उल्टा प्रभाव होता है और शादी ही नहीं होती। 
13. कुंडली में गुरु नीच का, अशुभ प्रभाव में, अशुभ भाव में हो तो पुखराज कभी भी नहीं पहनना चाहिए।  
14. कई लोग घर में मनी प्लांट लगा लेते हैं। यह सुनकर कि इससे घर में धन वृद्धि होगी लेकिन तथ्य तो यह है कि अगर बुध खराब हो तो घर में मनी प्लांट लगाने से घर की बहन-बेटी दुखी रहती हैं। 
15. कैक्टस या कांटे वाले पौधे घर में लगाने से शनि प्रबल हो जाता है। अतः जिनकी कुंडली में शनि खराब हो उन्हें ऐसे पौधे नहीं लगाने चाहिए। 
राजेन्द्र गुप्ता

बुधवार, 12 मई 2021

विशेष: 26 मई को लगेगा साल का पहला 'चंद्र ग्रहण'

उज्जैन। 26 मई को साल का पहला चंद्र ग्रहण लगने जा रहा है। इस दिन वैशाख और बुद्ध पूर्णिमा भी है। इस बार वैशाख पूर्णिमा का विशेष महत्व होगा। साल का पहला चंद्र ग्रहण उपछाया ग्रहण होगा। इस वजह से इस ग्रहण का धार्मिक प्रभाव नहीं होगा। चंद्र ग्रहण 26 मई को दोपहर 2 बजकर 17 मिनट पर शुरू होगा और शाम 7 बजकर 19 मिनट पर खत्म होगा। इसका प्रभाव वृश्चिक राशि के लोगों पर सबसे ज्यादा होगा।
साल 2021 का पहला चंद्र ग्रहण अमेरिका, उत्तरी यूरोप, पूर्वी एशिया, ऑस्ट्रेलिया और प्रशांत महासागर के कुछ क्षेत्रों में पूर्ण रूप से दिखाई देगा। भारत में ये उपछाया की तरह दिखागा। उपछाया ग्रहण में किसी भी तरह के धार्मिक कार्यों पर पाबंदी नहीं होती है। इसलिए 26 मई के दिन सूतक काल नहीं माना जाएगा। ग्रहण काल के दौरान भी मंदिर के कपाट बंद नहीं होंगे। इस दिन किसी भी तरह के शुभ कार्यों पर रोक नहीं रहेगी। चंद्र ग्रहण वृश्चिक राशि और अनुराधा नक्षत्र में लगने जा रहा है। वृश्चिक राशि वाले लोगों पर इस ग्रहण का कुछ न कुछ असर जरूर देखने को मिलेगा। ग्रहण का प्रभाव लंबे समय तक रहता है। इस वजह से वृश्चिक राशि और अनुराधा नक्षत्र के लोगों को हर काम करते समय सतर्क रहना होगा।

रविवार, 21 मार्च 2021

5 चीजें रखने से घर में बढ़ेगा धन, वास्तुशास्त्र

 उमा वर्मा            

वास्तु में हर दिशा का बहुत महत्व माना जाता है। इसी तरह से वास्तु के अनुसार घर की उत्तर और पूर्व-उत्तर दिशा का सीधा संबंध आपकी आर्थिक संपन्नता से होता है। ये दोनों ही दिशाएं सकारात्मक ऊर्जा का भंडार हैं। इन दोनों दिशाओं में यदि किसी भी प्रकार का दोष होता है तो आपको पैसों की किल्लत का सामना करना पड़ता है तो वहीं हीं इन दोनों दिशाओं को लेकर खास सावधानी बरतने पर आप आर्थिक रूप से संपन्न हो सकते हैं। वास्तु के अनुसार, इस दिशा में कुछ चीजें रखने से आप रूपए पैसों से जुड़ी समस्याओं से तो मुक्ति पा ही सकते हैं। इसके साथ ही आपके घर में प्रचुर मात्रा में धन की आवक और वृद्धि होती है तो चलिए जानते हैं, कि वे कौन सी पांच चीजें हैं ? जिन्हें इन दोनों दिशाओं में रखने से आप धन-दौलत और तरक्की प्राप्त कर सकते हैं।उत्तर दिशा के स्वामी धन और समृद्धि के देवता कुबेर हैं। इस दिशा में भगवान कुबेर की प्रतिमा या तस्वीर रखने के साथ तिजोरी का मुहं भी इस दिशा में खुलना चाहिए। इससे आपके घर में कभी धन की कमी नहीं होती हैं और प्रचुर मात्रा में धन बना रहता है। घर की पूर्व-उत्तर दिशा में भगवान का स्थान बनाना उचित माना जाता है। इस दिशा में भगवान गणेश और मां लक्ष्मी की मूर्ति अवश्य रखनी चाहिए और प्रतिदिन प्रातः या सांय में यहां दीपक जरूर जलाना चाहिए। इससे आपके घर में मां लक्ष्मी और गणेश की कृपा से शुभता और समृद्धि दोनों आते हैं। आपको पैसों की तंगी का सामना नहीं करना पड़ता है।

मंगलवार, 19 जनवरी 2021

हनुमान को मंगल ग्रह का नियंत्रक कहा गया हैं

रायपुर। भगवान हनुमान का जन्म मंगलवार के दिन हुआ था। यही कारण है, कि हनुमान को मंगल ग्रह का नियंत्रक भी कहा गया है। हनुमान की पूजा अर्चना से व्यक्ति के सारे संकट दूर हो जाते हैं। साथ ही वे भक्त जो सच्चे मन से पाठ करता है। वह हमेशा हर आपदा से सुरक्षित रहता है। मंगलवार को हनुमान जी की पूजा करने से साहस, आत्मविश्वास और शक्ति का वरदान भी प्राप्त होता है। साथ ही मंगलवार के दिन व्रत और 100 बार हनुमान चालीसा का पाठ करने से व्यक्ति को कर्जे से मुक्ति मिलती है।

चाणक्य नीति: पशु-पक्षियों से सीखने चाहिए 5 गुण

आचार्य चाणक्य को महान अर्थशास्त्री और शिक्षाविद माना जाता है। नीति शास्त्र में चाणक्य ने जीवन से जुड़े अहम पहलु जैसे तरक्की, विवाह, कारोबार, सेहत और परिवार आदि के बारे में भी बात की है। चाणक्य ने जीवन को आसान बनाने के लिए कई नीतियां बताई हैं। कहते हैं कि इन नीतियों को जो अपनाते हैं, उन्हें जीवन में अपार सफलता हासिल होती है। सफलता के रास्ते को आसान बनाने के लिए चाणक्य ने नीति शास्त्र में पशु-पक्षियों से सीखे जाने वाले गुणों का भी जिक्र किया है। जानिए पशु-पक्षियों के किन गुणों को हर व्यक्ति को जीवन में अपनाना चाहिए। 1. बगुला- चाणक्य कहते हैं कि व्यक्ति को बगुले की तरह ही अपनी इंद्रियों पर संयम रखते हुए अपनी शक्ति या क्षमता के हिसाब से काम काम करना चाहिए। 2. मुर्गा- चाणक्य नीति के अनुसार, व्यक्ति को मुर्गे की तरह ही सूर्योदय से पहले उठना चाहिए। रण में पीछे न हटते हुए हटकर मुकाबला करना चाहिए। परिवार या प्रियजनों में मिल बांट कर खाना चाहिए। मुर्गे की तरह ही इंसान को अपने बल पर भोजन को प्राप्त करना चाहिए। 3. कौआ– चाणक्य कहते हैं कि इंसान को कौए की भांति हर वक्त सतर्क और सावधान रहना चाहिए। इसके साथ ही समय-समय पर अपने लिए चीजें भी जुटाना चाहिए।

4. श्वान- चाणक्य के अनुसार, हर इंसान को कुत्ते से स्वामी भक्ति का गुण सीखना चाहिए। इसके साथ ही श्वान निद्रा लेनी चाहिए, ताकि आहट मिलते ही आपकी आंख खुल जाए।

5. शेर- चाणक्य नीति के अनुसार, हर व्यक्ति को शेर की भांति कोई भी काम पूरी शक्ति या ताकत से करना चाहिए। जिस तरह से शेर अपने शिकार पर पूरी ताकत से हमला करता है, चाहे वह छोटा पशु या पक्षी ही क्यों न हो। उसी तरह से व्यक्ति को अपने काम में सफलता पाने के लिए अपनी पूरी शक्ति का इस्तेमाल करना चाहिए।

रविवार, 27 दिसंबर 2020

सूर्य, पृथ्वी और चंद्रमा की चाल महत्वपूर्ण बनेगी

2021 में सूर्य, पृथ्वी और चंद्रमा की चाल दुनियाभर के खगोल प्रेमियों को एक पूर्ण चंद्रग्रहण और एक पूर्ण सूर्यग्रहण समेत ग्रहण के चार रोमांचक दृश्य दिखाएगी। हालांकि, भारत में इनमें से केवल दो खगोलीय घटनाएं निहारी जा सकेंगी। उज्जैन की प्रतिष्ठित शासकीय जीवाजी वेधशाला के अधीक्षक डॉ. राजेंद्र प्रकाश गुप्त ने रविवार को ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया कि अगले साल की इन खगोलीय घटनाओं का सिलसिला 26 मई को लगने वाले पूर्ण चंद्रग्रहण से शुरू होगा। उन्होंने कहा, “नववर्ष का यह पहला ग्रहण सिक्किम को छोड़कर भारत के पूर्वोत्तर के राज्यों, पश्चिम बंगाल के कुछ हिस्सों और ओडिशा के तटीय क्षेत्रों में दिखाई देगा जहां चंद्रोदय देश के दूसरे इलाकों के मुकाबले जल्दी होता है। इस खगोलीय घटना के वक्त चंद्रमा पृथ्वी की छाया से 101.6 प्रतिशत ढक जाएगा।” पूर्ण चंद्रग्रहण तब लगता है, जब सूर्य और चंद्रमा के बीच पृथ्वी आ जाती है और अपने उपग्रह चंद्रमा को अपनी छाया से ढक लेती है। चंद्रमा इस स्थिति में पृथ्वी की ओट में पूरी तरह छिप जाता है और उसपर सूर्य की रोशनी नहीं पड़ पाती है। इस खगोलीय घटना के वक्त पृथ्वीवासियों को चंद्रमा रक्तिम आभा लिए दिखाई देता है। लिहाजा इसे “ब्लड मून” भी कहा जाता है।गुप्त ने भारतीय संदर्भ में की गई कालगणना के हवाले से बताया कि 10 जून को लगने वाला वलयाकार सूर्यग्रहण देश में दिखाई नहीं देगा। इस खगोलीय घटना के वक्त सूर्य और पृथ्वी के बीच चंद्रमा आ जाएगा। इस कारण पृथ्वीवासियों को सूर्य “रिंग ऑफ फायर” (आग का चमकदार छल्ला) के रूप में 94.3 प्रतिशत ढका। उन्होंने बताया कि 19 नवंबर को लगने वाले आंशिक चंद्रग्रहण को अरुणाचल प्रदेश और असम के कुछ भागों में बेहद कम समय के लिए निहारा जा सकेगा। इस खगोलीय घटना के चरम पर चंद्रमा का 97.9 प्रतिशत हिस्सा पृथ्वी की छाया से ढका दिखाई देगा। तकरीबन दो सदी पुरानी वेधशाला के अधीक्षक ने बताया कि चार दिसंबर को लगने वाले पूर्ण सूर्यग्रहण के दौरान सूर्य और पृथ्वी के बीच चंद्रमा कुछ इस तरह आ जाएगा कि सौरमंडल का मुखिया सूर्य 103.6 प्रतिशत ढका नजर आएगा। हालांकि, वर्ष 2021 के इस अंतिम ग्रहण को भारत में नहीं निहारा जा सकेगा। समाप्ति की ओर बढ़ रहे वर्ष 2020 में दो सूर्यग्रहण और चार चंद्रग्रहण समेत ग्रहण के छह रोमांचक दृश्य देखे गए।

सोमवार, 21 दिसंबर 2020

सूर्य व बुध ग्रह के तेज से होता है बुधादित्य योग

सूर्य और बुध ग्रह से निर्धातिर होता है बुधादित्य योग, यह योग अच्छा भी होता है और खराब भी होता है
सूर्य ग्रहों का राजा, केंद्र बिंदु हैं। बुध उसके सबसे समीप का ग्रह। सूर्य की तरफ से गरम, दूसरी तरफ ठंडा। मतलब सूर्य से निरंतर तेज़ लेता रहता। दोनो मिल के बुधादित्य योग बनाते है जो कि ज्ञान के लिए बेस्ट। बुध विद्या, ग्रहण करने की क्षमता, सरस्वती बुद्धि, तांत्रिक तन्त्र, आन्तड़िया, व्यापर, वाणी आदि आदि। मन बुद्धि के वश में ओर बुद्धि आत्मा के वश में। मतलब सूर्य बुध की युति शुभ की हो तो कितना सुंदर योग बन जाये। भृकुटि के मध्य ध्यान लग जाये। बुध तो सूर्य के 28 डिग्री आगे पीछे घूमता रहता फिर काहे का अस्त का दोष। 
सूर्य बुध दोनो मिल के चार चांद लगा दे। यही योग बिगड़ा हुआ हो तो बुद्धि भृष्ट कर दे मतलब एक अशुभ स्थान का स्वामी हो तो। सूर्य सब ग्रहों का दोष हर ले और बुध राहु का दोष हर ले फिर बचा का शुभ युति व्यापार में ऊंचाईयों तक पहुंचा दी। धन भी तो बुद्ध है। वाणी भी तो बुद्ध है। दोनो दिमाग के भी तो कारक है। इसी लिए तो कहते है। बुध में सूर्य के भी गुण निहित है। बस शर्त यह है। कि अशुभ युति नही होनी चाहिए। अब वो हमारे कर्मो पे करता है। 
वाणी भी आत्म विश्वास से भरपूर रहेगी। सूर्य आत्मा। राजकीय। पिता। ऊर्जा। आत्म विश्वास आदि। दोनो साथ मिल जाये तो मजा आ जाये। युति तो हर किसी की कुंडली मे मिल जाएगी लेकिन अपने कर्मो से निर्धारित होगी कि अछि है। कि बुरी। बुध चंचल ग्रह है। छोटा बच्चा। अब पिता ही तो उसको कन्ट्रोल करता है। इसी लिए तो इसे पिता सूर्य के पास स्थान दिया गया है। ताकि कन्ट्रोल में रहे।

बुधवार, 16 दिसंबर 2020

संक्रांति: 7 राशियों पर पड़ेगा गहरा प्रभाव

पालूराम 
नई दिल्ली। ज्योतिष विद्वानों के अनुसार ग्रहों नक्षत्रों में निरंतर बदलाव होने की वजह से मनुष्य के जीवन पर इसका गहरा प्रभाव पड़ता है। बता दें कि ज्योतिष शास्त्र के अनुसार मकर संक्रांति इस माह का सबसे शुभ और पावन दिन था। इस समय बन रहे ग्रह दशा इन 7 राशियों के जीवन में शुभ समय की शुरुआत करने जा रही है
आने वाला समय आपके लिए खुशियां लेकर आएगा। जीवन में खुशियों और धन आगमन होगा। आपकी धन सम्बन्धित सभी समस्या अचानक से समाप्त होगी।आपको सफलता के नए मार्ग मिल सकते है।
इनकी सभी मुरादे पूरी होगी। आपके द्वारा की जा रही मेहनत का आपको पूर्ण फल प्राप्त होगा। कारोबार में अच्छी योजनाए आपके दिमाग में आ सकती है, आपको मनोरंजन के नए अवसर प्राप्त हो सकते हैं।आपके जीवन में आने वाली सभी तरह की परेशानियां दूर हो जाएंगी। तुला, मकर, मिथुन, सिंह, कन्या, कुंभ और मीन राशि के लोग रहेंगे अधिक भाग्यशाली।

'प्लास्टिक मुक्त प्रयागराज' कार्यक्रम का आयोजन

'प्लास्टिक मुक्त प्रयागराज' कार्यक्रम का आयोजन बृजेश केसरवानी           प्रयागराज। शनिवार को आर्य कन्या इंटर कॉलेज प्रयागराज में नगर...