शुक्रवार, 11 नवंबर 2022

विभाग के अंतर्गत 'जिला पोषण' समिति की बैठक

विभाग के अंतर्गत 'जिला पोषण' समिति की बैठक

हरिशंकर त्रिपाठी 

देवरिया। मुख्य विकास अधिकारी, देवरिया द्वारा बाल विकास विभाग के अंतर्गत 'जिला पोषण' समिति की बैठक की गई। जिसमें जनपद के पोषण अभियान से संबंधित अधिकारीगण समस्त बाल विकास परियोजना अधिकारी उपस्थित थे। बैठक में पोषण ट्रैकर पर लाभार्थियों के आधार वेरिफिकेशन, 0-5 वर्ष के बच्चों के वजन, गृह भ्रमण, सामुदायिक गतिविधियों व पुष्टाहार वितरण की फीडिंग किये जाने की समीक्षा की गयी। फीडिंग में सबसे खराब प्रदर्शन करने वाले बाल विकास परियोजना अधिकारी भागलपुर, भलुअनी, लार, सलेमपुर, बैतालपुर को कारण बताओ नोटिस जारी करने के निर्देश दिए गए।

बैठक में अवगत कराया गया कि माह अगस्त, 2022 से जनपद में केवल 07 परियोजनाओं भागलपुर, शहर, गौरी बाजार, लार, पथरदेवा, सलेमपुर तथा तरकुलवा में पोषाहार की आपूर्ति पूरानी व्यवस्था के अनुसार नैफेड द्वारा की जायेगी शेष 10 परियोजनाओं बरहज, बैतालपुर, भटनी, भलुअनी, रूद्रपुर, रामपुर कारखाना, देसही, सदर, बनकटा तथा भाटपाररानी में राष्ट्रीय ग्रामीण आजिविका मिशन के अन्तर्गत स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से उत्पादित पोषाहार रेसिपी की आपूर्ति सीधे आंगनबाड़ी केन्द्रों पर की जायेगी। आपूर्ति में विलम्ब के सम्बन्ध में उपायुक्त ग्रामीण आजिविका मिशन को पत्र प्रेषित कराया जाएं।

‘‘आर्दश आंगनबाड़ी केन्द्र’’ के सम्बन्ध में अवगत कराया गया कि जनपद में कुल 171 आंगनबाड़ी केन्द्र गोद लिये गये हैं। जिसमें माह अक्टूबर, 2022 में जिला खादी ग्रामोद्योग अधिकारी, मुख्य कार्यकारी अधिकारी मत्स्य, जिला युवा कल्याण अधिकारी, जिला खनन अधिकारी, जिला क्षय रोग नियन्त्रण अधिकारी, जिला बचत अधिकारी, जिला कुष्ट रोग नियन्त्रण अधिकारी, जिला मलेरिया अधिकारी, जिला क्रिडा अधिकारी एवं पिछड़ा वर्क कल्याण अधिकारी, जिला विद्यालय निरीक्षक, जिला होम्योपैथिक चिकित्सा अधिकारी, जिला पंचायत राज अधिकारी, जिला प्रोबेशन अधिकारी, जिला सेवायोजन अधिकारी, जिला उद्यान अधिकारी, जिला अर्थ एवं संख्याधिकारी, जिला आबकारी अधिकारी, परियोजना अधिकारी डूडा, श्रम प्रवर्तन अधिकारी, सहायक निबन्धक सहकारिता, सहायक सूचना निदेशक, सहायक अभियन्ता लघु सिंचाई, उपायुक्त श्रम एवं रोजगार तथा उपायुक्त उद्योग केन्द्र, अधि0अभि0 ग्रामीण अभियन्त्रण विभाग, अपर मुख्य अधिकारी जिला पंचायत द्वारा गोद लिये आंगनबाडी केन्द्रों को माह अक्टूबर, 2022 में निरीक्षण नही किया गया है।

उपस्थित अधिकारीगण को निर्देशित किया गया कि दिनांक 10 एवं 11 नवम्बर, 2022 को प्रत्येक दशा में केन्द्रों का भ्रमण कर लें एवं आख्या अगली बैठक के पूर्व जिला कार्यक्रम अधिकारी, देवरिया को प्रेषित कर दें।

आर्मी इंटे‌लिजेंस ने संदिग्ध युवक को हिरासत में लिया

आर्मी इंटे‌लिजेंस ने संदिग्ध युवक को हिरासत में लिया

सत्येंद्र पंवार 

मेरठ। मेरठ के कैंट में शुक्रवार को आर्मी इंटे‌लिजेंस ने एक संदिग्ध युवक को हिरासत में लिया है। युवक आर्मी का जवान बनकर लोगों से जानकारी जुटा रहा था। आर्मी इंटेलिजेंस युवक से पूछताछ कर रही है। शुक्रवार को एक संदिग्ध युवक आर्मी का जवान बनकर कैंट में आने जाने वाले लोगों से जानकारी हासिल कर रहा था। जानकारी मिलने पर आर्मी इंटेलिजेंस मौके पर पहुंची और युवक को पकड़ लिया। बताया गया है कि युवक के पास से इंटेलिजेंस ने कुछ संदिग्ध सामान भी बरामद किया है।

युवक कौन है और क्या-क्या जानकारियां जुटा रहा था ? इसको लेकर आर्मी इंटेलिजेंस युवक से पूछताछ कर उसके मकसद के बारे में जानकारी ले रही है। हालांकि, अभी आर्मी इंटेलिजेंस ने इस संबंध मेें कोई जानकारी नहीं दी है।

गांधी की हत्या के षड्यंत्रकारियों की रिहाई, गलत

गांधी की हत्या के षड्यंत्रकारियों की रिहाई, गलत

अकांशु उपाध्याय 

नई दिल्ली कांग्रेस ने कहा है कि प्रधानमंत्री या पूर्व प्रधानमंत्री की हत्या राष्ट्रीय मुद्दा है और यह देश की संप्रभुता, अखंडता, अस्तित्व और एकता जुड़ा है। इसलिए पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की हत्या के षड्यंत्रकारियों की रिहाई का फैसला गलत है। कांग्रेस प्रवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने शुक्रवार को यहां पार्टी मुख्यालय में संवाददाता सम्मेलन में कहा कि उच्चतम न्यायालय ने इस मामले में प्रदत विशेष संवैधानिक अधिकारों का इस्तेमाल किया है। सामान्य स्थिति में न्यायालय यह निर्णय नहीं दे सकता था। इसका मतलब यह हुआ कि फैसले में तथ्यों को नजरअंदाज किया गया है इसलिए वह इस फैसले की आलोचना करते है।

उन्होंने कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री पर हमला भारत की संप्रभुता, एकता और भारत के अस्तित्व पर हमला है और न्यायपालिका उन लोगों को फायदा नहीं दे सकती है जिन्होंने सोच समझकर और एक योजना के तहत पूर्व प्रधानमंत्री की हत्या की है। पूर्व प्रधानमंत्री की हत्या भारत पर आघात है और ऐसे अपराधी को रिहाई का आदेश नहीं दिया जा सकता था इसलिय न्यायालय ने अनुच्छेद 142 में संविधान प्रदत पावर का इस्तेमाल किया है।

कांग्रेस संचार विभाग के प्रभारी जयराम रमेश ने यहां जारी बयान में कहा, “पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी के हत्यारों की रिहाई का उच्चतम न्यायालय का फैसला पूरी तरह से गलत और अस्वीकार्य है। कांग्रेस पार्टी इसकी स्पष्ट रूप से आलोचना करती है और इसे पूरी तरह से गलत मानती है।उन्होंने कहा की न्यायालय ने यह फैसला देते हुए देश की भावनाओं का ख्याल नहीं रखा है। उन्होंने कहा, “सबसे दुर्भाग्यपूर्ण बात यह है कि न्यायालय ने यह फैसला सुनाते समय इस मुद्दे पर देश की भावना के अनुरूप काम नहीं किया है।

गौरतलब है कि उच्चतम न्यायालय ने पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की हत्या के मामले में दोषियों-नलिनी श्रीहरन और पी. रविचंद्रन को जेल से रिहा करने का आदेश दिया है। उच्चतम न्यायालय ने शुक्रवार को 1991 के राजीव गांधी हत्याकांड मामले में सात दोषियों में शामिल एस. नलिनी और आर. पी. रविचंद्रन को उनकी सजा की निर्धारित अवधि में छूट देने की याचिका स्वीकार करते हुए जेल में बंद उनके सभी छह सह दोषियों को रिहा करने का आदेश दिया।

शीर्ष अदालत का रिहाई करने का यह आदेश नलिनी और रविचंद्रन समेत जेल में बंद सभी छह दोषियों पर लागू होगा।
न्यायमूर्ति बी. आर. गवई और न्यायमूर्ति बी. वी. नागरथ्ना की पीठ ने दोषियों के 30 वर्षों की कैद में रहने और इस दौरान संतोषजनक आचरण के आधार पर दोषियों को निर्धारित सजा की अवधि पहले रिहा करने का आदेश दिया। 
शीर्ष अदालत ने इस तथ्य पर भी गौर किया कि रिहाई का आदेश देते हुए तमिलनाडु सरकार की ओर से राजीव गांधी हत्याकांड के सभी दोषियों को रिहा करने की सिफारिश की गई थी।

आजीवन कारावास की सजा के बाद 30 वर्षों से अधिक समय से जेल में बंद नलिनी ने मद्रास उच्च न्यायालय में अपनी रिहाई संबंधी याचिका खारिज होने के बाद
अगस्त में शीर्ष अदालत का दरवाजा खटखटाया था।
शीर्ष अदालत ने संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत प्राप्त विशेष शक्तियों का प्रयोग करते हुए दोषियों को रिहा करने का आदेश दिया।

इससे पहले मद्रास उच्च न्यायालय ने यह कहते हुए उनकी याचिका खारिज कर दी थी कि अनुच्छेद 142 के तहत विशेष शक्तियां सुप्रीम कोर्ट को दी गई हैं। तीस वर्षों से अधिक समय से आजीवन कारावास की सजा काट रहे दो दोषियों की सजा में छूट देकर उन्हें रिहा करने की मांग वाली याचिकाओं का तमिलनाडु की द्रमुक सरकार ने उच्चतम न्यायालय में समर्थन किया था।

सात दोषियों में शामिल नलिनी और रविचंद्रन ने राज्य मंत्रिमंडल के (सजा में छूट संबंधी) फैसले और सह-दोषी ए जी पेरारिवलन को 18 मई को शीर्ष अदालत द्वारा रिहा करने के आदेश का हवाला देते हुए मद्रास उच्च न्यायालय में याचिका दायर की थी, जिसे खारिज कर दिया गया था। इसके बाद दोनों दोषियों ने शीर्ष अदालत का दरवाजा खटखटाया था।
याचिका पर शीर्ष अदालत ने सरकार को अपना पक्ष रखने को कहा था। राज्य सरकार ने लिखित जवाब में कहा था कि कानून के मुताबिक राज्यपाल संविधान के अनुच्छेद 161 के तहत राज्य मंत्रिमंडल की सहायता और सलाह से बाध्य है। इस मामले में राज्य सरकार ने चार साल पहले सभी सात दोषियों को सजा में छूट को मंजूरी दे दी थी। मंत्रिमंडल का यह फैसला ‌ 11 सितंबर 2018 को राज्यपाल को भेजा गया था, जिस पर फैसला नहीं आया।

इस बीच 27 जनवरी 2021 को राज्यपाल ने राज्य मंत्रिमंडल की सिफारिशों को राष्ट्रपति को दी, लेकिन अभी भी कोई फैसला नहीं हुआ है। राज्य सरकार ने अपने जवाब में कहा था कि दोनों याचिकाकर्ताओं ने 30 साल से अधिक की जेल की सजा काट ली है। इस बीच सह-दोषी ए जी पेरारिवलन को 18 मई को शीर्ष अदालत द्वारा रिहा करने का आदेश दिया गया था। अदालत ने राज्यपाल द्वारा मंत्रिमंडल की सिफारिश पर फैसला लेने में अत्यधिक देरी होने और 31 साल से अधिक की जेल सजा काटने को ध्यान में रखते हुए विशेष शक्ति का प्रयोग करते हुए रिहा करने का आदेश किया था।

शीर्ष अदालत ने पेरारिवलन के मामले में संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत पूर्ण न्याय करने के लिए अपनी असाधारण शक्तियों का इस्तेमाल किया था।
पेरारिवलन नौ मार्च 2022 से पहले से ही जमानत पर था।
पेरारिवलन की रिहाई के बाद नलिनी और रविचंद्रन ने शीर्ष अदालत के उस आदेश का हवाला देते हुए मद्रास उच्च न्यायालय में अपनी याचिका दायर की थी, लेकिन वहां उन्हें निराशा हाथ लगी थी। उच्च न्यायालय ने 17 जून को कहा था कि वह शीर्ष अदालत द्वारा पारित समान आदेश पारित करने के लिए संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत शक्तियों का प्रयोग नहीं कर सकता है।

प्रदेश के सभी जिलों में मनेगी मुलायम की जयंती

प्रदेश के सभी जिलों में मनेगी मुलायम की जयंती

संदीप मिश्र 

लखनऊ। समाजवादी पार्टी अपने संस्थापक और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव की जयंती प्रदेश के सभी जिलों में सादगी से मनाएगी। पार्टी के मुख्य प्रवक्ता राजेन्द्र चौधरी ने शुक्रवार को बताया कि पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव के निर्देशानुसार 22 नवम्बर को मुलायम सिंह यादव का जन्मदिन पार्टी की ओर से प्रदेश के सभी जिलों में सादगी के साथ मनाया जाएगा। 

पार्टी के प्रत्येक कार्यालय में इस अवसर पर नेता जी (मुलायम) के चित्र पर कार्यकर्ता पुष्पांजलि अर्पित करेंगे तथा समाजवादी विचारधारा के लिए उनके संघर्ष को स्मरण करते हुए उनके रास्ते पर चलने का संकल्प लेंगे। इस अवसर पर अस्पतालों में फल वितरण, रक्तदान शिविर, हवन पूजन, गरीबों में वस्त्र तथा भोजन वितरण आदि कार्यक्रम आयोजित किए जा सकते हैं। गौरतलब है कि मुलायम सिंह यादव ने चार नवम्बर 1992 को लखनऊ में समाजवादी पार्टी का स्थापना सम्मेलन आयोजित किया था। उनका निधन पिछली 10 अक्टूबर को हुआ था।

पुलिसकर्मियों की संलिप्तता पर सख्त एक्शन: कुमार 

पुलिसकर्मियों की संलिप्तता पर सख्त एक्शन: कुमार 

पंकज कपूर 

देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की ड्रग्स फ्री देवभूमि की मुहिम को लेकर सूबे के पुलिस महानिदेशक अशोक कुमार हरकत में आ गए हैं। उन्होंने नशा तस्करों और माफियाओं पर एनडीपीएस (NDPS) के साथ गैंगस्टर की कार्रवाई के साथ ही पुलिसकर्मियों की संलिप्तता पर सख्त एक्शन की बात कही है।

शुक्रवार को डीजीपी अशोक कुमार ने पुलिस अधिकारियों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए बैठक की। बताया कि नशे की अवैध बिक्री पर लगाम नहीं लगी तो संबंधित कोतवाली, थाना और चौकी प्रभारियों के खिलाफ निलंबन की कार्यवाही की जाएगी। बताया कि एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स का गठन राज्य, जनपद और थाना स्तर पर किया गया है।

उन्होंने कहा कि मादक पदार्थों की रोकथाम करना थानाध्यक्ष की नैतिक जिम्मदारी है। यदि राज्य स्तर की टास्क फोर्स किसी थाना क्षेत्र में ड्रग्स पकडती है, तो संबंधित थाना प्रभारी की भी जवाबदेही तय की जाएगी। बताया कि फोर्स के कार्यों की पुलिस मुख्यालय समय-समय पर समीक्षा भी करेगा।

स्कूलों में दिए जाने वाले मिड-डे मील पर नजर: सैलजा

स्कूलों में दिए जाने वाले मिड-डे मील पर नजर: सैलजा

अकांशु उपाध्याय/राणा ओबरॉय 

नई दिल्ली/चंडीगढ़। कांग्रेस नेता एवं पूर्व केन्द्रीय मंत्री कुमारी सैलजा ने शुक्रवार को आरोप लगाया कि सरकारी स्कूलों को बंद करने के बाद अब भारतीय जनता पार्टी-जननायक जनता पार्टी (भाजपा-जजपा) गठबंधन सरकार की नजर स्कूलों में दिए जाने वाले मिड-डे मील पर लग गई है और सरकार मिड डे मील को बंद करना चाहती है।

कुमारी सैलजा ने यहां जारी बयान में कहा कि स्कूलों में राशन और कुकिंग कॉस्ट (भोजन पकाने का खर्च) पहुंचाने में देरी की जा रही है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि मिड-डे मील में छात्रों को दिए जाने वाले हजारों टन फ्लेवर्ड मिल्क पावडर के घोटाले की जांच से भी भाजपा-जजपा गठबंधन सरकार बच रही है।

कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया कि योजना के तहत प्रदेश के सरकारी स्कूलों में प्रत्येक बच्चे के हिसाब से जो पांच रुपये 45 पैसे दिए जाते हैं, वह राशि कई जिलों में अभी तक जारी नहीं की गई है और कुछ जिलों में तो चार महीने से उक्त राशि स्कूलों को नहीं मिली है। पूर्व केंद्रीय मंत्री ने आरोप लगाया कि सरकार यह योजना बंद करना चाहती है, इसलिए ही कभी इसे तैयार करने वाली कुक का वेतन कई-कई महीनों तक रोक लिया जाता है, जबकि कितनी ही बार महीनों तक कुकिंग कॉस्ट को रोक लिया जाता है।

कुमारी सैलजा ने आरोप लगाया कि जुलाई से सितंबर के बीच 16.91 लाख स्कूली बच्चों को दिया जाने वाले फ्लेवर्ड मिल्क पाउडर की सप्लाई ही स्कूलों में नहीं की गई, जो 1218 टन से अधिक बनता है, जबकि, दूसरी ओर महकमे को रिपोर्ट दे दी गई कि बच्चों को दूध पिलाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि लेकिन फ्लेवर्ड मिल्क घोटाला उजागर होने के बाद आज तक शिक्षा विभाग ने काेई जांच नहीं बैठाई है। 

अगले आदेश तक शिवलिंग का संरक्षण जारी, सुनवाई 

अगले आदेश तक शिवलिंग का संरक्षण जारी, सुनवाई 

अकांशु उपाध्याय/संदीप मिश्र 

नई दिल्ली/वाराणसी। वाराणसी के ज्ञानवापी मामलें को लेकर आज शुक्रवार को अलग-अलग मामलों में सुप्रीम कोर्ट, हाईकोर्ट और जिला अदालत में सुनवाई हुई। मामले की सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने अगले आदेश तक कथित शिवलिंग का संरक्षण जारी रखने का आदेश दिया है। यानि शिवलिंग को सुरक्षित रखा जाएगा।

सुप्रीम कोर्ट ने ज्ञानवापी विवाद से जुड़े मुकदमे में अपना पक्ष मजबूत बनाने के लिए हिंदू पक्षों को वाराणसी के जिला न्यायाधीश के समक्ष आवेदन करने की अनुमति दी। साथ ही कोर्ट ने सर्वेक्षण आयुक्त की नियुक्ति के संबंध में हाई कोर्ट के आदेश को चुनौती देने वाली ज्ञानवापी मस्जिद समिति की याचिका पर हिंदू पक्षों से तीन सप्ताह में जवाब देने को कहा।

कोर्ट ने कहा कि शिवलिंग को कोई छुएगा नहीं। वहीं शृंगार गौरी और ज्ञानवापी मस्जिद मामले में जिला जज अजय कृष्ण विश्वेश ने सुनवाई की अगली तारीख 5 दिसंबर को तय की है। कारण, हाईकोर्ट की तरफ से सुनवाई को दिसंबर के पहले सप्ताह तक के लिए टाल दिया गया था।

झारखंड के लिए आज का दिन विशेष और ऐतिहासिक

झारखंड के लिए आज का दिन विशेष और ऐतिहासिक

इकबाल अंसारी 

रांची। झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा कि पूरे झारखंड के लिए आज का दिन विशेष और ऐतिहासिक है। सोरेन ने कहा कि झारखंड विधान सभा से झारखंड वासियों की आत्मा और अस्मिता से जुड़े 1932 खतियान आधारित स्थानीयता और नियुक्ति तथा सेवाओं में आरक्षण वृद्धि का विधेयक पारित हो चुका है। आज पूरा झारखंड जश्न और खुशियां मना रहा है।

सोरेन ने इन दोनों विधेयकों के सदन से पारित होने के बाद विधानसभा परिसर में संवाददाताओं को संबोधित करते हुए कहा एक बार फिर झारखंड के लिहाज से 11 नवंबर का दिन इतिहास के पन्नों में स्वर्ण अक्षरों में दर्ज हो चुका है। मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारी सरकार ने जनता से जो वादा किया था, उसे निभाने का काम किया है।

अब केंद्र सरकार की जिम्मेदारी बनती है कि वह झारखंड की भावनाओं के अनुरूप संवैधानिक प्रावधानों के तहत1932 खतियान आधारित स्थानीयता और नियुक्ति तथा सेवाओं में आरक्षण वृद्धि से संबंधित विधेयक को नौवीं अनुसूची में डालने की पहल करें , ताकि झारखंड वासियों उनका मान -सम्मान और अधिकार मिल सके। मुख्यमंत्री ने कहा कि अगर जरूर हुई तो पूरी सरकार दिल्ली में भी इसके लिए अपनी पूरी ताकत लगाने से पीछे नहीं हटेगी।

हार्ट अटैक आने के कारण एक्टर सिद्धांत की मौंत

हार्ट अटैक आने के कारण एक्टर सिद्धांत की मौंत

कविता गर्ग 

मुंबई। छोटे पर्दे के जाने- माने एक्टर सिद्धांत वीर सूर्यवंशी की मौंत हो गई है। एक्टर महज 46 वर्ष के थे। उनकी मौत हार्ट अटैक आने के कारण हुआ। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक एक्टर शुक्रवार की सुबह वर्क आउट कर रहे थे। इसी दौरान उन्हें आर्ट अटैक  आ गया। एक्टर को आनन फानन में अस्पताल ले जाया गया, जहां डाक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।

इन टीवी सीरियल्स में किया काम
एक्टर  सिद्धांत वीर सूर्यवंशी ने टीवी धारावाहिक कुसुम, वारिस और सूर्यपुत्र करण के लिए काफी मशहूर रहे। सीरियल कुसुम उनकी डेब्यू टीवी थी। कसौटी जिंदगी की, कृष्णा अर्जुन, क्या दिल में है। इसके बाद उनकी आखिरी प्रोजेक्ट टीवी शो 'क्यों रिश्तों में कट्टी- बट्टी' और 'जिद्दी दिल' था। एक्टर के मौत की जानकार टीवी एक्टर जय भानुशाली ने दी। सिद्धांत के दो बच्चे और पत्नी अलीसिया राउत हैं।

बतौर मॉडल की थी करियर की शुरूआत
सिद्धांत वीर सूर्यवंशी ने बतौर मॉडल अपने करियर की शुरुआत की थी। सीरियल कुसुम से इन्होंने अपना टीवी डेब्यू किया था। इसके अलावा भी सिद्धांत वीर सूर्यवंशी ने कई पॉपुलर टीवी शोज में काम कर घर-घर में अपनी पहचान बनाई। 

राजस्थान: 3 दिन का विशेष अभियान, निर्णय किया 

राजस्थान: 3 दिन का विशेष अभियान, निर्णय किया 

नरेश राघानी 

जयपुर। राजस्थान में खान विभाग द्वारा पुलिस प्रशासन के समन्वय से अवैध खनन, परिवहन और भण्डारण के विरुद्ध तत्काल प्रभाव से तीन दिन का विशेष अभियान चलाने का निर्णय किया गया है। खान विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव डॉ. सुबोध अग्रवाल ने बताया कि राज्य के सभी माइनिंग अधिकारियों को आज शुक्रवार को ही अपने क्षेत्र के संबंधित पुलिस अधीक्षकोें से संपर्क कर प्रभावी कार्यवाही की रणनीति बनाने के निर्देश दिए हैं। शुक्रवार से प्रदेश में कार्यवाही की सूचना भी आने लगी ह्रै और आरंभिक सूचनाओं के अनुसार बिना रवन्ना या टीपी के खनिज परिवहन करते हुए 13 से अधिक वाहन जब्त कर संबंधित पुलिस थानों को सुपुर्द किए गए है।

डॉ. सुबोध अग्रवाल ने बताया कि मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने गुरुवार को स्टोनमार्ट के उद्घाटन अवसर पर कहा था कि राज्य सरकार अवैध खनन के प्रति गंभीर है और निरंतर अभियान चलाकर इस पर रोक लगाने के प्रयास कर रही है। मुख्यमंत्री गहलोत के निर्देश के साथ ही विभाग एक्शन मोड पर आ गया है और विभाग ने आज ही पुलिस अधीक्षकों से संपर्क कर तीन दिनों तक लगातार अभियान चलाकर अवैध खनन गतिविधियों के खिलाफ कठोरतम कार्यवाही के निर्देश दिए हैं।

डॉ. अग्रवाल ने बताया कि अवैध खनन पर प्रभावी रोक के लिए एक और विभाग द्वारा संबंधित विभागों से समन्वय बनाते हुए अभियान चलाकर बड़ी मशीनरी की जब्ती और एफआईआर एवं गिरफ्तारी जैसे कठोर कदम उठाए जा रहे हैं वहीं वैध खनन को बढ़ावा देने के लिए खनिज ब्लाक तैयार कर ई नीलामी की जा रही है। ताकि अवैध खनन पर रोक लगाई जा सके।

केम्पेगौड़ा की 108 फुट ऊंची प्रतिमा का अनावरण

केम्पेगौड़ा की 108 फुट ऊंची प्रतिमा का अनावरण

अकांशु उपाध्याय/इकबाल अंसारी 

नई दिल्ली/बेंगलुरु। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने बेंगलुरु के संस्थापक नादप्रभु केम्पेगौड़ा की 108 फुट ऊंची प्रतिमा का शुक्रवार को अनावरण किया। ‘वर्ल्ड बुक ऑफ रिकॉर्ड्स’ के अनुसार, यह शहर के संस्थापक की पहली और सबसे ऊंची कांस्य प्रतिमा है। ‘स्टैच्यू ऑफ प्रॉस्पेरिटी’ (समृद्धि की प्रतिमा) नामक यह प्रतिमा बेंगलुरु के विकास के लिए केम्पेगौड़ा के योगदान को याद करती है।

यह प्रतिमा 218 टन वजनी (98 टन कांसा और 120 टन इस्पात) है। इसे यहां केम्पेगौड़ा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर स्थापित किया गया है। इसमें लगी तलवार चार टन की है। प्रतिमा के पीछे 23 एकड़ में फैला एक विरासत थीम पार्क है जो 16वीं सदी के शासक को समर्पित है। इस परियोजना की कुल लागत लगभग 84 करोड़ रुपये है।

हालांकि, कांग्रेस ने कैम्पेगौड़ा की मूर्ति के उद्घाटन को लेकर सवाल उठाया हैं। कर्नाटक कांग्रेस के अध्यक्ष डीके शिवकुमार ने सवाल उठाया कि कैम्पेगौड़ा की मूर्ति बनाने के लिए सरकारी पैसों का इस्तेमाल क्यों किया गया? उन्होंने कहा कि कैम्पेगौड़ा इंटरनेशनल एयरपोर्ट का जिम्मा बेंगलुरु इंटरनेशनल एयरपोर्ट लिमिटेड (BIAL) के पास है और उसे ही इस मूर्ति का खर्चा उठाना चाहिए था।

शिवकुमार ने कहा, 'सरकारी पैसे से बनी प्रतिमा को स्थापित करना अपराध है। कर्नाटक सरकार ने BIAL को जमीन और फंड दिया था। 4,200 एकड़ जमीन में से 2,000 एकड़ जमीन सिर्फ 6 लाख रुपये प्रति एकड़ के हिसाब से दी गई थी। उनके पास शेयर भी हैं। BIAL को अपने पैसे का इस्तेमाल करना चाहिए था।' पूर्ववर्ती विजयनगर साम्राज्य के सामंती शासक केम्पेगौड़ा ने 1537 में बेंगलुरु की स्थापना की थी। उन्हें ओल्ड मैसूरु तथा दक्षिण कर्नाटक के अन्य हिस्सों में बहुल वोक्कालिगा समुदाय द्वारा श्रद्धेय माना जाता है। प्रख्यात मूर्तिकार और पद्म भूषण से सम्मानित राम वनजी सुतार ने इस प्रतिमा का निर्माण किया है। सुतार ने गुजरात में ‘स्टैच्यू ऑफ यूनिटी’ तथा बेंगलुरु के विधानसौध में महात्मा गांधी की प्रतिमा भी बनायी थी।

इस प्रतिमा के लिए राज्य के 22,000 से अधिक स्थानों से ‘पवित्र मिट्टी’ एकत्रित की गयी जिसे सांकेतिक रूप से प्रतिमा के चार टॉवर में से एक के नीचे की मिट्टी में मिलाया गया। पिछले दो सप्ताह में 21 विशेष वाहनों ने गांवों, शहरों और नगरों में पवित्र मिट्टी एकत्रित की। अगले साल विधानसभा चुनाव के मद्देनजर इस प्रतिमा की स्थापना से राजनीतिक दलों के बीच केम्पेगौड़ा की विरासत पर दावा जताने की स्पर्धा शुरू होती दिख रही है, जिसका मकसद राजनीतिक रूप से प्रभावशाली वोक्कालिगा समुदाय से चुनावी समर्थन हासिल करना है। विपक्ष के नेता सिद्धरमैया ने पहले कहा था कि उनके नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार ने सबसे पहले हवाई अड्डे पर केम्पेगौड़ा की प्रतिमा स्थापित करने की योजना बनाई थी।

कैम्पेगौड़ा हैं कौन?

नदप्रभु कैम्पेगौड़ा विजयनगर साम्राज्य के शासक थे। 1537 में उन्होंने ही बेंगलुरु की स्थापना की थी। यहां उन्होंने कन्नड़ भाषा में कई शिलालेख बनवाए थे। कैम्पेगौड़ा के पिता मोरासू वोक्कालिगा कैम्पेंनंजे गौड़ा के पुत्र थे, जिन्होंने 70 साल से भी ज्यादा समय तक येल्हानकनाडु पर शासन किया था। माना जाता है कि 15वीं सदी में उनका परिवार तमिलनाडु के कांची से कर्नाटक आ गया और विजयनगर साम्राज्य का शासन संभाला। सन् 1513 में कैम्पेगौड़ा ने अपने पिता की विरासत को संभाला। कैम्पेगौड़ा ने लगभग 46 साल तक विजयनगर साम्राज्य पर शासन किया।

माना जाता है कि एक बार कैम्पेगौड़ा अपने मंत्री वीरन्ना और सलाहकार गिद्दे गौड़ा के साथ शिकार पर गए थे, तभी उन्होंने एक ऐसे शहर की कल्पना की थी जहां किले, टैंक, छावनी, मंदिर और कारोबार करने की सुविधा हो। कैम्पेगौड़ा ने पहले शिवगंगा रियासत पर जीत हासिल की और बाद में डोम्लूर को भी जीत लिया। डोम्लूर पुराने बेंगलुरु एयरपोर्ट की सड़क पर स्थित है। 1537 में उन्होंने बेंगलुरु किले का निर्माण किया और शहर बसाया। और अपनी राजधानी को येलहांका से बेंगलुरु में स्थानांतरित कर लिया।

कैम्पेगौड़ा ने जो किला बनाया था, वो लाल रंग का था। इस किले में 8 दरवाजे थे और अंदर दो चौड़ी सड़कें थीं। किले के बाहर चारों ओर चौड़ी खाई भी बनी थी। उन्होंने दूर-दराज के इलाकों से कुशल कारीगरों को भी यहां बसाया ताकि वो कारोबार कर सकें।

टीचर के द्वारा खाने में छिपकली खिलाने का मामला 

टीचर के द्वारा खाने में छिपकली खिलाने का मामला 

अविनाश श्रीवास्तव 

भागलपुर। बिहार के भागलपुर में एक टीचर के द्वारा खाने में छिपकली खिलाने का मामला सामने आया है, जिससे 200 से ज्यादा बच्चे बीमार पड़ गए हैं। बताया जा रहा है कि एक स्कूल में मिड-डे मिल के खाने में छिपकली होने की बात बच्चों ने टीचर से कही, लेकिन टीचर ने बच्चों से कहा कि खाने में छिपकली नहीं वो बैंगन है।

आरोप है कि बच्चों ने जब खाना खाने से इनकार कर दिया तो उन्हें टीचर ने पीटा और जबरदस्ती खाना खिलाया। जैसे ही बच्चों ने खाना खाया उन्हें उलटियां होना शुरू हो गईं और थोड़ी देर के बाद बच्चों की हालत बिगड़ने लगी। बीमार पड़ने के तुरंत ही उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया। फिलहाल बच्चों का उपचार किया जा रहा है और पुलिस मामले की जांच कर रही है।

अनुशंसित नामों को लंबित रखने पर नाराजगी: एससी 

अनुशंसित नामों को लंबित रखने पर नाराजगी: एससी 

अकांशु उपाध्याय 

नई दिल्ली। उच्चतम न्यायालय ने शुक्रवार को शीर्ष अदालत की कॉलेजियम द्वारा दोबारा भेजे गये नामों सहित उच्चतर न्यायपालिका में न्यायाधीशों की नियुक्ति के लिए अनुशंसित नामों को केंद्र द्वारा लंबित रखने पर नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि यह ‘अस्वीकार्य’ है। शीर्ष अदालत ने कहा कि नामों पर कोई निर्णय न लेना ऐसा तरीका बनता जा रहा है कि उनलोगों को अपनी सहमति वापस लेने को मजबूर किया जाए, जिनके नामों की सिफारिश उच्चतर न्यायपालिका में बतौर न्यायाधीश नियुक्ति के लिए की गई है। न्यायमूर्ति संजय किशन कौल और न्यायमूर्ति अभय एस. ओका की पीठ ने कहा, ‘‘नामों को बेवजह लंबित रखना स्वीकार्य नहीं है।’’

पीठ ने केंद्रीय विधि एवं न्याय मंत्रालय के सचिव (न्याय) को नोटिस जारी करके शीर्ष अदालत के 20 अप्रैल 2021 के आदेश के अनुरूप समय पर नियुक्ति के लिए निर्धारित समय सीमा की ‘‘जानबूझकर अवज्ञा’’ करने के आरोप वाली याचिका पर जवाब मांगा। एडवोकेट्स एसोसिएशन, बेंगलुरु द्वारा अधिवक्ता पई अमित के माध्यम से दायर याचिका में उच्चतर न्यायालयों में न्यायाधीशों की नियुक्ति में ‘‘असाधारण देरी’ का मुद्दा उठाया है। इसने 11 नामों का उल्लेख किया है, जिनकी सिफारिश की गई थी और बाद में ये नाम दोबारा भी भेजे जा चुके हैं।

पीठ ने कहा, ‘‘अगर हम विचार के लिए लंबित मामलों की स्थिति को देखें, तो सरकार के पास ऐसे 11 मामले लंबित हैं, जिन्हें कॉलेजियम ने मंजूरी दे दी थी और अभी तक उनकी नियुक्ति की प्रतीक्षा की जा रही है।’’ पीठ ने कहा कि कॉलेजियम द्वारा दोबारा भेजे गए नामों सहित अनुशंसित नामों को मंजूरी देने में देरी के कारण कुछ लोगों ने अपनी सहमति वापस ले ली है और (न्यायिक) तंत्र ने पीठ में एक प्रतिष्ठित व्यक्ति के शामिल होने का अवसर खो दिया है।

शीर्ष अदालत ने कहा, ‘‘हम पाते हैं कि नामों को रोककर रखने का तरीका इन लोगों को अपना नाम वापस लेने के लिए मजबूर करने का एक तरीका बन गया है, ऐसा हुआ भी है।’’ याचिकाकर्ता के वकील की इस बात का भी संज्ञान लिया गया कि जिन व्यक्तियों का नाम दोबारा भेजे जाने के बाद भी लंबित था, उनमें से एक का निधन हो गया है।

पीठ ने इस बात का भी संज्ञान लिया कि सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन (एससीबीए) के अध्यक्ष एवं वरिष्ठ अधिवक्ता विकास सिंह ने शीर्ष अदालत के समक्ष दलील दी है कि शीर्ष अदालत में नियुक्ति के लिए पांच सप्ताह से अधिक समय पहले की गई सिफारिश आज भी लंबित है। पीठ ने कहा, ‘‘हम वास्तव में इसे समझ पाने या इसका मूल्यांकन करने में असमर्थ हैं।’’ शीर्ष अदालत ने कहा कि वह वर्तमान सचिव (न्याय) और सचिव (प्रशासन और नियुक्ति) को फिलहाल ‘‘सामान्य नोटिस’’ जारी कर रही है। पीठ ने मामले की अगली सुनवाई के लिए 28 नवंबर की तारीख तय की है।

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1. अंक-397, (वर्ष-05)

2. शनिवार, नवंबर 12, 2022

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