सोमवार, 17 अप्रैल 2023

नेता करात की याचिका पर जवाब दाखिल करें पुलिस 

नेता करात की याचिका पर जवाब दाखिल करें पुलिस 

अकांशु उपाध्याय 

नई दिल्ली। उच्चतम न्यायालय ने माकपा नेता बृंदा करात की उस याचिका पर दिल्ली पुलिस से जवाब दाखिल करने को कहा है। जिसमें सीएए विरोधी प्रदर्शन को लेकर कथित तौर पर नफरती भाषण देने को लेकर केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर और भाजपा नेता प्रवेश वर्मा के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने की मांग की गई है। इससे पहले निचली अदालत और फिर दिल्ली उच्च न्यायालय द्वारा प्राथमिकी दर्ज करने से इनकार कर दिया गया था जिसके खिलाफ करात ने यह याचिका दायर की है। न्यायमूर्ति के.एम. जोसेफ और न्यायमूर्ति बी.वी. नागरत्ना की पीठ ने शहर की पुलिस को नोटिस जारी किया और तीन सप्ताह के भीतर जवाब मांगा।

सुनवाई के दौरान पीठ ने पाया कि प्रथम दृष्टया मजिस्ट्रेट का यह कहना कि दोनों भाजपा नेताओं के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने के लिए मंजूरी की आवश्यकता है, सही नहीं था। पिछले साल 13 जून को दिल्ली उच्च न्यायालय ने माकपा नेताओं बृंदा करात और के.एम. तिवारी द्वारा भाजपा के दो सांसदों के खिलाफ उनके कथित घृणास्पद भाषणों के सिलसिले में दायर याचिका को खारिज कर दिया था।

उच्च न्यायालय ने निचली अदालत के आदेश में हस्तक्षेप करने से इनकार करते हुए कहा था कि कानून के तहत मौजूदा तथ्यों में प्राथमिकी दर्ज करने के लिए सक्षम प्राधिकारी से मंजूरी लेनी जरूरी है। याचिकाकर्ताओं ने निचली अदालत के समक्ष अपनी शिकायत में दावा किया था कि ठाकुर और वर्मा ने “लोगों को उकसाने की कोशिश की थी, जिसके परिणामस्वरूप दिल्ली में दो अलग-अलग विरोध स्थलों पर गोलीबारी की तीन घटनाएं हुईं”।

याचिकाकर्ताओं का कहना था कि यहां रिठाला रैली में ठाकुर ने 27 जनवरी, 2020 को भीड़ को उकसाने के लिए भड़काऊ नारेबाजी की थी। याचिकाकर्ताओं ने यह भी कहा कि वर्मा ने 28 जनवरी, 2020 को शाहीन बाग में सीएए विरोधी प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कथित रूप से भड़काऊ टिप्पणी की थी। निचली अदालत ने 26 अगस्त, 2021 को याचिकाकर्ताओं की प्राथमिकी दर्ज करने की याचिका को इस आधार पर खारिज कर दिया था कि यह सुनवाई योग्य योग्य नहीं है क्योंकि सक्षम प्राधिकार, केंद्र सरकार से अपेक्षित मंजूरी नहीं मिली।

शिकायत में, करात और तिवारी ने भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 153-ए (धर्म, जाति, जन्म स्थान, निवास, भाषा के आधार पर विभिन्न समूहों के बीच दुश्मनी को बढ़ावा देना), 153-बी (राष्ट्रीय एकजुटता को कमजोर करने वाले भाषण देना) और 295-ए (जानबूझकर किसी भी वर्ग की धार्मिक भावनाओं को चोट पहुंचाना) के तहत प्राथमिकियां दर्ज किए जाने का अनुरोध किया था।

आईपीसी की धारा 298 (धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने के इरादे से दिया गया भाषण), 504 (शांति भंग करने के इरादे से जानबूझकर अपमान), 505 (गड़बड़ी फैलाने के इरादे से दिया गया बयान) और 506 (आपराधिक धमकी के लिए सजा) के तहत भी कार्रवाई का अनुरोध किया गया था। इन अपराधों के लिए अधिकतम सात वर्ष कैद की सजा हो सकती है।

सिसोदिया की हिरासत एक मई तक के लिए बढ़ाई

सिसोदिया की हिरासत एक मई तक के लिए बढ़ाई

अकांशु उपाध्याय 

नई दिल्ली। दिल्ली शराब नीति 2021-22 में कथित अनियमितताओं के मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) और प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की अलग-अलग गिरफ्तारी के बाद तिहाड़ जेल में बंद आदमी पार्टी के वरिष्ठ नेता एवं दिल्ली के पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया की न्यायिक हिरासत सोमवार को एक मई तक के लिए बढ़ा दी गई।राउज एवेन्यू स्थित एम. के. नागपाल की विशेष अदालत ने ईडी की ओर से दर्ज मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में सिसोदिया की न्यायिक हिरासत बढ़ाने का आदेश पारित किया। विशेष अदालत ने इससे पहले पांच अप्रैल को ईडी के अनुरोध पर उनकी न्यायिक हिरासत अवधि 17 अप्रैल तक के लिए बढ़ा दी थी।  इससे पहले इस अदालत ने तीन अप्रैल को आरोपी नेता को सीबीआई की ओर से दर्ज मामले में भी 17 अप्रैल तक न्यायिक हिरासत में भेजने का आदेश दिया था।

विशेष अदालत ने आबकारी नीति में कथित अनियमितताओं के मामले में सीबीआई की ओर से दर्ज प्राथमिकी में सिसोदिया की जमानत याचिका 31 मार्च को खारिज कर दी थी। इसके बाद उन्होंने दिल्ली उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया था। दिल्ली उच्च न्यायालय ने सिसोदिया की जमानत याचिका पर छह अप्रैल को सीबीआई को नोटिस जारी किया। उच्च न्यायालय के न्यायाधीश न्यायमूर्ति दिनेश कुमार शर्मा की एकल पीठ ने सीबीआई को दो सप्ताह के भीतर अपना जवाब दाखिल करने का निर्देश देते हुए कहा कि वह इस मामले की अगली सुनवाई 20 अप्रैल को करेगी। गौरतलब है कि पूर्व उपमुख्यमंत्री को सीबीआई ने लंबी पूछताछ के बाद 26 फरवरी को गिरफ्तार किया था। सीबीआई ने आरोप लगाया था कि सिसोदिया जांच में सहयोग नहीं कर रहे थे, इसीलिए उन्हें गिरफ्तार किया गया।

बाद में सिसोदिया को विशेष अदालत में पेश किया गया था, जहां उन्हें सीबीआई के अनुरोध पर चार मार्च तक केंद्रीय जांच एजेंसी की हिरासत में भेजा गया था, जिसकी अवधि समाप्त होने पर दो दिन की और सीबीआई हिरासत में भेजने का आदेश दिया गया था। सीबीआई हिरासत समाप्त होने के बाद उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया था। सीबीआई मामले में न्यायिक हिरासत के दौरान ईडी ने श्री सिसोदिया से पूछताछ की थी। बाद में विशेष अदालत ने ईडी की याचिका पर उन्हें उसकी हिरासत में भेजा दिया था। सिसोदिया को ईडी की हिरासत खत्म होने के बाद इस मामले में भी न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया था। शीर्ष अदालत ने 28 फरवरी को सिसोदिया की रिट याचिका खारिज करते हुए कहा था कि याचिकाकर्ता दिल्ली उच्च न्यायालय के समक्ष गुहार लगा सकता है।

उन्होंने अपनी गिरफ्तारी और सीबीआई की जांच के तरीकों पर सवाल उठाते हुए राहत की उम्मीद में शीर्ष अदालत का दरवाजा खटखटाया था। मुख्य न्यायाधीश डी वाई चंद्रचूड़ और न्यायमूर्ति पी एस नरसिम्हा की पीठ ने संबंधित पक्षों की दलीलें सुनने के बाद सिसोदिया की याचिका पर विचार करने से इनकार कर दिया था। शीर्ष अदालत से राहत नहीं मिलने पर सिसोदिया ने बाद में उसी दिन उप मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था, जिसे स्वीकार कर लिया गया था। सीबीआई ने 17 अक्टूबर 2022 को उनसे पूछताछ की थी। एजेंसी ने 17 अगस्त 2022 को सिसोदिया और अन्य 14 लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की थी।

गौरतलब है कि दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल से भी रविवार 16 अप्रैल को सीबीआई ने नई दिल्ली स्थित अपने मुख्यालय में इसी मामले में पूछताछ की थी। केजरीवाल का कहना है कि सीबीआई ने उनसे नौ घंटे तक पूछताछ की, जिसमें 56 सवाल किए गए थे।

नोटबंदी व कानूनों को लेकर सरकार की आलोचना 

नोटबंदी व कानूनों को लेकर सरकार की आलोचना 

अकांशु उपाध्याय 

नई दिल्ली। दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर तीखा हमला करते हुए नोटबंदी और कृषि कानूनों को लेकर केंद्र सरकार की आलोचना की। केजरीवाल सोमवार को विधानसभा के विशेष सत्र को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर हमला करने के लिए एक चौथी पास राजा की कहानी सुनाई। उन्होंने कहा, राजा ने अपने दोस्त के साथ मिलकर देश को जमकर लूटा। उसने सरकारी ठेके अपने दोस्त को दे दिए। देश की बैंकों को सबसे पहले लूटा गया। इन सबसे देश भयंकर महंगाई आ गई। महंगाई से परेशान होकर लोगों ने आवाज़ उठाई तो राजा ने कहा जो उनके ख़िलाफ़ बोलेगा उसे जेल में डाला जाएगा।

राजा ने एक-एक को जेल में डालना शुरू कर दिया। उन्होंने फ़र्ज़ी डिग्री मामले में प्रधानमंत्री पर कटाक्ष करते हुए कहा कि चौथी पास राजा ने एमए की फर्जी डिग्री बनवाई, जब आरटीआई के जरिए इस बारे में जानकारी मांगी गई तो उसने लोगों पर 25-25 हजार रुपए का जुर्माना लगा दिया। मुख्यमंत्री ने चौथी पास राजा की तुलना मोहम्मद बिन तुगलक से की जो अपने समय में उल्टे सीधे फ़ैसले लेने के लिए जाना जाता है।

उन्होंने बताया कि किस तरह से एक दिन रात को आठ बजे राजा ने सभी चलते हुए नोटों को बंद कर दिया। इस घटना से पूरे देश में हाहाकार मच गया। लोगों के धंधे तक चौपट हो गए। इसके साथ ही उन्होंने किसानों के कानूनों का भी जिक्र किया। राजा की मूर्खता की वजह से तीन काले कानून पास कर दिए। इससे पूरे देश के किसान सड़कों पर उतर आए।केजरीवाल ने स्वयं की तारीफ़ करते हुए कहा कि चौथी पास राजा के देश में एक छोटे राज्य का मुख्यमंत्री था जो लोगों के लिए काम करता था और वह कट्टर ईमानदार था। वह देशभक्त एवं पढ़ा लिखा मुख्यमंत्री था।

अतीक व अशरफ की हत्या, यूपी में जंगल राज है

अतीक व अशरफ की हत्या, यूपी में जंगल राज है

अविनाश श्रीवास्तव 

पटना। जनता दल- यूनाइटिड (जदयू) के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजीव रंजन उर्फ ललन सिंह ने माफिया और पूर्व सांसद अतीक अहमद और उसके पूर्व विधायक भाई अशरफ अहमद की प्रयागराज में पुलिस हिरासत में सरेआम हत्या किए जाने पर सोमवार को प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए दावा किया कि उत्तर प्रदेश में जंगल राज है। सिंह ने ट्विट कर कहा, बिहार में जंगलराज का विलाप करने वाले भाजपाइयों को उत्तरप्रदेश पुलिस बल के समक्ष अपराधियों की ठायें-ठायें और न्यायिक हिरासत में हत्या नहीं दिखाई दे रही है। उन्होंने कहा, लेकिन ढीठ भाजपा सरकार तो न्यायालय व संविधान को ताक पर रखकर कानून की धज्जियां उड़ा रही है और अपनी पीठ खुद थपथपा रही है।

जदयू प्रमुख ने कहा, बिहार में जब से महागठबंधन की सरकार बनी है तब से दिल्ली से लेकर प्रदेश स्तर तक के नेता जंगलराज कहने लगे हैं, वाह रे भाई वाह... उत्तरप्रदेश की भाजपा सरकार, जहां पुलिस अभिरक्षा में न्यायिक हिरासत के आरोपियों की सरेआम हत्या हो रही है उस सरकार को क्या कहिएगा... वाह रे भाजपा का मंगल राज....जहां कानून, संविधान और लोकतंत्र को कुचला जा रहा है।

सिंह ने भाजपा पर अपना प्रहार जारी रखते हुए कहा, देश की 140 करोड़ जनता मूकदर्शक बन कर आपके कारनामों को देख रही है, 2024 में आपको जवाब जरूर मिलेगा और देश भाजपा मुक्त होगा । अतीक (60) और उसके भाई अशरफ की शनिवार रात को प्रयागराज में तीन हमलावरों ने उस समय गोली मारकर हत्या कर दी थी, जब पुलिस दोनों को चिकित्सा जांच के लिए मेडिकल कॉलेज ले जा रही थी।

पत्रकारों की भेष में आए तीन हमलावरों ने अतीक और उसके भाई को उस समय बहुत करीब से गोली मार दी, जब वे मीडियाकर्मियों से बातचीत कर रह थे, जबकि उनके आसपास पुलिस कर्मियों का पहरा था। इससे पहले झांसी में 13 अप्रैल को अहमद का बेटा असद और उसका एक साथी पुलिस मुठभेड़ में मारे गए थे। 

मणिपुर पर्यटन निगम के प्रमुख के पद से इस्तीफा

मणिपुर पर्यटन निगम के प्रमुख के पद से इस्तीफा

इकबाल अंसारी 

इंफाल। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के विधायक करम श्याम ने सोमवार को मणिपुर पर्यटन निगम के प्रमुख के पद से इस्तीफा दे दिया और आरोप लगाया कि उन्हें कोई जिम्मेदारी नहीं दी जा रही थी। मीडियाकर्मियों के साथ साझा किए गए एक वीडियो क्लिप में श्याम ने आरोप लगाया कि राज्य में पर्यटन से जुड़े विभिन्न कार्यक्रमों में उन्हें दरकिनार कर दिया गया। लांगथबल क्षेत्र से विधायक ने यह भी दावा किया कि उन्होंने अपना इस्तीफा मुख्यमंत्री एन बीरेन सिंह को भेज दिया है।

उन्होंने कहा, "जब राज्य संगाई त्योहार की तैयारी कर रहा था, उस दौरान मैं कुछ नहीं कर रहा था और बेकार अध्यक्ष बना रहा।" करम मणिपुर विधानसभा चुनाव से एक साल पहले 2021 में भाजपा में शामिल हुए थे। कुछ दिन पहले ही, भाजपा के एक अन्य विधायक थोकचोम राधेश्याम ने कोई जिम्मेदारी नहीं दिए जाने का हवाला देते हुए मुख्यमंत्री के निजी सहायक के पद से इस्तीफा दे दिया था।

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प्राधिकृत प्रकाशन विवरण

प्राधिकृत प्रकाशन विवरण


1. अंक-186, (वर्ष-06)

2. मंगलवार, अप्रैल 18, 2023

3. शक-1944, बैशाख, कृष्ण-पक्ष, तिथि-त्रयोदशी, विक्रमी सवंत-2079‌‌।

4. सूर्योदय प्रातः 06:40, सूर्यास्त: 06:23। 

5. न्‍यूनतम तापमान- 25 डी.सै., अधिकतम- 33+ डी.सै.।

6. समाचार-पत्र में प्रकाशित समाचारों से संपादक का सहमत होना आवश्यक नहीं है। सभी विवादों का न्‍याय क्षेत्र, गाजियाबाद न्यायालय होगा। सभी पद अवैतनिक है। 

7.स्वामी, मुद्रक, प्रकाशक, संपादक राधेश्याम व शिवांशु  (विशेष संपादक) श्रीराम व सरस्वती (सहायक संपादक) संरक्षण-अखिलेश पांडेय, ओमवीर सिंह, वीरसैन पंवार, योगेश चौधरी आदि के द्वारा (डिजीटल सस्‍ंकरण) प्रकाशित। प्रकाशित समाचार, विज्ञापन एवं लेखोंं से संपादक का सहमत होना आवश्यक नहीं हैं। पीआरबी एक्ट के अंतर्गत उत्तरदायी।

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