गुरुवार, 12 जनवरी 2023

'बर्ड फ्लू' फैलने की वजह से 1,800 मुर्गियों की मौंत 

'बर्ड फ्लू' फैलने की वजह से 1,800 मुर्गियों की मौंत 

इकबाल अंसारी 

तिरुवनंतपुरम। केरल के कोझिकोड जिले में एक सरकारी मुर्गी पालन केन्द्र में बर्ड फ्लू फैलने की वजह से, कम से कम 1,800 मुर्गियों की संक्रमण से मौंत हो गई है। आधिकारिक सूत्रों ने यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि बर्ड फ्लू के वायरस के एच5एन1 स्वरूप की मौजूदगी उस मुर्गी पालन केन्द्र की मुर्गियों में पाई गई। जिसका संचालन जिला पंचायत करता है। अधिकारी ने बताया कि केरल की पशुपालन मंत्री जे चिंचू रानी ने इस संबंध में केंद्र के दिशानिर्देशों और प्रोटोकॉल के अनुरूप रोकथाम के उपाय करने के निर्देश दिए हैं। सरकार की ओर से जारी एक बयान में कहा गया कि प्रारंभिक जांच में बर्ड फ्लू फैलने के संकेत हैं।

नमूनों को सटीक जांच के लिए मध्य प्रदेश के भोपाल स्थित प्रयोगशाला में भेजा गया है। मुर्गी पालन केन्द्र में 5000 से अधिक मुर्गियां थीं और उनमें से अब तक संक्रमण के चलते 1800 मुर्गियों की मौत हो चुकी है। बयान के अनुसार, जिला अधिकारियों के तत्वावधान में विभिन्न सरकारी विभागों के समन्वय के साथ मुर्गियों को मारा जाएगा तथा बीमारी की रोकथाम के लिए अन्य प्रयास किए जाएंगे।

भारत: कोविड-19 ने विनिर्माण क्षेत्र को प्रभावित किया 

भारत: कोविड-19 ने विनिर्माण क्षेत्र को प्रभावित किया 

अकांशु उपाध्याय 

नई दिल्ली। कोविड-19 ने भारत के विनिर्माण क्षेत्र को बहुत अधिक प्रभावित किया है। यह बात एक अध्ययन में कही गई है। महामारी के प्रभाव को मापने के पिछले प्रयासों में अधिकांशत: केवल एक ही आयाम देखा गया, जैसे कि सकल घरेलू उत्पाद या देश की बेरोजगारी दर। ‘पीएलओएस वन’ में प्रकाशित नवीनतम अध्ययन में अमेरिका, ब्राजील, भारत, स्वीडन, न्यूजीलैंड और इज़राइल समेत कई देशों में सामाजिक, आर्थिक तथा राजनीतिक जैसे विभिन्न क्षेत्रों में महामारी के प्रभाव का पता लगाया गया।

अमेरिका स्थित लॉस अलामोस नेशनल लैबोरेटरी से संबंद्ध सारा डेल वैले ने कहा, ‘‘देशों में महामारी के प्रभाव को लेकर पूर्व में विशेषज्ञों द्वारा जताए गए अनुमानों में हमें विसंगतियां देखने को मिलीं।’’ शोधकर्ताओं ने पाया कि महामारी से सबसे अधिक प्रभावित क्षेत्र भी अलग-अलग देशों में अलग-अलग हैं। अध्ययन से पता चलता है कि अमेरिका और स्वीडन में मानव स्वास्थ्य, लोक प्रशासन और रक्षा क्षेत्र पर बहुत अधिक प्रभाव पड़ा, जबकि ब्राजील और भारत में विनिर्माण क्षेत्र पर अत्यधिक प्रभाव पड़ा। शोधकर्ताओं के अनुसार, निर्माण क्षेत्र सभी देशों में मध्यम स्तर पर, या फिर बहुत अधिक प्रभावित हुआ।

उन्होंने कहा कि अन्य देशों के विपरीत, खुदरा व्यापार - मोटर वाहनों और मोटरसाइकिलों को छोड़कर-अन्य क्षेत्रों के सापेक्ष भारत में बहुत अधिक प्रभावित हुआ। डेल वैले ने कहा, "हमने पाया कि इन देशों में लोगों ने सख्त कोविड नीतियों के प्रति काफी अलग-अलग तरह की प्रतिक्रिया दी।"

हिंसा भड़काने में भाषा की भूमिका की जांच शुरू 

हिंसा भड़काने में भाषा की भूमिका की जांच शुरू 

अखिलेश पांडेय 

वाशिंगटन डीसी/ब्रासीलिया। ब्राजील में दंगे, 6 जनवरी, 2021 की घटना और कोलोराडो एलजीबीटीक्यू नाइट क्लब में बड़े पैमाने पर गोलीबारी जैसी घटनाएं तब हुई जब कुछ समूहों ने बार-बार दूसरों के खिलाफ खतरनाक भाषा का इस्तेमाल किया। यही कारण है कि अमेरिका में निर्वाचित अधिकारियों ने हिंसा भड़काने में भाषा की भूमिका की जांच शुरू कर दी है। एक सामाजिक मनोवैज्ञानिक के रूप में जो खतरनाक भाषा और दुष्प्रचार का अध्ययन करता है, मुझे लगता है कि नागरिकों, विधायकों और कानून प्रवर्तन के लिए समान रूप से यह समझना महत्वपूर्ण है कि भाषा समूहों के बीच हिंसा को भड़का सकती है। वास्तव में, बयानबाजी में विभिन्न प्रकार के खतरे हैं, जो हमारे में से ही कुछ लोगों को हिंसा फैलाने के लिए इस्तेमाल करते हैं।

वह समाज को दो वर्गों आंतरिक समूह और बाहरी समूह में बांट देते हैं और खतरनाक भाषा के जरिए वह अपने कृत्यों को सही ठहराने का प्रयास करते हैं। उदाहरण के लिए, हाल के चुनावों से संकेत मिलता है कि मुख्य रूप से धुर दक्षिण समाचार स्रोतों पर भरोसा करने वाले 40 प्रतिशत लोगों का मानना ​​है कि "सच्चे देशभक्तों" को देश को "बचाने" के लिए हिंसा का सहारा लेना पड़ सकता है। समूहों के बीच संघर्ष को फैलाने वाले प्रमुख तत्वों को पहचानने वाले वैज्ञानिक सिद्धांतों की एक श्रृंखला पर चित्रण करते हुए, मैंने पांच बुनियादी प्रकार के खतरे की पहचान की है।

1. शारीरिक धमकियाँ - वे हमें नुकसान पहुँचाने वाले हैं इसमें जब एक समूह द्वारा दूसरे समूह को शारीरिक रूप से नुकसान पहुंचाने या मारने की आशंका के रूप में चित्रित किया जाता है, इस श्रेणी में आता है।

उदाहरण के लिए, आंतरिक समूह कभी-कभी बाहरी समूह को आंतरिक समूह के लिए खतरे के रूप में चित्रित करने के लिए बीमारी का उपयोग करते हैं। कोविड-19 महामारी के दौरान लोगों द्वारा एशियाई अमेरिकियों और अप्रवासियों के खिलाफ लगाए गए आरोप इसके उदाहरण हैं। आंतरिक समूह भी उसी कारण से बाहरी समूहों को शारीरिक रूप से आक्रामक या हिंसक अपराधी मान लेते हैं। इस तरह के कामों में माहिर लोग बाहरी समूहों को अमूमन हमारे समाज के संरक्षित या कमजोर वर्गों- महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों के प्रति विशेष रूप से आक्रामक के तौर पर पेश करने के शौकीन होते हैं। इस तरह के चरित्र-चित्रण से बाहरी समूह निंदनीय लगने लगते हैं और कमजोर लोगों की "रक्षा" करने की कार्रवाई महान प्रतीत होती है।

समय-समय पर, मध्य युग से चल रहे एक सिलसिले में, अलग-अलग आंतरिक समूहों ने यहूदियों पर तथाकथित "रक्तपात आरोप" लगाया है, जिसमें एक अनुष्ठान के रूप में ईसाई बच्चों की हत्या की बात कही गई। आज, हम क्यूएनन षड्यंत्र के सिद्धांतों में इसकी प्रतिध्वनि देखते हैं, जो उदारवादियों पर बच्चों की तस्करी का आरोप लगाते हैं।परिणामस्वरूप, क्यूएनएन में विश्वास रखने वाले "बच्चों को बचाना" चाहते हैं और कथित खतरे से निपटने के लिए हिंसा का उपयोग करने को तैयार हैं।

2. नैतिक खतरे - वे हमारे समाज को नीचा दिखा रहे हैं एक आंतरिक समूह में कोई व्यक्ति जो बाहरी समूह को समाज के सांस्कृतिक, राजनीतिक या धार्मिक मूल्यों के लिए अपमानजनक मानता है, वह बाहरी समूह को नैतिक खतरे के रूप में रखता है।

उदाहरण के लिए, लोग अक्सर एलजीबीटीक्यू समुदाय के सदस्यों को इस तरह के धमकी भरे तरीकों से निशाना बनाते हैं। कुछ लोगों का मानना ​​है कि समलैंगिकता नैतिक रूप से गलत है। और ऐसे लोग हैं जो तर्क देते हैं कि समान-लिंग विवाह स्वयं विवाह के लिए खतरा है। पिछली कांग्रेस के दौरान, विवाह अधिनियम के सम्मान पर चैंबर द्वारा हस्ताक्षर किए जाने से पहले एक रिपब्लिकन महिला सदन के पटल पर रो रही थी। लोगों ने एलजीबीटीक्यू समुदाय की कथित अनैतिकता को प्राकृतिक आपदाओं से लेकर आतंकी हमलों तक हर चीज के लिए जिम्मेदार ठहराया है। और यह आरोप कि एलजीबीटीक्यू लोग बच्चों को प्रेरित कर रहे हैं और उन्हें तैयार कर रहे हैं, आज राजनीतिक खतरे के मुख्य आधार हैं।

3. संसाधन खतरे - वे हमसे हमारे संसाधन ले रहे हैं कभी-कभी, आंतरिक समूह के सदस्य बाहरी समूहों को मूल्यवान वस्तुओं के प्रतियोगी के रूप में पेश करते हैं और दोनो मूल्यवान संसाधनों के लिए प्रतिस्पर्धा करते हैं। इससे समूहों के बीच दुश्मनी और संघर्ष तेजी से बढ़ता है। यदि बाहरी समूह वांछित संसाधन तक पहुंच बना लेते हैं, तो इसका मतलब यह लगाया जाता है कि आंतरिक समूह के लिए कुछ भी नहीं बचा है।

इस प्रकार के खतरे का सबसे आम उदाहरण यह आरोप है कि अप्रवासी "हमारी नौकरियां चुरा रहे हैं।" शिक्षा, छात्रवृत्ति, स्वास्थ्य देखभाल या सामाजिक सेवाओं जैसे अन्य संसाधनों का अनुचित हिस्सा प्राप्त करने के रूप में बाहरी समूहों को दिखाकर इस खतरे को बढ़ाया जा सकता है।

4. सामाजिक खतरे - वे हमारे लिए बाधाएँ हैं जब आंतरिक समूह के सदस्य बाहरी समूह पर उनकी सामाजिक स्थिति या महत्वपूर्ण संबंधों तक पहुंच को हथियाने का आरोप लगाते हैं। यह जनसंख्या में जनसांख्यिकीय बदलाव से शुरू हो सकता है। वैकल्पिक रूप से, जब आंतरिक सदस्य अपनी स्थिति को अवांछनीय मानते हैं, तो वह दोष बाहरी समूह पर मढ़ सकते हैं।

5. खुद को खतरा - ये हमें बुरा महसूस कराते हैं अंत में, आंतरिक समूह को कभी-कभी ऐसा महसूस होता है जैसे कि उसके सामूहिक आत्मसम्मान को बाहरी समूह द्वारा खतरे में डाला जाता है, जैसे कि जब उन्हें लगता है कि बाहरी समूह उन्हें बदनाम कर रहा है। इससे "वे हमसे नफरत करते हैं, इसलिए हम उनसे नफरत करते हैं" की तर्ज पर सोच सकते हैं।

उदाहरण के लिए ट्विटर पर "लिबटार्ड" या "रिपग्निकन" की खोज करें। लेकिन इस मामले में, जिस स्तर पर बाहरी समूह को इस अपमान में संलग्न माना जाता है वह अतिशयोक्तिपूर्ण है और आंतरिक समूह द्वारा समान व्यवहार की उपेक्षा करता है। बाहरी समूह को जितना बड़ा खतरा माना जाता है, उतनी ही अधिक उचित चरम कार्रवाई दिखाई देती है। इस दौरान दोनो समूह स्पष्ट रूप से बंटे हुए दिखाई देते हैं। अंतरसमूह संघर्ष पर दशकों के शोध के कई अध्ययनों ने कथित खतरे और शत्रुता और संघर्ष के बीच इस संबंध का समर्थन किया है। 

स्वामी की याचिका पर जवाब दाखिल करने का समय  

स्वामी की याचिका पर जवाब दाखिल करने का समय  

अकांशु उपाध्याय 

नई दिल्ली। उच्चतम न्यायालय ने 'रामसेतु' को राष्ट्रीय धरोहर का दर्जा देने की मांग वाली भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेता डॉ. सुब्रमण्यम स्वामी की याचिका पर केंद्र सरकार को फरवरी के पहले सप्ताह तक अपना जवाब दाखिल करने का समय दिया है। मुख्य न्यायाधीश डी. वाई. चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली पीठ ने गुरुवार को राज्यसभा सांसद डॉ. स्वामी की संक्षिप्त दलीलें सुनने के बाद सरकार को फरवरी के प्रथम सप्ताह तक अपना जवाबी हलफनामा दायर करने का आदेश दिया। शीर्ष अदालत इस मामले में अगली सुनवाई फरवरी के दूसरे सप्ताह में करेगी।

डॉ. स्वामी ने पीठ के समक्ष दलील देते हुए कहा कि केंद्र सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल ने 12 दिसंबर तक अपना जवाब दाखिल करने को वचन दिया था, लेकिन उस पर अमल नहीं किया गया। उन्होंने केंद्र सरकार द्वारा अदालत के समक्ष दिये गये वचन का पालन नहीं करने पर केंद्रीय कैबिनेट सचिव को समन जारी करने की मांग की , लेकिन पीठ ने उनकी इस गुहार को अस्वीकार कर दिया।

डॉ. स्वामी ने भारत और श्रीलंका के बीच मौजूद खाड़ी में तमिलनाडु के दक्षिण-पूर्वी तट पर स्थित चट्टानों से निर्मित 'रामसेतु' को राष्ट्रीय धरोहर घोषित करने की मांग करते हुए 2007 में एक याचिका दायर की थी। हिंदू धर्म में विश्वास रखने वाले बहुत से लोगों का मानना है कि ये चट्टानें रामायण काल की हैं। केंद्र सरकार ने 2021 में यह पता लगाने के लिए शोध की अनुमति दी थी कि रामसेतु मानव निर्मित है या नहीं। इसके अलावा इसके बनने का समय क्या है और क्या यह रामायण के दौर से मिलता है ?

महादयी जल मुद्दे का जल्द ही समाधान निकाला जाएगा 

महादयी जल मुद्दे का जल्द ही समाधान निकाला जाएगा 

इकबाल अंसारी/संजय उपाध्याय

पणजी/बेंगलुरू। गोवा और कर्नाटक के बीच चल रहे महादयी नदी जल विवाद के बीच केंद्रीय जल शक्ति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने बृहस्पतिवार को कहा कि इस मुद्दे का जल्द ही समाधान निकाल लिया जाएगा। शेखावत ने एक ट्वीट में यह भी कहा कि गोवा के मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल ने बृहस्पतिवार को दिल्ली में उनके आवास पर उनसे मुलाकात की। कर्नाटक द्वारा नदी की सहायक नदियों कलसा और बंडुरी पर बांधों के निर्माण के माध्यम से महादयी नदी के पानी के मोड़ को लेकर गोवा और कर्नाटक आपस में उलझे हुए हैं। गोवा सरकार ने तर्क दिया है कि कर्नाटक महादयी नदी के पानी को मोड़ नहीं सकता है, क्योंकि यह महादयी वन्यजीव अभयारण्य से होकर गुजरता है, जो उत्तरी गोवा में नीचे की ओर स्थित है।

केंद्र ने हाल ही में कर्नाटक द्वारा दो बांधों के निर्माण के लिए प्रस्तुत एक विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) को मंजूरी दे दी है। सावंत के नेतृत्व में प्रतिनिधिमंडल ने बुधवार को दिल्ली में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात की थी और महादयी नदी के पानी को मोड़ने के मुद्दे को हल करने के लिए एक जल प्रबंधन प्राधिकरण के तत्काल गठन का आग्रह किया था। बृहस्पतिवार को प्रतिनिधिमंडल ने राष्ट्रीय राजधानी में केंद्रीय मंत्री शेखावत से मुलाकात की। बैठक के बाद शेखावत ने एक ट्वीट में कहा, “गोवा के मुख्यमंत्री अन्य प्रतिनिधियों के साथ मेरे दिल्ली आवास पर मुझसे मिलने आए थे। हमने महादयी नदी जल वितरण के मुद्दे पर चर्चा की। निश्चित रूप से, इस मुद्दे का समाधान जल्द ही निकाल लिया जाएगा।”

सावंत ने बुधवार को केंद्रीय मंत्री शाह के साथ बैठक के दौरान कहा, उन्होंने ‘‘महादेई जल प्रबंधन प्राधिकरण’’ के तत्काल गठन और केंद्रीय जल आयोग द्वारा स्वीकृत डीपीआर (कर्नाटक के) को वापस लेने का आग्रह किया। गोवा, कर्नाटक और महाराष्ट्र ने महादयी नदी के पानी के बंटवारे पर अंतर-राज्यीय जल विवाद न्यायाधिकरण द्वारा 2019 में दिए गए फैसले को चुनौती दी है। मामला फिलहाल उच्चतम न्यायालय में है।

वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेन के डिब्बे पर पथराव, शीशा टूटा

वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेन के डिब्बे पर पथराव, शीशा टूटा

सन्नी उपाध्याय

विशाखापत्तनम। आंध्र प्रदेश के विशाखापत्तनम में कुछ अज्ञात लोगों ने रेलवे यार्ड में खड़ी नई वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेन के एक डिब्बे पर पथराव किया, जिससे उसकी खिड़की का शीशा टूट गया। पुलिस ने यह जानकारी दी। यह वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेन सिकंदराबाद और विशाखापत्तनम के बीच चलाई जाएगी। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा इसे 15 जनवरी को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से हरी झंडी दिखाई जानी है।

रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ) की प्रारंभिक जांच से पता चला है कि कंचारपालेम में कोच परिसर के पास खेल रहे कुछ बच्चों ने बुधवार रात कथित तौर पर शरारत में ट्रेन के एक डिब्बे पर पथराव किया, जिससे उसकी खिड़की का शीशा टूट गया। घटना की जांच में विशाखापत्तनम पुलिस भी अब आरपीएफ के साथ शामिल हो गई है

पुलिस के मुताबिक, वंदे भारत एक्सप्रेस का एक रेक रखरखाव संबंधी जांच के लिए बुधवार को चेन्नई से विशाखापत्तनम पहुंचा था। अधिकारियों ने बताया कि विशाखापत्तनम में रेक को कंचारपालेम स्थित नए कोच परिसर में ले जाया गया था, जहां यह घटना हुई। पुलिस के अनुसार, पथराव में ट्रेन की एक खिड़की का शीशा पूरी तरह से टूट गया, जबकि दूसरे में मामूली दरार आई। एक स्थानीय पुलिस अधिकारी ने कहा कि वे पथराव करने वाले लोगों की तलाश कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि घटना के बाद इलाके में सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी गई है।

गैस-सिलेंडर में आग लगने से कई दुकानें जली, नष्ट 

गैस-सिलेंडर में आग लगने से कई दुकानें जली, नष्ट 

मिनाक्षी लोढी 

कोलकाता। कोलकाता में गुरुवार तड़के रसोई गैस-सिलेंडर में आग लगने से कई दुकानें जलकर नष्ट हो गईं। पुलिस और अग्निशमन विभाग के सूत्रों ने यह जानकारी दी। सूत्रों ने बताया कि शहर के फुटपाथ के किनारे स्थित दुकानों में से किसी एक में रसोई गैस सिलेंडर फट गया, जिसमें एक दुकानदार झुलस गया। उसे इलाके के बिधाननगर अस्पताल ले जाया गया। बचाव अधिकारियों ने बताया कि उनकी टीम आग लगने की सूचना मिलते ही तत्काल घटनास्थल पर छह से अधिक गाड़ियों को लेकर पहुंच गई। कड़ी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया।

तब तक कई दुकानें जलकर खाक हो गईं। उन्होंने कहा कि अभी आग लगने के कारण का पता नहीं चल पाया है। राज्य के अग्निशमन मंत्री सुजीत बोस और कई वरिष्ठ अधिकारी आग के बारे में जानकारी लेने और बचाव कार्य का जायजा लेने पहुंच गए हैं।

फसल कटाई के वक्त उचित फैसला करेगी सरकार 

फसल कटाई के वक्त उचित फैसला करेगी सरकार 

अकांशु उपाध्याय/मनोज सिंह ठाकुर 

नई दिल्ली/इंदौर। विदेश व्यापार महानिदेशालय (डीजीएफटी) के महानिदेशक संतोष कुमार सारंगी ने बृहस्पतिवार को कहा कि गेहूं निर्यात से प्रतिबंध हटाने की मांग पर सरकार मार्च-अप्रैल के आस-पास फसल कटाई के वक्त उचित फैसला करेगी। उन्होंने कहा कि इस फैसले से पहले आंका जाएगा कि देश में गेहूं की मांग और पूर्ति में कितना संतुलन है।

सारंगी, मध्यप्रदेश सरकार के आयोजन वैश्विक निवेशक सम्मेलन "इन्वेस्ट मध्यप्रदेश" में हिस्सा लेने इंदौर आए थे। गेहूं निर्यात खोलने की मांग के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा, "देश में गेहूं की फसल की कटाई आमतौर पर मार्च-अप्रैल में होती है। इस अवधि के आसपास सरकार इस विषय (गेहूं निर्यात खोलने की मांग) में उचित फैसला करेगी।" उन्होंने आगे कहा,"जिस समय महसूस किया जाएगा कि गेहूं की मांग और आपूर्ति में संतुलन है, इस खाद्यान्न का निर्यात खोलने के लिए व्यवस्था की जाएगी।" गौरतलब है कि मई 2022 में गर्मी और लू की वजह से गेहूं उत्पादन प्रभावित होने की चिंताओं के बीच भारत ने अपने प्रमुख खाद्यान्न की कीमतों में आई भारी तेजी पर अंकुश लगाने के मकसद से गेहूं के निर्यात पर प्रतिबंध लगा दिया था।

सारंगी ने यह भी कहा कि मध्यप्रदेश से निर्यात को बढ़ावा देने के लिए वस्त्र निर्माण पर खास ध्यान दिया जाना चाहिए क्योंकि सूबे में इस उद्योग के कच्चे माल के रूप में कपास की खासी उपलब्धता है। उन्होंने कहा कि सूबे में गेहूं, चावल, फल-सब्जियों और मसालों के साथ ही जैविक व अजैविक रसायनों तथा इंजीनियरिंग उत्पादों का भी निर्यात बढ़ने की उजली संभावनाएं हैं। सारंगी ने एक सवाल पर बताया कि सरकार की उत्पादन आधारित प्रोत्साहन (पीएलआई) योजना अभी 14 क्षेत्रों के लिए चलाई जा रही है तथा हो सकता है कुछ और क्षेत्रों में इसका विस्तार किया जाए।फसल कटाई के वक्त उचित फैसला करेगी सरकार 

2025 तक 10 लाख वाहनों को जोड़ने का लक्ष्य 

2025 तक 10 लाख वाहनों को जोड़ने का लक्ष्य 

विजय भाटी

गौतमबुद्ध नगर। इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए ऊर्जा अवसंरचना एवं सेवा प्रदाता कंपनी सन मोबिलिटी ने बृहस्पतिवार को कहा कि उसका 2025 तक अपने मंच से 10 लाख वाहनों को जोड़ने का लक्ष्य है। कंपनी ने यहां 'वाहन प्रदर्शनी-2023' में अपने स्वैपएक्स कॉम्पैक्ट बैटरी अदला-बदली (स्वैपिंग) स्टेशन का अनावरण किया। इसके जरिए कंपनी अपने नेटवर्क का तेजी से विस्तार करना चाहती है।

सन मोबिलिटी ने इसके अलावा अपने अगली पीढ़ी के बैटरी पैक एस2.1 को भी पेश किया। सन मोबिलिटी के सह-संस्थापक और चेयरमैन चेतन मैनी ने कहा, ‘‘हमारा मकसद अपने मंच पर 10 लाख वाहनों को जोड़ने का है।'’ सन मोबिलिटी, दोपहिया, तिपहिया और चार पहिया छोटे वाहनों की बैटरी बदलने की सेवा उपलब्ध कराती है। कंपनी के भारत के 18 से अधिक शहरों में 240 से अधिक बैटरी स्वैपिंग स्टेशन मौजूद हैं।

गतिरोध: सरकार ने राष्ट्रपति मुर्मू को ज्ञापन सौंपा

गतिरोध: सरकार ने राष्ट्रपति मुर्मू को ज्ञापन सौंपा

अकांशु उपाध्याय/इकबाल अंसारी 

नई दिल्ली/चेन्नई। तमिलनाडु में सत्तारूढ़ द्रमुक और राज्यपाल आर एन रवि के बीच गतिरोध की पृष्ठभूमि में राज्य सरकार ने बृहस्पतिवार को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को एक ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन की विषयवस्तु को अभी सार्वजनिक नहीं किया गया है। द्रमुक संसदीय दल के नेता टी आर बालू ने नयी दिल्ली में संवाददाताओं से कहा कि तमिलनाडु के कानून मंत्री एस रेगुपति के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल ने राष्ट्रपति को ज्ञापन सौंपा जिसे मुख्यमंत्री एम के स्टालिन ने लिखा है। उन्होंने कई बार इस बात पर जोर दिया कि ज्ञापन में क्या लिखा है, वह केवल मुख्यमंत्री जानते हैं। उन्होंने कहा कि स्टालिन का ज्ञापन सीलबंद लिफाफे में राष्ट्रपति को सौंपा गया है।

राष्ट्रीय राजधानी में संवाददाताओं से तमिल भाषा में संक्षिप्त बातचीत में बालू ने ज्ञापन के बारे में केवल इतना कहा कि यह राज्य सरकार की ओर से तमिलनाडु के कानून मंत्री ने सौंपा। उन्होंने संकेत दिया कि ज्ञापन में राज्यपाल से जुड़े मुद्दे और उनके ‘परंपराओं से हटकर काम करने’ के बारे में लिखा हो सकता है। रेगुपति और लोकसभा सदस्य ए राजा की मौजूदगी में बालू ने कहा, ‘‘हमें ज्ञापन के निष्कर्ष वाले हिस्से की जानकारी नहीं है क्योंकि यह तमिलनाडु के मुख्यमंत्री और भारत की राष्ट्रपति के बीच ही है।’’ उन्होंने कहा, ‘‘हमने राष्ट्रपति से अनुरोध किया है कि ज्ञापन का अध्ययन करने के बाद उन्हें जो उचित लगे कार्रवाई करें।’’

रवि ने सोमवार को राज्य विधानसभा में अपने परंपरागत अभिभाषण से हटकर संबोधन दिया था और स्टालिन ने इसके खिलाफ एक प्रस्ताव प्रस्तुत किया। जिसके बाद राज्य सरकार और राज भवन के बीच पहले से गतिरोध वाले संबंधों में और तनाव आ गया। द्रमुक और उसके सहयोगी दल जहां राज्यपाल रवि को वापस बुलाने की मांग पुरजोर तरीके से उठा रहे हैं, वहीं भारतीय जनता पार्टी रवि का समर्थन कर रही है। द्रमुक नीत गठबंधन ने गत नवंबर महीने में राष्ट्रपति मुर्मू से रवि को बर्खास्त करने का अनुरोध करते हुए आरोप लगाया था कि उन्होंने संविधान के तहत ली गयी शपथ का उल्लंघन किया है। बालू ने आज कहा कि नवंबर 2022 में दिया गया ज्ञापन ‘राजनीतिक’ प्रकृति का था, जबकि आज का ज्ञापन सरकार की ओर से दिया गया है।

द्रमुक नेता ने रवि पर तमिलनाडु में ‘राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की सनातन नीतियों’ को थोपने की कोशिश करने का आरोप भी लगाया। उन्होंने कहा कि पेरियार, अन्ना और कलईंगर की धरती पर ये कोशिश फलीभूत नहीं होंगी। उन्होंने यह आरोप भी लगाया कि राज्यपाल ने तमिलनाडु की जनता और राष्ट्रगान का अपमान किया है। वह संभवत: सोमवार को सदन से राज्यपाल के वॉकआउट का परोक्ष जिक्र कर रहे थे।

राज्यपाल रवि द्वारा राज्य को ‘तमिझगम’ पुकारने की सलाह के अनुसार एक पत्रकार द्वारा इस शब्द का इस्तेमाल किये जाने पर बालू ने आपत्ति जताते हुए कहा कि सही नाम ‘तमिलनाडु’ ही है। उन्होंने कहा, ‘‘हम तमिझगम शब्द को स्वीकार नहीं करते क्योंकि वह (रवि) किसी मंशा के साथ इसका उपयोग कर रहे हैं। अन्ना (द्रमुक संस्थापक और दिवंगत मुख्यमंत्री) ने राज्य को तमिलनाडु नाम दिया था।’’

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प्राधिकृत प्रकाशन विवरण

प्राधिकृत प्रकाशन विवरण


1. अंक-93, (वर्ष-06)

2. शुक्रवार, जनवरी 13, 2023

3. शक-1944, पौष, कृष्ण-पक्ष, तिथि-षष्ठी, विक्रमी सवंत-2079‌‌।

4. सूर्योदय प्रातः 07:24, सूर्यास्त: 05:33। 

5. न्‍यूनतम तापमान- 10 डी.सै., अधिकतम- 19+ डी.सै.।

6. समाचार-पत्र में प्रकाशित समाचारों से संपादक का सहमत होना आवश्यक नहीं है। सभी विवादों का न्‍याय क्षेत्र, गाजियाबाद न्यायालय होगा। सभी पद अवैतनिक है। 

7.स्वामी, मुद्रक, प्रकाशक, संपादक राधेश्याम व शिवांशु  (विशेष संपादक) श्रीराम व सरस्वती (सहायक संपादक) संरक्षण-अखिलेश पांडेय, ओमवीर सिंह, वीरसैन पवार, योगेश चौधरी आदि के द्वारा (डिजीटल सस्‍ंकरण) प्रकाशित। प्रकाशित समाचार, विज्ञापन एवं लेखोंं से संपादक का सहमत होना आवश्यक नहीं हैं। पीआरबी एक्ट के अंतर्गत उत्तरदायी।

8. संपर्क व व्यवसायिक कार्यालय- चैंबर नं. 27, प्रथम तल, रामेश्वर पार्क, लोनी, गाजियाबाद उ.प्र.-201102। 

9. पंजीकृत कार्यालयः 263, सरस्वती विहार लोनी, गाजियाबाद उ.प्र.-201102

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संपर्क सूत्र :- +919350302745--केवल व्हाट्सएप पर संपर्क करें, 9718339011 फोन करें।

(सर्वाधिकार सुरक्षित)

गणतंत्र दिवस    'संपादकीय'

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