गुरुवार, 18 मई 2023

विशेष: आज मनाई जाएगी शनि जयंती, जानिए 

विशेष: आज मनाई जाएगी शनि जयंती, जानिए 

सरस्वती उपाध्याय 

ज्योतिष शास्त्र में शनि देव को कर्म प्रधान का देवता माना जाता है। हिंदू पंचांग के मुताबिक साल के ज्येष्ठ माह के कृष्ण-पक्ष की अमावस्या तिथि के दिन शनि जयंती मनाई जाती है। इस दिन सनातन धर्म को मानने वाले लोग भगवान शनिदेव की विधि विधान पूर्वक पूजा आराधना करते हैं। इस साल शनि जयंती 19 मई को मनाई जाएगी।

इतना ही नहीं, शनि की उपासना करने से साढ़ेसाती शनि ग्रह का दोष से मुक्ति भी मिलती है। आज हम आपको इस रिपोर्ट में बताएंगे, कि किन राशियों पर शनिदेव की अपार कृपया रहेगी।

ज्योतिषाचार्य पंडित कल्कि राम के मुताबिक भगवान शनि एक ऐसे देवता हैं, जो तिलक पहले करते हैं और राजा बाद में बनाते हैं। शनि जयंती पर कुछ राशि के जातकों के लिए सर्वाधिक लाभ होने वाला है। जैसे मकर राशि, तुला राशि के जातक, मेष राशि के जातक और मिथुन राशि के जातक पर शनि जयंती के दिन भगवान शनि देव की अपार कृपया रहेगी।

शनि जयंती के दिन ज्योतिष शास्त्र के मुताबिक, कई शुभ संयोग भी बन रहे हैं। ऐसी स्थिति में मिथुन राशि के जातकों के लिए मान सम्मान बढ़ेगा। समाज में कद ऊंचा होगा। लंबे समय से अटके हुए काम जल्द पूरा होंगे। धन का लाभ होगा। नौकरी और व्यवसाय के क्षेत्र में पदोन्नति होगी।

देवी ने 'एसआरजी' की वर्कशॉप का शुभारंभ किया

देवी ने 'एसआरजी' की वर्कशॉप का शुभारंभ किया

संदीप मिश्र 

लखनऊ। उत्तर प्रदेश की माध्यमिक शिक्षा राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) गुलाब देवी ने गुरुवार को लखनऊ में माध्यमिक शिक्षा के गणित, अंग्रेजी तथा विज्ञान विषयों के शिक्षकों के समूह राज्य रिसोर्स ग्रुप (एसआरजी) की वर्कशॉप का वर्चुअल माध्यम से शुभारंभ किया। इस दो दिवसीय कार्यशाला के पहले दिन शिक्षकों से तकनीक का बेहतर प्रयोग करने की सलाह देते हुए उन्होंने निर्भीक होकर भावी पीढ़ी के निर्माण की सलाह दी। राज्य शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद की ओर से लखनऊ के इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में दो दिवसीय राज्य रिसोर्स ग्रुप (एसआरजी) की कार्यशाला का आयोजन किया गया है। इस कार्यशाला में प्रदेशभर से गणित, विज्ञान तथा अंग्रेजी विषयों के चुनिंदा शिक्षकों को रोचक ढंग से विषय पढ़ाने का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। 

कार्यशाला में देशभर के प्रतिष्ठित शैक्षणिक संस्थानों के विशेषज्ञ शिक्षकों को प्रशिक्षण दे रहे हैं। कार्यशाला के उद्घाटन सत्र को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से संबोधित करते हुए माध्यमिक शिक्षा मंत्री गुलाब देवी ने कहा की आज का प्रशिक्षण आगे के लिए काफी उपयोगी होगा। उन्होंने कहा कि शिक्षक आगे आने वाले समय में बच्चों का उचित मार्गदर्शन करें। उन्होंने कहा की यह समय तकनीक का है इसलिये शिक्षक इसका बेहतर प्रयोग करें। विभाग की ओर से समय से बोर्ड परीक्षा के आयोजन की प्रशंसा न सिर्फ यूपी बल्कि अन्य प्रदेश में भी हो रही है। उन्होंने शिक्षकों से कहा कि आप निर्भीक होकर काम करें। शिक्षकों को मानसिक परेशानी न हो, यह मेरी जिम्मेदारी है।

कार्यशाला को जी.एस.नवीन, विशेष सचिव, माध्यमिक शिक्षा द्वारा सम्बोधित किया गया। उन्होने विशेष रूप से कहा कि विद्यालयों के टॉपर्स को ट्रैक करना चाहिये एवं उनके उच्च शिक्षा हेतु अच्छे महाविद्यालयों में प्रवेश में सहयोग करना चाहिए। इसी क्रम में उन्होने कहा कि प्रत्येक विद्यालय में टॉपर्स का नाम बोर्ड पर प्रदर्शित करना चाहिए क्योंकि इससे बच्चों में उत्साह बढ़ता है और वे अच्छे से अच्छा प्रदर्शन करने के लिये प्रयास करेंगे। उद्घघाटन सत्र को संबोधित करते हुए महानिदेशक स्कूल शिक्षा विजय किरण आनंद ने कहा कि स्कूली शिक्षा को बेहतर बनाने के लिए क्लासरूम गतिविधियों को रोचक और शैक्षिक क्रियाकलापों को मनमोहक बनाना होगा। जिससे स्कूली शिक्षा के प्रति बच्चों की रुचि तथा उत्साह और अधिक बढ़े। 

कार्यक्रम में भाग ले रहे शिक्षकों से अपेक्षा है कि वह विशेषज्ञों के अनुभवों तथा कौशलों का लाभ लेकर उन्हें बच्चों तक पहुंचाने में मददगार बनें तथा स्वयं को अधिक कार्यकुशल एवं लगनशील बनाने के कौशलों को ग्रहण करें। उन्होने कहा कि विज्ञान के विशेषज्ञ मनीष जैन के सहयोग से प्रत्येक माह दो-दो ऑनलाइन सेक्शन होंगे। जिसमें एस.आर.जी. सीखेंगे कि किस प्रकार वैज्ञानिक दृष्टिकोण बच्चों में विकसित किया जाय। राज्य शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद की निदेशक डॉ.अंजना गोयल ने उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए कहा कि इस कार्यशाला के माध्यम से शिक्षकों को अपनी कार्यकुशलता बढ़ाने का अवसर मिलेगा।

उन्हीं के माध्यम से विशेषज्ञों के अनुभवों तथा कौशलों का लाभ विद्यार्थियों तक पहुंचाया जा सकता है। उन्होंने सभी सहभागियों से अपेक्षा रखी कि वे इस कार्यशाला का उपयोग शिक्षण कौशलों के परिमार्जन तथा विद्यार्थियों को उत्कृष्ट शिक्षा रोचक ढंग से देने के लिए एक बड़े अवसर के रूप में करेंगे। संयुक्त शिक्षा निदेशक (शिविर) भगवती सिंह ने स्टेट रिसोर्स ग्रुप के उद्देश्य, कार्य-प्रणाली तथा शैक्षिक उत्थान में इसकी भूमिका विषय पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने कहा कि एसआरजी समूह शैक्षिक एक्सीलेंस की धुरी है। उन्होंने प्रतिभागी शिक्षकों से अपेक्षा की कि शिक्षा की तकनीक तथा कक्षा कक्ष में बच्चों की अपेक्षाएं नियमित रूप से बदलती रहती हैं। इसलिए वह स्वयं को इन बदलती परिस्थितियों के लिए सदैव तैयार रखें। उन्होंने कहा कि शैक्षिक उत्थान के लिए हमें समुदाय तथा अभिभावकों की भूमिका भी बढ़ानी होगी।

विशेषज्ञ के रूप में शामिल कमल किशोर ने एससीईआरटी के गतिविधियों/कार्यक्रमों का विडियो के माध्यम से प्रस्तुतीकरण किया। विद्या समीक्षा केन्द्र के माध्यम से सतत् मूल्यांकन एवं समग्र प्रगति आख्या विषय पर आनन्द पाण्डेय वरिष्ठ विशेषज्ञ परियोजना कार्यालय लखनऊ, टीचर प्रोफेशनल स्टेण्डर्ड एण्ड एनसीएफ पर रंजना अरोड़ा, प्रोफेसर, एन.सी.ई.आर.टी., नई दिल्ली तथा विज्ञान गणित में काल्पनिक शक्ति सृजित करने की शैक्षणिक पद्धतियाँ विषय पर मनीष जैन, आई०आई०टी०, गांधीनगर ने विशेषज्ञ के रूप में प्रतिभाग किया। 

अन्य विशेषज्ञ के रूप में रीता सिंह, प्रोफेसर, आई.आई.टी., कानपुर, स्कंद शुक्ला, प्राचार्य, आंग्ल भाषा शिक्षण संस्थान, प्रयागराज, मेहुल सहगल, निपुण भारत सेल, राज्य परियोजना कार्यालय, ममता दूबे प्रवक्ता, अरविन्द गौतम प्रवक्ता, राज्य विज्ञान शिक्षा संस्थान प्रयागराज, रिशू श्रीवास्तव प्रबन्धक कन्वेजीनियस जी.डी.आई. संस्था शामिल थे। इस अवसर पर माध्यमिक तथा बेसिक शिक्षा निदेशक महेंद्र देव एवं माध्यमिक शिक्षा विभाग के अधिकारीगण सहित प्रदेश भर से गणित, विज्ञान तथा अंग्रेजी विषयों के चुनिंदा शिक्षक मौजूद रहे।

'जल्लीकट्टू' संबंधी कानून की वैधता बरकरार रखी

'जल्लीकट्टू' संबंधी कानून की वैधता बरकरार रखी

अकांशु उपाध्याय 

नई दिल्ली। उच्चतम न्यायालय ने बृहस्पतिवार को तमिलनाडु के उस कानून की वैधता बरकरार रखी, जिसके तहत सांडों से जुड़े खेल ‘जल्लीकट्टू’ को मंजूरी दी गई थी। न्यायमूर्ति के एम जोसेफ की अध्यक्षता वाली पांच-न्यायाधीशों की संविधान पीठ ने सर्वसम्मति से यह फैसला सुनाया। पीठ ने इसी के साथ बैलगाड़ी दौड़ की अनुमति देने वाले महाराष्ट्र के कानून की वैधता भी बरकरार रखी।

‘जल्‍लीकट्टू’ तमिलनाडु के ग्रामीण इलाकों में पोंगल के त्योहार के दौरान आयोजित किया जाने वाला एक पारंपरिक खेल है। सांडों के साथ होने वाले इस खेल पर रोक लगाने की मांग भी उठती रही है।

संविधान पीठ ने ‘जल्‍लीकट्टू’ और बैलगाड़ी दौड़ के आयोजन की अनुमति देने वाले तमिलनाडु और महाराष्ट्र के कानून को चुनौती देने वाली विभिन्न याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान यह फैसला सुनाया। इस पीठ में न्यायमूर्ति अजय रस्तोगी, न्यायमूर्ति अनिरुद्ध बोस, न्यायमूर्ति ऋषिकेश रॉय और न्यायमूर्ति सीटी रविकुमार भी शामिल थे।

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प्राधिकृत प्रकाशन विवरण

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1. अंक-217, (वर्ष-06)

2. शुक्रवार, मई 19, 2023

3. शक-1944, ज्येष्ठ, कृष्ण-पक्ष, तिथि-अमावस्या, विक्रमी सवंत-2079‌‌।

4. सूर्योदय प्रातः 06:40, सूर्यास्त: 06:10। 

5. न्‍यूनतम तापमान- 25 डी.सै., अधिकतम- 41+ डी.सै.।

6. समाचार-पत्र में प्रकाशित समाचारों से संपादक का सहमत होना आवश्यक नहीं है। सभी विवादों का न्‍याय क्षेत्र, गाजियाबाद न्यायालय होगा। सभी पद अवैतनिक है। 

7.स्वामी, मुद्रक, प्रकाशक, संपादक राधेश्याम व शिवांशु  (विशेष संपादक) श्रीराम व सरस्वती (सहायक संपादक) संरक्षण-अखिलेश पांडेय, ओमवीर सिंह, वीरसैन पंवार, योगेश चौधरी आदि के द्वारा (डिजीटल सस्‍ंकरण) प्रकाशित। प्रकाशित समाचार, विज्ञापन एवं लेखोंं से संपादक का सहमत होना आवश्यक नहीं हैं। पीआरबी एक्ट के अंतर्गत उत्तरदायी।

8. संपर्क व व्यवसायिक कार्यालय- चैंबर नं. 27, प्रथम तल, रामेश्वर पार्क, लोनी, गाजियाबाद उ.प्र.-201102। 

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