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शनिवार, 7 मई 2022

8 मई को मनाया जाएगा हैप्पी 'मदर्स डे'

8 मई को मनाया जाएगा हैप्पी 'मदर्स डे'  

सरस्वती उपाध्याय

हैप्पी 'मदर्स डे' को लेकर लोगों को उत्साह है। हर साल 8 मई को मदर्स डे मनाया जाता है। इस साल मदर्स डे 8 मई, रविवार को है। हैप्पी मदर्स डे मां और बच्चों के प्रेम और स्नेह का दिन है। वैसे तो हर दिन मां और बच्चों का होता है। लेकिन बच्चे जीवन की भागदौड़ में मां को यह बता नहीं पाते कि उनके जीवन में मां कितनी अहम हैं। ऐसे में मदर्स डे मां के मातृत्व, उनकी देखभाल, निस्वार्थ प्यार को समर्पित दिन होता है। लेकिन मदर्स डे के बारे में आप कितना जानते हैं? विश्व मातृ दिवस के अवसर पर भले ही लोग अपनी-अपनी तरह से मदर्स डे का पर्व मनाते हैं। लेकिन मदर्स डे से जुड़ी कई ऐसी बाते हैं, जिनसे आप अनजान होंगे...

पहला मदर्स डे कहां मनाया गया...

मौजूदा समय में दुनिया के तमाम देश मदर्स डे मनाते हैं। अमेरिका से लेकर भारत और यूरोपीय देशों में मदर्स डे अलग-अलग तरीकों से मनाया जाता है लेकिन शायद आप इस बात से अनजान हो कि सबसे पहला मदर्स डे अमेरिका के वेस्ट वर्जीनिया और फिलाडेल्फिया में मनाया गया था। साल 1908 में पहली बार मदर्स डे मनाया गया।

6 मार्च को भी मदर्स डे...

उसके बाद से कई सारे देशों में मदर्स डे मनाने का एक तय दिन हो गया। जिसे भारत, अमेरिका समेत अन्य देशों ने अपना लिया लेकिन बहुत कम लोगों को पता होगा कि यूके में मदर्स डे 6 मार्च को मनाया जाता है।

मदर्स डे मनाने की आधिकारिक घोषणा...

भले ही साल 1908 में मदर्स डे मनाने की शुरुआत हो गई हो लेकिन आधिकारिक तौर पर मदर्स डे मनाने के लिए कानून पास हुआ। अमेरिके के राष्ट्रपति वुड्रो विल्सन ने 9 मई 1914 को कानून पास किया, जिसमें लिखा था कि मई महीने के हर दूसरे रविवार को मदर्स डे मनाया जाएगा।

सोमवार, 2 मई 2022

तृतीया तिथि को मनाईं जाएंगी 'परशुराम जयंती'

तृतीया तिथि को मनाईं जाएंगी 'परशुराम जयंती'  

सरस्वती उपाध्याय         
परशुराम भगवान विष्णु को छठवें अवतार माने जाते हैं। उनके पिता का जमदग्नि और माता का नाम रेणुका था। परशुराम के चार बड़े भाई थे। परशुराम को न्याय देवता माना जाता है। शास्त्रों के अनुसार, भगवान परशुराम का जन्म वैशाख माह के शुक्ल-पक्ष की तृतीया तिथि को हुआ था। इस दिन को लोग अक्षय तृतीया के नाम से भी जानते हैं। इस साल अक्षय तृतीया व परशुराम जयंती 3 मई, मंगलवार को है। 
प्रभु परशुराम अपने माता-पिता के आज्ञाकारी पुत्र थे। इसके बावजूद उन्होंने अपने पिता के कहने पर अपनी माता की गर्दन काट दी थी।
ब्रह्रावैवर्त पुराण के अनुसार, भगवान परशुराम को एक बार उनके पिता ने आज्ञा दी थी कि वो अपनी मां का वध कर दें। भगवान परशुराम आज्ञाकारी पुत्र थे। इसलिए उन्होंने अपने पिता की आज्ञा का पालन करते हुए तुरंत अपनी मां का सिर धड़ से अलग कर दिया था। अपने पुत्र को आज्ञा का पालन करते हुए देखकर भगवान परशुराम के पिता ऋषि जमदग्नि बेहद प्रसन्न हुए। पिता को प्रसन्न देखकर उन्होंने अपनी मां को दोबारा जीवित करने का आग्रह किया।

पिता से भगवान परशुराम ने मांगे तीन वरदान...

परशुराम ने अपने पिता से तीन वरदान मांगे थे। पहले वरदान में माता रेणुका को पुनर्जीवित करने और दूसरा चारों भाइयों को ठीक करने का वरदान मांगा। तीसरे वरदान में उन्होंने कभी पराजय का सामना न करना पड़ा और लंबी आयु का वरदान मांगा था।

गुरुवार, 28 अप्रैल 2022

ऑयल का चुनाव एक्सपर्ट की सलाह से ही करें

ऑयल का चुनाव एक्सपर्ट की सलाह से ही करें
सरस्वती उपाध्याय 
स्वस्थय हृदय के लिए स्वस्थ खानपान भी जरूरी है। खासकर, भोजन पकाने के लिए तेल का चुनाव बेहद सावधानी पूर्वक करना चाहिए, क्योंकि सरसों तेल, रिफाइंड ऑयल, घी आदि की क्वालिटी सही ना हो, तो शरीर में कोलेस्ट्रॉल लेवल, फैट आदि बढ़ने की संभावना रहती है। ऐसे में हेल्दी हार्ट के लिए कुकिंग ऑयल का चुनाव किसी एक्सपर्ट की सलाह लेकर ही करें। खासकर, जब आपके घर में किसी को हार्ट की बीमारी है या हृदय रोग होने की फैमिली हिस्ट्री है। आइए जानते हैं, लंबी उम्र तक स्वस्थ हृदय के लिए कौन-कौन से तेल होते हैं बेस्ट‌।
फूड डॉट एनडीटीवी डॉट कॉम में छपी एक रिपोर्ट के अनुसार, सूरजमुखी के बीजों से तैयार किए गए इस तेल में अन्य तेलों की तुलना में अधिक विटामिन ई होता है। यह हृदय के लिए एक अच्छा एंटीऑक्सीडेंट है। आप इसे सरसों के तेल के साथ मिलाकर भी सेवन कर सकते हैं। सूरजमुखी के तेल में 80% से अधिक मोनोअनसैचुरेटेड फैट होता है, जो इसे दिल के लिए बेहतरीन तेल बनाता है। इसका स्मोक प्वाइंट बहुत अधिक होता है, इसलिए इसका उपयोग ज्यादातर तलने के लिए किया जाता है।
ऑलिव ऑयल में पाया जाने वाला मुख्य प्रकार का वसा मोनोअनसैचुरेटेड फैटी एसिड एक हेल्दी डायटरी फैट की श्रेणी में आता है। ये स्वस्थ वसा शरीर में कोलेस्ट्रॉल लेवल को कंट्रोल रखकर हृदय रोग के जोखिम को कम करने में कारगर होता है। एक्स्ट्रा वर्जिन ऑलिव ऑयल को आप सलाद में ड्रेसिंग के रूप में इस्तेमाल कर सकते हैं। वहीं, रेगुलर ऑलिव ऑयल में हाई स्मोक प्वाइंट होता है और इसे तलने के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है, जो हार्ट हेल्थ के स्वस्थ रखता है।
चावल की भूसी या राइस ब्रान ऑयल दिल के लिए सबसे बेस्ट खाना पकाने के तेलों में से एक माना जाता है। इसमें पॉलीअनसैचुरेटेड फैट और मोनोअनसैचुरेटेड फैट का एक आदर्श संतुलन होता है। चावल के दाने की बाहरी परत को चोकर कहा जाता है। इस भूरी भूसी से तेल निकाला जाता है। इसका स्वाद में हल्का और हल्का सा नट जैसा स्वाद होता है। इसे सलाद, कुकीज और केक में या ग्रिलिंग और तलने के लिए इस्तेमाल कर सकते हैं। मात्रा में ओमेगा-6 फैटी एसिड (जिसे लिनोलिक एसिड भी कहा जाता है) होता है। यह शरीर में कोलेस्ट्रॉल को संतुलित करता है, धमनियों को सख्त होने से रोकता है और इस प्रकार, हृदय रोग के जोखिम को कम करता है।
तिल का तेल खाएं दिल को रखें हेल्दी
तिल का तेल भी हेल्दी हार्ट के लिए बेहतर होता है।‌ अधिकतर लोग इस तेल का खाना पकाने के लिए इस्तेमाल करते हैं। इसका स्वाद भी बहुत अच्छा होता है। मोनोअनसैचुरेटेड और पॉलीअनसेचुरेटेड फैटी एसिड में समृद्ध यह तेल अपने हाई स्मोक प्वाइंट के लिए जाना जाता है। इसका सेवन भी हेल्दी हार्ट के लिए किया जा सकता है।
सोयाबीन तेल भी है हार्ट फ्रेंडली
सोयाबीन का तेल सोयाबीन से निकाला जाने वाला एक वनस्पति तेल है।‌ इसमें अच्छी किस्म के आवश्यक फैटी एसिड और प्लांट स्टेरोल होते हैं, जो समग्र स्वास्थ्य को बढ़ावा देते हैं। ये शरीर में कोलेस्ट्रॉल को जमा होने से रोकते हैं। बंद धमनियों (एथेरोस्क्लेरोसिस) और हार्ट डिजीज जैसे हार्ट अटैक, स्ट्रोक के जोखिम को कम करता है।

सोमवार, 25 अप्रैल 2022

रमजान का महीना, सहरी में 5 ड्रिंक्स का करें सेवन

रमजान का महीना, सहरी में 5 ड्रिंक्स का करें सेवन      

सरस्वती उपाध्याय 

रमजान का पवित्र महीना (Month of Ramzan) चल रहा है। इस पूरे महीने मुसलमान दिन भर रोजा रखते हैं और खुदा की इबादत करते हैं। माना जाता है कि रमजान के महीने में खुदा की इबादत करने और रोजा रखने से बाकी महीनों से ज्यादा नेकियां मिलती हैं और जन्नत का दरवाजा खुल जाता है। इसलिए मुस्लिम समुदाय के लोग 15 घंटे बिना कुछ खाए और पिएं रहते हैं। हालांकि, गर्मी के मौसम में दिन भर भूखा रहना बर्दाश्त किया जा सकता है। लेकिन प्यास को बर्दाश्त करना मुश्किल होता है। ऐसे में अगर कुछ जरूरी चीजों का सेवन किया जाए तो दिन भर शरीर हाइड्रेट रहता है और एनर्जी भी बनी रहती है, तो आइए जानते हैं कि आप सहरी में किन चीजों का इस्तेमाल करें, जिससे पूरे दिन आप एनर्जी के साथ बिना प्यास महसूस किए गुजार सकें।

खजूर शेक...

रमजान के दिनों में इफ्तार की शुरुआत खजूर से ही की जाती है। ऐसे में अगर आप खजूर शेक बनाकर सहरी में पिएं तो आपको पूरे दिन प्यास नहीं लगेगी। खजूर में कई जरूरी पोषक तत्व होते हैं जो शरीर की कमजोरी को दूर करने का काम करते हैं।

किशमिश मिल्‍क...

किशमिश के सेवन से थकावट दूर होती है और शरीर की इम्‍यूनिटी अच्‍छी होती है। ऐसे में आप रमजान के दिनों में आधा लीटर दूध में 15 ग्राम किशमिश को डालकर उबाल लें और फ्रिज में रख दें। इसे आप सहरी में पियें। यह आपको पूरे दिन कमजोरी और प्यास से बचाएगी।

दही...

अगर आप सहरी में दही का सेवन करें तो इससे आपको दिन भर प्‍यास नहीं लगेगी और एनर्जी से भरपूर रहेंगेे। दरअसल दही में विटामिन, प्रोटीन, लैक्टोज, फास्फोरस और अधिक मात्रा में कैल्शियम मौजूद होता है जो हड्डियों के की सेहत से लेकर पाचन तंत्र को भी ठीक रखता है। इसके सेवन से पूरे दिन प्यास भी नहीं लगती हैै।

संतरे का जूस...

संतरे का फल अगर आप सहरी में पियें तो ये आपके शरीर में पानी की कमी को पूरा करता है और आप दिन भर प्‍यास महसूस नहीं करते। संतरे में विटामिन सी, पोटेशियम, फाइबर, विटामिन ए जैसे कई पोषक तत्व होते हैं जो कई बीमारियों को भी दूर रखने का काम करता हैै।

पानी पिएं...

दिन भर अगर आप प्‍यासे रहते हैं तो सहरी के समय ज्‍यादा से ज्‍यादा पानी पीने की कोशिश करें। रमजान के दिनों में सहरी में कम-से कम तीन गिलास नॉर्मल पानी जरूर पीना चाहिए। ऐसा करने से शरीर में बने रहे टॉक्सिन को फ्लश करने में आसानी होती है।

लू को मात देने के लिए अपनाएं, खास टिप्स

लू को मात देने के लिए अपनाएं, खास टिप्स  

सरस्वती उपाध्याय 
अंग्रेजी में एक कहावत है, ‘प्रिवेंशन इज बेटर दैन क्योर’, जिसका सीधा सा मतलब है कि इलाज से बेहतर बचाव होता है। दरअसल, ये कहावत गर्मी पर बिल्कुल सटीक लागू होती है। कई लोग गर्मी से बचने के लिए तपती धूप और खासकर लू में निकलने से पहले कोई एहतियात नहीं बरतते हैं, जिसके चलते न सिर्फ उन्हें लू लगने का खतरा बढ़ जाता है, बल्कि उनकी तबीयत भी गंभीर रूप से खराब हो सकती है।
दरअसल, गर्मी के मौसम में लू लगना आम बात होती है। ऐसे में कुछ लापवाहियों के चलते कई लोग लू का शिकार हो जाते हैं। जिसके बाद लूज मोशन, उल्टी, डिहाइड्रेशन, शरीर में दर्द, थकान और कमजोरी आने लगती है। साथ ही वायरल इंफेक्शन होने की संभावना भी काफी हद तक बढ़ जाती है। हम आपसे शेयर कर रहे हैं, लू से बचने के कुछ खास टिप्स, जिन्हें फॉलो करके आप लू को आसानी से मात दे सकते हैं।

शरीर को कवर करके रखें...
गर्मी में कुछ लोग धूप और चिलचिलाती गर्मी के कारण कम से कम कपड़े पहन कर बाहर जाने को प्राथमिकता देते हैं। लेकिन ऐसे में लू लगने का खतरा बढ़ जाता है। इसलिए बाहर निकलने से पहले शरीर को अच्छे से ढकना ना भूलें।
शरीर को लू से बचाने के लिए बाहर निकलते समय फुल स्लीव कपड़े पहनने की कोशिश करें। बेशक फुल कपड़ों में आपको गर्मी ज्यादा लग सकती है। मगर, इससे आपको धूप और लू बिल्कुल नहीं लगेगी। साथ ही गर्मी में सिंथेटिक कपड़ों के बजाए ढ़ीले-ढ़ाले हल्के रंग के सूती कपड़े पहने। इससे आपको भी गर्मी कम लगेगी और आप काफी कम्फर्टेबल फील करेंगे।
धूप और लू का आंखों पर सीधा असर होता है। जिससे आपकी आंखों में जलन, खुजली और सूजन भी शुरू हो सकती है। ऐसे में बाहर जाते समय आंखों पर सन ग्लास पहनना ना भूले।
गर्मी में खाली पेट बाहर निकलना बीमारी को आमंत्रण देने जैसा होता है। इसलिए हमेशा कुछ न कुछ खाकर ही बाहर जाएं। साथ ही गर्मी से बचने के लिए आम पना, शिंकजी और गन्ने का जूस जैसे ड्रिंक्स भी पी सकते हैं। इससे आपका शरीर ठंडा रहेगा और आप पर गर्मी का असर नहीं होगा।

इन बातों का रखें ख्याल...
गर्मी में शरीर को ठंडा रखने के लिए रोज नहाएं और घर को भी ठंडा रखने की कोशिश करें। वहीं धूप से आने के बाद तुंरत पानी या ठंडी चीजों का सेवन करने से बचें। इसके अलावा गर्मी में हेल्दी रहने के लिए मार्किट में खुली चीजों और कटे फलों को भूलकर भी ना खाएं। इससे आपकी तबीयत खराब हो सकती है।

शनिवार, 23 अप्रैल 2022

अपने दिनचर्या में शामिल करें योगाभ्यास, जानिए

अपने दिनचर्या में शामिल करें योगाभ्यास, जानिए        

सरस्वती उपाध्याय            
गर्मियां आते ही शरीर में कई सारे बदलाव देखने को मिलते हैं। हमारे शरीर में पानी की अधिक जरूरत होती है ऐसे में आप ज्यादा-ज्यादा पानी पिएं, मौसमी फल और सब्जी अपनी डाइट में ज़रूर शामिल करें। इन सबके साथ ही आप अपने शरीर को सही तरीके से आराम भी दें। क्योंकि बिगड़ी हुई लाइफ स्टाइल आपके पाचन पर गहरा असर डालती है। यदि आपकी पाचन क्रिया दुरुस्त नहीं होगी तो आपको कई सारी समस्याओं का सामना करना पड़ेगा। बिगड़ी दिनचर्या के कारण बहुत से लोगों में अकड़न-जकड़न और ब्लड प्रेशर की समस्या देखने को मिलने लगी है। प्रभावित लाइफ स्टाइल आपके शरीर में रक्त संचार को भी प्रभावित करता है। इसके लिए आपको अपने दिनचर्या में नियमित रूप से योगाभ्यास को शामिल करना चाहिए। 
किसी भी योगासन की शुरुआत ध्यान के साथ करना चाहिए। इससे मन एकाग्र होता है और योगसन के अच्छे परिणाम देखने को मिलते हैं। अपनी आती जाती सांसों पर ध्यान केंद्रित करें। उसके बाद ओम के साथ किसी भी मंत्र का उच्चारण करें।
अब सीधे खड़े होकर अपने हाथों को कमर पर रख लें। पैरों को आस में करलें, पंजों के बल खड़े हो जाए और फिर नीचे आएं उसके बाद एड़ी के बल खड़े हो जाएं। इस प्रक्रिया 10 बार दोहराएं।
सबसे पहले घुटनों को मोड़कर मलासन में बैठ जाएं। इस दौरान आपकी एडियां हिप्स को टच करनी चाहिए।
अब घुटनों को थोड़ा नीचे झुकाकर पंजों पर बैठें और हाथों को घुटनों पर रखें।
अब दाएं घुटने को अंदर की तरफ जमीन पर टिकाएं।
फिर बाएं पैर को उठाकर आगे की तरफ ले जाएं और जमीन पर टिकाएं।
अब बाएं घुटने को जमीन पर टिकाते हुए दाएं पैर को आगे ले जाकर रखें।
इसी तरह एक ही दिशा में आगे बढ़ते रहें।
मैट की दूरी तक आगे बढ़ें और फिर अपनी जगह वापिस आ जाएं।
यह क्रिया कम से कम 5-7 बार करें।
अगर आप ऐसी जगह आसन कर रहे हैं, जहां आपके घुटनों को नीचे टिकाने में तकलीफ न हो, तो एक ही दिशा में जितना आगे बढ़ सकें, बढ़ें।
ध्यान रखें चाल हमेशा पंजों के बल ही करें।
इस आसन के दौरान आपको शरीर के निचले हिस्से में खिंचाव महसूस होगा।
यह आपके फैट को तेजी से बर्न करने में मदद करेगा।हो सकता है शुरूआत में आपको बैलेंस बनाने में दिक्कत आए। इसलिए बेहतर होगा कि आप हाथों को जमीन पर टिकाकर बॉडी को सपोर्ट दे।
सर्वांग पुष्टि आसन के लिए मैट पर दोनों पैर फैलाकर सीधे खड़े हो जाएं। मुट्ठी इस तरह बंद करें कि अंगूठा दिखाई ना दे। अब दोनों हाथों को नीचे झुकाकर बाएं टखने के पास बायां हाथ नीचे और दायां हाथ कलाई के ऊपर रखें। सांस भरते हुए धीरे-धीरे दोनों हाथों से ऊपर की ओर बाएं कन्धे के बाजू से सिर तक ले जाएं और दाएं टखने की तरफ सांस छोड़े। दाहिना हाथ नीचे और बायां हाथ ऊपर रखें। दोबारा सांस लेकर दोनों हाथों के नीचे से ऊपर दाएं कन्धे तक लाते हुए सिर के ऊपर तक ले जाएं। अब बाईं ओर मुड़ते हुए दोनों हाथों को बाएं कन्धे से नीचे की ओर बाएं टखने तक लाएं। सांस छोड़े, हाथ को बदल-बदलकर बायां नीचे और दाहिना ऊपर रखें। इसे दो बार दोहराएं। हर अंग की चर्बी घटाने के लिए करें ‘सर्वांग पुष्टि आसन’ बेहतरीन है। लेकिन जो लोग लोअर बैक पेन की समस्या से परेशान हैं वे इस आसन को ना करें। लाभकारी है। तितली आसन करने के लिए पैरों को सामने की ओर फैलाते हुए बैठ जाएं,रीढ़ की हड्डी सीधी रखें। घुटनो को मोड़ें और दोनों पैरों को श्रोणि की ओर लाएं। दोनों हाथों से अपने दोनों पांव को कस कर पकड़ लें। सहारे के लिए अपने हाथों को पांव के नीचे रख सकते हैं। एड़ी को जननांगों के जितना करीब हो सके लाने का प्रयास करें। लंबी,गहरी सांस लें, सांस छोड़ते हुए घटनों एवं जांघो को जमीन की तरफ दबाव डालें। तितली के पंखों की तरह दोनों पैरों को ऊपर नीचे हिलाना शुरू करें। धीरे धीरे तेज करें। सांसें लें और सांसे छोड़ें। शुरुआत में इसे जितना हो सके उतना ही करें। धीरे-धीरे अभ्यास बढ़ाएं।

शुक्रवार, 22 अप्रैल 2022

22 अप्रैल को मनाया जाता हैं 'विश्व पृथ्वी दिवस'

22 अप्रैल को मनाया जाता हैं 'विश्व पृथ्वी दिवस'   

सरस्वती उपाध्याय            

'वर्ल्ड अर्थ डे' यानी, विश्व पृथ्वी दिवस हर साल 22 अप्रैल को मनाया जाता है। ये दिन एक मौका होता है, जब करोड़ों लोग मिलकर पृथ्वी से जुड़ी पर्यावरण की चुनौतियों जैसे कि, क्लाइमेट चेंज। ग्लोबल वार्मिंग, प्रदूषण और जैवविविधता संरक्षण के लिए प्रयास करने में और जागरुक हों और इसमें तेजी लाएं। इस दिन को इंटरनेशनल मदर अर्थ डे के रूप में भी जाना जाता है।इसे मनाने का मकसद यही है कि लोग पृथ्वी के महत्‍व को समझें और पर्यावरण को बेहतर बनाए रखने के प्रति जागरूक हों। यही वजह है कि इस दिन पर्यावरण संरक्षण और पृथ्वी को बचाने का संकल्प लिया जाता है।

विश्व पृथ्वी दिवस के दिन पेड़ लगाकर, सड़क के किनारे कचरा उठाकर, लोगों को टिकाऊ जीवन जीने के तरीके अपनाने के लिए प्रेरित करने जैसे विभिन्न कार्यक्रम आयोजित करके सेलिब्रेट किया जाता है। इसके अलावा बच्चों में जागरूकता फैलाने के लिए इस दिन स्कूलों और विभिन्न समाजिक संस्थाओं द्वारा कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं।

यह है 'वर्ल्ड अर्थ डे' का इतिहास...

विश्व पृथ्वी दिवस पहली बार साल 1970 में मनाया गया था। तब से लेकर आज तक इसे हर साल 22 अप्रैल को 192 देशों में सेलिब्रेट किया जाता है। दरअसल, साल 1960 दशक में विकास कार्यों के चलते पेड़ों की बड़ी मात्रा में कटाई की गई थी, जिससे पर्यावरण को काफी नुकसान हुआ। इसी को देखते हुए अमेरिकी सेनिटर ने साल 1969 में लोगों को जागरुक करने के लिए वॉशिंगटन में एक सम्मेलन की घोषणा की। जिसमें स्कूल के कई बच्चे शामिल हुए। इस दौरान बच्चों समेत वहां के लोगों को पर्यावरण के प्रति जागरुक किया गया। इसके बाद से ही इस दिन को विश्वभर में 'वर्ल्ड अर्थ डे' के रूप में मनाया जाने लगा।


गुरुवार, 21 अप्रैल 2022

हड्डियों की सेहत को बनाए रखने के उपाय, जानिए

हड्डियों की सेहत को बनाए रखने के उपाय, जानिए  

सरस्वती उपाध्याय         
हड्डियां शरीर के लिए कई महत्वपूर्ण भूमिकाएं निभाती हैं। जैसे शरीर को स्ट्रक्चर प्रदान करना, अंगों की रक्षा करना, मांसपेशियों को सपोर्ट करना, कैल्शियम स्टोर करना आदि‌। बचपन से ही मजबूत और स्वस्थ हड्डियों का निर्माण करना महत्वपूर्ण है। आप वयस्कता में भी हड्डियों की सेहत को बनाए रखने के उपायों को आजमा सकते हैं। हालांकि, प्रॉपर देखभाल, एक्सरसाइज, वेट मैनेज, हेल्दी डाइट आदि का सेवन करें, तो हड्डियां मजबूत बनी रह सकती हैं। 
आजकल लोगों में 30-35 की उम्र से ही हड्डियों में दर्द, जोड़ों में दर्द, अर्थराइटिस, हड्डियां जल्दी फ्रैक्चर होने की समस्या आम होती जा रही है। उम्र बढ़ने के साथ हड्डियों का घनत्व कम होने लगता है, जिससे हड्डियां दर्द करने लगती हैं, कमजोर हो जाती हैं। बुजुर्गावस्था में ऑस्टियोपोरोसिस होने की संभावना बढ़ जाती है।लंबी उम्र तक हड्डियों को स्वस्थ रखना है, तो इन बातों का ध्यान रखें।

हड्डियों की सेहत कैसे होती है खराब ?
रिपोर्ट के अनुसार, कई तरह के कारक हड्डियों की सेहत को प्रभावित करते हैं। आपकी डाइट में कैल्शियम की मात्रा कितनी है, आप कितना फिजिकल एक्टिविटी करते हैं। धूम्रपान और शराब का सेवन कितना करता है।शरीर में हार्मोन लेवल कितना है। यदि बहुत ज्यादा थायरॉएड हार्मोन होगा, तो बोन लॉस होने की संभावना महिलाओं में अधिक होती है। फूड इनटेक कम करना, ईटिंग डिसऑर्डर और हद से ज्यादा वजन कम होने से भी हड्डियां कमजोर हो जाती हैं। कुछ खास तरह की दवाओं के सेवन से भी हड्डियां धीरे-धीरे कमजोर होने लगती हैं। 

कैल्शियम जरूर करें डाइट में शामिल....

कैल्शियम के सेवन से भी हड्डियां मजबूत रहती हैं। 19 से 50 वर्ष की आयु के वयस्कों और 51 से 70 वर्ष की आयु के पुरुषों को प्रतिदिन 1,000 मिलीग्राम कैल्शियम की जरूरत होती है। वहीं, 51 वर्ष की उम्र की महिलाओं और 71 वर्ष और उससे अधिक उम्र के पुरुषों के लिए 1,200 मिलीग्राम कैल्शियम की जरूरत होती है।कैल्शियम का मुख्य स्रोत डेयरी प्रोडक्ट्स, बादाम, ब्रोकली, केल, सार्डिन्स, सोया प्रोडक्ट्स जैसे टोफू आदि हैं।

विटामिन- डी की कमी ना होने दें...
कैल्शियम को एब्जॉर्ब करने के लिए शरीर को विटामिन डी की जरूरत होती है। ऐसे में विटामिन डी का सेवन प्रतिदिन बहुत जरूरी है। विटामिन- डी के मुख्य स्रोत हैं ऑयली फिश जैसे टूना, सैल्मन, व्हाइटफिश, मशरूम, अंडा, फोर्टिफाइड फूड्स जैसे दूध, अनाज आदि. इनके अलावा, विटामिन- डी का सबसे जरूरी सोर्स है धूप, इसलिए सुबह में कम से कम 10 से 15 मिनट धूप में जरूर बैठें‌।

डेली रूटीन में फिजिकल एक्टिविटी हो शामिल...

वजन कम करने वाले एक्सरसाइज जैसे चलना, टहलना और सीढ़ियां चढ़ना-उतरना आपको मजबूत हड्डियां बनाने और बोन लॉस को धीमा करने में में मदद कर सकते हैं।

स्मोकिंग और एल्कोहल का सेवन करें कम...
हड्डियों को स्वस्थ रखने के लिए धूम्रपान न करें।महिलाओं को प्रतिदिन एक से अधिक गिलास शराब का सेवन नहीं करना चाहिए। वहीं, पुरुषों को एक दिन में दो से अधिक पेग शराब पीने से बचना चाहिए।

सब्जियां खाएं हड्डियों को मजबूत बनाएं...
चाहते हैं लंबी उम्र तक आपको घुटनों में दर्द ना हो, आराम से चल-फिर सकें, दौड़ सकें, तो आज से ही डाइट में हर तरह की सब्जियों को शामिल करना शुरू कर दें। सब्जियां हड्डियों के लिए बहुत फायदेमंद होती हैंं। इनमें विटामिन सी होता है, जो हड्डियों को फॉर्म करने वाली कोशिकाओं के निर्माण को बढ़ाता है। विटामिन सी का एंटीऑक्सीडेंट प्रभाव हड्डियों की कोशिकाओं को क्षतिग्रस्त होने से बचाते हैंं। साथ ही सब्जियां हड्डियों की घनत्वता को भी बढ़ाती हैं।

नमक का सेवन सीमित करें...
नमक का सेवन बहुत अधिक ना करें‌। आजकल लोग जंक फूड्स, चिप्स, पिज्जा, बर्गर, चीज, प्रॉसेस्ड फूड्स आदि चीजों का सेवन अधिक करते हैंं। इनमें नमक अधिक होता है। कुछ लोग भोजन में ऊपर से भी नमक डाल लेते हैं, ऐसा करने से हड्डियों को नुकसान पहुंच सकता है। सीमित मात्रा में नमक का सेवन करेंगे तो ब्लड प्रेशर भी हाई नहीं होगा। साथ ही सोडा ड्रिंक्स और कैफीन भी अधिक लेना बोन हेल्थ के लिए हानिकारक होता है। इनमें फॉस्फोरस होता है, जो हड्डियों के लिए सही नहीं होता है।

विटामिन-डी का सबसे अच्छा स्रोत हैं सूर्य की रोशनी

विटामिन-डी का सबसे अच्छा स्रोत हैं सूर्य की रोशनी  

सरस्वती उपाध्याय         
हमारी बेहतर सेहत के लिए कई प्रकार के पोषक तत्वों की दैनिक आवश्यकता होती है। विटामिन-डी उनमें से एक है। सूर्य की रोशनी को विटामिन-डी का सबसे अच्छा स्रोत माना जाता है। यही कारण है कि सभी लोगों को रोजाना सुबह की हल्की धूप में वॉक करने की सलाह दी जाती है। सूर्य की रोशनी सिर्फ विटामिन-डी के लिए ही नहीं, शरीर के लिए कई अन्य प्रकार से भी लाभदायक मानी जाती है। रोजाना सूर्य के प्रकाश में कुछ समय बिताने की आदत आपके सेहत को गजब का बूस्ट दे सकती है। आइए सूर्य के प्रकाश से होने वाले विभिन्न स्वास्थ्य लाभ के बारे में विस्तार से जानते हैं...

हड्डियों के लिए फायदेमंद...
हड्डियों को स्वस्थ रखने के लिए विटामिन-डी की आवश्यकता होती है। सूर्य की रोशनी इसका सबसे अच्छा स्रोत मानी जाती है। विटामिन-डी शरीर में कैल्शियम की उचित मात्रा बनाए रखने में सहायक है, ऐसे में सूर्य की रोशनी के संपर्क में रहना आपके लिए विशेष लाभप्रद हो सकता है। कैल्शियम, हड्डियों को मजबूत करने, पतले होने और आसानी से टूटने से बचाने में सहायक है।

मूड विकारों को कम करती है...
सूर्य की रोशनी का संपर्क आपके मूड को बेहतर बनाए रखने में सहायक है। धूप, आपके शरीर में सेरोटोनिन के स्तर को बढ़ाती है। सेरोटोनिन, एक न्यूरोट्रांसमीटर है जो मूड को खुश रखने में मददगार मानी जाती है। मन को शांत रखने और ध्यान केंद्रित करने में इसका लाभ है।
सूर्य की रोशनी के संपर्क में रहना शरीर की इम्युनिटी सिस्टम को बढ़ावा देने में काफी मददगार हो सकता है। विटामिन-डी हमारी प्रतिरक्षा प्रणाली के लिए महत्वपूर्ण है, और सूरज की रोशनी के लगातार संपर्क में रहने से आप इसे बेहतर बनाए रखने में सफल हो सकते हैं। स्वस्थ प्रतिरक्षा प्रणाली सर्जरी के बाद बीमारी, संक्रमण, कुछ प्रकार के कैंसर, कोरोना संक्रमण आदि के जोखिम को कम करने में मदद कर सकती है।

सोमवार, 18 अप्रैल 2022

द लोनी फाइल्स, अत्याचार आज भी बरकरार

द लोनी फाइल्स, अत्याचार आज भी बरकरार   

अश्वनी उपाध्याय 
गाजियाबाद। बहुचर्चित हिंदी फीचर फिल्म 'द कश्मीर फाइल्स' में निर्देशक के द्वारा 1990 के दशक में हिंदुओं पर कश्मीर राज्य में किए गए अत्याचार को प्रदर्शित करने की बेहतर कोशिश की गई है। लेकिन यह बीता हुआ कल है। जिसके चित्रण या अभिनय पर दोष सिद्धि के आरोप लगाए जा सकते हैं। परंतु आज केंद्र और  उत्तर प्रदेश में भाजपा दल सत्तारूढ़ है। जो सनातन सभ्यता और संस्कृति का आधुनिकरण करने का प्रयास कर रहा है। यदि ऐसी स्थिति में किसी हिंदू परिवार पर उत्तर प्रदेश में अत्याचार किया जाता है तो यह हिंदुत्व विचारधारा के लिए शर्म की बात है। जानकारी के अनुसार गाजियाबाद की तहसील लोनी स्थित बुध नगर निवासी बुजुर्ग दंपत्ति श्रीमती कृष्णा देवी व पति पोशाकी घर के पास हनुमान मंदिर में साफ-सफाई आदि का कार्य करते हैं। 11 अक्टूबर 2017 में बुजुर्ग दंपत्ति ने अपने जीवन भर की जमा पूंजी से वर्ग 33.44 मीटर जमीन खरीदी थी। 
उपरोक्त अंकित तिथि में ही 6 लाख रुपए का भुगतान भी कर दिया गया था। भूस्वामी जुबेदा बेगम पति असर मोहम्मद ने सन 2017 से आज तक बुजुर्ग दंपत्ति को न जमीन पर कब्जा दिया और ना ही उसके रुपए लौटाए हैं। श्रीमती कृष्णा देवी के द्वारा इस संबंध में उप जिला अधिकारी तहसील लोनी से कई बार लिखित शिकायत की है। लेकिन कोई संतोषजनक कार्रवाई नहीं हुई है। जुबेदा दबंग प्रवृत्ति की महिला है। जिसने किसी भी प्रकार की कानूनी कार्रवाई करने पर श्रीमती कृष्णा को जान से मारने की धमकी भी दी है। एक हिंदू बुजुर्ग दंपत्ति पर अत्याचार किया जा रहा है, जिसके विरोध में कोई दल-संगठन सामने नहीं आया है। पीड़ित बुजुर्ग महिला ने बताया कि पति की बीमारी के चलते किसी बड़े अधिकारी तक जाना संभव नहीं होता है। स्थानीय विधायक नंदकिशोर गुर्जर के किसी सहयोगी के द्वारा शिकायत की गई थी। लेकिन हिंदू विचारधारा के समर्थक विधायक के द्वारा भी अभी तक कोई कार्यवाही नहीं की गई है। प्रकरण में पुनः 6 अप्रैल को उप जिला अधिकारी को सहायता के लिए पत्र लिखा गया है। हिंदुत्व का दम भरने वाले, हिंदुत्व को लेकर धरना-प्रदर्शन करने वाले, चीखने-चिल्लाने वाले सभी लोग गलत नहीं है। आज भी हिंदुओं पर अत्याचार बरकरार है। यदि हम बारीकी से अध्ययन करते हैं तो प्रमाणीकरण करना अधिक कठिन नहीं है कि योगी सरकार में हिंदुओं का शोषण और हनन बदस्तूर जारी है।

हस्तरेखा शास्त्र, रेखाओं व पर्वतों को ज्यादा महत्व

हस्तरेखा शास्त्र, रेखाओं व पर्वतों को ज्यादा महत्व  


सरस्वती उपाध्याय          

हस्तरेखा शास्‍त्र में कुछ रेखाओं और पर्वतों को ज्‍यादा महत्‍व दिया गया है। क्‍योंकि ये जीवन के अहम पहलुओं को प्रभावित करते हैं। चंद्र क्षेत्र भी इनमें से एक है। चंद्रमा का संबंध मन से है और यदि यह अशुभ स्थिति में हो तो न केवल मन को, बल्कि पूरे शरीर और आर्थिक स्थिति पर भी बुरा असर डालता है। ऐसे लोगों का बीमारियों पर अच्‍छा-खासा पैसा खर्च होता है। वहीं शुभ चंद्रमा जिंदगी बना देता है।

हथेली में चंद्र की स्थिति और उसका प्रभाव
मस्तिष्‍क रेखा के नीचे का भाग चंद्र पर्वत होता है। यह मणिबंध तक जाता है।

यदि चंद्र पर्वत गोल हो और उस पर कोई तिल या धब्‍बा न हो तो यह शुभ होता है। वहीं, इसके उलट दबा हुआ चंद्र पर्वत व्‍यक्ति के जीवन में संघर्ष का कारण बनता है।

यदि चंद्र पर्वत से निकलकर कोई रेखा बुध पर्वत तक जाए तो उसे देव रेखा कहते है। ऐसे लोग भगवान की कृपा से खूब सफलता पाते हैं।

वहीं, देव रेखा होने के साथ-साथ भाग्य रेखा सूर्य और शनि पर्वत के बीच से जाती हो तो व्यक्ति अपने कर्मों के कारण असफलता पाता है। ऐसे लोग गलत संगति में पड़ कर अपना सबकुछ गंवा देते हैं‌‌।

चंद्र क्षेत्र से किसी रेखा का मंगल पर्वत तक जाना अपार धन-पद-प्रतिष्‍ठा दिलाता है। हालांकि, इन लोगों को जलाशयों से बचकर रहना चाहिए‌।

 यदि चंद्र पर्वत से कोई रेखा निकलकर सूर्य पर्वत तक जाए तो ऐसे लोग पर मां सरस्‍वती और मां लक्ष्‍मी दोनों की कृपा होती है। वे अपने ज्ञान से खूब नाम कमाते हैं और धनवान भी बनते हैं। इन लोगों में मदद की भावना होती है।

शुक्र पर्वत से किसी रेखा का निकलना और उसका जीवन रेखा को काटते हुए चंद्र पर्वत पर पहुंचना अच्‍छा नहीं होता है। ऐसे लोगों को न केवल जीवन में खूब संघर्ष करना पड़ता है, बल्कि वे धोखा भी खाते हैं।

शनिवार, 16 अप्रैल 2022

किस्मत: पूरब या उत्तर दिशा में लगाना चाहिए शीशा

किस्मत: पूरब या उत्तर दिशा में लगाना चाहिए शीशा 

सरस्वती उपाध्याय 
वास्तु शास्त्र के अनुसार, घर में लगे शीशे का किस्मत से खास कनेक्शन है। अगर दर्पण को सही दिशा में नहीं रखा जाए तो व्यक्ति के जीवन पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। वहीं अगर शीशे को सही दिशा में लगाया जाए तो घर-परिवार की आर्थिक स्थिति बेहतर होती है। साथ ही घर में सकारात्मक ऊर्जा बरकरार रहती है।
आईने से जुड़े ये वास्तु टिप्स हैं खास, वास्तु शास्त्र के मुताबिक ब्रह्मांड की सकारात्मक ऊर्जा पूर्व से पश्चिम  और उत्तर से दक्षिण की तरफ चलती है। ऐसे में शीशे को पूरब या उत्तर की दीवार पर इस तरह से लगाना चाहिए, ताकि देखने वाले का चेहरा पूरब या उत्तर की ओर रहे। वास्तु शास्त्र के मुताबिक दर्पण लगाने के लिए सबसे अच्छी दिशा पूरब, उत्तर या पूर्वोत्तर दिशा मानी गई है। इस दिशा में आईना लगाने से घर में खुशहाली और सुख-समृद्धि आती है।
वास्तु शास्त्र के अनुसार घर की तिजोरी या आलमारी के सामने दर्पण लगाने से धन में बरकत होती है। आईना लगाते वक्त इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि वह कहीं से भी टूटा हुआ नहीं हो। दरअसल ऐसा आइना निगेटिव एनर्जी उत्पन्न करता है। वास्तु के मुताबिक बेडरूम में आईना कमरे के तरफ ही लगाना चाहिए। सोते वक्त शरीर का कोई भी हिस्सा आईने में नहीं दिखाई देना चाहिेए। क्योंकि इससे सेहत से संबंधित परेशानियां हो सकती हैं। -अगर कमरा छोटा होने के कारण आईना बेड से सामने ही है तो रात को सोते वक्त उस आईने को किसी कपड़े से ढक दें। इससे नकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ता है। वास्तु शास्त्र के मुताबिक, घर के दक्षिण या पश्चिम दिशा में आईना नहीं लगाना चाहिए। क्योंकि ऐसा करने घर में क्लेश बढ़ने लगते हैं। इसके अलावा कमरे की दीवारों पर शीशा आमने-सामने नहीं रखना चाहिए। इससे घर में तनाव उत्पन्न हो सकता है।

शुक्रवार, 15 अप्रैल 2022

16 अप्रैल को मनाईं जाएगी 'हनुमान जयंती'

16 अप्रैल को मनाईं जाएगी 'हनुमान जयंती'     

सरस्वती उपाध्याय         
चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा के दिन भगवान हनुमान का जन्म हुआ था। इसलिए इस दिन धूमधाम से देशभर में हनुमान जयंती का पर्व मनाया जाता है। लेकिन, इस बार हनुमान जयंती 16 अप्रैल के दिन पड़ रही है। हनुमान का जन्म मंगलवार के दिन हुआ था। इसलिए मंगलवार का दिन हनुमान को समर्पित है। श्री राम के जन्म के ठीक 6 दिन बाद रुद्रावतार पवनपुत्र हनुमान का जन्म हुआ था। बजरंगबली मे अपनी सच्ची भक्ति से यह सिद्ध कर दिया कि भगवान राम से बड़ा उनका नाम है, उनकी भक्ति है।

मान्यता है कि हनुमान जयंती के दिन विधि-विधान के साथ पूजा-अर्चना करने और व्रत आदि करने से हनुमान की कृपा प्राप्त होती है। बता दें कि हनुमान जंयती के दिन विशेष योग बन रहे हैं।

चौपाई...

जय हनुमन्त सन्त हितकारी। सुनि लीजै प्रभु अरज हमारी।।

जन के काज विलम्ब न कीजै। आतुर दौरि महा सुख दीजै।।

जैसे कूदि सिन्धु वहि पारा। सुरसा बदन पैठि विस्तारा।।

आगे जाय लंकिनी रोका। मारेहु लात गई सुर लोका।।

जाय विभीषण को सुख दीन्हा। सीता निरखि परम पद लीन्हा।।

बाग उजारि सिन्धु मंह बोरा। अति आतुर यम कातर तोरा।।

अक्षय कुमार को मारि संहारा। लूम लपेटि लंक को जारा।।

लाह समान लंक जरि गई। जै जै धुनि सुर पुर में भई।।

अब विलंब केहि कारण स्वामी। कृपा करहु प्रभु अन्तर्यामी।।

जय जय लक्ष्मण प्राण के दाता। आतुर होई दुख करहु निपाता।।

जै गिरधर जै जै सुख सागर। सुर समूह समरथ भट नागर।।

ॐ हनु-हनु-हनु हनुमंत हठीले। वैरहिं मारू बज्र सम कीलै।।

गदा बज्र तै बैरिहीं मारौ। महाराज निज दास उबारों।।

सुनि हंकार हुंकार दै धावो। बज्र गदा हनि विलम्ब न लावो।।

ॐ ह्रीं ह्रीं ह्रीं हनुमंत कपीसा। ॐ हुँ हुँ हुँ हनु अरि उर शीसा।।

सत्य होहु हरि सत्य पाय कै। राम दुत धरू मारू धाई कै।।

जै हनुमन्त अनन्त अगाधा। दुःख पावत जन केहि अपराधा।।

पूजा जप तप नेम अचारा। नहिं जानत है दास तुम्हारा।।

वन उपवन जल-थल गृह माहीं। तुम्हरे बल हम डरपत नाहीं।।

पाँय परौं कर जोरि मनावौं। अपने काज लागि गुण गावौं।।

जै अंजनी कुमार बलवन्ता। शंकर स्वयं वीर हनुमंता।।

बदन कराल दनुज कुल घालक। भूत पिशाच प्रेत उर शालक।।

भूत प्रेत पिशाच निशाचर। अग्नि बैताल वीर मारी मर।।

इन्हहिं मारू, तोंहि शमथ रामकी। राखु नाथ मर्याद नाम की।।

जनक सुता पति दास कहाओ। ताकी शपथ विलम्ब न लाओ।।

जय जय जय ध्वनि होत अकाशा। सुमिरत होत सुसह दुःख नाशा।।

उठु-उठु चल तोहि राम दुहाई। पाँय परौं कर जोरि मनाई।।

ॐ चं चं चं चं चपल चलन्ता। ॐ हनु हनु हनु हनु हनु हनुमंता।।

ॐ हं हं हांक देत कपि चंचल। ॐ सं सं सहमि पराने खल दल।।

अपने जन को कस न उबारौ। सुमिरत होत आनन्द हमारौ।।

ताते विनती करौं पुकारी। हरहु सकल दुःख विपति हमारी।।

ऐसौ बल प्रभाव प्रभु तोरा। कस न हरहु दुःख संकट मोरा।।

हे बजरंग, बाण सम धावौ। मेटि सकल दुःख दरस दिखावौ।।

हे कपिराज काज कब ऐहौ। अवसर चूकि अन्त पछतैहौ।।

जन की लाज जात ऐहि बारा। धावहु हे कपि पवन कुमारा।।

जयति जयति जै जै हनुमाना। जयति जयति गुण ज्ञान निधाना।।

जयति जयति जै जै कपिराई। जयति जयति जै जै सुखदाई।।

जयति जयति जै राम पियारे। जयति जयति जै सिया दुलारे।।

जयति जयति मुद मंगलदाता। जयति जयति त्रिभुवन विख्याता।।

ऐहि प्रकार गावत गुण शेषा। पावत पार नहीं लवलेषा।।

राम रूप सर्वत्र समाना। देखत रहत सदा हर्षाना।।

विधि शारदा सहित दिनराती। गावत कपि के गुन बहु भाँति।।

तुम सम नहीं जगत बलवाना। करि विचार देखउं विधि नाना।।

यह जिय जानि शरण तब आई। ताते विनय करौं चित लाई।।

सुनि कपि आरत वचन हमारे। मेटहु सकल दुःख भ्रम भारे।।

एहि प्रकार विनती कपि केरी। जो जन करै लहै सुख ढेरी।।

याके पढ़त वीर हनुमाना। धावत बाण तुल्य बनवाना।।

मेटत आए दुःख क्षण माहिं। दै दर्शन रघुपति ढिग जाहीं।।

पाठ करै बजरंग बाण की। हनुमत रक्षा करै प्राण की।।

डीठ, मूठ, टोनादिक नासै। परकृत यंत्र मंत्र नहीं त्रासे।।

भैरवादि सुर करै मिताई। आयुस मानि करै सेवकाई।।

प्रण कर पाठ करें मन लाई। अल्प-मृत्यु ग्रह दोष नसाई।।

आवृत ग्यारह प्रतिदिन जापै। ताकी छाँह काल नहिं चापै।।

दै गूगुल की धूप हमेशा। करै पाठ तन मिटै कलेषा।।

यह बजरंग बाण जेहि मारे। ताहि कहौ फिर कौन उबारे।।

शत्रु समूह मिटै सब आपै। देखत ताहि सुरासुर काँपै।।

तेज प्रताप बुद्धि अधिकाई। रहै सदा कपिराज सहाई।।


दोहा...

प्रेम प्रतीतिहिं कपि भजै। सदा धरैं उर ध्यान।।

तेहि के कारज तुरत ही, सिद्ध करैं हनुमान।।

गुरुवार, 14 अप्रैल 2022

मच्छरों से छुटकारा, अपनाएं घरेलू उपाय

मच्छरों से छुटकारा, अपनाएं घरेलू उपाय     


सरस्वती उपाध्याय          

गर्मियों में जितना गर्मी परेशान नहीं करती हैं, उससे कही ज्यादा तंग मच्छर कर देते हैं‌‌। जैसे ही मच्छर मारने की कोइल खत्म होती है। वैसे ही ये मच्छर हमला करने लगते हैं‌। जहां हल्का हाथ लगाओ वहीं मच्छर बैठा मिल जाता है। हर समय इन्हें भगाने में ही ध्यान रहता है और चाहे, जितनी कोशिश कर लो, किसी ना किसी कोने में मच्छर छुपकर बस मौके की तलाश में रहते हैं कि कब रेपलेंट (Mosquito Repellent) खत्म हो और कब आकर काट सकें‌। इन मच्छरों से सभी एक बराबर परेशान रहते हैं। कभी-कभी तो लगता है कि गर्मी बर्दाश्त हो सकती है, लेकिन ये मच्छर नहीं‌‌। आपकी भी मच्छरों ने इतनी ही बुरी हालत कर दी है तो ये कुछ घरेलू उपाय आपके काम आ सकते हैं।

1. लहसुन: लहसुन का रस मच्छरों को फूटी आंख नहीं सुहाता. कुछ लहसुन की कलियों को मसलकर पानी में उबाल लें। अब इसे स्प्रे बोतल में भरकर पूरे कमरें में छिड़क लें। कमरे में मौजूद सभी मच्छर भाग जाएंगे
जहां भी आसपास आपको लगता है कि मच्छर अंडे दे सकते हैं या पनप सकते हैं वहां कॉफी पाउडर या कॉफी ग्राउंड्स डाल दें। सब मच्छर और उनके अंडे मर जाएंगेे‌।

2. पुदीना: मच्छरों को पुदीने की खुशबू से चिड़ होती है। पुदीने के तेल को घर में जगह-जगह छिड़क दें। मच्छर आपके घर से दूर रहेंगे।

3. नीम का तेल: शरीर पर मच्छर ना काटें और आपसे दूर रहें, इसके लिए नीम के तेल (Neem Oil) को पानी में मिलाकर या अपने बॉडी लोशन में मिलाकर शरीर पर लगा लें। मच्छर आपके आसपास भी नहीं भटकेंगे।

4. सोयाबीन का तेल: सोयाबीन का तेल भी मच्छरों को आपसे दूर रखता है। रात में इसे शरीर पर लगाकर सोने पर मच्छर आपको नहीं काट पाएंगे।

कार्बन एमिशन की तीव्रता, वैश्विक स्तर पर कार्य

कार्बन एमिशन की तीव्रता, वैश्विक स्तर पर कार्य   

सरस्वती उपाध्याय       
पर्यावरण के प्रति प्रतिबद्धता के अनुरूप, भारत 2070 तक नेट ज़ीरो के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए कार्बन एमिशन की तीव्रता को कम करने के लिए वैश्विक स्तर पर लगातार काम कर रहा है।  
भारत में बिजली उत्पादन के स्त्रोतों पर नज़र डालें तो यह क्षेत्र वैसे तो दुनिया भर का सबसे विविध बिजली उत्पादन क्षेत्रों में से एक है‌। लेकिन भारत में कोयले द्वारा तापीय विद्युत उत्पादन कुल उत्पादन क्षमता का लगभग 62% है। ऐसे में पारंपरिक बिजली से स्वच्छ ईंधन-आधारित ऊर्जा उत्पादन में ट्रांज़िशन के लिए, एक समग्र दृष्टिकोण के माध्यम से, कोयला खदान श्रमिकों के हितों की रक्षा करना बेहद ज़रूरी है। एनेर्जी ट्रांज़िशन के नाम पर उन लोगों और उनसे जुड़े परिवारों को अनदेखा नहीं किया जा सकता, जिनका जीवन और एक लिहाज से अस्तित्व कोयला खदानों से जुड़ा है।  
उनकी आर्थिक मजबूरीयों को दूर करने के लिए एक कौशल विकास कार्य योजना तैयार करनी होगी। साथ ही, उनका पुनर्वास सुनिश्चित करने के लिए, उनको किसी नए रोजगार के लिए प्रशिक्षित करने का मजबूत ढांचा भी तैयार करना होगा। 
रिपोर्ट के लॉन्च पर बोलते हुए, ईवाई में पार्टनर और लीडर (पावर एंड यूटिलिटीज) जीपीएस, सोमेश कुमार ने कहा, “पर्यावरण के प्रति भारत की प्रतिबद्धताओं को देखते हुए, देश अब कोयला आधारित ऊर्जा से रीन्यूब्ल एनेर्जी में ट्रांज़िशन के लिए कमर कस रहा है। फ़िलहाल भारत में जस्ट ट्रांज़िशन या न्यायसंगत एनेर्जी ट्रांज़िशन एक उभरता हुआ विषय है, लेकिन अब वक़्त है इसके रणनीतिबद्ध तरीके से सर्वांगीण विकास को सुनिश्चित करने का। ऐसा इसलिए ज़रूरी है क्यों की कोयला आधारित बिजली उत्पादन की पूरी मूल्य शृंखला में अनगिनत परिवार जुड़े हैं। और इस ट्रांज़िशन के न्यायसंगत होने के लिए उन परिवारों के हितों का ध्यान रखना बेहद ज़रूरी है। यह जरूरी है कि कोयला श्रमिकों को कोयला क्षेत्र से बाहर निकलने में मदद दी जाए और उन्हें दूसरे वैकल्पिक रोजगारों के लिए आवश्यक कौशल प्रदान किया जाए।” 
आगे, जीपीएस के पार्टनर और लीडर (सोशल एंड स्किल्स सेक्टर) अमित वात्स्यायन कहते हैं, “कोयला खदान श्रमिकों के कौशल और उद्यमिता विकास पर ही जस्ट ट्रांज़िशन की सफलता और प्रासंगिकता टिकी हुई है। ऐसा करना कोयले पर निर्भर क्षेत्रों के आर्थिक विविधीकरण को सुनिश्चित करेगा और इन क्षेत्रों में निवेश को भी आकर्षित करेगा। यह रिपोर्ट एक ऐसे ट्रांज़िशन ढांचे के विकास पर केंद्रित है जिसका उपयोग जिलों या राज्यों द्वारा यह सुनिश्चित करने के लिए किया जा सकता है कि न सिर्फ़ प्रभावित कोयला खदान श्रमिकों की आजीविका में व्यवधान कम से कम हो, उन्हें पर्याप्त अवसर भी प्रदान किए जाएं। इस ट्रांज़िशन को जस्ट या न्यायसंगत तब ही कहा जा सकता है जब सबसे गरीब और सबसे आर्थिक रूप से कमजोर लोगों के हितों की रक्षा की जाती है।” 
एक न्यायपूर्ण परिवर्तन की आवश्यकता पर जोर देते हुए , विपुल तुली, अध्यक्ष, फिक्की पावर कमेटी और सीईओ-दक्षिण एशिया, सेम्बकॉर्प इंडस्ट्रीज ने कहा, "कोयले से दूर होने से देश पर दूरगामी प्रभाव पड़ेंगे। यह पूरी कार्य योजना, इसकी लागत, पुनर्नियोजन और इससे जुड़े तमाम पक्ष राष्ट्रीय और बहुपक्षीय स्तर पर महत्व रखता है। "  

रिपोर्ट की मुख्य बातें...

जैसे-जैसे ऊर्जा क्षेत्र में थर्मल से नवीकरणीय स्रोत की ओर झुकाव बढ़ेगा, ऊर्जा की मांग भी बढ़ेगी जिससे कोयले पर निर्भरता भी आने वाले वर्षों में और बढ़ने की उम्मीद है। इसलिए, भारत के सामने एक दोहरी चुनौती है - अपने ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन को कम करना और थर्मल क्षेत्र से जुड़े कार्यबल का सही प्रबंधन करना। भारत में लगभग 50% खदानें अत्यधिक लाभहीन हैं और जल्द ही बंद हो सकती हैं जिससे उन खदानों में श्रमिकों की आजीविका प्रभावित हो सकती है। 
कार्यबल पर बदलाव का प्रभाव 
कोयला खदानों से 7.25 लाख से अधिक प्रत्यक्ष रोजगार और कई अप्रत्यक्ष रोजगार सृजित होते हैं। पुराने कोयला संयंत्रों के बंद होने और खदानों के बंद होने से पांच राज्यों पश्चिम बंगाल, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, झारखंड और महाराष्ट्र में हजारों कोयला खदान श्रमिकों की आजीविका में व्यवधान का खतरा है। उनमें से ज्यादातर ब्लू-कॉलर कार्यकर्ता हैं। जिन्हें समय के नए कौशल के साथ कुशल बनाने की आवश्यकता है। प्रत्यक्ष श्रमिकों के अलावा, खनन जिलों की पूरी अर्थव्यवस्था कोयले से संबंधित गतिविधियों के इर्द-गिर्द घूमती है, और समुदायों ने पीढ़ियों से इस पर भरोसा किया है। 
'जस्ट ट्रांजिशन' की अवधारणा 
'जस्ट ट्रांजिशन' कोयला खदान श्रमिकों की आजीविका के संभावित नुकसान के कारण आर्थिक कमजोरियों को संबोधित करता है। वैकल्पिक उद्योगों में खनिकों के पुन: एकीकरण के लिए आर्थिक विविधीकरण और आजीविका को बढ़ावा देने की सुविधा पर जोर देना महत्वपूर्ण है। विभिन्न रीस्किलिंग कार्यक्रम प्रभावित खनिकों को कोयला खनन उद्योग से बाहर निकलने के लिए नए कौशल और संसाधन हासिल करने में सक्षम बनाएंगे। उद्यमिता विकास और एमएसएमई को बढ़ावा देना कोयला पर निर्भर उद्योग कस्बों की अर्थव्यवस्था को पुनर्जीवित करने और विविधता लाने में प्रमुख कारक होंगे। 
राज्य कौशल कार्य योजना 
रिपोर्ट में कौशल कार्य योजनाओं की रूपरेखा दी गई है। जो परिवर्तनशील खनिकों के लिए उद्योग-प्रासंगिक कौशल और आजीविका संवर्धन हस्तक्षेपों को डिजाइन करने में मदद करने के लिए कार्यों के खाके/ढांचे के रूप में कार्य करेगी। ये योजनाएं राज्यों को श्रमिकों की संक्रमण संबंधी जरूरतों को पूरा करने की रणनीति के साथ नेतृत्व करने के लिए सशक्त बनाएंगी। कौशल कार्य योजना के घटकों में निम्नलिखित शामिल हैं‌, 
संभावित नौकरी के नुकसान का अनुमान लगाते हुए भौगोलिक समूहों की पहचान...
लक्षित जनसंख्या का आकलन - खनिक।
प्रमुख उद्योग चालकों और अनिवार्यताओं की पहचान 
चल रहे कौशल वृद्धि और आजीविका सहायता कार्यक्रमों में तालमेल बनाना।
वित्त पोषण और कार्यक्रम वितरण सहायता के लिए सहयोग और संस्थागत सुदृढ़ीकरण।
अभिसरण कार्यक्रम वितरण को साकार करने के लिए पदाधिकारियों की क्षमता निर्माण 
खनिकों को कार्यक्रमों के लाभों का आकलन करने के लिए निगरानी और प्रभाव मूल्यांकन।
ज्ञान प्रबंधन-रेडी रेकनर्स, वैश्विक और राष्ट्रीय सर्वोत्तम प्रथाओं आदि का भंडार।

बुधवार, 13 अप्रैल 2022

14 अप्रैल को मनाईं जाएगी अंबेडकर की जयंती

14 अप्रैल को मनाईं जाएगी अंबेडकर की जयंती  

सरस्वती उपाध्याय                  
हर साल 14 अप्रैल को भीमराव अंबेडकर की जयंती मनाईं जाती है। भारत के पहले कानून मंत्री डॉ भीमराव अंबेडकर की जयंती को चिह्नित करते हुए, 14 अप्रैल को अंबेडकर जयंती के रूप में मनाया जाता है। इस दिन को भारत में समानता दिवस और ज्ञान दिवस के रूप में जाना जाता है। इस दिन ब्रिटिश कोलंबिया, कनाडा में 'अंबेडकर समानता दिवस' भी मनाया जाता है। डॉ. भीमराव आम्बेडकर यानी डॉ. बाबा साहेब अम्बेडकर का जन्म दिन 14 को 1891 को मध्य प्रदेश के महू में हुआ था।
डॉ. भीमराव रामजी अम्बेडकर को भारतीय संविधान के पिता के रूप में सम्मानित किया गया, क्योंकि उनकी अध्यक्षता में ही संविधान सभा ने दुनिया का सबसे लंबा लिखित संविधान तैयार किया गया था। अम्बेडकर जयंती को जातिगत भेदभाव और उत्पीड़न जैसी सामाजिक बुराइयों से लड़ने में न्यायविद के समर्पण को याद करने के लिए भी मनाया जाता है। उन्होंने जाति व्यवस्था का कड़ा विरोध किया और इसे समाज से मिटाने का प्रयास किया।
वह हमेशा उत्पीड़ितों के साथ एकजुटता से खड़े रहे और महिलाओं, मजदूरों और अछूतों के जीवन के उत्थान के लिए काम किया। एक प्रखर समाज सुधारक, अर्थशास्त्री और प्रभावशाली वक्ता होने के साथ-साथ, डॉ. अम्बेडकर राजनीति विज्ञान, कानून और अर्थशास्त्र जैसे विभिन्न विषयों के विद्वान भी थे।
उन्होंने एक ऐसे भारत की कल्पना की जहां सभी नागरिकों को कानून के तहत समान माना जाए। उन्होंने ब्रिटिश शासन से भारत की आजादी के लिए अभियान चलाया।

मंगलवार, 12 अप्रैल 2022

कूलर की लीकेज को रोकने का तरीका, जानिए

कूलर की लीकेज को रोकने का तरीका, जानिए   

सरस्वती उपाध्याय             
गर्मियों का मौसम आते ही सभी के घरों में एसी, फैन, कूलर आदि का इस्तेमाल होना शुरू हो जाता है। हालांकि, अब इतनी गर्मी पड़ने लगी है कि अब ज्यादातर लोग अपने घरों में एसी लगवाने लगे हैं। लेकिन अभी भी कई घरों में कूलर का इस्तेमाल किया जाता है। क्योंकि हर कोई एसी अफोर्ड नहीं कर सकता और कूलर कम खर्च में ज्‍यादा अच्‍छी और ठंडी हवा देने का काम करता है। ज़ाहिर है, हर साल गर्मी के मौसम में आप नया कूलर तो नहीं खरीदते होंगे।
लेकिन कूलर जैसे-जैसे पुराना होता जाता है, तो कूलर में कई तरह की दिक्कतें आने लग जाती हैं, जैसे- कूलर का फैन हल्का चलने लगता है या फिर कूलर की टंकी टपकने लगती है। हालांकि, कई बार नए कूलर का टैंक भी टपकने लगता है। अगर आपके साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ है तो अब आपको परेशान होने की कोई जरूरत नहीं है। क्योंकि आज हम आपके लिए कुछ ऐसे टिप्स लेकर आए हैं, जिनकी मदद से आप कूलर की लीकेज को रोक सकते हैं‌।
कैसे ? आइए जानते हैं... 
बता दें, कि इसका इस्तेमाल करने के लिए आप पहले कूलर को खाली करके सुखा लें और फिर एक बाउल में एपॉक्सी पुट्टी को डाल दें।
फिर इसे मिक्स कर लें और मिक्स करने के बाद लिक हो रही जगह पर इसे लगा दें। इसके अलावा, आप टैंक को पूरी तरह से एपॉक्सी पुट्टी से कवर कर लें। फिर इसे आप लगभग सूखने दें बस आपका कूलर एकदम सेट हो जाएगा और कुछ देर बाद टैंक में पानी डालकर चेक कर सकते हैं।
इसके अलावा, अगर आपका कूलर ज्यादा लीक नहीं हो रहा है या फिर टैंक में छेद हो गया है, तो आप लीकेज को रोकने के लिए वाटरप्रूफ टेप या फिर MC का इस्तेमाल कर सकते हैं। यह टेप आपको बाजार में या फिर किसी भी दुकान पर आसानी से मिल जाएगा। इसका इस्तेमाल करने के लिए सबसे पहले टैंक को अच्छी तरह से सुखा लें और टेप की सहायता से लीकेज वाले हिस्से को पूरी तरह से कवर कर लें।
आप छेद को दोनों तरफ यानि अंदर और बाहर से कवर कर सकते हैं। इससे आपका कूलर लीक नहीं होगा और आपके अधिक पैसे भी नहीं खर्च होंगे। इसके अलावा, आप MC रबड़ या मिट्टी को भी छेद पर लगा सकते हैं।
पेंट की भी ले सकते हैं मदद
अगर आप चाहती हैं कि आपके कूलर का टैंक अधिक समय तक चलता रहे, तो आप टैंक के अंदर पेंट कर सकती हैं। इससे आपके कूलर का टैंक न सिर्फ नया दिखेगा। बल्कि आपका टैंक लीक होने से भी बचा रहेगा। क्योंकि वाटर पेंट कूलर में हो रहे छेद को भरने का काम करेगा और फिर आपका कूलर टपकेगा भी नहीं। इसके लिए, आप टैंक के अंदर दो से तीन बार पेंट कर सकते हैं।

सोमवार, 11 अप्रैल 2022

पानी के लिए कड़ा संघर्ष करते हैं पक्षी, व्यवस्था

पानी के लिए कड़ा संघर्ष करते हैं पक्षी, व्यवस्था  

सरस्वती उपाध्याय         
भीषण गर्मी में आसमान से आग बरस रही है। गर्मी में मानव हो या फिर पशु-पक्षी सभी को ठंडे जल की तलाश रहती है। लोगों के लिए तो जगह-जगह प्याऊ व नल के साथ ही पानी की उचित व्यवस्था मिल ही जाती है। लेकिन, पक्षियों को पानी के लिए कड़ा संघर्ष करना पड़ता है। ऐसे में लोगों की जिम्मेदारी है कि वे पक्षियों के लिए दाना व पानी की उचित व्यवस्था करें‌। ताकि, खुले आसमान और धूप में विचरण करने वाले पंछियों को राहत मिल सके।
गर्मी में पानी को अमृत के समान माना जाता है, मनुष्य को प्यास लगती है तो वह कहीं भी मांग कर पी लेता है, लेकिन मूक पशु पक्षियों को प्यास में तड़पना पड़ता है, हालांकि जब वे प्यासे होते हैं तो घरों के सामने दरवाजे पर आकर खड़े हो जाते हैं। कुछ लोग पानी पिला देते हैं तो कुछ लोग भगा भी देते है। इस गर्मी में पशु पक्षियों की प्यास बुझाने के लिए लोगों को प्रयास करना चाहिए।
गर्मियों में कई परिंदों व पशुओं की मौत पानी की कमी के कारण हो जाती है। लोगों का थोड़ा सा प्रयास घरों के आस पास उड़ने वाले परिंदों की प्यास बुझाकर उनकी जिंदगी बचा सकता है। सुबह आंखें खुलने के साथ ही घरों के पक्षियों की चहक मन को मोह लेती है। गर्मियों में घरों के आसपास इनकी चहचहाहट बनी रहे, इसके लिए जरूरी है कि लोग पक्षियों से प्रेम करें और उनका विशेष ख्याल रखें।
गर्मी में पानी अमृत के समान...
भोजन और पानी की होती है कमी।
गर्मी में पक्षियों के लिए भोजन की भी कमी रहती है। पक्षियों के भोजन कीड़े-मकोड़े गर्मियों में नमी वाले स्थानों में ही मिल पाते हैं। खुले मैदान में कीड़ों की संख्या कम हो जाती है, जिससे पक्षियों को भोजन खोजने में भी काफी मशक्कत करनी पड़ती है। जंगलों में पेड़ों के पत्ते झड़ जाते हैं, साथ ही जल स्त्रोत भी सूख जाते हैं। वहीं मवेशियों के लिए भी चारागाह के अलावा खेतों में पानी की समस्या होती है, इस वजह से पानी के साथ भोजन की भी कमी से मवेशियों को जूझना पड़ता है।
अपने घर की बालकनी और आंगन में आप पक्षियों के लिए पानी रख सकते हैं। ध्यान रहे कि प्लास्टिक या स्टील के बर्तन में पानी न रखें। धूप में इन बर्तनों का पानी बहुत गर्म हो जाता है। मिट्टी के बर्तन में पानी रखना सबसे अच्छा होता है। इन बर्तनों की नियमित सफ़ाई करते रहें, ताकि पक्षी रोगों से दूर रहें। आप अपने ऑफ़िस में भी अपने सहयोगियों के साथ मिल कर वहां पानी रख सकते हैं, जहां पक्षी आते हों।
 हम पक्षियों के लिए इस गर्मी के मौसम कुछ जिम्मेदारी निभा सकते है।
1) आप अपने घर के बहार मिट्टी का सतही कटोरा रख सकते हैं, ताकि छोटे पक्षी और स्तनधारी भी इससे पानी पी सकें। पक्षी को पानी देने के लिए एक उपयुक्त बर्तन को चुनें, जिसे आप आसानी से साफ कर सकें।
2)  आप अपने घर के पीछे एक छोटी सी स्थायी पूल भी स्थापित कर सकते हैं। बस थोड़ी सी जमीन खोदें और पानी को रोकने के लिए इसके चारों ओर प्‍लास्टिक या सीमेंट से एक दीवार बनाएं। आप पानी कि व्‍यवस्‍था करने के लिए इसमें एक पंप भी जोड़ सकते हैं। इससे पक्षियाँ तपती हुई गर्मी में ठन्डे पानी से स्नान कर अपने आप को राहत दे पाएंगी।
3) आप कटोरे को छत पर या बगीचे में छायादार स्थान पर रखें, कोशिश करें अधिक ऊंचाई पर रखें ताकि पक्षी बिल्लियों जैसे शिकारियों से सुरक्षित रहें। आस-पास प्राकृतिक पर्यावरण बना पाएं तो काफी अच्छा होगा।
4) आप पक्षियों को पानी के स्थान में नियमित रूप मे आने पर कुछ हफ्ते लग सकते हैं। इसलिए धैर्य रखें और साफ पानी को भरते रहें।
5) कटोरे को हर दो दिन में साफ करना याद रखें। पानी को बासी न होने दें। यदि पानी की सतह पर हरा शैवाल बनने लगे तो उसे तुरंत साफ कर लें। साथ ही ध्यान रहे पानी पुरा भरा होना चाहिए।

सर्दी के मौसम में बीमारियों को दूर करता है 'आम'

सर्दी के मौसम में बीमारियों को दूर करता है 'आम'      

सरस्वती उपाध्याय            
आज के इस समय मेें आम की फसल को बहुत ही महत्व दिया जाता है। सर्दी के मौसम में आम खाने से कई बिमारियां दूर होती है। भारत की यह एक महत्वपूर्ण फसल है। आज, ये रंगीन, मीठे फल भारतीय व्यंजनों का मुख्य आधार हैं और दुनिया भर में लोकप्रिय हैं। विविधता के आधार पर आम का वजन कुछ औंस से लेकर पांच पाउंड से अधिक तक हो सकता है। आप जिस प्रकार का आम खरीदते हैं, उसके बावजूद ये फल कुछ प्रभावशाली स्वास्थ्य लाभ प्रदान करते हैं।
आम बहुत ही गुणकारी होता है, आम में मौजूद विटामिन, खनिज और एंटीऑक्सीडेंट महत्वपूर्ण स्वास्थ्य लाभ प्रदान कर सकते हैं। उदाहरण के लिए, विटामिन के आपके रक्त के थक्के को प्रभावी ढंग से मदद करता है और एनीमिया को रोकने में मदद करता है। यह आपकी हड्डियों को मजबूत बनाने में भी अहम भूमिका निभाता है।
आम विटामिन सी से भी भरपूर होता है, जो रक्त वाहिकाओं और स्वस्थ कोलेजन के निर्माण के साथ-साथ आपको ठीक करने में मदद करता है।
आम बीटा-कैरोटीन से भरपूर होते हैं, जो फल के पीले-नारंगी रंग के लिए जिम्मेदार एक वर्णक है। बीटा-कैरोटीन एक एंटीऑक्सिडेंट है, जो आम में पाए जाने वाले कई में से एक है। आम में मौजूद एंटीऑक्सिडेंट मुक्त कणों से लडऩे के लिए दिखाए गए हैं, जो आपकी कोशिकाओं को नुकसान पहुंचा सकते हैं और संभावित रूप से कैंसर का कारण बन सकते हैं।
आम आपके कार्डियोवस्कुलर सिस्टम को सपोर्ट करने में भी मददगार होते हैं। वे मैग्नीशियम और पोटेशियम का एक बड़ा स्रोत हैं, जो दोनों निम्न रक्तचाप और एक नियमित नाड़ी से जुड़े हैं। इसके अलावा, आम मैंगिफेरिन नामक एक यौगिक का स्रोत हैं, जो प्रारंभिक अध्ययनों से पता चलता है कि हृदय की सूजन को कम करने में सक्षम हो सकता है।
आम आपके पाचन तंत्र को स्थिर करने में मदद कर सकता है। वे एमाइलेज यौगिकों और आहार फाइबर दोनों की पेशकश करते हैं, जो आपको कब्ज से बचने में मदद कर सकते हैं। एमाइलेज यौगिक आपके पेट में अन्य खाद्य पदार्थों को घोलने में मदद कर सकते हैं, मुश्किल स्टार्च को तोड़ सकते हैं। इस बीच, आम में फाइबर समान फाइबर सप्लीमेंट की तुलना में कब्ज से राहत के लिए अधिक प्रभावी हो सकता है।
गर्भवती के लिए लाभकारी
आम फोलेट से भरपूर होते हैं, जिसका उपयोग स्वस्थ कोशिका विभाजन और डीएनए दोहराव के लिए किया जाता है। चिकित्सक सलाह देते हैं कि जो लोग गर्भवती हो सकते हैं वे प्रतिदिन कम से कम 400 एमसीजी फोलेट का सेवन करें, क्योंकि यह जन्म दोषों से बचने के लिए महत्वपूर्ण है।
विटामिन ए, विटामिन सी, विटामिन के, पोटैशियम, बीटा कैरोटीन, फोलेट, कोलीन, मैगनीशियम प्रति सेवारत पोषक तत्व शामिल है।
आम की त्वचा में उरुशीओल नामक यौगिक होता है, जो ज़हर आइवी लता में भी पाया जाता है। उरुशीओल वह है, जो ज़हर आइवी के पौधे को छूने के बाद खुजलीदार लाल चकत्ते का कारण बनता है। जबकि आम की त्वचा में ज़हर आइवी की तुलना में कम यूरुशीओल होता है, फिर भी यह चकत्ते और एलर्जी का कारण बन सकता है। दुर्लभ अवसरों पर, कुछ लोगों को छिलके वाले फल खाने पर एलर्जी भी हो सकती है। यदि आपके पास ज़हर आइवी लता के प्रति नकारात्मक प्रतिक्रिया है, तो आपको फल छीलते समय ध्यान रखना चाहिए और कभी भी त्वचा को खाने का प्रयास नहीं करना चाहिए।
आम स्वास्थ्य खाद्य भंडारों और कभी-कभी किसानों के बाजारों में भी पाया जा सकता है। यह स्वादिष्ट फल सिर्फ तीखापन के साथ मीठा होता है। आमों को काटते समय, बीच में बड़े, चपटे बीज पर ध्यान देना महत्वपूर्ण है, जो आसानी से चाकू को सुस्त कर सकते हैं।
आम का छिलका खाने से बचें। यदि आपकी त्वचा में संवेदनशीलता है, तो आप सीधे संपर्क से बचने के लिए आम को दस्ताने या तौलिये से स्थिर करते हुए छील सकते हैं। आम का गूदा खाने के लिए तैयार होने पर नरम और चमकीला नारंगी-पीला होना चाहिए। आप इसे मीठे इलाज के रूप में कच्चा, ग्रिल्ड या फ्रोजन खा सकते हैं।
चाहे आप इसे इसके स्वाद के लिए खाएं या इसके स्वास्थ्य लाभ के लिए, आम लगभग किसी भी भोजन के लिए एक बढिय़ा अतिरिक्त है। यहाँ कुछ तरीके दिए गए हैं जिनसे आप आम को अपने आहार में शामिल कर सकते हैं।

शनिवार, 9 अप्रैल 2022

'नवरात्रि' का नौवां दिन, माता सिद्धिदात्री की पूजा

'नवरात्रि' का नौवां दिन, माता सिद्धिदात्री की पूजा    

सरस्वती उपाध्याय        
नवरात्रि के नौवें दिन देवी दुर्गा के नौवें स्वरूप माता सिद्धिदात्री की पूजा की जाती है। कमल पर विराजमान होने के कारण इन्हें मां कमला भी कहा जाता है। देवी सिद्धिदात्री ने मधु और कैटभ नाम के राक्षसों का वध करके दुनिया का कल्याण किया। यह देवी भगवान विष्णु की प्रियतमा लक्ष्मी के समान, कमल के आसन पर विराजमान हैं और हाथों में कमल, शंख, गदा व सुदर्शन चक्र धारण किए हुए हैं। सिद्धिदात्री नाम से ही स्पष्ट है सिद्धियों को देने वाली। माना जाता है कि इनकी पूजा से व्यक्ति को हर प्रकार की सिद्धि प्राप्त होती है। मार्केण्डेय पुराण के अनुसार अणिमा, महिमा, गरिमा, लघिमा, प्राप्ति, प्रकाम्य, ईशित्व और वशित्व, कुल आठ सिद्धियां हैं, जो कि मां सिद्धिदात्री की पूजा से आसानी से प्राप्त की जा सकती हैं। मां सिद्धिदात्री को खीर, हलवा-पूरी का भोग लगाया जाता है।
सिद्धिदात्री की पूजा की जाती है। माना जाता है कि मां का यह रूप साधक को सभी प्रकार की ऋद्धियां एवं सिद्धियां प्रदान करने वाला है। मां सिद्धिदात्री को खीर, हलवा पूरी का भोग लगाया जाता है। नवरात्रि में अष्टमी और नवमीं पर पूजा के दौरान काले चने और पूरियों के साथ सूजी का हलवा खासतौर पर बनाया जाता है।
नवरात्रि के नौवें दिन मां सिद्धिदात्री की पूजा की जाती है। माना जाता है कि मां का यह रूप साधक को सभी प्रकार की ऋद्धियां एवं सिद्धियां प्रदान करने वाला है। इस दिन कमल में बैठी देवी का ध्यान करना चाहिए। सुंगधित फूल अर्पित करें।  इसके साथ ही इस मंत्र का जाप करें- ऊं सिद्धिरात्री देव्यै नम:। इस दिन हवन जरूर करें।

माता सिद्धिदात्री की पूजा विधि...

  • सुबह जल्दी उठकर स्नान आदि से निवृत्त होने के बाद साफ- स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
  • मां की प्रतिमा को गंगाजल या शुद्ध जल से स्नान कराएं। 
  • मां को सफेद रंग के वस्त्र अर्पित करें। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार मां को सफेद रंग पसंद है।
  • मां को स्नान कराने के बाद सफेद पुष्प अर्पित करें।
  • मां को रोली कुमकुम लगाएं। 
  • मां को मिष्ठान, पंच मेवा, फल अर्पित करें।
  • माता सिद्धिदात्री को प्रसाद, नवरस युक्त भोजन, नौ प्रकार के पुष्प और नौ प्रकार के ही फल अर्पित करने चाहिए।
  • मां सिद्धिदात्री को मौसमी फल, चना, पूड़ी, खीर, नारियल और हलवा अतिप्रिय है। कहते हैं कि मां को इन चीजों का भोग लगाने से वह प्रसन्न होती हैं।
  • माता सिद्धिदात्री का अधिक से अधिक ध्यान करें।
  • मां की आरती भी करें।
  • अष्टमी के दिन कन्या पूजन का भी विशेष महत्व होता है। इस दिन कन्या पूजन भी करें।
माता सिद्धिदात्री की आरती...
 
जय सिद्धिदात्री तू सिद्धि की दाता।
तू भक्तों की रक्षक तू दासों की माता।।
तेरा नाम लेते ही मिलती है सिद्धि।
तेरे नाम से मन की होती है शुद्धि।।
कठिन काम सिद्ध कराती हो तुम।
हाथ सेवक के सर धरती हो तुम।।
तेरी पूजा में न कोई विधि है।
तू जगदंबे दाती तू सर्वसिद्धि है।।
रविवार को तेरा सुमरिन करे जो।
तेरी मूर्ति को ही मन में धरे जो।।
तू सब काज उसके कराती हो पूरे।
कभी काम उस के रहे न अधूरे।।
तुम्हारी दया और तुम्हारी यह माया।
रखे जिसके सर पैर मैया अपनी छाया।।
सर्व सिद्धि दाती वो है भाग्यशाली।
जो है तेरे दर का ही अम्बे सवाली।।
हिमाचल है पर्वत जहां वास तेरा।
महानंदा मंदिर में है वास तेरा।।
मुझे आसरा है तुम्हारा ही माता।
वंदना है सवाली तू जिसकी दाता‌।।

माता सिद्धिदात्री का ध्यान मंत्र...

सिद्धगंधर्वयक्षाद्यैरसुरैरमरैरपि ।
सेव्यमाना सदा भूयात् सिद्धिदा सिद्धिदायिनी।।

वन्दे वांछित मनोरथार्थ चन्द्रार्घकृत शेखराम्।
कमलस्थितां चतुर्भुजा सिद्धिदात्री यशस्वनीम्॥

'जिला स्वच्छ भारत मिशन' की बैठक संपन्न

'जिला स्वच्छ भारत मिशन' की बैठक संपन्न    सुशील केसरवानी         कौशाम्बी। मुख्य विकास अधिकारी शशिकान्त त्रिपाठी की अध्यक्षता में उद...