शनिवार, 29 जून 2019

रिश्वतखोर पटवारी पर कब होगी कार्रवाई

मुख्यमंत्री योगी जी रिश्वत लेने वाले पटवारी पर कब होगी कार्यवाही 


दबंग पटवारी कंवरपाल का रिश्वत लेते हुए वीडियो हुआ वायरल , अधिकारी मौन 


सफ़ेद पोश नेताओ का पटवारी के सिर पर हाथ


वसीम मंसूरी


सहारनपुर, देवबंद । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा किसान सम्मान निधि योजना के तहत अधिक से अधिक किसानों को लाभान्वित करने और योजना सफल बनाने के लिए शासन स्तर से हर संभव कोशिशें की जा रही हैं , लेकिन सरकारी कारिंदे अपनी हरकतों से बाज नहीं आ रहे। योजना के तहत पात्रों की सूची में अपना नाम जुड़वाने के लिए किसानों को दौड़ाया ही नहीं जा रहा है, बल्कि इसके एवज में उनसे सुविधा शुल्क भी मांगा जा रहा है।


मिली जानकारी के अनुसार बीते दिन देवबंद क्षेत्र के लेखपाल कंवरपाल का गरीब किसानों से हस्ताक्षर करने के 100 - 100 रुपये वसूले का मामला सामने आ रहा हैं। गरीब किसानों को इस योजना का लाभ लेने के लिए आपने आवेदन पर हस्ताक्षर करने के अवैध वसूली के रूप में लेखपाल द्वारा वसूले जा रहे हैं। गरीब किसानों के फर्मो पर लेखपाल द्वारा हस्ताक्षर करने का सुविधा शुल्क कब - तक गरीब किसानों की जेब मार झेलती रहेगी ।
देवबंद लेखपाल कंवरपाल तहसील में बैठने पर आपने आप को शर्म महसूस करते हैं और अपना निजी चेम्बर लेकर उसमें बैठ कर अपने कार्य करते हैं और वही पर गरीबो की जेबो पर डाका डालते हैं इतना ही नही कि लेखपाल अपने साथ मे एक प्राइवेट सहायक भी रखते हैं ।


आपको बता दे कि जहाँ एक तरफ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा किसान निधि को गरीब किसानों को लाभ देने के लिए चलाई गई वही दूसरी ओर क्षेत्र के ही सफ़ेदपोश नेता आपने निजी फायदों के लिए लेखपाल का सहयोग करते हैं । सफ़ेदपोश नेताओ को गरीब किसानों की कोई फिक्र नही हैं ।
एसडीएम देवबंद के संज्ञान लेने के बाद भी कोई कानूनी कार्यवाही अभी तक अमल में नही आती नज़र आ रही हैं । क्या उक्त लेखपाल के विरुद्ध कानूनी कार्यवाही हो पाएगी ।


नेपाल में ₹100 से ऊपर की मुद्रा प्रतिबंध

नेपाल ने लगाया 200 रुपये के भारतीय मुद्रा पर प्रतिबन्ध,अब केवल ₹ 100 तक के नोट वैध! 



रक्सौल। नेपाल सरकार ने अब दो सौ रुपये की भारतीय मुद्रा के चलन पर भी रोक लगा दी है। नेपाल कैबिनेट ने तत्काल प्रभाव से इस आदेश को लागू करने को कहा है। सरकार ने नागरिकों से कहा है कि सौ रुपये से ऊपर की भारतीय करेंसी लाना, पास में रखना, खरीद-फरोख्त में इस्तेमाल करना कानूनन अपराध माना जाएगा।
सूचना एवं संचार मंत्री गोकुल प्रसाद बास्कोटा ने पत्रकारों से बातचीत में बताया कि भारत में जब नोटबंदी हुई थी, तब नेपाल में बड़ी मात्रा में 500 और 1000 के पुराने नोट थे। वह मुद्रा वहीं फंस गई थी। नेपाल सरकार ने अभी तक भारत में नोटबंदी के बाद जारी हुई नई करेंसी को मान्यता नहीं दी थी पर उसे गैरकानूनी भी नहीं बताया था, लेकिन अब नेपाल सरकार ने नई भारतीय करेंसी को गैरकानूनी घोषित करते हुए इनका प्रचलन पूरी तरह बंद कराने का फैसला किया है। अब भारतीयों को नेपाल में 50-100 अन्य छोटे नोट ही ले जाने होंगे। या फिर उन्हें नेपाल सीमा पर भारतीय नोटों को नेपाल की करेंसी से बदलना होगा।
नेपाल सरकार के संचार मंत्री का कहना है कि उनके देश में आर्थिक अपराध ,स्वर्ण तस्करी और हवाला कारोबार पर रोक के लिए यह पहल की गई है।मंत्रिपरिषद के फ़ैसले के बाद शुक्रवार से पांच सौ और दो हजार रुपये के भारतीय नोट के अलावा दो सौ रुपये के नोट भी नेपाल में गैरकानूनी हो गए।गुरुवार यानी 27 जून 2019 को मंत्री परिषद की बैठक में उक्त निर्णय लिया गया था। उन्होंने कहा कि इसका प्रभाव नेपाल के पर्यटन उद्योग पर जरूर पड़ेगा, लेकिन देशहित में यह फैसला जरूरी था।


हार को स्वीकार करना चाहिए

ऐसे इस्तीफे पटकवाने से भला क्या होगा ? राहुल गांधी के बाल हठ से बर्बाद हो रही है कांग्रेस
आखिर अब तक क्यूँ अपना वर्चस्व सिद्ध करने में लगे हैं


जब से पूरे देश में लोकसभा चुनाव के दौरान कांग्रेस की जबरदस्त हार हुई है । तब से राहुल गांधी मुंह फुलाए बैठे हैं।और अपना अध्यक्ष पद छोड़कर कोप भवन में विराजमान है । इस उम्मीद के साथ कि कोई फिर उनके पास जाए और मनुहार करते हुए कहे की - नहीं साहब ! मेहरबानी करके आप पुनः प्रधानमंत्री के उम्मीदवार .....( नहीं नहीं माफ कीजिएगा,वो तो कैसे बनेंगे यार ?? ) आप एक बार फिर बने रहिए । हम आपके बिना कैसे रहेंगे ?

बजाय अपनी कमी स्वीकार करने के राहुल गांधी ने भी अब तक अपना बाल हठ नहीं छोड़ा है। दो दिन पहले तो यूथ कांग्रेस की एक मीटिंग में यह तक कह दिया कि मुझे पद छोड़े हुए 1 महीना हो गया है , लेकिन लोग अभी भी अपनी कुर्सियों पर टिके हैं। कोई भी मेरे साथ इस्तीफा देकर अपनी कुर्सी खाली करने को तैयार नहीं है ।
अब बताओ यह भी कोई बात हुई भला ! कोई उनसे यह कहे कि ,क्यों राहुल जी आप तो पुश्तैनी राजा हैं। जो बेचारे गैर गांधी कार्यकर्ता हैं वह पूरा जीवन पार्टी की सेवा करते हुए अपने घर परिवार को ताक पर रखकर गली-गली गांव-गांव कांग्रेस का प्रचार करने के लिए मारे मारे फिर रहे हैं । और बड़ी मुश्किल से पार्टी में अपना सम्मानजनक पद पाकर काम कर रहे हैं। वह भला इस बात से प्रभावित होकर पद क्यों छोड़े ? वह भी एकमात्र कारण से की उनके अध्यक्ष अपनी ज़िद्द पर सवार है । देखा जाए तो उसमें *गलती सबसे बड़ी राहुल गांधी की खुद की है । जब लोगों को लोकसभा के टिकट बांटे जा रहे थे , तब राहुल गांधी आंखें बंद कर अपने मुट्ठी अनुभवहीन नेताओं से घिरे रहे , जो की जैसा मन में आया वैसे ही पट्टी राहुल को पढ़ाते रहे । राहुल भी बिल्कुल अपनी अनुभवहीन युवा टीम के भरोसे सभी वरिष्ठ नेताओं को दरकिनार कर उल्टे सीधे फैसले लेते रहे।
देखा जाए तो कांग्रेस को पिछले 10 साल में जितना नुकसान राहुल गांधी के बाल हठ की वजह से हुआ है , उतना नुकसान शायद पिछले 70 साल में कभी नहीं हुआ है । परंतु अब तक भी राहुल गांधी इस बात को समझने को तैयार नहीं है कि उनकी प्रधानमंत्री बनने की जिद सबसे बड़ी गलती थी। और इस गलती ने ही कांग्रेस को आज के इस कगार पर लाकर खड़ा किया है। जहां पर कांग्रेस एक प्रादेशिक दल की तरह अल्पमत में आ गई है। बजाय इसके की लोकसभा के टिकटों के बंटन के दौरान राहुल की टीम द्वारा की गई गलतियों को स्वीकार करने के, राहुल गांधी अब भी अपनी नाकारा युवा टीम को पूरे देश में कांग्रेस की कमान सौंपना चाहते हैं ।और हमेशा की तरह अब की बार भी उनका निशाना वरिष्ठ और अनुभवी लोग ही है । ताकि युवाओं के लिए रास्ता साफ हो सके। आम लोगों की भाषा में सुनने पर यह बहुत सुखद लगता है । परंतु यथार्थ का धरातल यह है कि यदि उन्होंने ऐसा कर दिया तो कांग्रेस का नामोनिशान मिट जाएगा। वैसे भी कांग्रेस में अब अनुभवी नेता अंतर्मन में राहुल के हठीले स्वभाव के सामने थकान महसूस कर रहे हैं।उनके लिए तो दोनों तरफ ही मरण है। एक तरफ राहुल गांधी जैसा अनुभवहीन नेतृत्व जिसको स्वीकार करने के लिए लिए आम जनता को समझाना बहुत मुश्किल दिखाई दे रहा है । और दूसरी तरफ राहुल गांधी का ज़िद्दी स्वभाव। जिसके चलते राहुल गांधी वरिष्ठ नेताओं के पीछे लठ लेकर घूम हैं। राहुल के इस चिड़चिड़े रवैये से यही लग रहा है कि वह अपनी गलती मानने की बजाय इसको दोष बाकी सब अनुभवी नेताओं पर मढ़ने का प्रयास कर रहे हैं।
राहुल को वरिष्ठ नेताओं को पार्टी में हाशिए पर ले जाने का इतना ही शौंक है , तो इस से पहले यह भी मूल्यांकन करना होगा कि उनकी ताजा युवा टीम में क्या वाकई इतना दम है कि कांग्रेस की खोई हुई इज्जत वापस ला सके ? उत्तर है नहीं ... क्योंकि इतना ही दम होता तो लोकसभा चुनावों में पार्टी के प्रचार की कमान खुद राहुल गांधी, प्रियंका गांधी सहित ज्योतिरादित्य सिंधिया,सचिन पायलट , जितिन प्रशाद,रणदीप सिंह सुरजेवाला जैसे उनके करीबियों में हाथ में ही थी।जो कि सब के सब फेल साबित हुए हैं। मजे की बात यह है कि इनमें से भी किसी ने अब तक अपना इस्तीफा राहुल की टेबल पर नहीं रखा है। *कायदे से तो पहले ये लोग ही इस्तीफा दें तब कोई बात है। वर्ना बाकी सब तो खेल तमाशा है .... परंतु राहुल को फिर भी आशा है !


नरेश राघानी


जिला कारागार का निरीक्षण किया गया

प्रभारी जिला जज व डीएम एसएसपी ने जिला कारागार का किया निरीक्षण



गोरखपुर। प्रभारी जिला जज-एंटी करप्शन मनोज कुमार राय प्रभारी मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट मंगल देव सिंह जिलाधिकारी गोरखपुर के विजयेंद्र पांडियन वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक डॉ सुनील गुप्ता जिला कारागार गोरखपुर का त्रैमासिक निरीक्षण किया इस मौके पर जेलर प्रेम सागर शुक्ला डिप्टी जेलर प्रभाकांत पांडेय व डिप्टी जेलर भोलानाथ भारती जेल अधीक्षक रामधनी रहे मौजूद। जिलाधिकारी गोरखपुर के विजयेंद्र पांडियन ने बताया कि जेल में कुछ विदेशी कैदी थाईलैंड नाइजीरिया जर्मन के सजा काट रहे हैं। महिला कैदियों के साथ 13 बच्चे महिलाओं के साथ रह रहे हैं जिसे पढ़ने व दूध की व्यवस्था किया गया है जिला जज से बात कर महिलाओं को रिहा करने का प्रयास किया जाएगा ताकि जेल में महिलाओं के साथ बेवजह बच्चे अपना जीवन व्यतीत न करे। जेल में लगभग 2000 कैदी बंद है अंदर 4 बैरक नया बनाया जा रहा है उसके बाद भी रहने की जगह कम पड़ रही है जो शासन से बात कर और बैरक बढ़ाने की व्यवस्था की जाएगी साफ-सफाई की व्यवस्था जेल के अंदर ठीक-ठाक पाई गई जेल की व्यवस्था चुस्त-दुरुस्त रही।


गोरखपुर। पुलिस लाइन पुलिस मेस सभागार में पुलिस अधीक्षक नगर विनय कुमार सिंह क्षेत्राधिकारी कैंट प्रभात राय गोरखपुर जनपद के सभी थानों के एंटी रोमियो प्रभारियों के साथ बैठक कर 1 जुलाई से 31 जुलाई तक जनपद के सभी थानों के अंतर्गत आने वाले प्रतिदिन एक विद्यालय में छात्राओं के साथ संवाद कर छात्राओं को जागरुक करने का कार्य करेंगे जिसका नेतृत्व संबंधित सर्किल के क्षेत्राधिकारी प्रतिदिन प्रत्येक थानों के अंतर्गत एक विद्यालय में प्रतिदिन 26 विद्यालयों मे संवाद करते हुए अगल-बगल के विद्यालयों की छात्राओं को भी बुलाकर सीधा संवाद कर मनचलों के प्रति छात्राओं को जागरूक किया जाएगा। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक डॉ सुनील गुप्ता का मंशा है कि 1 महीने में लगभग 700 विद्यालयों में क्षेत्राधिकारीयों के नेतृत्व में थानाध्यक्ष व एंटी रोमियो प्रभारियों को विद्यालय में भेज कर छात्राओं को जागरूक करेंगे इसके दौरान पुलिस अधीक्षक सहित अन्य अधिकारीगण विद्यालयों का दौरा कर निरीक्षण करते रहेंगे की किस विद्यालय में छात्राओं को एंटी रोमियो के प्रति जागरूक किया जा रहा है वैसे तो वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक डॉ सुनील गुप्ता का लक्ष्य है कि 700 विद्यालयों के साथ-साथ अगल-बगल पढ़ने वाले विद्यालय की छात्राएं भी उक्त विद्यालय पर बुलाकर उन्हें भी जागरूक किया जाए ताकि 1 महीने में सारे विद्यालयों के छात्राओं को एंटी रोमियो के प्रति जागरूक किया जाए इस मौके पर महिला थाना प्रभारी अर्चना सिंह एंटी रोमियो प्रभारी मौजूद रहे।


केंद्र सरकार लोगों के साथ कर रही है छलावा

ग्वालियर। ज्योतिषपीठ एवं शारदा पीठ द्वारका के शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती ने कहा है कि राम मंदिर को लेकर केन्द्र सरकार लोगों के साथ छलावा कर रही है। उन्होंने यह भी कहा कि हिन्दुओं के साथ ही मुस्लिमों को भी एक ही विवाह के लिए कानून बनाया जाना चाहिये जिससे मुसलमानों में तीन तलाक जैसी बुराई की नौबत ही नहीं आ सके।
स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती आज अपने प्रवास के दौरान यहां पत्रकारों से चर्चा कर रहे थे। स्वामी जी ने कहा कि वह तो चुनावों के पूर्व ही राम मंदिर के शिलान्यास के लिये अयोध्या जा रहे थे। लेकिन उस समय अचानक पुलवामा में बडी घटना घट गई और उन्होंने अपना राम मंदिर शिलान्यास का कार्यक्रम स्थगित कर दिया। स्वामी जी ने कहा कि विश्व हिन्दू परिषद और आरएसएस ने जो बाबरी के नाम पर ढांचा तोडा था वह तो वास्तविकता में राम मंदिर का ही हिस्सा था। वहां पर तो कोई मस्जिद थी ही नहीं। उन्होने कहा कि वह चाहते हैं कि अयोध्या में भगवान श्रीराम का भव्य मंदिर बने इसके लिये वह स्वयं भी प्रयासरत हैं और उन्होंने न्यायालय सहित हाल ही में उच्चतम न्यायालय द्वारा गठित की गई तीन सदसयीय समिति के सामने अपना पूरा ठोस पक्ष रख दिया है अब अंतिम फैसला न्यायालय को लेना है।


स्वामीजी ने कहा कि वह तो राम मंदिर का मुददा तो रामानंद सागर द्वारा प्रस्तुत किये गये धारावाहिक के बाद से ज्यादा जागा इसमें आरएसएस ने कोई विराट आंदोलन नहीं किया। उन्होने आरएसएस प्रमुख पर आरोप लगाते हुए कहा कि वह तो भगवान राम को एक महापुरूष मानते हैं हाल ही में उन्होंने ऐसा ही बयान एक साक्षात्कार में दिया है इसीलिये वह तो उनके स्मारक के पक्ष में ज्यादा है ना कि मंदिर के । उन्होंने कहा कि उन्होंने १९८३ से श्री राम जन्म भूमि के लिए आंदोलन चलाया। स्वामी जी ने कहा कि पूर्व की मध्यप्रदेश सरकार ने आदि शंकराचार्य के नाम पर जनता के साथ धोखा किया है। उन्होंने कहा कि आदि शंकराचार्य का मध्यप्रदेश में कुछ भी तथ्य नहीं जुडे फिर भी सरकार ने नरसिंहपुर से नर्मदा के उत्तर तट पर एक विलक्षण गुफा में शंकराचार्य विराजते थे कहकर उसकी महिमा मंडित की। जबकि वह क्षेत्र पतजंलि अंशभूत गोविंदभगवत्पादाचार्य जो एक बडे योगी थे परकाय प्रवेश एवं आकाश गमन की विद्यायें उन्होंने शंकराचार्य जी को प्रदान की थी उस संन्यास स्थल को उनके द्वारा खोजा गया उसका परिस्कार कर लोकार्पण शिवराज सरकार ने किया। इतना ही नहीं इस यात्रा में अनेकों साधू संन्यासियों को बुलाया लेकिन जो मुख्य शंकराचार्य वह स्वयं थे उनसे सरकार ने बात तक नहीं की। उन्होंने कहा कि शिवराज सरकार इस एकात्म यात्रा के नाम पर पंडित दीनदयाल के आदर्शों को सरकारी धन से जनता तक पहुंचाना चाहती थी। देश में दूसरी बार बहुमत से आई नरेन्द्र मोदी सरकार के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि वह तो झूठ का सहारा ले रहे हैं। स्वामी जी ने स्पष्ट किया कि पिछली बार उन्होंने गौवंश के निर्यात पर रोक लगाने की बात कही लेकिन वह रूका तो नहीं केन्द्र में मोदी की सरकार रहते बढ और गया। इतना ही नहीं गौवंश निर्यात पर अनुदान तक सरकार देने लगी है। राम मंदिर की बात कहीं लेकिन उसके लिये उच्चतम न्यायालय ने जरूर तीन सदस्यीय समिति का गठन किया जिसमें सेवा निवृत न्यायाधीश सहित श्री श्री रविशंकर को रखा है वह लोगों से बात कर अपना पक्ष न्यायालय को बतायेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि केन्द्र सरकार तो ना मंदिर ना मस्जिद ना गुरूद्वारा बनवा सकती है वह तो संविधान की शपथ लेते हैं जिसमें साफ लिखा है कि देश सेक्यूलर है। स्वामी जी ने कहा कि अभी तक राम मंदिर के साथ ही काशी और मथुरा की बात करने वाली भाजपा सभी को भूल गई है। एक आने वाली फिल्म आर्टिकल १५ में ब्राह्मणों को लेकर चित्रण करने पर उन्होंने कहा कि यह निदंनीय है। हम महिलाओं बेटियों का सम्मान करते हैं ऐसा कुछ नहीं करते। यह आपस में लडने के लिए क्यों मोड रहे हैं उन्हें नहीं पता। तीन तलाक के बारे में उन्होंने कहा कि मुसलमानों में भी हिन्दुओं जैसे ही एक पत्नी प्रथा का चलन करना चाहिये। अभी चार पत्नी शरियत के हिसाब से रखकर एक को तलाक बोल देते हैं उससे क्या फर्क पडता है। उन्होंने कहा कि समान सिविल कोड को लागू करना चाहिये। काशमीर के बारे में उन्होंने कहा कि वहां से धारा ३७० को केन्द्र सरकार को समाप्त करना चाहिये। और काश्मीर में हिन्दुओं काशमीरी पंडितों को बसाना चाहिये जिससे अभी मुसलमानों की जो मनमानी चल रही है वह समाप्त हो सके। स्वामी जी ने कहा कि सरकार को ईव्हीएम से नहीं बैलेट पेपर से चुनाव कराना चाहिये। स्वामीजी ने कहा कि जहां आग होती है वहां धुंआ उठता ही है। ऐसा ही ईवीएम के साथ है।


20 देशों के प्रमुखो से मिले प्रधानमंत्री

जी-20 के मंच पर 20 देशों के प्रमुखों से मिले प्रधानमंत्री


ओसाका ! प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जापान के ओसाका में जी-20 सम्मेलन में भाग लेकर स्वदेश लौटने को रवाना हो गए। सम्मेलन के आखिरी दिन आज ओसाका से विदा होने से पहले पीएम मोदी ने कई देशों के प्रमुखों से मुलाकात की। इनमें ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री स्कॉट मॉरिसन, इंडोनेशिया के राष्ट्रपति जोको विडोडो, तुर्की के राष्ट्रपति रेचप तैयप एर्दोगन, ब्राजील के राष्ट्रपति जैर बोलसोनारो प्रमुख हैं।


बता दें कि जी-20 की सम्मेलन में इस बार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी करीब बीस देशों के प्रमुखों से मिले। इसके साथ ही पीएम मोदी ने जापान-भारत-अमेरिका और रूस-भारत-चीन जैसे समूहों के साथ त्रिपक्षीय मुलाकातों में शिरकत की। इसके अलावा ब्रिक्स देशों की अनौपचारिक बैठक और जी-20 शिखर सम्मेलन के सत्रों में भी उनकी सक्रिय भागीदारी नजर आई।


इससे पहले बता दें कि जी-20 शिखर सम्मेलन के आखिरी दिन आज पीएम मोदी ने इंडोनेशिया के राष्ट्रपति जोको विडोडो से मुलाकात की। दोनों देशों में हालिया चुनाव के बाद मोदी और विडोडो की यह पहली मुलाकात थी। विदेश मंत्रालय प्रवक्ता रवीश कुमार के मुताबिक दोनों नेताओं ने माना कि चुनावों के बाद अब द्विपक्षीय रिश्तों को तेजी से आगे बढ़ाने पर ध्यान देने की जरूरत है।


सरकारी हेडपंप पर अवैध कब्जा

रामनगर टेंगरामोड़ बाईपास पर दबंगो का कब्जा पीडब्ल्यू डी में सरकारी हैंडपम्प और बनी हुई नाली पे किया कब्जा गर्मी में टेंगरामोड़ पर हजारों की संख्या में यात्री का होता है आवा गमन ।


वाराणसी ! रामनगर टेंगरामोड़ बाईपास पर प्रसाशन और प्रधान के मिली भगत से सरकारी हैण्ड पम्प को निजी  समरसेबल डालकर दबंगो ने किया कब्जा और पीडब्ल्यू डी में बनी हुई नाली पर दबंगो का कब्जा ! कब्जे के बाद सारा पानी हीरानगर कालोनी के रास्ते से होकर बहता है! जिससे रास्ता ना बनने से हीरानगर कालोनी के रास्ता का बद से बेहतर हुआ और बरसात में मिटटी की कटान जोरो से है !तीन साल से रास्ता पास हुआ है पर प्रधान ने रास्ता बनने का बस अस्वासन ही दिये जो की उस रास्ते पर तीन तीन भी हास्पिटल है।
बताते चले 2019 के चुनाव के समय अचार संहीता लागु होने के बाद एक ट्रक गिट्टी रास्ते में डाला गया और वहाँ पर कहाँ गया कि ये रास्ता बनेंगे और उसी रास्ते में भारत शर्मा जी के घर के सामने बरसाती पानी निकलने के लिए पाइप भारत शर्मा ने लगाया था लेकिन उनका पाइप यह कह कर निकलवाया गया कि ये रोड बन रहा है आप वहाँ से पाईप निकाल ले उस समय भरत शर्मा ने अपना पाईप निकाल लिये लेकिन चुनाव भी हो गए और बरसात के दिन आ गए और बारिश भी हो रहे है लेकिन ना तो अभी तक रोड बना ना ही बरसात का पानी निकलने के लिए प्रधान के तरफ से कोई ब्यवस्था किया गया । अब सवाल ये है ऐसी क्या वजह थी !


एक तिहाई कश्मीर भारत के पास नहीं

लोकसभा में गृहमंत्री अमित शाह ने कहा- मनीष तिवारी आज देश के विभाजन पर सवाल उठा रहे हैं मैं इनसे पूछना चाहता हूं कि देश का विभाजन किसने किया था?आज कश्मीर का एक तिहाई हिस्सा भारत के पास नहीं है, ऐसा किसके कारण हुआ?


नई दिल्ली ! जम्मू कश्मीर की आवाम और भारत की आवाम के बीच एक खाई पैदा की गई। क्योंकि पहले से ही भरोसा बनाने की कोशिश ही नहीं की गई! पाक प्रेरित आतंकवाद से लड़ने के लिए CRPF की कुछ विशिष्ट मांगे थी जिनमें अत्याधुनिक तकनीक और हथियार शामिल थे। मुझे इस सदन को बताते हुए आनंद हो रहा है कि उनकी सभी मांगों को पूरा कर दिया गया! आज से पहले 132 बार धारा 356 का उपयोग किया गया है। 132 में से 93 बार कांग्रेस ने इसका उपयोग किया है और अब वो हमें सिखाएंगे कि 356 का उपयोग कैसे करना है!


जमायते इस्लामी पर पहले क्यों प्रतिबन्ध नहीं लगाया गया ? किसको खुश करना चाहते थे आप ? ये नरेन्द्र मोदी सरकार है जिसने इस पर प्रतिबंध लगाया ! देश विरोधी बात करने वालों को पहले सरकार द्वारा सुरक्षा दी जाती थी। हमने 919 लोग, जिन्हें भारत विरोधी बयान देने के कारण सुरक्षा मिली थी, हमने उनकी सुरक्षा को हटाने का काम किया है! जहाँ आतंकवाद की जड़ है वहां घुसकर मारेंगे! मोदी जी की सरकार आने के बाद आतंकवादियों की जड़ में घुसकर इनके दिल दहलाने वाले हमले कराने का काम हुआ ! हम विभाजन का समर्थन नहीं करते है और न करते थे। विभाजन किसने किया? हमने नहीं किया। हम आज भी कहते है धर्म के आधार पर विभाजन नहीं होना चाहिए!


मनीष तिवारी आज देश के विभाजन पर सवाल उठा रहे हैं मैं इनसे पूछना चाहता हूं कि देश का विभाजन किसने किया था ? आज कश्मीर का एक तिहाई हिस्सा भारत के पास नहीं है, ऐसा किसके कारण हुआ ! जम्मू कश्मीर की आवाम और भारत की आवाम के बीच एक खाई पैदा की गई। क्योंकि पहले से ही भरोसा बनाने की कोशिश ही नहीं की गई ! 23 जून 1953 को जब श्यामा प्रसाद मुखर्जी जम्मू कश्मीर के संविधान का, परमिट प्रथा का और देश में दो प्रधानमंत्री का विरोध करते हुए जम्मू कश्मीर गए तो उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया और वहां उनकी संदेहास्पद मृत्यु हो गई! श्यामा प्रसाद मुखर्जी जी की मृत्यु की जांच होनी चाहिए या नहीं, क्योंकि मुखर्जी जी विपक्ष के नेता थे, देश के और बंगाल के नेता थे!आज बंगाल अगर देश का हिस्सा है तो इसमें मुखर्जी जी का बहुत बड़ा योगदान है! जम्मू-कश्मीर में चुनाव आयोग जब भी तय करेगा तब लोकत्रांतिक तरीके से चुनाव कराए जाएंगे। केंद्र सरकार का उसमें कोई हस्तक्षेप नहीं होगा!


जम्मू-कश्मीर की आवाम के मन डर नहीं होना चाहिए। जो देश को तोड़ना चाहते हैं उनके मन में डर होना चाहिए. जम्मू कश्मीर की आवाम को हम अपना मानते हैं, उन्हें अपने गले लगाना चाहते हैं। लेकिन उसमें पहले से ही जो शंका का पर्दा डाला गया है, वो इसमें समस्या पैदा कर रहा है. सिर्फ 3 ही परिवार इतने साल तक कश्मीर में शासन करते रहे। ग्राम पंचायत, तहसील पंचायत, नगर पंचायत सब का शासन वही करें और सरकार भी वही चलाएं। ऐसा क्यों, क्या जम्मू-कश्मीर भारत का हिस्सा नहीं है. कश्मीर में हुए पंचायत चुनाव हो या अभी हुए लोकसभा चुनाव एक खून का कतरा भी कश्मीर में जमीन पर नहीं गिरा और आप कह रहे हैं कि कंट्रोल नहीं है। कंट्रोल है बस देखने का नजरिया अलग-अलग है!


घाटी के अंदर 6 हजार ट्रांजिट आवासों का निर्माण कश्मीरी पंडितों के लिए हमने शुरू किया है. 370 है, मगर अस्थायी शब्द शायद आप भूल गए हैं, ये अस्थायी है, स्थायी नहीं। 370 हमारे संविधान का अस्थायी मुद्दा है ये याद रखियेगा. कश्मीरियत खून बहाने में नहीं है। कश्मीरियत देश का विरोध करने में नहीं है। कश्मीरियत देश के साथ जुड़े रहने में है। कश्मीरियत कश्मीर की भलाई में है। कश्मीर की संस्कृति को बचाने में है!


किशोर को चौकी में दी थर्ड डिग्री

वर्दी वाले गुंडे -किशोर को चौकी में बंद कर डेढ़ घंटे तक दी थर्ड डिग्री, जूते से पैरों को कुचला-चीखने पर मारे डंडे


 लखनऊ ! महज चोरी के शक में तीन पुलिसकर्मी एक किशोर को घर से उठा लाते हैं, फिर पुलिस चौकी में बंदकर जुर्म कुबूलने के नाम पर डेढ़ घंटे तक थर्ड डिग्री का इस्तेमाल करते हैं। पुलिसकर्मियों ने उसके पैरों को जूते से कुचला और डंडे भी बरसाए। जुल्म के निशान मासूम के शरीर पर साफ देखे जा सकते हैं। शरीर के जख्म तो समय के साथ भर जाएंगे, लेकिन किशोर के मन से खाकी का खौफ शायद ही निकल पाए।


ये है पूरा मामला


पुलिस का यह बर्बर चेहरा पीजीआइ थाना की तेलीबाग चौकी में सामने आया। वृंदावन कॉलोनी निवासी एक मजदूरी की आर्थिक स्थिति ठीक न होने के चलते उनका नाबालिग बेटा भी किराए पर ई-रिक्शा चलाता था। किशोर ने बताया कि 24 जून को लौंगा खेड़ा के पास दो लड़कों ने उसका ई-रिक्शा बुक किया। इसके बाद एक लड़का स्कूटी और दूसरा उसके रिक्शे पर सैनिक नगर तक आया। उन्होंने किशोर को पानी की बोतल लाने के लिए भेज दिया। वापस आने पर लड़के और रिक्शा दोनों गायब थे। इस पर किशोर ने ई-रिक्शा मालिक को सूचना दी। 27 जून को छह बजे किशोर के घर पर तेलीबाग चौकी से तीन पुलिसवाले आए। मां के मुताबिक, पुलिसवाले किशोर को चौकी लेकर चले गए। साढ़े सात बजे चौकी पर परिवार और क्षेत्र के अन्य लोग पहुंचे तो पुलिसकर्मी लडख़ड़ाते किशोर को टैंपो में कहीं ले जा रहे थे, लेकिन लोगों को देखकर छोड़ दिया।


चोर के साथ मिले होने का बना रहे थे दबाव


किशोर का आरोप है कि चौकी इंचार्ज के सामने कई पुलिस वाले उस पर चोरों के साथ मिले होने और चोरी का पैसा मिलने की बात कुबूलने का दबाव बना रहे थे। एक सिपाही उसके पैरों को जूतों से रौंद रहा था। दूसरा डंडे बरसाते हुए वारदात कुबूलने का कह रहे थे।


मुकदमा दर्ज नहीं, किशोर को उठा लाए चौकी


इंस्पेक्टर पीजीआइ ने खुद इस बात को माना कि इस मामले में कोई मुकदमा दर्ज नहीं था। चौकी में मौखिक शिकायत हुई थी। चौकी प्रभारी रजनीश वर्मा ने उन्हें भी सूचना नहीं दी। वहीं, सीओ कैंट तनु उपाध्याय ने बताया कि मुकदमा दर्ज किए बिना इस तरह की कार्रवाई के विषय में जांच शुरू कर दी गई है। दोषियों पर कार्रवाई की जाएगी। बता दें कि दस दिन पहले पीजीआइ थाना क्षेत्र में ही एक चोर को लोगों ने पकड़ा था, जिसे पुलिस ले गई, बाद में उसकी मौत हो गई। इस मामले में पुलिस ने चोर पकडऩे वाले परिवार पर ही मुकदमा दर्ज कर दिया था।


डर से पहुंचे एसएसपी के पास


किशोर और उसके माता-पिता इस वारदात से दहशत में है। गुरुवार शाम छोडऩे के बाद पुलिसकर्मियों ने शुक्रवार सुबह फिर चौकी बुलाया था। इससे डरकर वह पहले सीओ कैंट और फिर एसएसपी ऑफिस पहुंचे। यहां से एएसपी नॉर्थ और सीओ कैंट बच्चों को लेकर मेडिकल के लिए सिविल अस्पताल पहुंचे।


तहखाने में किशोर की दी यातनाएं! आरोप है कि चौकी के अंदर बेस्मेंट में एक तहखाना बना हुआ है। इसमें किशोर को पुलिसकर्मियों ने रखकर मारा और आरोप कुबूलने का दबाव बनाया।


एसएसपी शांत, मां ने दी तहरीर


उधर, इतने संगीन मामले में एसएसपी कलानिधि नैथानी से कई बार संपर्क किया गया, लेकिन उन्होंने कॉल और मैसेज का जवाब नहीं दिया। इसी बीच मां ने पूरे प्रकरण की लिखित तहरीर दी है।


क्या कहते हैं आईजी रेंज ?


आईजी रेंज लखनऊ एसके भगत का कहना है कि प्रकरण की रिपोर्ट लखनऊ पुलिस के उच्च अधिकारियों से मांगी गई है। साथ ही जांच के आदेश भी दिए गए हैं। जल्द ही दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई होगी।


संजीव शर्मा की रिपोर्ट


पीएम को खून से लिखे गए सैकड़ों पत्र

डेढ़ सौ लोगों ने पीएम मोदी को लिखे खून से पोस्टकार्ड



महोबा। पृथक बुंदेलखंड राज्य की मांग को लेकर चल रहे ऐतिहासिक अनशन के एक वर्ष पूरा होने पर आल्हा चौक स्थित अनशन स्थल पर डेढ़ सौ से अधिक लोगों ने प्रधानमंत्री को अपने खून से पोस्टकार्ड लिखे और उनसे जल्द बुंदेलखंड राज्य बनाने की मांग की। विशेषज्ञों की मदद से खून निकलाया गया। फिर पोस्टकार्ड पर 'मोदी जी, हमें बुंदेलखंड राज्य दो' लिखा गया।


अनशन स्थल पर पूर्व सैनिक, वकील, व्यापारी, शिक्षक, बुजुर्ग व मजदूर सभी ने 'खून से खत लिखो अभियान' में हिस्सा लिया। यह अभियान दो घंटे से अधिक चला। पीएम को अलग राज्य के लिए खून से खत लिखने 91 वर्षीय राम सेवक अवस्थी भी अनशन स्थल पहुंचे, लेकिन उनका खून नहीं लिया गया। ऐतिहासिक अनशन की अगुवाई कर रहे बुंदेली समाज के संयोजक तारा पाटकार ने बताया कि एक वर्षीय अनशन के दौरान हम लोग हजारों पोस्टकार्ड, सैकड़ों ज्ञापन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम भेज चुके हैं। हमारी बहनें रक्षाबंधन में हजारों राखियां भेज चुकी हैं, लेकिन जब प्रधानमंत्री जी ने कोई सुनवाई नहीं की तो अब हमें मजबूरन खून से खत लिखने का फैसला लेना पड़ा। यहां बुंदेली समाज के महामंत्री अजय बरसैया, यशपाल सिंह परिहार, सुधीर दुबे, अमरचंद विश्वकर्मा, लालजी त्रिपाठी, आशीष शुक्ला, मुन्ना जैन, अच्छेलाल सोनी, ग्यासी लाल, प्रशांत गुप्ता बुंदेलखंडी, हरीओम निषाद, दुर्गेश, हरिश्चंद्र वर्मा, माधव खरे, देवेंद्र तिवारी, कृष्णा शंकर जोशी, दीपेंद्र परिहार, सचिन खरया, बाबू लाल रैकवार आदि ने अपने खून से खत लिखे।



अनिल कुमार


17 ओबीसी जातियों को एससी का दर्जा

सीएम योगी का बड़ा फैसला: 17 ओबीसी जातियों को मिलेगा एससी का दर्जा


लखनऊ ! उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने बड़ा फैसला करते हुए अति पिछड़ा वर्ग की 17 जातियों को अनुसूचित जातियों की लिस्ट में डाल दिया है। ये अति पिछड़ी जातियां हैं ! निषाद, बिन्द, मल्लाह, केवट, कश्यप, भर, धीवर, बाथम, मछुआरा, प्रजापति, राजभर, कहार, कुम्हार, धीमर, मांझी, तुरहा और गौड़। इन जातियों को एससी की कैटेगरी में डालने का सीधा फायदा इनके लिए बढ़े आरक्षण के फायदे के तौर पर होगा। इसे सरकार का पिछड़ी जातियों को लुभाने के बड़े फैसले के तौर पर देखा जा रहा है।


हालांकि समाज कल्याण विभाग द्वारा जारी किए गए आदेश में कहा गया है कि यह फैसला कोर्ट के अंतिम आदेश के अधीन होगा। यानी अगर कोर्ट का अंतिम निर्णय इन जातियों को अनुसूचित जाति में शामिल न करने का आता है, तो फिर से इन्हें अनुसूचित जाति के दायरे से बाहर कर दिया जाएगा। जबकि अगर कोर्ट इन्हें अनुसूचित जाति में बरकरार रखने को कहता है तो उनका यह स्टेटस जारी रहेगा। योगी आदित्यनाथ सरकार काफी लंबे समय से इन 17 अन्य पिछड़ी जातियों को अनुसूचित जाति की लिस्ट में डालने का प्रयास कर रही थी। योगी सरकार का इन जातियों को एससी लिस्ट में डालने के पीछे तर्क ये है कि ये वो जातियां हैं जो सामाजिक और आर्थिक रूप से काफी पिछड़ी हुई हैं। 


 


ट्रेन की चपेट में आने से अधेड़ की मौत

फ़िरोज़ाबाद ! टूंडला रेलवे स्टेशन पर पानी लेने उतरे अधेड़ की ट्रेन की चपेट में आने से मौत। मरुधर एक्सप्रेस का मामला । जीआरपी ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा।


 टूंडला रेलवे स्टेशन क्षेत्र का मामला है !लखनऊ से जयपुर की ओर जा रही मरुधर एक्सप्रेस में यात्रा कर रहे करीब 55 वर्षीय रघुनाथ पुत्र राम चंद्र निवासी इमलीवाला फाटक जनकपुरी फर्स्ट थाना ज्योति नगर जयपुर टूंडला रेलवे स्टेशन पर ट्रेन के रुकते ही पानी लेने के लिए उतरे थे! तभी ट्रेन आगे चल दी ट्रेन चलता देख,उन्होंने ट्रेन पकड़ने के लिए दौड़ लगा दी ! हाथ फिसलने से ट्रेन की चपेट में आ गए और उनकी मौत हो गई! जीआरपी ने शव कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेजा है।


संवाददाता रिहान अली 


82 केंद्रों पर बीएड की मुख्य परीक्षा

मेरठ और सहारनपुर के 82 केंद्रों पर बीएड की मुख्य परीक्षा आज से मेरठ


मेरठ,। चौ.चरण सिंह विवि की बीएड की मुख्य परीक्षा शुक्रवार से शुरू हो रही है। मेरठ और सहारनपुर में 82 केंद्रों पर परीक्षा होगी। परीक्षा के एक दिन पहले छात्र- छात्राओं के एडमिट कार्ड डाउनलोड हो सके। इससे छात्र-छात्रएं परेशान भी हुए। बीएड दो वर्षीय पाठ्यक्रम में सत्र 2018-19 फस्र्ट ईयर, सत्र 2017-19 द्वितीय वर्ष, फस्र्ट ईयर एक्स और बैक पेपर, सत्र 2016-18 फस्र्ट और सेकेंड ईयर एक्स के विद्यार्थी परीक्षा में सम्मिलित होंगे।
कहां पर कितने केंद्र
इसके अलावा सत्र 2015-17 फर्स्‍ट ईयर एक्स और सत्र 2015-17 सेकेंड ईयर और बैक पेपर के छात्र- छात्राएं परीक्षा देंगे। मेरठ में 31 केंद्रों पर परीक्षा होगी। गाजियाबाद में 12, बुलंदशहर में 11 परीक्षा केंद्र निर्धारित किए गए हैं, जबकि हापुड़ में चार, गौतमबुद्धनगर में छह परीक्षा केंद्र बनाए गए हैं। बड़ौत में पांच केंद्रों पर परीक्षा होगी। मुजफ्फरनगर में चार,शामली में दो, सहारनपुर में छह केंद्र बनाए गए हैं। बीएड की परीक्षा दो पालियों में 11 बजे से दो बजे और तीन बजे से छह बजे के बीच होगी।
बीएड की मौखिक परीक्षा 10 जुलाई से
बीएड दो वर्षीय पाठ्यक्रम 2016 प्रथम वर्ष, 2017 प्रथम वर्ष, द्वितीय वर्ष, बीएड सत्र 2018 प्रथम, द्वितीय वर्ष की छूटी हुई प्रयोगात्मक और मौखिक परीक्षा 10 जुलाई से 20 जुलाई के बीच होगी। जिनका शुल्क जमा नहीं है, वह पांच जुलाई तक निर्धारित फीस जमा कर परीक्षा में सम्मिलित हो सकते हैं।
अब अल्पसंख्यक कॉलेज नहीं कर सकेंगे मनमानी
अब अल्पसंख्यक बीएड कॉलेज बीएड के प्रवेश में मनमानी नहीं कर सकेंगे। चौ. चरण सिंह विश्वविद्यालय ने संबद्ध अल्पसंख्यक कॉलेजों में संचालित बीएड पाठ्यक्रम में प्रवेश के लिए रजिस्ट्रेशन शुरू कर दिया है ।


 रवि ठाकुर


विद्यालय में प्रवेश अवधि बढ़ाने की मांग

"प्रवेश लेने की अवधि बढ़ाने की मांग मेरठ कालेज प्राचार्य से मिले छात्र


मेरठ ! मेरठ कॉलेज में छात्र-छात्राओं के प्रवेश में आ रही समस्या को लेकर छात्र प्राचार्य से मिले। छात्रों ने स्नातक में प्रवेश लेने की अवधि बढ़ाने की मांग की है। एडमिशन के लिए काउंटर पर भीड़ को देखते हुए उन्होंने मंगल पांडे सभागार या अन्य जगह व्यवस्था करने को कहा। बैंकों में फीस जमा करने में छात्रों को दिक्कत आ रही है। उन्होंने वैकल्पिक व्यवस्था करने की मांग की है। छात्रों ने कॉलेज परिसर में फोटो स्टेट की व्यवस्था कराने, नोटिस बोर्ड पर मेरिट और अन्य सूचनाएं बड़े अक्षरों में टाइप कराकर लगाने की मांग की।
मेरठ कॉलेज में आज अनावश्यक जाने से बचें
शुक्रवार को मेरठ कॉलेज में बीएड की परीक्षा है। जहां 17 कॉलेजों का सेंटर बनाया गया है। शुक्रवार को विधि कोर्स के निरीक्षण के लिए बार काउंसिल आफ इंडिया की टीम भी आ रही है। वहीं विवि में दाखिले का दौर चल रहा है। कॉलेज की चीफ प्राक्टर डा. अलका चौधरी ने बीएड परीक्षार्थियों को मोबाइल फोन न लेकर आने के लिए कहा है। अनावश्यक रूप से छात्रों को कॉलेज में आने से मना किया है। उन्होंने कहा है कि प्रवेश के लिए छात्र अपने अभिभावक के साथ शांतिपूर्ण आएं।
पहले दिन कॉलेजों में कम हुए प्रवेश
विश्वविद्यालय की रिवाइज हुई मेरिट से गुरुवार को शहर के कॉलेजों में बहुत कम प्रवेश हुए। मेरठ कॉलेज, डीएन कॉलेज, एनएएस कॉलेज के अलावा सभी ग‌र्ल्स कॉलेजों में प्रवेश की स्थिति एक जैसी रही। कई कॉलेजों में एक भी प्रवेश नहीं हुआ। मेरिट के इंतजार में छात्र-छात्राएं वापस लौट आए। 


रवि ठाकुर


देवता और परमेश्वर (मंथन)

देवता और ईश्वर


वेद के अनुसार ईश्वर सर्वव्यापक सर्वाधिष्ठान और एक है । वह अखिल ब्रह्माण्ड और उनके अधिष्ठातृ देवताओं के भी स्वामी तथा स्वप्रभु है । देवता अनेक हैं । देवताओं का कोई स्थूल रूप नहीं होता । ये अत्यन्त सूक्ष्म और दिव्य हैं ; शास्त्रीय कर्म और उपासना के अंग हैं । इनका सामर्थ्य एक ही ब्रह्माण्ड में सीमित है । अलग अलग ब्रह्माण्ड के अलग अलग ब्रह्मादि देवगण होते हैं । देवता निर्दिष्ट शक्ति या सामर्थ्य के अधिकारी हैं । ये अपने अपने अधिकार क्षेत्र के अंतर्गत सीमित फल ही उपासक के लिये प्रदान करते हैं । ईश्वर कोई याग-प्रविष्ट देवता नहीं है । सगुण ईश्वर की उपासना से अभीष्ट फल की प्राप्ति हो सकती है , सायुज्यादि मुक्ति की भी प्राप्ति हो सकती है । निष्काम भाव से की गयी ईश्वर उपासना तत्पदार्थ शोधक के रूप में ब्रह्मज्ञान में हेतु है । निर्गुण ब्रह्म का ज्ञान मोक्ष प्रदान करता है ।


कर्मफल के दाता , प्रकाशमान और द्युलोक में रहने के कारण ये देवता कहलाते हैं । ईश्वर जगत का अभिन्न- निमित्त-उपादान-कारण है । माया का अधिष्ठान है । देवता भी परमेश्वर की माया शक्ति के अधीन ही होते हैं । सगुण ईश्वर की वैदिक उपासना विधि से पृथक् आगमों की उपासना विधि में यथा-सम्प्रदाय नाम रूप और गुणों का अतिरिक्त अनुदेश है । किंतु पौराणिक अर्थवादात्मक विषय को छोड़कर देखें तो परमेश्वर ही समस्त सृस्टि , स्थिति , लय , अनुग्रह और तिरोधान का कर्ता है - इस प्रकार का अभिनिश्चय शैव, शाक्त और वैष्णव आदि सभी आगम में स्वीकृत है । जीव में कर्माधिकार, कर्तृत्व, भोक्तृत्व, और देहाभिमान है । देवताओं का दिव्य भोग में अधिकार है । ये देवत्व के अभिमान से युक्त होते हैं । किंतु सामान्य जीव में रहने वाली मूढ़ता देवताओं में नहीं होती है । ये प्रवल ज्ञान, वैराग्य और ऐश्वर्य से सम्पन्न होते है । तथापि दिव्यगुणानुसंगता यहां पर भी है । परमेश्वर अत्यन्त निर्लिप्त और असंग चित्पदार्थ है । सब का उपादान और निमित्त हो कर सब से अभिन्न होते हुये भी सब से अतिरिक्त और अपरिणामी है ।


अवतारवाद ईश्वर-उपासना का अनिवार्य अंग नहीं है । किन्तु इस से श्रद्धा और आस्तिक्य की वृद्धि होती है । वैसे मूर्ति-पूजा भी यथार्थ उपासना में अतिरिक्त विशिष्ट भूमिका ग्रहण नहीं करती । उपास्य लिंग विग्रहादि केवल प्रारंभिक अवस्था में एकाग्रता के सम्पादनार्थ सहायक हैं । किन्तु शास्त्रीय पारमार्थिक बोध के विना मूर्ति पूजा भी एक धार्मिक पाखण्ड ही है ।


वैदिक कर्म या उपासना में देवता का ध्यान नहीं किया जाता । विनियोग स्थान में मंत्र के पाठ से ही देवता की उपस्थिति मानी जाती है । आगमों के अनुसार उपासना में ध्यान पूर्वक अपने अन्तःकरण को देवता के स्वरूप में ढाला जाता है । यही यहां देवता की उपस्थिति है । तब बाह्यपूजारूप बहिर्याग ध्यानात्मक अन्तर्याग के लिये ही समर्पित है ; यही सिद्धान्त है । ईश्वर उपासनामें द्रव्यादि त्याग सहित कर्तृत्व आदि के अभिमान का त्याग और समर्पण भाव ही मुख्य है । सकाम उपासना निष्काम भाव का हेतु नहीं है । सकाम ईश्वर उपासक की बुद्धि में विद्यमान ईश्वर संबंधी ज्ञान आगे चलकर उपासक के निष्काम होनेपर तत्त्वबोध का उपकारक होता है । किंतु केवल देवताओं के उपासक के लिये देवताओं का दासत्व या पशुत्व लाभ ही सार होता है ।


निगमागम विधि और ज्ञान से रहित कल्पित ग्राम्य देवताओं की उपासना केवल मनोरञ्जन ही है ; मूढ़ता और जड़ता से पूर्ण है । उसका कोई फल नहीं है । सम्प्रति प्राचीन या आधुनिक बड़े बड़े प्रसिद्ध अथवा साधारण मंदिरों में ट्रस्टी, पुजारी, तीर्थयात्री, दानकर्ता या मंदिर प्रशासन के हित केलिये समर्पित जिस पूजा पाठ की परिपाटी प्रचलित है वह धर्म या अध्यात्म की यथार्थता के विपरीत है । विवेकी जन इन सब के लिये अपना समय , धन या एकाग्रता को खराब नहीं करते हैं । 


सनातनी सदीप गुप्ता


जेडीयू को भी मंत्रिमंडल में हिस्सेदारी मिलनी चाहिए

अविनाश श्रीवास्तव    पटना। केंद्रीय मंत्रिमंडल के विस्तार और उसमें जनता दल यूनाइटेड के शामिल होने की अटकलों के बीच जेडीयू अध्यक्ष आरसीपी सिं...