मंगलवार, 16 मई 2023

नेता तिवारी का निधन, शोक में डूबा गोरखपुर 

नेता तिवारी का निधन, शोक में डूबा गोरखपुर 


पूर्वांचल के बाहुबली नेता हरिशंकर तिवारी का हुआ निधन, शोक में डूबा गोरखपुर 

संदीप मिश्र 

लखनऊ/गोरखपुर। उत्तर प्रदेश के बाहुबली नेता पंडित हरिशंकर तिवारी का मंगलवार शाम को निधन हो गया। इससे उनके समर्थकों में उदासी छा गई है। निधन की सूचना मिलते ही उनके घर और गोरखपुर हाता पर समर्थकों की भीड़ जुट गई है। दो साल पहले उनकी मौंत के सम्बंध में अफवाह उड़ी थी। हालांकि तब वह जीवित थे, परन्तु मंगलवार शाम 7 बजे उन्होंने अंतिम सांस ली और हमेशा के लिए चिर निद्रा में शो गए।

बता दें, कि चिल्लूपार विधानसभा क्षेत्र के चुनाव का इतिहास खंगालने पर वयोवृद्ध बाहुबली हरिशंकर तिवारी का नाम बार-बार, उभरकर सामने आता है। हरिशंकर तिवारी इस सीट से लगातार 22 वर्षों (1985 से 2007) तक विधायक रहे हैं। पहला चुनाव 1985 में निर्दलीय लड़ा था, फिर अलग-अलग राजनीतिक दल के टिकट पर चुनाव लड़कर जीतते रहे हैं। तीन बार कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़कर जीते व यूपी सरकार में मंत्री भी बने थे। साल 2007 के चुनाव में बसपा ने राजेश त्रिपाठी को अपना प्रत्याशी बनाकर चुनाव मैदान में उतार दिया। राजेश त्रिपाठी ने कांग्रेस के दिग्गज नेता हरि शंकर तिवारी के किले को ढहा दिया और उन्हें शिकस्त देते हुए बसपा के राजेश त्रिपाठी ने सीट पर कब्जा कर लिया।

मंगलवार को और एक राजनीतिक योद्धा चिर निद्रा में सो गया। पूर्वांचल में हरि शंकर तिवारी का जलवा देखने लायक था। उनके आगे किसी की नहीं चल पाती थी। सूबे के मुखिया योगी आदित्यनाथ जी जब गोरखपुर से सांसद हुआ करते थे तो राजनीति का महारथी हरि शंकर तिवारी चिल्लूपार विधानसभा से विधायक हुआ करते थे।  हालांकि योगी जी से हरि शंकर तिवारी बहुत सीनियर नेता हुआ करते थे। दोनों नेताओं में वर्चस्व को लेकर आपस में गतिरोध बना रहता था।

फिलहाल, गोरखपुर के चिल्लूपार विधानसभा में हरि शंकर तिवारी का गढ़ माना जाता था। उनके गढ़ में उनके सक्रिय राजनीति में कोई ठौर न बना सका। मंगलवार को उनके मृत होने की सूचना से समूचा गोरखपुर शोक में डूब गया।

यूपी में ग्रीष्मकालीन अवकाश की घोषणा: परिषद 

यूपी में ग्रीष्मकालीन अवकाश की घोषणा: परिषद 

संदीप मिश्र/बृजेश केसरवानी 

लखनऊ/प्रयागराज। उत्तर प्रदेश बेसिक शिक्षा परिषद की ओर से राज्य में ग्रीष्मकालीन अवकाश की घोषणा कर दी गई है। 15 जून तक चलने वाले ग्रीष्म अवकाश की अवधि में स्कूलों पर ताले लटके रहेंगे। मंगलवार को उत्तर प्रदेश बेसिक शिक्षा परिषद प्रयागराज के सचिव प्रताप सिंह बघेल की ओर से उत्तर प्रदेश में ग्रीष्मकालीन अवकाश का ऐलान कर दिया गया है। 

राज्य के सभी जिला बेसिक शिक्षा अधिकारियों को भेजी गई चिट्ठी में बेसिक शिक्षा परिषद के सचिव ने कहा है कि उत्तर प्रदेश बेसिक शिक्षा परिषद के नियंत्रण में संचालित होने वाले विद्यालयों/ मान्यता प्राप्त विद्यालयों में वर्ष 2023 में दिए जाने वाले अवकाशों की तालिका संलग्न कर प्रेषित की गई है। तालिका में ग्रीष्मावकाश 20 मई से प्रारंभ होकर 15 जून तक निर्धारित है। 

महानिदेशक स्कूल शिक्षा कार्यालय के पत्र प्री प्राइमरी शिक्षा स्कूल रेडीनेस/13014/ 2022- 23 दिनांक 22 मार्च 2023 द्वारा कक्षा 1 में स्कूल रेडीनेस में गतिविधि कैलेंडर आधारित कक्षा शिक्षण संस्थान के संबंध में दिए गए निर्देशों के बिंदु संख्या 01 में 12 सप्ताह स्कूल रेडीनेस गतिविधि कार्यक्रम के संचालन की समय सारणी में 15 मई से 15 जून तक ग्रीष्मावकाश निर्धारित किया गया है।

उन्होंने जिला बेसिक शिक्षा अधिकारियों को निर्देश देते हुए कहा है कि उत्तर प्रदेश बेसिक शिक्षा परिषद के नियंत्रण में संचालित विद्यालय तथा मान्यता प्राप्त बेसिक विद्यालय में ग्रीष्मावकाश 20 मई से प्रारंभ होकर 15 जून तक रहेगा।

'हाइब्रिड मोड’ में सुनवाई करेगी अवकाशकालीन पीठ

'हाइब्रिड मोड’ में सुनवाई करेगी अवकाशकालीन पीठ

अकांशु उपाध्याय 

नई दिल्ली। प्रधान न्यायाधीश (सीजेआई) डी. वाई. चंद्रचूड़ ने मंगलवार को कहा कि शीर्ष अदालत की अवकाशकालीन पीठ ‘हाइब्रिड मोड' (प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष दोनों तरीके) में सुनवाई करेगी, ताकि वकील विभिन्न स्थानों से पेश हो सकें। न्यायमूर्ति चंद्रचूड़ ने कहा कि अवकाशकालीन पीठ नए मामलों की भी सुनवाई करेगी। पीठ में न्यायमूर्ति पी एस नरसिम्हा और न्यायमूर्ति जे बी पारदीवाला भी शामिल थे।

शीर्ष अदालत में 22 मई से दो जुलाई तक ग्रीष्मावकाश है और केवल अवकाशकालीन पीठें अत्यावश्यक मामलों पर सुनवाई करेंगी। सीजेआई ने मंगलवार को सुनवाई की शुरुआत में कहा कि अवकाशकालीन पीठ नई याचिकाओं को विचारार्थ स्वीकार करने से संबंधित सुनवाई ‘हाइब्रिड मोड’ में करेगी, जहां वकील व्यक्तिगत रूप से और वीडियो-कॉन्फ्रेंस के माध्यम से सुनवाई में हिस्सा ले सकते हैं।

पीठ ने कहा, ‘‘अगर कोई कहीं और जाना चाहता है और वहां से सुनवाई में हिस्सा लेना चाहता है, तो आपका स्वागत है... केवल एक शर्त है कि वकील ठीक से कपड़े हों।’’ सीजेआई ने कहा कि 300 से अधिक नये मामलों, जिन्हें सुनवाई के लिए नहीं लिया जा सका है, उन्हें अवकाशकालीन पीठ के समक्ष सूचीबद्ध किया जाएगा।

'शुगर फ्री स्वीटनर्स' के इस्तेमाल के खिलाफ आगाह 

'शुगर फ्री स्वीटनर्स' के इस्तेमाल के खिलाफ आगाह 

अखिलेश पांडेय 

वाशिंगटन डीसी। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने शरीर के वजन को नियंत्रित करने या गैर-संचारी रोगों के खतरे को कम करने के लिए शुगर फ्री स्वीटनर्स (मिठास पैदा करने वाले पदार्थ) के इस्तेमाल के खिलाफ आगाह किया है। यह सुझाव उपलब्ध सबूतों की समीक्षा के नतीजों पर आधारित है जिससे पता चलता है कि शुगर फ्री स्वीटनर्स (एनएसएस) के इस्तेमाल से वयस्कों या बच्चों के शरीर का वजन कम करने में लंबे समय में कोई फायदा नहीं मिलता।

डब्ल्यूएचओ ने कहा कि समीक्षा के नतीजों से यह भी पता चलता है कि लंबे वक्त तक एनएसएस के इस्तेमाल से संभावित रूप से अवांछित असर हो सकते हैं जैसे कि टाइप 2 मधुमेह, दिल की बीमारियों का खतरा और वयस्कों में मृत्यु दर बढ़ सकती है। डब्ल्यूएचओ के पोषण और खाद्य सुरक्षा के निदेशक फ्रांसिस्को ब्रांका ने कहा, किसी भोजन या पेय पदार्थ में घुली किसी भी प्रकार की मिठास के स्थान पर एनएसएस का इस्तेमाल करने से लंबे वक्त तक वजन कम करने में मदद नहीं मिलती। लोगों को अन्य विकल्पों पर विचार करने की जरूरत है।

उदाहरण के लिए ऐसे पदार्थ खाना जिनमें प्राकृतिक रूप से मिठास होती है जैसे कि फल या बिना मिठास वाला भोजन और पेय पदार्थ। ब्रांका ने एक बयान में कहा, एनएसएस आहार के लिए आवश्यक तत्व नहीं है और इनका पोषण की दृष्टि से भी कोई महत्व नहीं है। लोगों को अपने स्वास्थ्य में सुधार लाने के लिए जीवन में शुरुआत से ही आहार में मिठास की मात्रा कम रखनी चाहिए।

शाह पर टिप्पणी करने के मामलें में फैसला सुरक्षित

शाह पर टिप्पणी करने के मामलें में फैसला सुरक्षित

इकबाल अंसारी 

रांची। भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पर कथित टिप्पणी करने के मामलें में कांग्रेस के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी की याचिका पर झारखंड उच्च न्यायालय में मंगलवार को सुनवाई हुई। दोनों पक्षों की ओर से बहस पूरी होने के बाद न्यायालय ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है। इस केस के सूचक नवीन झा हैं और इससे पहले रांची सिविल कोर्ट के जारी नोटिस पर उच्च न्यायालय ने रोक लगा दिया था।

पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी की ओर से अधिवक्ता पीयूष चित्रेश और अधिवक्ता दीपांकर राय ने पक्ष रखा। झारखंड उच्च न्यायालय के न्यायाधीश जस्टिस अम्बुजनाथ की अदालत में इस मामले की सुनवाई हुई। वहीं, इस मामले के याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता विनोद साहू ने पक्ष रखा। श्री गांधी ने निचली अदालत द्वारा उनके खिलाफ लिए गए संज्ञान को रद्द करने को लेकर उच्च न्यायालय पहुंचे हैं।

फिल्म 'द केरल स्टोरी' पर प्रतिबंध नहीं, नकारा

फिल्म 'द केरल स्टोरी' पर प्रतिबंध नहीं, नकारा

अकांशु उपाध्याय 

नई दिल्ली। उच्चतम न्यायालय के समक्ष तमिलनाडु पुलिस ने विवादास्पद फिल्म 'द केरल स्टोरी' पर 'अप्रत्यक्ष प्रतिबंध' लगाने के आरोपों को खारिज करते हुए मंगलवार को कहा कि ऐसा लगता है कि इसे दर्शकों ने ही नकार दिया है। तमिलनाडु सरकार ने शीर्ष अदालत को बताया है कि मुस्लिम संगठनों के विरोध बावजूद तमिलनाडु में 19 मल्टीप्लेक्सों में रिलीज हुई, लेकिन दर्शकों ने उसे नहीं चाहा।

इस वजह से मल्टीप्लेक्स मालिकों द्वारा फिल्म को हटा दिया गया था। पुलिस ने दलील देते हुए कहा, "ऐसा प्रतीत होता है कि मल्टीप्लेक्स मालिकों ने फिल्म को मिल रही आलोचना, जानेमाने अभिनेताओं की कमी, अभिनेताओं के खराब अभिनय और दर्शकों की बेरुखी के कारण सात मई 2023 से फिल्म का प्रदर्शन बंद करने का निर्णय लिया था। राज्य के अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (कानून-व्यवस्था) ने एक लिखित जवाब में कहा कि हिंदी में फिल्म को पांच मई को राज्य भर के 19 मल्टीप्लेक्सों में प्रदर्शित किया गया था। हलफनामे में कहा गया, 'यह दोहराया जाता है कि यह निर्णय थिएटर मालिकों द्वारा खुद लिया गया था और राज्य की इसमें कोई भूमिका नहीं थी।"

पुलिस ने कहा कि फिल्म पर 'अप्रत्यक्ष प्रतिबंध' के आरोप के समर्थन में याचिकाकर्ता ने एक भी दस्तावेज या आदेश या सबूत पेश नहीं किया है, जिससे यह साबित हो सके कि तमिलनाडु ने फिल्म के प्रदर्शन पर प्रतिबंध लगाने के लिए कदम उठाए हैं। शीर्ष अदालत के समक्ष पेश हलफनामे में पुलिस ने कहा है कि वास्तव में पुलिस ने प्रदर्शनकारियों के खिलाफ उचित कानूनी कार्रवाई की और नौ मामले दर्ज किए।

शीर्ष अदालत ने फिल्म निर्माताओं- सनशाइन पिक्चर्स प्राइवेट लिमिटेड और निर्माता विपुल अमृतलाल शाह की एक रिट याचिका पर 12 मई को सुनवाई करते हुए पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु सरकारों से जवाब मांगा था कि देशभर में सुचारू रूप से चलने वाली फिल्म वहां (पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु) क्यों नहीं चल सकती है। जवाबी हलफनामे में पुलिस ने आरोप लगाया कि याचिकाकर्ताओं ने इस तथ्य के बावजूद कि राज्य ऐसी स्थिति बनाने और बनाए रखने के लिए अपने सकारात्मक दायित्व का निर्वहन कर रहा, "प्रचार पाने के प्रयास में दुर्भावनापूर्ण इरादों से प्रेरित झूठे आरोप लगाए।" पुलिस ने अपने जवाब में कहा, "मल्टीप्लेक्स/थिएटर मालिकों ने खुद ही फिल्म का प्रदर्शन बंद कर दिया है।

ऐसे में सरकार सिनेमाघरों को सुरक्षा प्रदान करने के अलावा उक्त फिल्म के लिए दर्शकों की संख्या बढ़ाने के लिए कुछ नहीं कर सकती है।" पुलिस ने यह भी कहा कि पांच मई 2023 को पुलिस महानिदेशक / पुलिस बल के प्रमुख, तमिलनाडु ने राज्य के सभी पुलिस आयुक्तों और जिला पुलिस अधीक्षकों को ( जहां फिल्म की स्क्रीनिंग की गई थी।) पर्याप्त सुरक्षा प्रदान करने के निर्देश जारी किए गए थे।पुलिस ने दावा किया, "राज्य ने फिल्म को प्रदर्शित करने के लिए सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम किए हैं। थिएटर मालिक और दर्शको की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए 25 डीएसपी सहित 965 से अधिक पुलिस कर्मियों को जगह-जगह तैनात किया गया था।"

अपने हलफनामे में पुलिस ने कहा कि पांच मई 2023 को विभिन्न मुस्लिम संगठनों द्वारा 19 जगहों पर प्रदर्शन, आंदोलन और धरने दिये गये थे। छह मई 2023 को चेन्नई और सात मई को कोयम्बटूर में कई जगहों पर प्रदर्शन हुए। प्रदर्शनकारियों के खिलाफ चेन्नई में पांच और कोयम्बटूर में चार मामले दर्ज किए गए थे। 

बंगाल: सरकार की उदासीनता, लोग झेल रहे हैं पीड़ा

बंगाल: सरकार की उदासीनता, लोग झेल रहे हैं पीड़ा

मिनाक्षी लोढी 

कोलकाता। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने बंगाल के लोगों को अपनी पूंजी बताते हुए कहा कि केंद्र सरकार की उदासीनता के कारण राज्य के लोग अंतहीन पीड़ा झेल रहे हैं। सुश्री बनर्जी ने एक प्रेस वार्ता में यहां सोमवार को कहा था, "मैंने हमेशा उनकी भलाई को प्राथमिकता दी है और समर्पण के साथ उनकी जरूरतों को पूरा किया है।

मैं भविष्य में कड़ी मेहनत को बरकरार रखने का इरादा रखती हूं।" उन्होंने जनता से वादा किया कि वह हमेशा यह सुनिश्चित करेंगी कि राज्य का कोई व्यक्ति समग्र जीवन जीने से वंचित न रहे। उन्होंने कहा कि उनके राज्य में हर एक व्यक्ति समृद्धि को प्राप्त करने का हकदार है, और वह यह सुनिश्चित करेंगी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य के लोग केंद्र सरकार की उदासीनता के कारण अंतहीन पीड़ा झेल रहे हैं। उन्होंने सभी को आश्वासन दिया कि इस तरह के अत्याचार के खिलाफ उनकी लड़ाई जीत तक जारी रहेगी। सुश्री बनर्जी ने कहा कि वह नीति आयोग की बैठक में भाग लेने के लिए 27 मई को नयी दिल्ली जा रही हैं, जहां वह राज्य से संबंधित मुद्दों पर चर्चा करेंगी।

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प्राधिकृत प्रकाशन विवरण

प्राधिकृत प्रकाशन विवरण


1. अंक-215, (वर्ष-06)

2. बुधवार, मई 17, 2023

3. शक-1944, ज्येष्ठ, कृष्ण-पक्ष, तिथि-त्रयोदशी, विक्रमी सवंत-2079‌‌।

4. सूर्योदय प्रातः 06:40, सूर्यास्त: 06:10। 

5. न्‍यूनतम तापमान- 24 डी.सै., अधिकतम- 41+ डी.सै.।

6. समाचार-पत्र में प्रकाशित समाचारों से संपादक का सहमत होना आवश्यक नहीं है। सभी विवादों का न्‍याय क्षेत्र, गाजियाबाद न्यायालय होगा। सभी पद अवैतनिक है। 

7.स्वामी, मुद्रक, प्रकाशक, संपादक राधेश्याम व शिवांशु  (विशेष संपादक) श्रीराम व सरस्वती (सहायक संपादक) संरक्षण-अखिलेश पांडेय, ओमवीर सिंह, वीरसैन पंवार, योगेश चौधरी आदि के द्वारा (डिजीटल सस्‍ंकरण) प्रकाशित। प्रकाशित समाचार, विज्ञापन एवं लेखोंं से संपादक का सहमत होना आवश्यक नहीं हैं। पीआरबी एक्ट के अंतर्गत उत्तरदायी।

8. संपर्क व व्यवसायिक कार्यालय- चैंबर नं. 27, प्रथम तल, रामेश्वर पार्क, लोनी, गाजियाबाद उ.प्र.-201102। 

9. पंजीकृत कार्यालयः 263, सरस्वती विहार लोनी, गाजियाबाद उ.प्र.-201102

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(सर्वाधिकार सुरक्षित)

स्वास्थ्य के लिए बेहद फायदेमंद है 'गन्ने का रस'

स्वास्थ्य के लिए बेहद फायदेमंद है 'गन्ने का रस'  सरस्वती उपाध्याय  चिलचिलाती गर्मी के मौसम में सभी को ठंडा रहने के लिए शरीर को ठंडक ...