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शुक्रवार, 21 जनवरी 2022

भारतीय किसानों को गेहूं पर सब्सिडी, आपत्ति जताईं

भारतीय किसानों को गेहूं पर सब्सिडी, आपत्ति जताईं    
अखिलेश पांडेय         नई दिल्ली/ वाशिंगटन डीसी। भारत में किसानों को गेहूं पर सब्सिडी के मामलें को लेकर अमेरिका ने गहरी आपत्ति जताई है। अमेरिका के शीर्ष सासंदों ने जो बाइडन प्रशासन से आग्रह किया है कि विश्व व्यापार संगठन  में भारत के खिलाफ शिकायत की प्रक्रिया शुरू कराएं। भारत सरकार किसानों को गेहूं के उत्पादन मूल्य के आधे से ज्यादा सब्सिडी देती है जिस पर अमेरिकी सांसदों को आपत्ति है और इस मुद्दे को विश्व व्यापार संगठन में उठाने की मांग कर रहे हैं। अमेरिका कांग्रेस सदस्यों ने इसे लेकर जो बाइडन प्रशासन को एक पत्र लिखा है। अमेरिका का व्हीट एसोसिएट्स हमेशा से इस मसले पर भारत के खिलाफ कार्रवाई की मांग करता आया है और अब सांसदों के इस पत्र का उसने स्वागत किया है।

अमेरिकी कांग्रेस के 28 सांसदों ने अपने पत्र में लिखा कि भारत की सरकार अपने किसानों को अधिक सब्सिडी दे रही है जिसका नुकसान अमेरिका के उत्पादकों को हो रहा है। सांसदों का कहना है कि भारत की नीति से अंतर्राष्ट्रीय व्यापार नीति बर्बाद हो रही है।

'भ्रष्टाचार' के विरोध में चैंपियन की जिंदगी पर खतरा    

सुनील श्रीवास्तव        तेहरान। ईरान में जारी आर्थिक भ्रष्‍टाचार का विरोध करने पर चैंपियन बॉक्‍सर की जिंदगी पर संकट मंडराने लगा है। इस बॉक्सिंग चैंपियन का नाम मोहम्‍मद जवाद (26) है। नवंबर 2019 में विरोध प्रदर्शनों के लिए मौत की सजा दी जा सकती है। इससे पहले सितंबर 2020 में एक पहलवान नाविद अफकारी को फांसी की सजा दे दी गई थी। एक खबर के मुताबिक नाविद को बचाने के लिए अभियान चलाने वाली पत्रकार और मानवाधिकार कार्यकर्ता मसीह अलीनेजाद ने मोहम्‍मद जवाद को मिली सजा के बारे में दुनिया को बताया है। मसीह ने ट्वीट करके कहा, 'ईरान में एक और एथलीट को नवंबर 2019 में प्रदर्शन करने के लिए‍ मौत की सजा का ऐलान किया गया है। मोहम्‍मद जवाद एक बॉक्सिंग चैंपियन हैं। उन्‍हें धरती पर भ्रष्‍टाचार फैलाने के आरोप में मौत की सजा दी गई है।'

मसीह ने दुनिया से अपील की, 'हम ईरानी पहलवान नाविद अफकारी को नहीं बचा पाए थे। दुनियाभर के एथलीट इस बार हमारी मदद कर सकते हैं। इस बार मोहम्‍मद जावेद वफाइई ईरान में देशव्‍यापी प्रदर्शनों में हिस्‍सा लेने के आरोप में मौत की सजा का सामना कर रहे हैं।' नाविद अफकारी के बाद ईरान में दो और एथलीटों को फांसी की सजा दी गई थी। बॉक्‍सर अली मुतैरी को जेल के अंदर बहुत ज्‍यादा प्रताड़‍ित किया गया था। इसके अलावा चैंपियन रेसलर मेहदी अली हुसैनी को भी पिछले साल फांसी की सजा दी गई थी।


मैरीलैंड के रेडियोलॉजिस्ट ने एक्स-रे का खुलासा किया

अखिलेश पांडेय        अनापोलिस। मैरीलैंड के एक रेडियोलॉजिस्ट ने चौंकाने वाले एक्स-रे का खुलासा किया। कोरोना मरीजों की छाती के इन एक्स-रे में वैक्सीन लगा चुके और बिना वैक्सीन वाले कोविड पॉजिटिव रोगियों में अंतर साफ दिख रहा है। एक्स-रे की तस्वीरें बताती हैं कि कोराना वैक्सीन आपके शरीर की रक्षा करने में कितना बड़ा कारगर है। डॉ ओमर अवान ने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि एक्स-रे की ये तस्वीरें लोगों को कोरोना वैक्सीन लेने के लिए प्रेरित करेगी।

यूनिवर्सिटी ऑफ मैरीलैंड स्कूल ऑफ मेडिसिन के डायग्नोस्टिक विभाग में एसोसिएट वाइस चेयरमैन डॉ ओमर अवान ने बताया कि उन्होंने वैक्सीन नहीं लगाने वाले और वैक्सीन के दोनों डोज ले चुके कोरोना मरीजों की छाती का एक्स-रे निकाला। उन्होंने कहा कि कोरोना वैक्सीन ले चुके मरीज के एक्स-रे में फेफड़े का अधिकांश भाग काला है। यह एक अच्छी बात है। क्योंकि काला रंग हवा को प्रदर्शित करता है। इससे साफ है कि वैक्सीन लेने वाले मरीज को कोरोना संक्रमण कम प्रभावित कर पाया है।
डॉ. ओमर अवान ने ये भी कहा कि कोरोना वैक्सीन नहीं लेने वाले मरीज में संक्रमण की मात्रा ज्यादा है जो एक्स-रे स्पष्ट हो रहा है। उन्होंने कहा कि वैक्सीन ले चुके मरीज के लक्षण किसी बिना टीका वाले मरीज की तुलना में हल्के होते हैं। अक्सर जिन लोगों का टीकाकरण नहीं होता है, उनमें सांस की पूरी तरह से कमी होती है। उन्हें ऑक्सीजन थेरेपी की आवश्यकता हो सकती है। उन्हें आईसीयू में जाने की जरूरत पड़ सकती है।
बीते साल अक्टूबर में फीनिक्स के डियर वैली मेडिकल सेंटर के एक डॉक्टर ने इसी तरह के स्कैन रिपोर्ट शेयर किए थे। उस रिपोर्ट में भी कोरोना रोगियों के फेफड़ों पर वायरस के प्रभाव को तुलनात्मक रूप से दिखाया गया था। डियर वैली मेडिकल सेंटर के चीफ ऑफ स्टाफ डॉ सैम दुर्रानी ने कहा था कि केवल वही लोग वास्तव में बीमार हो रहे हैं, जिनका टीकाकरण नहीं हुआ है। डॉ दुर्रानी ने बताया था कि कोविड के टीकाकरण वाले रोगियों के स्कैन से अधिक हवा का प्रवाह होता है, जिसमें फेफड़ों का बड़ा हिस्सा काले रंग का होता है, जिसका अर्थ है कि कोई नुकसान नहीं है। इसके विपरीत, एक बिना टीकाकरण वाले व्यक्ति के स्कैन की छवि से पता चलता है कि फेफड़े पूरे शरीर में ऑक्सीजन के प्रवाह को सीमित कर रहे हैं।

गुरुवार, 20 जनवरी 2022

कोरोना संक्रमितों की संख्या बढ़ेगी: डबल्यूएचओ

कोरोना संक्रमितों की संख्या बढ़ेगी: डबल्यूएचओ    

अखिलेश पांडेय            जिनेवा। दुनियाभर में कोरोना के नए ओमिक्रॉन वैरिएंट से तबाही जारी है। इस बीच विश्व स्वास्थ्य संगठन ने चेताया है कि जिस तेजी से संक्रमण फैल रहा है, उससे आने वाले हफ्तों में मामलों, अस्पताल में भर्ती होने वाले मरीजों और मौतों की संख्या बढ़ सकती है। अपनी वीकली रिपोर्ट में डब्ल्यूएचओ ने बताया कि दुनियाभर में कोरोना के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। डब्ल्यूएचओ ने कहा कि ओमिक्रॉन वैरिएंट तेजी से फैल रहा है और ऐसे में बेकाबू होती भीड़ और खतरा बढ़ा रही है। फिर शुरू किए निगरानी केंद्र डबल्यूएचओ का कहना है कि शुरुआती स्टडी में सामने आ रहा है कि डेल्टा की तुलना में ओमिक्रॉन कम गंभीर है, लेकिन इसके बावजूद ये तेजी से फैल रहा है। इससे अस्पतालों में मरीजों की संख्या बढ़ रही है। हालांकि, डबल्यूएचओ ने ये भी कहा कि ओमिक्रॉन के चलते नवंबर और दिसंबर में जिन देशों में संक्रमण बढ़ा था, वहां अब मामलों में कमी आने लगी है। डब्ल्यूएचओ के मुताबिक, 10 से 16 जनवरी के बीच दुनियाभर में कोरोना के 1.8 करोड़ नए मामले सामने आए हैं, जो पिछले हफ्ते की तुलना में 20 फीसदी ज्यादा है। वहीं, पिछले हफ्ते 45 हजार मौतें हुईं हैं। 

उसके बाद 20.12 लाख मामले फ्रांस में और 15.94 लाख मामले भारत में सामने आए हैं। भारत में एक हफ्ते में नए मामले 150 फीसदी बढ़ गए हैं। गरीब देशों में 9% आबादी को वैक्सीन की एक ही डोज विश्व स्वास्थ्य संगठन ने ये भी कहा कि कोरोना के तेजी से बढ़ते मामलों के बीच वैक्सीन की असमानता अब भी जारी है। 29 दिसंबर तक दुनियाभर में 8.6 अरब डोज लगाई जा चुकी थीं। अभी तक दुनिया की 57 फीसदी आबादी को पहली और 47 फीसदी को दोनों डोज लग चुकी है। हालांकि, गरीब देशों की हालत अब भी खराब है। गरीब देशों की महज 9 फीसदी आबादी को ही पहली डोज लगी है, जबकि अमीर देशों की 66 फीसदी आबादी को एक डोज लग चुकी है।

दुनिया का चक्कर लगाने वाली महिला बनेंगीं जारा

सुनील श्रीवास्तव        लंदन। बेल्जियन-ब्रिटिश पायलट जारा रदरफोर्ड दुनिया का चक्कर लगाने वाली सबसे कम उम्र की महिला बनने से एक दिन दूर हैं। 19 वर्षीय जारा अपने अंतिम पड़ाव में बुधवार को जर्मनी में लैंड कीं। रिकॉर्ड बनाने से एक दिन दूर जारा ने कहा कि वो पांच महीने बाद अपने घर लौटने की उम्मीद कर रही हैं। जारा रदरफोर्ड गुरुवार को बेल्जियम के कॉर्ट्रिज्क-वेवेलगेम हवाई अड्डे में उतरने वाली हैं, जहां से उन्होंने 18 अगस्त को अपनी 51,000 किमी की यात्रा शुरू की थी। जारा की यात्रा पांच महाद्वीपों और अमेरिका, रूस और कोलंबिया समेत 52 देशों तक फैली थी।

अमेरिकी एविएटर शाएस्टा वाइस 30 वर्ष की थीं, जब उन्होंने 2017 में सबसे कम उम्र की महिला के रूप में ये रिकॉर्ड बनाया। खुलासा लड़कियों को प्रोत्साहित करने की उम्मीद जारा रदरफोर्ड ने जर्मनी में लैंड करने के बाद मीडिया से बात करते हुए कहा, "बड़े होकर मैंने कई अन्य महिला पायलटों को नहीं देखा। मैंने हमेशा सोचा था कि यह वास्तव में हतोत्साहित करने वाला है। उन्होंने कहा कि मैं एविएशन में जाने के लिए ज्यादा से ज्यादा लड़कियों को प्रोत्साहित करने की उम्मीद कर रही हूं, ताकि अगर कोई लड़की एविएशन में जाना चाहती है, तो वो मुझे देखकर सोचेगी कि वो अकेली नहीं है। जारा रदरफोर्ड को अपनी ये यात्रा सोमवार को खत्म करनी थी, लेकिन खराब मौसम के चलते देरी हुई। रदरफोर्ड ने उड़ान के दौरान कैलिफोर्निया के जंगल में आग को दूर से देखा। साथ ही उन्होंने यात्रा के दौरान रूस की कड़ाके की ठंड से निपटीं और उत्तर कोरियाई हवाई क्षेत्र से बचीं। उन्होंने कहा कि वो घर आने के लिए वास्तव में उत्साहित हैं।



बुधवार, 19 जनवरी 2022

चीनी नागरिकों को अरबों रुपये का मुआवजा: पीएम

चीनी नागरिकों को अरबों रुपये का मुआवजा: पीएम    
सुनील श्रीवास्तव         
इस्‍लामाबाद/ बीजिंग। पाकिस्‍तान के प्रधानमंत्री इमरान खान चीन की धमकी से डर गए हैं। इमरान खान अब दासू पनबिजली परियोजना पर हुए आतंकी हमले में हताहत हुए चीनी नागरिकों को अरबों रुपये का मुआवजा देने जा रहे हैं। पाकिस्‍तान सरकार 36 चीनी नागरिकों को मुआवजा देगी, जिसमें से 10 की आत्‍मघाती हमले में मौत हो गई थी। वहीं, 26 अन्‍य घायल हो गए थे। कंगाली की हालत से गुजर रहे पाकिस्‍तान के मुआवजा देने में आनाकानी करने से चीन ने काम बंद करने की धमकी दी थी। एक्‍सप्रेस ट्रिब्‍यून की रिपोर्ट के मुताबिक, इस मुआवजे को लेकर चीन और पाकिस्‍तान के बीच राजनयिक तनाव पैदा हो गया था। इमरान सरकार 4 तरीके का मुआवजा देने जा रही है।
जिसमें 81 करोड़ रुपये से लेकर 3.6 अरब रुपये तक का मुआवजा शामिल है। इस पूरे मामले में महत्‍वपूर्ण बात यह है कि पाकिस्‍तान कानूनी रूप से या समझौते की शर्त के रूप में मुआवजा देने के लिए बाध्‍य नहीं था। इसके बाद भी इमरान खान सरकार चीनी धमकी के आगे झुक गई और अब अरबों रुपये मुआवजा देगी। डासू प्रॉजेक्‍ट के लिए विश्‍व बैंक पैसा दे रहा है और यह चाइना पाकिस्‍तान इकनॉमिक कॉरिडोर में भी नहीं आता है। इस हमले में 4 पाकिस्‍तानी नागरिक भी मारे गए थे। 
इमरान खान सरकार ने अंतरराष्‍ट्रीय बेइज्‍जती से बचने के लिए पहले इस घटना को गैस लीकेज करार दिया था, जिससे चीन भड़क गया था। उसने सीपीईसी की बैठक को रद्द कर दिया था। चीनी ठेकेदार ने दासू प्रॉजेक्‍ट पर काम भी बंद कर दिया था। इसके बाद इमरान सरकार ने माना कि यह आतंकी हमला है। चीनी कंपनी ने मुआवजे के रूप में 3.7 करोड़ डॉलर की भारी भरकम राशि की मांग की थी। बता दें कि चीन की सीपीईसी परियोजना लगातार पाकिस्‍तान में झटके खा रही है। एक तरफ जहां काम की रफ्तार धीमी हुई है, वहीं नए प्रॉजेक्‍ट की मंजूरी भी दोनों तरफ से ठप हो गई है।

विमानन प्रौद्योगिकियों के बीच हस्तक्षेप, उड़ाने रद्द की
सुनील श्रीवास्तव          नई दिल्ली/ वाशिंगटन डीसी। एयर इंडिया समेत कई अंतरराष्ट्रीय विमान कंपनियों ने 5जी मोबाइल फोन सेवा और जटिल विमानन प्रौद्योगिकियों के बीच हस्तक्षेप पर अनिश्चितता को लेकर बुधवार से अमेरिका के लिए उड़ानों में कटौती कर दी है। एयर इंडिया ने कहा कि दिल्ली से अमेरिका के सैन फ्रांसिस्को, शिकागो और जेएफके तथा मुंबई से नेवार्क के बीच अपनी उड़ानें रद्द कर दी गयी है।एयर इंडिया ने एक ट्वीट में कहा कि ,अमेरिका में 5G संचार की तैनाती के कारण हम 19 जनवरी से दिल्ली से अमेरिका के सैन फ्रांसिस्को, शिकागो और जेएफके तथा मुंबई से नेवार्क के बीच अपनी उड़ानें संचालित करने में सक्षम नहीं होंगे। सीएनएन की रिपोर्ट के मुताबिक अमीरात, एयर इंडिया, ऑल निप्पॉन एयरवेज और जापान एयरलाइंस ने अमेरिका के लिए उड़ानों में कटौती की घोषणा की है।

अमीरात ने नौ अमेरिकी हवाई अड्डों बोस्टन, शिकागो ओ’हारे, डलास फोर्ट वर्थ, ह्यूस्टन में जॉर्ज बुश इंटरकांटिनेंटल, मियामी, नेवार्क, ऑरलैंडो, सैन फ्रांसिस्को और सिएटल के लिए अपनी उड़ानें रद्द किये जाने की घोषणा की है। फेडरल एविएशन एडमिनिस्ट्रेशन के मुताबिक हवाई अड्डों के पास 5जी सेल्यूलर एंटिना कुछ विमान उपकरणों से रीडिंग को अवरुद्ध कर सकता है। जिससे पायलटों को यह पता चलता है कि वे जमीन से कितनी दूर हैं।


मंगलवार, 18 जनवरी 2022

स्वीडन: शोधकर्ताओं ने 'जीन' का पता लगाया

स्वीडन: शोधकर्ताओं ने 'जीन' का पता लगाया  
अखिलेश पांंडेय            स्टॉकहोम। लंबे समय से लोग कोरोना के कहर का सामना कर रहे हैं और अभी भी इससे किसी प्रकार की राहत के कोई आसार नजर नहीं आ रहे हैं। इसी बीच स्वीडन के कुछ शोधकर्ताओं ने एक खोज में बड़ा दावा किया है। शोधकर्ताओं ने एक खास जीन वैरिएंट का पता लगाया है। जो गंभीर कोरोना संक्रमण से बचा सकता है। स्वीडन में करोलिंस्का इंस्टिट्यूट के शोधकर्ताओं के नेतृत्व में एक अंतर्राष्ट्रीय टीम ने विभिन्न मूल के लोगों का अध्ययन करके इस वैरिएंट का पता लगाया है। इस अध्ययन को 'नेचर जर्नल' नाम की पत्रिका में प्रकाशित किया गया है। जिसमें बताया गया है कि जीन कोरोना संक्रमण के असर को प्रभावित कर सकते हैं। इससे पता लगाया जा सकता है कि कोई व्यक्ति कोरोना संक्रमण से कितना प्रभावित हुआ है।

पूर्व में हुए अध्ययनों में शोधकर्ताओं ने पाया कि यूरोपियन मूल के लोगों में डीएनए का विशेष अंश मौजूद था। डीएनए के विशेष अंश की मौजूदगी वाले लोगों में कोविड के गंभीर संक्रमण का खतरा 20 प्रतिशत कम होता है। वैज्ञानिकों ने इस जीन वैरिएंट की पहचान करने के लिए उन लोगों को स्टडी में शामिल किया, जिनमें ये विशेष डीएनए मौजूद था। इनमें अफ्रीकी मूल के 2,787 तथा छह विभिन्न समूहों के 1,30,997 ऐसे लोग शामिल थे, जिन्हें कोरोना संक्रमण के कारण अस्पताल में भर्ती कराया गया था।
अध्ययन की मुख्य लेखिका व वीए बोस्टन हेल्थकेयर सिस्टम की शोधकर्ता जेनिफर हफमैन ने कहा कि 'अफ्रीकी मूल के लोगों में मौजूद समान सुरक्षा ने हमें डीएनए के विशेष जीन वैरिएंट (आरएस10774671-जी) की पहचान के लिए प्रेरित किया, जो कोरोना के खिलाफ सुरक्षा प्रदान करता है।  शोधकर्ताओं ने कहा कि अफ्रीकी मूल के 80 फीसदी लोगों में यह प्रोटेक्टिव वैरिएंट पाया गया।
शोधकर्ताओं के मुताबिक, प्रोटेक्टिव जीन वैरिएंट (rs10774671-G), जीन ओएएस1 द्वारा एन्कोड किए गए प्रोटीन की लंबाई को निर्धारित करता है। पहले के कुछ अध्ययनों से यह भी पता चला है कि प्रोटीन का यह लंबा वैरिएंट सर्ष-कोव-2, वायरस जो कोविड-19 का कारण बनता है, को तोड़ने में अधिक प्रभावी है। इसके अलावा, कनाडा में मैकगिल विश्वविद्यालय के प्रोफेसर ब्रेंट रिचर्ड्स ने कहा, "हम जेनेटिक रिस्क फैक्टर्स को अच्छे से समझने लगे हैं जो कोरोना के खिलाफ नई दवाइयां बनाने में मदद कर सकते हैं।

चीनी ड्रैगन ने अवैध पुल का निर्माण कार्य तेज किया    

सुनील श्रीवास्तव          बीजिंग। चीनी ड्रैगन ने भारत पर सामरिक बढ़त हासिल करने के लिए पूर्वी लद्दाख के पैंगोंग झील पर बनाए जा रहे अवैध पुल का निर्माण कार्य काफी तेज कर दिया है। ताजा सैटलाइट तस्‍वीरों से खुलासा हुआ है कि यह चीनी पुल अब 400 मीटर लंबा बन चुका है। यह पुल करीब 8 मीटर चौड़ा है और चीनी सैन्‍य ठिकाने के दक्षिण में स्थित है। विशेषज्ञों के मुताबिक चीन जब यह पुल बना लेगा तब इस इलाके में उसे काफी सामरिक बढ़त हासिल हो जाएगी। 

एनडीटीवी की रिपोर्ट के मुताबिक गत 16 जनवरी की सैटलाइट तस्‍वीर में इशारा मिलता है कि चीनी निर्माण कर्मचारी भारी क्रेन का इस्‍तेमाल पिलर को जोड़ने के लिए कर रहे हैं। जिस गति से यह पुल बन रहा है, माना जा रहा है कि आने वाले कुछ महीने में इसका निर्माण कार्य पूरा हो जाएगा। हालांकि अभी रुटोग तक सड़क बनाने में अभी लंबा समय लगेगा। इससे पहले खुलासा हुआ था कि चीन पैंगोंग झील पर पुल का निर्माण कर रहा है। इससे चीनी सेना पैंगोंग झील के दूसरी तरफ बहुत तेजी से अपने सैनिकों को भेज सकेगी।इससे पुल के बनने से अब चीनी सैनिकों को रुटोग अड्डे तक पहुंचने के लिए 200 किमी तक पैंगोंग झील का चक्‍कर नहीं लगाना पड़ेगा। द इंटेल लैब में शोधकर्ता दमिएन सयमोन ने कहा, 'भारी मशीनों (क्रेन) को पुल का निर्माण करने के लिए लगाया गया है। भीषण बर्फबारी और खराब मौसम के बाद भी इस पुल का निर्माण कार्य जारी है। इसके अलावा पुल तक जाने के लिए एक नया रास्‍ता उत्‍तरी किनारे पर खुर्नाक फोर्ट के पास दिखाई दिया है जो एक चीनी सड़क से जोड़ेगा।'

चीन जिस इलाके में यह पुल बना रहा है, उस पर साल 1958 से ड्रैगन का कब्‍जा है। भारत का मानना है कि यह उसके वास्‍तविक नियंत्रण रेखा के अंदर आता है। भारतीय विदेश मंत्रालय ने कहा कि चीन जिस जगह पर यह पुल बना रहा है, वह साल 1960 से उसके अवैध कब्‍जे में है। जैसाकि आप भलीभांति जानते हैं कि भारत ने इस अवैध कब्‍जे को कभी स्‍वीकार नहीं किया है। चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता वांग वेनबिन ने पिछले दिनों पैंगोंग सो पुल का प्रत्यक्ष उल्लेख किए बगैर पत्रकारों से कहा कि ‘आपने जो बात कही, मुझे उसकी जानकारी नहीं है।’वांग ने कहा, ‘मैं यह बताना चाहता हूं कि चीन की ओर से अपनी सीमा में किया जा रहा बुनियादी ढांचे का निर्माण पूरी तरह से उसकी सम्प्रभुता में आता है और उसका लक्ष्य चीन की क्षेत्रीय सम्प्रभुता की रक्षा करना और चीन-भारत सीमा पर शांति तथा स्थिरता बनाए रखना है।’ भारत और चीन की सेनाओं के बीच पांच मई 2020 को पूर्वी लद्दाख क्षेत्र में गतिरोध शुरू हुआ। पैंगोंग झील वाले इलाके में हिंसक टकराव के बाद दोनों देशों की सेनाओं ने काफी संख्या में सैनिकों और भारी हथियारों की तैनाती कर दी। पिछले वर्ष लगातार कई दौर की सैन्य और राजनयिक स्तर की वार्ता के बाद दोनों पक्षों ने पिछले साल पैंगोंग झील के उत्तरी और दक्षिणी किनारे तथा गोगरा क्षेत्र से सैनिकों को पीछे हटाने की प्रक्रिया पूरी की।

अपने मिलिट्री बेस के लिए पाक का इस्तेमाल करेगा चीन    
अखिलेश पांडेय            
इस्लामाबाद। चीन के एशिया में पांव फैलाने और विशेष रूप से भारत पर निगाह रखने और दबाव में लाने की नीयत किसी से छिपी नहीं है। अब यही बात विशेषज्ञ भी मान रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि चीन पाकिस्‍तान के ग्‍वादर पोर्ट का इस्‍तेमाल अपने मिलिट्री बेस के लिए करना चाहता है। बता दें कि ग्‍वादर पोर्ट चीन के मल्‍टी बिलियन प्रोजेक्‍ट चीन-पाकिस्‍तान इकनामक कारिडोर का ही एक हिस्‍सा है। इस बात में कोई शक नहीं है कि चीन की इस मंशा के बारे में जानकार पहले से ही आशंका जताते रहे हैं। जानकारों का मानना है कि चीन इस पोर्ट के जरिए व्‍यापार तो करना ही चाहता है। लेकिन साथ ही वो इसको मिलिट्री बेस बनाकर इस क्षेत्र में अपनी रणनीतिक बढ़त बनाना चाहता है।

यूरोपीयन फाउंडेशन फार साउथ एशियन स्‍टडीज के डायरेक्‍टर जुनैद कुरैशी और स्‍कूल आफ अफ्रीकन एंड आरियंटल स्‍टडीज के प्रोफेसर मैथ्‍यू मैककार्टने ने एक इंटरव्‍यू के दौरान कहा कि चीन की वन बेल्‍ट एंड रोड इनिशिएटिव से जुड़े कई मुद्दों पर बात की। उनका कहना था कि यह अवश्यंभावी है कि चीन कुछ बिंदुओं पर ग्वादर में बंदरगाह का उपयोग सैन्य अड्डे के रूप में करना चाहता है ताकि विदेशी संसाधन लगातार बिना रोक-टोक के मिल सकें। लेकिन चीन इस बात को भी अच्‍छी तरह से जानता है कि उसके यहां पर मिलिट्री बेस बनाने का बड़े पैमाने पर विरोध हो सकता है। इसलिए वो इसके लिए भी बेहद सावधान रहेगा।

गौरतलब है कि वर्ष 2015 में चीन ने 46 बिलियन डालर की लागत से इकनामिक प्रोजेक्‍ट की घोषणा की थी। सीपैक का मकसद पाकिस्‍तान में अपनी भूमिका को बढ़ाना और सेंट्रल एशिया और दक्षिण एशिया में अमेरिका और भारत के प्रभाव को कम करना था। सीपैक के अतंर्गत ग्‍वादर पोर्ट के आने के बाद चीन का सीधेतौर पर राची से लिंक हो गया। ग्‍वादर पोर्ट से सामान की आवाजाही दूसरे रास्‍ते से चीन में सामान पहुंचाने से कहीं अधिक सस्‍ती है। वहीं इस तरह से कराची सीधीतौर पर चीन के शिंजियांग प्रांत से भी जुड़ गया। चीन की योजना इसके लिए ट्रेन और सड़क मार्ग तैयार करना है। इसके अलावा वो एक पाइपलाइन भी डालना चाहता है जो चीन तक तेल की सप्‍लाई सीधे कर सकेगी। ड्रैगन फ्राम द माउंटेन- द सीपैक फ्राम काशघर टू ग्‍वादर में मैककार्टने ने लंबे समय तक चलने वाले इस प्रोजेक्‍ट के पाकिस्‍तान पर प्रभाव का भी जिक्र किया है। उनका मानना है कि इससे पाकिस्‍तान को फायदा तो होगा लेकिन ये किसी भी तरह से इकनामिक गेम चेंजर के रूप में सामने नहीं आ सकेगा। न ही इसका असर पाकिस्‍तान की खराब होती अर्थव्‍यवस्‍था में सुधार को लेकर होगा। बढ़ती बेरोजगारी पर भी इससे कोई लगाम नहीं लगाई जा सकेगी। मैक का यहां तक कहना है कि इसके लिए मिले ऋण को उतारने के लिए भी पाकिस्‍तान को दूसरों पर निर्भर रहना होगा।

ऑस्ट्रेलिया: संक्रमण में तेजी, आपात स्थिति की घोषणा

सुनील श्रीवास्तव          सिडनी। ऑस्ट्रेलिया में मंगलवार को कोविड-19 से रिकॉर्ड मौत दर्ज की गई और इसके दूसरे सबसे बड़े राज्य ने अस्पतालों में आपात स्थिति की घोषणा की। जो कोरोना वायरस के चलते संक्रमितों की संख्या बढ़ने और स्टाफ की कमी से जूझ रहे हैं। तीन सबसे अधिक आबादी वाले राज्यों में 74 मरीजों की मौत हुई। न्यू साउथ वेल्स में 36, विक्टोरिया में 22 और क्वींसलैंड में 16 मरीजों की मौत हुई। इससे पहले एक दिन में कोरोना वायरस के कारण सर्वाधिक 59 लोगों की मौत चार सितंबर, 2020 को हुई थी। संघीय स्वास्थ्य मंत्री ग्रेग हंट ने कहा कि ऐसे संकेत मिल रहे हैं कि न्यू साउथ वेल्स में संक्रमण की दर चरम पर पहुंच रही है और विक्टोरिया में स्थिर होने वाली है।

न्यू साउथ वेल्स की सरकार ने बेहद संक्रामक ओमिक्रोन स्वरूप से निपटने के लिए लॉकडाउन लगाने की संभावना से इनकार किया है। अक्टूबर में, सिडनी ने 108 दिनों का लॉकडाउन हटाया था क्योंकि ऑस्ट्रेलिया के सबसे अधिक आबादी वाले राज्य में ज्यादातर लोगों का टीकाकरण हो चुका था। विक्टोरिया ने राज्य की राजधानी मेलबर्न के अस्पतालों और कई क्षेत्रीय अस्पतालों में स्टाफ की कमी और मरीजों के भर्ती होने में वृद्धि के कारण बुधवार दोपहर से आपातकाल घोषित कर दिया। लगभग 5,000 कर्मचारी अनुपस्थित हैं क्योंकि वे या तो संक्रमित हैं या करीबी संपर्क में हैं। यह पहली बार है जब राज्य के कई अस्पतालों में आपात स्थिति लगा दी गई है। करीब 2.6 करोड़ की आबादी वाले ऑस्ट्रेलिया में 2,700 लोगों की कोविड-19 के कारण मौत हो चुकी है।

अंटार्कटिक सागर के पानी को नापने का उपकरण बनाया

सुनील श्रीवास्तव           वाशिंगटन डीसी। अंटार्कटिक सागर का पानी बेहद ठंडा है। यह बेहद ठंडा असल में कितना ठंडा है, यह हम अब जान पाएंगे। इस पानी के तापमान को मापने के लिए वैज्ञानिकों ने एक अत्याधुनिक उपकरण बनाया है। इसका नाम है- हाई प्रिसिजन सुपरकूलिंग मेजरमेंट इंस्ट्रूमेंट। न्यूजीलैंड, नॉर्वे और अमेरिका के वैज्ञानिकों ने इसे बनाया है। यह उपकरण बताएगा कि अंटार्कटिक सागर के ऊपर जमी बर्फ के नीचे मौजूद पानी कितना ठंडा होता है। इस 'सुपरकूलिंग यंत्र' को एक छोटे, रिमोट कंट्रोल से संचालित रोबोट पर रखकर समंदर में जमी बर्फ के नीचे भेजा जा सकता है, ताकि यह वहां के पानी का ठीक-ठीक तापमान माप सके।

यूनिवर्सिटी ऑफ ओटागो की डॉक्टोरल छात्र मारेन रिक्टर ने बताया कि बर्फ की मोटी तहों के नीचे समंदर का पानी एक बड़ी पहेली की तरह है। रिसर्चर अभी इसके बारे में बहुत नहीं जानते हैं। रिक्टर ने कहा, "अंटार्कटिक के ऊपर जमी बर्फ की मोटी तह रॉस आइस सेल्फ के मुकाबले हम डार्क साइड कहे जाने वाले चांद के दूसरी तरफ के हिस्से के बारे में ज्यादा जानते हैं। रिक्टर ने बताया कि अंटार्कटिक के पानी का तापमान मापने वाला नया यंत्र बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। इसकी मदद से वैज्ञानिक समझ सकेंगे कि समुद्र, उसपर जमी बर्फ और वातावरण, ये तीनों साथ मिलकर कैसे काम करते हैं। ये सभी तत्व किस तरह एक-दूसरे से जुड़े हैं, यह भी जाना जा सकेगा। रिक्टर बोलीं, "इनकी गणना बड़े स्तर पर बनाए गए मॉडलों के माध्यम से की जाती है। मॉडल जितने अधिक सटीक होंगे,  छोटे स्तर पर उनकी सटीकता जितनी ज्यादा होगी, उनसे मिलने वाली जानकारियों की सटीकता बड़े स्तर पर भी उतनी ही अधिक होगी। मसलन, भविष्य में न्यूजीलैंड का मौसम कैसा रहेगा, यह हम अधिक स्पष्टता से बता सकेंगे।

अंटार्कटिक में बर्फ की सतह के नीचे कई बार पानी का तापमान जमने के पॉइंट से नीचे होता है, लेकिन फिर भी यह जमता नहीं है। द्रव्य रूप में ही रहता है. इस प्रक्रिया को सुपरकूलिंग कहते हैं। ओटागो यूनिवर्सिटी की छात्रा इंगा स्मिथ ने बताया कि समुद्र का पानी आमतौर पर माइनस 1.9 डिग्री सेल्सियस के तापमान पर जम जाता है। लेकिन जब बर्फ की मोटी परत के नीचे बहकर आया ताजा पानी जब खारे पानी से मिलता है, तो यह बेहद ठंडा हो जाता है। स्मिथ ने बताया, "तब यह होता तो द्रव है, लेकिन जमने वाले बिंदु यानी फ्रीजिंग पॉइंट से नीचे।  अंटार्कटिक के ऊपर जमी बर्फ की सतह सैकड़ों मीटर मोटी है। इसके चलते समुद्र के बाकी हिस्सों की तरह इस हिस्से में पहुंचना और इससे जुड़ी जानकारियां हासिल करना बहुत मुश्किल है। जलवायु परिवर्तन के चलते हमारी धरती तेजी से गर्म हो रही है। पर्यावरण में गर्मी और उष्मा की जितनी मात्रा बढ़ी है, उसका 90 प्रतिशत से भी ज्यादा हिस्सा समुद्रों ने सोख लिया है। ऐसे में जलवायु से जुड़े शोधों के लिए समुद्र के तापमान की सटीक जानकारी बेहद जरूरी है।

इस दिशा में एक बड़ी चुनौती हैं, विशेष उपकरणों की कमी। हमारे पास ऐसे यंत्रों की कमी है, जो समुद्र के ऊपर तैर रहे हिमखंडों और बर्फ की तहों के नीचे गहराई में जाकर समुद्र का तापमान को माप सकें। समुद्र पर शोध करने वाले ओशियनोग्राफर और पोलर इंजीनियर लंबे समय से इस चुनौती से जूझते रहे हैं। उम्मीद है कि अत्याधुनिक उपकरणों की मदद से वैज्ञानिकों को अंटार्कटिक की सतह के नीचे की जानकारी हासिल करने में मदद मिलेगी।

सोमवार, 17 जनवरी 2022

हमेशा के लिए नहीं चल सकतीं महामारी: वैज्ञानिक

हमेशा के लिए नहीं चल सकतीं महामारी: वैज्ञानिक       

अखिलेश पांडेय         वाशिंगटन डीसी। करोना वायरस के नए वैारिएंट ओमिक्रॉन ने पूरी दुनिया में कोहराम मचा रखा है। भारत समेत दुनियाभर के कई देश इस संक्रमण से जूझ रहे है। कोरोना वायरस का यह नया वैरिएंट तेजी से लोगों को संक्रमित कर रहा है. इसी बीच, एक राहत की खबर सामने आई है। हाल ही में वॉशिंगटन के वैज्ञानिक और वायरोलॉजिस्ट डॉ. कुतुब महमूद ने कहा कि, यह महामारी हमेशा के लिए नहीं चल सकती और इसका अंत बहुत पास है। डॉ. कुतुब ने यह भी कहा कि शतरंज के इस खेल में कोई विजेता नहीं है, यह एक ड्रॉ मैच की तरह है, जहां वायरस छिप जाएगा और हम वास्तव में जीतेंगे और जल्द ही फेसमास्क से छुटकारा मिल सकेगा। तो, उम्मीद है कि हम फिर से आगे बढ़ेंगे। 

इस पर डॉ. कुतुब ने कहा कि कोरोना से लड़ने के लिए वैक्सीन ही सबसे शक्तिशाली हथियार है। उन्होंने कहा, हमारे पास वैक्सीन, एंटीवायरल और एंटीबॉडी जैसे हथियार हैं जिनका इस्तेमाल हमने वायरस के खिलाफ किया है। वायरोलॉजिस्ट डॉ कुतुब महमूद ने शतरंज के खेल का एक उदाहरण देते हुए कहा कि वायरस अपनी चालें चल रहा है और हम इंसान भी अपनी चालों से उसे हराने की कोशश कर रहे हैं। हमारी चालें काफी छोटी हैं जैसे फेस मास्क पहनना, हैंड सैनिटाइजर इस्तेमाल और सोशल डिस्टेंसिंग। इन चालों से ही हमें कोरोना को मात देनी है। उन्होंने आगे कहा कि अगर आगे भी कोई म्यूटेंट आते हैं तो हमें उनसे घबराने की कोई जरूरत नहीं है। अगर पूरी आबादी का टीकाकरण किया जाता है तो हम सभी आने वाले किसी भी तरह के वायरस से सुरक्षित रह सकते हैं। डॉ. कुतुब ने भारत बायोटेक की कोवैक्सिन की सराहना करते हुए कहा कि, यह एक अच्छा डोमेस्टिक प्रोडक्ट है, जिसके लिए मैं भारत की सरकार और भारतीय कंपनी को बधाई देना चाहता हूं. यह एक बेहतरीन वैक्सीन है और क्लिनिकल डाटा में हमने देखा कि 2 साल की उम्र तक के बच्चों में इसके बेहतरीन रिजल्ट देखने को मिले हैं।

8.1% की दर से बढ़ीं चीन की अर्थव्यवस्था: महामारी

सुनील श्रीवास्तव           बीजिंग। कोरोना महामारी की चुनौतियों के बीच चीन की अर्थव्यवस्था 2021 में 8.1% की दर से बढ़ी। चीनी अर्थव्यवस्था अब करीब 18,000 अरब अमेरिकी डॉलर (18 ट्रिलियन डॉलर) की हो गई। राष्ट्रीय सांख्यिकी ब्यूरो (एनबीएस) के अनुसार चीन की अर्थव्यवस्था में पिछले साल की चौथी तिमाही में 4% की वृद्धि हुई, जो तीसरी तिमाही के मुकाबले कम है। तीसरी तिमाही में वृद्धि दर 4.9% थी। सरकार ने 2021 के लिए 6% वृद्धि दर का लक्ष्य रखा था, हालांकि इस दौरान चीन ने 8.1% की दर से वृद्धि हासिल की। 

चीन की सरकारी संवाद एजेंसी शिन्हुआ ने कहा कि ये वृद्धि महामारी से लड़ाई और जटिल विदेश व्यापार दशाओं के बीच हासिल की गई। एनबीएस ने सोमवार को कहा कि चीन की जीडीपी सालाना आधार पर 8.1% बढ़कर 1,14,370 अरब युआन (करीब 18,000 अरब अमेरिकी डॉलर) हो गई है। एनबीएस के आंकड़ों से पता चलता है कि वृद्धि दर 6% के सरकारी लक्ष्य से काफी अधिक है। चीन में इससे पिछले दो साल की औसत वृद्धि दर 5.1% थी।नागरिकों की प्रति व्यक्ति डिस्पोजेबल आय पिछले साल 9.1% बढ़कर 35,128 युआन हो गई। रिपोर्ट के मुताबिक, कमजोर खपत के आंकड़ों से आउटलुक प्रभावित हुआ। दिसंबर में खुदरा बिक्री में एक साल पहले की तुलना में केवल 1.7% की वृद्धि दर्ज हुई। अगस्त 2020 के बाद यह सबसे धीमी गति रही। विश्लेषकों ने नवंबर में इसके 3.9% बढ़ने के बाद 3.7% की बढ़ोतरी की उम्मीद की थी।नागरिकों की प्रति व्यक्ति डिस्पोजेबल आय पिछले साल 9.1% बढ़कर 35,128 युआन हो गई। रिपोर्ट के मुताबिक, कमजोर खपत के आंकड़ों से आउटलुक प्रभावित हुआ। दिसंबर में खुदरा बिक्री में एक साल पहले की तुलना में केवल 1.7% की वृद्धि दर्ज हुई। 

अगस्त 2020 के बाद यह सबसे धीमी गति रही। विश्लेषकों ने नवंबर में इसके 3.9% बढ़ने के बाद 3.7% की बढ़ोतरी की उम्मीद की थी।एनबीएस के मुताबिक, सामान्य तौर पर 2021 में चीन ने राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था की निरंतर और स्थिर रिकवरी को बनाए रखा। साथ ही दुनिया में आर्थिक विकास और महामारी की रोकथाम व नियंत्रण में आगे रहा। इस तरह चीन आर्थिक विकास को लेकर तय टारगेट को हासिल करने सफल रहा। एनबीएस ने चेतावनी जारी करते हुए कहा, "हमें यह पता होना चाहिए कि बाहरी वातावरण अधिक जटिल और अनिश्चित है। साथ ही घरेलू अर्थव्यवस्था मांग में कमी, सप्लाई शॉक और कमजोर उम्मीदों का ट्रिपल दबाव है।


अमीराब्‍दोल्‍लहिआन ने चीनी विदेश मंत्री से मुलाकात की
अखिलेश पांंडेय         बीजिंग/ तेहरान। ईरान और चीन के बीच पिछले साल 25 वर्षों के लिए हुई महाडील पर काम शुरू हो गया है। ईरान के विदेश मंत्री हुसैन अमीराब्‍दोल्‍लहिआन ने अपनी पहली चीन यात्रा के दौरान चीनी विदेश मंत्री वांग यी से मुलाकात के दौरान यह ऐलान किया है। यही नहीं चीन अब ईरान के बंदरअब्‍बास में अपना महावाणिज्‍य केंद्र शुरू करने जा रहा है। दरअसल, अमेरिका-इजरायल के साथ तनाव को देखते हुए ईरान चीन के साथ अपनी दोस्‍ती को तेजी के साथ मजबूत करना शुरू कर दिया है। बताया जा रहा है कि 5 हजार चीनी सैनिक भी ईरान में तैनात होंगे। 
इससे भारत के लिए बड़ा संकट पैदा हो गया है।ईरानी विदेश मंत्री ने यह नहीं बताया कि चीन और ईरान के बीच अभी किस प्रॉजेक्‍ट पर काम शुरू हुआ है। मार्च 2021 में पूर्व राष्‍ट्रपति हसन रुहानी के कार्यकाल के दौरान चीन और ईरान के बीच इस 'रणनीतिक समझौते' पर हस्‍ताक्षर हुआ था। इसमें आर्थिक, सैन्‍य और सुरक्षा सहयोग पर बल दिया गया है। वह भी तब जब दोनों ही देश अलग-अलग स्‍तरों पर अमेरिकी प्रतिबंधों का सामना कर रहे हैं। चीन अमेरिकी प्रतिबंधों को धता बताते हुए ईरान से सस्‍ते दर पर तेल खरीद रहा है।ईरानी विदेश मंत्री राष्‍ट्रपति इब्राहिम रईसी का बेहद गोपनीय संदेश वाला पत्र लेकर गए हैं जिसे चीनी राष्‍ट्रपति को दिया गया है। रईसी प्रशासन ने वादा किया है कि वह एशिया केंद्रीत विदेश नीति अपनाएगा। चीन और ईरान के बीच बढ़ती दोस्‍ती से भारत के लिए बड़ा संकट पैदा हो गया है। भारत ने ईरान के चाबहार बंदरगाह पर अरबों रुपये का निवेश किया है लेकिन चीन की बढ़ती भूमिका से इसको लेकर संदेह के बादल मंडरा रहे हैं।
यही नहीं पिछले दिनों ईरान ने भारत को अरबों डॉलर का झटका दे दिया था। ईरान ने भारत को फरजाद बी गैस परियोजना से चलता कर दिया है। इस गैस फील्‍ड की खोज भारत की ओएनजीसी विदेश लिमिटेड ने की थी। ईरान ने अब इस गैस फील्‍ड को खुद ही विकसित करने का फैसला किया है। इससे पहले ईरान ने चाबहार रेलवे लिंक परियोजना के लिए भारत के 2 अरब डॉलर के प्रस्ताव को खारिज कर दिया था।दरअसल, ईरान ने चीन के साथ 25 साल के लिए 400 अरब डॉलर का समझौता किया है। मई 2018 में परमाणु डील से अमेरिका के हटने के बाद ईरान बुरी तरह से अमेरिकी प्रतिबंधों की मार झेल रहा है और उसके पास पैसे की भारी कमी है। चीन से महाडील के बाद अब ईरान के पास जमकर पैसा आ रहा है। यही नहीं चीन ने भारत के विपरीत ईरान से तेल के आयात को काफी बढ़ा दिया है। इससे भी ईरान को चीन से काफी पैसा मिल रहा है। चीनी पैसे के बल पर अब ईरान फरजाद बी गैस फील्‍ड को खुद ही विकसित करने जा रहा है।
ईरान और चीन ने अगले 10 साल में द्विपक्षीय व्‍यापार को 10 गुना बढ़ाकर 600 अरब डॉलर करने का लक्ष्‍य रखा है। चीन-ईरान के इस महाडील के 18 पन्‍ने के दस्‍तावेजों से पता चलता है कि चीन बहुत कम दाम में अगले 25 साल तक ईरान से तेल खरीदेगा। इसके बदले में चीन बैंकिंग, आधारभूत ढांचे जैसे दूरसंचार, बंदरगाह, रेलवे, और ट्रांसपोर्ट आदि में निवेश करेगा। माना जा रहा है कि इस डील के बाद ईरान की चीन के जीपीएस कहे जाने वाले बाइदू तक पहुंच हो जाएगी। यही नहीं चीन ईरान में 5G सर्विस शुरू करने में मदद कर सकता है। चीन ईरान का सबसे बड़ा व्‍यापारिक भागीदार है।
ईरान डील में सैन्‍य सहयोग जैसे हथियारों का विकास, संयुक्‍त ट्रेनिंग और खुफिया सूचनाओं की ट्रेनिंग भी शामिल है जो 'आतंकवाद, मादक पदार्थों और इंसानों की तस्‍करी तथा सीमापार अपराधों' को रोकने के लिए होगा। कहा जा रहा है कि चीन अपने 5 हजार सैनिकों को भी ईरान में तैनात करेगा। चीन की योजना पाकिस्‍तान में चल रहे चीन पाकिस्‍तान आर्थिक कॉरिडोर को ईरान तक आगे बढ़ाने की है।
चीन अगर इस इलाके में अपनी सैन्‍य पकड़ बना लेता है तो पश्चिम एशिया में अमेरिकी सैन्‍य प्रभाव पर संकट आ जाएगा। चीन अफ्रीका के जिबूती में पहले ही विशाल नेवल बेस बना चुका है। विश्‍लेषकों की मानें तो इस डील से भारत को भी झटका लग सकता है। भारत ने ईरान के बंदरगाह चाबहार के विकास पर अरबों रुपये खर्च किए हैं। अमेरिका के दबाव की वजह से ईरान के साथ भारत के रिश्ते नाजुक दौर में हैं। चाबहार व्यापारिक के साथ-साथ रणनीतिक तौर पर बेहद महत्वपूर्ण है।
यह चीन की मदद से विकसित किए गए पाकिस्तान के ग्वादर पोर्ट से महज 100 किलोमीटर दूर है। चाबहार को ग्‍वादर का जवाब माना जा रहा है। ऐसे में चीन की मौजूदगी, भारतीय निवेश के लिए मुश्किलें पैदा करेंगी। भारत को भी अमेरिका, सऊदी अरब, इजरायल बनाम ईरान में से किसी एक देश को चुनना पड़ सकता है। एक वक्त था जब ईरान भारत का मुख्य तेल आपूर्तिकर्ता था, लेकिन अमेरिका के दबावों की वजह से नई दिल्ली को तेहरान से तेल आयात को तकरीबन खत्म करना पड़ा। चीन की ईरान में उपस्थिति से भारतीय निवेश के लिए संकट पैदा हो गया है।

रविवार, 16 जनवरी 2022

तालिबान ने करीब 3 हजार सदस्यों को बर्खास्त किया

तालिबान ने करीब 3 हजार सदस्यों को बर्खास्त किया    
सुनील श्रीवास्तव          काबुल। तालिबान ने अपनी कट्टरपंथी इस्लामिक आंदोलन से जुड़ी अपमानजनक प्रथाओं के आरोप में करीब 3 हजार सदस्यों को बर्खास्त कर दिया है। अफगानिस्तान में सत्ता में आने के बाद शुरू की गई व्यापक निरीक्षण प्रक्रिया के तहत तालिबान ने यह कदम उठाया है। अमेरिका से 20 सालों तक जंग लड़ने के बाद पिछले अगस्त में यूएस और नाटो सेना के वापस जाने के बाद तालिबान ने अफगानिस्तान की सत्ता पर कब्जा जमा लिया था। तालिबान सरकार ने उन सदस्यों की पहचान करने के लिए एक आयोग बनाया था। जो आंदोलन के नियमों का उल्लंघन कर रहे थे।

रक्षा मंत्रालय में पैनल के प्रमुख लतीफुल्ला हकीमी ने न्यूज एजेंसी एएफपी को बताया कि, ये लोग इस्लामिक अमीरात को बदनाम कर रहे थे। इसलिए इस पुनरीक्षण प्रक्रिया में उन्हें हटा दिया गया। ताकि भविष्य में एक बेहतर सेना और पुलिस फोर्स का निर्माण किया जा सके। उन्होंने बताया कि अब तक 2840 सदस्यों को बर्खास्त किया जा चुका है। लतीफुल्ला हकीमी ने कहा कि, ये लोग भ्रष्टाचार, ड्रग्स और लोगों के निजी जीवन में घुसपैठ की कोशिश कर रहे थे। इसके अलावा उनके दाएश के साथ लिंक भी थे। आंदोलन के सर्वोच्च नेता हिबतुल्ला अखुंदज़ादा के एक माफी के आदेश के बावजूद तालिबान लड़ाकों पर पूर्व सुरक्षा बल के सदस्यों की एक्सट्रा ज्यूडिशियल किलिंग का आरोप लगा है। जिहादी समूह के क्षेत्रीय संगठन कट्टरपंथी इस्लामी प्रशासन के लिए एक बड़ी सुरक्षा चुनौती के रूप में उभरे हैं। जो अक्सर काबुल और अन्य शहरों में बंदूक और बम हमलों में अधिकारियों को निशाना बनाते हैं।

90 करोड़ डॉलर की आर्थिक सहायता करेगा 'भारत'   
अखिलेश पांडेय        
कोलंबो/बीजिंग/ नई दिल्ली। पड़ोसी देश चीन से कर्ज लेकर फंसी श्रीलंकाई सरकार के सहयोग के लिए भारत आगे आया है। सजे तहत भारत ने एक समझौता प्रस्तुत किया है। जिसके तहत भारत सरकार भारत अगले 2 महीने में श्रीलंका को 515 मिलियन अमेरिकी डॉलर से ज्यादा का सहायता करेगा। भारत ने श्रीलंका को 90 करोड़ डॉलर से अधिक का कर्ज देने की घोषणा की है।
इससे देश को विदेशी मुद्रा भंडार बढ़ाने और खाद्य आयात में मदद मिलेगी। आर्थिक संकट से गुजर रहे श्रीलंका में इस समय लगभग आवश्यक वस्तुओं की भारी किल्लत देखने को मिल रही है। श्रीलंका के सेंट्रल बैंक के गवर्नर अजीत निवार्ड कैबराल ने बुधवार को कहा था कि उनका देश भारत से एक अरब अमेरिकी डॉलर के ऋण पर बातचीत कर रहा है।
श्रीलंका में भारतीय उच्चायुक्त गोपाल बागले ने बृहस्पतिवार को कैबराल से मुलाकात की और पिछले सप्ताह आरबीआई द्वारा 90 करोड़ अमेरिकी डॉलर से अधिक की सुविधाओं का विस्तार करने के मद्देनजर श्रीलंका को भारत का मजबूत समर्थन जताया। एक ट्वीट में कहा गया,इनमें एशियाई समाशोधन संघ के 50.9 करोड़ अमेरिकी डॉलर से अधिक के निपटान को स्थगित करना और 40 करोड़ अमेरिकी डॉलर की मुद्रा अदला-बदली शामिल है।
भारत के कदम पर टिप्पणी करते हुए विश्लेषकों ने यहां कहा कि भारतीय सहायता श्रीलंका के दिसंबर के अंत में घोषित विदेशी मुद्रा भंडार को दोगुना करने में योगदान दे सकती है।

प्रतिद्वंद्वी 'फेसबुक' के साथ मिलीभगत का आरोप         
अखिलेश पांडेय        वाशिंगटन डीसी/ नई दिल्ली। गूगल के खिलाफ अमेरिका के राज्य के नेतृत्व वाले एकाधिकार व्यापार विरोधी वाद के नए असंशोधित दस्तावेजों में ऑनलाइन विज्ञापन बिक्री में हेरफेर करने के लिए प्रतिद्वंद्वी फेसबुक के साथ मिलीभगत का आरोप लगाया गया है। वाद में आरोप लगाया गया है कि दोनों कंपनियों के मुख्य कार्यकारी अधिकारियों (सीईओ) को समझौते की जानकारी थी और उन्होंने इस पर हस्ताक्षर किए। दिसंबर 2021 में दायर किए गए मूल, संशोधित वाद में गूगल पर ‘‘प्रतिस्पर्धा-विरोधी आचरण’’ करने और सोशल नेटवर्किंग क्षेत्र की दिग्गज कंपनी फेसबुक के साथ मिलकर काम करने का आरोप लगाया गया। लेकिन इसका असंशोधित संस्करण अल्फाबेट (गूगल की मूल कंपनी) के सीईओ सुंदर पिचाई और फेसबुक के सीईओ मार्क जुकरबर्ग की भागीदारी के बारे में विवरण प्रदान करता है। फेसबुक ने अब अपना नाम बदलकर मेटा कर लिया है।

वाद के अनुसार, फेसबुक की मुख्य संचालन अधिकारी (सीओओ) शेरिल सैंडबर्ग ने 2018 में सिलसिलेवार ईमेल के जरिए बातचीत में ‘‘स्पष्ट किया कि यह रणनीतिक रूप से एक बड़ा सौदा है।’’ इस सौदे में फेसबुक के सीईओ भी शामिल थे। मुकदमे में फेसबुक के अधिकारियों के नाम अब भी संशोधित किए जा रहे हैं लेकिन उनके उपनाम स्पष्ट तौर पर दिख रहे हैं। दायर वाद के अनुसार, जब दोनों पक्षों ने समझौते की शर्तों पर सहमति बना ली, तब ‘‘टीम ने सीधे सीईओ जुकरबर्ग को संबोधित कर एक ईमेल भेजा।’’ शिकायत के अनुसार, ईमेल में लिखा है, ‘‘हस्ताक्षर करने के लिए लगभग तैयार हैं और आगे बढ़ने के लिए आपकी स्वीकृति की आवश्यकता है।’’ शिकायत में कहा गया है कि जुकरबर्ग निर्णय लेने से पहले सैंडबर्ग और उनके अन्य अधिकारियों से मिलना चाहते थे।

गूगल के प्रवक्ता पीटर शोटेनफेल्स ने एक बयान में कहा कि मुकदमे में ‘‘कई गलतियां हैं और कानूनी विशेषता का अभाव है।’’ सितंबर 2018 में शिकायत में कहा गया कि दोनों कंपनियों ने समझौते पर हस्ताक्षर किए। राज्यों की शिकायत के अनुसार कभी गूगल के विज्ञापन व्यवसाय की प्रमुख रहीं सैंडबर्ग और पिचाई ने व्यक्तिगत रूप से समझौते पर हस्ताक्षर किए। मेटा के प्रवक्ता क्रिस एसग्रो ने शुक्रवार को कहा कि गूगल के साथ कंपनी के विज्ञापन समझौते और इस तरह के अन्य मंचों के साथ ऐसे ही समझौतों से ‘‘विज्ञापन के लिए प्रतिस्पर्धा बढ़ाने में मदद मिली है।’’ एसग्रो ने कहा, ‘‘ये व्यावसायिक संबंध मेटा को प्रकाशकों को उचित रूप से क्षतिपूर्ति करते हुए विज्ञापनदाताओं को अधिक मूल्य प्रदान करने में सक्षम बनाते हैं, जिसके परिणामस्वरूप सभी के लिए बेहतर परिणाम मिलते हैं।’’ गूगल के शोटेनफेल्स ने कहा कि मुकदमे में यह आरोप कि पिचाई ने फेसबुक के साथ समझौते को मंजूरी दी, यह ‘‘ठीक नहीं है। हम हर साल सैकड़ों समझौतों पर हस्ताक्षर करते हैं जिनके लिए सीईओ की मंजूरी की आवश्यकता नहीं होती है और यह समझौता भी इससे अलग नहीं था।’’ उन्होंने कहा, ‘‘समझौता कभी भी गोपनीय नहीं था।’’यह वाद टेक्सास अटॉर्नी जनरल केन पैक्सटन के नेतृत्व में दायर किया गया है, जिसमें अलास्का, अर्कांसस, फ्लोरिडा, इडाहो, इंडियाना, केंटुकी, लुइसियाना, मिसिसिपी, मिसौरी, मोंटाना, नेवादा, नॉर्थ डकोटा, प्यूर्टो रिको, दक्षिण कैरोलिना, साउथ डकोटा और यूटा के अटॉर्नी जनरल भी शामिल हैं।

शुक्रवार, 14 जनवरी 2022

ब्रिटिश 'पीएम' बोरिस पर इस्तीफे का दवाब बढ़ा

ब्रिटिश 'पीएम' बोरिस पर इस्तीफे का दवाब बढ़ा     

सुनील श्रीवास्तव          लंदन। कोरोना वायरस के बढ़ते संक्रमण को थामने के लिए लगाए गए लॉकडाउन के दौरान आयोजित की गई शराब पार्टी के बाद विवादों के झमेले में फंसे ब्रिटिश प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन के ऊपर अब इस्तीफा देने का दबाव बढ़ता जा रहा है। संसद में बे-मन के साथ माफी मांगने के बाद भी उनके ऊपर पड रहा इस्तीफे का दबाव कम नहीं हुआ है। जिसके चलते उनकी पार्टी के 10 में से 6 मतदाताओं ने प्रधानमंत्री के कामकाज करने के तरीके को खराब बताया है।

ब्रिटिश प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन के ऊपर इस समय अपने पद से इस्तीफा देने का दबाव बढ़ता ही चला जा रहा है। देश के भीतर कोरोना वायरस के संक्रमण को थामने के लिए लगाए गए लॉकडाउन के दौरान आयोजित की गई दारू पार्टी की वजह से प्रधानमंत्री विवादों के घेरे में आ गए थे। हालांकि मन नहीं होने के बावजूद प्रधानमंत्री की ओर से संसद के भीतर इस मामले को लेकर माफी मांग ली गई थी, लेकिन बताया जा रहा है कि इसके बावजूद भी उनके ऊपर इस्तीफे का दबाव लगातार बढ़ रहा है। बताया जा रहा है कि कंजरवेटिव पार्टी के 10 में से 6 सदस्य प्रधानमंत्री के कामकाज करने के तौर-तरीके को खराब मान रहे हैं। पता चल रहा है कि प्रधानमंत्री की लोकप्रियता घटकर अब केवल 36 प्रतिशत ही रह गई है। इन सबके बीच बोरिस जॉनसन की सरकार में भारतीय मूल के वित्त मंत्री ऋषि सुनक ब्रिटेन के भीतर प्रधानमंत्री पद के लिए पहली पसंद बनकर तेजी के साथ उभर रहे हैं। 

उनकी पार्टी की ओर से कराए गए सर्वे में 46 फ़ीसदी लोगों ने यह बात मानी है कि वित्तमंत्री ऋषि सुनक मौजूदा प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन से बेहतर पीएम साबित हो सकते हैं। यदि ऋषि सुनक को प्रधानमंत्री बनाया जाता है तो वर्ष 2024 की 2 मई को होने वाले आम चुनाव के दौरान उनकी पार्टी कंजरवेटिव पार्टी को बोरिस जॉनसन के प्रधानमंत्री रहने के मुकाबले ज्यादा सीटें हाथ लग सकती है। उधर जॉनसन द्वारा लॉकडाउन पार्टी की बात कबूल कर लेने के बाद स्वास्थ्य सचिव की ओर से अपना इस्तीफा दे दिया गया है।


एंटी-शिप मिसाइल सिस्टम अधिग्रहण को मंजूरी दी
अखिलेश पांडेय      
नई दिल्ली/ बीजिंग/ मनीला। भारत और चीन सागर से लद्दाख तक आंखें दिखा रहे चीनी ड्रैगन को बड़ा झटका लगा है। फिलीपींस ने शुक्रवार को ब्रह्मोस एयरोस्पेस प्राइवेट लिमिटेड से अपनी नौसेना के लिए एंटी-शिप मिसाइल सिस्टम अधिग्रहण को मंजूरी दे दी है। यह प्रस्ताव डील करीब 37 करोड़ 40 लाख डॉलर की होगी अमेरिकी डॉलर का है।
इस संबंध में जल्‍द ही दोनों देशों के बीच समझौते पर हस्‍ताक्षर होगा। ड्रैगन की दादागिरी से जूझ रहे दक्षिण पूर्वी एशियाई देश फिलीपींस ने भारत के साथ दुनिया की सबसे तेज सुपरसोनिक एंटी शिप क्रूज मिसाइल ब्रह्मोस की खरीद को मंजूरी दे दी। हैब्रह्मोस मिसाइल के लिए यह पहला विदेशी आर्डर है। फिलीपींस के राष्ट्रीय रक्षा विभाग द्वारा ब्रह्मोस के अधिकारियों को इसकी सूचना दी गई है।बता दें कि इस हफ्ते 11 जनवरी को भारतीय नौसेना और रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन ने ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल का सफल परीक्षण किया है। मिसाइल भारत और रूस के बीच एक संयुक्त उद्यम है जहां डीआरडीओ भारतीय पक्ष का प्रतिनिधित्व करता है।
मिसाइल का परीक्षण आईएनएस विशाखापत्तनम से किया गया था जो हाल ही में शामिल भारतीय नौसेना का नवीनतम युद्धपोत है। ब्रह्मोस भारतीय नौसेना के युद्धपोतों की मुख्य हथियार प्रणाली है और इसे इसके लगभग सभी सतह प्लेटफार्मों पर तैनात किया गया है।इसका एक पानी के नीचे वाला संस्करण भी विकसित किया जा रहा है जिसका उपयोग न केवल भारत की पनडुब्बियों द्वारा किया जाएगा, बल्कि मित्र देशों को निर्यात के लिए भी पेश किया जाएगारोचक बात यह है, कि फिलीपींस अमेरिका का सहयोगी देश है। लेकिन चीन के खिलाफ सैन्‍य तैयारी के लिए उसने भारत-रूस द्वारा मिलकर बनाई गई ब्रह्मोस मिसाइल पर भरोसा जताया है। माना जा रहा है कि जल्‍द ही चीन का एक और पड़ोसी देश वियतनाम भी भारत के साथ ब्रह्मोस मिसाइल का समझौता कर सकता है। दोनों ही देशों के बीच इस मिसाइल डील को लेकर बातचीत चल रही है। इंडोनेशिया सहित कई देशों और कई खाड़ी देशों ने मिसाइल खरीदने में रुचि दिखाई है।

मिशिगन झील के तट पर बनीं आकृतियों का खुलासा
सुनील श्रीवास्तव         
वाशिंगटन डीसी। मिशिगन झील के किनारे बनीं इन अजीबोगरीब संरचनाओं को लैंडस्केप और प्रकृति फोटोग्राफर जोशुआ नोविकी ने सबसे पहले अपने कैमरे में कैद की। जैसे ही उन्होंने इन तस्वीरों को सोशल मीडिया पर पोस्ट किया तो, देखते ही देखते फोटो वायरल हो गए। इन आश्चर्यजनक तस्वीरों को अब लोग एलियंस के साथ जोड़ रहे हैं, हालांकि इनके पीछे की सच्चाई कुछ और ही है। कई लोगों के मन में सवाल उठने लगे कि आखिर ये आकृतियां बनीं कैसे।
मिशिगन झील के तट पर बनीं आकृतियों को लेकर बड़ा खुलासा किया गया है। आपको बता दें कि इन संरचनाओं को किसी एलियंस या परग्रही ने नहीं बल्कि तेज हवाओं ने बनाया है। प्रकृति की कारीगरी का ये नायाब नमूना अपने आप में ही आश्चर्य है, लोगों को विश्वास नहीं हो पा रहा है कि हवाओं की मदद से ये संरचना बनी होगी। हालांकि कई लोगों ने मजाकिया लहजे में कहा के इसे एलियंस ने बनाया है।

गुरुवार, 13 जनवरी 2022

‘स्वास्थ्य योगदान’ के तहत कर भुगतान, नियम बनाया

‘स्वास्थ्य योगदान’ के तहत कर भुगतान, नियम बनाया    

सुनील श्रीवास्तव          ओटावा। कनाडा के दूसरे सबसे अधिक आबादी वाले प्रांत क्यूबेक में कोरोना का टीका नहीं लगाने वालों के लिए एक पहले के तौर पर नया नियम लागू किया गया है। जिसमें कोरोना की डोज नहीं लेने वाले व्यक्ति को जुर्माने के तौर पर कर (टैक्स) देना होगा। प्रांत में व्यक्तिगत अधिकारों और सामाजिक जिम्मेदारी के बारे में एक बहस में यह नयी पहल की गयी। जिसमें कोविड-19 टीकाकरण से इनकार करने वाले लोगों को ‘स्वास्थ्य योगदान’ के तहत कर भुगतान करने के लिए नियम बनाया गया है।

प्रांत के प्रीमियर फ्रांस्वा लेगॉल्ट ने कहा, “करीब 10 फीसदी नागरिकों ने कोरोना वैक्सीन की पहली डोज़ अभी तक नहीं लगवाई है, ये स्वास्थ्य नेटवर्क पर आर्थिक बोझ बढ़ा रहे हैं और अन्य नागरिकों के लिए खतरा पैदा कर सकते हैं।” इसके साथ ही क्यूबेक पहला ऐसा स्थान बन गया है जहां कोरोना वैक्सीन की डोज नहीं लेने वाले को कर देना होगा। श्री लेगॉल्ट ने कहा, “कोरोना के खिलाफ जंग में टीके की महत्वपूर्ण भूमिका है। इसलिए हम ऐसे पर कर लगाना चाहते है जो बिना किसी चिकित्सा कारण के टीके की डोज लगवाने से इनकार कर रहे है। ऐसे लोग अन्य लोगों के स्वास्थ्य के साथ खिलवाडा कर रहे हैं।”

उन्होंने कहा कि प्रांत में 90 फीसद लाेगों को कोराना की डोज लग चुकी है। उन्होंने कहा कि आने वाले हफ्ते में गैर-टीकाकृत लोगों को टीका न लगवाने के एवज में 100 डॉलर से अधिक राशि कर के तौर पर देनी होगी।

अमेरिका: 40 सालों में तेज गति से बढ़ाईं महंगाई

अखिलेश पांडेय       वाशिंगटन डीसी। अमेरिका महंगाई के दौरा से गुजर रहा है। अमेरिका में महंगाई पिछले महीने करीब 40 सालों की अपनी सबसे तेज गति से बढ़ी है। एक साल पहले की तुलना में महंगाई में 7 फीसदी की वृद्धि हुई है। घरेलू खर्च बढ़ गए हैं। साल 2021 के दौरान कारों, गैस, भोजन और फर्नीचर की कीमतों में तेजी से वृद्धि हुई है। इस दौरान महामारी की मंदी से बाहर आते हुए जैसे-जैसे अमेरिकियों ने खर्च बढ़ाया, श्रमिकों और कच्चे माल की कमी तथा इस बढ़े हुए मूल्य दबाव से आपूर्ति श्रृंखला पर दबाव बना।श्रम विभाग ने बुधवार को बताया कि महंगाई का एक पैमाना, जिसमें अस्थिर भोजन और गैस की कीमतों को शामिल नहीं किया गया है।

दिसंबर में 5.5% उछल गया, जो दशकों में सबसे अधिक है। नवंबर के मुकाबले कुल महंगाई 0.5% बढ़ी है। आपूर्ति श्रृंखला में सुधार के साथ मूल्य वृद्धि धीमी हो सकता है, लेकिन अधिकांश अर्थशास्त्रियों का कहना है कि महंगाई जल्द पूर्व-महामारी के स्तर पर वापस नहीं आएगी। वित्तीय सेवा कंपनी आईएनजी के मुख्य अंतरराष्ट्रीय अर्थशास्त्री जेम्स नाइटली ने कहा, "अमेरिकी महंगाई दबाव कम होने के कोई संकेत नहीं दिखा रहे हैं। थैचर और रीगन के दिनों से यह इतनी ज्यादा नहीं रही है। हम शिखर के करीब हो सकते हैं, लेकिन जोखिम यह है कि मुद्रास्फीति अधिक समय तक बनी रहती है।"संयुक्त राज्य अमेरिका ने 1980 के दशक की शुरुआत से ऐसा कुछ नहीं देखा है। तब ब्याज दरें दर्दनाक स्तरों पर थीं। बैंकों के सर्वश्रेष्ठ ग्राहकों के लिए प्रमुख दर 1980 में 20% तक पहुंच गई थी और अर्थव्यवस्था को एक गहरी मंदी का सामना करना पड़ा था। लेकिन, अमेरिका ने फिर मुद्रास्फीति पर काबू पाया था।

उच्च मुद्रास्फीति ने राष्ट्रपति जो बिडेन को रक्षात्मक मुद्रा में धकेल दिया है। मुद्रास्फीति के लिए बिडेन और कुछ कांग्रेसी डेमोक्रेट्स नेताओं ने बड़े निगमों को दोष देना शुरू कर दिया है। उनका कहना है कि मांस उत्पादक और अन्य उद्योग कीमतों और मुनाफे को बढ़ाने के लिए महामारी से प्रेरित कमी का फायदा उठा रहे हैं।उच्च मुद्रास्फीति न केवल अमेरिका के लिए एक समस्या है बल्कि यूरो मुद्रा का उपयोग करने वाले 19 यूरोपीय देशों में मुद्रास्फीति एक साल पहले की तुलना में दिसंबर में 5% बढ़ी है। यह रिकॉर्ड वृद्धि है।

मेयर एरिक गार्सेटी के नामांकन को मंजूरी: समिति
सुनील श्रीवास्तव      
वाशिंगटन डीसी/नई दिल्ली। कांग्रेस की एक अहम समिति ने भारत में अमेरिका के राजदूत के तौर पर लॉस एंजिलिस के मेयर एरिक एम गार्सेटी के नामांकन को मंजूरी दी है। गार्सेटी के अलावा सीनेट की शक्तिशाली विदेशी संबंध समिति ने बुधवार को 11 अन्य राजदूतों के नामांकन को मंजूरी दी। इनमें जर्मनी में अमेरिका के राजदूत के तौर पर एमी गुटमैन, पाकिस्तान में डोनाल्ड आर्मिन ब्लोम तथा होली सी में जोए डोनेली के नाम शामिल हैं। अब इन नामों को अंतिम मंजूरी के लिए सीनेट के पटल पर रखा जाएगा।
सीनेट की विदेश संबंधों की समिति के अध्यक्ष सीनेटर बॉब मेनेंदेज ने इस पर नाराजगी जतायी कि समिति के समक्ष 55 नामांकन अब भी लंबित हैं और दुनियाभर में कई चुनौतियां उनका इंतजार कर रही हैं। 
उन्होंने कहा, ‘‘जैसा कि मैने इस समिति और सीनेट के समक्ष कई बार कहा है कि लंबे समय तक पदों को रिक्त रखना हमारे हित में नहीं है।’’
रैंकिंग सदस्य जिम रिश्च ने जर्मनी के राजदूत पद पर नामांकन के विपक्ष में मत दिया। उन्होंने कहा, ‘‘मैं डॉ. गटमैन के खिलाफ ‘ना’ में वोट दे रहा हूं लेकिन यह निजी मसला नहीं है। मैं उनके साथ काम करने और जर्मनी के साथ हमारा गठबंधन मजबूत करने के लिए तैयार हूं।’’
उन्होंने कहा, ‘‘निश्चित तौर पर वह योग्य हैं, उनका लंबा और सफल करियर रहा है लेकिन मुझे लगता है कि यह संभवत: यूनिवर्सिटी ऑफ पेन्सिलवेनिया में काम करने को लेकर रहा, जो चीन से लाखों डॉलर का चंदा लेता है। अमेरिका के उच्च शिक्षा संस्थानों में विदेशी खासतौर से चीन के प्रभाव का मुद्दा इस समिति के लिए बहुत महत्वपूर्ण है।’

एलएसी से आंशिक तौर पर सैनिक पीछे हटें: नरवणे

अखिलेश पांडेय         नई दिल्ली/बीजिंग। भारत और चीन के बीच चल रही कोर कमांडर स्तर की 14वें दौर की वार्ता के बीच थल सेनाध्यक्ष जनरल एमएम नरवणे ने बुधवार को अपनी सालाना प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि एलएसी से आंशिक तौर पर सैनिक पीछे हटे हैं। लेकिन खतरा किसी भी तरह से कम नहीं हुआ है। सेना प्रमुख ने चीन सीमा पर स्थिति के बारे में कहा कि किसी भी विवाद का समाधान निकालने के लिए युद्ध या संघर्ष हमेशा अंतिम उपाय होता है। अगर इस आखिरी विकल्प का भी सहारा लिया गया, तो बहुत विश्वास के साथ आश्वस्त कर सकता हूं कि हम ही विजयी होंगे। अपने कार्यकाल के आखिरी संवाददाता सम्मेलन में एमएम नरवणे ने सिलसिलेवार सेना की उपलब्धियों, थियेटर कमांड प्रक्रिया, आधुनिकीकरण की योजना, सेना में महिलाओं की भागीदारी, पाकिस्तान सीमा पर दुश्मन के छद्म युद्ध जैसे सवालों के बेबाकी से जवाब देकर राष्ट्रीय सुरक्षा के मुद्दों पर भी चर्चा की। अपने 28 माह के कार्यकाल के महज चार माह बचने पर जनरल नरवणे ने कहा कि उनका अब तक का समय चीन और पाकिस्तान से मिल रही चुनौतियों से निपटने में बीता। उन्होंने कहा कि बीते साल जनवरी से हमारी उत्तरी और पश्चिमी सीमाओं पर सकारात्मक विकास हुआ है। उत्तरी सीमाओं पर हमने ऑपरेशनल तैयारियों पर फोकस करने के साथ ही बातचीत के माध्यम से चीनी सेना (पीएलए) के साथ वार्ता भी जारी रखी है। अब तक हुईं 13 दौर की वार्ताओं के दौरान एलएसी के कई विवादित इलाकों में आपसी सहमति से सैनिकों को पूरी तरह से हटाने की प्रक्रिया भी पूरी हुई है।जनरल नरवणे ने आज मोल्डो में हो रही कोर कमांडर स्तर की 14वीं वार्ता के बारे पूछे जाने पर उम्मीद जताई कि आने वाले दिनों में हम इसमें प्रगति देखेंगे। 

उन्होंने साफ कहा कि एलएसी से आंशिक तौर पर सैनिक पीछे हटे हैं, लेकिन खतरा किसी भी तरह से कम नहीं हुआ है। सेना प्रमुख ने भारत की उत्तरी सीमा पर स्थिति को लेकर कहा कि किसी भी आकस्मिक स्थिति से निपटने के लिए आवश्यक सुरक्षा कदम उठाए गए हैं। उन्होंने कहा कि हमने पूर्वी लद्दाख समेत पूरे नॉर्दर्न फ्रंट में फोर्स, इंफ्रास्ट्रक्चर, हथियारों की क्षमता बढ़ाई है। उत्तरी सीमा पर पिछले डेढ़ साल में हमारी क्षमता कई तरह से बढ़ी है। उन्होंने कहा कि पहले विवादित क्षेत्रों से विस्थापन होना है, फिर हम डी-इंडक्शन और वापस जाने की बात कर सकते हैं। पाकिस्तान सीमा के बारे में किये गए सवाल के जवाब में जनरल नरवणे ने स्वीकार किया कि पश्चिमी मोर्चे पर विभिन्न लॉन्च पैड में आतंकवादियों की संख्या में वृद्धि हुई है और बार-बार नियंत्रण रेखा के पार घुसपैठ के प्रयास किए गए हैं। यह एक बार फिर हमारे पश्चिमी पड़ोसी के नापाक मंसूबों को उजागर करता है। नगालैंड में नागरिक हत्याओं की जांच की स्थिति पर सेना प्रमुख ने बताया कि सेना की जांच अंतिम चरण में है, रिपोर्ट एक या दो दिन में आनी चाहिए। देश का कानून सर्वोपरि है और उसी के अनुसार कार्रवाई की जाएगी। हम ऑपरेशन के दौरान भी अपने देशवासियों की सुरक्षा के लिए प्रतिबद्ध हैं।

अरुणाचल प्रदेश में चीन के बुनियादी ढांचे के निर्माण की खबरों पर सेना प्रमुख बोले कि ऐसा इसलिए होता है क्योंकि एलएसी अनिर्धारित है, इसलिए दोनों देशों में सीमा को लेकर अलग-अलग धारणाएं हैं कि सीमा वास्तव में कहां है। सीमा के मुद्दे अनसुलझे रहने तक इस तरह के मुद्दे सामने आते रहेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि द्विपक्षीय संबंधों में अंतर खत्म करने के लिए इन समस्याओं का दीर्घकालीन समाधान खोजना है। हम अपनी सीमाओं के साथ अच्छी तरह से तैयार हैं और जरा भी संदेह नहीं करना चाहिए कि कोई भी अपनी मनमर्जी से सीमा की यथास्थिति बदल सकता है। सेना प्रमुख जनरल एमएम नरवणे ने कहा कि चीन से बातचीत चल रही है और हमेशा उम्मीद है कि हम बातचीत के माध्यम से अपने मतभेदों को सुलझाने में सक्षम होंगे। एलएसी को लेकर 01 जनवरी से लागू हुए चीन के नए कानून के बारे में जनरल नरवणे ने कहा कि हम पर वह कोई भी कानून जाहिर तौर पर लागू नहीं हो सकता जो कानूनी रूप से अमान्य और हमारे साथ अतीत में हुए समझौतों के अनुरूप न हो।


बुधवार, 12 जनवरी 2022

भारत-चीन सीमा पर तनाव, बीजिंग को आगाह किया

भारत-चीन सीमा पर तनाव, बीजिंग को आगाह किया    

अखिलेश पांडेय        नई दिल्ली/ बीजिंग/ वाशिंगटन डीसी। भारत-चीन सीमा पर बने तनाव के बीच अमेरिका ने बीजिंग को आगाह किया है कि पड़ोसी देशों को 'धमकी देने' की उसकी कोशिशें फिक्र बढ़ाने वाली हैं। अमेरिका ने ये भी कहा है कि वो अपने 'साझेदार देशों के साथ खड़ा रहेगा। भारत और चीन के बीच पूर्वी लद्दाख क्षेत्र में बीते करीब डेढ़ साल से ज़्यादा वक़्त से तनाव की स्थिति बनी हुई है। दिक्कतों को दूर करने के लिए दोनों देशों के बीच सैन्य स्तर की बातचीत के कई दौर हो चुके है। लेकिन अब तक समाधान हासिल नहीं हुआ है। अमेरिका का ताज़ा बयान ऐसे वक्त आया है जब भारत और चीन के बीच सैन्य स्तर की बातचीत का 14वां दौर शुरू होने को है।

समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक कोर कमांडर स्तर की ये बातचीत बुधवार (12 जनवरी) को हो सकती है। वहीं, चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता वांग वेनबिन ने बताया है, दोनों पक्षों में बनी सहमति के मुताबिक चीन और भारत के कोर कमांडरों की बैठक 12 जनवरी को चीनी पक्ष की ओर मोल्डो मीटिंग प्वाइंट पर होगी।

मंगलवार, 11 जनवरी 2022

57 वर्षीय व्यक्ति में सुअर का दिल प्रत्यारोपित किया

57 वर्षीय व्यक्ति में सुअर का दिल प्रत्यारोपित किया    

सुनील श्रीवास्तव        वाशिंगटन डीसी। अमेरिकी शल्य चिकित्सकों ने नए साल के पहले पखवाड़े में बड़ी कामयाबी पाई है। उन्होंने 57 साल के एक व्यक्ति में आनुवंशिक रूप से परिवर्तित एक सूअर का दिल सफलतापूर्वक प्रत्यारोपित कर इतिहास रच दिया। दुनिया के चिकित्सा जगत के लिए यह बड़ी अच्छी खबर है। इससे हृदय प्रत्यारोपण के क्षेत्र में क्रांतिकारी बदलाव आ सकते हैं। इससे हृदय की गंभीर बीमारियों से जूझ रहे लाखों लोग के दिल के प्रत्यारोपण का नया रास्ता खुल गया है। अमेरिका के दवा नियामक एफडीए ने इस सर्जरी के लिए नए साल की पूर्व संध्या पर मंजूरी दी थी। सूअर के दिल के प्रत्यारोपण की यह आपात मंजूरी 57 साल के इस पीड़ित व्यक्ति की जान बचाने के लिए अंतिम उपाय थी।

यह ऐतिहासिक सर्जरी शुक्रवार को संपन्न हुई। यूनिवर्सिटी आफ मैरीलैंड मेडिकल स्कूल ने सोमवार को को बयान जारी कर इस सर्जरी के बारे में मीडिया को जानकारी दी। यह शल्य चिकित्सा पशुओं के अंगों के इंसान में प्रत्यारोपण की दिशा में मील का पत्थर साबित होगी। यूनिवर्सिटी के बयान के अनुसार पीड़ित डेविड बेनेट की हालत काफी नाजुक थी। इसलिए उसकी जान बचाने के लिए आनुवांशिक रूप से परिवर्तित सूअर का हृदय प्रत्यारोपित करने का फैसला किया गया। डेविड की हालत में अब सुधार हो रहा है और उस पर पूरी नजर रखी जा रही है कि नया अंग किस तरह काम कर रहा है। बेनेट का परंपरागत रूप से होने वाले हृदय प्रत्यारोपण नहीं हो सकता था, इसलिए अमेरिकी चिकित्सकों ने यह बड़ा फैसला लेकर सूअर का दिल प्रत्यारोपित कर दिया।

मैरीलैंड के रहने वाले डेविड ने सर्जरी के एक दिन पहले कहा था कि उसके सामने दो ही रास्ते थे। एक ओर मौत थी और दूसरी ओर इस प्रत्यारोपण के जरिए नए जीवन की आस। अंधेरे में चौका लगाना मेरे लिए अंतिम विकल्प था। बेनेट पिछले कई माहों से बिस्तर पर ही हार्ट-लंग बायपास मशीन के सहारे जी रहे थे। उन्होंने उम्मीद है कि अब वह एक बार फिर उठ खड़े होंगे।

पाकिस्तान-अफगानिस्तान बॉर्डर पर धमाका, 9 मौंत

अखिलेश पांडेय         काबूल/ इस्लामाबाद। पाकिस्तान-अफगानिस्तान में एक बम धमाके में 9 बच्चों की मौत हो गई। जबकि चार गंभीर रूप से घायल हैं। यह ब्लास्ट पाकिस्तान और अफगानिस्तान बॉर्डर पर हुआ। धमाका नांगरहार के लालोपुर में एक स्कूल के सामने खाने का सामान ले जा रही गाड़ी में हुआ। इस गाड़ी में एक मोर्टार छिपाकर रखा गया था और लालोपुर जिले की चौकी पर जैसे ही यह गाड़ी पहुंची, वहां ब्लास्ट हो गया।

इस इलाके में आतंकी संगठन इस्लामिक स्टेट सक्रिय है और उसकी तालिबान से अक्सर हिंसक झड़पें होती रहती हैं। पिछले महीने भी नांगरहार प्रांत के एक कस्बे में धमाका हुआ था और उसमें 4 महिलाओं समेत 7 लोग मारे गए थे।

मेक्सिको के राष्ट्रपति एंड्रेस कोरोना संक्रमित मिलें

सुनील श्रीवास्तव      मेक्सिको सिटी। मेक्सिको के राष्ट्रपति एंड्रेस मैनुअल लोपेज़ ओब्रेडोर कोरोना पॉजिटिव पाए गए हैं। लोपेज़ ओब्रेडोर ने खुद ही इस बात की जानकारी दी है। उन्होंने कहा कि वह फिर से कोविड ​​-19 से संक्रमित हो गए हैं और उनमें इस वायरस के हल्के लक्ष्ण हैं। उन्होंने ट्वीट कर कहा, "मैं आप लोगों को बताना चाहता हूं कि मैं कोविड-19 से संक्रमित हो गया हूं और मुझमें इस वायरस के हल्के लक्षण हैं। मैं आइसोलेशन में रहूंगा और स्वस्थ होने तक मैं आभासी तरीके से सिर्फ दफ्तर के कार्य और संवाद करूंगा।"

उल्लेखनीय है कि यह दूसरा मौका है, जब मेक्सिको के राष्ट्रपति ओब्रेडोर कोरोना वायरस की चपेट में आए हैं। इससे पहल वह 2021 में जनवरी महीने की आखिर में कोविड-19 से संक्रमित हुए थे।


अमेरिका: वेरिएंट 'ओमिक्रोन' का कहर लगातार बढ़ा

अखिलेश पांडेय      वाशिंगटन डीसी। महाशक्ति माने जाने वाले अमेरिका के भीतर कोरोना के नए वेरिएंट का कहर लगातार आगे बढ़ता लोगों पर टूट रहा है। अस्पतालों में भर्ती मरीजों की संख्या सरकार के सामने नया संकट खड़ा कर रही है। पिछली लहर के पीक का रिकॉर्ड कोरोना के नए वेरिएंट ओमिक्रॉन ने तोड़ दिया है। अमेरिका के स्वास्थ्य विभाग की ओर से बताया गया है कि देश के अस्पतालों में फिलहाल 142388 कोरोना संक्रमण के मरीज भर्ती है, जबकि पिछली लहर के पीक के दौरान 14 जनवरी को 142315 मरीज ही अस्पतालों में भर्ती हुए थे। कोरोना संक्रमण के चलते चिंताजनक स्थिति यह भी उत्पन्न हो रही है कि पिछले दो हफ्तों के औसत से भी 83 फ़ीसदी ज्यादा मरीज अब अस्पतालों में भर्ती हो रहे हैं। 

अस्पतालों में भर्ती होने वाले मरीजों की उम्र ज्यादातर 60 साल से कम है। 60 साल से ऊपर के मरीजों के अस्पताल में भर्ती होने की तादाद अभी तक भी पिछले साल के मुकाबले काफी कम है। अस्पताल में भर्ती कराए गए मरीजों में ऐसे लोग भी अनेक लोग शामिल है जो किसी अन्य बीमारी का इलाज कराने के लिए अस्पताल में पहुंचे थे और वह जांच के दौरान कोरोना संक्रमित पाए गए थे।

जर्मनी: प्रीमियम एसयूवी क्यू-7 के लिए बुकिंग प्रारंभ

अखिलेश पांडेय         बर्लिन। जर्मनी की लक्जरी कार विनिर्माता कंपनी एयूडीआई इंडिया ने अगली पीढ़ी की अपनी प्रीमियम एसयूवी क्यू-7 के लिए बुकिंग शुरू कर दी है। कंपनी ने मंगलवार को कहा कि 3,000सीसी के शक्तिशाली इंजन से लैस नयी पीढ़ी की क्यू7 को पांच लाख रुपये के अग्रिम भुगतान के साथ बुक किया का सकता है। एयूडीआई इंडिया के प्रमुख बलबीर सिंह ढिल्लों ने एक बयान में कहा कि वर्ष 2021 में नौ उत्पाद पेश करने के बाद हम एक और अविश्वसनीय पेशकश के साथ नए साल में कदम रखने के लिए उत्साहित हैं। उन्होंने कहा कि ऑडी क्यू7 को ग्राहकों ने हमेशा सड़क पर अपनी शानदार उपस्थिति और बहुमुखी प्रदर्शन के लिए पसंद किया है।

एयूडीआई क्यू 7 के साथ, कंपनी अब इसे नए डिजाइन और विशेषताओं के साथ एक पायदान ऊपर ले जा रही है। ऑडी इंडिया ने कहा कि क्यू7 प्रीमियम प्लस और टेक्नोलॉजी जैसे दो अलग-अलग मॉडल में उपलब्ध होगी।


सोमवार, 10 जनवरी 2022

शरणार्थियों के कैंप में आग, 1200 घर जलकर खाक

शरणार्थियों के कैंप में आग, 1200 घर जलकर खाक       

सुनील श्रीवास्तव        ढाका। बांग्लादेश के कॉक्स बाजार में स्थित रोहिंग्या शरणार्थियों के कैंप में भीषण आग लगने की सूचना है। रिपोर्ट्स के मुताबिक आग में करीब 1200 रोहिंग्या शरणार्थियों के घर जलकर खाक हो गए। यह सब तब हुआ जब यहां स्थित कैंप16 शरणार्थी शिविर के काटा इलाके में रविवार को अचानक आग लग गई।आग लगने के कारणों का अभी पता नहीं चल पाया है। अब तक किसी के हताहत होने की सूचना नहीं है। दअरसल, रिपोर्ट के हवाले से बताया है कि पुलिस बटालियन के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक कामरान हुसैन ने बताया कि आग रविवार शाम करीब पांच बजे लगी है। उन्होंने कहा कि आग तेजी से फैली और लगभग 1200 रोहिंग्या शरणार्थी घरों को नष्ट कर दिया। कॉक्स बाजार में उखिया फायर स्टेशन के स्टेशन अधिकारी ने बताया कि आग को रात तक बुझाया गया। 

जानकारी के मुताबिक, शाम करीब 4.50 बजे आग लगने की सूचना मिलते ही दमकल की चार इकाइयां कॉक्स बाजार में मौके पर पहुंचे। स्थानीय लोगों ने बताया कि शाम करीब पांच बजे उन्होंने कैंप के ऊपर घना धुंआ उठते देखा। स्थानीय निवाली सद्दाम हुसैन ने बताया कि उन्होंने अचानक देखा कि आग में सैकड़ों घर जल रहे हैं।

इसे काबू करने में अग्निशमन सेवा और अन्य सरकारी एजेंसियों ने कड़ी मेहनत की। यह पहली बार नहीं है। जब रोहिंग्या शिविरों में आग लगी है। कॉक्स बाजार में रोहिंग्या शिविरों में आग लगने की घटनाएं आम हो गई हैं। संबंधित अधिकारियों ने अक्सर ही गैस सिलेंडर को आग लगने के लिए जिम्मेदार ठहराया है। लेकिन इस बार रोहिंग्या शिविरों के कुछ लोगों ने दावा किया है कि आग आगजनी का परिणाम है।


चीन के कर्ज को कम करने की अपील: श्रीलंका
अखिलेश पांडेय        
कोलंबो। चीन के भारी-भरकम कर्ज के बोझ में दब चुके श्रीलंका ने चीनी विदेश मंत्री वांग यी से रहम की गुहार लगाई है। श्रीलंका ने चायनीज विदेश मंत्री वांग यी से श्रीलंका की खराब आर्थिक हालत को देखते हुए भारी कर्ज के बोझ को कुछ कम करने की अपील की है। श्रीलंका के राष्ट्रपति गोटबाया राजपक्षे के कार्यालय ने रविवार को एक बयान में कहा कि, 'राष्ट्रपति ने कहा कि अगर महामारी के बाद आर्थिकसंकट को देखते हुए कर्ज भुगतान को पुनर्निर्धारित किया जा सकता है तो यह एक बड़ी राहत होगी।
'आपको बता दें कि, श्रीलंका आर्थिक दिवालिएपन की कगार पर खड़ा हो चुका है और इस बीच चीनके विदेश मंत्री श्रीलंका के दौरे पर पहुंचे हैं और विश्लेषकों का मानना है कि, चीन के विदेश मंत्रीश्रीलंका पर और ज्यादा प्रेशर बनाने के लिए पहुंचे हैं।
श्रीलंका ने अंतर्राष्ट्रीय चेतावनी को दरकिनार करते हुए चीन से जी-भरकर कर्ज लिया है और अब स्थिति ये है कि, चीन, श्रीलंका का सबसे बड़ा द्विपक्षीय ऋणदाता है और चायनीज विदेश मंत्री वांग यी की यात्रा अंतरराष्ट्रीय रेटिंग एजेंसियों की चेतावनी के बाद हुई है, कि श्रीलंका की राजपक्षे की सरकार डिफॉल्ट के कगार पर हो सकती है। विश्लेषकों का मानना है कि, श्रीलंकी की सत्ता पर पिछले कई सालों से काबिज राजपक्षे परिवार ने देश की आर्थिक हालात को बर्बाद करके रख दिया है और इस साल के अंत तक श्रीलंका दिवालिया हो सकता है। वहीं, पर्यटन पर निर्भर रहने वाले श्रीलंका की स्थिति कोविड महामारी ने और भी ज्यादा बर्बाद कर दी है और देश का विदेशी मुद्रा भंडार खत्म हो गया है, वहीं, श्रीलंका के बाजारों में खाने-पीने की आवश्यक वस्तुएं भी खत्म हो चुकी हैं और महंगाई काफी ज्यादा बढ़ चुकी है।

श्रीलंका की सरकार ने देश में इन्फ्रास्ट्रक्चर के विकास के नाम पर चीन से भारी-भरकम कर्ज उधार लिया है और कर्ज का एक बड़ा हिस्सा उन प्रोजेक्ट्स में खत्म हो चुके हैं, जो श्रीलंका के लिए सफेद हाथी पालने जैसा है। यानि, उन प्रोजेक्ट्स से सिर्फ चीन को ही फायदा होना है और श्रीलंका को कुछ नहीं मिलने वाला। चीन यही काम पाकिस्तान में भी कर रहा है, लेकिन इस वक्त पाकिस्तान को भी आटे-दाल की कीमत समझ नहीं आ रही है। श्रीलंकन सरकार की रिपोर्ट के मुकाबिक, दक्षिणी श्रीलंका में एक बंदरगाह निर्माण के लिए श्रीलंका ने चीन ने 1.4 अरब डॉलर का कर्ज लिया हुआ है, लेकिन अब वो इस कर्ज को चुकाने में सक्षम नहीं है। वही, चीन साल 2017 में श्रीलंका से कोबंलो में बनाया गया हंबनटोटा बंदरगाह 99 सालों के लिए छीन चुका है और हंबनटोटा बंदरगाह निर्माण के लिए भी श्रीलंका ने चीन से भारी कर्ज लिया था और उसे भी चुकाने में असमर्थ हो गया था। भारत और अमेरिका ने श्रीलंका को कई बार चायनीज कर्ज को लेकर चेतावनी दी थी हंबनटोटा पोर्ट के लिए श्रीलंका चीन के साथ सौदा नहीं करे, क्योंकि इससे चीन को सीधे तौर पर हिंद महासागर में एंट्री मिल जाएगी, लेकिन चीन के प्रेम में पड़े श्रीलंका की सरकार ने तमाम चेतावनियों को नजरअंदाज कर दिया और फिर बाद में हंबनटोटा पोर्ट हाथ से गंवा दिया।श्रीलंकन सरकार की रिपोर्ट के मुकाबिक, दक्षिणी श्रीलंका में एक बंदरगाह निर्माण के लिए श्रीलंका ने चीन ने 1.4 अरब डॉलर का कर्ज लिया हुआ है। 

लेकिन अब वो इस कर्ज को चुकाने में सक्षम नहीं है। वही, चीन साल 2017 में श्रीलंका से कोबंलो में बनाया गया हंबनटोटा बंदरगाह 99 सालों के लिए छीन चुका है और हंबनटोटा बंदरगाह निर्माण के लिए भी श्रीलंका ने चीन से भारी कर्ज लिया था और उसे भी चुकाने में असमर्थ हो गया था। भारत और अमेरिका ने श्रीलंका को कई बार चायनीज कर्ज को लेकर चेतावनी दी थी हंबनटोटा पोर्ट के लिए श्रीलंका चीन के साथ सौदा नहीं करे, क्योंकि इससे चीन को सीधे तौर पर हिंद महासागर में एंट्री मिल जाएगी, लेकिन चीन के प्रेम में पड़े श्रीलंका की सरकार ने तमाम चेतावनियों को नजरअंदाज कर दिया और फिर बाद में हंबनटोटा पोर्ट हाथ से गंवा दिया।

श्रीलंका के प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति पद, दोनों कुर्सी पिछले कई सालों से राजपक्षे परिवार के पास ही है और राजपक्षे परिवार के कार्यकाल में श्रीलंका ने चीन के साथ खूब दोस्ती बढ़ाई है। विकास के नाम पर श्रीलंका ने चीन से अंधाधुंध कर्ज लिया है और अब स्थिति ये है कि, श्रीलंका के पास ड्रैगन का कर्ज चुकाने के लिए पैसे ही नहीं बचे हैं और इसका फायदा उठाकर चीन श्रीलंका की रणनीतिक और सैन्य लिहाज से महत्वपूर्ण ठिकानों को 'कब्जाने' की कोशिश में है, ताकि वो हिंद महासागर में घुसकर भारत को चुनौती दे सके।

वहीं, श्रीलंका के विपक्षी सांसद और अर्थशास्त्री हर्षा डी सिल्वा ने हाल ही में संसद को बताया कि जनवरी 2022 तक देश का विदेशी मुद्रा भंडार माइनस 43.7 करोड़ डॉलर होगा, जबकि फरवरी से अक्टूबर 2022 तक देश को कुल 4.8 अरब डॉलर का विदेशी कर्ज चुकाना है। उन्होंने देश की संसद में कहा कि, 'श्रीलंका पूरी तरह से दिवालिया हो जाएगा'। वहीं, सेंट्रल बैंक के गवर्नर अजीत निवार्ड काबराल ने सार्वजनिक आश्वासन दिया कि श्रीलंका अपने कर्ज को धीरे धीरे चुकाने में सक्षम हो सकता है, लेकिन श्रीलंका के रिजर्व बैंक के पूर्व उप-गवर्नर विजेवर्धने ने कहा कि श्रीलंका के ऊपर डिफॉल्टर होने का खतरा मंडरा रहा है और अगर ऐसा होता है, तो इसके अंजाम भयानक होंगे।

वहीं, श्रीलंकन अखबार द संडे मॉर्निंग की रिपोर्ट के मुताबिक, मुश्किल में फंसे श्रीलंका को गंभीर वित्तीय संकट से निकालने के लिए भारत सरकार 1.9 अरब डॉलर की मदद देने के लिए तैयार हो गई है। अखबार की रिपोर्ट के मुताबिक, भारत से 90 करोड़ डॉलर की दो वित्तीय सहायता पैकेज इसी महीने श्रीलंका पहुंचेंगे। भारत सरकार के सूत्रों ने द संडे मॉर्निंग को पुष्टि की है कि, 40 करोड़ डॉलर स्वैप सुविधा के तहत दी जाएगी, जबकि ईंधन के लिए 50 करोड़ डॉलर की क्रेडिट लाइन श्रीलंका को दी जाएगी। माना जा रहा है कि इनमें से एक सुविधा 10 जनवरी तक श्रीलंका सरकार के खजाने में पहुंच जाएगी। अखबार की रिपोर्ट के मुताबिक, श्रीलंका सरकार के अनुरोध पर भारत सरकार इस द्वीप की मदद के लिए तैयार हुई है, जो पहले चीन की तरफ झुकी दिखाई देती थी।

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