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गुरुवार, 23 सितंबर 2021

जापान को शामिल करने की संभावना खारिज की

वाशिंगटन डीसी। अमेरिका ने हाल में हिंद-प्रशांत की सुरक्षा के लिए ऑस्ट्रेलिया तथा ब्रिटेन के साथ मिलकर बनाए त्रिपक्षीय गठबंधन ‘ऑकस’ (एयूकेयूएस) में भारत या जापान को शामिल किए जाने की संभावना को खारिज कर दिया है। व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव जेन साकी ने दैनिक संवाददाता सम्मेलन में कहा कि पिछले हफ्ते ऑकस की घोषणा केवल सांकेतिक नहीं थी और मुझे लगता है कि राष्ट्रपति जो बाइडन ने भी फ्रांस के राष्ट्रपति एमैनुएल मैक्रों को यही संदेश दिया है कि हिंद-प्रशांत की सुरक्षा के लिए बनाए गठबंधन में किसी अन्य देश को शामिल नहीं किया जाएगा। 
साकी से सवाल किया गया था कि क्या भारत या जापान को इस गठबंधन में शामिल किया जाएगा, जिसके जवाब में उन्होंने उक्त जवाब दिया। अमेरिका, ब्रिटेन और ऑस्ट्रेलिया ने हिंद-प्रशांत में चीन के बढ़ते प्रभाव के बीच रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण इस क्षेत्र के लिए नए त्रिपक्षीय सुरक्षा गठबंधन ‘ऑकस’ (एयूकेयूएस) की 15 सितंबर को घोषणा की थी, ताकि वे अपने साझा हितों की रक्षा कर सकें और परमाणु ऊर्जा से संचालित पनडुब्बियां हासिल करने में ऑस्ट्रेलिया की मदद करने समेत रक्षा क्षमताओं को बेहतर तरीके से साझा कर सकें।
इस समझौते के कारण उसने फ्रांस के साथ अनुबंध रद्द कर दिया है। फ्रांस ने गठबंधन में उसको शामिल ना करने की आलोचना की थी और कहा था कि जब हिंद-प्रशांत क्षेत्र में आम चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है तो यह सुसंगतता की कमी को दर्शाता है। साकी ने कहा  कि यकीनन, इस क्षेत्र में प्रत्यक्ष रुचि रखने वाले फ्रांस समेत कई देशों के साथ बातचीत के लिए एक महत्वपूर्ण विषय है।

अफगान के सभी वर्गों का प्रतिनिधित्व: विदेशमंत्री

एल्बनि। विदेश मंत्री एस जयशंकर ने जी20 देशों से कहा कि तालिबान को अफगानिस्तान की जमीन का इस्तेमाल आतंकवाद के लिए किसी भी प्रकार से नहीं करने देने की अपनी प्रतिबद्धता लागू करनी चाहिए और दुनिया को एक ऐसी व्यापक एवं समावेशी प्रक्रिया की अपेक्षा है। जिसमें अफगान समाज के सभी वर्गों का प्रतिनिधित्व हो।
जयशंकर ने संयुक्त राष्ट्र महासभा के 76वें उच्चस्तरीय सत्र के इतर बुधवार को जी20 के विदेश मंत्रियों की एक बैठक को संबोधित किया, जिसमें अफगानिस्तान में मौजूदा हालात पर चर्चा की गई। जयशंकर ने डिजिटल बैठक के बाद ट्वीट किया, ”मानवीय आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए अंतरराष्ट्रीय समुदाय को एकजुट होकर काम करना चाहिए। सहायता देने वालों को निर्बाध, बिना किसी प्रतिबंध के और सीधी पहुंच प्रदान की जानी चाहिए।”
उन्होंने कहा, ”अफगानिस्तान की जमीन का इस्तेमाल आतंकवाद के लिए किसी भी प्रकार से नहीं करने देने की तालिबान की प्रतिबद्धता का क्रियान्वयन किया जाना चाहिए। दुनिया को एक ऐसी व्यापक एवं समावेशी प्रक्रिया की उम्मीद है, जो अफगान समाज के सभी वर्गों का प्रतिनिधित्व करती हो।” अफगानिस्तान से अमेरिकी बलों की वापसी के बाद तालिबान ने पिछले महीने वहां अपना कब्जा कर लिया है।
तालिबान ने कहा है कि अफगानिस्तान की जमीन का इस्तेमाल किसी भी देश के खिलाफ नहीं किया जाएगाा। जयशंकर ने कहा कि अफगानिस्तान पर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद का प्रस्ताव 2593 वैश्विक भावना को दर्शाता है और इसे ”हमारे दृष्टिकोण का मार्गदर्शन करना जारी रखना चाहिए। भारत की भागीदारी अफगान लोगों के साथ उसकी ऐतिहासिक मित्रता से संचालित होगी”।

पहचान बनाने के लिए प्रवासियों की प्रशंसा की

वाशिंगटन डीसी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दुनिया भर में अपनी अलग पहचान बनाने के लिए भारतीय प्रवासियों की प्रशंसा की है। मोदी के यहां पहुंचने पर भारतीय-अमेरिकी समुदाय ने उनका गर्मजोशी से स्वागत किया। प्रधानमंत्री का विमान बुधवार को जैसे ही हवाई अड्डे पर उतरा, उसके तुरंत बाद भारतीय अमेरिकियों के एक समूह ने उनका स्वागत किया। इसके बाद मोदी ने होटल में समुदाय के सदस्यों के साथ संवाद किया। 
प्रधानमंत्री ने भारतीय-अमेरिकी मुख्य कार्यकारी अधिकारियों (सीईओ) के साथ अपने संवाद की तस्वीरें ट्वीट कीं और लिखा, ”मैं गर्मजोशी से स्वागत करने के लिए वाशिंगटन डीसी स्थित भारतीय समुदाय का आभारी हूं। 
भारतीय प्रवासी हमारी ताकत हैं।” मोदी ने कहा, ” भारतीय प्रवासियों ने जिस प्रकार दुनियाभर में अपनी अलग पहचान बनाई है, वह प्रशंसनीय है।”
प्रधानमंत्री की विदेश यात्राओं में बड़ी संख्या में भारतीय प्रवासियों की सभाएं तथा बैठकें उनके कार्यक्रम का अहम हिस्सा रही हैं, लेकिन कोविड-19 संबंधी मौजूदा हालात के कारण प्रधानमंत्री इस बार कोई बड़ी सभा संभवत: नहीं करेंगे। भारतीय-अमेरिकियों के बीच मोदी काफी लोकप्रिय है। अमेरिका की जनसंख्या में 1.2 प्रतिशत से अधिक लोग भारतीय-अमेरिकी हैं।

बुधवार, 22 सितंबर 2021

बाइडन ने संयुक्‍त राष्‍ट्र महासभा को किया संबोधित

नई दिल्ली/ वाशिंगटन डीसी। अमेरिकी राष्‍ट्रपति जो बाइडन ने संयुक्‍त राष्‍ट्र महासभा को पहली बार संबोधित किया। उनका यह भाषण इसलिए अहम है क्‍योंकि उन्‍होंने इसमें अमेरिकी विदेश नीति की तस्‍वीर को साफ कर दिया है। उनके भाषण में सबसे ज्‍यादा चिंता चीन की दिखी। उन्‍होंने कहा कि अमेरिका अब किसी दूसरे शीतयुद्ध का कारण नहीं बनेगा। बाइडन के पूर्ववर्ती डोनाल्‍ड ट्रंप के विपरीत उन्‍होंने चीन और रूस के साथ बढ़ते तनाव को कम करने का भी संदेश दिया है। बाइडन ने कोरोना वायरस, आतंकवाद, अफगानिस्‍तान और ईरान पर भी अपनी नीति को स्‍पष्‍ट किया है। अफगानिस्‍तान मुद्दे पर देश की नाराजगी झेल रहे बाइडन ने अमेरिकी नीति को साफ किया। आइए जानते हैं कि बाइडन के भाषण का क्‍या है निहितार्थ।

प्रो. हर्ष वी पंत का कहना है कि अमेरिकी राष्‍ट्रपति के भाषण का इंतजार सभी को था। रूस और चीन की निगाहें भी उनके भाषण पर टिकी थी। उन्‍होंने कहा कि संयुक्‍त राष्‍ट्र में बाइडन ने एक तरह से अमेरिकी विदेश नीति का एजेंडा तय किया है। उन्‍होंने कहा कि बाइडन ने दुनिया के सभी ज्‍वलंत मुद्दों को उठाया है। उन्‍होंने सारे पहलुओं को छुआ है, जो बाइडन प्रशासन के लिए चिंता का व‍िषय है।

मधुमक्खियों ने 64 अफ्रीकन पेंग्विंस को मार डाला

प्रिटोरिया। दक्षिण अफ्रीका में एक बेहद विचित्र घटना हुई है। इससे साइंटिस्ट भी हैरान है। न जाने किस बात से नाराज मधुमक्खियों ने 64 अफ्रीकन पेंग्विंस को मार डाला। इन पेंग्विंस की प्रजाति खतरे में है। मधुमक्खियों ने इनकी आंखों पर हमला किया। आंखों में डंक मारकर जो जहर छोड़ा उससे इन प्यारे पेंग्विंस की मौत हो गई। पूरी दुनिया में इस प्रजाति के सिर्फ 42 हजार पेंग्विंस ही बचे है।

अफ्रीकन पेंग्विंस को वैज्ञानिक भाषा में स्फेनिसकस डेमेरसस कहते हैं। जिन मधुमक्खियों ने इन पर हमला किया उनका नाम केप हनी-बी है। साउथ अफ्रीकन नेशनल पार्क ऑर्गेनाइजेशन के रेंजर्स ने केप टाउन के पास टेबल माउंटेन नेशनल पार्क में 64 पेंग्विंस को मरा हुआ पाया। इस पार्क में इन पेंग्विंस को संरक्षित और बचाने के लिए रखा गया था। पेंग्विंस की यह प्रजाति इंटरनेशनल यूनियन फॉर कंजरवेशन ऑफ नेचर की लाल सूची है।

नेता खड़का को नेपाली विदेश मंत्री नियुक्त किया

मंगलवार शाम को बालुवतार में देउबा के आवास पर सत्तारूढ़ पार्टी के गठबंधन के शीर्ष नेताओं की बैठक में प्रधानमंत्री ने नेपाल के नए विदेश मंत्री के तौर पर खड़का के नाम का प्रस्ताव रखा था।

खड़का ने पुणे में एक विश्वविद्यालय से अर्थशास्त्र में पीएचडी की है। अभी तक विदेश मंत्री का प्रभार प्रधानमंत्री के पास था। देउबा के नेतृत्व में नयी सरकार का गठन होने के दो महीने से अधिक समय बाद भी विदेश मंत्री का पद रिक्त था। खड़का की नियुक्ति से सरकार में अब देउबा और एक राज्य मंत्री समेत कुल सात मंत्री हैं। खड़का 1990 में तत्कालीन प्रधानमंत्री कृष्ण प्रसाद भट्टराय के सलाहकार रहे थे। वह 2014 में शहरी विकास मंत्री भी रह चुके हैं।

कनाडा के लोगों ने जस्टिन ट्रूडो पर विश्वास जताया

ओटावा। कनाडा के लोगों ने एक बार फिर जस्टिन ट्रूडो पर विश्वास जताया है। टेलीविजन नेटवर्क के अनुमानों के अनुसार, कनाडा के लोगों ने लिबरल प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो को एक बार फिर सत्ता मे लौटा दिया है, लेकिन वह पूर्ण बहुमत हासिल करने में विफल रहे हैं।
पिछले महीने अचानक चुनाव का आह्वान किया था। हालांकि पांच सप्ताह के चुनाव प्रचार के बाद उनकी अधिकतर सीटों पर बड़ी जीत की मंशा पूरी नहीं हो सकी है। इन चुनावों में लिबरल पार्टी ने अन्य किसी भी पार्टी की तुलना में सबसे अधिक सीटें हासिल की हैं। ट्रूडो ने एक ट्वीट किया, थैंक यू कनाडा, अपना वोट डालने के लिए लिबरल टीम में अपना विश्वास रखने के लिए, एक उज्जवल भविष्य के चुनाव के लिए। हम कोविड के खिलाफ लड़ाई खत्म करने जा रहे हैं और कनाडा को आगे बढ़ाने जा रहे हैं। साल 2015 में ट्रूडो ने अपने दिवंगत पिता और पूर्व प्रधानमंत्री पियरे ट्रूडो की लोकप्रियता के सहारे जीत हासिल की थी। हालांकि इसके बाद दो बार उन्होंने अपने दम पर पार्टी को जीत दिलाई। 
खबर देने तक कनाडा चुनाव में लिबरल पार्टी 148 सीट पर और कंजरवेटिव पार्टी 103 सीटों पर आगे है, ब्लॉक क्यूबेकोइस 28 और वामपंथी न्यू डेमोक्रेटिक पार्टी 22 सीटों पर आगे चल रहे हैं। 

अमेरिका के रूप में 'प्रतिबद्ध शत्रु' मिलता रहेगा

वाशिंगटन डीसी। अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन ने मंगलवार को राष्ट्रों से आह्वान किया कि वे दुनिया के “सुदूर क्षेत्रों” या “हमारे अपने आसपास” से पैदा होने वाले आतंकवाद के खतरे के प्रति सतर्क रहें। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि जो लोग अमेरिका के खिलाफ आतंकवादी गतिविधियों को अंजाम देते हैं, उन्हें अमेरिका के रूप में एक-एक “प्रतिबद्ध शत्रु” मिलता रहेगा।
बाइडन ने अमेरिकी राष्ट्रपति के रूप में संयुक्त राष्ट्र महासभा में अपने पहले संबोधन में कहा कि आज की दुनिया 2001 की दुनिया नहीं है और अमेरिका वही देश नहीं है, ” जब हम पर 20 साल पहले हमला हुआ था।” उन्होंने कहा कि अमेरिका विश्व को कार्रवाई के लिए एकजुट करना चाहता है और हम सिर्फ अपनी शक्ति के जरिए उदाहरण नहीं पेश करेंगे बल्कि ईश्वर की इच्छा के साथ अपने उदाहरण की शक्ति के साथ नेतृत्व करेंगे। उन्होंने कहा कि अमेरिका आतंकवादी खतरों सहित विभिन्न हमलों के खिलाफ अपनी, अपने सहयोगियों और अपने हितों की रक्षा करता रहेगा तथा हम जरूरत पड़ने पर बल प्रयोग करने के लिए तैयार हैं।
उन्होंने कहा कि हमें इस खतरे के प्रति भी सतर्क रहना चाहिए कि आतंकवाद हमारे सभी राष्ट्रों के लिए खतरा है, चाहे वह दुनिया के सुदूर के क्षेत्रों से हो या हमारे अपने आसपास से। पिछले महीने काबुल हवाई अड्डे पर आतंकी हमलों का जिक्र करते हुए बाइडन ने कहा, ”हम आतंकवाद के कड़वे असर को जानते हैं। आतंकवाद का कड़वा असर वास्तविक है। लगभग हम सभी ने इसका अनुभव किया है।” उन्होंने कहा कि पिछले महीने काबुल में हुए एक “घृणित” आतंकवादी हमले में हमने 13 अमेरिकी नायकों और लगभग 200 निर्दोष अफगान नागरिकों को खो दिया।
उन्होंने कहा, “जो लोग अमेरिका के खिलाफ आतंकवादी गतिविधियों को अंजाम देते हैं, उन्हें अमेरिका के रूप में एक प्रतिबद्ध दुश्मन मिलता रहेगा… आज, हम आतंकवादी खतरों को रोकने के लिए, पता लगाने के लिए बेहतर ढंग से सुसज्जित हैं तथा उन्हें पीछे हटाने और जवाब देने की अधिक क्षमता है।” बाइडन ने कहा कि अमेरिका जानता है कि आतंकवादी नेटवर्क को नष्ट करने के लिए उनके वित्त और उनकी मददगार प्रणालियों को लक्षित करके, उनके दुष्प्रचार का मुकाबला करके, उनकी यात्रा को रोकने के साथ-साथ आसन्न हमलों को बाधित करने के लिए प्रभावी साझेदारी कैसे बनाई जाए।

मंगलवार, 21 सितंबर 2021

चीन के साथ 'नया शीत युद्ध' नहीं चाहता अमेरिका

वाशिंगटन डीसी। अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन ने मंगलवार को संयुक्त राष्ट्र महासभा में कहा कि अमेरिका चीन के साथ संबंधों के संदर्भ में "नया शीत युद्ध" नहीं चाहता है। उन्होंने न्यूयॉर्क में विश्व नेताओं से कहा, "संयुक्त राज्य अमेरिका किसी भी राष्ट्र के साथ काम करने के लिए तैयार है। जो चुनौतियों को साझा करने के लिए शांतिपूर्ण समाधान का प्रयास करता है, भले ही हमारे बीच अन्य क्षेत्रों में तीव्र असहमति हो।"

संयुक्त राष्ट्र महासभा के 76वें सत्र को संबोधित करते हुए अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन ने कहा है कि अमेरिका अब वही देश नहीं है, जिस पर 20 साल पहले 9/11 को हमला हुआ था। उन्होंने कहा कि आज हम बेहतर ढंग से सुसज्जित हैं। सभा को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि हम आतंकवाद के कड़वे दंश को जानते हैं। पिछले महीने काबुल हवाई अड्डे पर हुए जघन्य आतंकवादी हमले में हमने 13 अमेरिकी नायकों और कई अफगान नागरिकों को खो दिया।

विश्व: कई देशों में मनाया जाता हैं अलजाइमर दिवस

नई दिल्ली/ वाशिंगटन डीसी। विश्व अल्जाइमर दिवस हर साल कई देशों में 21 सितंबर को मनाया जाता है। यह दिवस अल्जाइमर रोग की रोकथाम तथा जागरूकता फैलाने के लिए हर साल मनाया जाता है। इस दिन का उद्देश्य दुनियाभर के लोगों को डिमेंशिया के लक्षणों के बारे में बताने के साथ डिमेंशिया से पीड़ित रोगियों अथवा इस बीमारी के कारण मृत्यु को प्राप्त होने वाले रोगियों को भी न भूलना है।
अल्जाइमर रोग भूलने का रोग है। इस रोग का नाम अलोइस अल्जाइमर पर रखा गया, जिन्होंने सबसे पहले इसका विवरण दिया। इस बीमारी के कई लक्षण हैं जैसे की याददाश्त की कमी होना, निर्णय न ले पाना, बोलने में दिक्कत आना तथा फिर इसकी वजह से सामाजिक और पारिवारिक समस्याओं की गंभीर स्थिति आदि शामिल हैं। रक्तचाप, मधुमेह, आधुनिक जीवनशैली और सर में कई बार चोट लग जाने से इस बीमारी के होने की आशंका बढ़ जाती है। अमूमन 60 वर्ष की उम्र के आसपास होने वाली इस बीमारी का फिलहाल कोई स्थायी इलाज नहीं है।
अल्जाइमर रोग का सबसे समान्य रूप डिमेंशिया है। यह निरंतर प्रगतिशील होने वाला मस्तिष्क रोग है, जिसके परिणामस्वरूप याददाश्त एवं सोचने की क्षमता में कमी हो जाती हैं। यह रोग मस्तिष्क की कोशिकाओं को नष्ट कर देता है, जिसके कारण याददाश्त में कमी, बदलाव, अनियमित व्यवहार एवं शरीर की प्रक्रियाओं को नुकसान पहुंचता हैं। आमतौर पर यह रोग धीरे-धीरे शुरू होता है लेकिन समय के साथ गंभीर हो जाता है। अल्जाइमर के सबसे सामान्य प्रारंभिक लक्षणों में से एक हाल की घटनाओं को याद करने में कठिनाई है। अल्जाइमर से पीड़ित रोगी अक्सर लोगों के नाम जैसे कि पुराने दोस्तों, पता, यहाँ तक कि सड़कों तथा अन्य वस्तुओं के नाम भी भूल जाते हैं।

अल्जाइमर रोग के लक्षण 
अल्जाइमर के प्रारंभिक लक्षणों में से कुछ प्रमुख हैं जैसे स्मृति का खोना, निर्णय से जुड़ी समस्यायें, सवालों का बार-बार दोहराया जाना, मुसीबत से निपटने में परेशानी का सामना करना, रुपयों का बेहतर प्रबंधन न कर पाना। साथ ही अपने सामान्य दैनिक कार्यों को पूरा करने में असफल रहना आदि। इस चरण में मरीजों का अकसर इलाज किया जाना चाहिए और उसका निदान भी प्रस्तुत किया जाना चाहिए।
इस बीमारी के मध्य चरण में रोगी, परिवार के सदस्यों की पहचान नहीं कर पता है। साथ ही अपने कपड़ों के सन्दर्भ में अजीबोगरीब हरकत करता है। इसके अलावा वह प्रतिदिन के कार्यों में भुलक्कड़ प्रवृति का संपादन करने लगता है।
अलजाइमर रोग ज़्यादातर बुजुर्ग लोगों को प्रभावित करता है। आज भारत में बुजुर्ग लोगों की आबादी बढ़ रहीं हैं। यह कारण बीमारी होने का अलार्म है।
अल्जाइमर रोग के सही कारण अभी तक ज्ञात नहीं है। मस्तिष्क में होने वाली कुछ जटिल परेशानियाँ इस बीमारी का कारण हैं।
अल्जाइमर रोग का कोई उपचार उपलब्ध नहीं है। पीड़ित रोगी का प्रभावी ढंग से उपचार करने के लिए रोग की जल्दी जानकारी से लाभ मिलता हैं।

24 घंटों में कोरोना संक्रमण के 14,345 नये मामलें

कुआलालम्पुर। मलेशिया में पिछले 24 घंटों में कोरोना संक्रमण के 14,345 नये मामले सामने आये तथा 301 संक्रमितों की मौत हो गयी।
मलेशिया के राष्ट्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक नये मामलों के साथ संक्रमितों का आंकड़ा बढ़कर 21 लाख 12 हजार 175 हो गया। वहीं मृतकों की संख्या 23,744 हो गयी है। इसी दौरान 16,814 मरीजों को स्वस्थ होने के बाद विभिन्न अस्पतालों से छुट्टी दे दी गयी। देश में अब तक 18 लाख 80 हजार 733 लोग कोरोनामुक्त हो चुके हैं। अभी यहां 2,07,698 सक्रिय मामले हैं।

अमेरिका और भारत के बीच बंधन को मजबूती दीं

नई दिल्ली/ वाशिंगटन डीसी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडन के बीच 24 सितंबर को होने वाली पहली द्विपक्षीय बैठक से दोनों देशों के बीच संबंध को और मजबूती मिलेगी और क्वाड समूह को नयी गति देने में मदद मिलेगी। व्हाइट हाउस के एक अधिकारी ने यह कहा। बाइडन 24 सितंबर को प्रधानमंत्री मोदी के साथ अपनी पहली द्विपक्षीय बैठक के लिए व्हाइट हाउस में उनकी मेजबानी करेंगे।
उसी दिन बाद में बाइडन, मोदी, जापान के प्रधानमंत्री योशीहिदे सुगा और ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री स्कॉट मॉरिसन के साथ व्हाइट हाउस में पहली बार प्रत्यक्ष तौर पर क्वाड नेताओं के शिखर सम्मेलन की मेजबानी करेंगे। जनवरी में अमेरिका का राष्ट्रपति बनने के बाद से बाइडन ने प्रधानमंत्री मोदी से कई मौकों पर डिजिटल माध्यम से बात की है।
प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति बाइडन के बीच आखिरी बार 26 अप्रैल को टेलीफोन पर बातचीत हुई थी। व्हाइट हाउस के एक अधिकारी ने पीटीआई-भाषा को बताया, ”बैठक के दौरान दोनों नेता अपने लोगों और साझा लोकतांत्रिक मूल्यों के बीच गहरे संबंधों को मजबूत करने पर ध्यान केंद्रित करेंगे, जिसने सात दशकों से अधिक समय तक अमेरिका और भारत के बीच विशेष बंधन को मजबूती दी है।”
अधिकारी ने बताया, ”बाइडन-हैरिस प्रशासन ने स्वतंत्र और मुक्त हिंद-प्रशांत को बनाए रखने में मिलकर काम करने, कोविड-19 महामारी को समाप्त करने के लिए प्रयासों का नेतृत्व करके और जलवायु संकट को दूर करने के लिए ठोस कार्रवाई करके भारत के साथ अपनी साझेदारी को बढ़ाया है।” 
इससे पहले एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए प्रशासन के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा था कि भारत के साथ साझेदारी के दृष्टिकोण से बाइडन-मोदी की बैठक इसे मजबूती से आगे ले जाने का अवसर होगी। अधिकारी ने बताया कि अमेरिका की उपराष्ट्रपति कमला हैरिस 23 सितंबर को यहां प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात करेंगी, जो मोदी और राष्ट्रपति जो बाइडन के बीच पहली द्विपक्षीय बैठक होगी और व्हाइट हाउस में क्वाड शिखर सम्मेलन से एक दिन पहले होगी।
अधिकारी ने बताया, ”उपराष्ट्रपति प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात करेंगी।” दोनों नेताओं के बीच यह पहली मुलाकात होगी। हैरिस ने इससे पहले कोविड-19 संकट के दौरान मोदी से फोन पर बात की थी। हैरिस अमेरिका की उपराष्ट्रपति बनने वाली भारतीय मूल की पहली महिला हैं।
व्हाइट हाउस के अनुसार इस सप्ताह के दौरान जब विश्व के नेता संयुक्त राष्ट्र महासभा के वार्षिक सत्र में भाग लेने के लिए न्यूयॉर्क में एकत्रित होंगे, तब हैरिस मंगलवार को ब्रिटेन के प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन के साथ बैठक करेंगी, बुधवार को वह जाम्बिया के राष्ट्रपति हाकेंडे हिचिलेमा से और बृहस्पतिवार को घाना के राष्ट्रपति नाना एडो डंकवा अकुफो-एडो से मुलाकात करेंगी।
व्हाइट हाउस के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार बुधवार को वह डिजिटल माध्यम से होने वाले राष्ट्रपति के कोविड शिखर सम्मेलन में भविष्य की महामारियों को बेहतर तरीके से रोकने के विषय पर एक सत्र का नेतृत्व करेंगी।

सोमवार, 20 सितंबर 2021

क्वारंटीन की अनिवार्यता को खत्म किया: यूएसए

वाशिंगटन डीसी। नए नियमों के तहत अमेरिका आने वाली फ्लाइट पर बैठने से पहले यात्रियों को पूरे वैक्सिनेशन का सबूत देना होगा। फ्लाइट से तीन पहले कोविड-19 टेस्ट कराना होगा और इसके निगेटिव नतीजे दिखाने होंगे। क्वारंटीन की अनिवार्यता को खत्म कर दिया गया है। लेकिन कॉन्टैक्ट ट्रेसिंग और मास्क लगाने पर जोर रहेगा। इससे पहले अप्रैल में राष्ट्रपति जो बाइडेन ने भारत से गैर-अमेरिकी नागरिकों के आने पर रोक लगा दी थी।
वाइट हाउस के कोविड-19 रेस्पॉन्स कोओर्डिनेटर जेफ जींट्स का कहना है कि लोगों को सुरक्षित रखने और वायरल को फैलने से रोकने के लिए फिलहाल सबसे बड़ा हथियार वैक्सीन ही है। फिलहाल बच्चों की वैक्सीन नहीं आने के चलते उनके लिए इस नियम में छूट दी गई है। वहीं, नए नियम मेक्सिको और कनाडा से जमीन के रास्ते ट्रैवल पर भी लागू नहीं हैं।

मणिपुर: 5 तीव्रता के भूकंप के झटके महसूस किए

इंफाल। मणिपुर के शिरुई से पूर्व उत्तर पूर्व में 31 किमी दूर रविवार और सोमवार की दरमियानी रात 12 बजकर 54 मिनट 3 सेकेंड पर 5 तीव्रता के भूकंप के झटके महसूस किए गए। भूकंप के चलते कहीं से किसी भी तरह के नुकसान की खबर नहीं है।
भूकंप का झटका मध्य रात महसूस हुआ, जिसके चलते अधिकांश लोगों को पता नहीं चला। बावजूद काफी लोग घरों से बाहर निकल आए। सिस्मोलॉजी विभाग से मिली जानकारी के अनुसार भूकंप का केंद्र मणिपुर के सिरुई से 31 किमी दूर जमीन में 80 किमी नीचे बताया गया है। भूकंप का एपीक सेंटर 25.26 उत्तरी अक्षांश तथा 94.70 पूर्वी देशांत्तर पर स्थित था।

रविवार, 19 सितंबर 2021

डी5एलई परमाणु मिसाइल का परीक्षण: अमेरिका

वाशिंगटन डीसी। अमेरिकी नौसेना ने शुक्रवार को ओहियो क्लास की पनडुब्बी यूएसएस व्योमिंग से दो की संख्या में ट्राइडेंट डी5एलई परमाणु मिसाइल का परीक्षण किया है। बताया जा रहा है कि अंतरराष्ट्रीय कानून के अनुसार, परीक्षण के दौरान मिसाइल में लाइव परमाणु वॉरहेड्स नहीं लगे हुए थे। नौसेना ने बताया कि परीक्षण के दौरान ट्राइडेंट डी5एलई मिसाइल ने हर मिशन ऑब्जेक्टिव को पूरा किया है। अमेरिकी नौसेना के इस टेस्ट को चीन के लिए सीधे संदेश के तौर पर देखा जा रहा है। यूएसएस व्योमिंग से यह मिसाइल टेस्ट फ्लोरिडा के केप कैनावेरल के तट के पास किया गया। यह परीक्षण अमेरिकी नौसेना के शेकडाउन ऑपरेशन और डीएएसओ-31 का हिस्सा था। रिफ्यूलिंग ओवरहॉल के बाद परिचालन तैनाती के लिए भेजे जाने से पहले बैलिस्टिक मिसाइल पनडुब्बी और उसके चालक दल की फिटनेस का आकलन करने के लिए डीएएसओ का आयोजन किया जाता है।

विश्व में संक्रमितों की संख्या-22.81 करोड़ हुईं

वाशिंगटंन डीसी/ नई दिल्ली। विश्वभर में कोरोना वायरस (कोविड-19) महामारी के संक्रमितों की संख्या बढ़कर 22.81 करोड़ हो गई है और अब तक इसके कारण 46.85 लाख से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है। अमेरिका की जॉन हॉपकिन्स यूनिवर्सिटी के विज्ञान एवं इंजीनियरिंग केंद्र (सीएसएसई) की ओर से जारी ताजा आंकड़ों के अनुसार दुनिया के 192 देशों एवं क्षेत्रों में संक्रमितों की संख्या बढ़कर 22 करोड़ 81 लाख 19 हजार 119 हो गई है जबकि 46 लाख 85 हजार 253 लोग इस महमारी से जान गंवा चुके हैं।विश्व में महाशक्ति माने जाने वाले अमेरिका में कोरोना वायरस संक्रमण बरकार है। यहां संक्रमितों की संख्या 4.20 करोड़ से अधिक हो गयी है और 6.73 लाख से ज्यादा लोगों की मौत हो गयी है। दुनिया में कोरोना संक्रमितों के मामले में भारत दूसरे और मृतकों के मामले में तीसरे स्थान पर है। देश में पिछले 24 घंटों के दौरान कोरोना के 30,773 नये मामलों की पुष्टि की गयी, जिससे संक्रमितों का आंकड़ा बढ़कर तीन करोड़ 34 लाख 48 हजार 163 हो गया है।
इस दौरान 38,945 मरीजों के स्वस्थ होने के बाद कोरोनामुक्त होने वालों की तादाद बढ़कर तीन करोड़ 26 लाख 71 हजार 167 हो गयी है। सक्रिय मामले घटकर तीन लाख 32 हजार 158 रह गये हैं। इसी अवधि में 309 मरीजों की मौत होने से मृतकों का आंकड़ा बढ़कर 4,44,838 हो गया है। देश में सक्रिय मामलों की दर अब 0.99 प्रतिशत रह गयी है, रिकवरी दर 97.68 प्रतिशत है, जबकि मृत्यु दर 1.33 फीसदी पर बरकरार है।
ब्राजील संक्रमितों के मामले में अब तीसरे स्थान पर है, जहां कोरोना संक्रमण के मामले फिर से बढ़ रहे हैं और अभी तक इससे 2.12 करोड़ से अधिक लोग प्रभावित हुए हैं जबकि 5.90 लाख से अधिक मरीजों की मौत हो चुकी है। ब्राजील कोरोना से हुई मौतों के मामले में विश्व में दूसरे स्थान पर है। संक्रमण के मामले में ब्रिटेन रूस और फ्रांस से आगे निकल चुका है।
यहां कोरोना से प्रभावित लोगों की संख्या 74.35 लाख से अधिक हो गयी है और 135,478 मरीजों की मौत हो चुकी है। रूस में कोरोना वायरस से अब तक 71.50 लाख से अधिक लोग प्रभावित हुए हैं जबकि 1.93 लाख से अधिक मरीजों की मौत हो चुकी है। फ्रांस में कोरोना संक्रमितों की संख्या 70.37 लाख से अधिक हो गई है और इसके संक्रमण से 116,662 लाख से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है।

फ्रांस: जल्द संकट पैदा होने की आशंका व्यक्त की

पेरिस। फ्रांस के विदेश मंत्री ने अमेरिका से सौदा करने के लिए पनडुब्बी बनाने के उसके साथ किए अनुबंध को अचानक रद्द करने के ऑस्ट्रेलिया के फैसले को ”छल, उपेक्षा और झूठ” बताते हुए शनिवार को इसकी निंदा की तथा पश्चिमी सहयोगियों के बीच जल्द संकट पैदा होने की आशंका व्यक्त की।

अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया से अपने राजदूतों को वापस बुलाने के एक दिन बाद फ्रांस के विदेश मंत्री ज्यां इव लि द्रीयां ने कहा कि यह पीठ पीछे किया गया एक समझौता है। जिसमें फ्रांस को धोखा दिया गया। उन्होंने ‘फ्रांस 2’ टेलीविजन को दिए एक साक्षात्कार में कहा कि राजदूतों को वापस बुलाना फ्रांसिसी सरकार और वाशिंगटन तथा कैनबरा के बीच ”आज संकट की गहरायी को दिखाता है।” उन्होंने कहा कि यह पहली बार है जब फ्रांस ने सबसे पुराने सहयोगी अमेरिका से अपने राजदूत को वापस बुलाया है। दरअसल, अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और ब्रिटेन ने नया हिंद-प्रशांत सुरक्षा गठबंधन बनाने में फ्रांस को छोड़ दिया है।

चीन: जहाज के नदी में पलटने से 8 लोगों की मौंत

गुईयांग। चीन के दक्षिण-पश्चिमी प्रांत गुइझोउ में एक यात्री जहाज के नदी में पलट जाने से आठ लोगों की मौत हो गयी। जबकि सात अन्य लापता हैं। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक दुर्घटना शनिवार की शाम लियूपांशुई शहर के जांगके टाउनशिप के समीप उस समय हुई। जब जांगके नदी यात्री जहाज पलट गया। घटना में आठ लोगों की मौत हो गयी। 
जबकि सात अन्य लापता हैं। रविवार सुबह तक 39 लोगों को बचा लिया गया।अधिकारी जहाज में सवार यात्रियों की संख्या की जांच कर रहे हैं। बचाव अभियान अभी जारी है तथा दुर्घटना के कारणों की जांच की जा रही है। 

शनिवार, 18 सितंबर 2021

दोनों देशों से अपने राजदूतों को वापस बुलाया

वाशिंगटन डीसी/ पेरिस। अमेरिका के सबसे पुराने सहयोगी फ्रांस ने परमाणु पनडुब्बी सौदा रद्द करने पर अप्रत्याशित रूप से गुस्सा दिखाते हुए अमेरिका और आस्ट्रेलिया दोनों ही देशों से अपने राजदूतों को वापस बुला लिया है। 18 वीं सदी के दौरान फ्रांस और अमेरिका के बीच बने संबंधों में अब दरार आती दिखाई दे रही है।

इन देशों के बीच संबंध हिंद-प्रशांत क्षेत्र में अमेरिका, ब्रिटेन और आस्ट्रेलिया के एक नए त्रिपक्षीय गठबंधन की घोषणा के बाद बिगड़े हैं। गठबंधन के बाद आस्ट्रेलिया ने फ्रांस से 40 बिलियन डालर का पनडुब्बी का सौदा रद कर दिया है। अब वह पनडुब्बी अमेरिका से लेगा।

फ्रांस के विदेश मंत्री जीन यवेस ले ड्रियान ने लिखित बयान में कहा है कि अमेरिका और आस्ट्रेलिया की घोषणा बहुत ही गंभीर और असाधारण है। इसीलिए फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के कहने पर यह कदम उठाया गया है। उन्होंने कहा है कि सौदे को रद करना सहयोगी और पार्टनरों के बीच अस्वीकार्य व्यवहार है। राजदूत फिलिप एटियेन ने ट्वीट किया है कि डील रद करने की घोषणा यूरोप के लिए हिंद-प्रशांत के महत्व के हमारे दृष्टिकोण को सीधे प्रभावित कर रही है।

काबुल की सड़कों पर अपने घरों का सामान बेचा

काबुल। अफगानिस्तान में तालिबान का कब्जा होने के बाद यहां के नागरिक पैंसा नहीं हाेने पर भुखमरी के कगार पहुंच गए हैं और दो वक्त का खाना जुटाने के लिए लोग काबुल की सड़कों पर अपने घरों का सामान बेच रहे हैं। टोलो न्यूज की रिपोर्ट के अनुसार काबुल के एक पार्क चमन-ए-होजोरी की ओर जाने वाली सड़क पर कालीन, फ्रीज, टेलीविजन, सोफा और अन्य सामान रखेे हुए दिखाई दे रहे हैं।
लोग अपने परिवार के लिए दो जून की रोटी पाने हेतु घरों से सामान लेकर उसे बेचने के लिए सड़कों पर बैठे हैं। रिपोर्ट के अनुसार कई लोग जीवन यापन और अफगानिस्तान से बाहर जाने के लिए धन की जरूरतों के मद्देनजर अपना घरेलू सामान बेच रहे हैं।
रिपोर्ट में बताया गया है कि लोग अपना महंगा सामान बहुत दामों पर बेच रहे हैं। एक दुकानदार लाल गुल ने टोलो न्यूज को बताया कि एक लाख का घरेलू सामान सिर्फ 20 हजार में बिक रहा हैं। उसने बताया कि “मैंने भी अपना सामना आधे से भी कम दाम पर बेचा है। मैंने 25 हजार में खरीदे गये फ्रीज को केवल 5,000 में बेच दिया।
इसके अलावा मेरे पार ओर कोई रास्ता नहीं है, इसे बेच कर कम से कम मेरे बच्च रात का खाना खा पाएंगे।” पूर्व पुलिस अधिकारी मोहम्मद आगा ने बताया कि उन्हें वेतन नहीं मिलने से वह पिछले दस दिनों से बाजार में काम कर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि अब मेरे पास नौकरी नहीं है और मैं क्या करूं। एक अन्य काबुल निवासी ने बताया कि मैं इलेक्ट्रिकल इंजीनियर हूं। मेरा बेटा भूविज्ञान संकाय से स्नातक है। हम दोनों बेरोजगार हैं। हमारे पास खाने के पैसे नहीं हैं और हम अपने घर का सामान बेचने आए है। हमें परिवार को खाना खिलाने के लिए पैसे की जरूरत है।

अमेरिकी एक्सचेंज नैसडैक पर शानदार एंट्री की

अकांशु उपाध्याय      नई दिल्ली। बिजनेस सॉफ्टवेयर फर्म फ्रेशवर्क्स इंक ने बुधवार को अमेरिकी एक्सचेंज नैसडैक पर शानदार एंट्री की है। अपने शानद...