रविवार, 29 मई 2022

कच्चे आम का पुलाव बनाने की रेसिपी, जानिए

कच्चे आम का पुलाव बनाने की रेसिपी, जानिए  

सरस्वती उपाध्याय      

कच्चे आम के मौसम में आम पना और चटनी तकरीबन हर घर में बनाई जाती है। कई लोग आम के जायके को साल भर चखते रहने के लिए आम का अचार और कुच्चा जैसी खट्टी-मीठी चीज़ें बनाते हैं। आम की ही अगर इन सबसे अलग कोई डिश बनाना चाहते हैं, तो आज हम आपके लिए लेकर आए हैं, रॉ मैंगो राइस यानी, कच्चे आम का पुलाव। दक्षिण भारत में इस डिश को ख़ास तौर पर बनाया जाता है। इस डिश को बनाने के लिए आपको न ज़्यादा सामान की ज़रूरत होती है न ही अधिक समय की. बस कच्चा आम करी पत्ते हैं, तो इस डिश को झटपट बनाकर तैयार किया जा सकता है। जिस दिन कुछ हल्का खाने की इच्छा हो या फिर बढ़ती गर्मी की वजह से रसोई में वक्त गुज़ारना मुश्किल हो रहा हो, तो खट्टे स्वाद वाले इस चावल को बनाने और गर्मा-गर्म सर्व करें। आइए जानते है, कच्चे आम का पुलाव बनाने के लिए किन चीज़ों की ज़रूरत होती है और यह कैसे बनता है।

सामग्री...

चावल – 2 कटोरी
कच्चा आम – 1 बड़े आकार का
सरसों – ½ टीस्पून
जीरा – 1 टीस्पून
मूंगफली – 2 टेबलस्पून
चना दाल – 1 टेबलस्पून
उड़द दाल – 1 टेबलस्पून
करी पत्ते – 8-10
साबुत लाल मिर्च – 2
हरी मिर्च – 2 बारीक कटी हुई
हल्दी – 1 टीस्पून
सरसों तेल – 2 टेबलस्पून
नमक – स्वादानुसार

कच्चे आम का पुलाव बनाने की विधि...
चावल को भगोने में पकाकर इसका माड़ निकाल लें। एक पैन में तेल गर्म करें और इसमें सरसों-जीरा चटकाए। 1 मिनट बाद इसमें लाल मिर्च, मूंगफली, करी पत्ते, उड़द और चना की दाल डालकर धीमी आंच पर दो से तीन मिनट तक भूनें। अब इसमें कद्दूकस किया हुआ कच्चा आम, हल्दी, नमक डालकर तेज आंच पर 5 मिनट के लिए आम को अच्छी तरह भूनें।

अब इसमें पके हुए चावल डालकर चलाएं। जब चावल और तड़के वाला मिश्रण अच्छी तरह से मिल जाए, तब गैस बंद कर दें। इस राइस के साथ टमाटर,प्याज और खीरे का रायता सर्व कर सकते हैं। खट्टापन के ज़ायके से भरपूर कच्चे आम के पुलाव का बेहतर स्वाद पाने लिए इसे गर्मा-गर्म ही खाएं।

'महिला व्यापार मंडल' सदस्यता अभियान को बढ़ाया

'महिला व्यापार मंडल' सदस्यता अभियान को बढ़ाया 

बृजेश केसरवानी         
प्रयागराज। अखिल भारतीय महिला व्यापार मंडल की मंडल प्रभारी लक्ष्मी बहुगुणा जोशी, जिला प्रभारी स्मृति श्रीवास्तव के नेतृत्व में महिला व्यापार मंडल सदस्यता अभियान को आगे बढ़ाते हुए 20 सदस्य बनाएं। जिसमें ब्यूटी पार्लर संचालक, बुटीक, के अलावा व्यापार कर रही महिलाओं को जोड़कर संगठन को आगे बढ़ाया और स्वच्छता अभियान को तेजी लाने के लिए संगठन को मजबूत करने के लिए 5 महिलाओं को स्मृति चिन्ह देकर प्रदेश संगठन जिला अध्यक्ष रमेश केसरवानी, नगर प्रभारी नीरज जायसवाल ने देकर उनका सम्मान किया। 
सम्मान होने वालों में प्रमुख रूप से जिला प्रभारी स्मृति श्रीवास्तव, लक्ष्मी बहुगुणा जोशी, कल्याणी बक्स, अंजना गुप्ता, रीता वर्मा,शालिनी सिन्हा, उषा गुप्ता, स्वरिका भरद्वाज , अनुराधा त्रिपाठी का सम्मान किया गया। जिला अध्यक्ष रमेश केसरवानी, नगर प्रभारी नीरज जायसवाल, ने सभी महिलाओं को संगठन को मजबूत करने के लिए डोर-टू-डोर पहुंच कर महिलाओं को जोड़ने के लिए और संगठन को मजबूती प्रदान करने के लिए अपील किया है। इसके अलावा उत्तर प्रदेश सरकार के माननीय मुख्यमंत्री योगी आदिनाथ द्वारा पूरे प्रदेश में अतिक्रमण अभियान के तहत चौराहा जनपद प्रयागराज में स्मार्ट सिटी के तहत मंडला आयुक्त संजय गोयल, जिलाधिकारी प्रयागराज संजय खत्री द्वारा अभियान में महिला व्यापार मंडल, एवं अखिल भारतीय उद्योग व्यापार मंडल ने अपना पूर्ण योगदान देने का शपथ लिया और निगरानी समिति में महिलाओं का भी योगदान रहेगा।

सेवा 'शिक्षा प्रशिक्षण' वर्ग के पांचवे दिन का उद्घाटन

सेवा 'शिक्षा प्रशिक्षण' वर्ग के पांचवे दिन का उद्घाटन 

बृजेश केसरवानी                  
प्रयागराज। रानी रेवती देवी सरस्वती विद्या निकेतन इंटर कॉलेज, राजापुर प्रयागराज के संगीताचार्य एवं मीडिया प्रभारी मनोज गुप्ता की सूचना अनुसार, विद्यालय के प्रधानाचार्य बांके बिहारी पांडे के संयोजन में विद्या भारती काशी प्रांत द्वारा संचालित सेवा बस्तियों में चल रहे संस्कार केंद्रों के संयोजको के सात दिवसीय सेवा शिक्षा प्रशिक्षण वर्ग के पांचवे दिन का उद्घाटन, मुख्य अतिथि सचिव, भारतीय शिक्षा परिषद पूर्वी उत्तर प्रदेश एवं प्रशिक्षण प्रमुख दिनेश सिंह ने किया तथा विशिष्ट अतिथि के रूप में क्षेत्रीय शिशु वाटिका प्रमुख विजय उपाध्याय का मार्गदर्शन प्राप्त हुआ।
कार्यक्रम का प्रारंभ संगीताचार्य मनोज गुप्ता के निर्देशन में मां सरस्वती की सुमधुर वंदना से हुआ। अतिथियों का सम्मान माल्यार्पण स्मृति चिन्ह एवम अंगवस्त्रम से किया गया। प्रधानाचार्य बांके बिहारी पांडे ने अतिथियों सहित आए हुए समस्त केंद्र संयोजको का स्वागत किया।
मुख्य अतिथि के रूप में अपना उद्बोधन देते दिनेश सिंह ने बताया कि आप सब का जीवन त्याग और तपोमय है, समता और समानता की लहर पूरे देश में दौड़ रही है और पूरे देश में नारी का सम्मान भी बढ़ रहा है। भारतीय जीवन मूल्यों में नारी की संस्कृति फलती-फूलती है। हमारे भारतीय महापुरुषों ने अनेकों बुराइयों एवं कुरीतियों को दूर करने का प्रयास तथा जिसे समाज ने ठुकराया उसे अपनाने का कार्य किया है। वर्तमान समय में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ सर्व समाज के साथ-साथ हिंदुओं को जगाने का प्रयास तथा इसको परम वैभव तक पहुंचाने का कार्य कर रहा है। क्योंकि हिंदू जगे तो देश जगेगा, तभी मानव का विश्वास जगेगा, भेद भावना तमस हटेगा, समरसता अमृत बरसेगा।
विशिष्ट अतिथि के रूप में अपना उद्बोधन देते हुए विजय उपाध्याय ने बताया कि सीमा क्षेत्रों में कार्य करने से हमारे लक्ष्य की पूर्ति संभव है। आप सभी बंधु ,भगिनी श्रेष्ठ कार्य कर रहे हैं और प्रेरणास्रोत हैं सेवा कार्य ईश्वरीय कार्य है। जो स्वयं ईश्वर की कृपा से पूर्ण हो जाता है। सीमा क्षेत्र नेपाल में संस्कार केंद्रों के 28000 स्वयंसेवकों का कार्यक्रम संपन्न हुआ। जिसमें दूरदराज के अनेकों स्वयंसेवकों ने बढ़-चढ़कर कार्यक्रम में भाग लेकर इसे सफल बनाया, उक्त कार्यक्रम में काशी प्रांत से लगभग 100 सेवा केंद्र के संयोजक भाग ले रहे है।
 इस अवसर पर राष्ट्रीय सेवा शिक्षा संयोजक रामस्वरूप, प्रांतीय सेवा प्रमुख कमलाकर तिवारी, क्षेत्रीय सीमा सेवा संयोजक राघव , सह शिक्षा सेवा संयोजक नरसिंह नारायण सिंह, सुनील कुमार गुप्ता, अवधेश कुमार, प्रवीण कुमार तिवारी, कुंदन सिंह, अभिषेक शर्मा ,दीपक दयाल ,सचिन सिंह परिहार, विशाल कुमार सहित विद्यालय के समस्त आचार्य बंधु एवं आचार्या दीदियां उपस्थित रहे। संचालन दिनेश कुमार शुक्ला ने किया।

दक्षिण एशियाई देशों के लिए समस्‍या बना, वायु प्रदूषण

दक्षिण एशियाई देशों के लिए समस्‍या बना, वायु प्रदूषण 

डॉक्टर सुभाषचंद्र गहलोत         
नई दिल्ली/वाशिंगटन डीसी। वायु प्रदूषण खासकर दक्षिण एशियाई देशों के लिए बहुत विकट समस्‍या बन गया है। इस विपत्ति की सबसे ज्‍यादा तपिश दक्षिण एशियाई देशों भारत, पाकिस्‍तान, बांग्‍लादेश और नेपाल को सहन करनी पड़ रही है। वायु प्रदूषण संपूर्ण दक्षिण एशियाई क्षेत्र के लिए बहुत बड़ी समस्या है और इस क्षेत्र में स्थित कोई भी देश इससे अकेला नहीं लड़ सकता। भारत और पाकिस्‍तान के सांसदों ने इन देशों का एक ऐसा मंच तैयार करने की जरूरत बतायी है, जहां पर वायु प्रदूषण से निपटने के लिये विशेषज्ञताओं और अनुभवों का आदान-प्रदान किया जा सके।
पर्यावरण थिंक टैंक ‘क्‍लाइमेट ट्रेंड्स’ ने वायु प्रदूषण, जन स्‍वास्‍थ्‍य और जीवाश्‍म ईंधन के बीच अंतर्सम्‍बंधों को तलाशने और सभी के लिये स्‍वस्‍थ धरती से सम्‍बन्धित एक विजन का खाका खींचने के लिये शनिवार को एक ‘वेबिनार’ का आयोजन किया। 
वेबिनार में असम की कलियाबोर सीट से सांसद गौरव गोगोई ने कहा कि वायु प्रदूषण के मामले में पूरी दुनिया की नजर दक्षिण एशिया पर होती है, क्‍योंकि ये विशाल भूभाग प्रदूषण की समस्‍या का सबसे बड़ा शिकार है, लिहाजा हमें अपने मानक और अपने समाधान तय करने होंगे। हमें एक ऐसा मंच और ऐसे मानक तैयार करने होंगे जिनसे इस सवाल के जवाब मिलें कि हमने स्टॉकहोम और ग्लास्गो में जो संकल्प लिए थे उन्हें दिल्ली, लाहौर, ढाका और दिल्ली में कैसे लागू किया जाएगा। यह मंच विभिन्न विचारों के आदान-प्रदान का एक बेहतरीन प्लेटफार्म साबित होगा। उन्‍होंने कहा कि जब हम वायु प्रदूषण के एक आपात स्थिति होने के तौर पर बात करते हैं तो इस बात को भी नोट करना चाहिए कि हम इस मुद्दे पर कितना ध्‍यान केन्द्रित करते हैं। इन मामलों में सांसद बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। ऐसे में बहुत जरूरी है कि हम इस क्षेत्र में अपने सांसदों की क्षमता को और बढ़ाएं। उन्हें इस बात की जानकारी होनी चाहिए कि वायु प्रदूषण उनके अपने राज्य को किस तरह प्रभावित कर रहा है ताकि वे अपने क्षेत्र में सर्वे कर सकें और लोगों को जागरूक बना सकें। इससे यह भी पता लगेगा कि वायु प्रदूषण की समस्या को लेकर हमारे स्‍थानीय निकाय कितने तैयार हैं।
पाकिस्‍तान के सांसद रियाज फतयाना ने वायु प्रदूषण को दक्षिण एशिया के लिये खतरे की घंटी बताते हुए महाद्वीप के स्‍तर पर मिलजुलकर काम करने की जरूरत पर जोर दिया। उन्‍होंने कहा कि दक्षिण एशियाई सांसदों का एक फोरम बनाया जाना चाहिए जहां इन विषयों पर बातचीत हो सके। पाकिस्तान में वायु प्रदूषण की समस्या बहुत ही खतरनाक रूप लेती जा रही है। जहां एक तरफ दुनिया कह रही है कि नए कोयला बिजलीघर न लगाए जाएं लेकिन दक्षिण एशिया के विभिन्न देशों में अब भी इन्‍हें लगाए जाने का सिलसिला जारी है। इनकी वजह से होने वाला वायु प्रदूषण जानलेवा साबित हो रहा है।
उन्‍होंने कहा कि हमें वैकल्पिक ऊर्जा और एनवायरमेंटल एलाइनमेंट दोनों पर ही काम करना होगा। एक दूसरे के अनुभवों का आदान-प्रदान करना भी बहुत महत्वपूर्ण है। हमें और भी ज्यादा प्रभावी कानून बनाने होंगे। क्‍लाइमेट ट्रेंड्स की निदेशक आरती खोसला ने कहा कि वायु की गुणवत्ता का मसला अब सिर्फ भारत की समस्या नहीं रहा, बल्कि यह पूरे दक्षिण एशिया की भी समस्या बन चुका है। दुनिया वर्ष 1972 में स्टॉकहोम में ह्यूमन एनवॉयरमेंट पर हुई संयुक्‍त राष्‍ट्र की पहली कॉन्फ्रेंस की 50वीं वर्षगांठ अगले महीने मनाने जा रही है। यह इस बात के आकलन के लिए एक महत्वपूर्ण वर्ष है कि किस तरह से जैव विविधता तथा पर्यावरण से जुड़े अन्य तमाम पहलू मौजूदा स्थिति से प्रभावित हो रहे हैं। वायु प्रदूषण एक प्राथमिक सार्वजनिक स्वास्थ्य इमरजेंसी है। दक्षिण एशिया यह मानता है कि जलवायु परिवर्तन सिर्फ राजनीतिक मसला नहीं है बल्कि सामाजिक और आर्थिक समस्या भी बन चुका है।
बांग्लादेश के सांसद साबेर चौधरी ने कहा कि जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिये राजनीतिक इच्‍छाशक्ति की जरूरत बेहद महत्‍वपूर्ण है। हमें पूरी दुनिया में सांसदों की ताकत का सदुपयोग करना चाहिये। वायु प्रदूषण एक पर्यावरणीय आपात स्थिति नहीं बल्कि प्लेनेटरी इमरजेंसी है। इसकी वजह से वॉटर स्ट्रेस और खाद्य असुरक्षा समेत अनेक आपदाएं जन्म ले रही हैं। वायु प्रदूषण दक्षिण एशिया के लिये एक साझा चुनौती है। यह किसी एक देश की सेहत का सवाल नहीं है। यह पूरे दक्षिण एशिया का प्रश्न है। सांसद के रूप में मैं जन स्‍वास्‍थ्‍य पर ध्‍यान केन्द्रित करना चाहता हूं। हमें नये सिरे से विकास की परिकल्पना करनी होगी।
नेपाल की सांसद पुष्पा कुमारी कर्ण ने काठमांडू की दिन-ब-दिन खराब होती पर्यावरणीय स्थिति का विस्‍तार से जिक्र करते हुए कहा कि वायु प्रदूषण दुनिया की सभी जानदार चीजों की सेहत पर प्रभाव डाल रहा है। काठमांडू नेपाल की राजधानी है और यह दुनिया के सबसे प्रदूषित शहरों में से एक है। हर साल सर्दियों के मौसम में काठमांडू में वायु की गुणवत्ता बहुत खराब हो जाती है। ऑटोमोबाइल्स और वाहनों की बढ़ती संख्या की वजह से समस्या दिन-ब-दिन विकट होती जा रही है। काठमांडू में पीएम 2.5 का स्तर डब्ल्यूएचओ के सुरक्षित मानकों के मुकाबले 5 गुना ज्यादा है। हालांकि नेपाल सरकार ने इलेक्ट्रिक मोबिलिटी के लिए एक योजना तैयार की है। इसी तरह की योजनाएं दक्षिण एशिया के अन्य देशों में भी लागू की जानी चाहिए।
वायु प्रदूषण खासकर दक्षिण एशियाई क्षेत्रों के लिये एक स्‍वास्‍थ्‍य सम्‍बन्‍धी आपात स्थिति बन गया है। मेदांता हॉस्पिटल के ट्रस्‍टी डॉक्‍टर अरविंद कुमार ने कहा कि भारत, पाकिस्तान, बांग्लादेश और नेपाल को यह सवाल पूछने की जरूरत है कि जलवायु परिवर्तन कितना प्रभावी है। इन चारों देशों में वायु प्रदूषण के स्तर खतरनाक रूप ले चुके हैं। वायु प्रदूषण सिर्फ पर्यावरणीय और रासायनिक मुद्दा नहीं है बल्कि यह विशुद्ध रूप से स्‍वास्‍थ्‍य से जुड़ा मसला है।
फेफड़े के विशेषज्ञ के तौर पर वह अपने 30 साल के अनुभव से कहते हैं कि फेफड़े के कैंसर के लगभग 50 प्रतिशत मरीज ऐसे आ रहे हैं जो धूम्रपान नहीं करते। इसके अलावा 10 प्रतिशत मरीज 20 से 30 साल के बीच के होते हैं। भारत के 30% बच्चे यानी हर तीसरा बच्‍चा दमा का मरीज है। वायु प्रदूषण सिर्फ हमारे फेफड़ों को ही नुकसान नहीं पहुंचा रहा है बल्कि इसकी वजह से दिल की बीमारियां, तनाव, अवसाद और नपुंसकता समेत अन्य अनेक रोग पैदा हो रहे हैं। गर्भ में पल रहे बच्चे को भी समस्याएं हो रही हैं। यानी पैदाइश से पहले से लेकर मौत तक वायु प्रदूषण हमें प्रभावित कर रहा है। हमारे पास वायु प्रदूषण को समाप्त करने के अलावा और कोई चारा नहीं है। हमें अपनी जिम्मेदारी समझनी होगी और इस दिशा में काम करने का सबसे सही समय आज ही है।
नेपाली रेस्पिरेटरी सोसाइटी के अध्‍यक्ष डॉक्‍टर रमेश चोखानी ने दक्षिण एशिया के पर्वतीय देश नेपाल में वायु प्रदूषण की चिंताजनक स्थिति का जिक्र करते हुए कहा कि नेपाल जीवाश्म ईंधन का प्रमुख उपयोगकर्ता है और वह ज्यादातर जीवाश्म ईंधन को भारत से आयात करता है। नेपाल में अन्य वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों की कमी की वजह से मजबूरन बायोमास और लकड़ी का इस्तेमाल किया जाता है। नेपाल की ज्यादातर आबादी परंपरागत बायोमास पर निर्भर करती है। नेपाल में बायोमास जलने के कारण उत्‍पन्‍न वायु प्रदूषण की वजह से हर साल तकरीबन 7500 लोगों की मौत होती है।
उन्‍होंने बताया कि वायु प्रदूषण को लेकर आपात स्थिति से गुजरने के बावजूद पिछले पांच सालों में नेपाल में पेट्रोल की खपत लगभग दोगुनी हो गयी है। डीजल का उपयोग भी लगभग 96% बढ़ा है। हाल ही में 69 किलोमीटर की पेट्रोलियम पाइपलाइन बिहार के मोतिहारी से नेपाल के बीच तैयार की गई है। इसका मतलब यह है कि नेपाल सरकार का अक्षय ऊर्जा में रूपांतरण का कोई भी इरादा नहीं है। हालांकि नेपाल के पास अक्षय ऊर्जा स्रोतों से बड़े पैमाने पर ऊर्जा उत्पादन करने की क्षमता है। उसके पास वायु, हाइड्रो और सोलर पावर उत्पन्न करने की काफी संभावना है लेकिन अभी उन पर ज्यादा काम नहीं किया गया है। अगर हाइड्रो पावर की तमाम संभावनाओं का सर्वश्रेष्ठ दोहन किया जाए तो इससे नेपाल की अर्थव्यवस्था को बढ़ाने में काफी मदद मिल सकती है। नेपाल के पास काफी प्राकृतिक संपदा है लेकिन उसका सही उपयोग नहीं हो रहा है। बांग्लादेश लंग फाउंडेशन के काजी बेन्नूर ने कहा कि जीवाश्म ईंधन यानी कोयला, तेल और प्राकृतिक गैस की वजह से अनेक पर्यावरणीय तथा स्‍वास्‍थ्‍य सम्‍बन्‍धी नुकसान होते हैं।
इससे जीवाश्म ईंधन की आपूर्ति श्रृंखला के हर चरण में अतिरिक्‍त भार पैदा होता है। जब जीवाश्म ईंधन को जलाया जाता है तो उससे कार्बन डाइऑक्साइड जैसी ग्रीनहाउस गैस उत्पन्न होती है जो जलवायु परिवर्तन को बढ़ावा देती है। जीवाश्म ईंधन से पैदा होने वाली गैसों की वजह से समुद्रों का अम्‍लीकरण, अत्यधिक बारिश और समुद्र के जल स्तर में वृद्धि होती है। जीवाश्म ईंधन जलाने के कारण उत्पन्न वायु प्रदूषण की वजह से दमा, कैंसर, दिल की बीमारी और असामयिक मौत हो सकती है। वैश्विक स्तर पर हर पांच में से एक मौत वायु प्रदूषण की वजह से होती है। वहीं, प्रदूषण दुनिया में चौथा सबसे बड़ा मानव स्वास्थ्य संबंधी खतरा है।
उन्‍होंने कुछ आंकड़े देते हुए बताया कि वायु प्रदूषण एक अदृश्य हत्यारा है। दक्षिण एशिया में 29% लोगों की मौत फेफड़े के कैंसर से होती है, 24% लोगों की मौत मस्तिष्क पक्षाघात से, 25% लोगों की मौत दिल के दौरे से और 43 प्रतिशत लोगों की मौत फेफड़े की बीमारी से होती है। दक्षिण पूर्व एशियाई क्षेत्र में वायु प्रदूषण की वजह से 20 लाख से ज्यादा लोगों की मृत्यु होती है।
फॉसिल फ्यूल ट्रीटी के हरजीत सिंह ने वायु प्रदूषण के लिये मौजूदा आर्थिक ढर्रे को काफी हद तक जिम्‍मेदार ठहराया। उन्‍होंने कहा कि हम मौजूदा आर्थिक मॉडल के साथ आगे नहीं बढ़ सकते। हमें एक ऐसे विकास मॉडल की जरूरत है जो हमारे पर्यावरण को संरक्षण देता हो।
कोई भी देश मौजूदा आर्थिक ढर्रे से हटना नहीं चाहता है, लेकिन ऐसा किए बगैर दुनिया को सुरक्षित नहीं बनाया जा सकता। इसके लिए हमें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सहयोग की भी जरूरत होती है। क्योंकि इसके बिना कुछ नहीं हो सकता।

अपनी बारी आने तक श्रीवारी दर्शन की प्रतीक्षा करें

अपनी बारी आने तक श्रीवारी दर्शन की प्रतीक्षा करें 

इकबाल अंसारी  

अमरावती/तिरुमाला। आंध्र प्रदेश में तिरुमाला तिरुपति देवस्थानम्स (टीटीपी) पार्टी के अध्यक्ष वाई.वी. सुब्बा रेड्डी ने रविवार को भक्तों से आग्रह किया कि वे भीषण गर्मी में धैर्यपूर्वक अपनी बारी आने तक श्रीवारी दर्शन की प्रतीक्षा करें। टीटीडी के अध्यक्ष ने यहां संवाददाताओं से कहा कि इस दौरान तिरुमाला मंदिर परिसर के बाहर श्रद्धालुओं की लंबी कतार देखी गई, क्योंकि 48 घंटे तक मुफ्त दर्शन के लिए प्रतीक्षा समय बढ़ा दिया गया है।

देश भर के कई राज्यों में एसएससी और इंटरमीडिएट परीक्षाओं के समापन के बाद तिरुमाला में भक्तों की अचानक भीड़ उमड़ी। उन्होंने बताया कि तिरुमाला में इस सप्ताह के अंत में भक्तों की संख्या में इजाफा हो रहा है, क्योंकि कोविड महामारी के दो साल बाद नियमों में छूट दे दी गयी है। उन्होंने बताया कि भक्तों के लिए सभी सुविधाओं का प्रबंधन किया गया है। टीटीडी अध्यक्ष ने भक्तों की सेवा में कड़ी मेहनत के लिए अधिकारियों और कर्मचारियों की सराहना करते हुए कहा कि सभी भक्तों के लिए पीने का पानी और अन्नप्रसादम सहित अन्य सुविधाएं उपलब्ध कराई गयी हैं।


द्रविड़ों और आदिवासियों का हैं, भारत: ओवैसी

द्रविड़ों और आदिवासियों का हैं, भारत: ओवैसी 

कविता गर्ग      
ठाणे। ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) के अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी ने कहा कि ‘‘भारत द्रविड़ों और आदिवासियों का है’’ न कि उनका या महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे का, न राकांपा अध्यक्ष शरद पवार का या प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का। एआईएमआईएम के अध्यक्ष ने शनिवार को शाम को यहां एक रैली को संबोधित करते हुए जानना चाहा कि राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) प्रमुख पवार ने शिवसेना सांसद संजय राउत के लिए क्यों प्रधानमंत्री मोदी से गुहार लगाई और राज्य में राकांपा के मंत्री नवाब मलिक के लिए क्यों नहीं पैरवी की जिन्हें धन शोधन के मामले में प्रवर्तन निदेशालय द्वारा गिरफ्तार किया गया है।
भाजपा, शिवसेना, राकांपा और कांग्रेस पर करारा प्रहार करते हुए ओवैसी ने दावा किया कि ये पार्टिंया अपना वोट बैंक बचाना चाहती हैं, इसलिए जब अल्पसंख्यक समुदाय के सदस्य को निशाना बनाया जाता है तो ये प्रतिक्रिया नहीं करते। उन्होंने मंहगाई और अन्य मुद्दों का हवाला देते हुए कहा कि भाजपा और प्रधानमंत्री देश पर अपने सफल शासन का जश्न मना रहे हैं, लेकिन उन्हें एहसास नहीं है कि देश किस मुश्किल दौर से गुजर रहा है।
ओवैसी ने कहा, ‘‘अगर भारत किसी का है तो, वह द्रविड़ों और आदिवासियों का है।’’ उन्होंने कहा, ‘‘वे (अन्य पार्टियां) 600 साल का उदाहरण देती हैं लेकिन मैं आपको 65 हजार साल से अधिक का उदाहरण देता हूं। यह देश ठाकरे, पवार, ओवैसी, मोदी या शाह का नहीं था बल्कि द्रविड और आदिवासियों का था।’’ ओवैसी ने दावा किया कि अगर कोई मुख्यमंत्री ठाकरे, पवार, मोदी या उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी (आदित्यनाथ) की आलोचना करता है तो वे (संबंधित पार्टियां) तुरंत प्रतिक्रिया देते हैं और कार्रवाई करते हैं, ‘‘लेकिन जब हमारी आलोचना होती है या हमारे खिलाफ टिप्पणी होती है तो कोई प्रतिक्रिया नहीं देता।
ओवैसी ने मुस्लिमों, दलितों और ओबीसी (अन्य पिछड़ा वर्ग) सहित अन्य से अपील की कि वे समझें कि ‘‘उनकी सहायता के लिए कथित धर्मनिरपेक्ष पार्टियां नहीं आएंगी’’क्योंकि वे केवल अपने वोट बैंक को लेकर चिंतित हैं। ओवैसी ने कहा कि किसी को भी उन्हें चुनौती नहीं देनी चाहिए या उकसाना नहीं चाहिए नहीं तो वह उन्हें ‘‘आइना दिखाएंगे।’’ उन्होंने दावा किया कि मुस्लिमों को मस्जिद के साथ-साथ हिजाब पहनने और हलाल मीट जैसे मुद्दों को लेकर निशाना बनाया जा रहा है। 
ओवैसी ने इसके साथ ही समुदाय से इनके खिलाफ लड़ने की अपील की। ओवैसी ने दावा किया कि महाराष्ट्र में शिवसेना और कांग्रेस के साथ सत्तासीन राकांपा के नेता पवार ने प्रधानमंत्री मोदी से सांसद राउत के लिए गुहार लगाई। उन्होंने सवाल किया, ‘‘ क्यों उन्होंने (पवार ने) नवाब मलिक के लिए गुहार नहीं लगाई? राउत के बारे में खास क्या है?’’ ज्ञानवापी मस्जिद विवाद का संदर्भ देते हुए ओवैसी ने कहा कि वे (केंद्र सरकार) अलग-अलग स्थानों की खुदाई चाहते हैं, लेकिन उन्हें वहां कुछ नहीं मिलेगा।
’उन्होंने कहा, ‘‘ वे उसे (ज्ञानवापी मस्जिद को) बाबरी मस्जिद की तरह मिटाना चाहते हैं।’’ ओवैसी ने कहा कि बाबरी ढांचा विवाद में अदालत का फैसला आने के बाद उन्होंने कहा था कि अब वे (सरकार) ज्ञानवापी और लखनऊ सहित अन्य मस्जिदों की खुदाई शुरू करेंगे और उनका दावा सच हो रहा है।

पनीर के फूल का सेवन करना, बेहद फायदेमंद

पनीर के फूल का सेवन करना, बेहद फायदेमंद 

सरस्वती उपाध्याय          
आपने पनीर के बारे में तो सुना होगा, लेकिन कम ही लोग जानते होंगे कि पनीर का फूल भी होता है। इस फूल का भी सेवन किया जाता है। अब आप सोच रहे होंगे कि भला इसका उपयोग कैसे किया जाता है और इसके क्या-क्या फायदे आपको मिल सकते हैं, तो आइए जानने का प्रयास करते हैं कि पनीर के फूल ब्लड शुगर कंट्रोल में कैसे प्रभावी है ? 
वर्तमान समय में डायबिटीज से ज्यादातर लोग पीड़ित हैं। इससे निपटने के लिए कुछ लोग दवाइयों पर निर्भर हैं तो कुछ लोग एहतियात अपनाते हैं। बता दें कि यह एक ऐसी बीमारी है जिसे कंट्रोल किया जा सकता है, लेकिन पूरी तरह से खत्म नहीं किया जा सकता है। ऐसी स्थिति में आपको सही खानपान, हेल्दी लाइफस्टाइल के साथ-साथ कुछ घरेलू उपाय अपनाने होंगे, जिससे ब्लड शुगर कंट्रोल किया जा सकता है। ऐसे में पनीर का फूल भी काफी फायदे है। डायिबटीज मरीजों के लिए यह रामबाण इलाज हो सकता है। दरअसल, इसका उपयोग करन से ब्लड शुगर लेवल कंट्रोल में रहता है। अब आप सोच रहे होंगे कि इस फूल का कैसे इस्तेमाल करें, तो आइए जानते हैं।
वर्तमान समय में डायबिटीज से ज्यादातर लोग पीड़ित हैं। इससे निपटने के लिए कुछ लोग दवाइयों पर निर्भर हैं तो कुछ लोग एहतियात अपनाते हैं। बता दें कि यह एक ऐसी बीमारी है जिसे कंट्रोल किया जा सकता है, लेकिन पूरी तरह से खत्म नहीं किया जा सकता है। ऐसी स्थिति में आपको सही खानपान, हेल्दी लाइफस्टाइल के साथ-साथ कुछ घरेलू उपाय अपनाने होंगे, जिससे ब्लड शुगर कंट्रोल किया जा सकता है।
ऐसे में पनीर का फूल भी बेहद फायदेमंद है। डायिबटीज मरीजों के लिए यह रामबाण इलाज हो सकता है। दरअसल, इसका उपयोग करन से ब्लड शुगर लेवल कंट्रोल में रहता है। 

सामाजिक मुद्दों व किसानों की समस्याओं पर मंथन

सामाजिक मुद्दों व किसानों की समस्याओं पर मंथन 

भानु प्रताप उपाध्याय 
मुजफ्फरनगर। काकड़ा में बालियान खाप की ओर से बुलाई गई किसान मजदूर पंचायत में आज पश्चिमी उत्तर प्रदेश, हरियाणा, पंजाब और अन्य राज्यों की विभिन्न खापों के चौधरी गरजे। किसान और मजदूरों के मुद्दे पर पंचायत का ऐलान किया गया था। सर्वखाप मंत्री सुभाष बालियान ने कहा कि सामाजिक मुद्दों, किसानों की समस्याओं पर काकड़ा में मंथन किया गया। भाकियू अध्यक्ष चौधरी नरेश टिकैत ने कहा कि अगर गांव और किसानों को बिजली नहीं मिली तो शहर में भी बिजली सप्लाई नहीं होने देंगे। बड़ी-बड़ी बिजली लाइनें किसानों के खेतों से होकर गुजर रही है।
किसान इन बिजली लाइनों को उखाड़ कर फेंक देंगे। टिकैत ने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को जानकारी नहीं है, अधिकारी पर्दे के पीछे लूट कर रहे हैं। किसान और प्रदेश की जनता बेहाल है।
काकड़ा गांव के स्वामी कल्याणदेव कन्या इंटर कॉलेज में बालियान खाप ने किसान मजदूर महापंचायत बुलाई गई। पंचायत को लेकर ग्रामीणों में भारी उत्साह रहा और ग्रामीण बढ़ चढ़कर हिस्सा लेने पहुंचे। कॉलेज के प्रबंधक मास्टर राधेश्याम बालियान ने बताया कि बताया कि महापंचायत में बालियान खाप के गांवों के अलावा अन्य खापों सहित हरियाणा, पंजाब, राजस्थान व उत्तराखंड सहित पूर्वी उत्तरप्रदेश के 20 से 25 हजार किसान मजदूर भाग लेने पहुंचे।
सोरम निवासी भाकियू नेता सतबीर सिंह सैकेट्री ने बताया कि महापंचायत को लेकर किसान व मजदूरों में भारी उत्साह रहा। सोरम गांव से पांच दर्जन से अधिक ट्रैक्टर-ट्रॉलियों में सवार होकर किसान मजदूर महापंचायत में पहुंचे। गांव गोयला के पूर्व प्रधान वीरेंद्र सिंह ने बताया कि काकड़ा से आगामी रणनीति तय की गई। बालियान खाप की ओर से महापंचायत में आने वाले किसानों के खाने-पीने का इंतजाम किया गया है। अलग-अलग गांव की ओर से भंडारे लगाए गए हैं।

सांप्रदायिक हिंसा को लेकर निशाना साधा: सीएम

सांप्रदायिक हिंसा को लेकर निशाना साधा: सीएम 

नरेश राघानी  
जयपुर। राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने सांप्रदायिक हिंसा को लेकर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पर निशाना साधते हुए रविवार को कहा कि देशभर में बने तनाव के माहौल में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को रेडियो पर प्रसारित होने वाले अपने मासिक कार्यक्रम ‘मन की बात’ में शांति की अपील करनी चाहिए। मुख्यमंत्री ने एक ट्वीट में कहा, ‘प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी , देश के तमाम विपक्षी पार्टियों के नेता, बुद्धिजीवी, पत्रकार, लेखक एवं शांतिपूर्ण जीवन जीना चाहने वाले सभी नागरिक आपसे अपील कर रहे हैं कि आप “मन की बात” कार्यक्रम में देशभर में बने तनाव के माहौल में शांति की अपील जारी करें।
’’ उन्होंने कहा कि ‘‘आज धर्म के नाम पर पूरे देश में तनाव का माहौल है और आए दिन दंगे हो रहे हैं।
 ऐसे में जनता में आपकी अपील का असर होगा। आप कहें कि सब कुछ बर्दाश्त हो सकता है लेकिन सांप्रदायिकता और हिंसा किसी कीमत पर बर्दाश्त नहीं है।’’ गहलोत ने कहा, ‘‘इससे देशभर में एक सकारात्मक संदेश जाएगा और माहौल सुधरेगा।’’ उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री गहलोत पहले भी प्रधानमंत्री से इस तरह की अपील करने का आग्रह कर चुके है। गहलोत ने हाल में भाजपा और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) पर साप्रंदायिक हिंसा फैलाने का आरोप लगाया था।

जुलाई-अगस्त तक ऊर्जा संकट खड़ा हो सकता है

जुलाई-अगस्त तक ऊर्जा संकट खड़ा हो सकता है

अकांशु उपाध्याय
नई दिल्ली। भारत में ताप बिजली संयंत्रों में मानसून से पहले कोयला भंडार की कमी होने से संकेत मिल रहा है कि जुलाई-अगस्त तक देश में एक और ऊर्जा संकट खड़ा हो सकता है। स्वतंत्र शोध संगठन सेंटर फॉर रिसर्च ऑन एनर्जी एंड क्लिन एयर (सीआरईए) की रिपोर्ट में यह बात कही गई है। खदानों पर लगे ऊर्जा स्टेशनों के पास अभी 1.35 करोड़ टन का कोयला भंडार है और देशभर के ऊर्जा संयंत्रों के पास 2.07 करोड़ टन कोयला भंडार है। सीआरईए ने अपनी ‘‘भार उठाने में विफल। भारत का ऊर्जा संकट कोयला प्रबंधन का संकट है’ शीर्षक की रिपोर्ट में कहा है, ‘‘आधिकारिक स्रोतों से एकत्रित आंकड़े बताते हैं कि कोयला आधारित बिजली संयंत्र ऊर्जा की मांग में मामूली बढ़ोतरी को भी झेलने की स्थिति में नहीं हैं और कोयला परिवहन की योजना पहले से बनाने की जरूरत है।
केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण (सीईए) का अनुमान है कि अगस्त में ऊर्जा की अधिकतम मांग 214 गीगावॉट पर पहुंच जाएगी, इसके अलावा औसत बिजली की मांग भी मई के दौरान 13,342.6 करोड़ यूनिट से अधिक हो सकती है।
सीआरईए ने कहा, ‘‘दक्षिणपश्चिमी मानसून के आगमन से खनन में और खदानों से बिजली स्टेशनों तक कोयले के परिवहन में भी मुश्किलें आएंगी। मानसून से पहले यदि कोयला भंडार को पर्याप्त स्तर तक नहीं बनाया गया, तो जुलाई-अगस्त में देश को एक और बिजली संकट का सामना करना पड़ सकता है।
रिपोर्ट में कहा गया कि हाल में देश में जो बिजली संकट आया था उसकी वजह कोयला उत्पादन नहीं बल्कि इसका ‘‘वितरण और अधिकारियों की उदासीनता’’ थी। इसमें कहा गया, ‘‘आंकड़ों से यह जाहिर है कि पर्याप्त कोयला खनन के बावजूद ताप बिजली संयंत्रों में कोयले का पर्याप्त भंडार नहीं रखा गया।
भारत में 2021-22 में कोयले का 77.72 करोड़ टन का रिकॉर्ड उत्पादन हुआ जो इससे एक साल पहले के 71.60 करोड़ टन उत्पादन की तुलना में 8.54 प्रतिशत अधिक है। सीआरईए में विश्लेषक सुनील दहिया ने कहा 2021-22 में देश की कुल खनन क्षमता 150 करोड़ टन रही जबकि कुल उत्पादन 77.72 करोड़ टन रहा जो उत्पादन क्षमता का ठीक आधा है।
दहिया ने कहा कि यदि कोयले की वास्तव में कमी होती तो कोयला कंपनियों के पास उत्पादन बढ़ाने का विकल्प था। उन्होंने कहा कि यह स्थिति अभी-अभी बनी है ऐसा नहीं है, बल्कि बिजली संयंत्रों के पास से तो मई, 2020 से ही कोयले का भंडार लगातार घट रहा है। दहिया ने कहा कि पिछले वर्ष बिजली संकट की स्थिति बनने का प्रमुख कारण यह था कि बिजली संयंत्र परिचालकों ने मानसून से पहले कोयले का पर्याप्त भंडार नहीं बनाया था।

4 साल के लिए सेना में युवाओं की भर्ती की जाएगी

4 साल के लिए सेना में युवाओं की भर्ती की जाएगी

अकांशु उपाध्याय
नई दिल्ली। देश की सेवा के लिए भारतीय सेना में शामिल होना युवाओं का सपना होता है। लेकिन पिछले कई सालों से सेना में भर्ती प्रक्रिया थमी हुई है, इससे युवाओं में हताशा है। ऐसे में अग्निपथ योजना (टूर ऑफ ड्यूटी) के तहत भारत के युवाओं को भारतीय सेना, नेवी और एयरफोर्स में भर्ती करने की तैयारी की जा रही है। इसमें 4 साल के लिए युवाओं की सेना में भर्ती की जाएगी।
जानकारी के अनुसार, ‘टूर ऑफ ड्यूटी’ के तहत भर्ती किए गए जवानों में से 100 फीसदी चार साल बाद सेवा से मुक्त किए जाएंगे। इनमें से 25 फीसदी को पूर्ण सेवा के लिए फिर से सूचीबद्ध किया जाएगा।
जानकार बताते हैं कि प्रारंभिक प्रस्ताव के विपरीत ‘टूर ऑफ़ ड्यूटी’ के तहत युवाओं की तीन साल के लिए भारतीय सेना में शामिल होने की बात कही जा रही थी। लेकिन अब चार साल की संविदा सेवा के बाद इन सैनिकों को सेवा मुक्त किए जाने के करीब 30 दिनों की अवधि के साथ उनमें से 25 फीसदी को वापस बुला लिया जाएगा। शामिल होने की एक नई तारीख के साथ सैनिकों के रूप में फिर से भर्ती किया जाएगा।
सैनिकों को उनकी पिछले 4 सालों की संविदा सेवा को वेतन और पेंशन के निर्धारण के लिए उनकी पूर्ण सेवा में नहीं गिना जाएगा। इस तरह से एक बड़ी राशि की बचत होने की उम्मीद है। सूत्रों का कहना है कि तीन सेवाओं में सैनिकों के कुछ ट्रेडों के लिए कुछ अपवाद होंगे, जिसमें उनकी नौकरी की तकनीकी नेचर की वजह से उन्हें 4 साल की संविदा सेवा से परे रखा जा सकता है। इनमें आर्मी मेडिकल कोर में सेवारत कर्मचारी भी शामिल हो सकते हैं।

'भारत के कब्जे वाली भूमि' वापस लेने के लिए प्रतिबद्ध

'भारत के कब्जे वाली भूमि' वापस लेने के लिए प्रतिबद्ध  

अखिलेश पांडेय       
काठमांडू। नेपाल के प्रधानमंत्री शेर बहादुर देउबा ने शनिवार को कहा कि उनकी सरकार 'भारत के कब्जे वाली विवादित भूमि' वापस लेने के लिए प्रतिबद्ध है। बजट पेश करने से पहले संसद को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि उनकी सरकार देश की जमीन की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है।
कालापानी क्षेत्र में नेपाल और भारत के बीच लंबे समय से सीमा विवाद है। के.पी. शर्मा ओली सरकार ने मई 2020 में कल्पना, लिपुलेख और लिंपियाधुरा - सभी भारतीय क्षेत्रों को शामिल करते हुए एक नए राजनीतिक मानचित्र का अनावरण किया था। भारत ने नेपाल द्वारा एकतरफा क्षेत्रीय विस्तार को "काटरेग्राफिक अभिकथन' के रूप में खारिज कर दिया था और नेपाल से स्थापित राजनयिक तंत्र के माध्यम से विवाद को निपटाने का आग्रह किया था।
देउबा ने शनिवार को कहा कि चूंकि सीमा से संबंधित मुद्दा संवेदनशील है, इसलिए सरकार इसे बातचीत और कूटनीतिक तरीकों से हल करने के लिए प्रतिबद्ध है, जबकि कालापानी, लिपुलेख और लिंपियाधुरा नेपाल के हैं।
पूर्व प्रधानमंत्री ओली ने शुक्रवार को सदन को संबोधित करते हुए भारत के कब्जे वाली जमीन को वापस लेने में विफल रहने के लिए देउबा सरकार की आलोचना की।
देउबा ने कहा कि भारत के साथ संबंध बहुआयामी हैं और सहयोग के क्षेत्र विविध हैं।उन्होंने ओली को दिए जवाब में कहा, "हम अपने विदेशी संबंधों का संचालन करते हुए गुटनिरपेक्षता की नीति पर चल रहे हैं। राष्ट्रीय हित, पारस्परिक लाभ और सम्मान बनाए रखते हुए सरकार पड़ोसियों और सभी मित्र राष्ट्रों के साथ अपने संबंधों को मजबूत करने के लिए प्रतिबद्ध है। नेपाल से संबंधित भूमि की रक्षा के लिए सरकार भी प्रतिबद्ध है।
देउबा ने अपने बयान में नेपाल और भारत के बीच पहली बार 2014 में हस्ताक्षरित ऊर्जा सहयोग पर भी प्रकाश डाला। पिछले जुलाई में देउबा के सत्ता में आने के बाद उनकी सरकार ने पहले ही भारत को एक जलविद्युत परियोजना का अनुबंध देने का फैसला किया है और दूसरे को विकसित करने के लिए बातचीत जारी है।
तीन साल से लंबित नेपाल-भारत संबंधों पर प्रतिष्ठित व्यक्तियों के समूह की रिपोर्ट प्रस्तुत करने के मुद्दे पर देउबा ने ओली से पूछा कि उन्हें तीन साल पहले रिपोर्ट क्यों नहीं मिली थी।
2016 में वापस, नेपाल और भारत ने नेपाल-भारत मैत्री संधि 1950 सहित द्विपक्षीय संबंधों के विभिन्न पहलुओं की समीक्षा करने के लिए आठ सदस्यीय ईपीजी का गठन किया था, और इसने कहा कि एक विस्तृत रिपोर्ट के साथ आने के लिए लगभग साढ़े तीन साल तक काम किया है और इसे जल्द ही नेपाल और भारत के प्रधानमंत्रियों को सौंपेंगे। भारतीय पक्ष कुछ आपत्तियों के कारण रिपोर्ट को स्वीकार करने के लिए अनिच्छुक था।
ओली ने रिपोर्ट प्राप्त करने के लिए माहौल बनाने में विफल रहने के लिए देउबा सरकार की आलोचना की थी। जब ईपीजी रिपोर्ट तैयार हुई तो ओली नेपाल में प्रधानमंत्री थे।
देउबा ने ओली से कहा, आपको तीन साल पहले रिपोर्ट प्राप्त करने से किस बात ने रोका नेपाल सरकार एक ऐसा माहौल बनाने के लिए प्रतिबद्ध है ताकि रिपोर्ट दोनों पक्षों को सौंपी जा सके।
ओली द्वारा एक-चीन नीति का सम्मान करने की नेपाल की लंबे समय से चली आ रही स्थिति के उल्लंघन पर सवाल उठाने के बाद देउबा ने चीन के साथ नेपाल के संबंधों पर भी बात की। ओली ने कहा कि हाल ही में एक वरिष्ठ अमेरिकी अधिकारी ने काठमांडू स्थित तिब्बती शिविरों का दौरा किया, जिसने नेपाल की एक-चीन नीति का उल्लंघन किया है। नेपाल लगभग 15,000 तिब्बती शरणार्थियों का घर है और कुछ 6,000 दस्तावेजीकरण से वंचित हैं। अमेरिका और कुछ पश्चिमी देश नेपाल सरकार पर पंजीकरण से वंचित शेष तिब्बतियों को शरणार्थी पहचान पत्र प्रदान करने के लिए दबाव डाल रहे हैं।
देउबा ने कहा कि सरकार एक चीन की नीति के लिए प्रतिबद्ध है और पूरी तरह से जानती है कि उसकी जमीन का इस्तेमाल उसके पड़ोसियों के खिलाफ नहीं किया जाएगा।

नगरीय निकाय चुनाव में नए प्रयोग करने की तैयारी

नगरीय निकाय चुनाव में नए प्रयोग करने की तैयारी  

मनोज सिंह ठाकुर     

भोपाल। मध्य प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी आगामी समय में होने वाले नगरीय निकाय चुनाव में नए प्रयोग करने की तैयारी में है। यह प्रयोग वर्ष 2023 में होने वाले विधानसभा चुनाव रणनीति का हिस्सा हो सकते हैं। राज्य में पंचायत चुनाव की तारीखों का ऐलान हो चुका है जो गैर दलीय आधार पर हो रहे हैं तो वही नगरीय निकाय चुनाव की तारीख का भी जल्दी एलान हो सकता है जो दलीय आधार पर होंगे। नगर निगम में महापौर का चुनाव जहां सीधे जनता करने वाली है, वही नगर पालिका और नगर पंचायत के अध्यक्षों का चुनाव पार्षदों द्वारा किया जाएगा।भाजपा से जुड़े सूत्रों का कहना है कि पार्टी ने नगरीय निकाय चुनाव में नए चेहरों को ज्यादा तरजीह देने की रणनीति बनाई है। इस पर संगठन से जुड़े लोग मंथन भी कर चुके हैं। 

आगामी समय में जल्दी ही पार्टी की समितियां गठित हो जाएंगी और वे निचले स्तर पर उन संभावित चेहरों की तलाश करेंगी जो साफ-सुथरे हैं और पार्टी के लिए समर्पित कार्यकर्ता के तौर पर काम भी कर रहे हैं।भाजपा वर्षों से मध्य प्रदेश में लगातार नए प्रयोग करती आ रही है, वर्तमान में संगठन के प्रदेशाध्यक्ष विष्णु दत्त शर्मा से लेकर प्रदेश कार्यकारिणी और जिला स्तर के पदाधिकारी पर गौर किया जाए तो अधिकांश नए चेहरे हैं। इसी तरह का प्रयोग नगरीय निकाय चुनाव में होने वाला है। इन चुनावों में पार्टी विभिन्न क्षेत्रों के पढ़े लिखे और सार्वजनिक जीवन में काम करने वालों को प्राथमिकता देने वाली है।पार्टी सूत्रों का कहना है कि ऐसा करने के पीछे नए चेहरों को सामने लाने के अलावा राज्य में परिवारवाद पर भी अंकुश लगाना बड़ा मकसद है। पार्टी लगभग यह भी मन बना चुकी है कि एक परिवार से एक व्यक्ति ही उम्मीदवार बनाया जाएगा, वहीं अगर उस परिवार का सदस्य संगठन में पदाधिकारी है तो उसे टिकट नहीं दिया जाएगा। हां उसके पास यह विकल्प चुनने का जरूर अवसर रहेगा कि वह संगठन का पद छोड़ दें और अपने लिए अथवा परिवार के सदस्य के लिए टिकट मांगे।

भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता डॉ हितेष वाजपेई का कहना है कि नगरीय निकाय चुनाव किसी भी राजनीतिक दल के लिए महत्वपूर्ण होते हैं और भाजपा भी इन चुनावों को लेकर गंभीर है। पार्टी हमेशा अपनी नीतियों और योजनाओं के साथ जनता के हित में किए गए कामों को लेकर चुनाव के मैदान में जाती है। इस चुनाव में भी ऐसा ही होगा। जहां तक उम्मीदवारी की बात है, पार्टी की ओर से सक्षम व्यक्ति का उम्मीदवार के तौर पर चयन किया जाएगा।


देश की पहली आरआरटीएस ट्रेन चलाने का लक्ष्य

देश की पहली आरआरटीएस ट्रेन चलाने का लक्ष्य 

अकांशु उपाध्याय/अश्वनी उपाध्याय 
नई दिल्ली/गाजियाबाद। दिल्ली-गाजियाबाद-मेरठ रीजनल रैपिड ट्रांजिट सिस्टम कॉरिडोर के प्रायोरिटी सेक्शन पर मार्च 2023 तक देश की पहली आरआरटीएस ट्रेन चलाने के लक्ष्य को पूरा करने के लिए एनसीआरटीएस तेजी से कार्य कर रहा है। इस कॉरिडोर पर चलने वाली आरआरटीएस ट्रेनें गुजरात के सावली से जल्द गाजियाबाद स्थित दुहाई डिपो पहुंचेंगी। दुहाई डिपो में इनके लिए ट्रैक बनकर तैयार हो चुके हैं और ट्रेन की टेस्टिंग के लिए भी पूरी तैयारी है। आरआरटीएस ट्रेनों के संचालन के लिए दुहाई डिपो में ही प्रशासनिक भवन बनाया गया है।
17 किमी लंबे प्रायोरिटी सेक्शन में साहिबाबाद, गाजियाबाद, गुलधर, दुहाई आरआरटीएस स्टेशन और दुहाई डिपो हैं। आरआरटीएस ट्रेनों के लिए दुहाई डिपो में 11 स्टेबलिंग लाइन, 2 वर्कशॉप लाइन, 3 इंटरनल-बे लाइन (आईबीएल) और एक हेवी इंटरनल क्लीनिंग (एचईसी) लाइन बनाई जा रही हैं, जिनमें एक वर्कशॉप और एक आईबीएल लाइन का निर्माण अंतिम चरण में हैं, जबकि बाकी लाइनों का निर्माण पूरा हो चुका है।
स्टेबलिंग लाइनों का प्रयोग ट्रेनों के खड़ा करने के लिए किया जाता है। वर्कशॉप लाइनों पर ट्रेनों के रख रखाव और तकनीकी खराबियों को ठीक किया जाता है। आईबीएल लाइनें ट्रेनों की टेस्टिंग के लिए बनाई जाती हैं और हेवी इंटरनल क्लीनिंग लाइन पर ट्रेनों के भीतर की सफाई की जाती है।
आरआरटीएस ट्रेनों को जनता के लिए ऑपरेशनल करने से पहले इसकी कई प्रकार की टेस्टिंग की जाती है। साथ ही सिग्नलिंग, रोलिंग स्टॉक और सतत विद्युत सप्लाई सुनिश्चित करने के लिए इसे कई प्रक्रियाओं द्वारा जांचा-परखा जाता है। सभी प्रक्रियाओं की सफल टेस्टिंग के बाद प्री-ऑपरेशनल ट्रायल होता है, जिसमें सफल होने के बाद ही ट्रेन को यात्रियों के लिए ऑपरेशनल किया जाता है।
दुहाई डिपो में ट्रेनों के लिए रूफ शेड लगाने, अंडरपास और बाउंड्री वॉल के निर्माण समेत अन्य कई कार्य तेजी से चल रहे हैं। इसके साथ ही ट्रेनों के लिए विद्युत आपूर्ति के लिए ओएचई लगाने का काम जल्द शुरू होने वाला है। डिपो में ओएचई लगाने के लिए पोल और केंटीलिवर लगाए जा चुके हैं। जल्द ही पूरा डिपो ट्रेनों के संचालन के लिए तैयार हो जाएगा।
इसके साथ ही दुहाई आरआरटीएस स्टेशन को दुहाई डिपो से जोड़ने वाले वायाडक्ट का निर्माण कार्य भी तेजी से चल रहा है। इस वायाडक्ट के पूरा होने के साथ ही ट्रेनों के लिए डिपो से बाहर निकलने के लिए लाइन तैयार हो जाएगी। वहीं प्रायोरिटी सेक्शन पर ट्रैक बिछाने और ओएचई लगाने का कार्य भी प्रगति पर है।

लिपुलेख-लिंपियाधुरा व कालापानी का मुद्दा उठाया

लिपुलेख-लिंपियाधुरा व कालापानी का मुद्दा उठाया 

सुनील श्रीवास्तव
काठमांडू। नेपाल ने उत्तराखंड के लिपुलेख, लिंपियाधुरा और कालापानी का मुद्दा फिर उठाया है। अब प्रधानमंत्री शेर बहादुर देउबा ने भी इन तीनों क्षेत्रों को नेपाल का हिस्सा बताया। कहा कि इस मामले में नेपाल का रुख पूरी तरह दृढ़ है। इससे पहले पूर्व प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली के कार्यकाल में भी नेपाल इन क्षेत्रों पर अपना दावा कर चुका है।
देउबा ने कहा कि हमारा देश तटस्थ विदेश नीति पर चलता रहा है। नेपाल सरकार ने हमेशा राष्ट्रीय हित को सामने रखा है। पड़ोसियों और अन्य देशों से जुड़े मुद्दों में हम आपसी लाभ की नीति पर चलते हैं। सरकार अपने क्षेत्र की रक्षा के लिए हमेशा तैयार रहती है। देउबा ने कहा, सीमा का मुद्दा एक संवेदनशील मामला है। हम समझते हैं कि इन मुद्दों का समाधान संवाद के माध्यम से निकाला जा सकता है। इस दिशा में आगे बढ़ते हुए हम राजनयिक चैनलों के जरिये प्रयास कर रहे हैं।
बता दें कि भारत के साथ सीमा विवाद के बीच नेपाल ने चाल चलते हुए 20 मई 2020 को कैबिनेट में नए नक्शे को पेश किया था। जिसे नेपाली संसद की प्रतिनिधि सभा ने 13 जून को अपनी मंजूरी दे दी थी। इसमें भारत के कालापानी, लिपु लेख और लिंपियाधुरा को नेपाल का हिस्सा दिखाया गया है। वहीं भारत ने इसका विरोध करने के लिए नेपाल को एक डिप्लोमेटिक नोट भी सौंपा था। इसके अलावा, भारतीय विदेश मंत्रालय ने नेपाल के नए नक्शे को एतिहासिक तथ्यों के साथ छेड़छाड़ भी करार दिया था।
नेपाल के इस कदम से भारत के साथ उसके रिश्‍तों पर गहरा असर पड़ रहा है। भारत ने साफ कर दिया है कि वह अपनी संप्रभुता से समझौता नहीं करेगा। विदेश मंत्रालय की तरफ से कहा गया था कि इस सीमा विवाद का हल बातचीत के माध्यम से निकालने के लिए आगे बढ़ना होगा। इसके बाद नेपाल ने पिथौरागढ़ से सटे बॉर्डर पर बरसों पुराने एक रोड प्रोजेक्‍ट को शुरू करवा दिया। यह रोड रणनीतिक रूप से अहम है और उसी इलाके में है जहां पर नेपाल अपना कब्‍जा बताता रहा है।


31 को जिला कलेक्ट्री पर प्रदर्शन कर, सभा की जाएगी

31 को जिला कलेक्ट्री पर प्रदर्शन कर, सभा की जाएगी 

नरेश राघानी  
उदयपुर। देश में बढ़ती महंगाई और बेरोजगारी के खिलाफ वामपंथी दलों द्वारा आगामी 31 मई को यहां जिला कलेक्ट्री पर प्रदर्शन कर सभा की जाएगी। माकपा के जिला सचिव राजेश सिंघवी ने बताया कि जिला कलेक्ट्री, उदयपुर पर प्रदर्शन और सभा के पूर्व टाउन हाल से रेली निकलेगी, जो देहली गेट होते हुए कलेक्ट्री पहुंचेगी। उन्होंने बताया कि बढ़ती महंगाई से लोगों पर अभूतपूर्व बोझ पड़ा है। 
उन्होंने बताया कि पिछले वर्ष के दौरान पेट्रोलियम उत्पादों की कीमतों में 70 प्रतिशत सब्जियों में 20 प्रतिशत खाना पकाने के तेल में 23 प्रतिशत और अनाज की कीमतों में आठ प्रतिशत से अधिक की बढ़ोतरी हुई है।

'मन की बात' कार्यक्रम के चलते, देश को संबोधित किया

'मन की बात' कार्यक्रम के चलते, देश को संबोधित किया

अकांशु उपाध्याय
नई दिल्ली। देश के प्रधानमंत्री मोदी ने 'मन की बात' कार्यक्रम के चलते देश को संबोधित किया। जिसमें उन्होंने कहा कि, हाल ही में देश ने एक ऐसी उपलब्धि हासिल की है। जो हम सभी को प्रेरित करती है। आप लोग क्रिकेट के मैदान पर किसी बैट्समैन की सेंचुरी सुनकर खुश होते होंगे, लेकिन भारत ने एक और मैदान में सेंचुरी लगाई है। इस महीने 5 तारीख को देश में यूनिकॉर्न की संख्या 100 के आंकड़े तक पहुंच चुकी है।
एक यूनिकॉर्न यानी कम से कम साढ़े 7 हजार करोड़ का स्टार्टअप होता है। इन यूनिकॉर्न्स का कुल वैल्युएशन 25 लाख करोड़ रुपये से भी ज्यादा है। ये बात हर भारतीय के लिए गर्व करने की बात है।
पीएम मोदी ने कहा कि, इंडियन यूनिकॉर्न्स का एनुअल ग्रोथ रेट यूएसए, यूके और अन्य कई देशों से भी ज्यादा है। जानकारों का ये भी कहना है कि आने वाले समय में इसमें तेज उछाल देखने को मिलेगी। हमारे यूनिकॉर्न्स अलग-अलग क्षेत्रों के हैं। स्टार्टअप की दुनिया न्यू इंडिया की स्प्रिट को बढ़ा रही है। देश में लगातार स्टार्टअप्स की संख्या बढ़ रही है।

नई गाइडलाइन में सिर्फ मास्क्ड आधार ही शेयर करें

नई गाइडलाइन में सिर्फ मास्क्ड आधार ही शेयर करें 

अकांशु उपाध्याय  
नई दिल्ली। केंद्र ने देश की जनता को अलर्ट किया। अगर आप भी अपने आधार कार्ड को कहीं देने में लापरवाही बरतते हैं, या बेफिक्र तरीके से इसकी कॉपी शेयर करते हैं, तो आपको सरकार की इस चेतावनी पर गौर करना चाहिए। सरकार ने अपनी नई गाइडलाइन में लोगों से सिर्फ मास्क्ड आधार ही शेयर करने के लिए कहा है।
हो सकता है आधार का गलत इस्तेमाल...
सरकार का कहना है कि लोगों को किसी संस्थान को आधार कार्ड की फोटोकॉपी नहीं देना चाहिए, क्योंकि इसका गलत इस्तेमाल हो सकता है। इसकी जगह आप मास्क्ड आधार का उपयोग कर सकते हैं।
जानें क्या होता है मास्क्ड आधार...
मास्क्ड आधार में आपकी 12 डिजिट की पूरी आधार संख्या नहीं दिखाई देती है। बल्कि इसमें आधार संख्या के सिर्फ आखिरी चार अंक ही दिखाई देते हैं। इसे आप ऑनलाइन भी प्राप्त कर सकते हैं।
गैर-लाइसेंसी नहीं रख सकते आपका आधार
इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने अपने नोटिस में ये भी साफ किया है कि गैर-लाइसेंसी प्राइवेट इकाइयां आपका आधार कलेक्ट नहीं कर सकती हैं, ना ही उसे अपने पास रख सकती हैं। इसमें बिना लाइसेंस वाले होटल और सिनेमा हॉल शामिल हैं ।केवल ऐसे प्राइवेट संस्थान ही आपके आधार कार्ड की कॉपी कलेक्ट कर सकते हैं।
जिन्होंने भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (UIDAI) से आधार के लिए यूजर लाइसेंस वाले होटल और सिनेमा हॉल शामिल हैं। केवल ऐसे प्राइवेट संस्थान ही आपके आधार कार्ड की कॉपी कलेक्ट कर सकते हैं जिन्होंने भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (UIDAI) से आधार के लिए यूजर लाइसेंस हासिल किया है।
साइबर कैफे से नहीं करें डाउनलोड
सरकार ने लोगों को चेतावनी दी है कि वे अपने आधार की कॉपी को पब्लिक कंप्यूटर या साइबर कैफे से डाउनलोड नहीं करें। अगर वो ऐसा करते हैं तो ये सुनिश्चित करें कि आधार की डाउनलोड की कई सभी कॉपी को परमानेंट डिलीट कर दिया है।
आधार कार्ड को भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण जारी करता है।
ये एक 12 डिजिट का एक न्यूमेरिक कोड होता है, जिसे आधार संख्या कहा जाता है। ये मूलत आपकी बायोमीट्रिक पहचान सुनिश्चित करने के लिए उपयोग किया जाता है। भारत सरकार की कई कल्याणकारी योजनाओं का लाभ उठाने के लिए आधार संख्या अनिवार्य है। वहीं इसके माध्यम से डिजिटल पेमेंट आधार पे भी हो सकता है।

भड़काऊ नारेबाजी, नेता को गिरफ्तार किया

भड़काऊ नारेबाजी, नेता को गिरफ्तार किया  

इकबाल अंसारी  
तिरुवनंतपुरम। केरल के अलप्पुझा जिले में हाल में आयोजित एक मार्च के दौरान एक नाबालिग लड़के के द्वारा कथित रूप से भड़काऊ नारेबाजी किये जाने के संबंध में रविवार सुबह पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (पीएफआई) के एक नेता को गिरफ्तार कर लिया गया। पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने मामले में याहया थांगल की गिरफ्तारी की पुष्टि की। थांगल को इसलिये गिरफ्तार किया गया क्योंकि वह उस कार्यक्रम के आयोजकों में शामिल था, जिसमें कथित रूप से नारेबाजी की गई।
थांगल ने शनिवार को केरल उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों के खिलाफ भी आपत्तिजनक टिप्पणियां की थीं। अधिकारी ने कहा कि पुलिस ने इस मामले में अभी कोई कार्रवाई नहीं की है क्योंकि इस पर उच्च न्यायालय को संज्ञान लेना है। उन्होंने कहा कि पुलिस अपनी तरफ से मामले में कार्रवाई शुरू नहीं कर सकती। पुलिस शनिवार को नाबालिग लड़के के पिता को गिरफ्तार कर चुकी है। गौरतलब है कि 21 मई को पीएफआई ने ‘गणतंत्र बचाओ’ रैली निकाली थी, जिसके एक वीडियो में एक व्यक्ति के कंधे पर बैठे नाबालिग लड़के को कथित रूप से आपत्तिजनक नारे लगाते हुए देखा जा सकता है। इस वीडियो के सामने आने के बाद पुलिस ने मामला दर्ज किया था।

धर्मांतरण के लिए मजबूर करना, कतई बर्दाश्त नहीं

धर्मांतरण के लिए मजबूर करना, कतई बर्दाश्त नहीं  

इकबाल अंसारी  
पणजी। गोवा के मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत ने कहा कि राज्य में लोगों को ईसाई धर्म अपनाने का लालच देने के आरोप में हाल ही में गिरफ्तार किए गए पादरी के खिलाफ पहले से कई मामले दर्ज हैं, जिनमें एक व्यक्ति की मौत से संबंधित मामला भी शामिल है। सावंत ने शनिवार को संवाददाताओं से बातचीत में कहा कि राज्य सरकार संविधान में निहित धार्मिक स्वतंत्रता के अधिकार का पूरा सम्मान करती है, लेकिन लोगों को धन या दूसरी चीजों का लालच देकर धर्मांतरण के लिए मजबूर किए जाने को कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
पुलिस के एक अधिकारी ने बताया था कि राजधानी पणजी से लगभग 20 किलोमीटर दूर उत्तरी गोवा के सालिगांव में सक्रिय पादरी डॉमिनिक डिसूजा और उनकी पत्नी जोआन को दो लोगों द्वारा अलग-अलग शिकायतें दर्ज कराए जाने के बाद बृहस्पतिवार को गिरफ्तार कर लिया गया था। 
इन शिकायतों में आरोप लगाया गया था कि दोनों धर्मांतरण में शामिल रहे हैं। अधिकारी ने कहा था कि पादरी और उनकी पत्नी कथित रूप से धन की पेशकश करके या बीमारी का इलाज कराने का लालच देकर लोगों को ईसाई धर्म अपनाने के लिए प्रेरित करते थे।
सावंत ने कहा कि पहले भी डिसूजा द्वारा कथित रूप से जबरन धर्मांतरण कराए जाने के मामले पुलिस की नजर में आए थे। उन्होंने कहा कि पादरी के खिलाफ एक व्यक्ति की मौत के सिलसिले में भी मामला दर्ज किया गया था, जिसे उन्होंने कथित ‘चमत्कारी तेल’ लगाया था। सावंत ने कहा कि पादरी के खिलाफ कानून के तहत कार्रवाई की गई है और मामले की जांच जारी रहेगी।
पुलिस ने पादरी और उनकी पत्नी के खिलाफ धर्म के आधार पर विभिन्न समूहों के बीच दुश्मनी को बढ़ावा देने तथा धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने के इरादे से जानबूझकर एवं दुर्भावनापूर्ण कृत्यों में लिप्त होने संबंधी भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धाराओं के अलावा औषधि एवं चमत्कारिक उपचार (आक्षेपणीय विज्ञापन) अधिनियम के प्रावधानों के तहत मामला दर्ज किया है।

आयुर्वेद की प्रभावशीलता, लोकप्रियता बढ़ाने का आह्वान

आयुर्वेद की प्रभावशीलता, लोकप्रियता बढ़ाने का आह्वान 

मनोज सिंह ठाकुर
उज्जैन। राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने रविवार को आयुर्वेद विशेषज्ञों से रोगों के उपचार एवं महामारी विज्ञान के नए-नए क्षेत्रों में आयुर्वेद की प्रभावशीलता एवं लोकप्रियता को बढ़ाने का आह्वान करते हुए कहा कि भारत के गांवों में आज भी पारंपरिक आयुर्वेद चिकित्सा पद्धतियां प्रचलित हैं और अभी भी किसी अन्य चिकित्सा पद्धति ने इसका स्थान नहीं लिया है।
उज्जैन में अखिल भारतीय आयुर्वेद महासम्मेलन के 59वें महाधिवेशन का उद्घाटन करने के बाद कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कोविंद ने कहा, सचमुच में भारत गांवों का देश है और गांवों में जो पारंपरिक चिकित्सा की व्यवस्था है, वह आज भी आयुर्वेदिक ही है। इसका विकल्प अभी भी किसी भी अन्य चिकित्सा पद्धति में नहीं है। किसी भी चिकित्सा पद्धति ने इसका स्थान अ​भी तक नहीं लिया है।उन्होंने कहा, अनुसंधान से जुड़े हुए लोगों से अपेक्षा है कि रोगों के उपचार एवं महामारी विज्ञान के नए-नए क्षेत्रों में आयुर्वेद की प्रभावशीलता और लोकप्रियता को बढ़ाया जाए। कोविंद ने कहा, विश्व भर में अनेक चिकित्सा पद्धतियां प्रचलित हैं। परंतु आयुर्वेद इनमें सबसे अलग है। आयुर्वेद का अर्थ है ‘साइंस ऑफ लाइफ’ अर्थात आयु का विज्ञान।
उन्होंने कहा, विश्व में प्रचलित अनेक चिकित्सा पद्धतियों के साथ पैथी शब्द जुड़ा होता है। पैथी अर्थात रोग हो जाने पर उसका उपचार करने की पद्धति।
लेकिन आयुर्वेद में स्वास्थ्य रक्षा अर्थात रोग के उपचार के साथ-साथ रोग निवारण पर भी बल दिया जाता है। रोग का मूल कारण ढूंढ़ करके उसे दूर करने का प्रयास किया जाता है। ऐसे सर्वहितकारी आयुर्वेद का परंपरागत ज्ञान हमारे पास है। यह हम सबका सौभाग्य है।कोविंद ने आगे कहा, लेकिन आज का समय शोध और अनुसंधान का, प्रमाणन का और गुणवत्ता का समय है। यह समय आयुर्वेद के लिए ज्ञान को अधिक गहराई से समझने, वैज्ञानिक कसौटी पर कसकर खरा उतरने का तथा वर्तमान समय की आवश्यकताओं के अनुसार तकनीकी विश्व को देने का है। ये हम सबके लिए एक बहुत बड़ी चुनौती है और मुझे विश्वास है कि आप सब लोग मिलकर इस चुनौती को स्वीकारेंगे और इसमें प्रगति करेंगे।
उन्होंने कहा कि ये जानकर गौरव होता है कि मॉरिशस सहित विश्व के लगभग 20 देशों में आयुर्वेद में अनुसंधान किया जा रहा है। कोविंद ने कहा कि भारत सरकार द्वारा समय-समय पर भारतीय चिकित्सा पद्धतियों के संरक्षण और संवर्धन के लिए अनेक उपाय किए गए हैं, लेकिन वर्ष 2014 में पृथक आयुष मंत्रालय की स्थापना के बाद इस कार्य में और तेजी आई है। उन्होंने आशा जताई कि मध्य प्रदेश के राज्यपाल मंगूभाई पटेल के मार्गदर्शन और मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के नेतृत्व में चिकित्सा सुविधाओं को प्रदेश में लगातार संबल मिलता रहेगा और यह प्रदेश आयुर्वेद चिकित्सा का गंतव्य बनेगा।

भारतीय सीमा में घुसा पाकिस्तानी ड्रोन, मार गिराया

भारतीय सीमा में घुसा पाकिस्तानी ड्रोन, मार गिराया

इकबाल अंसारी/सुनील श्रीवास्तव  
श्रीनगर/इस्लामाबाद। जम्मू कश्मीर के कठुआ जिले में रविवार को अंतरराष्ट्रीय सीमा पार कर भारतीय सीमा में घुसने के कुछ ही देर बाद एक पाकिस्तानी ड्रोन को मार गिराया गया‌। जिस पर सात मैग्नेटिक बम एवं इतने ही यूबीजीएल ग्रेनेड थे। एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने यह जानकारी दी। यह घटना दक्षिण कश्मीर हिमालय में पवित्र अमरनाथ गुफा के लिए वार्षिक तीर्थयात्रा शुरू होने से पहले हुई है। इस यात्रा से पहले सुरक्षा कड़ी कर दी गयी है।
अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (जम्मू), मुकेश सिंह ने बताया कि पुलिस तलाशी दल ने सुबह राजबाग थाना क्षेत्र के तल्ली हरिया चक इलाके में सीमा पर एक ड्रोन की गतिविधि देखी और उस पर गोलियां चलायी, तब वह नीचे गिर गया। सिंह ने बताया कि इस ड्रोन पर लादे गये सामानों की जांच के लिए बुलाये गये बम निरोधक दस्ते को सात मैग्नेटिक बम और सात ‘अंडर बैरल ग्रेनेडल लांचर’ (यूबीजीएल) मिले।
पुलिस अधिकारी ने कहा कि दरअसल सीमापार से बार-बार ड्रोन की गतिविधियां होने के चलते पुलिस तलाशी दल नियमित रूप से उस क्षेत्र में भेजे जा रहे हैं। इस संघशासित प्रदेश में 30 जून से 43 दिवसीय अमरनाथ यात्रा दो मार्गों से शुरू होने वाली है।

'नीट एमडीएस 2022' का परिणाम जारी किया

'नीट एमडीएस 2022' का परिणाम जारी किया 

अकांशु उपाध्याय  
नई दिल्ली। जिन छात्रों ने नीट एमडीएस 2022 की परीक्षा दी थी, उनका इंतजार अब खत्म हो गया है। दरअसल नेशनल बोर्ड एग्जामिनेशन इन मेडिकल साइंसेज ने नीट एमडीएस 2022 का परिणाम जारी कर दिया है। अभ्यर्थी अपने नतीजे ऑफिशियल साइट और nbe.edu.in पर जाकर चेक कर सकते हैं। उम्मीदवार अपने स्कोर कार्ड ऑफिशियल साइट पर जारी हो जाने के बाद डाउनलोड कर सकेंगे। बता दें इस परीक्षा का आयोजन 2 मई 2022 को किया गया था। परीक्षा का आयोजन एक शिफ्ट में हुआ था, ये परीक्षा सुबह 09 बजे शुरू हुई थी जो कि 12 बजे तक चली थी।
नीट एमडीएस 2022 के परिणाम के आधार पर शॉर्टलिस्ट किए गए उम्मीदवारों को अब 50% अखिल भारतीय कोटा सीटों, 50% राज्य कोटा सीटों, डीम्ड/केंद्रीय विश्वविद्यालयों, ईएसआईसी और निजी विश्वविद्यालयों को दी जाने वाली 6,501 एमडीएस सीटों पर प्रवेश प्रदान किया जाएगा। प्रत्येक वर्ग के लिए नीट एमडीएस 2022 पर्सेंटाइल स्कोर का कटऑफ रिजल्ट के साथ ही जारी होगा। अभ्यर्थी किसी भी प्रकार की अधिक जानकारी के लिए ऑफिशियल साइट की मदद ले सकते हैं।
 ऑफिशियल वेबसाइट natboard.edu.in पर जाएं। इसके बाद उम्मीदवार होमपेज पर “एनईईटी-एमडीएस 2022 का परिणाम” के लिंक पर क्लिक करें। अब आपकी स्क्रीन पर एक अधिसूचना प्रदर्शित होगी। इस अधिसूचना में दिए गए लिंक पर क्लिक करें। अब उम्मीदवार भविष्य के लिए उसी की हार्ड कॉपी अपने पास रख लें।

बनर्जी को अब न्याय पालिका पर भी भरोसा नहीं

बनर्जी को अब न्याय पालिका पर भी भरोसा नहीं  

मिनाक्षी लोढी   
कोलकाता। कोयला घोटाला मामलें में सीबीआई जांच दायरे में आए सीबीआई जांच से पेरशान तृणमूल कांग्रेस के महासचिव और ममता बनर्जी के भतीजे अभिषेक बनर्जी को अब न्याय पालिका पर भी भरोसा नहीं रहा। उन्होंने न्याय पालिका पर गंभीर आरोप लगाए हैं। अभिषेक बनर्जी द्वारा न्याय पालिका पर गंभीर आरोप लगाए जाने पर प्रमुख विपक्षी दल भाजपा ने उन्हें जमकर लताड़ा।
दरअसल अभिषेक बनर्जी ने पूर्वी मिदनापुर जिला में पार्टी कार्यकर्ताओं की एक बैठक में कहा कि न्यायपालिका का एक छोटा सा हिस्सा गुलाम बन गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि हर मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो की जांच का आदेश दे रहा है। बनर्जी ने हल्दिया के बंदरगाह शहर में कहा कि मुझे यह कहते हुए शर्म आती है कि न्यायपालिका का एक बहुत छोटा हिस्सा मिनियन बन गया है। एक या दो व्यक्ति समझ के साथ काम कर रहे हैं। सभी नहीं, केवल एक प्रतिशत। वे हर मामले में सीबीआई जांच के आदेश दे रहे हैं। वे हत्या की चल रही जांच पर भी रोक लगाने का आदेश दे रहे हैं। क्या आपने कभी इस बारे में सुना है। आप हत्या की जांच पर रोक लगाने का आदेश नहीं दे सकते। उनके इस बयान पर विपक्षी दलों ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है।
अभिषेक बनर्जी ने यह स्पष्ट नहीं किया कि उन्होंने यह आरोप क्यों लगाया कि न्यायपालिका का एक हिस्सा निर्देशों के तहत काम कर रहा था, लेकिन यह स्पष्ट था कि वह परोक्ष रूप से इस तथ्य की ओर इशारा कर रहे थे कि कलकत्ता उच्च न्यायालय के आदेशों के तहत सीबीआई द्वारा 272 मामलों की जांच की जा रही है। इनमें से अधिकांश मामलों में राजनीतिक हिंसा शामिल है जो टीएमसी के 2021 के विधानसभा चुनाव जीतने के बाद हुई थी।
उन्होंने कोयला तस्करी मामले का उल्लेख किए बिना प्रवर्तन निदेशालय द्वारा उन्हें भेजे गए समन  का भी उल्लेख किया, जिसमें वह और उनकी पत्नी रुजीरा संदिग्ध हैं। सीबीआई ने उनसे पिछले साल पूछताछ की थी। अभिषेक बनर्जी ने कहा कि सीबीआई और ईडी लगातार मुझे निशाना बना रहे हैं लेकिन मैंने उनके सामने अपना सिर नहीं झुकाया है। मैं किसी एजेंसी या जांच से नहीं डरता। ईडी ने मुझे दो बार दिल्ली बुलाकर परेशान करने की कोशिश की। मैं कभी किसी एजेंसी से नहीं भागा। मैंने उनसे कहा कि अगर वे मुझसे पूछताछ करना चाहते हैं, तो उन्हें बंगाल आना चाहिए। मैं इस मिट्टी का पुत्र हूं। मैं सभी सवालों के जवाब देने के लिए तैयार हूं। सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में टीएमसी नेता और उनकी पत्नी को दिल्ली में ईडी के सामने पेश होने से राहत दी और एजेंसी को कोलकाता में दंपति से पूछताछ करने का आदेश दिया।
बंगाल बीजेपी के मुख्य प्रवक्ता समिक भट्टाचार्य ने कहा टीएमसी ने न्यायपालिका को उसी तरह निशाना बनाया है जिस तरह से उसने सभी संस्थानों और हमारे लोकतांत्रिक ढांचे को निशाना बनाया है। उन्होंने कहा,  “यह कहना कि वह न्यायपालिका के एक प्रतिशत या एक या दो न्यायाधीशों की बात कर रहे थे, कोई फर्क नहीं पड़ता। यह कलकत्ता उच्च न्यायालय की पांच-न्यायाधीशों की पीठ थी जिसने अपने आदेश (चुनाव के बाद की हिंसा के मामले में) में कहा था कि बंगाल अपने स्वयं के कानून द्वारा चलाया जा रहा है।
 प्रख्यात वकील और माकपा के राज्यसभा सदस्य विकास रंजन भट्टाचार्य ने कहा कि बनर्जी का बयान अदालत की अवमानना के समान है। उन्होंने कहा कि यह स्पष्ट रूप से अदालत की अवमानना है। न्यायपालिका के प्रति अनादर दिखाया गया है। केवल टीएमसी नेता ही ऐसी चीजों के लिए सक्षम हैं। बंगाल कांग्रेस अध्यक्ष अधीर रंजन चौधरी ने कहा कि ममता बनर्जी अपनी पार्टी के नेताओं को न्यायपालिका को निशाना बना रही हैं क्योंकि वह ऐसा नहीं कर सकतीं। उन्होंने कहा कि टीएमसी नेता पार्टी के खिलाफ जाने वाले फैसलों को स्वीकार नहीं कर सकते। अभिषेक बच्चा है। ममता बनर्जी ये बयान क्यों नहीं दे रही हैं। हल्दिया की बैठक में अभिषेक बनर्जी ने भाजपा नेता सुवेंदु अधिकारी पर भी निशाना साधा। उन्होंने खुद को सीबीआई जांच से बचाने के लिए कैंप बदलने का आरोप लगाया।

प्राधिकृत प्रकाशन विवरण

प्राधिकृत प्रकाशन विवरण  

1. अंक-233, (वर्ष-05)
2. सोमवार, मई 30, 2022
3. शक-1944, ज्येष्ठ, कृष्ण-पक्ष, तिथि-अमावस्या, विक्रमी सवंत-2079।
4. सूर्योदय प्रातः 05:33, सूर्यास्त: 07:01।
5. न्‍यूनतम तापमान- 29 डी.सै., अधिकतम-40+ डी.सै.। उत्तर भारत में बरसात की संभावना।
6. समाचार-पत्र में प्रकाशित समाचारों से संपादक का सहमत होना आवश्यक नहीं है। सभी विवादों का न्‍याय क्षेत्र, गाजियाबाद न्यायालय होगा। सभी पद अवैतनिक है।
7.स्वामी, मुद्रक, प्रकाशक, संपादक राधेश्याम व शिवांशु, (विशेष संपादक) श्रीराम व सरस्वती (सहायक संपादक) के द्वारा (डिजीटल सस्‍ंकरण) प्रकाशित। प्रकाशित समाचार, विज्ञापन एवं लेखोंं से संपादक का सहमत होना आवश्यक नहीं हैं। पीआरबी एक्ट के अंतर्गत उत्तरदायी।
8. संपर्क व व्यवसायिक कार्यालय- चैंबर नं. 27, प्रथम तल, रामेश्वर पार्क, लोनी, गाजियाबाद उ.प्र.-201102।
9. पंजीकृत कार्यालयः 263, सरस्वती विहार लोनी, गाजियाबाद उ.प्र.-201102
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नगर निगम चुनाव में हर तरह के हथकंडे अपनाए

नगर निगम चुनाव में हर तरह के हथकंडे अपनाए अकांशु उपाध्याय  नई दिल्ली। नगर निगम चुनाव की मतगणना के नतीजों पर अपनी खुशी जताते हुए...