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सोमवार, 4 जुलाई 2022

स्वास्थ्य: स्ट्रॉबेरी का सेवन करना, फायदेमंद

स्वास्थ्य: स्ट्रॉबेरी का सेवन करना, फायदेमंद 

सरस्वती उपाध्याय         
स्ट्रॉबेरी भी अन्य बेरीज के जैसे विटामिन, मिनरल्स, फाइबर और एंटी-ऑक्सीडेंट, एंटी इन्फ्लेमेटरी गुणों से भरपूर होती है। ये पौष्टिक तत्वों से भरपूर होने के कारण बहुत से स्वास्थ्य लाभ दे सकती है। अगर इसमें पाए जाने वाले पौष्टिक तत्वों की बात करें, तो एक कप स्ट्रॉबेरी में लगभग 53 कैलोरीज, 1 ग्राम प्रोटीन, 12 ग्राम कार्बोहाइड्रेट, 3 ग्राम डाइटरी फाइबर, 27 मिलीग्राम कैल्शियम और 1 ग्राम से कुछ कम आयरन, साथ ही मैग्नीशियम, फॉस्फोरस, पोटैशियम, विटामिन-सी और विटामिन-ई जैसे तत्व पाए जाते हैं। यही नहीं, स्ट्रॉबेरी में नाइट्रेट नामक तत्व होता है, जो हार्ट की सेहत को दुरुस्त रख सकता है। अगर दिल की बीमारियों से जूझ रहे हैं, तो एक हफ्ते में स्ट्रॉबेरी खाने से ही काफी अच्छे नतीजे देखने को मिल सकते हैं।

दिल की सेहत के लिए फायदेमंद...
स्ट्रॉबेरी में दिल को लाभ देने वाले काफी सारे पौष्टिक तत्व होते हैं। इसमें मौजूद एंटीऑक्सीडेंट्स केवल दिल के लिए ही नहीं, बल्कि पूरे शरीर के लिए ही फायदेमंद होते हैं।
 मेडिकल न्यूज़ टुडे के मुताबिक, स्ट्रॉबेरी में मौजूद एंथोसाइनीन और क्वेरकेटीन  कंटेंट के कारण यह दिल की बीमारियों से बचाने में काफी लाभदायक है। इनका सेवन करने से हार्ट अटैक का खतरा भी बहुत कम हो सकता है।
इसमें डाइट्री फ्लेवेनॉइड मौजूद होता है, जिसके कारण स्ट्रोक आने से बचा जा सकता है।
स्ट्रॉबेरी में एंटी कैंसर गुण होते हैं और बहुत सारे एंटीऑक्सीडेंट्स भी होते हैं, जो शरीर में फ्री रेडिकल्स के कारण होने वाले सेल डेमेज से सुरक्षा प्रदान करवाते हैं और इस कारण यह कैंसर से बचाने में हमें मदद करती है।
इसका सेवन करने से हाई ब्लड प्रेशर के मरीजों को भी लाभ मिल सकता है।
स्ट्रॉबेरी के कारण शरीर में सोडियम के नेगेटिव प्रभावों को कम किया जा सकता है।
कब्ज जैसी समस्याओं से भी निजात पाई जा सकती है, क्योंकि स्ट्रॉबेरी में डाइटरी फाइबर पाया जाता है और यह स्टूल को सॉफ्ट करने में मदद करता है, जिससे कब्ज में लाभ मिल सकता है।

रविवार, 3 जुलाई 2022

सब्जियों को आहार का हिस्सा बनाना चाहिए

सब्जियों को आहार का हिस्सा बनाना चाहिए

सरस्वती उपाध्याय
आहार विशेषज्ञ, सब्जियों और फलों के नियमित सेवन को काफी स्वास्थ्यवर्धक बताते हैं। विशेषकर यदि आप नियमित रूप से सब्जियों के जूस के सेवन की आदत बनाते हैं, तो यह काफी फायदेमंद हो सकता है। सब्जियों के जूस आपके सिस्टम को पोषक तत्वों और एंटीऑक्सिडेंट्स की आवश्यक मात्रा प्रदान करते हैं। यह न केवल स्वाद में आपके लिए काफी अच्छे माने जाते हैं। साथ ही सब्जियों की पोषकता आपको कई प्रकार की बीमारियों से सुरक्षित रखने में भी सहायक है। वेजिटेबल जूस के लिए आप कई प्रकार की मौसमी सब्जियों और साग को शामिल करके स्वास्थ्य लाभ प्राप्त कर सकते हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, कच्ची-ताजी सब्जियों को सभी लोगों को अपने दैनिक आहार का हिस्सा जरूर बनाना चाहिए।
जूस के रूप में इसका सेवन करना आपके लिए काफी बेहतर विकल्प हो सकता है। हालांकि इस बात का हमेशा ध्यान रहे कि ताजी सब्जियों के जूस के ही लाभ हैं, फ्रोजन या डिब्बाबंद जूस को ज्यादा फायदेमंद नहीं माना जाता है। इसलिए रोजाना हरी-ताजी सब्जियों के जूस के सेवन की आदत बनाएं। आइए जानते हैं कि आहार में किन सब्जियों के मिक्स जूस के शामिल करके बेहतर लाभ प्राप्त किया जा सकता है। गाजर के जूस को सेहत के लिए कई प्रकार से लाभकारी माना जाता है। गाजर अपने थोड़े मीठे स्वाद और प्रभावशाली पोषक तत्व के कारण हमेशा से पसंद किया जाता रहा है। इसमें कैलोरी कम होने के साथ विटामिन ए, बायोटिन और पोटेशियम की अधिकता होती है जो शरीर को स्वस्थ और फिट बनाए रखने के लिए अति आवश्यक है।
गाजर आंखों और हृदय की सेहत के लिए काफी फायदेमंद माने जाते रहे हैं। शरीर की शक्ति को बढ़ावा देने के लिए चुकंदर के जूस को हमेशा से सर्वोत्तम विकल्प के रूप में जाना जाता है। पोषण के मामले में, चुकंदर मैंगनीज, पोटेशियम और फोलेट से भरपूर होते हैं। इसके अलावा इनमें नाइट्रेट्स की भी उच्च मात्रा पाई जाती है।अध्ययनों से पता चलता है कि नाइट्रेट से भरपूर चुकंदर का रस रक्तचाप को कंट्रोल रखने के साथ शरीर में खून की कमी को दूर करने और एथलेटिक तथा मानसिक प्रदर्शन में सुधार करने में सहायक होता है। ब्रोकोली को सेहत के लिए सबसे फायदेमंद सब्जियों में से एक माना जाता रहा है। इसमें पोटेशियम और विटामिन ए, बी 6, तथा सी जैसे प्रमुख सूक्ष्म पोषक तत्व पाए जाते हैं, जो शरीर के संपूर्ण कार्यों के लिए अत्यंत आवश्यक हैं। ब्रोकली में केम्पफेरोल भी पाया जाता है जो एक शक्तिशाली यौगिक है और रोग पैदा करने वाले मुक्त कणों को बेअसर करके, सूजन को कम करने में मदद करता है। टेस्ट-ट्यूब अध्ययन में इसे कैंसर कोशिकाओं की वृद्धि को कम करने के लिए भी काफी लाभकारी पाया गया है।
पालक को इसके अद्भुत स्वास्थ्य लाभ के लिए सबसे फायदेमंद साग में से एक माना जाता है। पालक विटामिन-ए और सी से भरपूर होने के साथ क्वेरसेटिन, केम्पफेरोल, और ल्यूटिन जैसे एंटीऑक्सिडेंट्स का स्रोत माना जाता है। पालक भी नाइट्रेट से भरपूर होता है, जो हृदय स्वास्थ्य के लिए बहुत फायदेमंद है। 27 लोगों पर किए गए एक अध्ययन में पाया गया कि 7 दिनों तक पालक का सेवन करने से सिस्टोलिक और डायस्टोलिक रक्तचाप को कंट्रोल करने में काफी मदद मिल सकती है।

शुक्रवार, 1 जुलाई 2022

बहुत ज्यादा खुश होना, हाइपोमेनिया के लक्षण

बहुत ज्यादा खुश होना, हाइपोमेनिया के लक्षण 

सरस्वती उपाध्याय 
अपने मन का दुख या सुख महसूस करना और किसी दूसरे को बताने का सबका अपना तरीका होता है। कई बार कुछ लोग किसी भी सामान्य बात पर बहुत ज्यादा खुश होने लगते हैं, जो देखने वालों को भी कई बार असामान्य लग सकता है। अगर किसी व्यक्ति में ऐसे लक्षण दिखे, तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। क्योंकि ये लक्षण हाइपोमेनिया की तरफ इशारा करते हैं।
किसी साधारण-सी बात पर भी अगर कोई बेतहाशा खुशी जाहिर कर रहा है, तो इस खुशी को नजरअंदाज करना ठीक नहीं है। एक्सपर्ट्स की माने, तो हाइपोमेनिया को डिप्रेशन का भी नेक्स्ट लेवल माना जाता है। सामान्य तौर पर इसके बारे में काफी कम लोगों को जानकारी होती है। आइए जानते हैं, हाइपोमेनिया से जुड़ी ज़रूरी बातें...

वेरीवेलमाइंड के एक आर्टिकल के अनुसार हाइपोमेनिया एक ऐसी मानसिक बीमारी है, जिसमें व्यक्ति बहुत ज्यादा खुश और उत्साह से भरा हुआ दिखता है, जबकि अंदर ही अंदर वह कई मानसिक स्थितियों से लड़ रहा होता है। ऐसे लोग दूसरों से अपने बारे में खूब बढ़ा-चढ़ाकर बातें कहते हुए दिखावा करने की कोशिश करते हैं। ऐसे व्यक्ति अजनबी से भी ऐसे मिलते हैं, जैसे उनको बरसों से जानते हो और उनसे खूब सारी बातें करते हैं। हाइपोमेनिया की हालत कभी-कभी इंसान को बेहद खर्चीला बना देती है, इसमें कई बार व्यक्ति खुद को बहुत बड़ा समझने लगता है और उसका व्यवहार सामान्य व्यक्ति जैसा नहीं रहता।

हाइपोमेनिया के लक्षण...
हर वक्त खाना खाने की इच्छा होना।
हर काम में ज्यादा उत्सुकता दिखाना।
नींद ना आने पर भी थकान या नींद की ज़रूरत महसूस न होना।
हाइपोमेनिया में व्यक्ति अचानक बहुत अलग तरीके के कपड़े पहनने लगते है।
अनजान लोगों से खूब बातें करना।
छोटी-छोटी बातों पर बेतहाशा खुश होना।
मोनिया से ग्रस्त व्यक्ति भ्रम और काल्पनिक बातों को सच मानने लगते हैं।
हाइपोमेनिया से जूझ रहा व्यक्ति कभी भी यह मानने को तैयार नहीं होता कि वह मानसिक रूप से बीमार है। ऐसे में अगर किसी व्यक्ति मेंआपको अचानक ऐसे असामान्य लक्षण बढ़ते दिखने लगे, तो उन्हें डॉक्टर से सलाह अवश्य लेनी चाहिए। अच्छे डॉक्टर से कंसल्टेशन और दवाओं से व्यक्ति पूरी तरह स्वस्थ होकर सामान्य जीवन जी सकता है।

स्वास्थ्य: पौष्टिक गुणों का खजाना है 'ब्लैकबेरी'

स्वास्थ्य: पौष्टिक गुणों का खजाना है 'ब्लैकबेरी' 

सरस्वती उपाध्याय 
ब्लैकबेरी यानी कि जामुन पौष्टिक गुणों का खजाना है। इसे ब्लैक प्लम या जावा के नाम से भी जाना जाता है। जामुन एक मौसमी फल है, इसलिए जून से अगस्त तक के महीने में यह भारत में काफी मात्रा में मिल सकता है। जामुन में बहुत से पौष्टिक तत्व जैसे कि कैल्शियम, आयरन, मैग्नीशियम, फॉस्फोरस, सोडियम, विटामिन सी और सभी तरह के विटामिन-बी -थायमिन, राइबोफ्लेविन, फोलिक एसिड नियासिन और बी 6 मौजूद होते हैं। वैसे तो इस दरमियान बहुत से फल आते हैं, लेकिन अगर सेहत के लिहाज से देखा जाए तो जामुन को सेहत का खजाना भी माना जाता है। इन दिनों में जामुन का सेवन बहुत सी बीमारियों के जोखिम को कम कर सकता है।आइए जानते हैं जामुन से मिलने वाले फायदे...

रिपोर्ट के अनुसार, जामुन का सेवन शरीर में हीमोग्लोबिन लेवल बढ़ाता है। जिससे एनीमिया की समस्या कम हो सकती है।
इसमें मौजूद कैल्शियम, फॉस्फोरस व आयरन बोन्स की हेल्थ ठीक रखते हैं। इन तीनों तत्वों की मौजूदगी से दांत मसूड़े स्वस्थ रहते हैं और ओस्टियोपोरोसिस की रोकथाम भी हो सकती हैं।
एंटीऑक्सीडेंट्स से भरपूर जामुन इम्यूनिटी स्ट्रांग करता है और डाइजेशन व पेट संबंधी परेशानियों को दूर करने में सहायक है।
जामुन फाइबर से भरपूर होने के कारण, इसके सेवन से पेट काफी देर तक भरा रहता है और वजन कम हो सकता है।
जामुन को वायुनाशक, एंटीस्कोरब्यूटिक और मूत्रवर्धक भी माना जाता है।
इसकी एंटी-एजिंग प्रॉपर्टी की वजह से यह क्लियर पिंपल्स को कम करने में भी सहायक है।
हम उनका सेवन डायबिटीज में बेहतरीन औषधि का काम करता है। क्योंकि इसकी हाइपोग्लाइसेमिक प्रॉपर्टीज ब्लड ग्लूकोस लेवल को कम करती हैं।
जामुन के सेवन से हृदय लोगों का रेस्क्यू भी कम हो सकता है। इसकी एंटीकार्सिनोजेनिक प्रॉपर्टीज कार्सिनोजेनेसिस को रोकती हैं।
दिखने में छोटा सा यह फल एक बेहतरीन औषधि है।

सोमवार, 27 जून 2022

इमली के और भी अन्य फायदों के बारे में जानें

इमली के और भी अन्य फायदों के बारे में जानें
सरस्वती उपाध्याय
इमली का इस्तेमाल अब तक आपने खाना बनाने में किया होगा लेकिन क्या कभी इसका इस्तेमाल स्किन पर ग्लो लाने के लिए किया है। नहीं न, तो हम आपको बताएंगे कि कैसे आप इमली का इस्तेमाल स्किन पर अलग अलग प्रकार से कर सकते हैं और इसके क्या क्या फायदे हो सकते हैं।
दरअसल इमली में अल्फा हाइड्राॅक्सी एसिड होता है जो अपने एक्सफोलिएटिंग गुणों के लिए जाना जाता है। इसी गुण के कारण यह आपके स्किन पर एंटी एंजिग इफेक्ट डालने में मदद करता है। इमली के और भी अन्य फायदों के बारे में जानते हैं।
इसे बनाने के लिए एक बर्तन में इमली का पल्प, दही और गुलाब जल को मिक्स कर लें। अब इसे अपने चेहरे पर 20 मिनट तक के लिए लगा कर रखें और फिर इसे धोलें इससे आपकी स्किन हाइड्रेट रहेगी और चेहरा भी साफ रहेगा।
इसे बनाने के लिए एक बर्तन में इमली का पल्प, ब्राउन शुगर, नींबू का रस और बेकिंग सोडा को मिक्स कर लें। अब इसे अपने गर्दन और चेहरे पर लगाएं और कुछ देर बाद चेहरे को रगड़ कर अच्छे से पानी से धोलें। आप इसका इस्तेमाल पूरे बाॅडी पर भी कर सकते हैं।
टोनर बनाने के लिए एक कप इमली को पानी में उबाल लें और उसका पानी छान कर निकाल लें। फिर अलग से चास की पत्ती को उबाल लें और उसका पानी भी निकाल लें। अब दोनों ही पानी को मिक्स कर के एक स्प्रे वाले बोटल में भर लें। और जब भी आपका मन करें इसका इस्तेमाल करें।
इसे बनाने के लिए इमली के पल्प को कच्चे चावल के साथ ब्राउन होने तक भून लें। अब इसे मिक्सर में डाल कर पीस लें। अब इस पेस्ट में जैतून का तेल डालें और अच्छे से मिलाएं। अब इसे अपने चेहरे पर 20 मिनट के लिए लगाएं और फिर चेहरे को गुनगुने पानी से धोले।

शनिवार, 25 जून 2022

शरीफा पोषक तत्वों से भरपूर, सेवन के फायदे

शरीफा पोषक तत्वों से भरपूर, सेवन के फायदे

सरस्वती उपाध्याय 
शरीफा पोषक तत्वों से भरपूर होता है, जो हमारी सेहत के लिए बहुत फायदेमंद होते हैं। इस फल में पोटैशियम, मैग्नीशियम और फाइबर की उच्च मात्रा मौजूद होती है। शरीफा के सेवन से कई तरह के रोगों में लाभ होता है। आज के इस लेख में हम आपको शरीफा खाने के फायदे बताने जा रहे हैं। पाचन तंत्र को मजबूत बनाता है‌। शरीफा में पर्याप्त मात्रा में कॉपर और डाइट्री फाइबर मौजूद होते हैं, जो पाचन तंत्र को मजबूत बनातें है। शरीफा भोजन को जल्दी पचाने में मदद करता है। इसके साथ ही, शरीफा में मौजूद मैग्नीशियम अपच और कब्ज जैसी पेट संबंधी समस्या को दूर करने में मदद करता है। आँखों की रोशनी के लिए शरीफा बहुत फायदेमंद होता है। शरीफा में विटामिन-सी और विटामिन-ए जैसे आवश्यक विटामिन मौजूद होते हैं। जो आँखों की रोशनी बढ़ाने में मदद करते हैं। 
इसके साथ ही शरीफे में राइबोफ्लेविन और विटामिन बी 12 होता है जो फ्री रेडिकल्स से होने वाले नुकसान से लड़ता है और आंखों को तमाम समस्याओं से बचाता है। दिल की सेहत के लिए शरीफा बहुत फायदेमंद माना जाता है। शरीफा में मैग्नीशियम और पोटेशियम की अधिक मात्रा होती है जो दिल को स्वस्थ बनाए रखने में मदद करते हैं। हृदय संबंधी बीमारियों से बचाव के लिए मैग्नीशियम और पोटेशियम बहुत फायदेमंद है। यह मांसपेशियों को रिलैक्स करने और ब्लड प्रेशर को नियंत्रित करने में मदद करते है। शरीफा में नियासिन और फाइबर मौजूद होते हैं जो कोलेस्ट्रॉल के स्तर को कम करने में मदद करते हैं। इसके अलावा, इसमें मौजूद विटामिन बी 6, हृदय रोग के जोखिम को कम करता है। शरीफा में विटामिन ए की पर्याप्त मात्रा मौजूद होती है जो घाव को जल्दी भरने में मदद करता है। शरीफे का गूदा अल्सर और फोड़े के इलाज के लिए फायदेमंद माना जाता है। यह न केवल घाव को जल्दी भरता है, बल्कि सूजन को कम करने में मदद करता है। इसके साथ शरीफा का छिलका मसूड़ों के दर्द और दांतों की सड़न को रोकने में कारगर है। शरीफा एक नेचुरल एनर्जी बूस्टर की तरह काम करता है। यह थकावट और कमजोरी को कम करने के साथ-साथ दिनभर के कामों के लिए ऊर्जा प्रदान करता है। शरीफे में मौजूद पोटेशियम मांसपेशियों की कमजोरी को दूर करने में मदद करता है और रक्त की आपूर्ति में सुधार करके थकान को खत्म करता है। शरीफे में मैग्नीशियम भरपूर मात्रा में होता है जो शरीर में इलेक्ट्रोलाइट संतुलन बनाए रखने में मदद करता है। इसमें एंटीइंफ्लेमेटरी गुण पाए जाते हैं जो जोड़ों की सूजन कम करने में मदद करता है। गठिया के मरीजों के लिए शरीफा बहुत फायदेमंद होता है।

एंटीऑक्सीडेंट, एंटी-वायरल व एनाल्जेसिक गुण

एंटीऑक्सीडेंट, एंटी-वायरल व एनाल्जेसिक गुण
सरस्वती उपाध्याय 
लौंग का इस्‍तेमाल भारतीय आयुर्वेद में सदियों से किया जा रहा है। बदलते मौसम के दौरान होने वाली खांसी, सर्दी, पेट की समस्‍या या किसी तरह के संक्रमण को दूर करने के लिए लौंग काफी फायदेमंद होता है। खबर के मुताबिक, लौंग में एंटीइंफ्लेमेटरी, एंटी माइक्रोबियल और एंटीसेप्टिक गुण होते हैं, जो गले में खराश को कम करने में असरदार होते हैं। इसके अलावा, लिवर हेल्‍थ को इंप्रूव करने, ब्‍लड शुगर लेवल को कंट्रोल करने और डाइजेशन को बेहतर रखने का भी काम करते हैं। एंटीऑक्सीडेंट गुण के साथ-साथ इसमें एंटी-वायरल और एनाल्जेसिक गुण भी होते हैं। अगर आप लौंग की चाय या काढ़ा पिएं, तो इससे आप मौसमी बीमारियों से भी खुद को बचा सकते हैं।
मेटाबॉलिज्म बूस्ट करे
लौंग का काढ़ा पीने से मेटाबॉलिज्म बूस्ट होता है। अगर आप रोजाना सुबह के समय लौंग का काढ़ा पिएं तो आपका वजन भी कम होगा और डाइजेशन भी बेहतर होगा।

काला लहसुन: कम तीखा, पोषक तत्वो से भरपूर

काला लहसुन: कम तीखा, पोषक तत्वो से भरपूर
सरस्वती उपाध्याय
आज तक आपने एक ही प्रकार के लहसुन को देखा होगा और वो है सफेद लहसुन। पर क्या आप जानते हैं कि काला लहसुन भी होता है। जी हां, इसका छिलका तो सफेद ही रहेता है पर ये अंदर से पूरी तरह से काला नजर आएगा। आपको बतादें कि यह काला लहसुन का आज का नहीं बल्कि पुराने समय से हमारे देश में है। जिसका आयुर्वेद में कई औषधीय के तौर पर उपयोग किया जाता है।
आपको बतादें कि यह काला लहसुन कहीं अलग से उगाया नहीं जाता बल्कि यह सफेद लहसुन का फर्मेंटेशन रूप है। जो स्वाद में सफेद लहसुन के तुलना में कम तीखा होता है और पोषक तत्व इसमें भरपूर होते हैं। इस लहसुन का अगर आप लगातार सेवन करते हैं तो इससे सेहत को कई प्रकार के फायदें मिलते हैं।आइए जानते हैं इन फायदों (Benefits)के बारे में।
काला लहसुन में एंटी.बैक्टीरियल और एंटी.वायरल के गुण पाए जाते हैं जिसकी वजह से शुगर कंट्रोल में रहता है।
अगर आप भी अपने दिल का ख्याल रखना चाहते हैं तो आपको काले लहसुन का सेवन करना चाहिए। काले लहसुन में पाया जाने वाला एलिसिन गुण खून को पतला करने और हार्ट ब्लॉकेज से बचाने में मदद करता है।
काला लहसुन के सेवन से डाइजेशन भी अच्छी रहती है।इनमें पाए जाने वाले गुण खाना को पचाने में मदद करता है।
काला लहसुन के सेवन से इम्यूनिटी बूस्ट होती है। दरअसल इसमें पाए जाने वाला एंटीबैक्टीरियल और एंटीवायरल गुण डायबिटीज के मरीजों के लिए फायदेमंद होता है।
अगर आप काला लहसुन का लगातार सेवन करते हैं तो एलर्जी संबंधित रोगों से लड़ने की ताकत मिलती है। जैसे आप इसके सेवन से ठंड वाली और धूल से होने वाली एलर्जी को ठीक कर सकते हैं।

शुक्रवार, 24 जून 2022

स्वास्थ्य: ओट्स चीला बनाने की रेसिपी, जानिए

स्वास्थ्य: ओट्स चीला बनाने की रेसिपी, जानिए

सरस्वती उपाध्याय
अगर आप अपने दिन की शुरुआत स्वादिष्ट और हेल्दी ब्रेकफास्ट के साथ करना चाहते हैं, तो फटाफट बनने वाले ‘ओट्स चीला’ के बारे में जान लेना चाहिए। यह काफी हेल्दी माना जाता है और इससे शरीर को एनर्जी मिलती है। खास बात यह है कि इसे महज 20 मिनट में तैयार किया जा सकता है और इसे बनाने के लिए जरूरी सामग्री किचन में ही मिल जाएगी। धीरे-धीरे ‘ओट्स चीला’ का ट्रेंड बढ़ता जा रहा है और लोग इसे काफी पसंद भी कर रहे हैं। अगर आपने अब तक इस ब्रेकफास्ट को ट्राई नहीं किया है, तो आपको आसान विधि के बारे में जरूर जान लेना चाहिए।

ओट्स चीला बनाने की रेसिपी...

2 चम्मच बेसन
2 कप ओट्स
2 चम्मच तेल
2 कटी हुई हरी मिर्च
2 कटी हुई प्याज
2 शिमला मिर्च
1 गाजर
2 टमाटर
1 चम्मच जीरा
थोड़ा अदरक
1/2 चम्मच हल्दी
1 चम्मच मिर्च
हरा धनिया कटा हुआ
नमक (स्वादानुसार)
हरी चटनी या रेड सॉस

ओट्स चीला बनाने का आसान तरीका...

1. ओट्स चीला बनाने के लिए सबसे पहले आपको ओट्स को पीसना होगा। यह काम आप मिक्सी से कर सकते हैं। ओट्स पीसकर आप एक बर्तन में रख लें।
2. इसके बाद आप पिसे हुए ओट्स में बेसन, हल्दी, जीरा मिर्च और अन्य मसाले डालकर अच्छी तरह मिला लें।


शुक्रवार, 17 जून 2022

सफेद मक्खन बनाने की रेसिपी, जानिए

सफेद मक्खन बनाने की रेसिपी, जानिए 

सरस्वती उपाध्याय 
घर में बना मक्खन ज्यादा पौष्टिक और स्वाद में अच्छा होता है। इसमें कोई प्रिजर्वेटिव नहीं होता।ये आसानी से बन जाता है और एक से दो हफ्तों तक इसे फ्रिज में स्टोर करके रख सकते हैं। जानिए, सफेद मक्खन बनाने का आसान तरीका।

सामग्री...
3 कप मलाई
1 टेबल स्पून दही
1 कप आइस कोल्ड वाटर
4 से 5 आइस क्यूब्स

सफेद मक्खन बनाने की रेसिपी...

सफेद मक्खन बनाने के लिए आप रोजाना दूध से मलाई की लेयर को निकालकर रख सकते हैं। इसे एक कंटेनर में स्टोर करें।
जब आपके पास पर्याप्त मात्रा में मलाई इकट्ठा हो जाए, तब इसे मक्खन में कंवर्ट कर सकते हैं।
मलाई को जमा करते समय फ्रिज में एक बाउल में रखें। जब ये अच्छी मात्रा में इकट्ठा हो जाए, तो बाउल को फ्रिज से बाहर निकाल लें और इसे कमरे के तापमान पर आने दें।
इसमें 2 टेबल स्पून दही मिलाएं और 6 घंटों तक रेस्ट के लिए रख दें।
अब इस मिश्रण को एक बड़े बाउल में निकालें। इसमें 1 कप आइस कोल्ड वाटर और 4 से 5 आइस क्यूब्स मिलाएं।
इससे बटर को अच्छे तरीके से निकालने में मदद मिलेगी।
एक इलेक्ट्रिक हैंड ब्लेंडर लें और मिश्रण को ब्लेंड करें।
इसे थोड़ा रुक कर, तब तक ब्लेंड करते रहें, जब तक मिश्रण से छोटे-छोटे चंक न निकलने लगें।
धीरे-धीरे बटर की लेयर ऊपर आ जाएगी। बटर को बॉल की शेप दें। एक बॉउल में ठंडा पानी लें और इस बॉल को उसमें डाल दें।
इससे न सिर्फ बटर को एक सही शेप मिलेगी, बल्कि अगर कोई स्मेल भी होगी, तो वो चली जाएगी।
तैयार बटर को एयरटाइट कंटेनर में रखकर इसे फ्रिज में रखें। आपका ये होममेड बटर एक से दो हफ्तों तक चलेगा।

आयुर्वेद: चाय के साथ गुड़ मिलाकर नहीं पीना चाहिए

आयुर्वेद: चाय के साथ गुड़ मिलाकर नहीं पीना चाहिए

सरस्वती उपाध्याय  
आज के समय में स्वस्थ रहना हर किसी का मंत्र बन गया है। फिट रहने के लिए लोग जिम से लेकर डांस क्लासेस तक ज्वॉइन कर रहे हैं। साथ में अपनी डाइट का भी खूब ख्याल रख रहे हैं। पिछले कुछ समय में फिटनेस फ्रीक लोगों में चीनी की जगह गुड़ और शहद जैसे स्वस्थ विकल्पों को अपनाते देखा गया है। अब लोग अपने दिन की शुरुआत गुड़ वाली चाय से करना पसंद करते हैं।
खासतौर से सर्दी के दिनों में चाय में शक्कर की बजाय गुड़ डालना बहुत फायदेमंद होता है। लेकिन आयुर्वेद की मानें, तो यह एक दोषपूर्ण संयोजन है। चाय के साथ गुड़ मिलाकर नहीं पीना चाहिए।

चाय में शक्कर की बजाय गुड़ डालना क्‍यों है गलत ?

पाचन हो सकता है खराब...
प्राचीन चिकित्सा पद्धति कहती है कि खराब फूड कॉम्बिनेशन खराब अग्रि या खराब पाचन का कारण बन सकता है। कहने को गुड़ खाने के कई फायदे हैं। यह विटामिन, फॉस्फोरस, आयरन, मैग्नीशियम और पोटेशियम जैसे पोषक तत्वों से भरपूर है, लेकिन दूध के साथ मिलकर इसका कॉम्बिनेशन आपके स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो जाता है। 
​गलत कॉम्‍बिनेशन बन सकता है अमा का कारण
आयुर्वेद के अनुसार, खाद्य पदार्थों का गलत संयोजन अमा का कारण बन सकता है। बता दें कि आयुर्वेद में हर भोजन का अपना खास गुण, शक्ति , स्वाद होता है। डॉ. राधामणि कहती हैं कि दूध गर्म और गुड़ ठंडा होता है। जब आप किसी गर्म भोजन को ठंडे के साथ मिलाते हैं, तो वीर्य के अंतर के कारण इसे असंगत कहा जाता है। 
​चाय में चीनी की जगह मिलाएं मिश्री
जो लोग अपनी चाय को मीठा करने के लिए आर्टिफिशियल स्वीटनर की तलाश में हैं, उनके लिए आयुर्वेदिक विशेषज्ञ मिश्री या रॉक शुगर का सेवन करने की सलाह देती हैं। क्योंकि मिश्री दूध की तरह ही ठंडी होती है, इससे वीर्य में कोई अंतर नहीं आता।
​बचें खराब फूड कॉम्बिनेशन से
अन्य फूड कॉम्बिनेशन , जो आयुर्वेद के अनुसार, स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हैं वे हैं केला और दूध, मछली और दूध, दही और पनीर, घी और शहद। गलत फूड कॉम्बिनेशन ब्‍लोटिंग, त्वचा विकारों से लेकर ऑटोइम्यून बीमारियों तक कई तरह की स्वास्थ्य समस्याएं पैदा कर सकता है।

गुरुवार, 16 जून 2022

बढ़ते मोटापे को कंट्रोल करने में फायदेमंद है, ग्रीन-टी

बढ़ते मोटापे को कंट्रोल करने में फायदेमंद है, ग्रीन-टी

सरस्वती उपाध्याय  
बढ़ते मोटापे को कंट्रोल करने के साथ निकली हुई तोंद को भी अंदर करने के लिए आपने लोगों को एक दूसरे को ग्रीन-टी पीने की सलाह देते हुए कई बार सुना होगा। लेकिन, क्या वाकई ग्रीन-टी का सेवन बढ़ते मोटापे को कंट्रोल करने में फायदेमंद साबित हो सकता है, आइए जानते हैं...

ग्रीन-टी पीने के फायदे...
कई शोध बताते हैं कि ग्रीन-टी का सेवन वेट लॉस प्रोसेस को तेज करने में मदद करता है।
ग्रीन-टी में ढ़ेर सारे एंटी ऑक्सिडेंट्स मौजूद होते हैं, जो आपको पूरे दिन तरोताजा बनाए रखने में मदद करते हैं। ग्रीन-टी का सेवन वेट लॉस के साथ दिल से जुड़े रोग, स्किन प्रॉब्लम आदि को दूर करने में भी मदद करते हैं।
ग्रीन-टी में पाये जाने वाले तत्व शरीर को इंफेक्शन और सूजन से राहत देते हैं।
ग्रीन-टी में पाए जाने वाले एंटी ऑक्सीडेंट शरीर की इम्यूनिटी को बढ़ाते हैं।
एनसीबीआई की वेबसाइट पर यूनिवर्सिटी ऑफ बर्मिंघम के रिसर्च को प्रकाशित किया गया है। इस रिसर्च में बताया गया है कि ग्रीन-टी पीने से मोटापा संबंधी समस्या दूर हो सकती हैं। इसका सेवन करने से मेटाबॉलिक रेट दर को बढ़ाकर हर समय थोड़ी-थोड़ी कैलोरी को कम करने में मदद मिल सकती है। इसमें मौजूद योगिक फैट बर्निंग हॉर्मोन को सक्रिय कर सकते हैं। ग्रीन-टी की पत्तियों को तेज उबलते पानी में डालने से ग्रीन-टी की पत्तियों के अंदर मौजूद catechin डैमेज हो जाता है। इसलिए बेली फैट कम करने के लिए सबसे पहले पानी को उबालकर उसे 10 मिनट ठंडा होने दें। इसके बाद इसमें ग्रीन-टी की पत्तियां या फिर टी बैग डालकर हिलाएं। जब ग्रीन-टी बन जाए, तो पत्तियां या टी बैग निकालकर इसका सेवन करें।

रोजाना पीना है या नहीं ?
यूनिवर्सिटी ऑफ मैरिलैंड मेडिकल सेंटर की एक स्टडी की मानें तो वेट लॉस के लिए हर दिन 2 कप ग्रीन टी बहुत है। एक दिन में इससे ज्यादा ग्रीन-टी का सेवन नहीं करना चाहिए।

ग्रीन-टी पीने का सही टाइम...
अक्सर लोग मानते हैं कि खाली पेट ग्रीन टी पीने से जल्दी वजन कम होता है। लेकिन हेल्थ एक्सपर्ट्स ऐसा नहीं मानते हैं। खाली पेट ग्रीन टी नहीं पीना चाहिए। आइए जानते हैं क्या है ग्रीन टी पीने का सही समय।
खाना खाने के एक घंटे पहले और बाद में ही ग्रीन-टी पीनी चाहिए।
सोने से पहले ग्रीन टी पीने से वजन कम होता है।
ग्रीन-टी में दूध और चीनी मिलाकर नहीं पीना चाहिए।
वजन घटाने के लिए ग्रीन-टी में शहद मिलाकर पीना चाहिए।
वेट लॉस के लिए ग्रीन-टी में नींबू रस मिलाकर पीना भी फायदेमंद होता है।

शुक्रवार, 10 जून 2022

लौकी का जूस बनाने की रेसिपी, जानिए

लौकी का जूस बनाने की रेसिपी, जानिए 

सरस्वती उपाध्याय     
लौकी के बारे में तो हम सभी जानते हैं, इसे इंग्लिस में बोतल गॉर्ड कहते हैं, और ये सब्जियों के तौर पर इस्तेमाल होती है। काफी लोगों को ये सब्जी बहुत पसंद आती है। आपको ये जानकर हैरानी होगी की खाली पेट इसके जूस के सेवन से आप कोलेस्ट्रॉल को सिर्फ 90 दिनों में अलविदा कर सकते हैं। 
हम में से कई लोग ऐसे भी हैं। जिन्हें लौकी की सब्जी पसंद नहीं आती, लेकिन अगर इसके फायदों के बारे में जानेंगे तो हर कोई इसे डेली डाइट में शामिल करना चाहेगा। लौकी को खाने से आप कई तरह की बीमारियों से राहत पा सकते हैं। आपको बता दें कि इसमें कई तरह के प्रोटीन, विटामिन्स और मिनरल्स पाए जाते हैं‌। खास तौर से इसमें विटामिन ए, विटामिन सी, कैल्शियम, आयरन, मैग्नीशियम, पोटेशियम और जिंक भरपूर मात्रा में मिलते है। ये न्यूट्रिएंट्स शरीर की कई जरूरतों को पूरा करते हैं। इसके अलावा लौकी का जूस किसी औषधि से कम नहीं है।

लौकी का जूस बनाने की विधि...
इसके लिए एक लौकी लें और उसका छिलका उतारकर बीजों को अच्छी तरह से अलग कर लें। फिर 15-20 पुदीने की पत्तियां भी शामिल करें, अब एक चम्मच जीरा, 2-3 चम्मच नींबू का रस और स्वादानुसार नमक मिला लें, आपके जूस का रॉ मटेरियल तैयार है। आखिर में इन सभी चीजों को मिक्सर में ब्लेंड कर लें और थोड़ा सा पानी मिला लें, आपके कोलेस्ट्रॉल को जड़ से खत्म करने वाला जूस तैयार हो चुका है। 

सुबह उठते ही इस जूस का खली पेट सेवन करें और 90 दिनों तक लगातार ऐसा करते रहें, और साथ ही बाकी डाइट पर भी कंट्रोल करें।जो लोग नियमित रूप से शराब और सिगरेट का सेवन करते है, वो अपने आप को दिन पर दिन खोखला करते जा रहे हैं, और देखा जाए तो लीवर और दिल, ये दोनों ही हमारे शरीर के अहम अंग है। जब हम शराब और ऑयली चीजों का रोजाना सेवन करते है और अगर सिगरेट भी भरपूर पीते है, तो इससे हमारे लिवर में सूजन होने लगती है। साथ ही सांस लेने में भी परेशानियां पेश आती हैं। लेकिन आपको बता दें ऐसे में लौकी का जूस आपके लिए एनर्जी ड्रिंक का काम करता है। तो मुख्य रूप से शराब और सिगरेट पीना बंद करें और लौकी का सेवन डेली खली पेट करें, इससे कुछ ही दिनों आप में शरीर में बदलाव महसूस करेंगे, क्योंकि बैड कोलेस्ट्रॉल कम हो चुका होगा। 

सोमवार, 6 जून 2022

स्वास्थ्य, नोरोवायरस के दो मामलों की पुष्टि हुई

स्वास्थ्य, नोरोवायरस के दो मामलों की पुष्टि हुई

इकबाल अंसारी
तिरुवनंतपुरम। केरल के विझिंजम में नोरोवायरस के दो मामलों की पुष्टि हुई है। राज्य की स्वास्थ्य मंत्री वीना जॉर्ज ने कहा कि चिंता की कोई जरूरत नहीं है। स्वास्थ्य विभाग ने स्थिति का आकलन किया है। क्षेत्र से नमूने लेकर परीक्षण किए गए हैं और इससे निपटने की कार्रवाई तेज कर दी गई है। दोनों बच्चों की हालत स्थिर है। स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि फिलहाल चिंता करने की कोई जरूरत नहीं है। लेकिन, सभी को सावधान रहना चाहिए और स्वच्छता बनाए रखना चाहिए।
केरल के अलाप्पुझा जिले के कायमकुलम में एक सरकारी उच्च प्राथमिक विद्यालय के आठ छात्रों को फूड पॉइजनिंग के एक संदिग्ध मामले के कारण बेचैनी की शिकायत के बाद शनिवार को एक अस्पताल में भर्ती कराया गया था। जिसके बाद दो बच्चों में संक्रमण का पता चला था। पीटीआई की रिपोर्ट के अनुसार, एक सरकारी प्रयोगशाला में छात्रों के नमूनों का परीक्षण किया गया। राज्य के स्वास्थ्य मंत्री के अनुसार इस वायरस के संक्रमण से जल्द निजात पाया जा सकता है।

गुरुवार, 2 जून 2022

फल, औषधि और आहार हैं इमली, जानिए

फल, औषधि और आहार हैं इमली, जानिए 

सरस्वती उपाध्याय  
इमली का नाम सुनते ही मुंह में पानी आने लगता है। इस चटपटी इमली के अपने कई गुण तो हैं ही, इसे दाल या सब्जी वगैरह में डाल दिया जाए तो स्वाद निखर आएगा। आयुर्वेद में इमली को विशेष बताया गया है। इमली देसी है या विदेशी, वह बहस का विषय है, लेकिन भारत में इसकी खपत बहुत अधिक है। 
असल में इमली है क्या ?
यह भी समझने की बात है। ऐसा क्यों कहा जाता है कि इसके पेड़ पर ‘भूत’ रहते हैं, इसलिए उसके नीचे नहीं सोना चाहिए ?
इमली का खट्टापन इतना जर्बदस्त स्वाद लिए होता है कि मनुष्य इसे खाए बिना नहीं रह पाता। चटनी को तो आप जानते ही हैं। भारतीय भोजन की जान है चटनी, क्योंकि यह स्वाद को बढ़ाती है और स्वादिष्ट चटनी बिना इमली के नहीं बन सकती। भारत की रसोई में जबर्दस्त घुसपैठ बनाने वाली इमली आई कहां से है। एक पक्ष का सीधा मानना है कि इमली अफ्रीका के उष्णकटिबंधीय क्षेत्रों की मूल निवासी है। खासतौर से सूडान, कैमरून और नाइजीरिया। उसके बाद यह फारस और अरब पहुंची। यह भी जानकारी मिली है कि ईसा पूर्व चौथी शताब्दी में प्राचीन मिस्रवासी और यूनानी अपने भोजन व अन्य कार्यों में इमली का प्रयोग करते थे। ईसा पूर्व चौथी शताब्दी में प्राचीन मिस्रवासी और यूनानी अपने भोजन व अन्य कार्यों में इमली का प्रयोग करते थे।

चरकसंहिता में है इमली का विशेष वर्णन...
भारत में इमली की स्थिति यह है कि ईसा पूर्व सातवीं-आठवीं शताब्दी में लिखे गए भारत के प्राचीन आयुर्वेदिक ग्रंथ ‘चरकसंहिता’ में इमली के साथ-साथ उसके समकक्ष वृक्षाम्लं और अम्लवेतस का भी वर्णन है। मजेदार बात यह है कि इमली का वैज्ञानिक नाम `इमलींडस इंडिका` है और फारसी और अरबी में ‘तामार हिंदी’ कहा जाता है। जबकि दावा यह है किया गया है कि सूडान से फारस और अरब होते हुए इमली भारत आई। उसके बाद यह पूरे एशिया क्षेत्र में फैल गई।

फल, औषधि और आहार हैं इमली...
भारत में इमली की जबर्दस्त खपत है। दक्षिण भारत सहित पूरे भारत में सब्जियों, स्पेशल डिश, चटनी आदि में इसका खूब प्रयोग होता है। इसके बावजूद भारत में इसका व्यापार व्यवस्थित नहीं है। इमली की सबसे ज्यादा उपज बिहार, उड़ीसा, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, मध्य प्रदेश, केरल, उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, तमिलनाडु आदि राज्यों में होती है। इमली को किस श्रेणी में रखा जाए। आयुर्वेदिक ग्रंथों में इसे फल बताया गया है तो आयुर्वेद से जुड़े चिकित्सक इसे औषधि की श्रेणी में रखते हैं तो फूड विशेषज्ञ इसे आहार मानते हैं। असलियत यह है कि तीनों ही श्रेणी में इमली का जलवा चल रहा है।
आयुर्वेदिक ग्रंथों में इमली को फल बताया गया है तो आयुर्वेद से जुड़े चिकित्सक इसे औषधि की श्रेणी में रखते हैं तो फूड विशेषज्ञ इसे आहार मानते हैं।
कई बीमारियों को कंट्रोल करती है। इमली
‘चरकसंहिता’ में कहा गया है कि इमली की तासीर गर्म है और यह वात व कफ को ठीक करती है। यह मदिरा का नशा कम करती है और हिचकी को रोकती है। फूड एंड न्यूट्रिशियन कंसलटेंट नीलांजना सिंह के अनुसार कहा जाता है कि खट्टा शरीर के लिए नुकसानदायक है, लेकिन इमली इस मिथक को तोड़ती है। इसका सेवन हाईपरटेंशन को कम करता है, बेड कॉलेस्ट्रॉल का घटाता और गुड कॉलेस्ट्रॉल को बढ़ाता है। यह एंटी बैक्टिरियल भी है और इसमें एंटी ऑक्सिडेंट के भी गुण हैं। इस बात पर शोध चल रहा है कि इमली की गुठली केंसर का इलाज कर सकती है।
इमली में काफी मात्रा में हाइड्रोऑक्साइट्रिक एसिड होता है, जो फैट को जलाने वाले एन्जाइम का पोषण करता है।
उन्होंने बताया कि इमली पाचन क्रिया को दुरुस्त रखती है। इमली में काफी मात्रा में हाइड्रोऑक्साइट्रिक एसिड होता है, जो फैट को जलाने वाले एन्जाइम का पोषण करता है। इसमें फाइबर और आयरन भी है‌। इसका अधिक सेवन शरीर में एलर्जी पैदा कर सकता है, दांतों को भी जकड़ देता है। इसका अधिक सेवन पेट को गुड़गुड़ा सकता है। डायबिटिक लोगों को भी इमली का कम सेवन करना चाहिए।

भूत का मसला बड़ा ही रोचक है...
इमली को लेकर हमें एक मिथक की जानकारी मिली कि इसके पेड़ के नीचे सोने या आसपास ज्यादा समय तक रहने से ‘भूत’ पकड़ लेते हैं, मनुष्य बीमार हो जाता है और उसकी त्वचा पर निशान पड़ जाते हैं। इसी ‘भूत’ के चलते चक्कर आते हैं, जी मितलाता है और कमजोरी भी महसूस होती है। इसलिए इमली के पेड़ को दूर से ही प्रणाम कर लेना चाहिए। इस मसले पर सरकारी अस्पताल में कार्यरत आयुर्वेदाचार्य डॉ. आरपी पराशर ने बताया कि असल में यह पेड़ अपने चारों ओर अम्लता का आवरण बनाए रखता है। इसके अलावा इसकी पत्तियों से सूक्ष्म द्रव भी निकलता है। इन दोनों के कारण ही शरीर में अम्लीय वायु प्रवेश करती रहती है, जिससे चक्कर व जी मितलाने की प्रवृत्ति पैदा हो जाती है। साथ ही त्वचा पर चकत्ते भी पड़ जाते हैं, इसलिए हमारे बड़े-बूढ़ों ने जोड़ दिया कि इस पेड़ पर भूत-प्रेत का वास होता है।

मंगलवार, 31 मई 2022

नारियल के दूध का सेवन करना, बेहद फायदेमंद

नारियल के दूध का सेवन करना, बेहद फायदेमंद  

सरस्वती उपाध्याय  
नारियल का दूध ताज़ा पके हुए ब्राउन नारियल से निकलता है। इसे सदियों से सूप, सॉस और डेज़र्ट्स के लिए उपयोग किया जा रहा है। इसे भारतीय, थाई, हवायन और दक्षिण अमेरिकी खानों में खूब इस्तेमाल किया जाता है।
हाल के समय में नारियल का दूध काफी पॉपुलर हो गया है। यह गाय या भैंस के दूध का स्वादिष्ट और हेल्दी विकल्प है। साथ ही इसके कई फायदे भी हैं। नारियल का दूध काफी गाढ़ा होता है और यह टेक्सचर रिच और क्रीमी होता है। नारियल के दूध का सेवन करना, बेहद फायदेमंद है। नारियल पानी की तरह नारियल का दूध प्राकृतिक तौर पर नहीं मिलता। इसे नारियल के सफेद गूदे और पानी को मिलाकर तैयार किया जाता है। आज हम आपको इसके फायदे बताने जा रहे हैं....

1. वज़न घटाने में करता है मदद...
नारियल का दूध हेल्दी फैट्स से भरा होता है। इसके सेवन से आपका पेट लंबे समय तक भरा महसूस करता है और आप ऊट पटांग खाने से बचते हैं।

2. एंटी-ऑक्सीडेंट्स से भरपूर...
नारियल का दूध विटामिन-सी और ई से भरपूर होता है, जो अपने एंटी-ऑक्सीडेंट गुणों के लिए जाने जाते हैं। चयापचय की प्रक्रिया के दौरान हमारे शरीर के ऊतकों द्वारा मुक्त ऑक्सीजन रेडिकल्स बनते हैं। वे सेलुलर घटकों के लिए हानिकारक हैं और उम्र बढ़ने व ट्यूमर के विकास में योगदान करते हैं।

3. इलेक्ट्रोलाइट बैलेंस...
नारियल का दूध पोटेशियम, मैग्नीशियम और फॉस्फोरस जैसे इलेक्ट्रोलाइट्स से भरपूर होता है। सामान्य हृदय ताल बनाए रखने के लिए पोटेशियम महत्वपूर्ण है। यह स्वस्थ मांसपेशियों के कामकाज के लिए भी ज़रूरी है। एक स्वस्थ प्रतिरक्षा प्रणाली के साथ-साथ सामान्य तंत्रिका और मांसपेशियों के कार्य के रखरखाव के लिए मैग्नीशियम की आवश्यकता होती है। वहीं, फास्फोरस हड्डियों और दांतों का एक महत्वपूर्ण संरचनात्मक घटक है।

4. दिल की बीमारी को दूर रखता है...
नारियल का दूध शरीर में एचडीएल कोलेस्ट्रॉल के स्तर को बढ़ाने के लिए जाना जाता है। वैज्ञानिक शोध से पता चलता है कि अगर कम मात्रा में सेवन किया जाए तो नारियल का दूध शरीर में एलडीएल कोलेस्ट्रॉल (खराब कोलेस्ट्रॉल) के स्तर को कम करने में मदद कर सकता है।

5. इम्यून सिस्टम को मज़बूती देता है...
नारियल का दूध में में लॉरिक एसिड होता है जो अपने एंटीसेप्टिक गुणों के लिए जाना जाता है। यह बैक्टीरिया, वायरस और कवक के कारण होने वाले संक्रमण से लड़ने में शरीर की मदद करता है।

6. अनीमिया से बचाव...
नारियल के दूध में आयरन की भी अच्छी मात्रा होती है, जो एक ऐसा खनीज है, जो सामान्य हीमोग्लोबिन के स्तर के साथ स्वस्थ लाल रक्त कोशिकाओं के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। नारियल के दूध को डाइट में शामिल करने से शरीर में खून की कमी नहीं होगी।

7. स्वस्थ बाल और त्वचा...
कुछ समय पहले ही लोगों ने बालों को कंडिशन करने के लिए नारियल के दूध का इस्तेमाल करना शुरू कर दिया है। इसमें फैट्स का मात्रा उच्च होती है, जो बालों के मॉइश्चर को बनाए रखने में मदद करता है। अगर इसे स्कैल्प पर लगाया जाए, तो यह डैंड्रफ और स्कैल्प की खुजली को दूर करने में मदद करता है। ऐसा इसलिए क्योंकि नारियल के दूध में एंटी-बैक्टीरियल और एंटी-फंगल गुण होते हैं। अगर इसे चेहरे पर डायरेक्टली लगाया जाए, तो यह स्किन के लचीलेपन को बढ़ावा देता है। साथ ही इसकी एंटी-बैक्टीरियल गुण एक्ने में आराम देते हैं।

8. एंटी-इन्फ्लामेट्री गुण...
नारियल का दूध जोड़ों में दर्द और सूजन को कम करने का काम करता है। चीनी सूजन बढ़ाने का काम करती है। ऐसे में अगर आप मीठे के लिए नारियल के दूध का उपयोग करते हैं, तो आपको आर्थराइटिस और लुपस आर्थराइटिस जैसी स्थिति में सूजन से नहीं जूझना पड़ेगा।

9. जठरांत्र स्वास्थ्य को बढ़ावा देता है...
नारियल का दूध उन लोगों के लिए अच्छा है, जो लैक्टॉस इंटॉलेरेन्ट हैं। इसके अलावा इसमें ज़िंक भी मौजूद होता है, जो एक ऐसा खनीज है जो आंतों की दीवार वाली कोशिकाओं के नवीनीकरण में सहायता करता है। यह आंतों से हानिकारक बैक्टीरिया को रक्त प्रवाह में जाने से रोकता है और दस्त जैसी घटनाओं को कम करता है।

सोमवार, 30 मई 2022

कॉर्न पोहा बनाने की आसान रेसिपी, जानिए

कॉर्न पोहा बनाने की आसान रेसिपी, जानिए  

मो. रियाज         
हमारे यहां पोहा नाश्ते के तौर पर काफी पसंद किया जाता है। कई जगहों पर तो स्ट्रीट फूड के तौर पर भी पोहा काफी फेमस है। घरों में भी पोहा बनाकर खाया जाता है। आप भी अगर पोहा खाना पसंद करते हैं और पोहे की अलग वैराइटी ट्राई करना चाहते हैं तो हम आज आपको कॉर्न पोहा  बनाने की आसान रेसिपी बताने जा रहे हैं। कॉर्न पोहा बनाने के लिए पोहे के साथ कॉर्न का प्रयोग किया जाता है। नाश्ते के अलावा दिन में कभी भी कॉर्न पोहा बनाकर खाया जा सकता है। ये फू़ड डिश बच्चों को भी काफी पसंद आती है। आप अगर घर पर इस रेसिपी को ट्राई करना चाहते हैं तो हमारी बताई विधि से स्वादिष्ट कॉर्न पोहा तैयार कर सकते हैं।

कॉर्न पोहा बनाने के लिए सामग्री...
पोहा – 2 कप
कॉर्न 1 कप
प्याज – 1
टमाटर – 2
राई – 1 टी स्पून
लाल मिर्च पाउडर – 1/2 टी स्पून
हल्दी – 1/4 टी स्पून
हरी मिर्च कटी – 2
धनिया पत्ती – 2 टेबलस्पून
अदरक-लहसुन पेस्ट – 1 टी स्पून
नींबू – 1
कढ़ी पत्ते – 15
तेल – 1 टेबलस्पून
नमक – स्वादानुसार

कॉर्न पोहा बनाने की विधि...
कॉर्न पोहा बनाने के लिए सबसे पहले पोहे को लेकर साफ कर लें और उसे पानी में गलाकर आधा घंटे के लिए अलग रख दें। अब मक्के के दानों (कॉर्न) को लें और उन्हें एक बर्तन में डालकर उबाल लें। आप चाहें तो इसके लिए छोटे कुकर का भी इस्तेमाल कर सकते हैं। अब प्याज, टमाटर और हरी मिर्च को बारीक-बारीक काट लें।इसके बाद अदरक और लहसुन को पीसकर पेस्ट तैयार कर लें।
अब एक कड़ाही में 1 टेबलस्पून तेल डालकर उसे मीडियम आंच पर गर्म करने के लिए रख दें। जब तेल गर्म हो जाए तो उसमें राई डालकर चटका लगाएं। इसके बाद इसमें कड़ी पत्ते डालकर एक मिनट तक भून लें। इसके बाद इसमें बारीक कटा प्याज, हरी मिर्च और अदरक-लहसुन का पेस्ट डालकर फ्राई करें। प्याज को तब तक भूने जब तक कि इसका रंग गोल्डन ब्राउन ना हो जाए।
इसके बाद इसमें बारीक कटे टमाटर, लाल मिर्च पाउडर, हल्दी और स्वादानुसार नमक डालकर मिलाएं। अब टमाटर को नरम होने तक पकने दें। जब टमाटर नरम हो जाएं तो इसमें उबले कॉर्न डालकर करछी से चलाते हुए मिक्स कर दें। इसके बाद गले हुए पोहे कड़ाही में डालें और मिश्रण के साथ अच्छी तरह से मिला दें। इसे 1-2 मिनट तक पकाएं फिर गैस बंद कर दें। आपका स्वादिष्ट कॉर्न पोहा बनकर तैयार हो चुका है। इसमें नींबू का रस और कटा हरा धनिया गार्निश कर सर्व करें।

रविवार, 29 मई 2022

कच्चे आम का पुलाव बनाने की रेसिपी, जानिए

कच्चे आम का पुलाव बनाने की रेसिपी, जानिए  

सरस्वती उपाध्याय      

कच्चे आम के मौसम में आम पना और चटनी तकरीबन हर घर में बनाई जाती है। कई लोग आम के जायके को साल भर चखते रहने के लिए आम का अचार और कुच्चा जैसी खट्टी-मीठी चीज़ें बनाते हैं। आम की ही अगर इन सबसे अलग कोई डिश बनाना चाहते हैं, तो आज हम आपके लिए लेकर आए हैं, रॉ मैंगो राइस यानी, कच्चे आम का पुलाव। दक्षिण भारत में इस डिश को ख़ास तौर पर बनाया जाता है। इस डिश को बनाने के लिए आपको न ज़्यादा सामान की ज़रूरत होती है न ही अधिक समय की. बस कच्चा आम करी पत्ते हैं, तो इस डिश को झटपट बनाकर तैयार किया जा सकता है। जिस दिन कुछ हल्का खाने की इच्छा हो या फिर बढ़ती गर्मी की वजह से रसोई में वक्त गुज़ारना मुश्किल हो रहा हो, तो खट्टे स्वाद वाले इस चावल को बनाने और गर्मा-गर्म सर्व करें। आइए जानते है, कच्चे आम का पुलाव बनाने के लिए किन चीज़ों की ज़रूरत होती है और यह कैसे बनता है।

सामग्री...

चावल – 2 कटोरी
कच्चा आम – 1 बड़े आकार का
सरसों – ½ टीस्पून
जीरा – 1 टीस्पून
मूंगफली – 2 टेबलस्पून
चना दाल – 1 टेबलस्पून
उड़द दाल – 1 टेबलस्पून
करी पत्ते – 8-10
साबुत लाल मिर्च – 2
हरी मिर्च – 2 बारीक कटी हुई
हल्दी – 1 टीस्पून
सरसों तेल – 2 टेबलस्पून
नमक – स्वादानुसार

कच्चे आम का पुलाव बनाने की विधि...
चावल को भगोने में पकाकर इसका माड़ निकाल लें। एक पैन में तेल गर्म करें और इसमें सरसों-जीरा चटकाए। 1 मिनट बाद इसमें लाल मिर्च, मूंगफली, करी पत्ते, उड़द और चना की दाल डालकर धीमी आंच पर दो से तीन मिनट तक भूनें। अब इसमें कद्दूकस किया हुआ कच्चा आम, हल्दी, नमक डालकर तेज आंच पर 5 मिनट के लिए आम को अच्छी तरह भूनें।

अब इसमें पके हुए चावल डालकर चलाएं। जब चावल और तड़के वाला मिश्रण अच्छी तरह से मिल जाए, तब गैस बंद कर दें। इस राइस के साथ टमाटर,प्याज और खीरे का रायता सर्व कर सकते हैं। खट्टापन के ज़ायके से भरपूर कच्चे आम के पुलाव का बेहतर स्वाद पाने लिए इसे गर्मा-गर्म ही खाएं।

पनीर के फूल का सेवन करना, बेहद फायदेमंद

पनीर के फूल का सेवन करना, बेहद फायदेमंद 

सरस्वती उपाध्याय          
आपने पनीर के बारे में तो सुना होगा, लेकिन कम ही लोग जानते होंगे कि पनीर का फूल भी होता है। इस फूल का भी सेवन किया जाता है। अब आप सोच रहे होंगे कि भला इसका उपयोग कैसे किया जाता है और इसके क्या-क्या फायदे आपको मिल सकते हैं, तो आइए जानने का प्रयास करते हैं कि पनीर के फूल ब्लड शुगर कंट्रोल में कैसे प्रभावी है ? 
वर्तमान समय में डायबिटीज से ज्यादातर लोग पीड़ित हैं। इससे निपटने के लिए कुछ लोग दवाइयों पर निर्भर हैं तो कुछ लोग एहतियात अपनाते हैं। बता दें कि यह एक ऐसी बीमारी है जिसे कंट्रोल किया जा सकता है, लेकिन पूरी तरह से खत्म नहीं किया जा सकता है। ऐसी स्थिति में आपको सही खानपान, हेल्दी लाइफस्टाइल के साथ-साथ कुछ घरेलू उपाय अपनाने होंगे, जिससे ब्लड शुगर कंट्रोल किया जा सकता है। ऐसे में पनीर का फूल भी काफी फायदे है। डायिबटीज मरीजों के लिए यह रामबाण इलाज हो सकता है। दरअसल, इसका उपयोग करन से ब्लड शुगर लेवल कंट्रोल में रहता है। अब आप सोच रहे होंगे कि इस फूल का कैसे इस्तेमाल करें, तो आइए जानते हैं।
वर्तमान समय में डायबिटीज से ज्यादातर लोग पीड़ित हैं। इससे निपटने के लिए कुछ लोग दवाइयों पर निर्भर हैं तो कुछ लोग एहतियात अपनाते हैं। बता दें कि यह एक ऐसी बीमारी है जिसे कंट्रोल किया जा सकता है, लेकिन पूरी तरह से खत्म नहीं किया जा सकता है। ऐसी स्थिति में आपको सही खानपान, हेल्दी लाइफस्टाइल के साथ-साथ कुछ घरेलू उपाय अपनाने होंगे, जिससे ब्लड शुगर कंट्रोल किया जा सकता है।
ऐसे में पनीर का फूल भी बेहद फायदेमंद है। डायिबटीज मरीजों के लिए यह रामबाण इलाज हो सकता है। दरअसल, इसका उपयोग करन से ब्लड शुगर लेवल कंट्रोल में रहता है। 

मंगलवार, 24 मई 2022

पनीर कोल्हापुरी बनाने की रेसिपी, जानिए

पनीर कोल्हापुरी बनाने की रेसिपी, जानिए  

सरस्वती उपाध्याय           
तीखा और मसालेदार खाना खाने वाले लोगों के लिए पनीर कोल्हापुरी कोई नया नाम नहीं है। इस फूड डिश की खासियत ही इसके लिए बनाईं जाने वाली स्पेशल तीखी और मसालेदार ग्रेवी होती है। स्वाद में लाजवाब पनीर कोल्हापुरी डिनर के लिए एक परफेक्ट रेसिपी हो सकती है। अगर आप स्पाइसी और मसालेदार सब्जी खाने का शौक रखते हैं। होटल और रेस्तरां की तरह ही घर पर भी पनीर कोल्हापुरी का लाजवाब जायका हासिल किया जा सकता है। आप भी अगर पनीर कोल्हापुरी को पसंद करते हैं और घर पर इस रेसिपी को बनाकर सभी को खिलाना चाहते हैं तो हम आपको इसे बनाने की आसान रेसिपी बताने जा रहे हैं। इसकी मदद से आप आसानी से इसे बना सकेंगे।

पनीर कोल्हापुरी बनाने के लिए सामग्री...

ताजा पनीर – 200 ग्राम
टमाटर – 4
सूखा नारियल कद्दूकस – 1/3 कप
तिल – 2 टी स्पून
जीरा – 2 टी स्पून
सौंफ – 1 टी स्पून
लाल मिर्च पाउडर – 1 टी स्पून
हल्दी – 1/2 टी स्पून
धनिया पाउडर – 1 टी स्पून
हींग – 1 चुटकी
काजू – 1/4 कप
अदरक कद्दूकस – 1 टी स्पून
हरी मिर्च कटी – 2
लाल मिर्च खड़ी – 2
बड़ी इलायची – 1
लौंग – 4
काली मिर्च – 8-10 दानें
दालचीनी – 1 इंच टुकड़ा
तेजपत्ता – 1
तेल – 3 टेबल स्पून
नमक – स्वादानुसार
 
पनीर कोल्हापुरी बनाने की रेसिपी...

पनीर कोल्हापुरी बनाने के लिए सबसे पहले पनीर को लें और उसके क्यूब्स काट लें। इसके बाद टमाटर के टुकड़े कर मिक्सी में डाल दें और इसमें अदरक, काजू, हरी मिर्च डालकर इस मिश्रण का पेस्ट तैयार कर लें। इसके बाद एक कड़ाही में तेल डालकर उसे मीडियम आंच पर गर्म करने के लिए रख दें। जब तेल गर्म हो जाए तो उसमें जीरा, सौंफ और तिल डालकर चटकने दें। कुछ सेकंड के बाद कड़ाही में लौंग, काली मिर्च, दालचीनी, तेजपत्ता और बड़ी इलायची डालकर भूनें।
इसके बाद मसाले में कद्दूकस सूखा नारियल डालकर करछी की मदद से मिक्स करें और मसाले को लगभग एक मिनट तक भून लें। इसके बाद गैस बंद कर मसाले को एक प्लेट में निकालकर ठंडा होने के लिए रख दें। मसाला ठंडा होने के बाद मिक्सी में उसे दरदरा पीस लें। इसके बाद इसे एक बर्तन में निकालकर अलग रख दें।
अब दोबारा कड़ाही में तेल डालकर उसे मीडियम आंच पर गर्म करें। तेल गर्म होने के बाद उसमें जीरा, हींग, धनिया पाउडर, हल्दी डालें और भूनें। इसमें खड़ी लाल मिर्च डालकर कुछ सेकंड तक भूनें फिर टमाटर-काजू का पेस्ट डालकर पकने दें। इस दौरान मसाले को करछी से चलाते हुए पकाते रहें। जब मसाला तेल छोड़ दे, तो इसमें लाल मिर्च पाउडर डालकर मिक्स करें और भूनें। कुछ देर बार ग्रेवी में आधा कप पानी मिलाएं और कड़ाही ढककर पकाएं।
जब ग्रेवी में उबाल आ जाए तो उसमें स्वादानुसार नमक और धनिया पत्ती डाल दें। इसे मिलाने के बाद ग्रेवी में पनीर क्यूब्स डालकर 4-5 मिनट तक पकने दें। इस दौरान गैस की फ्लेम को धीमी रखें‌। तय समय के बाद गैस बंद कर दें। आपकी स्वाद से भरी स्पाइसी और मसालेदार पनीर कोल्हापुरी की सब्जी बनकर तैयार हो चुकी है। इसे नान, पराठे या रोटी के साथ सर्व करें।

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