मंगलवार, 18 अप्रैल 2023

अतीक व अशरफ हत्याकांड के मामलें में जवाब मांगा 

अतीक व अशरफ हत्याकांड के मामलें में जवाब मांगा 

अकांशु उपाध्याय 

नई दिल्ली। प्रयागराज में अतीक अहमद और उसके भाई अशरफ हत्याकांड के मामलें में मंगलवार को राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने यूपी के डीजीपी और पुलिस कमिश्नर से 1 महीने में जवाब मांगा है। गौरतलब है कि बीते दिनों प्रयागराज में पूर्व सांसद और बाहुबली नेता अतीक अहमद व उसके भाई अशरफ की 3 शूटरों ने गोली मारकर हत्या कर दी थी।

पुलिस कस्टडी में हुए इस हत्याकांड के बाद आज राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने उत्तर प्रदेश के डीजीपी और प्रयागराज के पुलिस कमिश्नर को नोटिस भेजते हुए 1 महीने में जवाब मांगा है।

कौशाम्बी: क्षेत्राधिकारी ने पीस कमेटी की बैठक की

कौशाम्बी: क्षेत्राधिकारी ने पीस कमेटी की बैठक की


शांतिपूर्ण तरीके से मनाएं त्यौहार: क्षेत्राधिकारी

नगर निकाय के चुनाव को शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न कराने के लिए सीओ ने लोगों से की अपील

कौशाम्बी। आगामी त्यौहार और नगर निकाय के चुनाव को लेकर कोखराज थाने में क्षेत्राधिकारी सिराथू अवधेश विश्वकर्मा ने इलाके के ग्राम प्रधान संभ्रांत लोगों के साथ मंगलवार को पीस कमेटी की बैठक की। बैठक में उन्होंने उपस्थित लोगों से शांतिपूर्ण तरीके से त्यौहार मनाने और नगर निकाय के चुनाव को शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न कराने की अपील की है। इस दौरान उन्होंने कहा, कि यदि किसी ने नगर निकाय के चुनाव में और आगामी त्योहारों में स्थिति को खराब करने की कोशिश की, तो पुलिस उस पर कठोर कार्रवाई करेगी।

कोखराज थाने में आयोजित पीस कमेटी की बैठक में एसओ कोखराज विनोद कुमार मौर्य के साथ कोखराज थाने के कई उपनिरीक्षक, चौकी इंचार्ज, सिपाहियों के अलावा इलाके के गणमान्य लोग और ग्राम प्रधान उपस्थित रहे। पुलिस ने उपस्थित लोगों से क्षेत्र के कानून व्यवस्था की जानकारी ली और उन्हें आश्वासन दिलाया, कि त्यौहार के साथ-साथ नगर निकाय के चुनाव शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न कराया जाएगा। उन्होंने लोगों से अपील की, कि स्थितियों की जानकारी से लगातार पुलिस को अवगत कराते रहें।

अजीत कुशवाहा 

चुन-चुनकर माफियाओं का सफाया करेगी सरकार 

चुन-चुनकर माफियाओं का सफाया करेगी सरकार 

संदीप मिश्र 

लखनऊ। यूपी में माफिया अतीक अहमद का खात्मा हो चुका है। अतीक-अशरफ की मौत के बाद अब योगी सरकार माफियाओं के खिलाफ बड़ा अभियान चलाने जा रही है। योगी सरकार अतीक के बाद अब चुन-चुनकर माफियाओं का सफाया करेगी, जिसमे पुलिस ने 61 गैंगस्टर्स की लिस्ट तैयार की है। इस सूची में विजय मिश्रा, हाजी इकबाल उर्फ बल्ला, सुनील राठी जैसे कुख्यातों के नामों को शामिल किया गया है। इसके अलावा योगी सरकार की ओर से जारी की गई सूची में बदन सिंह उर्फ बद्दो व अंबेडकरनगर के अजय सिपाही का नाम भी शामिल है।

इस लिस्ट में मुख्तार अंसारी, बृजेश सिंह, त्रिभुवन सिंह उर्फ पवन सिंह, संजीव महेश्वरी उर्फ जीवा, ओमप्रकाश श्रीवास्तव उर्फ बबलू, सुशील, सलीम, रुस्तम, सोहराब व अन्य माफिया के नाम भी शामिल हैं। सूची में मेरठ जोन के उधम सिंह, योगेश भदोड़ा, बदन सिंह उर्फ बद्दो, हाजी याकूब कुरैशी, शारिक, सुनील राठी, धर्मेंद्र, यशपाल तोमर, अमर पाल उर्फ कालू, अनुज बारखा, विक्रांत, हाजी इकबाल, विनोद शर्मा, सुनील उर्फ मूंछ, संजीव माहेश्वरी, विनय त्यागी, आगरा जोन के अनिल चौधरी, त्रषि कुमार शर्मा, बरेली जोन के एजाज व कानपुर के अनुपम दुबे का नाम शामिल था।

वहीं, लखनऊ से खान मुबारक, अजय सिपाही, संजय सिंह सिंघाला, अतुल वर्मा, कासिम, प्रयागराज से डब्बू सिहं, सुधाकर सिंह, गुड्डू सिंह,अनूप सिंह वाराणसी जोन से मुख्तार अंसारी, त्रिभुवन सिंह, विजय मिश्रा, ध्रुव सिंह, अखंड प्रताप सिंह, रमेश सिंह उर्फ काका का नाम शामिल है। गोरखपुर से इस सूची में संजी व द्विवेदी, राकेश यादव, सुधीर कुमार सिंह, विनोद कुमार, राजन तिवारी, रिजवान जहीर, देवेंद्र सिंह, गौतमबुद्ध नगर से सुंदर भाटी, सिंहराज भाटी, अमित कसाना, अनिल भाटी, रणदीप भाटी, मनोज उर्फ आसे, अनिल दुजाना का नाम शामिल है।

पेपर लीक मामला, 3 लोगों को हिरासत में लिया

पेपर लीक मामला, 3 लोगों को हिरासत में लिया

नरेश राघानी 

जयपुर। राजस्थान पुलिस के विशेष अभियान दल (एसओजी) ने द्वितीय श्रेणी अध्‍यापक भर्ती परीक्षा-2022 के पेपर लीक मामलें में राज्य लोक सेवा आयोग (आरपीएससी) के एक सदस्य समेत तीन लोगों को हिरासत में लिया है। एसओजी ने मामले में आरपीएससी के सदस्य बाबूलाल कटारा, उसके भतीजे विजय कटारा और आरपीएससी के चालक गोपाल सिंह को हिरासत में लिया है।

मुख्‍यमंत्री अशोक गहलोत ने ट्वीट किया,‘‘ द्वितीय श्रेणी शिक्षक पेपर लीक के मामले में राजस्थान लोक सेवा आयोग (आरपीएससी) के सदस्य बाबूलाल कटारा एवं अन्य दो आरोपियों को एसओजी ने हिरासत में लिया है। युवाओं के हितों से खिलवाड़ करने वाला किसी भी स्तर का व्यक्ति हो, सरकार उसे सख्त से सख्त सजा दिलवाना सुनिश्चित करेगी।’’ एक आधिकारिक बयान कि अनुसार पेपर लीक ग‍िरोह का पता लगाने के लिए आरोपियों से गहन पूछताछ की जा रही है।

पिछले साल दिसंबर में द्वितीय श्रेणी शिक्षक भर्ती परीक्षा के पेपर लीक मामले में 37 अभ्यर्थियों समेत कुल 55 लोगों को गिरफ्तार किया गया था। उदयपुर पुलिस ने एक बस को रोका था, जिसमें परीक्षार्थी परीक्षा देने जा रहे थे। परीक्षार्थियों के पास से प्रश्नपत्र मिला, जिसके बाद सभी को गिरफ्तार कर लिया गया। पेपर लीक मामले में भूपेंद्र सारण और सुरेश ढाका मुख्य आरोपी हैं। सारण को हाल ही में गिरफ्तार किया गया था जबकि ढाका अब भी फरार है।

9 प्रतिशत गिरकर बंद हुए कंपनी के शेयर 

9 प्रतिशत गिरकर बंद हुए कंपनी के शेयर 

अकांशु उपाध्याय 

नई दिल्ली। इलेक्ट्रॉनिक विनिर्माण संबंधी सेवाएं मुहैया कराने वाली कंपनी एवलॉन टेक्नोलॉजीज के शेयर 436 रुपये के निर्गम मूल्य के मुकाबले पहले दिन नौ प्रतिशत गिरकर बंद हुए। इससे पहले कंपनी के शेयर बीएसई पर निर्गम मूल्य के मुकाबले 1.14 प्रतिशत गिरकर 431 रुपये पर सूचीबद्ध हुए थे। कारोबार के अंत में शेयर 8.84 प्रतिशत गिरकर 397.45 रुपये पर बंद हुए।

एनएसई पर एवलॉन टेक्नोलॉजीज के शेयर निर्गम मूल्य 436 रुपये पर सूचीबद्ध हुए थे। कारोबार के अंत में शेयर 9.17 प्रतिशत गिरकर 396 रुपये पर बंद हुए। कंपनी के आरंभिक सार्वजनिक निर्गम (आईपीओ) को 2.21 गुना अभिदान मिला था। कंपनी के 865 करोड़ रुपये के आईपीओ के लिए मूल्य दायरा 415-436 रुपये प्रति शेयर तय किया गया था।

चौहान को हिमाचल एचसी का मुख्य जज नियुक्त किया 

चौहान को हिमाचल एचसी का मुख्य जज नियुक्त किया 

श्रीराम मौर्य 

शिमला। हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय के वरिष्ठतम न्यायाधीश तरलोक सिंह चौहान को इसी उच्च न्यायालय का कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश नियुक्त किया गया है। केंद्रीय विधि एवं न्याय मंत्रालय के न्याय विभाग की ओर से मंगलवार को एक अधिसूचना जारी कर कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश की नियुक्ति से संबंधित घोषणा की गई। अधिसूचना के अनुसार, न्यायमूर्ति चौहान की नियुक्ति 20 अप्रैल से की गई है।

उसी दिन वर्तमान कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश (श्रीमती) न्यायमूर्ति सबीना सेवानिवृत्त होंगी। अधिसूचना में कहा गया है कि संविधान के अनुच्छेद 223 द्वारा प्रदत्त शक्ति का प्रयोग करते हुए राष्ट्रपति ने न्यायमूर्ति तरलोक सिंह चौहान की नियुक्ति को मंजूरी दी और प्रसन्नता व्यक्त की है।

केंद्रीय विधि मंत्री किरण रिजिजू ने ट्वीट कर न्यायमूर्ति चौहान को कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश नियुक्त करने पर उन्हें शुभकामनाएं एवं बधाई दी हैं। उन्होंने ट्विटर पर लिखा, "भारत के संविधान के प्रावधानों के अनुसार, माननीय राष्ट्रपति ने हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय के वरिष्ठतम न्यायाधीश न्यायमूर्ति तरलोक सिंह चौहान की 20 अप्रैल 2023 से उसी उच्च न्यायालय के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश के रूप में नियुक्ति की है। मैं उन्हें अपनी शुभकामनाएं देता हूं।

सिसोदिया की याचिका पर सुनवाई, फैसला सुरक्षित 

सिसोदिया की याचिका पर सुनवाई, फैसला सुरक्षित 

अकांशु उपाध्याय 

नई दिल्ली। दिल्ली शराब नीति-2021-22 में कथित अनियमितताओं से जुड़े प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) द्वारा मनी लॉन्ड्रिंग का आरोप लगाने वाली प्राथमिकी मामलें में दिल्ली की एक विशेष अदालत ने मंगलवार को आम आदमी पार्टी (आप) के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया की जमानत याचिका पर सुनवाई पूरी होने के बाद अपना फैसला सुरक्षित रख लिया। राउस एवेन्यू स्थित एम. के. नागपाल की विशेष अदालत ने संबंधित पक्षों की दलीलें सुनने के बाद कहा कि वह 26 अप्रैल को करीब चार बजे अपना फैसला सुनाएगी। इसी अदालत ने सोमवार को इसी मामले में सिसोदिया की न्यायिक हिरासत एक मई तक बढ़ाने का आदेश पारित किया था। विशेष अदालत ने केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) द्वारा दर्ज मामले में 31 मार्च को उनकी जमानत याचिका खारिज कर दी थी।

इसके बाद सिसोदिया ने दिल्ली उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया था, जहां यह मामला 20 अप्रैल को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध है। सिसोदिया सीबीआई और ईडी की अलग-अलग गिरफ्तारी के बाद न्यायिक हिरासत में तिहाड़ जेल में बंद हैं। सीबीआई मामले में विशेष अदालत से जमानत हासिल करने में नाकाम सिसोदिया ने दिल्ली उच्च न्यायालय का रुख किया था, जहां उनकी जमानत याचिका पर छह अप्रैल को सीबीआई को नोटिस जारी की गई थी।

उच्च न्यायालय के न्यायाधीश न्यायमूर्ति दिनेश कुमार शर्मा की एकल पीठ ने केंद्रीय जांच एजेंसी सीबीआई को दो सप्ताह के भीतर अपना जवाब दाखिल करने का निर्देश देते हुए कहा था कि वह इस मामले की अगली सुनवाई 20 अप्रैल को करेगी। पूर्व उपमुख्यमंत्री सिसोदिया को सीबीआई ने लंबी पूछताछ के बाद 26 फरवरी को गिरफ्तार किया था।बाद में सिसोदिया को विशेष अदालत में पेश किया गया था, जहां उन्हें सीबीआई के अनुरोध पर चार मार्च तक केंद्रीय जांच एजेंसी की हिरासत में भेजा था, जिसकी अवधि समाप्त होने पर दो दिनों की और सीबीआई हिरासत में भेजने का आदेश दिया था। सीबीआई और ईडी की हिरासत समाप्त होने के बाद उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया था। यह अवधि समय-समय पर बढ़ाई गई।

सीबीआई मामले में न्यायिक हिरासत के दौरान प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने सिसोदिया से पूछताछ की थी। बाद में विशेष अदालत ने ईडी की याचिका पर सिसोदिया को उसकी हिरासत में भेजा दिया था। सिसोदिया को ईडी की हिरासत खत्म होने के बाद इस मामले में भी न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया था। शीर्ष अदालत ने 28 फरवरी को सिसोदिया की रिट याचिका खारिज करते हुए कहा था कि याचिकाकर्ता दिल्ली उच्च न्यायालय के समक्ष गुहार लगा सकता है।

सिसोदिया ने अपनी गिरफ्तारी और सीबीआई की जांच के तरीकों पर सवाल उठाते हुए राहत की उम्मीद में शीर्ष अदालत का दरवाजा खटखटाया था। मुख्य न्यायाधीश डी वाई चंद्रचूड़ और न्यायमूर्ति पी एस नरसिम्हा की पीठ ने संबंधित पक्षों की दलीलें सुनने के बाद सिसोदिया की याचिका पर विचार करने से इनकार कर दिया था।

शीर्ष अदालत से राहत नहीं मिलने के बाद सिसोदिया ने बाद में उसी दिन उप मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था, जिसे स्वीकार कर लिया गया था। मनी लॉन्ड्रिंग के एक अलग मामले के आरोप में तिहाड़ जेल में बंद तत्कालीन मंत्री सत्येंद्र जैन ने भी उसी दिन अपने मंत्रिमंडल से इस्तीफा दे दिया था। सीबीआई ने दिल्ली की आबकारी नीति 2021-2022 ( विवाद के बाद दिल्ली सरकार ने इस नीति को रद्द कर दिया था) में कथित अनियमितता के मामले में सिसोदिया को 26 फरवरी रविवार को करीब आठ घंटे की लंबी पूछताछ के बाद देर शाम गिरफ्तार किया था।

सीबीआई ने आरोप लगाया था कि सिसोदिया जांच में सहयोग नहीं कर रहे थे, इसीलिए उन्हें गिरफ्तार किया गया। सीबीआई ने 17 अक्टूबर 2022 को ‘आप ’के नेता सिसोदिया से पूछताछ की थी। सीबीआई ने 17 अगस्त 2022 को सिसोदिया और अन्य 14 लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की थी। गौरतलब है कि दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल से भी रविवार 16 अप्रैल को सीबीआई ने नयी दिल्ली स्थित अपने मुख्यालय में इसी मामले में पूछताछ की थी। केजरीवाल का कहना है कि सीबीआई ने उनसे नौ घंटे तक पूछताछ की जिसमें 56 सवाल किए गए थे।

ईद-उल-फितर: नए व्यंजनों की पेशकश, घोषणा 

ईद-उल-फितर: नए व्यंजनों की पेशकश, घोषणा 

अकांशु उपाध्याय 

नई दिल्ली। नई एयरलाइन कंपनी अकासा एयर ने ईद-उल-फितर के उपलक्ष्य में अपनी इनफ्लाइट मील सर्विस कैफे अकासा ने नए व्यंजनों की पेशकश की घोषणा की है। एयरलाइन ने मंगलवार को यहां जारी बयान में कहा कि यह पेशकश 30 अप्रैल तक जारी रहेगी। अकासा एयर के ग्राहक पारंपरिक मीठे सेवइयां (सेंवई) और कारमेल-स्वाद वाले खजूर के साथ-साथ अकासा एयर रूट नेटवर्क में सभी उड़ानों पर पेय के विकल्प के साथ मटन कीमा पफ के साथ विशेष भोजन का आनंद ले सकेंगे।

ये पेशकश अकासा एयर की वेबसाइट या मोबाइल ऐप पर प्री-बुकिंग और ऑनलाइन ट्रैवल एजेंटों (ओटीए) का चयन करने पर उपलब्ध है। इस पेशकश का उद्देश्य ग्राहकों को उत्सव का लुत्फ उठाना और अकासा एयर की सिग्नेचर सर्विस में अवसर की भावना जोड़ना है।

'पीएम' के काफिले पर हमला, 48 लोगों को सजा

'पीएम' के काफिले पर हमला, 48 लोगों को सजा

अखिलेश पांडेय 

ढाका। बंगलादेश के सतिखरा में वर्ष 2002 में तत्कालीन नेता प्रतिपक्ष एवं वर्तमान प्रधानमंत्री शेख हसीना के काफिले पर हुए हमले के मामलें में बंगलादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) के कुल 48 नेताओं और कार्यकर्ताओं को अलग-अलग कारावास की सजा सुनाई गई है। पूर्व वकील एवं बीएनपी के जिला अध्यक्ष हबीबुल इस्लाम हबीब सहित चार लोगों को आजीवन कारावास और 44 अन्य को सात साल कैद की सजा सुनाई गई है। सतखिरा स्पेशल ट्रिब्यूनल-3 के जज विश्वनाथ मंडल ने सभी पक्षाें की दलीलें सुनने के बाद मंगलवार को फैसला सुनाया।

इस मामले के बयान के अनुसार, 30 अगस्त, 2002 को सुश्री हसीना एक स्वतंत्रता सेनानी की पत्नी से मिलने गयी थीं। सेनानी की पत्नी के साथ दुष्कर्म हुआ था और उसे सतखिरा सदर अस्पताल में भर्ती कराया गया था। सुश्री हसीना स्वतंत्रता सेनानी की पत्नी से मिलने के बाद जशोर लौट रही थीं। इसी दौरान उनके काफिले पर जिले के कलारोआ उपजिला में हमला हुआ। इस हमले में सुश्री हसीना बाल-बाल बच गईं, लेकिन अवामी लीग के लगभग 12 नेता और कार्यकर्ता तथा कुछ पत्रकार घायल हो गए। हमले के दौरान लगभग 15से 20 वाहनों में तोड़फोड़ की गई थी।

समलैंगिक विवाह को मान्यता देने का अनुरोध, सुनवाई 

समलैंगिक विवाह को मान्यता देने का अनुरोध, सुनवाई 

अकांशु उपाध्याय 

नई दिल्ली। उच्चतम न्यायालय ने समलैंगिक विवाह को कानूनी मान्यता देने का अनुरोध करने वाली याचिकाओं पर मंगलवार को सुनवाई शुरू की। वहीं, केंद्र सरकार अपनी प्रारंभिक आपत्ति पर जोर दे रही है कि क्या अदालत इस प्रश्न पर सुनवाई कर सकती है या पहले इस पर अनिवार्य रूप से ससंद में चर्चा कराई जाएगी ? प्रधान न्यायाधीश डी वाई चंद्रचूड़ और न्यायमूर्ति एस के कौल, न्यायमूर्ति एस आर भट, न्यायमूर्ति हिमा कोहली और न्यायमूर्ति पी एस नरसिम्हा की पांच सदस्यीय संविधान पीठ ने मामले की सुनवाई शुरू की। पीठ ने केंद्र की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता से कहा कि प्रारंभिक आपत्ति की प्रकृति और गुण-दोष इस बात पर निर्भर करता है कि याचिकाकर्ता का क्या कहना है और अदालत उनका पक्ष जानना चाहती है ?

मेहता ने पीठ से कहा कि याचिकाकर्ता अपना पक्ष रख सकते हैं और उनके द्वारा जतायी प्रारंभिक आपत्ति पर भी राय रख सकते हैं। इस पर सीजेआई ने मेहता से कहा, ‘‘मुझे माफ करिएगा श्रीमान सॉलिसिटर, हम फैसला लेंगे।’’ उन्होंने कहा कि अदालत पहले याचिकाकर्ताओं का पक्ष सुनेगी। उन्होंने कहा, ‘‘आप हमें बता नहीं सकते कि हम कैसे कार्यवाही का संचालन करेंगे। मैंने अपनी अदालत में कभी इसकी अनुमति नहीं दी है।’’ इस पर मेहता ने कहा कि वह ऐसा कभी नहीं करते हैं। मेहता ने कहा, ‘‘यह बहुत संवदेनशील मामला है जिस पर आप प्रारंभिक दलीलों पर गौर करेंगे और फिर मुझे कुछ वक्त देंगे। हमें विचार करना पड़ सकता है कि इस बहस में आगे भाग लेने के लिए सरकार का क्या रुख होगा ?''

सीजेआई ने कहा, ‘‘हम पर व्यापक दृष्टिकोण रखने के लिए भरोसा रखिए।’’ मेहता ने कहा कि उच्चतम न्यायालय जिस मामले पर सुनवाई कर रही है, वह वास्तव में विवाह का सामाजिक-कानूनी संबंध बनाने को लेकर है जो सक्षम विधायिका का कार्य क्षेत्र है। उन्होंने कहा, ‘‘जब विषय समवर्ती सूची में है तो हम एक राज्य के इस पर सहमत होने, दूसरे राज्य के इसके पक्ष में कानून बनाने तथा किसी तीसरे राज्य के इसके खिलाफ कानून बनाने की संभावना से इनकार नहीं कर सकते।

इसलिए राज्यों की अनुपस्थति में ये याचिकाएं विचार करने योग्य नहीं रहेंगी, यही मेरी प्रारंभिक आपत्तियों में से एक है।’’ इसे ‘‘बेहद मौलिक मुद्दा’’ बताते हुए उच्चतम न्यायालय ने 13 मार्च को इन याचिकाओं को सुनवाई के लिए पांच सदस्यीय संविधान पीठ के समक्ष भेजा था। सोमवार को शीर्ष न्यायालय समलैंगिक विवाह को कानूनी मान्यता देने का अनुरोध करने वाली याचिकाओं की विचारणीयता पर सवाल उठाने वाली केंद्र की याचिका पर सुनवाई के लिए सहमत हो गया था। केंद्र सरकार ने उच्चतम न्यायालय से कहा था कि समलैंगिक विवाह को मान्यता देने का अनुरोध करने वाली याचिकाएं ‘‘शहरी संभ्रांतवादी’’ विचारों को प्रतिबिंबित करती हैं और विवाह को मान्यता देना अनिवार्य रूप से एक विधायी कार्य है, जिस पर अदालतों को फैसला करने से बचना चाहिए।

केंद्र ने याचिकाओं के विचारणीय होने पर सवाल करते हुए कहा कि समलैंगिक विवाहों की कानूनी वैधता ‘पर्सनल लॉ’ और स्वीकार्य सामाजिक मूल्यों के नाजुक संतुलन को गंभीर नुकसान पहुंचाएगी। इस मामले की सुनवाई और फैसला देश पर व्यापक प्रभाव डालेगा, क्योंकि आम नागरिक और राजनीतिक दल इस विषय पर अलग-अलग विचार रखते हैं।दो समलैंगिक जोड़ों ने विवाह करने के उनके अधिकार के क्रियान्वयन और विशेष विवाह कानून के तहत उनके विवाह के पंजीकरण के लिए संबंधित प्राधिकारियों को निर्देश देने का अनुरोध करते हुए अलग-अलग याचिकाएं दायर की हैं, जिन पर न्यायालय ने पिछले साल 25 नवंबर को केंद्र से अपना जवाब देने को कहा था।

मक्का उत्पादन को 4.4-4.5 करोड़ टन करें, जरूरत 

मक्का उत्पादन को 4.4-4.5 करोड़ टन करें, जरूरत 

अकांशु उपाध्याय 

नई दिल्ली। एथनॉल उत्पादन और पोल्ट्री उद्योग के लिए अनाज की बढ़ती मांग के बीच देश के मक्का उत्पादन को अगले पांच वर्षों में बढ़ाकर 4.4-4.5 करोड़ टन करने की जरूरत है। केंद्रीय कृषि और किसान कल्याण सचिव मनोज आहूजा ने यहां मंगलवार को उद्योग निकाय फिक्की द्वारा आयोजित नौवें 'भारत मक्का शिखर सम्मेलन' में यह बात कही।

उन्होंने पूरी मक्का मूल्य श्रृंखला में नुकसान को व्यवस्थित रूप से कम करने की जरूरत पर भी जोर दिया। आहूजा ने कहा, ''वर्तमान में, देश में मक्का का उत्पादन 3.3-3.4 करोड़ टन की सीमा में है। हमें एथनॉल और पोल्ट्री उद्योग की बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए अगले पांच वर्षों में मक्का उत्पादन को बढ़ाकर 4.4-4.5 करोड़ टन करने की जरूरत है।''

उन्होंने कहा कि जलवायु परिवर्तन के बढ़ते खतरे के बीच बेहतर बीज उपलब्धता में सुधार, भंडारण और विपणन संपर्क स्थापित करने, सार्वजनिक और निजी भागीदारी बनाने पर ध्यान दिया जाना चाहिए। महाराष्ट्र के कृषि मंत्री अब्दुल सत्तार ने कार्यक्रम में कहा कि राज्य सरकार उन निजी कंपनियों का समर्थन करने को तैयार है, जो महाराष्ट्र में मक्का की मूल्य श्रृंखला और एथनॉल उत्पादन में निवेश करने की इच्छुक हैं।

24 को सुनवाई करने के लिए सहमत हुआ 'एससी'

24 को सुनवाई करने के लिए सहमत हुआ 'एससी'

अकांशु उपाध्याय 

नई दिल्ली। उच्चतम न्यायालय उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में गैंगस्टर से नेता बने अतीक अहमद और उसके भाई अशरफ की हत्या की स्वतंत्र जांच का अनुरोध करने वाली याचिका पर 24 अप्रैल को सुनवाई करने के लिए मंगलवार को सहमत हो गया। अतीक और अशरफ़ को शनिवार रात को पत्रकार बनकर आए तीन लोगों ने उस वक्त नजदीक से गोली मार दी थी, जब वे चिकित्सा जांच के लिए प्रयागराज के एक मेडिकल कॉलेज में पुलिसकर्मियों द्वारा ले जाते समय पत्रकारों के सवालों का जवाब दे रहे थे।

प्रधान न्यायाधीश डी वाई चंद्रचूड़ की अगुवाई वाली पीठ ने मामले की तत्काल सुनवाई के लिए उल्लेख करने वाले वकील विशाल तिवारी की दलीलों पर गौर किया। याचिका में 2017 के बाद से उत्तर प्रदेश में हुई 183 मुठभेड़ों की जांच का भी अनुरोध किया गया है। याचिका में अतीक और अशरफ की हत्या की जांच करने के लिए एक स्वतंत्र विशेष समिति गठित करने का अनुरोध किया गया है।

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प्राधिकृत प्रकाशन विवरण

प्राधिकृत प्रकाशन विवरण


1. अंक-187, (वर्ष-06)

2. बुधवार, अप्रैल 19, 2023

3. शक-1944, बैशाख, कृष्ण-पक्ष, तिथि-चतुर्दशी, विक्रमी सवंत-2079‌‌।

4. सूर्योदय प्रातः 06:40, सूर्यास्त: 06:23। 

5. न्‍यूनतम तापमान- 25 डी.सै., अधिकतम- 33+ डी.सै.।

6. समाचार-पत्र में प्रकाशित समाचारों से संपादक का सहमत होना आवश्यक नहीं है। सभी विवादों का न्‍याय क्षेत्र, गाजियाबाद न्यायालय होगा। सभी पद अवैतनिक है। 

7.स्वामी, मुद्रक, प्रकाशक, संपादक राधेश्याम व शिवांशु  (विशेष संपादक) श्रीराम व सरस्वती (सहायक संपादक) संरक्षण-अखिलेश पांडेय, ओमवीर सिंह, वीरसैन पंवार, योगेश चौधरी आदि के द्वारा (डिजीटल सस्‍ंकरण) प्रकाशित। प्रकाशित समाचार, विज्ञापन एवं लेखोंं से संपादक का सहमत होना आवश्यक नहीं हैं। पीआरबी एक्ट के अंतर्गत उत्तरदायी।

8. संपर्क व व्यवसायिक कार्यालय- चैंबर नं. 27, प्रथम तल, रामेश्वर पार्क, लोनी, गाजियाबाद उ.प्र.-201102। 

9. पंजीकृत कार्यालयः 263, सरस्वती विहार लोनी, गाजियाबाद उ.प्र.-201102

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(सर्वाधिकार सुरक्षित)

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