सोमवार, 18 सितंबर 2023

आज मनाई जाएगी गणेश चतुर्थी, तुलसी वर्जित

आज मनाई जाएगी गणेश चतुर्थी, तुलसी वर्जित 

सरस्वती उपाध्याय 
हिंदू पंचांग के अनुसार, प्रत्येक साल गणेश चतुर्थी का पर्व भाद्रपद माह के शुक्ल-पक्ष की चतुर्थी तिथि को मनाया जाता है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, कहा जाता है कि इस माह की चतुर्थी तिथि को गणपति बप्पा का जन्म हुआ था। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, गणेश भगवान को कई नामों से जाना जाता है। कोई इन्हें बप्पा कहता है, तो गणपति! उन्हें और भी नामों से जाना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, गणेश चतुर्थी का पर्व पूरे 10 दिनों तक मनाया जाता है। गणपति बप्पा का महापर्व गणेश चतुर्थी कल यानी 19 सितंबर 2023 को बड़े ही धूमधाम से मनाया जाएगा। गणपति बप्पा का महापर्व गणेश चतुर्थी कल यानी 19 सितंबर 2023 को बड़े ही धूमधाम से मनाया जाएगा। इस साल गणपति बप्पा का महापर्व गणेश चतुर्थी कल यानी 19 सितंबर 2023 को बड़े ही धूमधाम से मनाया जाएगा।
गणेश चतुर्थी भाद्र पद माह के शुक्ल पक्ष के चतुर्थी से शुरू होता है और अनंत चतुर्दशी के दिन समाप्त होता है। इन 10 दिनों में बप्पा को घर में विधि-विधान से पूजन किया जाता है। इसके साथ ही उनको कई तरह के भोग लगाया जाता है। धार्मिक मान्यताओं के आधार पर तुलसी पत्ता भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी को बहुत ही अधिक प्रिय हैं। लेकिन, क्या आपको पता है गणेश भगवान को कभी भी तुलसी का पत्ता नहीं चढ़ाया जाता है। ऐसा क्यों! अगर आप नहीं जानते हैं तो आज इस खबर में आपको बताएंगे कि आखिर क्यों गणपति को तुलसी दल अर्पित नहीं किया जाता है। आइए विस्तार से जानते हैं।
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, कहा जाता है कि माता तुलसी भगवान गणेश से विवाह करना चाहती थी। मन में विवाह की इच्छा लेकर वह भगवान गणेश के सामने प्रस्ताव रखा। लेकिन, मान्यता है कि भगवान गणेश इस विवाह प्रस्ताव को ठुकरा दिए थे। गणपति बप्पा द्वारा विवाह का प्रस्ताव ठुकराने के बाद माता तुलसी नाराज हो गई और गणेश भगवान को दो-दो शादियां होने का शाप दे दी। तुलसी के शाप से भगवान गणेश भी क्रोधित हो गए और उन्होंने भी तुलसी को किसी राक्षस से विवाह होने का शाप दे दिया।
बाद में तुलसी को शाप देकर गणेश भगवान को आभास हुआ। भगवान गणेश ने तुलसी से कहा कि विष्णु भगवान के प्रिय होने के कारण आप कलयुग में पूरे सृष्टि के लिए मोक्ष प्रदायिनी मानी जाओगी। उन्होंने तुलसी से कहा कि आप मेरी पूजा में शामिल नहीं हो सकती हैं। इसलिए गणेश भगवान पर तुलसी दल नहीं अर्पित किया जाता है।

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