बुधवार, 2 अक्तूबर 2019

नेताओं की नजरबंदी से हटी पाबंदी

गांधीजी की जयंती के अवसर पर जम्मू और कश्मीर


नई दिल्ली। प्रशासन ने जम्मू में कुछ नेताओं की नजरबंदी खत्म कर दी है। धारा 370 हटाने के बाद स्थानीय पुलिस ने एहतिहात के तौर पर जम्मू में कई नेताओं को नजरबंद किया था। पूर्व मंत्री और डोगरा स्वाभिमान संगठन पार्टी के अध्यक्ष चौधरी लाल सिंह को भी नजरबंद किया गया था। जम्मू में नजरबंद सभी विपक्षी दलों के नेताओं पर से नजरबंदी हटा दी गई है। जिन नेताओं पर से नजरबंदी हटाई गई है उसमें नेशनल कॉन्फ्रेंस, कांग्रेस, पैंथर्स पार्टी के नेता शामिल हैं।


डोगरा स्वाभिमान संगठन पार्टी के अध्यक्ष चौधरी लाल सिंह के अलावा जिन नेताओं से नजरबंदी हटाई गई है, उसमें नेशनल कॉन्फ्रेंस के देवेंद्र राणा और एसएस सालाथिया, कांग्रेस रमन भल्ला और पैंथर्स पार्टी के हर्षदेव सिंह के नाम शामिल हैं। इन नेताओं को 5 अगस्त से नजरबंद कर लिया गया था।


पीएम ने 'अहिंसादूत' को श्रद्धांजलि दी

नई दिल्‍ली। आज 2 अक्टूबर को महात्मा गांधी का जन्मदिन है। उन्हें पूरी दुनिया में अहिंसा के प्रतीक के तौर पर जाना जाता है। उनके जन्मदिन को अंतरराष्ट्रीय अहिंसा दिवस के रूप में मनाया जाता है। उनकी 150वीं जयंती के लिए पूरे देश में जोर-शोर से तैयारियां चल रही हैं।


आज राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की 150वीं जंयती के साथ देश के दूसरे प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री की 116वीं जयंती मनाई जा रही है। पूरे देश में कई जगहों पर इस अवसर पर कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। इस अवसर पर पीएम नरेंद्र मोदी ने राजघाट पहुंचकर बापू को श्रद्धांजलि अर्पित की। पीएम मोदी के साथ लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला, दिल्ली के उपराज्यपाल अनिल बैजल, केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल और हरदीप पुरी ने भी राष्ट्रपिता को उनकी 150वीं जयंती पर नमन किया। इसके बाद प्रधानमंत्री मोदी और लोकसभा अध्यक्ष राजघाट पर आयोजित प्रार्थना सभा में भी शामिल हुए।


सोनिया गांधी और बीजेपी के कार्यकारी अध्यक्ष जेपी नड्डा ने भी श्रद्धांजलि अर्पित की।इससे पहले कांग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी और बीजेपी के कार्यकारी अध्यक्ष जेपी नड्डा ने भी बापू की समाधि पर पहुंचकर राष्ट्रपिता को श्रद्धांजलि अर्पित की।


इससे पहले आज सुबह ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ट्वीट किया, 'गांधी जी की जंयती पर शत शत नमन…बापू का सपना पूरा करने के लिए कड़ी मेहनत करते रहेंगे। मानवता के लिए गांधी जी के योगदान के लिए हमेशा कृतज्ञ रहेंगे।' इसके साथ ही पीएम मोदी ने गांधी जी का एक वीडियो भी शेयर किया।


राष्ट्रपिता महात्मा गांधी को उनकी 150वीं जन्म-जयंती पर शत-शत नमन। इसके बाद कांग्रेस नेता सोनिया गांधी और पूर्व पीएम डॉ मनमोहन सिंह ने लाल बहादुर शास्त्री की समाधि विजय घाट पहुंचकर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शास्त्री जी याद करते हुए ट्वीट किया, 'जय जवान जय किसान' के उद्घोष से देश में नव-ऊर्जा का संचार करने वाले पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री जी को उनकी जयंती पर शत-शत नमन।'


कोई पुराना रोग उभर सकता है:सिंह

राशिफल 


मेष-वाहन, मशीनरी व अग्नि आदि के प्रयोग में सावधानी रखें। शारीरिक हानि की आशंका है। पुराना रोग परेशानी का कारण बन सकता है। क्रोध तथा उत्तेजना पर नियंत्रण रखें। राजमान व यश प्राप्ति की संभावना है। आय में वृद्धि होगी। व्यापार-व्यवसाय अच्‍छा चलेगा। निवेश शुभ रहेगा।


वृष-जीवनसाथी के स्वास्थ्‍य का ध्यान रखें। सहयोग प्राप्त होगा। कानूनी अड़चन दूर होगी। शत्रुभय रहेगा। सुख के साधन जुटेंगे। आय में सुगमता रहेगी। भाग्य का साथ मिलेगा। शेयर मार्केट तथा म्युचुअल फंड मनोनुकूल रहेंगे। घर-बाहर प्रसन्नता तथा उत्साह बने रहेंगे।


मिथुन-प्रतिद्वंद्विता बढ़ेगी। विवाद बढ़ने की आशंका है। क्लेश होगा। भूमि व भवन संबंधी निर्णय लेने में जल्दबाजी न करें। कोई बड़ा कारोबारी सौदा बड़ा लाभ दे सकता है। रोजगार प्राप्ति के प्रयास सफल रहेंगे। आय में वृद्धि होगी। प्रसन्नता रहेगी।


कर्क-लाभ के अवसर हाथ आएंगे। विद्यार्थी वर्ग अपने कार्य में सफलता हासिल करेगा। प्रतिद्वंद्वी सक्रिय रहेंगे। किसी मनोरंजक यात्रा का आयोजन हो सकता है। स्वादिष्ट भोजन का आनंद प्राप्त होगा। आराम तथा मनोरंजन का समय प्राप्त होगा। घर-बाहर प्रसन्नता रहेगी।


सिंह-कोई पुराना रोग उभर सकता है। किसी व्यक्ति विशेष से अकारण विवाद हो सकता है। संयम बरतें। दु:खद समाचार प्राप्त हो सकता है। कीमती वस्तुएं संभालकर रखें। भावनाओं को वश में रखें। मन की बात किसी को न बतलाएं। दूसरों के कार्य में दखल न लें।


कन्या-पहले की गई मेहनत का फल अब मिलेगा। सामाजिक कार्य करने की प्रेरणा प्राप्त होगी। घर-बाहर पूछ-परख रहेगी। आय में वृद्धि होगी। व्यापार-व्यवसाय लाभदायक रहेगा। नौकरी में कार्य की प्रशंसा होगी। निवेश शुभ रहेगा। थकान महसूस होगी।


तुला-बोलचाल में संतुलन रखें। परिवार के छोटे सदस्यों के स्वास्थ्‍य व अध्ययन संबंधी चिंता रहेगी। घर में अतिथियों का आगमन होगा। शुभ समाचार प्राप्त होंगे। आत्मविश्वास में वृद्धि होगी। कोई बड़ा कार्य प्रारंभ करने तथा लंबे प्रवास का मन बनेगा। लाभ होगा।


वृश्चिक-किसी अनहोनी की आशंका रहेगी। शारीरिक कष्ट संभव है। लाभ के अवसर हाथ आएंगे। लेन-देन में जल्दबाजी न करें। रोजगार प्राप्ति के प्रयास सफल रहेंगे। अप्रत्याशित लाभ के योग हैं। शेयर मार्केट व म्युचुअल फंड इत्यादि मनोनुकूल लाभ देंगे। थकान महसूस होगी।


धनु-मानसिक उलझनें रहेंगी। शारीरिक कष्ट से बाधा होगी। अप्रत्याशित खर्च सामने आएंगे। कर्ज लेने की आवश्यकता पड़ सकती है। धैर्य रखें। किसी व्यक्ति विशेष से कहासुनी हो सकती है। नए संबंध बनाने से पहले व्यक्ति को परख लें। धोखा खा सकते हैं। आय होगी।


मकर-कुंआरों को वैवाहिक प्रस्ताव मिल सकता है। घर-परिवार में खुशी का माहौल रहेगा। भागदौड़ रहेगी। बकाया वसूली के प्रयास सफल रहेंगे। व्यावसायिक यात्रा सफल रहेगी। भाग्य का साथ मिलेगा। कारोबार में वृद्धि होगी। निवेश शुभ रहेगा। प्रमाद न करें।


कुंभ-किसी लंबी यात्रा का कार्यक्रम बन सकता है। नेत्र पीड़ा की आशंका है। नई योजना बनेगी। तत्काल लाभ नहीं मिलेगा। व्यापार-व्यवसाय इत्यादि मनोनुकूल रहेंगे। शेयर मार्केट तथा म्युचुअल फंड लाभदायक रहेंगे। जोखिम न लें।


मीन-वाणी पर नियंत्रण रखें। शारीरिक कष्ट संभव है। लेन-देन में जल्दबाजी न करें। घर-बाहर पूछ-परख रहेगी। धर्म-कर्म में रुचि रहेगी। पूजा-पाठ पर व्यय होगा। चिंता तथा तनाव रहेंगे। कोर्ट व कचहरी के कार्य मनोनुकूल रहेंगे। लाभ के अवसर हाथ आएंगे। प्रमाद न करें।


बिच्छू का जहर मददगार

बिच्छू सन्धिपाद (Arthropoda) संघ का साँस लेनेवाला अष्टपाद (Arachnid) है। इसकी अनेक जातियाँ हैं, जिनमें आपसी अंतर बहुत मामूली हैं। यहाँ बूथस (Buthus) वंश का विवरण दिया जा रहा है, जो लगभग सभी जातियों पर घटता है।


यह साधारणतः उष्ण प्रदेशों में पत्थर आदि के नीचे छिपे पाये जाते हैं और रात्रि में बाहर निकलते हैं। बिच्छू की लगभग 2000 जातियाँ होती हैं जो न्यूजीलैंड तथा अंटार्कटिक को छोड़कर विश्व के सभी भागों में पाई जाती हैं। इसका शरीर लंबा चपटा और दो भागों- शिरोवक्ष और उदर में बटा होता है। शिरोवक्ष में चार जोड़े पैर और अन्य उपांग जुड़े रहते हैं। सबसे नीचे के खंड से डंक जुड़ा रहता है जो विष-ग्रंथि से संबद्ध रहता है। शरीर काइटिन के बाह्यकंकाल से ढका रहता है। इसके सिर के ऊपर दो आँखें होती हैं। इसके दो से पाँच जोड़ी आँखे सिर के सामने के किनारों में पायी जाती हैं।
बिच्छू साधारणतः उन क्षेत्रों में रहना पसन्द करते हैं जहां का तापमान 200 से 370 सेंटीग्रेड के बीच रहता हैं। परन्तु ये जमा देने वाले शीत तथा मरूभूमि की गरमी को भी सहन कर सकते हैं।


अधिकांश बिच्छू इंसान के लिए हानिकारक नहीं हैं। वैसे, बिच्छू का डंक बेहद पीड़ादायक होता है और इसके लिए इलाज की जरूरत पड़ती है। शोधकर्ताओं के मुताबिक बिच्छू के जहर में पाए जाने वाले रसायन क्लोरोटोक्सिन को अगर ट्यूमर वाली जगह पर लगाया जाए तो इससे स्वस्थ और कैंसरग्रस्त कोशिकाओं की पहचान आसानी से की जा सकती है। वैज्ञानिकों का दावा है कि क्लोरोटोक्सिन कैंसरग्रस्त कोशिकाओं पर सकारात्मक असर डालता है। यह कई तरह के कैंसर के इलाज में कारगर साबित हो सकता है। उनका मानना है कि बिच्छू का जहर कैंसर का ऑपरेशन करने वाले सर्जनों के लिए मददगार साबित हो सकता है। उन्हें कैंसरग्रस्त और स्वस्थ कोशिकाओं की पहचान करने में आसानी होगी।


लाभदायक अदरक

अदरक (वानस्पतिक नाम: जिंजिबर ऑफ़िसिनेल / Zingiber officinale), एक भूमिगत रूपान्तरित तना है। यह मिट्टी के अन्दर क्षैतिज बढ़ता है। इसमें काफी मात्रा में भोज्य पदार्थ संचित रहता है जिसके कारण यह फूलकर मोटा हो जाता है। अदरक जिंजीबरेसी कुल का पौधा है। अधिकतर उष्णकटिबंधीय (ट्रापिकल्स) और शीतोष्ण कटिबंध (सबट्रापिकल) भागों में पाया जाता है। अदरक दक्षिण एशिया का देशज है किन्तु अब यह पूर्वी अफ्रीका और कैरेबियन में भी पैदा होता है। अदरक का पौधा चीन, जापान, मसकराइन और प्रशांत महासागर के द्वीपों में भी मिलता है। इसके पौधे में सिमपोडियल राइजोम पाया जाता है।


सूखे हुए अदरक को सौंठ (शुष्ठी) कहते हैं। भारत में यह बंगाल, बिहार, चेन्नई,मध्य प्रदेश कोचीन, पंजाब और उत्तर प्रदेश में अधिक उत्पन्न होती है। अदरक का कोई बीज नहीं होता, इसके कंद के ही छोटे-छोटे टुकड़े जमीन में गाड़ दिए जाते हैं। यह एक पौधे की जड़ है। यह भारत में एक मसाले के रूप में प्रमुख है।


अदरक का अन्य उपयोग:-अदरक का इस्तेमाल अधिकतर भोजन के बनाने के दौरान किया जाता है। अक्सर सर्दियों में लोगों को खांसी-जुकाम की परेशानी हो जाती है जिसमें अदरक प्रयोग बेहद ही कारगर माना जाता है। यह अरूची और हृदय रोगों में भी फायदेमंद है। इसके अलावा भी अदरक कई और बीमारियों के लिए भी फ़ायदेमंद मानी गई है।


यज्ञोपवित संकल्प,अन्वेषण

गतांक से...
मेरे पुत्रों, मैं तुम्हें एक ऋषि के आसन पर ले जाना चाहता हूं। जहां ॠषिवर अपने में विचार विनिमय और अन्वेषण करते रहे हैं। 'बाल्‍यम्‌ ब्रह्म' आज का दिवस कहलाता है। 'नोनम्‌म्‌ ब्रह्म' जहां महापुरुषों की उत्पत्ति का मूल बन जाता है। आज मैं तुम्हें ऐसे क्षेत्र में ले जाऊंगा जहां ऋषि-मुनि अपने में बड़ा अन्वेषण और अनुसंधान करते रहे हैं। माता कौशल्या का जीवन मुझे स्मरण आता रहता है। उनके जीवन में कितनी प्रतिभा रही है। कितनी विचित्रता रही है। जिसके ऊपर हम प्राय: अपने में विचार विनिमय करते रहते हैं। यहां मूल उत्पत्ति का पालना करने की कितनी उधरवा में सीमा होती है। वास्तव में कोई सीमा नहीं होती है। कि कितनी पालना कर सकता है प्राणी। आज मैं तुम्हें त्रेता के काल में ले जाना चाहता हूं, जिस काल में मानव अपने में बड़ा अन्वेषण और विचार विनिमय करता रहा है। माता कौशल्या के गर्भ में जब पुनीत आत्मा विद्यमान थी, तो माता कौशल्या ने एक नियम बनाया था। जब पुत्रेष्टि यज्ञ हुआ तो, यज्ञ होते समय नियम बनाया कि मैं राष्ट्र का अन्न ग्रहण नहीं करूंगी। क्योंकि जब यजमान यज्ञ करता है तो यह यजमान अपनी दक्षिणा प्रदान करता है। जब पुत्रेष्‍टि यज्ञ हुआ तो उस समय कौशल्या से दक्षिणा प्राप्त करने लगे। जब वे प्रदान करने लगी तो ऋषि ने कहा कि हे दिव्या, हमे द्रव्य की दक्षिणा नहीं चाहते, हमें तो दक्षिणा दीजिए कि अब जो राष्ट्र है वह रसातल को जा रहा है यहां आलस्य और प्रमाद बलवती होता जा रहा है। रघुवंश और राजा रघु का जो राज था। महाराजा दिलीप की जो उत्तम प्रणाली थी, उसमें सुक्ष्‍मवाद आ गया है। माता कौशल्या बोली ॠषिवर, पूज्‍यपाद, जो तुम चाहते हो वर्णन करो। उन्होंने कहा तुम्हारे गर्व से एक ऐसे बालक का जन्म होना चाहिए। जो त्याग और तपस्या में ही परिणत होने वाला हो। माता कौशल्या ने वह स्वीकार कर लिया और उन्होंने कहा कि भगवान, तपस्या में ही अपने जीवन को व्यतीत करूंगी। मैं राष्ट्र का अनुकरण नहीं करूंगी। यह उन्होंने संकल्प लिया। मुझे वह काल स्‍मरण आता रहता है कि कैसे उन्होंने संकल्प किया और अपना गृह निवास करने लगी। जब उस शरीर में आत्मा वृत्तियों में रत हो रहा था तो राजा को यह प्रतीत हुआ कि कौशल्या राष्ट्र का अन्‍न ग्रहण नहीं कर रही है और यह बड़ा एक पापाचार बन जाएगा। यदि राष्ट्र का अन्‍न ग्रहण नहीं किया, वह स्वयं कला कौशल करके उसके बदले जी द्रव्य जाता है उसी से लेकर के अपने उधर की पूर्ति करती रहती। स्‍मरण आता रहता है कि राजा ने कहा हे देवी,राष्‍ट्र का अन्‍न ग्रहण नहीं कर रही हो। उन्होंने कहा प्रभु राष्ट्र का जो अन्‍न होता है। वह रजोगुण और तमोगुण से सना होता है। इसलिए मैं उसको ग्रहण नहीं करना चाहती। क्योंकि रजोगुण तमोगुण हमारे विचारों और तरंगों के लिए पवित्र नहीं होता है। राजा ने बहुत नम्रता से भी कहा परंतु कौशल्या ने स्वीकार नहीं किया। अंतिम परिणाम यह हुआ। 'ब्राह्मणम्‌ ब्रह्म कृतम' बेटा सायंकाल का समय था राजा ने कहा कि मैं वशिष्ठ और माता अरुंधति से आग्रह करूंगा। तो यह अन्‍न ग्रहण कर सकेगी। राजा दशरथ अपने वाहन में विद्यमान हो करके भयंकर वनो में जहां वशिष्ठ मुनि महाराजा और माता अरुंधति अपने विद्यालय में निवास करते थे। वह उनके द्वार पर पहुंचे पूर्णिमा का चंद्रमा अपनी संपन्न कलाओं से युक्त था। माता अरुधंती और वशिष्ठ मुनि महाराज एक स्थली पर विद्यमान हो पर कुछ चर्चा कर रहे थे। राजा दशरथ भी उन चर्चाओं को श्रवण करने लगे। माता अरुंधति ने कहा हे प्रभु, यह चंद्रमा कैसा प्रकाशमयी है। मानो अपने में प्रकाशमान है। वशिष्ठ मुनि बोले कि हे देवी, तुम्हें यह प्रतित है कि आज पूर्णिमा का चंद्रमा है और यह सोलह कलाओं से युक्त है। यह समुद्रों से अमृत को लेता है और उसकी वृष्टि कर देता है। चंद्रमा समुद्रों का अधिपति कहलाता है। यह चंद्रमा अमृत को बरसाने वाला है। हे देवी, तुम्हें यह प्रतीत है कि यही तो पृथ्वी के गर्भ में सोम बनकर के अमृत को प्रदान कराता रहता है। यही चंद्रमा की कांति है, जो माता के गर्भ स्थल में जब शिशु होता है तो उसे अमृत प्रदान करता है। यह वही सोम बनकर के अमृत को बहता रहता है। यह अपनी सोलह कलाओं से युक्त है। हे देवी, इसका समुद्रों से मिलान है समुद्र से अमृत लेता है। नाना वनस्पतियों को शोम्‍य बनाता है। माता अरुंधति बड़ी प्रसन्न हुई उन्होंने कहा प्रभु धन्य है। मैं यह जानना चाहती हूं कि एक वशिष्ठ मंडल है और एक अरुंधति मंडल है। इन दोनों का परस्पर क्या समन्वय रहता है। उन्होंने कहा हे देवी, यह जो अरुधंति और वशिष्ठ मंडल है यह अंतरिक्ष मे निवास करने वाले हैं। चंद्रमा से उधरवा गति में गमन करते हैं। अपनी परिधि में भ्रमण करते रहते हैं। जब भी कोई विज्ञान के वांग्मय में प्रवेश करता रहा है। विज्ञान में रत होता रहा है। उसी समय चंद्रमा देखो वशिष्ठ और अरुंधती दोनों की कातिंयां पृथ्वी मंडल पर बुध के माध्यम से होती रहती है और उसको वैज्ञानिक अपने में ग्रहण करते हैं और यंत्रों का निर्माण करते रहे हैं।


प्राधिकृत प्रकाशन विवरण

यूनिवर्सल एक्सप्रेस


प्राधिकृत प्रकाशन विवरण


October 03, 2019 RNI.No.UPHIN/2014/57254


1. अंक-60 (साल-01)
2. बृहस्पतिवार, 03अक्टूबर 2019
3. शक-1941,अश्‍विन,शुक्‍लपक्ष,तिथि - पचंमी, विक्रमी संवत 2076


4. सूर्योदय प्रातः 6:15,सूर्यास्त 6:10
5. न्‍यूनतम तापमान -24 डी.सै.,अधिकतम-32+ डी.सै., हवा की गति धीमी रहेगी, बरसात की संभावना रहेगी।
6. समाचार पत्र में प्रकाशित समाचारों से संपादक का सहमत होना आवश्यक नहीं है! सभी विवादों का न्‍याय क्षेत्र, गाजियाबाद न्यायालय होगा।
7. स्वामी, प्रकाशक, मुद्रक, संपादक राधेश्याम के द्वारा (डिजीटल सस्‍ंकरण) प्रकाशित।


8.संपादकीय कार्यालय- 263 सरस्वती विहार, लोनी, गाजियाबाद उ.प्र.-201102


9.संपर्क एवं व्यावसायिक कार्यालय-डी-60,100 फुटा रोड बलराम नगर, लोनी,गाजियाबाद उ.प्र.201102


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