शुक्रवार, 24 जुलाई 2020

'मन की बात' का 67 वांं संस्करण

नई दिल्ली। पीएम मोदी ने पिछले दिनों मांगे थे सुझाव और विचार प्रधानमंत्री बनने के बाद ओवरऑल 67वां संस्करण 'मन की बात'
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी रविवार को 'मन की बात' के जरिए लोगों को संबोधित करेंगे। मोदी के पिछले साल दूसरी बार प्रधानमंत्री बनने के बाद उनका यह 14वां 'मन की बात' कार्यक्रम होगा।ओवरऑल यह 67वां 'मन की बात' कार्यक्रम है। पीएम मोदी इस कार्यक्रम के जरिए लोगों के साथ संवाद करते हैं। पिछले दिनों प्रधानमंत्री ने ट्वीट करके इस कार्यक्रम में चर्चा के लिए लोगों से अपने विचार मांगे थे। कोरोना संकट की वजह से लगे लॉकडाउन और अनलॉक के दौर में प्रधानमंत्री का यह पांचवां 'मन की बात' कार्यक्रम है और वह रविवार सुबह 11 बजे लोगों को संबोधित करेंगे।


सुझाव साझा करेंः प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 11 जुलाई को ट्वीट कर कहा था, "मैं इस बात को लेकर पूरी तरह से आश्वस्त हूं कि आप लोग सामूहिक प्रयास से आने वाले सकारात्मक बदलाव की कहानियों से परिचित होंगे। आप निश्चित रूप से ऐसी कहानियों को जानते होंगे, जहां सकारात्मक पहल ने लोगों की जिंदगी बदल दी है। आप ऐसी कहानियों और प्रयासों को इस महीने 26 जुलाई को प्रसारित होने वाले 'मन की बात' कार्यक्रम के लिए कृपया शेयर करें।


पीएम मोदी ने अपने विचारों को उन तक पहुंचाने के लिए जनता को माध्यम भी बतलाया। प्रधानमंत्री ने कहा कि 'मन की बात' कार्यक्रम के लिए अपने विचार साझा करने के कई तरीके हैं। आप 1800-11-7800 पर कॉल करके अपना संदेश साझा कर सकते हैं या फिर आप अपने विचार को नमो ऐप पर मौजूद प्लेटफॉर्म पर डाल सकते हैं। या चाहे तो MyGov पर लिख सकते हैं।             


शिवांशु 'निर्भयपुत्र'


अध्यादेश को राष्ट्रपति ने किया अस्वीकार

नई दिल्ली। कानून को बदल सकते हैं या नया कानून बना सकते हैं, लेकिन इसे राष्ट्रपति की मंजूरी की आवश्यकता होती है। कोरोना वायरस महामारी की रोकथाम के लिए देशभर में लागू लॉकडाउन के दौरान, इन तीन राज्यों ने श्रम कानूनों को निलंबित करने का प्रस्ताव मंजूरी के लिए केंद्र सरकार के पास भेजा था। बीएमएस के जोनल सचिव पवन कुमार ने कहा, 'उत्तर प्रदेश, गुजरात और मध्य प्रदेश ने अपने राज्यों में अधिकांश श्रम कानूनों को निलंबित करने के लिए अध्यादेश के रूप में प्रस्ताव लाया था। भारत के राष्ट्रपति ने उन प्रस्तावों को अस्वीकार कर दिया है। हम केंद्र सरकार के इस फैसले की सराहना करते हैं।' श्रम मंत्रालय ने हालांकि इसकी पुष्टि नहीं की। इस बीच, बीएमएस ने गुरुवार को अपना 66वां स्थापना दिवस मनाया। कुमार ने यह भी कहा कि बीएमएस 24 जुलाई से 30 जुलाई तक अपने सरकार जगाओ सप्ताह की योजना के साथ आगे बढ़ेगा।               


श्रीराम 'निर्भयपुत्र'


अमेरिका पर पीछा करने का लगाया आरोप

तेहरान। ईरान ने आरोप लगाया है कि उसके एक यात्री विमान का अमेरिकी लड़ाकू विमान एफ-15 ने पीछा किया। किसी टकराव से बचने में विमान की अचानक ऊंचाई बदलने से कई यात्री जख्मी हो गए हैं। यह घटना गुरुवार को उस समय हुई, जब ईरानी निजी विमानन कंपनी महान एयर का विमान तेहरान से बेरुत जा रहा था। विमान में 150 से ज्यादा लोग सवार थे। अमेरिकी सेंट्रल कमान ने कहा कि सीरिया में अमेरिका के नेतृत्व वाले सैन्य अड्डों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए अंतरराष्ट्रीय मानकों के तहत ऐसा किया गया। जंगी जेट एफ-15 ईरानी यात्री विमान से एक हजार मीटर की सुरक्षित दूरी पर था। ईरानी मीडिया में आई खबरों के अनुसार, लड़ाकू जेट ने ईरानी विमान को परेशान किया। हालांकि यात्री विमान लेबनान की राजधानी बेरुत में सुरक्षित उतर गया। इधर, ईरानी विदेश मंत्रालय ने कहा कि इस घटना पर स्विटजरलैंड के दूतावास के जरिये आपत्ति दर्ज कराई जाएगी। ईरान में यह दूतावास अमेरिकी हितों का प्रतिनिधित्व करता है। मंत्रालय ने कहा कि अगर इस विमान को वापसी में कोई दिक्कत हुई तो उसके लिए अमेरिका जिम्मेदार होगा।            


सेटेलाइट से हथियार की लॉन्चिंग की गई

लंदन/ वाशिंगटन डीसी/ मास्को। ब्रिटेन और अमरीका ने आरोप लगाया है कि रूस ने अंतरिक्ष में एक सैटेलाइट से हथियार जैसी कोई चीज़ लॉन्च की है। ब्रिटेन के अंतरिक्ष निदेशालय के प्रमुख ने एक बयान जारी कर कहा, "रूस ने हथियार जैसी कोई चीज़ को लॉन्च कर जिस तरह से अपने एक सैटेलाइट को टेस्ट किया है उसको लेकर हमलोग चिंतित हैं।


बयान में कहा गया है कि 'इस तरह की कार्रवाई अंतरिक्ष के शांतिपूर्ण इस्तेमाल के लिए ख़तरा है। रूस के इस सैटेलाइट के बारे में अमरीका ने पहले भी चिंता जताई थी। ब्रिटेन के अंतरिक्ष निदेशालय के प्रमुख एयरवाइस मार्शल हार्वे स्मिथ ने बयान जारी कर कहा, "इस तरह की हरकत अंतरिक्ष के शांतिपूर्ण इस्तेमाल के लिए ख़तरा पैदा करती है और इससे अंतरिक्ष में मलवा जमा होने का भी ख़तरा रहता है जो कि सैटेलाइट और पूरे अंतरिक्ष सिस्टम को नुक़सान पहुँचा सकता है जिस पर सारी दुनिया निर्भर करती है।"             


भारत सरकार ने नियमों में किया बदलाव

अकाशुं उपाध्याय


नई दिल्ली। भारत सरकार ने अपने व्यापार नियमों में गुरुवार को एक अहम बदलाव किया है। नए नियमों के मुताबिक़ सरकारी ख़रीद में भारत में बोली लगाने वाली कंपनियाँ तभी इसके लिए सक्षम हो पाएँगी, जब वो डिपार्टमेंट फ़ॉर प्रमोशन ऑफ़ इंडस्ट्री एंड इंटर्नल ट्रेड (डीपीआईआईटी) की रजिस्ट्रेशन कमेटी में रजिस्टर्ड हों। इसके अलावा इन्हें भारत सरकार के विदेश मंत्रालय और गृह मंत्रालय से राजनीतिक और सुरक्षा मंज़ूरी लेना आवश्यक होगा। केंद्र सरकार ने सभी राज्य सरकारों को निर्देश दिए हैं कि वो भी अपनी सभी सरकारी ख़रीद में इस नियम को लागू करें। इस नियम के तहत वित्त मंत्रालय ने कुछ छूट भी दी है।कोविड-19 महामारी के कारण कोविड से जुड़े सामान की ख़रीद को लेकर 31 दिसंबर तक छूट दी गई है। ये बदलाव भारत सरकार ने जनरल फ़ाइनेंशियल नियम, 2017 में  किए गए हैं। ये उन देशों पर लागू होगा, जो देश भारत के साथ सीमा साझा करते हैं और सरकारी ख़रीद में हिस्सा लेते हैं। जानकारों की माने तो इस बदलाव में चीन की बात कहीं नहीं कही गई है, लेकिन इस फ़ैसले का सबसे ज़्यादा असर भारत के पड़ोसी देश चीन के साथ व्यापार पर पड़ेगा।           


बाढ़ संबंधित क्षेत्र का निरीक्षण किया

एनडीआरएफ की टीम ने फूलपुर तहसील के बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का किया दौरा


बृजेश केसरवानी

प्रयागराज। जिलाधिकारी प्रयागराज के निर्देशन में एनडीआरएफ की टीम ने फूलपुर तहसील के बाढ़ संभावित क्षेत्रों का निरीक्षण किया। टीम कमांडर जगदीश राणा और उनकी टीम ने फूलपुर तहसील के प्रभारी श्री रमेश चंद्र पांडेय, तहसीलदार की अगुवाई में क्षेत्रों का निरीक्षण किया।आर आई राम मनोहर भी मौके पर मौजूद रहे। गंगा जी के बाढ़ के पानी से प्रभावित होने वाले क्षेत्रों में गांव बदरा,सलोनी, और हेटापट्टी के इलाकों में जल भराव हो जाता है। जिससे निपटने के लिए प्रशासन ने कोरोना महामारी के मद्देनजर सामाजिक दूरी का पालन करते हुए पुनर्वास केंद्रों की भी व्यवस्था की गई है।

उपजा ने जिलाधिकारियों को सौंपा ज्ञापन

पत्रकार सुरक्षा कानून बनाये यूपी सरकार-रतन दीक्षित
पत्रकारों की हत्या और उत्पीड़न के खिलाफ उपजा ने जिलाधिकारियों को सौंपा ज्ञापन


बृजेश केसरवानी


प्रयागराज। उत्तर प्रदेश जर्नलिस्ट्स एसोसिएशन के प्रान्तीय अध्यक्ष एवं एनयूजे आई के पूर्व राष्ट्रीय महासचिव रतन कुमार दीक्षित के निर्देश पर उपजा की प्रयागराज , रायबरेली, सुल्तानपुर, प्रतापगढ़, अम्बेडकरनगर, फिरोजाबाद, गाजीपुर, महोबा, जालौन, आगरा, हमीरपुर, अमेठी सहित एक दर्जन से अधिक इकाइयों ने अपने-अपने जनपदों के माध्यम से पत्रकारों के दमन, उत्पीड़न, हमलों और हत्याओं के खिलाफ जिलाधिकारियों को के माध्यम से मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को ज्ञापन सौंपकर पत्रकारों की सुरक्षा पर चिन्ता जतायी और प्रदेश में पत्रकारों की सुरक्षा के लिए सार्थक कानूनी प्राविधानों सहित पत्रकार सुरक्षा कानून बनाने की मांग की है।
उपजा के प्रान्तीय अध्यक्ष रतन दीक्षित ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को सम्बोधित ज्ञापन देकर पुनः मांग की है कि प्रदेश में पत्रकारों की सुरक्षा हेतु प्रदेश के समस्त प्रशासनिक अधिकारियों और पुलिस अधिकारियों को सख्त निर्देश देते हुए पत्रकार सुरक्षा कानून के प्राविधान आगामी विधानसभा सत्र में निर्माण करने का निर्णय लें।
वहीं दूसरी आज पूर्व घोषणा के अनुरूप नई दिल्ली में  इंटरनेशनल फेडरेशन ऑफ जर्नलिस्ट्स से संबंद्ध नेशनल यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट्स-इंडिया और दिल्ली जर्नलिस्ट्स एसोसिएशन ने उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद में पत्रकार विक्रम जोशी और मध्यप्रदेश में निवाड़ी में पत्रकार सुनील तिवारी की हत्या के खिलाफ प्रेस क्लब से प्रधानमंत्री कार्यालय तक मार्च निकाला। संघटनों की तरफ से पत्रकार सुरक्षा कानून, मीडिया काउंसिल और मीडिया कमीशन के गठन के साथ ही पत्रकारों का उत्पीड़न, जबरन छंटनी, वेतन में कटौती और छोटे और मध्यम अखबारों की समस्याओं को दूर करने की मांग की गयी।
एनयूजे आई के अध्यक्ष रास बिहारी की अगुवाई में प्रेस निकाले से शुरू हुए मार्च को पुलिस ने प्रधानमंत्री कार्यालय से पहले की रोक लिया। विरोध मार्च को एनयूजे अध्यक्ष रास बिहारी, दिल्ली जर्नलिस्ट्स एसोसिएशन के अध्यक्ष राकेश थपलियाल महासचिव के पी मलिक,कोषाध्यक्ष नरेश गुप्ता, प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया के सदस्य आनंद राणा, एनयूजे की पूर्व कोषाध्यक्ष सीमा किरण ने संबोधित किया।इस अवसर पर अशोक किंकर, रणवीर सिंह, सुजान सिंह, सुभाष चंद्र, सुभाष बारोलिया, बंसी लाल, मनमोहन, ओमप्रकाश सहित दर्जनों पत्रकार शामिल थे।
प्रदर्शन के दौरान संघटनन के नेताओं ने कहा कि विक्रम जोशी और तिवारी की हत्या पुलिस में सुरक्षा मांगने के बावजूद की गई। मध्यप्रदेश के पत्रकार तिवारी ने दो महीने पहले अपनी सुरक्षा की गुहार लगाई गई थी। इससे पहले कानपुर में बालू माफिया का पर्दाफाश करने पर पत्रकार शुभम  त्रिपाठी की हत्या कर दी गई थी।
एनयूजे अध्यक्ष रासबिहारी ने कहा कि पत्रकारों पर बढ़ते हमले, फर्जी मुकदमे और फर्जी पत्रकारों की बढ़ती भीड़ को रोकने के लिए पत्रकार सुरक्षा कानून और राष्ट्रीय पत्रकार रजिस्टर बनाने की आवश्यकता है। प्रेस काउंसिल की ताकत बढ़ाने और इलैक्ट्रानिक मीडिया को दायरे में लाने के लिए मीडिया काउंसिल बनाने की आवश्यकता है। डीजेए अध्यक्ष राकेश थपलियाल ने कहा कि पत्रकारों पर हमले रोकने के लिए केंद्र और राज्य सरकार तुरंत प्रभावी कदम उठाएं। डीजेए महासचिव के पी मलिक ने कहा कि पत्रकारों की हत्या से कानून-व्यवस्था की खराब स्थिति सामने आई है। एनयूजे की वरिष्ठ नेता सीमा किरण ने कहा कि कई स्थानों पर कवरेज के दौरान भी महिला पत्रकारों के साथ अभद्र व्यवहार की शिकायतें बढ़ रही है। सरकार को इस ओर देने की जरूरत है।            


सीएम ने जनसभा कर, मतदाताओं से संवाद किया

सीएम ने जनसभा कर, मतदाताओं से संवाद किया  संदीप मिश्र  बरेली। बरेली के आंवला में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने रविवार को सुभाष इंटर कॉलेज ग्...