मंगलवार, 13 अगस्त 2019

देश गहरे संकट में चला गया:मनमोहन

नई दिल्ली। जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 खत्म करने को लेकर पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और एमडीएमके प्रमुख वाइको ने प्रतिक्रिया दी है। वाइको ने कहा कि जब देश अपना 100वां स्वतंत्रता दिवस मना रहा होगा, तब कश्मीर भारत का हिस्सा नहीं रहेगा। वहीं, कांग्रेस नेता मनमोहन सिंह ने कहा कि आज देश गहरे संकट में चला गया है। सरकार को जम्मू-कश्मीर के लोगों की बात सुननी चाहिए।


मनमोहन ने कहा कि सरकार का यह फैसला देश के कई लोगों को पसंद नहीं आ रहा। यह जरूरी है कि इन सभी लोगों की बात सुनी जाए। वे देश के लिए सोचते हैं, इसलिए अपनी आवाज उठा रहे हैं। मनमोहन पहली बार जम्मू-कश्मीर के मुद्दे पर बात कर रहे थे।


वाइको ने कहा,''उन्होंने कश्मीर को कीचड़ में धकेल दिया है। मैंने पहले भी कश्मीर पर अपने विचार व्यक्त किए हैं। कश्मीर मुद्दे पर मैंने कांग्रेस पर 30% और भाजपा पर 70% हमला किया है।'


200 की मौत, 53 लापता:बाढ़-भूस्खलन

दिल्ली। देश के कई राज्यों में बाढ़-भूस्खलन और बारिश से जुड़े हादसों में पिछले 12 दिन में 200 लोगों की मौत हो चुकी है। केरल के 14 जिले भारी बाढ़ और भूस्खलन से सबसे ज्यादा प्रभावित हैं। यहां 8 से 12 अगस्त के बीच मरने वालों का आंकड़ा 88 तक पहुंच गया है, जबकि 53 लापता हैं। कर्नाटक में 42 और महाराष्ट्र में 43 लोगों ने जान गंवाई है।


केरल में भूस्खलन के कारण मलप्पुरम में सबसे ज्यादा 29, कोझिकोड में 17, वायनाड में 12, कन्नूर में 9, त्रिशूर और इडुक्की जिले में 5-5, तिरुवनंतपुरम, अलप्पुझा, कोट्टायम और कसारगोड जिलों में 2-2 लोगों की जान गई। इसके अलावा राज्य में 53 लोग लापता हैं। वहीं, 838 घर पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गए। 63,506 परिवारों के ढाई लाख से ज्यादा लोगों ने 1413 राहत शिविरों में शरण ली है।


कर्नाटक, तमिलनाडु, महाराष्ट्र और गुजरात में भी बाढ़ से हालात गंभीर हैं। सभी बाढ़ग्रस्त राज्यों में सेना और एनडीआरएफ बचाव अभियान में जुटी है। महाराष्ट्र में पुणे डिविजन के 5 जिलों (सांगली, कोल्हापुर, सतारा, पुणे और सोलापुर) में बाढ़ से मरने वालों की संख्या बढ़कर 43 हो गई है। यहां के 584 गांवों से अब तक 4,74, 226 लोगों को सुरक्षित निकाला गया है।


इस मानसून सीजन में कर्नाटक में बाढ़ और भारी बारिश से 42, गुजरात में 29, उत्तराखंड में 8 और हिमाचल प्रदेश में 2 लोगों की मौत हो चुकी है। इसके अलावा पश्चिम बंगाल में बिजली गिरने से 8 लोगों की जान चली गई। कर्नाटक में 50 लोग लापता हैं।


घर-परिवार में सम्मान मिलेगा:कर्क

ज्योतिर्विद वेद प्रकाश तिवारी 
ॐ नमः शिवाय


देव गुरु बृहस्पति ने वृश्चिक राशि में अपनी चाल बदली है,अब तक यह ग्रह वक्री स्तिथि में थे,लेकिन अब सीधा चलने लगेगा,कुछ पंचांग में इस तिथि के संबंध में भेद भी हैं,कुछ ज्योतिषियों के अनुसार गुरु ग्रह 12 अगस्त को वक्री से मार्गी हो रहा है,रक्षाबंधन पर मार्गी गुरु की वजह से कई लोगों को सकारात्मक फल मिल सकते है,गुरु ग्रह अब सोमवार,04 नवंबर को राशि बदलकर धनु में प्रवेश करेगा,जानिए सभी 12 राशियों के लिए गुरु की ये स्थिति कैसी रहने वाली है!


मेष राशि -:- गुरु की वजह से तनाव बढ़ सकता है,लेकिन कड़ी मेहनत के बाद सफलता मिल जाएगी,नया काम शुरू होने के योग बन रहे हैं!


वृषभ राशि -:- इन लोगों को गुरु लाभ के अवसर प्रदान करेगा,नौकरी और व्यापार में बड़ी कामयाबी मिल सकती है,मित्रों के सहयोग से परेशानियां दूर कर पाएंगे!


मिथुन राशि -:- मिथुन राशि के लोग दुश्मनों से सावधान रहें,वरना कोई बड़ी हानि हो सकती है,माता-पिता और गुरु का आशीर्वाद लेकर दिन की शुरुआत करें!


कर्क राशि -:- आप लोगों को कड़ी मेहनत के बाद ही सफलता मिल पाएगी,लापरवाही की तो हानि हो सकती है,घर-परिवार और समाज में मान-सम्मान मिलेगा!


सिंह राशि -:- जो लोग बेरोजगार हैं,उन्हें गुरु के शुभ फल से नौकरी मिलने के योग बन रहे हैं,इन लोगों को कड़ी मेहनत करनी होगी और आलस्य से बचना होगा!


कन्या राशि -:- इस राशि के लोग धन लाभ प्राप्त कर सकते हैं,कुछ विपरीत परिस्थितियों से समझौता करना पड़ सकता है,धैर्य से काम लेना होगा!


तुला राशि -:- तुला राशि के लोग अपने पराक्रम से सफलता हासिल कर पाएंगे,संपत्ति में वृद्धि होने के योग बन रहे हैं!


वृश्चिक राशि -:- इन लोगों को पुरानी चिंताओं से मुक्ति मिलेगी,घर-परिवार और मित्रों से अच्छे संबंध रहेंगे!


धनु राशि -:- इस राशि के लोग लाभ में रहेंगे,नए काम मिल सकते हैं और धन लाभ कमाने के अवसर आएंगे,नौकरी में बदलाव भी हो सकते हैं!


मकर राशि -:- मकर राशि के लोगों के लिए गुरु शुभ रहेगा,धन-संपत्ति के मामले में सकारात्मक फल मिलेंगे,लाभ मिल सकता है!


कुंभ राशि -:- इन लोगों के लिए गुरु की स्थिति बहुत खास रहने वाली है,धन लाभ कमाने के योग बनेंगे,जो लोग नया काम शुरू करना चाहते हैं,उन्हें कामयाबी मिल सकती है।


मीन राशि -:- इस राशि लोग गुरु की वजह से घर-परिवार और समाज में मान-सम्मान प्राप्त करेंगे,भाग्य के साथ से कोई बड़ी उपलब्धि मिल सकती है ।


छप्पन भोग का एक व्यंजन 'घेवर'

घेवर छप्पन भोग के अन्तर्गत प्रसिद्ध व्यंजन हॅ। यह मैदे से बना, मधुमक्खी के छत्ते की तरह दिखाई देने वाला एक ख़स्ता और मीठा पकवान है।[1] सावन माह की बात हो और उसमें घेवर का नाम ना आए तो कुछ अटपटा लगेगा। घेवर, सावन का विशेष मिष्ठान माना जाता है। हालाँकि अब घेवर की माँग अन्य मिठाइयों के सामने कुछ कम हुई है लेकिन फिर भी आज कुछ लोग घेवर को ही महत्व देते हैं। सावन में तीज के अवसर पर बहन-बेटियों को सिंदारा देने की परंपरा काफी पुरानी है, इसमें चाहे कितना ही अन्य मिष्ठान रख दिया जाए लेकिन घेवर होना अवश्यक होता है। इसलिए साल के विशेष समय पर बनने वाली इस पारंपरिक मिठाई घेवर का वर्चस्व टूटना संभव नहीं है, भले ही आधुनिक मिठाइयों के सामने इसकी लोकप्रियता में कुछ कमी दिखाई देती हो।


घेवर 
सूखी फेनी
उद्भव
संबंधित देश
भारत
देश का क्षेत्र
राजस्थान और उत्तर भारत
व्यंजन का ब्यौरा
मुख्य सामग्री
मैदा, खोया, चीनी, बादाम काजू
अन्य प्रकार
मावा घेवर, मलाई घेवर


सावन में इस मिष्ठान की माँग को पूरा करने के लिए छोटे हलवाई से लेकर प्रतिष्ठित हलवाई महिनों पहले काम शुरु कर देते हैं। घेवर बनाने का काम प्रत्येक गली मौहल्ले में जोर-शोर से शुरू हो जाता है। पुराने लोग बताते हैं कि बगैर घेवर के न रक्षाबंधन का सगन पूरा माना जाता है और न ही तीज का।



घेवर
वैश्वीकरण के दौर में आज घेवर का रूप भी बदलने लगा है, 450 से लेकर 1000 रूपये प्रति किलो का घेवर बाजार में उपलब्ध है, जो जैसा दाम लगाता है उसे उसी प्रकार का माल मिल जाता है, सादा घेवर सस्ता है जबकि पिस्ता, बादाम और मावे वाला घेवर मँहगा। पिस्ता बादाम और मावे वाला घेवर ज्यादा प्रचलित हैं, हालाँकि लोगों का कहना है कि जितना आनंद सादा घेवर के सेवन में आता है उतना मेवा-घेवर में कतई नहीं। फिर भी लोग मावा-घेवर को ही खरीदना पसंद करते हैं।


कुल मिला कर सावन के महीने में घेवर की खुशबू पूरे बाजार को महका देती है और तीज व रक्षाबंधन के अवसर पर घेवर की दुकानों पर भीड़ देखते ही बनती है। घेवर दो तरह को होता है, फीका और मीठा। ताज़ा घेवर नर्म और ख़स्ता होता है पर यह रखा रखा थोड़ा सख़्त होने लगता है। इस समय फीके घेवर को बेसन में लपेटकर, तलकर मज़ेदार पकौड़े बनाए जाते हैं। मीठे घेवर की पुडिंग बढ़िया बनती है।


लय-प्रलय का स्वामी रूद्र

शिव या महादेवआरण्य संस्कृति जो आगे चल कर सनातन शिव धर्म नाम से जाने जाती है में सबसे महत्वपूर्ण देवताओं में से एक है। वह त्रिदेवों में एक देव हैं। इन्हें देवों के देव महादेव भी कहते हैं। इन्हें भोलेनाथ, शंकर, महेश, रुद्र, नीलकंठ, गंगाधार आदि नामों से भी जाना जाता है। तंत्र साधना में इन्हे भैरव के नाम से भी जाना जाता है। हिन्दू शिव घर्म शिव-धर्म के प्रमुख देवताओं में से हैं। वेद में इनका नाम रुद्र है। यह व्यक्ति की चेतना के अन्तर्यामी हैं। इनकी अर्धांगिनी (शक्ति) का नाम पार्वती है। इनके पुत्र कार्तिकेय और गणेश हैं, तथा पुत्री अशोक सुंदरी हैं। शिव अधिक्तर चित्रों में योगी के रूप में देखे जाते हैं और उनकी पूजा शिवलिंग तथा मूर्ति दोनों रूपों में की जाती है। शिव के गले में नाग देवता विराजित हैं और हाथों में डमरू और त्रिशूल लिए हुए हैं। कैलाश में उनका वास है। यह शैव मत के आधार है। इस मत में शिव के साथ शक्ति सर्व रूप में पूजित है।


शिव
सृष्टि के संहारकर्ता
अन्य नाम
नीलकंठ,महादेव, शंकर,पशुपतिनाथ,गंगाधर,नटराज, त्रिनेत्र,भोलेनाथ,रुद्रशिव,कैलाशी
संबंध
हिन्दू(सनातन) देवता
निवासस्थान
कैलाश पर्वत
मंत्र
ॐ नमः शिवाय
अस्त्र
त्रिशूल, पिनाक धनुष,डमरु
जीवनसाथी
पार्वती , गंगा
एक माँ की संताने
सरस्वती
बच्चे
कार्तिकेय ,गणेश
सवारी
नंदी
भगवान शिव को संहार का देवता कहा जाता है। भगवान शिव सौम्य आकृति एवं रौद्ररूप दोनों के लिए विख्यात हैं। अन्य देवों से शिव को भिन्न माना गया है। सृष्टि की उत्पत्ति, स्थिति एवं संहार के अधिपति शिव हैं। त्रिदेवों में भगवान शिव संहार के देवता माने गए हैं। शिव अनादि तथा सृष्टि प्रक्रिया के आदिस्रोत हैं और यह काल महाकाल ही ज्योतिषशास्त्र के आधार हैं। शिव का अर्थ यद्यपि कल्याणकारी माना गया है, लेकिन वे हमेशा लय एवं प्रलय दोनों को अपने अधीन किए हुए हैं। रावण, शनि, कश्यप ऋषि आदि इनके भक्त हुए है। शिव सभी को समान दृष्टि से देखते है इसलिये उन्हें महादेव कहा जाता है। शिव के कुछ प्रचलित नाम, महाकाल, आदिदेव, किरात,शंकर, चन्द्रशेखर, जटाधारी, नागनाथ, मृत्युंजय, त्रयम्बक, महेश, विश्वेश, महारुद्र, विषधर, नीलकण्ठ, महाशिव, उमापति, काल भैरव, भूतनाथ आदि।


शिव-शक्ति तपस्या प्रसंग

ब्रह्मा जी कहते हैं, मुनि उधर सती ने अश्विन मास के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि को उपवास करके भक्ति भाव से सर्वेश्वर शिव का पूजन किया। इस प्रकार नंदा व्रत पूर्ण होने पर नवमी तिथि को दिन में ध्यान मग्न हुई। सति को भगवान शिव ने प्रत्यक्ष दर्शन दिया। उनका श्रीविग्रह सर्वांग सुंदर एवं गौर वर्ण का था। उनके पांच मुख थे और प्रत्येक मुख में तीन तीन नेत्र थे।उनके शीष में चंद्रमा शोभा दे रहा था उनका चित्त प्रसन्न और कंठ में नील चिन्ह दृष्टिगोचर होता था। उनके चार बांहे थी। उन्होंने हाथों में त्रिशूल ब्रह्म कपाल वर्ग तथा अभय धारण कर रखे थे। भस्‍म रमण में अंगराग से उनका सारा शरीर उद् घोषित हो रहा था। गंगा जी उनके मस्तिष्क की शोभा बढ़ा रही थी। उनके सभी अंग बड़े मनोहर थे। वे महान लावण्य के धाम जान पड़ते थे। उनके मुख करोड़ों चंद्रमा के समान प्रकाशमान तथा आह्लाद जनक थे। उनकी अंग कांति करोड़ों कामदेव को तिरस्कृत कर रही थी। उनकी आकृति स्त्रियों के लिए प्रिय थी। सती ने ऐसे सौंदर्य माधुर्य से युक्त प्रभु महादेव जी को प्रत्यक्ष देखकर उनके चरणों की वंदना की। उस समय उनका मुख लज्जा से झुका हुआ था। तपस्या के पुण्य का फल प्रदान करने वाले महादेव जी उन्हीं के लिए कठोर व्रत धारण करने वाली सती को पत्नी बनाने के लिए प्राप्त करने की इच्छा रखते हुए भी उनसे इस प्रकार बोले, महादेव जी ने कहा, उत्तम व्रत का पालन करने वाली दक्षियाणी, मैं तुम्हारे से बहुत प्रशन्‍न हूं। इसलिए कोई वर मांगो। तुम्हारे मन को जो अभीष्ट होगा, वही मैं तुम्हें दूंगा। ब्रह्मा जी कहते हैं, उन्हें जगदीश्वर महादेव जी यद्यपि सती के मनोभाव को जानते थे। तो भी उनकी बात सुनने के लिए बोले 'कोई वर मांगो' परंतु लज्जा के अधीन हो गई थी। इसलिए उनके ह्रदय में जो बात थी। उसे स्पष्ट शब्दों में कह ना सकी। उनका जो अभीष्ट मनोरथ था,वह लज्जा से आच्छादित हो गया। प्राणबल्लभ शिव का प्रिय वचन सुनकर सती अत्यंत प्रेम में मग्न हो गई। इस बात को जानकर भक्तवत्सल भगवान शंकर बड़े प्रसन्न हुए और शीघ्रता पूर्वक बारम-बार कहने लगे। वर मांगो मांगो, पुरुषों के आश्रय भूत अंतर्यामी शंभू सती की भक्ति के वशीभूत हो गए थे। तब सती ने अपनी लज्जा को रोककर महादेव जी से कहा, वर देने वाले प्रभु मुझे मेरी इच्छा के अनुसार ऐसा वर दीजिए। भक्तवत्सल भगवान शंकर,दोनों हाथ जोड़कर मस्तक झुका भक्तवत्सल शिव के बारंबार कहने पर ,सती बोली देवादीदेव महादेव प्रभु जगतपति आप मेरे पिता को कहकर वैवाहिक विधि से मेरा पाणीग्रहण करें।ब्रह्मा जी कहते हैं, नाराज सती की यह बात सुनकर भक्तवत्सल महेश्वर ने प्रेम से उनकी ओर देखकर कहा, प्रिय ऐसा ही होगा। तब तक सती भी भगवान शिव को प्रणाम करके भक्ति पूर्वक विदा मांग जाने की आज्ञा प्राप्त करके मुंह छिपाकर और आनंद से युक्त हो माता के पास लौट गई। त्रिशूल धारी महेश्वर के स्मरण करने पर उनकी सिद्धि से प्रेरित हो ब्रह्मदेव तुरंत ही उनके सामने आ खड़े हुए। तात, हिमालय के शिखर पर जहां सती के वियोग का अनुभव करने वाले महादेव जी विद्वमान थे। वही मैं सरस्वती के साथ उपस्थित हो गया। देवर्षि सरस्वती संहित देखा के प्रेम पास में बंधे हुए शिव उत्सुकता पूर्वक भोले। शंभू ने कहा, ब्राह्मण। मैं जब से विभाग के कार्य में स्वार्थ बुद्धि कर बैठा हूं। तब से अदभुत स्वार्थ में ही स्वस्थ सा प्रतीत होता है।दक्षकन्या सती ने बड़ी भक्ति से मेरी आराधना की है। उसके नंदा व्रत के प्रभाव से मैंने उसे अभीष्ट कर देने की घोषणा की है। ब्राह्मण, तब उसने मुझसे वर मांगा कि आप मेरे पति हो जाए यह सुनकर सर्वथा संतुष्ट हो मैंने भी कह दिया कि तुम मेरी पत्नी हो जाओ। तब दक्षायणी मुझसे बोली मेरे पिता को सूचित कर के वैवाहिक विधि से मुझे ग्रहण करे।ब्राह्मण भक्तों की भक्ति से संतोष होने के कारण मैंने उसका अनुरोध स्वीकार कर लिया है। विधाता। तब सती अपनी माता के घर चली गई और मैं आंचल आया। इसलिए अब तुम मेरी आज्ञा से दक्ष के घर जाओ और ऐसा करो जिससे प्रजापति दक्ष सती और हमारे विभागा निश्चय करें।


प्राधिकृत प्रकाशन विवरण

प्राधिकृत प्रकाशन विवरण
2019-8-9 • RNI.No.UPHIN/2014/57254
1.अंक-011(साल-01)
2.बुधवार,14अगस्‍त 2019
3.शक-1941,श्रावन शुक्‍लपक्ष चतुर्दशी,विक्रमी संवत 2076
4. सूर्योदय प्रातः 5:47,सूर्यास्त 7:08
5.न्‍यूनतम तापमान 28 डी.सै.,अधिकतम-33+ डी.सै., हवा में आद्रता रहेगी!
6. समाचार पत्र में प्रकाशित समाचारों से संपादक का सहमत होना आवश्यक नहीं है! सभी विवादों का न्‍याय क्षेत्र, गाजियाबाद न्यायालय होगा!
7. स्वामी, प्रकाशक, मुद्रक, संपादक राधेश्याम के द्वारा प्रकाशित।


8.संपादकीय कार्यालय- 263 सरस्वती विहार लोनी गाजियाबाद 201102


9.संपर्क एवं व्यावसायिक कार्यालय-डी-60,100 फुटा रोड बलराम नगर, लोनी गाजियाबाद 201102
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cont.935030275


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