गुरुवार, 24 नवंबर 2022

डब्ल्यूएचओ की रिपोर्ट, बेहद खतरनाक 'डिजीज एक्स' 

डब्ल्यूएचओ की रिपोर्ट, बेहद खतरनाक 'डिजीज एक्स' 

अकांशु उपाध्याय/सुनील श्रीवास्तव 

नई दिल्ली/वाशिंगटन डीसी। कोरोना महामारी से पूरा देश लड़ रहा है। अब तक इसका संक्रमण पूरी तरह से खत्म नहीं हुआ है। दो साल तक बाकी दुनिया में भी तांडव मचा चुकी कोरोना महामारी का अब तक खात्मा भी नहीं हुआ कि एक और बीमारी की आहट ने लोगों के दिलों में खौफ पैदा कर दी है। इस बीच चीन में एक बार फिर कोरोना के मामले बढ़ने लगे हैं। लेकिन अब वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन (WHO) की नई रिपोर्ट डराने लगी है। कोरोना के बीच 'डिजीज एक्स' सबसे खतरनाक है।

इबोला से भी ज्यादा जानलेवा
कोविड का दूसरा झटका आया ही था
कि तभी डिजीज की बात होने लगी। साल 2021 में वैज्ञानिकों ने माना कि ये फ्यूचर बीमारी इबोला से भी ज्यादा जानलेवा हो सकती है। बता दें कि आमतौर पर पश्चिमी अफ्रीका में दिखने वाली इस वायरल बीमारी से ग्रस्त लगभग 80 प्रतिशत मरीजों की जान चली जाती है।

डिजीज X की आहट
WHO ने भी कोविड से पहले ही डिजीज की बात कही थी। जेनेवा में आने वाली महामारियों पर काम की ब्लू प्रिंट तैयार करते हुए ऐसे रोगों पर चर्चा हुआजिनका ओर-छोर भी फिलहाल वैज्ञानिकों को नहीं पता। इसके लगभग दो साल के भीतर कोविड आ गया। तब भी परेशान वैज्ञानिकों ने माना था कि कोविड भी डिजीज की श्रेणी में खड़ी बीमारी हैजिससे मुकाबला मुश्किल है। वैसे इसके तुरंत बाद ही देशों ने वैक्सीन तैयार कर ली और महामारी की रफ्तार और तीव्रता दोनों कम हुई।

300 वैज्ञानिकों की टीम तैयार
विश्व स्वास्थ्य संगठन ने कहा कि वह ऐसे पैथाजन्स की एक लिस्ट भी तैयार करेगा जिससे महामारी का खतरा पैदा हो सकता है। ओनली माय हेल्थ की खबर के अनुसार इस काम के लिए डब्ल्यूएचओ ने एक बड़े पैमानें में तैयारी शुरू की है और इसके लिए 300 वैज्ञानिकों की एक टीम भी तैयार करने की योजना बनाई है। वैज्ञानिकों की ये टीम लिस्टेड बैक्टीरिया और वायरस के टीके और इलाज को तलाशेंगीं।

डिजीज की शुरुआत
ये भी संभव है डिजीज 
की शुरुआत इंसानों से न होकरपशु-पक्षियों से हो। ये पैटर्न कई बीमारियों में दिख चुका है। जैसे कंस्पिरेसी के बावजूद कोरोना के मामले में ज्यादातर देश मानते हैं कि ये चमगादड़ों से आई बीमारी है। इसी तरह से सार्स और मर्स भी जानवरों से आए। यहां तक कि एड्स जैसी लाइलाज बीमारी भी संक्रमित चिंपाजी से इंसानों तक पहुंची। यलो फीवर भी साल 1901 में पशुओं से हम तक पहुंचा। इसके बाद से रेबीजलाइम डिजीज जैसी लगभग 2 सौ बीमारियां हैंजो संक्रमित पशु-पक्षियों से इंसानों तक आईं।

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