बुधवार, 24 नवंबर 2021

किसानों का आंदोलन अभी समाप्त नहीं होगा: टिकैत

किसानों का आंदोलन अभी समाप्त नहीं होगा: टिकैत 
अश्वनी उपाध्याय             गाजियाबाद। भारतीय किसान यूनियन के नेता राकेश टिकैत ने बुधवार को कहा कि कृषि कानूनों के खिलाफ चल रहा किसानों का आंदोलन अभी समाप्त नहीं होगा और आगे की रूपरेखा 27 नवंबर को तय की जाएगी। भारतीय किसान यूनियन (बीकेयू) के राष्ट्रीय प्रवक्ता ने कहा कि किसानों की आय दोगुनी करने के केंद्र सरकार के दावों को लेकर भी प्रदर्शनकारी उससे सवाल करेंगे। राकेश टिकैत  ने ट्वीट किया, ‘‘ये आंदोलन अभी ख़त्म नहीं होगा। 27 नवंबर को हमारी बैठक है। जिसके बाद हम आगे के निर्णय लेंगे। (प्रधानमंत्री नरेंद्र) मोदी जी ने कहा है कि एक जनवरी से किसानों की आमदनी दोगुनी हो जाएगी तो हम पूछेंगे कि कैसे दोगुनी होगी। किसानों की जीत तब होगी जब उन्हें अपनी फसलों के उचित दाम मिलेंगे।’’ 

केंद्र के तीन कृषि कानूनों के खिलाफ सैकड़ों किसान पिछले साल 26 नवंबर से दिल्ली की सीमाओं पर डेरा डाले हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पिछले सप्ताह घोषणा की थी कि उनकी सरकार तीनों विवादास्पद कानूनों को वापस लेगी। वहीं, केंद्रीय मंत्रिमंडल ने तीन कृषि कानूनों को निरस्त करने संबंधी विधेयक को बुधवार को मंजूरी दी। सूचना एवं प्रसारण मंत्री अनुराग ठाकुर ने यह जानकारी दी। संसद के शीतकालीन सत्र के दौरान तीन कृषि कानूनों को निरस्त करने से संबंधित विधेयक पेश किये जाने के लिये सूचीबद्ध है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कृषि कानूनों के संदर्भ में कहा था कि वे देशवासियों से क्षमा मांगते हुए सच्‍चे मन से और पवित्र हृदय से कहना चाहते हैं कि शायद उनकी तपस्‍या में ही कोई कमी रही होगी। जिसके कारण दिये के प्रकाश जैसा सत्‍य किसान भाइयों को वो समझा नहीं पाए। उन्होंने कहा था कि हमने तीनों कृषि कानूनों को वापस लेने का, निरस्त करने का निर्णय लिया है।


पदयात्रा कर रामधुन में शामिल होंगे दिग्विजय
भोपाल। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह ने अपनी पूर्व घोषणा के अनुरूप आज यहां भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के विधायक रामेश्वर शर्मा के निवास तक पदयात्रा करेंगे। दिग्विजय सिंह दिन में लगभग 11 बजे मिंटो हॉल परिसर में महात्मा गांधी की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर भाजपा विधायक रामेश्वर शर्मा के शासकीय निवास तक पदयात्रा कर रामधुन में शामिल होंगे।
इस बीच पुलिस प्रशासन द्वारा मिंटो हाल से लेकर रामेश्वर शर्मा के निवास तक पुलिस बल की तैनाती की गयी है। इस बीच वरिष्ठ कांग्रेस दिग्विजय सिंह ने अपने ट्वीट के माध्यम से कहा कि हिंसा पर अहिंसा की जीत। कांग्रेस कार्यकर्ताओं के घुटने तोड़ने वाले भाजपा विधायक ने कांग्रेसियों के सामने घुटने टेके।
कांग्रेस कार्यकर्ताओं के लिए ‘हलुआ पुड़ी’ का निमंत्रण। धन्यवाद। एक अन्य ट्वीट में उन्होंने कहा कि हे भाजपाईयों हे संघियों हमारे साथ बैठ कर रामधुन गाओ। और भारतीय संविधान का पालन कर सभी धर्मों का सम्मान करो। पूर्व मुख्यमंत्री ने सिलसिलवार ट्वीट कर कहा हे भाजपाईयों हे संघियों सनातन धर्म का पालन करो। सत्य प्रेम अहिंसा व सद्भावना का पालन करो।
हमारे सनातन धर्म का नारा है। धर्म की जय हो अधर्म का नाश हो प्राणियों में सद्भावना हो विश्व का कल्याण हो यही सनातनी परंपरा को महात्मा गांधी ने हमें सिखाया है। दरअसल हाल ही में भोपाल के हुजूर विधानसभा क्षेत्र से विधायक दिग्विजय सिंह ने एक कार्यक्रम में कहा था कि इस इलाके में आने वाले कांग्रेस कार्यकर्ताओं के घुटने तोड़ दिए जाएंगे।

क्रिकेटर-सांसद ने दिल्ली पुलिस से संपर्क किया 
अकांशु उपाध्याय     
नई दिल्ली। ईस्ट दिल्ली निर्वाचन क्षेत्र से बीजेपी सांसद और पूर्व क्रिकेटर गौतम गंभीर ने दिल्ली पुलिस से संपर्क किया है और बताया कि उन्हें ‘आईएसआईएस कश्मीर’ से जान से मारने की धमकी मिली है। 
डीसीपी सेंट्रल श्वेता चौहान ने कहा कि इस बात की जानकारी मिलते ही हमने इस मामले की जांच शुरू कर दी है। गौतम गंभीर की सेफ्टी के लिए गंभीर के घर के बाहर सुरक्षा बढ़ा दी गई है।
वहीं, हाल ही में गौतम गंभीर ने नवजोत सिंह सिद्धू के पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान को बड़ा भाई बताने वाले बयान पर हमला बोला था। पंजाब कांग्रेस के अध्यक्ष सिद्धू का एक वीडियो सोशल मीडिया में वायरल हो गया है। जिसमें एक पाकिस्तानी अधिकारी इमरान खान की ओर से उनका स्वागत करते दिखते हैं और वह यह कहते हुए सुने जा रहे हैं कि खान उनके ‘‘बड़े भाई’’ जैसे हैं और वह उन्हें बहुत प्यार करते हैं। जिसके बाद गौतम गंभीर ने शनिवार को कहा, ‘नवजोत सिंह सिद्धू को अपने बच्चों को सीमा पर भेजना चाहिए।
प्रदूषण: दिल्ली सरकार को दोबारा फटकार लगाईं
अकांशु उपाध्याय   
नई दिल्ली। उच्चतम न्यायालय ने राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में वायु प्रदूषण के मामले में केंद्र और दिल्ली सरकार को एक बार फिर फटकार लगाते हुए उन्हें स्थाई समाधान निकालने को कहा है। शीर्ष अदालत ने राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली में प्रदूषण कम करने के मद्देनजर लगाई गई पाबंदियां अगले दो दिनों तक जारी रखने का आदेश दिल्ली सरकार को दिया है।
मुख्य न्यायाधीश एन. वी. रमना, न्यायमूर्ति डी. वाई. चंद्रचूड़ और न्यायमूर्ति सूर्य कांत की शीर्ष अदालत की पीठ स्कूली छात्र आदित्य दुबे की जनहित याचिका पर आज आगे की सुनवाई कर रही है। अदालती आदेशों के अनुपालन संबंधी रिपोर्ट बुधवार को राज्य सरकारों की ओर पेश की गई, लेकिन केंद्र सरकार ने दाखिल नहीं की।
केंद्र सरकार ने कहा कि वह राज्य सरकारों से प्रदूषण की स्थिति और उससे निपटने के उपायों की जानकारी लेने के बाद पीठ के समक्ष अपनी रिपोर्ट दाखिल करेगी। सुनवाई के दौरान केंद्र और राज्य सरकारों की ओर से प्रदूषण कम करने की तत्कालिक उपाय की जानकारी देते हुए कहा गया कि प्रदूषण पहले के मुकाबले कम हुए हैं तथा आने वाले समय में उसके और कम होने की संभावना व्यक्त की गई है। उनकी इस दलील पर पीठ ने कहा कि यह हवा के कारण प्रदूषण स्तर कम हो सकता है।
अदालत ने कहा कि हम इस समस्या का स्थाई समाधान चाहते हैं। शीर्ष अदालत ने प्रदूषण रोकने के मामले में नौकरशाहों के रवैया पर एक बार फिर गहरी नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा कि उन्हें जमीनी स्तर पर ठोस प्रयास करने चाहिए। पंजाब में पराली का मामला हो या दिल्ली में प्रदूषण फैलाने वाली इकाइयों और वाहनों से जुड़ा मामला। हर मामले में नौकरशाहों के ढीले ढाले रवैये देखने को मिलते हैं।
न्यायमूर्ति चंद्रचूड़ ने बार-बार अदालती आदेशों और उन्हें लागू करने में सरकारों की लापरवाही को गंभीर बताते हुए कहा कि प्रदूषण के कारण दुनिया में गलत संदेश जाता है। इस मामले पर गंभीरता से प्रयास किए जाने की जरूरत है। मुख्य न्यायाधीश एन. वी. रमना की अध्यक्षता वाली शीर्ष अदालत की पीठ स्कूली छात्र आदित्य दुबे की जनहित याचिका पर आगे की सुनवाई कर रही है।
शीर्ष अदालत ने पिछले दिनों हुई सुनवाई के दौरान केंद्र और दिल्ली एवं पड़ोसी राज्य सरकारों से ‘राजनीति और सरकार’ की सीमा से ऊपर प्रदूषण कम करने के लिए ठोस उपाय करने का आदेश दिया था। सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश ने कहा था कि प्रदूषण बढ़ने के कारण हम घरों में मास्क लगाने को मजबूर हैं।सर्वोच्च अदालत ने दिल्ली सरकार को फटकार लगाते हुए कहा था कि दिल्ली में वायु प्रदूषण की खतरनाक स्थिति के लिए किसान बड़ा कारक नहीं, बल्कि औद्योगिक इकाइयां, कोयले से चलने वाले बिजली उत्पादन संयंत्र और सड़कों पर बड़ी संख्या में दौड़ने वाले वाहन मुख्य रूप से जिम्मेदार हैं। केंद्र सरकार सभी संबंधित राज्यों की आपात बैठक बुलाकर प्रदूषण कम करने के लिए ‘वर्क फ्रॉम होम’ समेत तत्काल सभी जरूरी उपाय सुनिश्चित 
 करने की व्यवस्था करें।
गौरतलब है कि शीर्ष अदालत के आदेश के मद्देनजर दिल्ली सरकार ने आपात बैठक बुलाकर कई उपाय किए थे। अपने कर्मचारियों के लिए वर्क फ्रॉम होम के अलावा स्कूलों एवं अन्य शिक्षण संस्थानों को अगले आदेश तक बंद करने का आदेश दिया था। सड़कों पर पानी का छिड़काव की व्यवस्था की गई।
निर्माण गतिविधियों पर आंशिक रूप लगाई गई थी। खंडपीठ ने कहा था कि हरियाणा एवं पंजाब के किसानों द्वारा पराली जलाने का मुद्दा उठाकर बार-बार राजधानी दिल्ली में वायु प्रदूषण खतरनाक स्थिति तक बढ़ने का शोर मचाया जाता है लेकिन विभिन्न रिपोर्टों से यह साफ हो गया कि प्रदूषण की बड़ी वजह पराली जलाना नहीं बल्कि सड़कों पर दौड़ने वाले वाहन रीमा निर्माण भवन एवं अन्य निर्माण कार्यों के कारण निकलने वाले धूल और बिजली उत्पादन करने वाले संयंत्र हैं, जो 74 फीसदी प्रदूषण फैलाते हैं। 
सर्वोच्च अदालत ने हालांकि हरियाणा और पंजाब सरकारों से कहा था कि वे अपने यहां के किसानों को कम से कम दो सप्ताह के लिए पराली जलाने से रोकने के लिए उन्हें समझाएं। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने सुनवाई के दौरान रिपोर्टों का हवाला देते हुए कहा था पराली जलाने के कारण सिर्फ 10 प्रतिशत प्रदूषण होती है।
इस पर न्यायमूर्ति सूर्य कांत ने कहा था कि जब पराली जलना प्रदूषण के बढ़ने की मुख्य वजह नहीं है तो किसान को लेकर इतनी हाय तौबा क्यों मचाई जा रही है। न्यायमूर्ति चंद्रचूड़ ने विभिन्न रिपोर्टों का हवाला देते हुए कहा था कि प्रदूषण खतरनाक स्थिति तक पहुंचने के लिए वाहनों की भारी तादाद औद्योगिक इकाइयां और निर्माण कार्य एवं अन्य कारणों से बढ़ने वाले धूल एवं अन्य चीजें मुख्य कारण हैं।

कमांडर जगदीश के खिलाफ आरोप-पत्र दाखिल 
अकांशु उपाध्याय    
नई दिल्ली। नौसेना के उपकरणों की खरीद तथा उनकी देखरेख से संबंधित गोपनीय सूचना कथित तौर पर लीक करने के मामले में सितंबर में गिरफ्तार किए गए नौसेना के कमांडर जगदीश के खिलाफ केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने आरोप-पत्र दाखिल किया है। अधिकारियों ने बुधवार को यह जानकारी दी।
अधिकारियों ने बताया कि छह आरोपियों के खिलाफ दो आरोप-पत्र पहले ही दाखिल किए जा चुके थे लेकिन कमांडर जगदीश के खिलाफ जांच चल रही थी। सोमवार को सीबीआई ने उनके खिलाफ भी आरोप-पत्र दाखिल कर दिया। उन्होंने बताया कि सेवानिवृत्त अधिकारी कमोडोर रणदीप सिंह और कमांडर एस जे सिंह, सेवारत अधिकारी कमांडर अजीत पांडे और हैदराबाद स्थित एलेन रेनफोर्स्ड प्लास्टिक्स लिमिटेड के कार्यकारी निदेशक समेत कई आरोपियों को इस मामले में पहले ही जमानत मिल चुकी है।
बचाव पक्ष के वकीलों ने कहा कि सीबीआई ने यह स्वीकार किया है कि सरकारी गोपनीयता कानून (ओएसए) के तहत जांच चल रही है लेकिन उन्होंने आरोप-पत्र में इसका जिक्र नहीं किया। वकीलों ने कहा कि आरोपियों के खिलाफ दाखिल किया गया आरोप-पत्र अधूरा है अत: आरोपी स्वत: जमानत पाने का अधिकारी हो जाता है।
जांच एजेंसी अगर 60 दिन अथवा 90 दिन की तय अवधि (लगाए गए आरोपों के आधार पर) के भीतर आरोप-पत्र दाखिल नहीं करती है तो आरोपी वैधानिक रूप से जमानत का हकदार हो जाता है। बचाव पक्ष के वकीलों ने दिल्ली उच्च न्यायालय के फैसले का हवाला देते हुए दलील दी थी कि सरकारी गोपनीयता कानून के तहत आरोप-पत्र 90 दिन में नहीं बल्कि 60 दिन के भीतर दायर होना चाहिए।
विशेष अदालत ने बचाव पक्ष के वकीलों के दलीलों से सहमत होते हुए कहा कि सरकारी गोपनीयता कानून के संबंध में सीबीआई का आरोप-पत्र अधूरा है। इसके बाद अदालत ने आरोपी को जमानत दे दी। सीबीआई को नौसेना में खरीद को लेकर एक बैठक से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियों के लीक होने की सूचना मिली थी जिसके बाद दो सितंबर को सेनानिवृत्त नौसैन्य अधिकारी कमोडोर रणदीप सिंह और कमांडर सतविंदर जीत सिंह के यहां छापेमारी की गई थी।
दोनों को उसी दिन गिरफ्तार कर लिया गया था। बाद में सीबीआई ने कमांडर अजीत कुमार पांडे, कमांडर जगदीश और एलेन रेनफोर्स्ड प्लास्टिक्स लिमिटेड के अधिकारियों समेत कुछ अन्य लोगों को गिरफ्तार किया था।

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