शुक्रवार, 25 जून 2021

राज्य सरकार की अपील पर हस्तक्षेप से इनकार किया

बृजेश केसरवानी            
प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सिंचाई विभाग झांसी से सेवानिवृत्त हेल्पर की अस्थायी सेवा अवधि शामिल कर पेन्शन निर्धारण के एकलपीठ के फैसले के खिलाफ राज्य सरकार की विशेष अपील पर हस्तक्षेप से इनकार कर दिया है।
खंडपीठ ने कहा है कि राज्य सरकार ने जवाबी हलफनामा में स्वयं स्वीकार किया है कि याची भानु प्रताप शर्मा हेल्पर के पद पर वर्कचार्ज के रूप में 1979 को नियुक्त हुए और 2006 में उनकी सेवा नियमित की गयी तथा 31 जनवरी 17 को सेवानिवृत्त हुए। सेवानिवृत्ति परिलाभ नियमावली 1961 व सिविल सर्विस रेग्युलेशन के प्रावधानों 361 व 370 में क्वालीफाइंग सर्विस की परिभाषा देते हुए कहा गया है कि स्थायी या अस्थायी नियुक्ति तिथि से क्वालीफाइंग सर्विस मानी जायेगी। 
विभाग ने भी उसकी वर्कचार्ज सेवा को आधार मानकर सेवा नियमित किया है। ऐसे में सरकार उसे लाभ से वंचित नहीं कर सकती। कोर्ट ने एकलपीठ के फैसले को सही करार देते हुए राज्य सरकार की विशेष अपील खारिज कर दी है।
यह आदेश मुख्य न्यायाधीश संजय यादव तथा न्यायमूर्ति प्रकाश पाडिया की खंडपीठ ने दिया है। अपील पर अपर मुख्य स्थायी अधिवक्ता सुभाष राठी  ने बहस की।
राज्य सरकार का कहना था कि 21 अक्टूबर 20 को अध्यादेश आया जो अब कानून बन गया है। इसके तहत याची कर्मी का नियमित होने से कंटीजेन्सी फंड बना। इसलिए इसी समय से वह पेन्शन पाने का हकदार है। वर्कचार्ज सेवा को क्वालीफाइंग सर्विस नहीं माना जायेगा। कोर्ट ने इस तर्क को अस्वीकार कर दिया।

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